Thursday, April 9, 2020

बनानी है बॉडी, तो घर पर ही बनाएं प्रोटीन शेक

अच्छी सेहत कौन नहीं चाहता है, एक अच्छी बॉडी और पर्सनालिटी से न केवल आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि लोग भी आकर्षित होते हैं। हालांकि अच्छी पर्सनालिटी के लिए पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन अगर आप घर बैठे आसान तरीके से बॉडी बनाना चाहते हैं तो कुछ खास प्रोटीन शेक हैं, जो बॉडी बनाने में मदद करेंगे।  प्रोटीन शेक से बॉडी बनती है लेकिन ये बहुत महंगे भी आते हैं। हम आपको कुछ ऐसे ही प्रोटीन शेक के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आप घर पर ही बनाकर अच्छी बॉडी फिटनेस पा सकते हैं। नीचे जानें ये आसान टिप्स

​ड्राई फ्रूट्स से बनाएं प्रोटीन शेक
ड्राई फ्रूट्स के जरिए भी प्रोटीन शेक बनाया जा सकता है। मूंगफली, काजू, बादाम, अखरोट और सूखे नारियल जैसे ड्राई फ्रूट्स में मौजूद पौष्टिक तत्व आपकी बॉडी को जरुरी कैलोरी देंगे और साथ ही साथ इसको पीने से आपको मसल्स बनाने में भी मदद मिलेगी।
सामग्री - 25 ग्राम मूंगफली, 25 ग्राम काजू, 25 ग्राम बादाम, 25 ग्राम अखरोट, 25 ग्राम सूखे नारियल के टुकड़े और 1 गिलास दूध
कैसे बनाएं - इन सारे ड्राई फ्रूट्स को एक मिक्सर में डालें, अब इसे 5-7 मिनट मिक्सर खूब अच्छी तरह ग्राइंड करें। जब यह पाउडर रूप में बन जाए तो इसमें दूध मिला लें और अब इसे 2 मिनट तक ग्राइंड करें। अब इसे प्रोटीन शेक बोतल में निकालकर इसे पीने के लिए इस्तेमाल करें।

स्मूदी का सेवन
स्मूदी के जरिए भी आप एक पौष्टिक प्रोटीन शेक का सेवन कर सकते हैं। एक्सरसाइज पर जाने से पहले या उस दौरान इसका सेवन करें। इसे मसल्स बनाने में और कोशिकाओं के निर्माण में मदद मिलेगी। आप चाहें तो अच्छे स्वाद के लिए इसमें चेरी भी मिला सकते हैं।
सामग्री - एक कप ब्लूबेरी, 1 केला, 1 सेब, 1 चम्मच पीनट बटर और 1 गिलास दूध
कैसे बनाएं - केले को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट लें फिर सेब को भी ऐसे ही छोटे टुकड़ों में काट लें। केला सेब और पीनट बटर को एक साथ मिक्सर में डालकर करीब 5 मिनट तक अच्छी तरह ग्राइंड करें फिर इसमें दूध मिलाकर 2 मिनट तक फिर से ग्राइंड करें। अब ग्लास या प्रोटीन बोतल में निकालने के बाद इसका सेवन करें।

बादाम, अलसी पाउडर और सूखा हुआ नारियल
बादाम और अलसी पाउडर और सूखे हुए नारियल का भी प्रोटीन शेक आपकी सेहत में चार चांद लगा सकता है। इससे आपकी बॉडी बड़ी तेजी से बनेगी और आपके चेहरे पर भी निखार आएगा। इसके पौष्टिक तत्व आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाएंगे।
सामग्री - 25 ग्राम बादाम, 25 ग्राम सूखे हुए नारियल के टुकड़े, 1 बड़ा चम्मच अलसी पाउडर और 1 गिलास दूध
कैसे बनाएं - बादाम और नारियल को ग्राइंडर में करीब 5 मिनट तक ग्राइंड कर लें। जब यह पाउडर बन जाए तो इसमें अलसी पाउडर और दूध डालें। अब इसे करीब 2 मिनट तक घुमाएं।अब आप इसका सेवन कर सकते हैं।

ब्लूबेरी, केला और पीनट
ब्लूबेरी, केला और पीनट बटर का उपयोग करके भी एक हेल्थी प्रोटीन शेक बनाया जा सकता है। पीनट बटर, दूध और केला के पौष्टिक तत्व आपको नई मसल्स बनाने में मदद करेंगे और आपको एक अच्छी फिटनेस पाने के लिए एक्टिव रूप से आपकी बॉडी को जरुरी प्रोटीन आदि की पूर्ति करेंगे।
सामग्री - एक कप ब्लूबेरी, एक केला, एक बड़ा चम्मच पीनट और एक गिलास दूध
कैसे बनाएं - सबसे पहले ग्राइंडर में ब्लूबेरी, केला और पीनत बटर को ग्राइंड कर लें। इसके बाद इसमें दूध मिलाकर इसे 2 मिनट के लिए और ग्राइंड करें। अब आप इसे गिलास में निकालकर इसका सेवन कर सकते हैं।

आम, बादाम और दूध का प्रोटीन शेक
यह प्रोटीन शेक टेस्टी तो होता ही है साथ ही यह आपके स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। दरअसल आम में कर्बोस नामक पौष्टिक तत्व पाया जाता है, जिसके कारण यह एक्सरसाइज के बाद आपको जरुरी उर्जा की पूर्ति करता है। साथ ही दूध और बादाम से आपकी मांसपेशियों को ताकत भी मिलती है।
सामग्री - एक कटा हुआ आम, जिसकी गुठली और छिलके अलग हों, 25 ग्राम बादाम, 1 गिलास दूध
कैसे बनाएं - सबसे पहले बड़ा बादाम को ग्राइंड करके बिल्कुल बारीक पीस लें और अब इसमें दूध मिलाकर 2 मिनट तक ग्राइंड करें। अब प्रोटीन बोतल या किसी गिलास में निकालकर इसका सेवन करें।

​ओटमील और मक्के का आटा
ओटमील और मक्के का आटा भी आपके सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। दरअसल मक्के का आटा और ओटमील दोनों कैलोरी और प्रोटीन का भरपूर स्रोत हैं। जिससे आप एक अच्छी फिटनेस बड़ी आसानी से पा सकते हैं। अगर आप मीठा स्वाद चाहिए तो आप इसमें चीनी की मात्रा भी मिला सकते हैं।
सामग्री - 1 कप ओटमील, 1 कप मक्के का आटा और एक गिलास दूध
कैसे बनाएं - ओटमील और मक्के के आटा लें। इसमें दूध मिला लें। अब इसे 3 मिनट तक ग्राइंड कर लें ताकि ओटमील अच्छी तरह से मक्के के आटे में मिल जाए। मीठा स्वाद पाने के लिए इसमें चीनी मिलाकर इसका सेवन करें।

