Wednesday, October 15, 2014

कुछ एक काम के नुस्खे ......!

*कुछ एक काम के #नुस्खे ......!

*यदि किसी स्त्री को बार-बार गर्भपात अथवा गर्भस्त्राव होता है तो निर्गुण्डी की जड को कपडे में बांधकर कमर में धारण करा दें। फिर गर्भपात या गर्भस्त्राव नहीं होगा। 
ये पंसारी से जाकर खरीद सकते है

*किसी भी प्रकार का कोई त्वचा विकार हो अथवा फोडे-फुंसी हों तो किसी रूद्राक्ष को भिगोकर पत्थर पर घिसकर, लेप तैयार कर लगाने से लाभ होता है।

*रक्तचाप की दशा में पांचमुखी रूद्राक्ष की माला गले में धारण करें। वह माला ह्रदय के पास तक जानी चाहिए।

*चारमुखी रूद्राक्ष को दूध में उबालकर प्रात: खाली पेट पीने से स्मरणशक्ति तीव्र हो जाती है।

*यदि कोई व्यक्ति सदैव अस्वस्थ रहता है और जल्दी-जल्दी बीमार हो जाता है, तो मोती शंख में काली गाय का दूध भरकर रखें और प्रात: खाली पेट उसे इस दूध का सेवन कराएं। इससे वह पूर्ण स्वस्थ्य हो जाएगा।

*सेंधा नमक, आंबा हल्दी और कूठ को समभाग लेकर नींबू के रस में पीसकर लेप करने से मुंह के धब्बे दूर होते हैं।

*एक नींबू के दो टुकडे करें और उसमें से बीज निकाल दें। फिर कटे नींबू पर फिटकरी को पकाकर व उसको पीसकर जो चूर्ण बने, उसे कटे नींबू पर तब तक डालते रहें जब तक कि नींबू का रस उसे सोखता रहे। जब सोखना बंद कर दे तो नींबू को अच्छी तरह चूस लें। दो-तीन बार के इस प्रयोग से पीलिया रोग चला जाता है।

गला बैठ गया है -

बहुत से लोगो का मौसम बदलने से या सर्दी-गर्मी से -या जादा ठंडा पानी पीने से या बहुत तेज चिल्लाने से गला बेठ जाता है -उनके लिए कुछ उपाय है जिनको करे और लाभ ले-







कच्चा सुंहागा आधा ग्राम (मटर के बराबर सुहागे को टुकड़ा) मुँह में रखें और रस चुसते रहें। उसके गल जाने के बाद स्वरभंग तुरंत आराम हो जाता है। दो तीन घण्टों मे ही गला बिलकुल साफ हो जाता है। उपदेशकों और गायकों की बैठी हुई आवाज खोलने के लिये अत्युत्तम है।

सोते समय एक ग्राम मुलहठी के चूर्ण को मुख में रखकर कुछ देर चबाते रहे। फिर वैसे ही मुँह में रखकर सो रहें। प्रातः काल तक गला अवश्य साफ हो जायेगा। मुलठी चुर्ण को पान के पत्ते में रखकर लिया जाय तो और भी आसान और उत्तम रहेगा। इससे प्रातः गला खुलने के अतिरिक्त गले का दर्द और सूजन भी दूर होती है।

रात को सोते समय सात काली मिर्च और उतने ही बताशे चबाकर सो जायें। सर्दी जुकाम, स्वर भंग ठीक हो जाएगा। बताशे न मिलें तो काली मिर्च व मिश्री मुँह में रखकर धीरे-धीरे चुसते रहने से बैठा खुल जाता है।

भोजन के पश्चात दस काली मिर्च का चुर्ण घी के साथ चाटें अथवा दस बताशे की चासनी में दस काली मिर्च का चुर्ण मिलाकर चाटें।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

Monday, October 13, 2014

दमा व श्वास का उपचार.......!


*द मा को आयुर्वेद में श्वास रोग कहते हैं। शरीर में कफ और वायु दोषों के असंतुलित हो जाने के कारण यह रोग होता है। बढ़ा हुआ कफ फेफड़े में एकत्र होने पर उसकी कार्यक्षमता में बाधा पहुंचती है और सांस के द्वारा लिये गये और छोड़े गये वायु के आवागमन में अवरोध उत्पन्न होता है। बढ़ा हुआ वायु इस कफ को सुख देता है जिससे वह श्वास नली में जम जाता है और सांस की तकलीफ शुरू होती है। तभी रोगी को दमे का भयंकर आक्रमण होता है। इसके अलावा कुछ और भी ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें पूर्वरूप कहा जाता है, जैसे छाती में हल्की पीड़ा, पेट में भारीपन, या वायु जम जाना, मुंह का स्वाद बदल जाना और सिर दर्द आदि।
*कर्ह बार लक्षणों के बिना अकस्मात् ही दमा शुरू हो जाता है। कारण दमा के मुख्यतः तीन कारण हैं: व्याधि, आहार एवं विहार।
*व्याधि: -व्याधि में शरीर में कफ और वायु दोष असंतुलित हो जाते हैं, जिसके कारण दमा होता है।
*आहार: -असंतुलित भोजन करने से भी रोग होता है। तेल या मसालेदार पदार्थों का अतिसेवन, भारी पदार्थ का अपचन, जो कब्ज पैदा करे, रूखा अन्न, बासी, खट्टी चीजें अधिक खाना और असमय खाना, जैसे रात में दही या दूध, केला या फल, सलाद, आइसक्रीम का सेवन एवं शीतल आहार, जैसे फ्रिज का ठंडा पानी, शीत पेय एवं तंबाकू के सेवन आदि से श्वास रोग हो सकता है।
*विहार: -यह आपके रहन-सहन पर निर्भर करता है। हमेशा शीत स्थान में रहना, जैसे वातानुकूलित कार्यालय में काम करना, वातानुकूलित कार्यालय में काम करना, वातानुकूलित कमरे में रहना और बर्फीले स्थान पर सफर करना आदि भी यह बीमारी पैदा करते हैं। धूल या धुंआ इस रोग के विशेष कारण हैं। इस्पात के कारखानों में, भट्टियों के पास, सीमेंट के कारखानों में, रसायन कारखानों में कार्यरत है। इसके अलावा तीव्र वायु में रहना, अधिक व्यायाम करना, वेगावरोध, जैसे मल-मूत्र के वेगों को रोकना, पोषणयुक्त आहार न करना, ये सभी दमा रोग को आमंत्रित करते हैं।
*यह रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है।श्वास पथ की मांसपेशियों में आक्षेप होने से सांस लेने निकालने में कठिनाई होती है।खांसी का वेग होने और श्वासनली में कफ़ जमा हो जाने पर तकलीफ़ ज्यादा बढ जाती है।रोगी बुरी तरह हांफ़ने लगता है। एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ या वातावरण के संपर्क में आने से,बीडी,सिगरेट धूम्रपान करने से,ज्यादा सर्द या ज्यादा गर्म मौसम,सुगन्धित पदार्थों,आर्द्र हवा,ज्यादा कसरत करने और मानसिक तनाव से दमा का रोग उग्र हो जाता है।
*यहां ऐसे घरेलू नुस्खों का उळ्लेख किया जा रहा है जो इस रोग ठीक करने,दौरे को नियंत्रित करने,और श्वास की कठिनाई में राहत देने वाल सिद्ध हुए हैं....


*एक पका केला छिला लेकर चाकू से लम्बाई में चीरा लगाकर उसमें एक छोटा चम्मच दो ग्राम कपड़छान की हुई काली मिर्च भर दें । फिर उसे बगैर छीलेही, केले के वृक्ष के पत्ते में अच्छी तरह लपेट कर डोरे से बांध कर 2-3 घंटे रख दें । बाद में केले के पत्ते सहित उसे आग में इस प्रकार भूने की उपर का पत्ता जले । ठंडा होने पर केले का छिलका निकालकर केला खा लें ।प्रतिदिन सुबह में केले में काली मिर्च का चूर्ण भरें। और शाम को पकावें । 15-20 दिन में खूब लाभ होगा । केला के पत्तों को सुखाकर किसी बड़े बर्तन में जला लेवें। फिर कपड़छान कर लें और इस केले के पत्ते की भरम को एक कांच की साफ शीशी या डिब्बे में रख लें । बस, दवा तैयार है ।
सेवन विधि - एक साल पुराना गुड़ 3 ग्राम चिकनी सुपारी का आधा से थोड़ा कम वनज को 2-3 चम्मच पानी में भिगों दें । उसमें 1-4 चौथाई दवा केले के पत्ते की राख डाल दें और पांच-दस मिनट बाद ले लें । दिनभर में सिर्फ एक बार ही दवा लेनी है, कभी भी ले लेवें ।