Wednesday, December 23, 2015

श्वेत प्रदर (सफ़ेद पानी)-

श्वेत प्रदर होने पर स्त्री की योनि से सफेद रंग का चिकना स्त्राव पतले या गाढ़े रूप में निकलने लगता है| इस प्रदर में तीक्ष्ण बदबू उत्पन्न होती है| ऐसे में दिमाग कमजोर होकर सिर चकराने लगता है| स्त्री को बड़ी बैचेनी एवं थकान महसूस होती है|कारणखून की कमी, चिन्ता, शोक, भय, सम्मान की कमी, अधिक सम्भोग, भावनात्मक कष्ट, अजीर्ण, कब्ज, मूत्राशय की सूजन आदि कारणों से स्त्रियों को श्वेत प्रदर हो जाता है|

पहचान:-
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  • योनि मार्ग से सफेद रंग का पतला-पतला स्त्राव निकलता है| कभी-कभी गाढ़ा लेसदार स्त्राव चिपचिपे श्लेष्मा के साथ निकलने लगता है| इस रोग में भूख नहीं लगती| पेट में भारीपन, सिर दर्द, शरीर में दर्द, उत्साह का खत्म हो जाना, जलन, योनि में खुजली तथा दुर्गंध आने लगती है| स्त्री दिन-प्रतिदिन कमजोर होती चली जाती है| शरीर में हड़फूटन पड़ती है तथा कमर में बड़ी तेजी से दर्द होता है|

नुस्खे:-
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  • 10 ग्राम मुलहठी तथा 20 ग्राम चीनी - दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें| आधा चम्मच चूर्ण सुबह और आधा चम्मच शाम को दूध के साथ सेवन करें|
  • सूखे हुए चमेली के पत्ते 4 ग्राम और सफेद फिटकिरी 15 ग्राम - दोनों को खूब महीन पीस लें| इसमें से 2 ग्राम चूर्ण शक्कर में मिलाकर रात के समय फांककर ऊपर से दूध पी लें| इससे श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है| जब तक प्रदर न रुके, यह दवा नियमित रूप से लेते रहना चाहिए|
  • पके हुए केले में 1 ग्राम फिटकिरी का चूर्ण भरकर दोपहर के समय उसे खूब चबा-चबाकर खाएं| इससे सफेद  प्रकार  रुक जाएगा-
  • पेट पर ठंडे पानी का कपड़ा 10 मिनट तक रखें| श्वेत प्रदर में यह लाभकारी रहता है|
  • अशोक की छाल 50 ग्राम लेकर उसे लगभग 2 किलो पानी में पकाएं| जब पानी आधा किलो की मात्रा में रह जाए तो उसे उतारकर छान लें| ठंडा करके इसमें दूध मिलाकर घूंट-घूंट पिएं| श्वेत प्रदर रोकने की यह अचूक दवा है|
  • गुलाब के पांच फूल मिश्री के साथ मिलाकर खिलाएं| ऊपर से गाय का आधा किलो दूध दें-
  • अरहर के आठ-दस पत्ते सिल पर पानी द्वारा पीस लें| इसमें थोड़ा-सा सरसों का तेल पकाकर मिलाएं| फिर थोड़ी चीनी डालकर सेवन करें-
  • एक चम्मच तुलसी के पत्तों का रस शहद के साथ चाटना चाहिए-
  • अनार के सूखे छिलके एक चम्मच की मात्रा में ठंडे पानी से सेवन करें-
  • दो चम्मच मूली के पत्तों का रस नित्य पीने से श्वेत प्रदर का रोग ठीक हो जाता है-
  • 10 ग्राम आंवले का गूदा 2 ग्राम जीरा - दोनों को खरल करके लें-सिंघाड़े के आटे की रोटी पर देशी घी लगाकर कुछ दिनों तक खाएं-

अल्‍सर का उपचार -

अल्‍सर, जिसे अक्सर आमाशय का अल्‍सर, पेप्टिक अल्‍सर या गैस्ट्रिक अल्‍सर कहते हैं, आपके आमाशय या छोटी आँत के ऊपरी हिस्से में फोड़े या घाव जैसे होते हैं। अल्‍सर उस समय बनते हैं जब भोजन को पचाने वाला अम्ल आमाशय या आँत की दीवार को क्षति पहुँचाता है। 


पहले यह माना जाता था कि अल्‍सर तनाव, पोषण या जीवनशैली के कारण होता है किन्तु वैज्ञानिकों को अब यह ज्ञात हुआ है कि ज्यादातर अल्सर एक प्रकार के जीवाणु हेलिकोबैक्टर पायलोरी या एच. पायलोरी द्वारा होता है। 




यदि अल्सर का उपचार न किया जाये तो ये और भी विकराल रूप धारण कर लेते हैं।



अल्सर का शाब्दिक अर्थ है - घाव

यह शरीर के भीतर कहीं भी हो सकता है; जैसे - मुंह, आमाशय, आंतों आदि में| परन्तु अल्सर शब्द का प्रयोग प्राय: आंतों में घाव या फोड़े के लिए किया जाता है| यह एक घातक रोग है, लेकिन उचित आहार से अल्सर एक-दो सप्ताह में ठीक हो सकता है|

अधिक मात्रा में चाय, कॉफी, शराब, खट्टे व गरम पदार्थ, तीखे तथा जलन पैदा करने वाली चीजें, मसाले वाली वस्तुएं आदि खाने से प्राय: अल्सर हो जाता है| इसके अलावा अम्युक्त भोजन, अधिक चिन्ता, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, कार्यभार का दबाव, शीघ्र काम निपटाने का तनाव, बेचैनी आदि से भी अल्सर बन जाता है| पेप्टिक अल्सर में आमाशय तथा पक्वाशय में घाव हो जाते हैं| धीरे-धीरे ऊतकों को भी हानि पहुंचनी शुरू हो जाती है| इसके द्वारा पाचक रसों की क्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती| फिर वहां फोड़ा बन जाता है |

पेट में हर समय जलन होती रहती है| खट्टी-खट्टी डकारें आती हैं| सिर चकराता है और खाया-पिया वमन के द्वारा निकल जाता है| पित्त जल्दी-जल्दी बढ़ता है| भोजन में अरुचि हो जाती है| कब्ज रहता है| जब रोग बढ़ जाता है तो मल के साथ खून आना शुरू हो जाता है| पेट की जलन छाती तक बढ़ जाती है| शरीर कमजोर हो जाता है और मन बुझा-बुझा सा रहता है| रोगी चिड़चिड़ा हो जाता है| वह बात-बात पर क्रोध प्रकट करने लगता है|