बच्चे का असाध्य दमा - अमलतास का गूदा 15 ग्राम दो कप पानी में डालकर उबालें चौथाई भाग बचने पर छान लें और सोते समय रोगी को गरम-गरम पिला दें । फेफड़ों में जमा हुआ बलगम शौच मार्ग से निकल जाता है । लगातार तीन दिन लेने से जमा हुआ कफ निकल कर फेफड़े साफ हो जाते है । महीने भर लेने से फेफड़े कर तपेदिक ठीक हो सकती है ।
*तुलसी के १५-२० पत्ते पानी से साफ़ करलें फ़िर उन पर काली मिर्च का पावडर बुरककर खाने से दमा मे राहत मिलती है।
*एक केला छिलके सहित भोभर या हल्की आंच पर भुनलें। छिलका उतारने के बाद १० नग काली मिर्च का पावडर उस पर बुरककर खाने से श्वास की कठिनाई तुरंत दूर होती है।
*दमा के दौरे को नियंत्रित करने के लिये हल्दी एक चम्मच दो चम्मच शहद में मिलाकर चाटलें।
*तुलसी के पत्ते पानी के साथ पीसलें ,इसमें दो चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से दमा रोग में लाभ मिलता है।
*पहाडी नमक सरसों के तेल मे मिलाकर छाती पर मालिश करने से फ़ोरन शांति मिलती है।
*१० ग्राम मैथी के बीज एक गिलास पानी मे उबालें तीसरा हिस्सा रह जाने पर ठंडा करलें और पी जाएं। यह उपाय दमे के अलावा शरीर के अन्य अनेकों रोगों में फ़यदेमंद है।
*एक चम्मच हल्दी एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से दमा रोग काबू मे रहता है।एलर्जी नियंत्रित होती है।
*सूखे अंजीर ४ नग रात भर पानी मे गलाएं,सुबह खाली पेट खाएं।इससे श्वास नली में जमा बलगम ढीला होकर बाहर निकलता है।
*सहजन की पत्तियां उबालें।छान लें| उसमें चुटकी भर नमक,एक चौथाई निंबू का रस,और काली मिर्च का पावडर मिलाकर पीयें।दमा का बढिया इलाज माना गया है।
*शहद दमा की अच्छी औषधि है।शहद भरा बर्तन रोगी के नाक के नीचे रखें और शहद की गन्ध श्वासके साथ लेने से दमा में राहत मिलती है।
*दमा में नींबू का उपयोग हितकर है।एक नींबू का रस एक गिलास जल के साथ भोजन के साथ पीना चाहिये।
*लहसुन की ५ कली ५० मिलि दूध में उबालें।यह मिक्श्चर सुबह-शाम लेना बेहद लाभकारी है।
*आंवला दमा रोग में अमृत समान गुणकारी है।एक चम्मच आंवला रस मे दो चम्मच शहद मिलाकर लेने से फ़ेफ़डे ताकतवर बनते हैं।
*दमा रोगी को हर रोज सुबह के वक्त ३-४ छुहारा अच्छी तरह बारीक चबाकर खाना चाहिये।अच्छे परिणाम आते हैं।इससे फ़ेफ़डों को शक्ति मिलती है और सर्दी जुकाम का प्रकोप कम हो जाता है।
*सौंठ श्वास रोग में उपकारी है। इसका काढा बनाकर पीना चाहिये।
*गुड १० ग्राम कूट लें। इसे १० ग्राम सरसों के तेल मे मसलकर-मिलाकर सुबह के वक्त खाएं। ४५ दिन के प्रयोग से काफ़ी फ़ायदा नजर आएगा।
*पीपल के सूखे फ़ल श्वास चिकित्सा में गुणकारी हैं। बारीक चूर्ण बनाले। सुबह -शाम एक चम्मच लेते रहें लाभ होगा।
*घरेलू उपचार स मुलहटी और सुहागा फूल को अच्छी तरह पीस लें और दोनों को बराबर मात्रा में मिला कर एक ग्राम दवा दिन में दो-तीन बार शहद के साथ चाटें, या गर्म पानी के साथ लें। ऐसा करना साधारण दमे में लाभकारी होता है।
* सोंठ, छोटी पीपर, सफेद पुनर्नवा, वायविडंग, चित्रक की जड़ की छाल, सत गिलोय, अश्वगंध, बड़ी हरड़ का छिलका, असली विधारा, बहेड़ की छाल, आंवला की छाल और काली मिर्च, सब को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीस कर चूर्ण बना लें। बाद में इन्हें गुड़ की एक तार की चाशनी में मिला कर पांच-पांच ग्राम की गोलियां बना कर सुखा लें। प्रातः काल एक गोली गाय या बकरी के दूध के साथ लें। इससे श्वास दमे में विशेष लाभ होता है।
*एक तोला, सोंठ का चूर्ण पचास ग्राम पानी में उबाल कर पकाएं। जब पानी आधा रह जाए, तो उसे छान कर पीने से दमें में लाभ होता है।
*सफेद जीरा तीन माशे, छोटी दुद्धी चार माशे, इन दोनों को ढाई ग्राम पानी में पीस कर छान लें। थोडा सा सेंधा नमक भी मिला कर सुबह पीएं।
*अडूसे का शरबत (बाजार से मिल जाता है) दो चम्मच भर पानी के साथ लेने पर सांस की नली साफ होती है और सांस लेने में तकलीफ नहीं होती।
*तुलसी के पत्तों का रस दो से चार चम्मच दिन में तीन-चार बार पीने से दमे में आराम होता है। तुलसी, काली मिर्च, हरी चाय की पत्ती का काढ़ा भी फायदेमंद होता है।
*धाय के फूल, पोस्ता के डोडे, बबूल की छाल, कटेरी अडूसा, छोटी पीपर, सोंठ, इन सबको बराबर मात्रा में ले कर पांच सौ ग्राम पानी में पकाएं। जब पानी आधा रह जाए, तो छान कर पांच माशे शहद के साथ लें। यह दमे में लाभ देता है।
*अजवायन, सुहागा, लोंग, काला नमक, सेंधा नमक, सांभर नमक, इन सबको बराबर मात्रा में ले कर मिट्टी की हांडी में डाल कर अच्छी तरह बंद कर दें और फिर गैसों की आग पर चार घंटे तक जलाएं। बाद में ठंडा कर हांडी से भस्म निकाल कर अच्छी तरह पीस कर चूर्ण बना लें। चुटकी भर भस्म शहद में मिला कर चाटें और हल्का गर्म पानी पीएं।
*अंजीर को कलई किये हुए बत्र्तन में चैबीस घंटे तक पानी में भिगोएं। सुबह अंजीर को उसी पानी में उबाल लें। प्रातः काल प्राणायाम करने के बाद जब श्वास सामान्य हो जाए, तब उबले हुए अंजीर को चबा कर खा लें और वही पानी पी लें। इससे दमा रोग में विशेष लाभ होता है।
*दमे का आक्रमण होने पर लहसुन के तेल से रोगी के सोने पर मालिश करें और एक-दो चम्मच हल्दी, एक चम्मच अजवायन पानी में डाल कर उबाल कर पिलाएं। दमे के आक्रमण से जल्द आराम मिलेगा।

शुद्ध शहद की पहचान और कुछ जरुरी #प्रयोग ......!

शुद्ध शहद की पहचान.......!


शुद्ध शहद में खुशबू रहती है। वह सर्दी में जम जाता है तथा गरमी में पिघल जाता है।

शुद्ध शहद को कुत्ता नहीं खाता।

कागज पर शहद डालने से नीचे निशान नहीं आता है।



शहद की कुछ बूंदे पानी में डालें। यदि यह बूंदे पानी में बनी रहती है तो शहद असली है और शहद की बूंदे पानी में मिल जाती है तो शहद में मिलावट है। रूई की बत्ती बनाकर शहद में भिगोकर जलाएं यदि बत्ती जलती रहे तो शहद शुद्ध है।


* एक ज़िंदा मक्खी पकड़कर #शहद में डालें। उसके ऊपर शहद डालकर मक्खी को दबा दें। शहद असली होने पर मक्खी शहद में से अपने आप ही निकल आयेगी और उड़ जायेगी। मक्खी के पंखों पर शहद नहीं चिपकता।
*कपड़े पर शहद डालें और फिर पौंछे असली शहद कपडे़ पर नहीं लगता है 

*  आइये और जाने घर में शुद्ध शहद रखना क्यों जरुरी है ...?

रोगों में शहद का प्रयोग .....