नुस्खे :-
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  • यदि पेट में जांच कराने के बाद घाव का पता चले तो संतरे का रस सुबह-शाम आधा-आधा कप इस्तेमाल करें| इससे घाव भर जाता है|
  • पिसे हुए आंवले का दो चम्मच चूर्ण रात को एक कप पानी में भिगो दें| सुबह उसमें आधा चम्मच पिसी हुई सोंठ, चौथाई चम्मच जीरा तथा दो चम्मच पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करें|
  • अल्सर के रोगियों को दो केले कुचलकर उनमें तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में मिलाकर खाना चाहिए|
  • यदि अल्सर के कारण पेट में दर्द की शिकायत हो तो एक चम्मच जीरा, एक चुटकी सेंधा नमक तथा दो रत्ती घी में भुनी हुई हींग - सबको चूर्ण के रूप में सुबह-शाम भोजन के बाद खाएं| ऊपर से मट्ठा पिएं|
  • छोटी हरड़ दो, मुनक्का बीज रहित दो तथा अजवायन एक चम्मच-तीनों की चटनी बनाकर दो खुराक करें| इसे सुबह-शाम लें|
  • कच्चे केले की सब्जी बनाकर उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर खाएं| यह अल्सर में बहुत फायदा करती है|
  • एक चम्मच आंवले के मुरब्बे का रस तथा एक कप अनार का रस - दोनों को मिलाकर सुबह के समय भोजन से पहले लें|
  • छोटी हरड़ एक, अजवायन एक चम्मच, धनिया दो चम्मच, जीरा एक चम्मच तथा हींग दो रत्ती - सबका चूर्ण बनाकर दो खुराक करें| भोजन के बाद एक-एक खुराक मट्ठे के साथ लें|
क्या खाएं क्या नहीं :-
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  • इस रोग में भोजन के बाद आमाशय के ऊपरी हिस्से में दर्द होने लगता है| इसलिए रोगी को थोड़ी-सी हींग पानी में घोलकर लेना चाहिए| रोगी को खाली दूध, दही, खोए तथा मैदा की चीजें नहीं खानी चाहिए| यदि दोपहर को केवल उबली हुई सब्जियों जैसे - लौकी, तरोई, परवल, पालक, टिण्डे आदि का सेवन करें तो रोग जल्दी चला जाता है| अल्सर में मूली, खीरा, ककड़ी, तरबूज, खट्टी चीजें जैसे - इमली और खटाई नहीं खानी चाहिए| सुबह नाश्ते में हल्की चाय एवं बिस्कुट लेना चाहिए| रात को हल्का भोजन करना बहुत लाभदायक होता है| तम्बाकू, कैफीन, अंडा, मांस, मछली, की तकलीफ को बढ़ा देता है, इसलिए इनका भी प्रयोग न करें|
  • अल्‍सर के रोगी को भरपेट भोजन नहीं करना चाहिए| थोड़ा-थोड़ा भोजन पांच-छ: बार में करें, क्योंकि भोजन का पचना पहली शर्त होती है| भरपेट भोजन से अल्सर पर दवाब पड़ सकता है और खाया-पिया उल्टी के रूप में निकल सकता है| चाय बहुत हल्की पिएं| यदि चाय की जगह पपीते, मौसमी, अंगूर या सेब का रस लें तो लाभकारी होगा| भोजन के बाद टहलने का कार्य अवश्य करें| पानी उबला हुआ सेवन करें| भोजन के बाद अपनी टुण्डी पर सरसों का तेल लगा लें| रात को सोने से पूर्व पेट पर सरसों का तेल मलें| पैर के तलवों पर भी तेल की मालिश करें|
अब आप इन बातों का रखें ख्‍याल:-
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  • रात के खाने और सोने के बीच कम-से-कम दो घंटे का अंतर होना चाहिए।
  • यदि आपको बार-बार या लगातार आमाशय या पेट में दर्द हो तो अपने चिकत्सक की सलाह अवश्य लें क्योंकि अक्सर यही अल्सर के प्रथम लक्षण होते हैं। अन्य लक्षणों में मितली आना, उल्टी आना, गैस बनना, पेट फूलना, भूख न लगना और वजन में गिरावट शामिल हैं।
  • यदि आपके मल अथवा उल्टी में रक्त आये या आपके लक्षण और खराब हो जायें या दवाओं को कोई असर न हो रहा हो तो अपने चिकित्सक के पास पुनः जायें। वे निम्न में से किसी एक जाँच कराने की राय दे सकते हैं- जीआई सीरीज़ - बेरियम नामक एक सफेद तरल पीने के बाद अल्सरों को देखने के लिये आपका एक्स-रे किया जायेगा। एण्डोस्कोपी - उपशामक के उपयोग के उपरान्त चिकित्सक आपके गले और ग्रसनी से होते हुये आमाशय में एक नली डालेंगें जिसके सिरे पर कैमरा होता है। कैमरे के द्वारा चिकित्सक आपके आहारनाल के अन्दर देख सकते हैं और ऊतक प्रकार का पता लगा सकते हैं। एच. पायलोरी के लिये बने प्रतिजैविक देखने के लिये रक्त की जाँच। एच. पायलोरी की उपस्थिति के लिये मल की जाँच। तरल यूरिया पीने के बाद साँस की जाँच।
  • यदि आपकी जाँचों में अल्सर के उपस्थिति की पुष्टि हो तो अपने चिकित्सक द्वारा दी गई राय का सख्ती से पालन करें। ज्यादातर उपचारों से अल्सर के कारणों को जड़ से समाप्त करने का प्रयास किया जाता है या फिर उसे शल्य चिकित्सा द्वारा हटाया जाता है। ऐस्परिन और नॉनस्टेरॉइडल एन्टी-इन्फ्लेमेटरी दवायें (एनएसएआइडी) भी अल्सर की कारक हो सकती हैं। यदि आपके अल्सर हो तो आपको एनएसएआइडी लेने से बचना चाहिये। यदि आपको एनएसएआइडी लेने की आवश्यकता हो तो अपने चिकित्सक की राय के अनुसार आप अम्ल लघुकारक के साथ एनएसएआइडी ले सकते हैं। लम्बे समय से बिना उपचार के पनप रहे गम्भीर या प्राणघातक अल्सर के लिये शल्यचिकित्सा अतिआवश्यक हो जाती है।
  • अत्यधिक रेशेदार ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें जिससे कि अल्सर होने की सम्भावना कम की जा सके या उपस्थित अल्सर को ठीक किया जा सके।
  • फ्लैवेनॉइड युक्त भोजन का अधिक मात्रा में सेवन करें। सेब, सेलरी, क्रैनबेरी, लहसुन और प्याज, फलों और सब्जियों के रसों के साथ-साथ कुछ प्रकार की चायें फ्लैवेनॉइड के अच्छे स्रोत होते हैं।
  • यदि मसालेदार भोजन करने के बाद आपके अल्सर में दर्द बढ़ जाये तो इनका सेवन समाप्त कर दें। हलाँकि चिकित्सकों का अब यह मानना है कि मसालेदार भोजन से अल्सर नहीं होता है लेकिन कुछ अल्सर वाले लोग यह अवश्य कहते हैं कि मसालेदार भोजन के उपरान्त उनके लक्षण गम्भीर हो जाते हैं।
  • कॉफी और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों की संख्या सीमित करें या पूर्णतयः समाप्त कर दें। इन सभी पेय पदार्थों का आमाशय की अम्लीयता में तथा अल्सर के लक्षणों को गम्भीर बनाने में सहभागिता होती है। 9. अपने अल्सर पूर्णतयः ठीक होने तक शराब के सेवन न करें। उपचार के उपरान्त शराब की थोड़ी मात्रा का सेवन वाजिब हो सकता है किन्तु इसके बारे में अपने चिकित्सक की राय अवश्य लें। 10. बदहज़मी और सीने में जलन जैसे अल्सर के लक्षणों पर काबू पाने के लिये दवा की दुकानों पर मिलने वाले एन्टाऐसिड का प्रयोग करें।

मुंहासों को दूर करने का उपचार

युवावस्था में जब शरीर में खून की गरमी पैदा हो जाती है तो वायु और कफ उस गरमी को शरीर से बाहर नहीं निकलने देते| उस दशा में त्वचा में गांठें या फुंसियां निकल आती हैं जो मुंहासे कहलाते हैं| ये उन लोगो को ज्यादा निकलते हैं जो गरम मसाले, मिर्च, तेल, खटाई एवं अम्लीय पदार्थ अधिक खाते हैं-


  • मुंहासे युवावस्था में युवक और युवतियों दोनों को समान रूप से निकलते हैं|
  • ये वसा ग्रंथियों में विकार के फलस्वरूप उत्पन्न होते हैं| युवतियों में डिम्ब के अन्त:स्त्राव के विकार, भोजन की खराबी, अधिक व्यायाम, वसा वाले पदार्थों का अधिक सेवन, युवकों द्वारा हस्तमैथुन करना आदि कारणों से चेहरे पर छोटी-छोटी फुंसियां अर्थात् मुंहासे निकल आते हैं|
  • युवक-युवतियों के चेहरे पर फुंसियां निकलने के कुछ दिनों बाद वे कठोर पड़ जाती हैं तथा उनमें कील और पीव पड़ जाती है| छोटे-छोटे मुंहासे कुछ दिनों के बाद अपने आप सुख जाते हैं| लेकिन बड़े मुंहासों में कील बन जाती है जो पक जाने पर दबाकर निकाली जा सकती है| मुंहासों के कारण चेहरा भद्दा -सा दिखाई देता है| वैसे मुंहासों से कोई शारीरिक हानि नहीं होती, लेकिन ये चेहरे के सौन्दर्य को फीका कर देते हैं| इसी कारण युवक/ युवतियां इनका शान्त करने का इलाज करते हैं|

इनका प्रयोग करे :-
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  • मुलतानी मिटटी को भिगोकर उसमें थोड़ी-सी पिसी हुई हल्दी और जौ का आटा मिला लें..अब इस फेक पैक को स्नान से पहले मुंह पर लगाएं.
  • तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर मुंह तथा हाथ-पैरों पर लगाएं.
  • थोड़ी-सी अजवायन को दही या मट्ठे में मिलाकर चेहरे पर लेप करें..थोड़ी देर बाद उसे गुनगुने पानी से धो डालें.
  • आम, जामुन और बेर की गुठलियों को मींगियां पीसकर बेसन में मिलाकर चेहरे और शरीर पर मलें.
  • बड़ या बरगद के पत्तों को पानी में पीसकर दही में मिला लें और फिर इस पेस्ट को चेहरे तथा हाथ-पैरों पर लगाएं.
  • नीम की निबौलियों को गूदा मुंह पर लगाएं.
  • दही में चोकर मिलाकर चेहरे पर लगाएं.
  • पान की जड़ को पानी में पीसकर लगाने से मुंहासे दोबारा नहीं निकलते.
  • दही में मूली का रस मिलाकर मुंहासों पर लगाने से वे सुख जाते हैं .
  • खीरे का रस चेहरे पर मलें इससे मुंहासे और झाइयां दूर होती हैं .
  • प्याज का रस शहद में मिलाकर मुंहासों पर लगाएं .
  • नीबू के रस में मलाई या मक्खन मिलाकर मुंहासों पर लगाना चाहिए .
  • बेसन में पिसी हुई हल्दी, गाजर और टमाटर का रस मिलाकर चेहरे पर लगाना चाहिए .
  • नीम के पेड़ छाल को पानी में घिस लें  फिर मुंहासों पर लगाएं .
  • जायफल को दूध के साथ पीसकर या एक चम्मच जायफल तथा चौथाई काली मिर्च को दूध में मिलाकर लेप तैयार कर लें फिर अब पुरुष इस लेप को मुंहासों पर लगाएं। फिर यह बिल्कुल जादुई सा असर दिखाता है। इस लेप से मुंहासे सख्त नहीं हो पाते और दब जाते है और कील-मुंहासे बिना कोई निशान छोड़ गायब हो जाते हैं .
  • दालचीनी और शहद का लेप पुरुषों में मुंहासों पर जादू का काम करता है। दो सप्‍ताह तक इसका नियमित इस्‍तेमाल मुंहासे दूर कर देता है। इसे लगाने के लिए तीन बड़े चम्मच शहद तथा एक बड़ा चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर लेप तैयार कर लें। सोने से पहले इस लेप को मुंहासों पर लगाएं और अगली सुबह गुनगुने पानी से धो लें .
  • पुरुषों की त्‍वचा महिलाओं के मुकाबले थोड़ी सख्‍त होती है, इसलिए उनके लिए उपाय भी महिलाओं से अलग होते है। पुरुषों के लिए मुंहासे ठीक करने के लिए नींबू का रस बहुत ही फायदेमंद होता है। नींबू चेहरे से एक्सट्रा ऑयल को खींच लेता है। नींबू के रस को चार गुना ग्लिसरीन में मिलाकर चेहरे पर रगड़ने से कील-मुंहासे ठीक हो जाते है -
  • काली मिर्च मुंहासों को दूर करने में कारगर होता है। इससे कील मुंहासे और झुर्रियां साफ होकर चेहरा चमकने लगता है। इसके लिए बीस-पच्चीस दाने काली मिर्च गुलाब जल में पीसकर रात को चेहरे पर लगायें सुबह गर्म पानी से धो लें -
  • पुरुषों में होने वाले मुंहासों के लिए न‍ारियल का तेल उपयोगी होता है। नारियल तेल में पाये जाने वाले कुछ खास तत्‍व मुंहासों को दूर करने में मदद करते हैं। नारियल तेल को सीधे चेहरे पर लगाने से मुंहासे आसानी से दूर हो सकते हैं .
  • कलौंजी के लेप का प्रयोग कुछ दिन लगातार करने से पुरुषों के चेहरे से मुंहासे दूर हो जाते हैं। इसके लिए सिरके में कलौंजी को पीसकर लेप बनाएं और इसे रोजाना सोने से पहले अपने मुंहासों और पूरे चेहरे पर मलें। सुबह पानी से साफ कर लें। इस प्रयोग को कुछ दिनों तक लगातार करने से चेहरे पर बहुत प्रभाव पड़ता हैं .
  • मुंहासों के लिए पुरुषों को रात के समय सोने से पहले कच्चे दूध को चेहरे पर मलना चाहिए और सुबह के समय उठकर चेहरे को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए। इससे मुंहासे जल्दी ही ठीक हो जाते हैं .
  • मुंहासों की समस्‍या से बचने के लिए पुरुष दही और काली चिकनी मिट्टी का बना फेस पैक लगाएं। इसके लिए वह दही में काली चिकनी मिट्टी को मिला लें और इस उबटन को अपने चेहरे पर लगाएं। उबटन के सुखने पर इसे धो लें। इस प्रकार की क्रिया कुछ दिनों तक करने से मुंहासे जल्दी ठीक हो जाते हैं .
  • लहसुन की 2-3 कली प्रतिदिन लगातार 2-3 महीने सुबह खाली पेट खाने से रक्‍त शुद्ध होता है, जिससे मुंहासे नहीं होते। साथ ही कच्चे लहसुन की कली को पीसकर उसे दिन में 3-4 बार मुंहासों पर लगाने से मुंहासे थम जाते हैं। चेहरे की त्वचा के काले निशान भी मिटते हैं .