 * कुछ बच्चे रात में सोते समय बिस्तर में ही मूत्र (पेशाब) कर देते हैं। यह एक बीमारी होती है। सोने से पहले रात में शहद का सेवन कराते रहने से बच्चों का निद्रावस्था में मूत्र (पेशाब) निकल जाने का रोग दूर हो जाता है।

* एक चम्मच शुद्ध शहद शीतल पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द को आराम मिलता है।

* एक चुटकी सौंठ को थोड़े से शहद में मिलाकर चाटने से काफी लाभ होता है। दो तुलसी की पत्तियां पीस लें। फिर इस चटनी को आधे चम्मच शहद के साथ सेवन करें।

* रात्री को सोते समय एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें। इसके इस्तेमाल से सुबह पेट साफ हो जाता है।

* एक गिलास पानी में एक चम्मच नींबू का रस तथा आधा चम्मच शहद मिलाकर लेना चाहिए। इससे अजीर्ण का रोग नष्ट हो जाता है।

* शहद में दो काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर चाटना चाहिए।

* अजवायन थोड़ा सा तथा सौंठ दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को शहद के साथ चाटें।

* शहद को जरा सा गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए।

* शहद में सौंफ, धनिया तथा जीरा का चूर्ण बनाकर मिला लें और दिन में कई बार चाटें। इससे दस्त में लाभ मिलता है।

* अनार दाना चूर्ण शहद के साथ चाटने से #दस्त बंद हो जाते हैं।

* अजवायन का चूर्ण एक चुटकी को एक चम्मच शहद के साथ लेना चाहिए। दिन में तीन बार यह चूर्ण लेने से #पेट के कीड़े मर जाते हैं।

* सौंठ, कालीमिर्च, पीपल, सेंधानमक इन सब चीजों को मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में से आधी चुटकी लेकर एक चम्मच शहद के साथ सुबह, दोपहर और शाम को इसका इस्तेमाल करें। एक दो कालीमिर्च तथा दो लौंग को पीसकर शहद के साथ चाटना चाहिए।

* धनिया तथा जीरा लेकर चूर्ण बना लें और शहद मिलाकर धीरे-धीरे चाटना चाहिए। इससे #अम्लपित्त नष्ट होता है।

* सौंफ, धनियां तथा अजवायन इन तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इस चूर्ण में से आधा चम्मच चूर्ण को शहद के साथ सुबह, दोपहर और शाम को इसका सेवन करना चाहिए। इससे #कब्ज दूर होती है।

* रात्रि को सोते समय एक चम्मच त्रिफला-चूर्ण या एरण्ड का तेल एक गिलास दूध के साथ लेना चाहिए। इससे #कब्ज दूर हो जाती है।

* त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। इससे #पीलिया का रोग नष्ट हो जाता है। गिलोय का रस 12 ग्राम शहद के साथ दिन में दो बार लें। नीम के पत्तों का रस आधा चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए।

* सिर पर शुद्ध शहद का लेप करना चाहिए। कुछ ही समय में #सिर का दर्द खत्म हो जायेगा। आधा चम्मच शहद और एक चम्मच देशी घी मिलाकर सिर पर लगाना चाहिए। घी तथा शहद के सूखने के बाद दोबारा लेप करना चाहिए। यदि पित्त के कारण सिर में दर्द हो तो दोनों कनपटियों पर शहद लगायें। साथ ही थोड़ा शहद भी चाटना चाहिए।

* सर्दी, गर्मी या #पाचन क्रिया की खराबी के कारण सिर में दर्द हो तो नींबू के रस में शहद को मिलाकर माथे पर लेप करना चाहिए।

* कागज के टुकड़ों पर शहद और चूना को मिलाकर माथे के जिस भाग में दर्द हो उस भाग पर रख देने से #सिर का दर्द दूर हो जाता है।

* भोजन के साथ शहद लेने से #सिर का दर्द दूर हो जाता है।

* रतौंधी ...शहद को सलाई या अंगुली की सहायता से काजल की तरह आंखों में सुबह के समय तथा रात को सोते समय लगाना चाहिए। काजल में शहद मिलाकर बराबर लगाते रहने से भी #रतौंधी की बीमारी समाप्त हो जाती है। शहद को आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी रोग दूर होता है। आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

* आंख में जलन के लिए शहद के साथ निबौंली (नीम का फल) का गूदा मिलाकर आंखों में काजल की तरह लगना चाहिए। शुद्ध शहद को सलाई या अंगुली की सहायता से काजल की तरह #आंख में लगायें।

* आंखों के रोग के लिए एक ग्राम गुरुच का रस तथा आधा चम्मच शहद को मिला लें। फिर इसे आंखों में नियम से रोज सलाई से लगायें। #आंखों की खुजली, दर्द, मोतियाबिंद तथा अन्य सभी रोगों के लिए यह उपयोगी अंजन (काजल) है।

* चार ग्राम गिलोय का रस लेकर उसमें दो ग्राम शहद मिलाकर लोशन बना लें। इसे आंखों में लगायें। आंखों के सभी रोगों में इससे लाभ होगा। रोज सुबह ताजे पानी से आंखों को छप्पा (पानी की छींटे) मारकर धोना चाहिए। इसके बाद दो बूंदे नीम का रस तथा चार बूंदे शहद मिलाकर आंखों में लगाना चाहिए। कड़वे तेल से बना हुआ काजल शुद्ध शहद के साथ मिलाकर आंखों में लगाना चाहिए।

* मुंह के छाले के लिए तवे पर सुहागे को फुलाकर शहद के साथ छालों पर लगाना चाहिए। इससे #मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

* छोटी इलायची को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर शहद में मिलाकर छालों पर लगायें। फिटकरी को पानी में घोल लें और एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर कुल्ला करें। यह कुल्ला भोजन करने से पहले सुबह, दोपहर तथा शाम को करना चाहिए।
पेट में गर्मी ज्यादा हो तो त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ लेना चाहिए। केवल आंवले का चूर्ण शहद के साथ लेने से भी #पेट की गर्मी शांत होती है और मुंह के छाले ठीक होने लगते हैं।

* आवाज का बैठ जाना ...फूली हुई फिटकरी पीसकर शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। इसमें पानी मिलाकर कुल्ला किया जा सकता है। मुलहठी का चूर्ण शहद के साथ चाटना चाहिए। कुलंजन मुंह में रखकर चूसने से भी #आवाज खुल जाती है।

* 3 से 9 ग्राम बहेड़ा के चूर्ण को शहद के साथ सुबह और शाम सेवन करने से #स्वरभंग (गला बैठना) और गले के दूसरे रोग भी ठीक हो जाते हैं।