मुहांसे से बचने के उपाय :-
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मुंहासों से बचने के कुछ प्रमुख उपाय निम्नवत् हैं - तेल, खटाई, इमली, अधिक मात्रा में घी, चाय, बर्फ, कॉफी, गरम मसाले, शराब, बीड़ी-सिगरेट आदि का सेवन बन्द कर देना चाहिए .
प्रतिदिन शरीर में तिली या सरसों के तेल की मालिश करके ही स्नान करना चाहिए... अश्लील साहित्य न पढ़ें . 
क्रोध, ईर्ष्या, जलन, द्वेष, मोह, लोभ आदि विकारों से अपने को बचाना चाहिए .
नियमित रूप से पौष्टिक, रुचिकर, सात्विक तथा पाचन भोजन ग्रहण करना चाहिए .
रात को सोने से पहले अधिक दूध का सेवन न करें . उसकी जगह मौसमी फलों का प्रयोग करें .

उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव....!

*आमतौर पर किसी भी रिलेशन में खासतौर पर दांपत्य जीवन में पुरूष महिला से उम्र में बढ़ा होता है और शादी के लिए आदर्श जोड़े में भी पुरूष महिलाओं से आमतौर पर एकाध साल बड़ी उम्र के ही होते हैं। 


*लेकिन आज के दौर में छोटी उम्र का पुरूष और बड़ी उम्र की महिला के बीच भी आसानी से संबंध बन जाते हैं। पति-पत्नी की उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव निश्चय ही पड़ता है। दरअसल, अकसर यह कहा जाता है कि महिला अपनी उम्र से पहले ही मैच्योर हो जाती है जबकि पुरूष अपनी उम्र के बाद ही मैच्योर होता है। आइए जानें उम्र के अंतर का संबंधों पर प्रभाव।

*आमतौर पर यदि बड़ी उम्र की महिला और छोटी उम्र के पुरूष की उम्र में सिर्फ कुछ सालों का अंतर है तो बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन जब यही फर्क 10-12 साल तक का हो जाता है तो काफी फर्क पड़ता है।

*हालांकि यह सर्वमान्य है कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती,न ही कोई बंधन। अगर दो लोग आपस में समझदारी से एक-दूसरे के साथ जीवन-निर्वाह करने को तैयार है तो किसी को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए लेकिन दोनों लोगों का खुश होना भी जरूरी है।

*बड़ी उम्र की महिला और छोटी उम्र के पुरूष या फिर बड़ी उम्र का पुरूष और छोटी उम्र की महिला फिर चाहे उम्र कोई भी हो लेकिन दोनों को मैच्योरिटी लेवल मिलना चाहिए जिससे दोनों आपस में सामंजस्य स्थापित कर पाएं।

*दरअसल,पति-पत्नी की उम्र के अंतर का संबंधो पर प्रभाव पड़ना लाजमी है। यदि बड़ी उम्र की महिला है तो निश्चित रूप से वह छोटी उम्र के पुरूष से अधिक अनुभवी होगी जिससे अधिक उम्र की महिला में सेक्‍स समस्‍याएं हो सकती हैं या फिर अधिक उम्र की महिलाओं की चाहत, सोच-विचार और इच्छाएं आपस में मिलने में मुश्किल हो सकते हैं।

*लड़कियां सामान्यतः लड़कों से जल्दी् परिपक्व हो जाती हैं, ऐसे में कोई भी निर्णय लेने में महिलाएं पुरूषों से अधिक सशक्त होती हैं। इतना ही नहीं महिलाओं में सेक्‍स समस्‍याएं भी पुरूषों के मुकाबले जल्‍दी उम्र में पनपनी लगती है, ऐसे में उम्र का रिश्‍तों पर प्रभाव पड़ना लाजमी है।

*दरअसल रिश्तों में बेस्ट हाफ, उम्र इत्यादि महत्वपूर्ण नहीं है। न ही महिलाओं और पुरूषों में सेक्‍स समस्‍याओं का ज्यादा महत्व है, महत्‍व तो इस बात का है कि वे एक दूसरे को कितनी अच्छी तरह से समझते हैं फिर चाहें उम्र कुछ भी हो।
वैसे भी वर्तमान में इस बात का महत्व कम हो गया है कि पति पत्नी में किसकी उम्र ज्यादा है। लेकिन मेडिकल साइंस ने ये माना है कि यदि पत्नी की उम्र पति से कम है तो वे कई तरह की परेशानियों से बच सकते हैं।

*आमतौर पर पत्नी या पति में कोई भी बड़ी उम्र का हो लेकिन दोनों की शारीरिक जरूरतें उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती हैं, इसीलिए दोनों की उम्र के बीच बहुत ज्यादा अंतराल होना सही नहीं है।



** Impact on the relationship of age difference ....! 



*आमतौर पर किसी भी रिलेशन में खासतौर पर दांपत्य जीवन में पुरूष महिला से उम्र में बढ़ा होता है और शादी के लिए आदर्श जोड़े में भी पुरूष महिलाओं से आमतौर पर एकाध साल बड़ी उम्र के ही होते हैं। 



* But in today's age between men and older women too easily become concerned. Husband-wife age difference certainly has an impact on the relationship. Indeed, often it is said that the woman is mature before age after age, while men are maturing. Here the effect of age gap relationships. 



*आमतौर पर यदि बड़ी उम्र की महिला और छोटी उम्र के पुरूष की उम्र में सिर्फ कुछ सालों का अंतर है तो बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन जब यही फर्क 10-12 साल तक का हो जाता है तो काफी फर्क पड़ता है। 



* While it is recognized that there is no limit to love, nor any bond.अगर दो लोग आपस में समझदारी से एक-दूसरे के साथ जीवन-निर्वाह करने को तैयार है तो किसी को कोई समस्या नहीं होनी चाहिए लेकिन दोनों लोगों का खुश होना भी जरूरी है। 



*बड़ी उम्र की महिला और छोटी उम्र के पुरूष या फिर बड़ी उम्र का पुरूष और छोटी उम्र की महिला फिर चाहे उम्र कोई भी हो लेकिन दोनों को मैच्योरिटी लेवल मिलना चाहिए जिससे दोनों आपस में सामंजस्य स्थापित कर पाएं। 



* Indeed, spouses are bound to impact on the relations of the age difference.यदि बड़ी उम्र की महिला है तो निश्चित रूप से वह छोटी उम्र के पुरूष से अधिक अनुभवी होगी जिससे अधिक उम्र की महिला में सेक्‍स समस्‍याएं हो सकती हैं या फिर अधिक उम्र की महिलाओं की चाहत, सोच-विचार और इच्छाएं आपस में मिलने में मुश्किल हो can be. 



* Girls are generally mature than boys Jldir, in making any decision that women are stronger than men. Not only sex problems in women than in men seems to be Panpani early age, the age that is bound to impact on relationships. 



* The Best Half of relationships, age etc. is not important.न ही महिलाओं और पुरूषों में सेक्‍स समस्‍याओं का ज्यादा महत्व है, महत्‍व तो इस बात का है कि वे एक दूसरे को कितनी अच्छी तरह से समझते हैं फिर चाहें उम्र कुछ भी हो। 

As it currently has reduced the importance of the husband and wife whose age is more.लेकिन मेडिकल साइंस ने ये माना है कि यदि पत्नी की उम्र पति से कम है तो वे कई तरह की परेशानियों से बच सकते हैं। 


*आमतौर पर पत्नी या पति में कोई भी बड़ी उम्र का हो लेकिन दोनों की शारीरिक जरूरतें उम्र के हिसाब से अलग-अलग होती हैं, इसीलिए दोनों की उम्र के बीच बहुत ज्यादा अंतराल होना सही नहीं है।

पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग के मुख्य कारण

महिलाओं में पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होने के 6 कारण को ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने का पता आसानी से चल जाता है। अगर आपको दिन में कई बार पैड बदलने की जरूरत महसूस हो रही है तो जरूर कुछ गड़बड़ है। आइए जानें पीरियड्स के दौरान ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने के क्या कारण हो सकते हैं-

यह तो सब जानते हैं कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोन में परिवर्तन होते हैं और यह सामान्य भी है। लेकिन कुछ महिलाओं के शरीर में ऐसे यह काफी तेजी से होता है जो कि ज्यादा ब्लीडिंग का कारण हो सकता है। ऐसे में बिना देर किए अपने डॉक्टर से संपंर्क करें-
  • जिन महिलाओं के गर्भाशय में ट्यूमर होता है वे पीरियड के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग की समस्या से ग्रस्त होती है। यह समस्या अक्सर 30 से 40 की उम्र के बाद होती है। ऑपरेशन और इलाज के जरिए इस ट्यूमर को गर्भाशय से निकाल दिया जाता है जैसे - मॉयमेक्‍टॉमी, एंडोमेटरियल एबलेशन, यूट्रिन आर्टरी एमबेलीजेशन और यूट्रिन बैलून थेरेपी आदि।
  • एंडोमेट्रियल पॉलीप्‍स, कैंसर का प्रकार नहीं है। य‍ह सिर्फ गर्भाशय की सतह पर उभरता या पनपता है। इसके बनने का कारण भी अभी तक पता नहीं लगाया जा सका है लेकिन इसका इलाज कई विधियों से चिकित्‍सा जगत में संभव है। इसके बनने से बॉडी में एस्‍ट्रोजन या अन्‍य प्रकार के ओवेरियन ट्यूमर बन जाते हैं जो कि हैवी ब्लीडिंग का कारण हो सकते हैं।
  • प्रजनन अंगों में कई तरह के संक्रमण होने के कारण महिलाओं को उन दिनों में ज्यादा #ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है जैसे गर्भाशय के पेल्विक में सूजन और संक्रमण के कारण ह समस्या ज्यादा होती है।
  • सरवाइकल कैंसर में गर्भाशय, असामान्‍य और नियंत्रण से बाहर हो जाता है। इसके होने से शरीर के कई हिस्‍से नष्‍ट हो जाते है। 90 प्रतिशत से ज्‍यादा सरवाइकल कैंसर, ह्यूमन पेपिलोमा वायरस के कारण होता है। इसके उपचार के दौरान मरीज की सर्जरी करके उसे कीमोथेरेपी और रेडियशन दिया जाता है, इस बीमारी का इलाज संभव है।
  • एंड्रोमेट्रियल कैंसर मुख्‍य रूप से 50 वर्ष से अधिक आयु वाली महिलाओं को होता है। इसके उपचार में सबसे पहले गर्भाशय को ऑपरेशन करके निकाल दिया जाता है। इस बीमारी की शिकायत होने पर तुरंत चिकित्‍सक ही सलाह लें और जल्‍द से जल्‍द उपचार करवाएं। इस प्रकार के कैंसर में कीमोथेरेपी और रेडियशन भी किया जाता है।

ध्यान रखें :- आपके पीरियड्स अचानक 90 दिन से अधिक समय के लिये बंद हो जाते हैं और आप गर्भवती नहीं हैं।सात दिनों से अधिक समय तक ब्लीडिंग होती रहती है और बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है।पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना।पीरियड्स का अंतराल 21 दिन से कम या 35 दिन से अधिक होना।पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द होना।

पढ़े समझे और जीवन में करे

” युक्ताहार विहारस्य युक्त चेष्टस्य कर्मणा
युक्त स्व्प्ना व्बोधस्य योगो भवति दु:खहा !!”

  • प्रकृति ने फ़ल फ़ूल , अन्न , मसाले , शाक सब्जी , दूध दही घी , मठा , जड़ी बूटी सभी कुछ तो स्वस्थ रहने के लिए दिया है . अनके सेवन से शरीर पौष्टिक बनता है वरन इन में ओषिधिगुण भी हैं , जैसे हल्दी , सरसों के तेल व सैंधा नमक के सेवन से दांतों के रोग होने की संभावना घट जाती है , उसी तरह इमली के प्रयोग से विशेष कर गर्मियों में लू , आदि का प्रकोप नहीं रहता.
  • जिसका आहार अर्थात खानपान नियमित है और जो प्रतिदिन विहार नियमपूर्वक करता है यानि जागना ,उठना ,बैठना ,टहलना और निद्रा नियम्पूर्वक हैं तब वह व्यक्ति स्वस्थ अर्थात निरोग रहेगा
  • कारपोरेट कर्मियों एवं कई सरकारी अधिकारियों पर काम का बोझ इतना ज्यादा है कि काम की पारी (समय) अथवा माहोल नके रुचि के अनुकूल नहीं हैं रात रात भर जागकर काम करना पड़ता है . अन्यथा हालत में खाने का कोई समय नहीं हैं इन सब से स्वास्थ्य संबंधी विकार और गड़बड़ैया उत्पन्न हो रही हैं .
  • हम आज के सम जब कि मिलावट का काफ़ी जोर है फ़ास्ट फ़ूड एसे बिक रहे है हैं जिनकी गुणवत्त संदेह की दायरे में हैं, ढाबों पर आटे की मनमाफ़िक सिकी रोटी नहीं मिलती.
कुछ बातें तो एसी हैं जिनका जानना पूरे परिवार के लिए जरूरी है-