* 1 कप गर्म पानी में 1 चम्मच शहद डालकर गरारे करने से #आवाज खुल जाती है।

* थूक के साथ बलगम के लिए छाती पर शहद की मालिश करके गुनगुने पानी से धो लें। इससे थूक के साथ #बलगम का आना बंद हो जाता है। रात्रि को सोने से पहले अजवायन का तेल छाती पर मलें। पिसी हुई हल्दी, अजवायन और सौंठ को मिलाकर एक चुटकी लेकर शहद में मिलाकर सेवन करें।

* पायरिया के लिए मसूढ़ों तथा दांतों पर शुद्ध शहद की मालिश करके गुनगुने पानी से कुल्ला करना चाहिए। नींबू का रस, नीम का तेल तथा शहद मिलाकर मसूढ़ों की मालिश करके कुल्ला कर लें। लहसुन, करेला, अदरक का रस निकालकर शहद में मिलाकर मसूढ़ों पर रोज लगाना चाहिए। तीन-चार दिन तक लगातार मालिश करने से #पायरिया तथा मसूढ़ों के अन्य रोग खत्म हो जाते हैं।

* खांसी की बीमारी के लिए लाल इलायची लेकर इसे भून लें और चूर्ण बना लें, इसमें शहद मिलाकर सेवन करें। मुनक्का, खजूर, कालीमिर्च, बहेड़ा तथा पिप्पली-सभी को समान मात्रा में लेकर कूट लें और उसमें से दो चुटकी चूर्ण लेकर शहद में मिलाकर सेवन करें। 3 ग्राम सितोपलादि के चूर्ण को शहद में मिलाकर दिन में तीन बार चाटकर खाने से #खांसी दूर हो जाती है।

* 5 ग्राम शहद में लहसुन के रस की 2-3 बूंदे मिलाकर बच्चे को चटाने से #खांसी दूर हो जाती है।

* एक नींबू पानी में उबालें फिर निकालकर कांच के गिलास में निचोड़ लें। इसमें 28 मिलीलीटर ग्लिसरीन और 84 मिलीलीटर शहद मिलाकर हिलाएं। एक-एक चम्मच चार बार पीने से खांसी बंद हो जाती है। शहद #खांसी में आराम देता है। 12 ग्राम शहद को दिन में तीन बार चाटने से कफ निकल जाता है और खांसी ठीक हो जाती है। थोड़ी सी फिटकरी को तवे पर भून लेते हैं। इस 1 चुटकी फिटकरी को शहद के साथ दिन में 3 बार चाटने से खांसी में लाभ मिलता है।

* काली खांसी के लिए सबसे पहले रोगी की कब्ज को दूर करना चाहिए। इसके लिए एरण्ड का तेल पिलाया जा सकता है। इसके बाद चिकित्सा आरम्भ शुरू करनी चाहिए। चिकित्सा के लिए शहद में लौंग के तेल की एक बूंद तथा अदरक के रस की दस बूंदे मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम को देनी चाहिए।

* दमा के लिए शहद में कुठार रस 4 बूंद मिलाकर दिन में 3-4 बार देना चाहिए। इससे #दमा का रोग नष्ट हो जाता है।

* सोमलता, कूट, बहेड़ा, मुलेठी, अडूसा के पत्ते, अर्जुन की छाल तथा काकड़ासिंगी सबका एक समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। प्यास लगने पर गर्म पानी पीयें।

* पसलियों में दर्द के लिए सांभर सींग को पानी में घिसकर शहद के साथ मिलाकर #पसलियों पर लेप करना चाहिए।

* एक कप दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह के समय पीने से #ताकत बढ़ती है।

* जुकाम के लिए शहद और अदरक का रस एक-एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो बार पीने से #जुकाम खत्म हो जाता है और भूख बढ़ जाती है।

* 2 चम्मच शहद, 200 मिलीलीटर गुनगुना दूध और आधे चम्मच मीठे सोडे को एक साथ मिलाकर सुबह और शाम पीने से जुकाम, #फ्लू ठीक हो जाता है। इसको पीने से बहुत पसीना आता है पर पसीना आने पर रोगी को हवा नहीं लगने देना चाहिए।

* 20 ग्राम शहद, आधा ग्राम सेंधानमक और आधा ग्राम हल्दी को 80 मिलीलीटर पानी में डालकर उबाल कर रख लें। कुछ देर बाद जब पानी हल्का सा गर्म रह जाये तो इस पानी को सोते समय पीने से #जुकाम दूर हो जाता है।

* बिच्छू के डंक मारे हुए स्थान पर शहद लगाने से #दर्द कम हो जाता है।

* जलन के लिए नियमित सुबह 20 ग्राम शहद ठंडे पानी में मिलाकर सेवन करने से जलन, खुजली और फुन्सियों जैसी चर्म रोग जड़मूल से समाप्त हो जाती है।

* शरीर के जले हुए अंगो पर शहद लगाने से जलन दूर होती है। #जख्म होने पर शहद को तब तक लगाते रहे जब तक कि जख्म ठीक ना हो जायें। जख्म ठीक होने के बाद सफेद निशान बन जाते हैं। उन पर शहद लगाकर पट्टी बांधते रहने से निशान मिट जाते हैं।

* शीघ्रपतन के लिए स्त्री-संग सम्भोग से एक घण्टा पहले पुरुष की नाभि में शहद में भिगोया हुआ रूई का फोहा रखने से पुरुष का जल्दी #स्खलन नही होता अर्थात पुरुष का #लिंग शिथिल नहीं होता है।

* बलगम युक्त खांसी के लिए 5 ग्राम शहद दिन में चार बार चाटने से बलगम निकल कर #खांसी दूर होती है। शहद और अडूसा के पत्तों का रस एक-एक चम्मच तथा अदरक का रस आधा चम्मच मिलाकर पीने से खांसी नष्ट हो जाती है।

* उल्टी के लिए गुड़ को शहद में मिलाकर सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है। #उल्टी होने पर शहद को चाटने से उल्टी होना बंद हो जाती है। शहद में लौंग का चूर्ण मिलाकर चाटने से गर्भावस्था में उल्टी आने से छुटकारा मिलता है।

* रक्तविकार के लिए बकरी के दूध में आठवां हिस्सा शहद मिलाकर पीने से #खून साफ हो जाता है। इसका प्रयोग करते समय नमक और मिर्च का त्याग कर देना आवश्यक है।

* यक्ष्मा या #टी.बी. के लिए ताजा मक्खन के साथ शहद का सेवन करने से क्षय रोग में लाभ होता है। शहद में करेले का चूर्ण डालकर चाटना चाहिए।

* हाईब्लडप्रेशर के लिए दो चम्मच शहद और नींबू का रस एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो से तीन बार सेवन करने से #हाई बल्डप्रेशर में लाभ होता है।

* कान दर्द के लिए कान में शहद डालने से कान की पीव और कान का दर्द नष्ट हो जाता है। कान में कनखजूरा सदृश जीव-जंतु घुस गया हो तो शहद और तेल मिलाकर उसकी कुछ बूंदे #कान में डालने से लाभ होता है।

* आंख आना के लिए 1 ग्राम पिसे हुए नमक को शहद में मिलाकर आंखों में सुबह और शाम लगाऐं। सोनामक्खी को पीसकर और शहद में मिलाकर #आंखों में सुबह और सांय लगाए। चन्द्रोदय वर्ति (बत्ती) को पीसकर शहद के साथ आंखों में लगाने से आंखों के रोग दूर होते हैं।

* मलेरिया का बुखार के लिए शुद्ध शहद 20 ग्राम, सैंधानमक आधा ग्राम, हल्दी आधा ग्राम को पीसकर 80 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी में डालकर रात को पीने से #मलेरिया का बुखार और जुकाम ठीक हो जाता है।

* फेफड़ों के रोगों में शहद लाभदायक रहता है। #श्वास में और फेफड़ों के रोगों में शहद अधिक प्रयोग करते हैं।

* दांतों का दर्द के लिए 1 चम्मच शहद में, लहसुन का रस 20 बूंद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम चाटें। इससे पायरिया, मसूढ़ों की सूजन, दर्द, मुंह की दुर्गन्ध आदि खत्म होती है। #मसूढ़ों में सूजन व खून निकलने के कारण दांत हिलने लगते हैं। शहद अथवा सरसों के तेल से कुल्ला करने से मसूढ़ों का रोग नष्ट हो जाता है।

* इन्फ्लुएन्जा के लिए शहद में पीपल का 1 चुटकी चूर्ण मिलाकर चाटने से आराम मिलता है।2 चम्मच शहद, 200 मिलीलीटर गर्म दूध, आधा चम्मच मीठा सोड़ा मिलाकर सुबह और शाम को पिलाने से #इन्फ्लुएन्जा पसीना आकर ठीक हो जाता है।

* बच्चों के दांत निकलते समय मसूढ़ों पर शहद मलने से #दांत निकलते समय दर्द में आराम रहता है।

* निमोनिया रोग में रोगी के शरीर की पाचन-क्रिया प्रभावित होती है इसलिए सीने तथा #पसलियों पर शुद्ध शहद की मालिश करें और थोड़ा सा शहद गुनगुने पानी में डालकर रोगी को पिलाने से इस रोग में लाभ होता है।

* जीभ की प्रदाह और सूजन के लिए जीभ के रोग में शहद को घोलकर मुंह में भरकर रखने से #जीभ के रोग में लाभ होता है।

* गर्भनिरोध के लिए चूहे की मींगनी शहद में मिलाकर योनि में रखने से गर्भ नहीं ठहरता है। शहद 250 ग्राम को हाथी की लीद (गोबर) का रस 250 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ ऋतु (माहवारी) होने के बाद स्त्रियों को सेवन कराने से #गर्भधारण नहीं होता है।

* लाख के पानी में शहद मिलाकर पीने से #खून की उल्टी होना रुक जाती है।

* मुंह के छाले के लिए नीलाथोथा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग को भुन पीसकर 10 ग्राम शहद में मिलालें। इस मिश्रण को रूई से #छालों पर लगायें तथा लार बाहर निकलने दें। मुंह की गंदगी लार के रूप में मुंह से बाहर निकाल कर छालों को ठीक करती है।

* गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में रक्त की कमी आ जाती है। गर्भावस्था के समय रक्त बढ़ाने वाली चीजों का अधिक सेवन करना चाहिए। महिलाओं को दो चम्मच शहद प्रतिदिन सेवन करने से #रक्त की कमी नहीं होती है। इससे शारीरिक शक्ति बढ़ती है और बच्चा मोटा और ताजा होता है। गर्भवती महिला को गर्भधारण के शुरू से ही या अंतिम तीन महीनों में दूध और शहद पिलाने से बच्चा #स्वस्थ और मोटा ताजा होता है।

* शहद में उंगली डूबोकर दिन में 3 बार चाटने से #हिचकी से आराम मिलता है। शहद और काला नमक में नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से हिचकी से आराम मिलता है। प्याज के रस में शहद मिलाकर चाटने से हिचकी बंद हो जाती है।

* कान का दर्द के लिए लगभग 3 ग्राम शहद, 6 मिलीलीटर अदरक का रस, 3 मिलीलीटर तिल का तेल और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक को एक साथ मिलाकर इसकी थोड़ी सी बूंदे कान में डालकर उसके ऊपर से रूई लगा देने से कान से #कम सुनाई देना, कान का दर्द, कान में अजीब-अजीब सी आवाजे सुनाई देना आदि रोग दूर हो जाते हैं। 5 मिलीलीटर सूरजमुखी के फूलों का रस, 5 ग्राम शहद, 5 मिलीलीटर तिल का तेल और 3 ग्राम नमक को मिलाकर कान में बूंद-बूंद करके कान में डालने से #कान का दर्द ठीक हो जाता है।

* शहद में समुद्रफेन को घिसकर कान में डालने से #बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है।

* शहद और दूध मिलाकर पीने से #धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है। और शरीर बलवान होता है।