  • जैसे गर्म पेय लेने के बाद आधे घंटे तक ठंडा न लें . अदल बदल कर गरम और ठंडा तरा ऊपर न लें तरबूज खरबूज एवं आइस्क्रीम के तुरन्त बाद पानी न पिएं .खरबूजे का संग शरबत से है इसलिए मेहमानों को कभी भी इसके साथ चाय सर्व न करें .
  • बहुत से व्यक्तियों को सुपारी से खासी एलर्जी होती है इसलिए उनको पूछ लेना चाहिए .
  • शादी ब्याह्के अवसर पर आइस्क्रीम , गरम पेय और पथ्य कुपथ्य का लोग ध्यान नहीं रखते फ़लत: पेट के कई प्रकार के रोग उनके गले पड़ जाते हैं . जैसे तंबाकू या गुटका खाने से गले या मुंह का केन्सर हो सकता है लेकिन लोग अनसुना करते रहते हैं कई बार तो अति- भोज overeatng कर लेते हैं और सदा के लिए पेट के विकार लेते हैं .
  • सेकरीन ठंडे पेय आदि में तो मीठी लगती है लेकिन गरम पेय जैसे खीर में इसे डाला जाए तो यह नुकसान-देह है
  • उड़द की दाल ज्यादा खा लेने पर यदि आपने उसके उपर से देशी घी दे दिया तो यह भी बहुत नुकसान- देह है.
  • कटहल की सब्जी खा लेने के बाद पान चबाना भी कई या प्राय: नुकसान-देह होता है
  • शहद और घी को मिलाना ही पड़ जाए तो याद रखें कि यह सदैव विषम मात्रा में होना चाहिए . सम मात्रा में यह जहर बन जाता है
  • तांबे के पात्र में खट्टी चीज ज्यादा देर न रखें यदि सब्जी बनाई है तो सब्जी के बन जाने पर उसे दूसरे पात्र में बदल दें , चूकि ये अपनी तासीर कुछ देर में ही बदलना शुरू कर देते हैं.
  • वर्षा के मौसम में जल मिलाकर सत्तू खाना, ओस गिर रही हो उस जगह सोना नदी के पानी में नहाना और धूप का सेवन त्याज्य बताए गए हैं .
  • गरमियों में यदि आलू बना ही रहे हैं तो उसमें सौंफ़ डाल लें जिससे उसकी गर तासीर थोड़ी ठंडी पड़ जाए.
जाड़े के दिनों में सब्जियों में सौंठ का प्रयोग करें .

  • हर घर में गेहूं के साथ निश्चित मात्रा में चना , मटर या जौ का आटा अवश्य मिलाएं ताकि यह कोई हानि न करे. साथ ही ध्यान रहे शरीर में यदि प्रोटीन की मात्रा ज्यादा लें गे और उसके सम अनुपात में केल्शियम नहीं लेंगे तो ये असंतुलन हड्डियों को कमज़ोर करेगा .
  • जाड़ों में बाजरा खुर्ती की फ़ली का सेवन फ़ायदेमंद बताया गया है .गरमियों में आप आम का पना , आम की चटनी बना सकते हैं जो कि सब के लिए गुणकारी होती है शायद ही कोई करे
  • कभी कभार रेस्टोरेन्ट में अनायस सब्जी आदि में कीड़ा छिपकली गिर जाते है तो जब भी खाना खाएं पूरी तन्मयता से आंख खोलकर मन से खाएं .इसमें कोई जल्दबाजी न करें
  • अतिभोज बदहजमी,मोटापा , शिठिलता को जन्म देता है . जिनके जोड़ों में दर्द रहता है उन्हें बादी और ठंडी चीजों से परहेज करना चाहिए.
ज्यादामात्रा में चूर्ण लेने से भी अजीर्ण होता है . कुछ टिप्स इस प्रकार हैं:-
1- बाहर से आएं तो साबुन से हाथ स्वच्छ करें
2- कभी भी बासी , एवं ज्यादा देर से रखा भोजन न करें
3- जिन खाने की चीजों पर फ़फ़ूंद लगी हो उनको न खाएं
4- किचन में कोकरोच से मुक्ति पाने के लिए बोरिक पाउडर छिड़कें
5- नीलाथोथा व तूतिया का छिड़काव भी कर सकते हैं
6- इधर उधर लगे जाले भी हटाएं
7- किचन की नाली में खाद्य पदार्थों के अवशिष्ट न डालें , यदि वे उस स्थान पर सड़े तो अस्वच्छ कारी वातावरण होगा
8 -बरतन अच्छी तरह से साफ़ किए हुए हों
9- बाज़ार से रोटी व सब्जी अगर खरीद भी लाए हैं तो घर आकर तेज आंच पर उन्हें दोबारा जरूर पका लें .
10-तांबे /स्टील /एल्यूमियम की कड़ाही में तैयार सब्जी पक जाने पर उसे दूसरे बरतन में तुरन्त बदल लें .
11-दिन में आमतौर पर सोना ठीक नहीं माना गया है .
12-नशे की लत से दूर रहें
13-जाड़ों में तेल मालिश जरूर करें , साप्ताहिक आदि रूप से .
14-भोजन पेट में पच जाए तभी खाना खाएं नहीं तो यह पाचन न हुआ तो पेट में सड़कर वायु विकार पैदा करेगा .
15-अजीर्ण की अवस्था में ( सौंफ़ +जीरा+काला नमक आधा चुटकी लें ).शरीर में वात, पित्त और कफ़ सम होने चाहिए . तीनों एक सथ अनियंत्रित होंगे तो सन्निपात जैसी स्थिती हो सकती है , अगर एक दो कम ज्यादा या बिगड़े तो अन्य रोग होंगे .
16-आयु अधिक होने पर तेल का प्रयोग फ़ेफ़ड़े में जमकर ( संदूषित पदार्थ ) रुकावट पैदा करेंगे फ़लत: सिस्टोलिक रक्तचाप कम होगाइस तरह हर्ट फ़ेल्योर (दिल के रुकने , दौरा पड़ने ) की संभावना बढ जाएगी .चयापचय ( मेटाबोलिज्म )अस्त व्यस्त होकर जरूरी मात्रा मेंप्रोटीन ( अमीनो असिड्स)नहीं बने तो चिड़चिड़ापन और कमजोरी बढ जाती हैं इस्में कुलेखरा या जवारे का रस फ़ायदा पहुंचाता है .
17-प्रात:काल ब्राह्म मुहुर्त में जगकर शुद्ध वायु का सेवन करें .
18-शरीर से बलिष्ठ होने के साथ आप मन से मजबूत हों .यह तभी संभव है जब सोच विचार , prudence , temperence fortitude and justice से नेक होंगे इस तरह सत्य और सत्मार्ग पर प्रवृत्त होने पर मन हल्का रहेगा और मन क्सी बोझ के तले नहीं होगा , फ़लत: प्रफ़ुल्लित रहेगा .