* शहद और नीम की गोंद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर कान में 2-2 बूंद डालने से कान मे से #मवाद का बहना बंद हो जाता है।

* शहद की 3-4 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द पूरी तरह से ठीक हो जाता है। कान को अच्छी तरह से साफ करके उसमे रसौत, शहद और और औरत के दूध को एक साथ मिलाकर 2-3 बूंदे रोजाना 3 बार कान में डालने से #कान में से मवाद का बहना बंद हो जाता है।

* कान में कुछ पड़ जाना ...रूई की एक बत्ती बनाकर शहद में भिगो लें और कान में धीरे-धीरे से घुमायें। ऐसा करने से कान में जितने भी छोटे-मोटे #कीड़े-मकोड़े होगें वो बत्ती के साथ चिपककर बाहर आ जायेंगे।

* पुराने से पुराने घाव में हरीतकी को पानी में पीसकर शहद के साथ मिलाकर लेप करने से #घाव शीघ्र ही ठीक हो जाता है। शहद लगाने से घाव जल्द भरते है।

* कौआ गिरना ....4 से 6 ग्राम शहद को कालक का चूर्ण 1 से 3 ग्राम मिलाकर दिन में 2 बार लेने से रोग में लाभ होता है।

* पक्षाघात-लकवा-फालिस फेसियल, परालिसिस लगभग 20 से 25 दिन तक रोजाना लगभग 150 ग्राम शहद शुद्ध पानी में मिलाकर रोगी को देने से शरीर का लकवा ठीक हो जाता है। लगभग 28 मिलीलीटर पानी को उबालें और इस पानी के ठंडा होने पर उसमें दो चम्मच शहद डालकर पीड़ित व्यक्ति को पिलाने से कैल्शियम की मात्रा शरीर में उचित रूप में आ जाती है जोकि #लकवे से पीड़ित भाग को ठीक करने में मददगार होती है।

* शहद में एक चुटकी अफीम मिलाकर और उसमें घिसकर चाटने से #पेचिश के रोगी का रोग दूर हो जाता है।

* शहद और सेंधानमक को मिलाकर बत्ती बनायें। बत्ती को #नासूर में रखने से #भगन्दर रोग में आराम मिलता है।

* मोच के स्थान पर शहद और चूना मिलाकर हल्की मालिश करने से आराम होता है।

* स्त्री को गुनगुने गर्म पानी के टब में बैठायें तथा शहद में भिगोये हुए कपडे़ को #योनि में रखे। इससे सर्दी का असर दूर हो जाता है और #प्रसव हो जाता है।

* शहद को मुंह में भरकर कुछ देर तक रखकर कुल्ला करें। इससे तेज प्यास शांत हो जाती है। पानी में शहद या चीनी मिलाकर पीने से गले की जलन व प्यास मिट जाती है। 20 ग्राम शहद को मुंह में 10 मिनट तक रखें फिर कुल्ला कर दें। इससे अधिक #तेज प्यास भी शांत हो जाती है।

* 20 ग्राम शहद में 40 मिलीलीटर पानी डालकर उबालकर रख लें, फिर इस पानी को पिलाने से #जलोदर की बीमारी में लाभ होता है। शहद और पीपल का चूर्ण छाछ में मिलाकर पीने से लाभ होगा।

* मासिक स्राव के लिए शहद के साथ कबूतर की बीट मिलाकर खाने से #रजोदर्शन (माहवारी) होता है और बांझपन दूर हो जाता है।

* शीतपित्त के लिए केसर 6 ग्राम, शहद 25 ग्राम रोगी को सुबह-शाम खिलाने से #शीतपित्त में लाभ मिलता है। एक चम्मच शहद और एक चम्मच त्रिफला मिलाकर सुबह-शाम खाने से भी लाभ होता है।

* मोटापा (स्थूलता) दूर करने के लिए 120 ग्राम से लेकर 240 ग्राम शहद को 100 से 200 मिलीलीटर गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में 3 बार खुराक के रूप में सेवन करें।

* गिल्टी (ट्यूमर) के लिए चूना और शहद को अच्छी तरह से मिलाकर #गिल्टी पर लगाने से रोग में आराम मिलता है।

* शहद का रोज दूध में मिलाकर सेवन करने से #मोटापा बढ़ता हैं।

* शहद के साथ लगभग 1-2 ग्राम पोस्ता पीसकर इसको शहद में घोलकर रोजाना सोने से पहले रोगी को देने से अच्छी नींद आती है। इससे रोगी को #आराम से नींद आ जाती है। शहद के साथ लगभग 3-9 ग्राम बहेड़ा के चूर्ण को रोगी को सुबह और शाम को सेवन करने से लाभ प्राप्त होता है।

* नींद ना आना (#अनिद्रा) के लिए एक-एक चम्मच नींबू का रस और शहद को मिलाकर रात को सोने से पहले दो चम्मच पीने से नींद आ जाती है। जब नींद खुले तब दो चम्मच पुन: लेने पर नींद आ जाती है और यदि केवल पानी के गिलास में शहद की दो चम्मच डालकर पीने से नींद आ जाती है। शहद या शर्करा के शर्बत में पोस्तादाना को पीसकर इसको घोलकर सेवन करने से नींद अच्छी आती है।

* पेट के कीड़े के लिए दो चम्मच शहद को 250 मिलीलीटर पानी में डालकर दिन में दो बार सुबह और शाम पीने से लाभ होता है। थोड़ी मात्रा में सेवन करने से भी पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।

* आधासीसी (#माइग्रेन) के लिए इस रोग में सूर्य उगने के साथ दर्द का बढ़ना और ढलने के साथ सिर दर्द का कम होना होता है, तो जिस ओर सिर में दर्द हो रहा हो उसके दूसरी ओर के नाक के नथुने में एक बूंद शहद डालने से सिर के दर्द में आराम मिलता है। रोजाना भोजन के समय दो चम्मच शहद लेते रहने से आधे सिर में दर्द व उससे होने वाली उल्टी आदि बंद हो जाती हैं।