वातावरण में मौजूद तमाम बैक्टीरिया और वायरस को हम साँस के जरिये रोजाना अन्दर लेते रहते हैं, लेकिन ये बैक्टीरिया हमें निकसान नहीं पहुंचाते. क्यों? क्योंकि हमारा प्रतिरोधक तंत्र इनसे हरदम लड़ता रहता है। और इन्हें पस्त करता रहता है। लेकिन कईं बार जब हम इन बहरी कीटाणुओं की ताकत बढ़ जाती है तो ये शरीर के प्रतिरोधक तंत्र को बेध देते हैं। जिससे गला ख़राब होना, जुकाम और ज्यादा तेज हमला हो गया है तो कभी-कभी फ्लू, बुखार आदि। जुकाम व सर्दी इस बात का संकेत है कि आपका प्रतिरोधक तंत्र कीटाणुओं को रोक पाने में कामयाब हो गया है।
कुछ दिन में आप ठीक हो जाते है। इसका अर्थ है की तंत्र ने फिर से जोर लगाया और घर कर रहे कीटाणुओं को हरा दीया। अगर प्रतिरोधक तंत्र ने दोबारा जोर न लगाया होता तो मरीज को जुकाम व सर्दी से कभी रहत न मिलती। इसी तरह कुछ लोगों को खास वस्तु या वातावरण से एलर्जी होती है और अन्य को उसी वास्तु से नहीं होती। इसका कारन है की जिसको एलर्जी है, उसका प्रतिरोधक तंत्र उस वास्तु पर रिऎक्शन कर रहा है, जबकि अन्य व्यक्तियों का तंत्र उस वास्तु के लिए सामान्य व्यव्हार करता है। इसी तरह डायबिटीज में भी प्रतिरोधक तंत्र पैनक्रियज में मौजूद सेल्स को गलत तरीके से मारने लगता है।

ज्यादातर लोगों में बिमारियों की मुख्या वजह वायरल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है। इनकी वजह से खांसी-जुकाम से लेकर खसरा, मलेरिया और एड्स जैसे रोग हो सकते हैं। ऐसी इन्फेक्शन से शारीर की रक्षा करने का काम ही करता है इम्यून सिस्टम।

इम्युनिटी बढाने के तरीके:-
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  • रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में सबसे ख़ास बात यह है कि इसका निर्माण शरीर खुद कर लेता है। ऐसा नहीं है की आपने बहार से कोई चीज खायी और उसने जाकर सीधे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा कर दिया।इसीलिए ऐसी सभी चीजें जो सेहतमंद खाने में आती है, उन्हें इस्तेमाल में लेना चाहिए। इनकी मदद से शरीर इस काबिल बना रहता है कि वह खुद अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सके।
  • अगर खानपान सही है तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के लिए किसी दवा या अतिरिक्त कोशिश की आवश्यकता नहीं है। आयुर्वेद के मुताबिक कोई भी खाना जो आपके ओज में वृद्धी करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में मददगार है। जो खाना अम्ल बढ़ता है, वह नुकसानदायक है। ओज से खाने के पूरी तरह से पच जाने के बाद सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. पचने में मुश्किल खाना खाने के बाद शरीर में अम्ल का निर्माण होता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है.
  • खानपान में सबसे अधिक ध्यान इस बात का रखे कि भूलकर भी वातावरण की प्रकृति के खिलाफ न जाएँ। उदहारण के तौर पर सर्दी में अधिक आइसक्रीम नुक्सान पहुंचा सकती है।
  • बाज़ार में मिलने वाले फ़ूड सप्लीमेंट उन्ही के लिए है जिनकी जुबान उनके काबू में नहीं है और जुबान के बस होकर वे कुछ भी खा लेते हैं। खाने में सलाद न लेना, वक्त पर खाना न खाना, उचित भोजन की अपेक्षा जंक फ़ूड व भारी खाना करना पसंद करना। वे अपनी शारीर की आवश्कता को समझ नहीं पाते। ऐसे ही लोगों के लिए फ़ूड सप्लीमेंट बनाये गए हैं।
  • अगर कोई शख्स खाने में विभिन्नता जैसे की सलाद, दालें, हरी सब्जियां आदि इस्तेमाल करता है तो उसे दवाओं की भी आवश्यकता कम पड़ेगी और सप्लीमेंट्स की भी। समुचित दुनिया में ऐसा कोई सप्लीमेंट नहीं है जो ऐसा दावा कर सके कि वह हर जरुरत पूरी करता है। मल्टी विटामिन्स के लिए हमें अपने खाने में विभिन्नता लानी आवश्यक है। तभी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता सयमित होगी। इसके लिए प्राकृतिक खानपान ही सबसे बेहतर और कारगर तरीका है।
  • प्रोसेस्ड और पैक खाने की वस्तुओं से जितना हो सके, बचना चाहिए। ऐसी वस्तुएं जिनमें प्रिजर्वेटिव्स मिले हों, उनसे भी बचना चाहिए।
  • इम्यूनिटी बढ़ने के लिए विटामिन सी और बिता कैरोटिस बढ़िया है जो कि मौसमी और निम्बू संतरे आदि से प्राप्त होता है।
  • जिंक के लिए सीफ़ूड और ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल करें।
  • विटामिन के लिए फल और हरी सब्जियां है।
  • दही व आचार एक साथ न खाए।
  • आचार जैसी तली पुरानी चीजों का परहेज करें ये शरीर में पानी रोकती है।
  • सिरका संतुलित ही इस्तेमाल करें। जहाँ सिरका पेट ठीक रखने में सहयोगी है वही त्वचा के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।
  • ठण्ड में शरीर को एक्सपोज़ न करें, इससे शरीर से आवश्यकता की गर्मी भी निकल जाती है। जिससे प्रतिरोधक क्षमता कम होती है.
  • स्ट्रेस लेने से भी जल्दी वायरल इन्फेक्शन होता है।
  • बंद कमरों में रहने से, अधिक लोगों के बीच सांस लेने से भी इन्फेक्शन फैलता है। यदि वातावरण स्वच्छ हो तो खुली जगह पर लम्बे सांस लेने से भी प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
क्या है फायदेमंद:-
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  • ग्रीन टी - इसमें एंटी ओक्सिडेंट होते हैं जो कईं तरह के कैंसर से बचाव करते हैं। यह छोटी आंत में पैदा होने वाले गंदे बैक्टीरिया को पनपने से रोकती है।
  • हरी मिर्च उपापचय बेहतर बनाती है इसमें बीटा कैरोटिन होता है।
  • दालचीनी से ब्लड क्लौटिंग रूकती है। ब्लड शुगर में सहायक है।
  • शकरकंद, अंजीर व मशरूम आदि खाने में इस्तेमाल से भी अनेकों फायदे हैं।