* नाक के रोग के लिए शहद या गुड़ के साथ गूलर के पके हुए फल को खाने से #नाक से खून आना बंद हो जाता है।

* शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम सुहागे की खील (लावा) को चटाने से आक्षेप और #मिर्गी में बहुत आराम आता है। शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग जटामांसी का चूर्ण सुबह और शाम रोगी को देने से आक्षेप के दौरे ठीक हो जाते हैं।

* पेट में दर्द के लिए शहद का प्रयोग करने से खाना खाने के बाद होने वाले #पेट दर्द समाप्त होते है। शहद और पानी मिलाकर पीने से पेट के दर्द में राहत मिलती है।

* तंग योनि को शिथिल करना ..10 ग्राम शहद को 5 ग्राम देशी घी में मिलाकर योनि पर लगाने से #तंग योनि शिथिल होती है।

* शहद के साथ लगभग तीन ग्राम कलौंजी का सुबह के समय सेवन करने से #भूलने की बीमारी दूर हो जाती है।

* शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चांदी की भस्म सुबह और शाम को लेने से #बुद्धि के विकास में वृद्धि होती है।

* शहद और पीपल का पीसा हुआ चूर्ण छाछ के साथ पीने से #छाती के दर्द में लाभ मिलता है।

* चिड़चिडापन और मन की उदासी के लिए शहद के साथ गुल्म कुठार की लगभग 1 या 2 गोलियां सुबह और शाम को देने से #चिड़चिड़ा स्वभाव और मन की उदासी दूर हो जाती है।

* शहद में लगभग 3 ग्राम कलौंजी का चूर्ण मिलाकर चाटने से #याददास्त तेज हो जाती है। लगभग 30 ग्राम शहद के साथ 20 ग्राम घी मिलाकर भोजन के बाद रोजाना लेने से दिमाग की याददास्त तेज होती है।

सावधानियां :-
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#शहद को अग्नि (आग) पर कभी गरम नही करना चाहिए और न ही अधिक गर्म चीजें शहद में मिलानी चाहिए इससे शहद के गुण समाप्त हो जाते हैं। इसको हल्के गरम दूध या पानी में ही मिला कर सेवन करना चाहिए। तेल, घी, चिकने पदार्थ के साथ सममात्रा (समान मात्रा) में शहद मिलाने से जहर बन जाता है।

#यदि शहद से कोई हानि हो तो नींबू का सेवन करें। ऐसी स्थिति में नीबू का सेवन करना रोगों को दूर कर लाभ पहुंचाता है।
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

Sunday, October 12, 2014

लोगो ने सिखाया और हमने सीखा - People taught and learned

मेरे मन की बात -


मै अपने जीवन में एक खुली किताब रहा हूँ कोई भी मुझे पढ़ और समझ सकता है बस सामने वाले के पास मुझे पढने और समझने लायक एक दिल हो -


जीवन भर ईमानदारी और उर्जा -पूरित जीवन जिया है मुझे नित-नित नए आयाम से कुछ न कुछ सीखने को मिला है लोभ से दूर शान्ति प्रिय जीवन पसंद व्यक्ति रहा हूँ जो भी आया मेरे जीवन में मुझे एक हल्का सा धक्का दे के आगे निकल गया- मगर जाते -जाते कुछ समझने की सीख दे गया -

या आप यूँ कहे कि रिश्ते की डोर मेरे जीवन में कमजोर ही रही है - फिर हम किसी को हम समझ नहीं पाए या कोई हमें समझ नहीं पाया किसी एक की गलती सही -पर कुछ तो येसा था -

जब भी इमानदारी से मन की बात की तो उसमे भी लोगो ने  अपना स्वार्थ खोजा - दूर रहकर भी हम सभी को समझते रहे -पास रह कर भी लोग मुझे समझ नहीं पाए - पता नहीं ये दोष मेरा था या उनका -

वक्त की थपेड़ो से मुझे जीना सिखाया है ये सीख शायद किसी को दे सकूँ और कोई मुझे समझे -दिल मे बहुत कुछ समेटे हुए हूँ जो औरो के काम आ सकेगा -शायद मेरे नाती -पोतो से भी कुछ सीखने को अभी मिले -वो भी काम की चीज हो सकती है -

इन्शान कभी जीवन में पूर्ण नहीं होता ये जीवन भर सीखने और सिखाने का स्कूल है - नवजात शिशु एक कोरा कागज होता है शुरवात लिखने की माँ-बाप,गुरु,समाज करता है और वही कोरा कागज एक दिन महाकाव्य बन जाता है -रचियता भी वही बनकर दुसरो को अपने जीवन के अनुभव से सिंचित करता है -

संघर्ष युक्त जीवन ही अनुभव देता है -जिसने आँख खोली और संघर्ष नहीं देखा तो " वो क्या जाने पीर पराई -जिसके पाँव न पड़ी बिवाई " मगर दूसरे को ज्ञान देने से गुरेज भी नहीं करते -लगता है संसार समाया है इनमे -

पेड़ को सिंचित करने वाला माली खुद ये नहीं समझ पाता है कि जिस पेड़ को परोपकार वश लगाया है एक आंधी के झोके से उसका नीचे स्थित झोपड़ा भी तबाह  कर सकता है -

आप दूसरो में जो खोजते है वो नाश्वर है असली तो आपके अंदर समाया है मगर कहाँ फुर्सत है खुद में खोजने की - समय तो बीत रहा है दुसरो के अवगुण ढूढने में -उतना समय खुद की गलतियों को ढूढने में लगाया होता तो अभी जहाँ है इससे कई गुना आगे होते-पल-पल समय को नाकामियों में जीना और समय को कामयाबी से जीना तो कुछ लोग ही कर पाते है -

आप ने दिल पे पत्थर रख कर मेरी बकवास पढ़ी - लेकिन आपके पास अगर कोई अतिरिक्त ज्ञान है तो मुझे भी अपने ज्ञान -गंगा से अवस्य सिंचित करे -शायद मुझे कुछ और सीखने को मिल जाए -

धन्यवाद -