Sunday, November 30, 2014

नष्ट करती है ये वस्तुए आपकी उत्तेजना को .....!

जो आपकी उत्तेजना को प्राकृतिक रूप से नष्ट करते हैं। ये पदार्थ पुरुषों को कमजोर बना सकते हैं। इसलिए खाने की ऐसी चीजों को पहचान कर अपनी खाने की लिस्ट से बाहर कर दें, जो आपकी ताकत को कम कर सकती है। आइए जानते हैं ऐसी ही चीजों के बारे में-








चिप्स आपकी कामोत्तेजना के साथ-साथ आप के शरीर की कोशिकाओं और उतकों को भी नुकसान पहुंचाती है। चिप्स पुराने तेल में तले होने के साथ-साथ उच्च तापमान पर निर्मित किए जाते हैं। इसीलिए इन्हें खाना सेहतमंद नहीं होता है। 



कॉर्न फ्लेक्स पुरुषों के लिए नुकसानदायक होता है। इसके अधिक सेवन से सेक्स लाइफ पर बुरा प्रभाव पड़ता है।



चीज में बहुत अधिक फैट होता है। अधिक वसा वाले पुरुषों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन उत्पादों के ज्यादा सेवन से शरीर में जहरीले पदार्थ बनते हैं। साथ ही, ईस्ट्रोजेन, प्रोजेस्ट्रोन और टेस्टोस्ट्रोन जैसे हार्मोन्स के निर्माण में भी रूकावट आती है।



सोयाबीन में फोटोईस्ट्रोजेन होते हैं, जो पुरूष सेक्स हॉर्मोन से प्रतिस्पर्धा करते हैं। इससे पुरूषों में प्रजनन, स्तन विकास और बालों के गिरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।



ज्यादा कॉफी पीना पुरुषों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके अधिक सेवन से शरीर में तनाव उत्पन्न करने वाला हॉर्मोन कॉर्टिसॉल बनने लगता है। कैफीन की अधिक मात्रा से हार्मोन असन्तुलन और तनाव हो सकता है।



सोडा और सुगंधित पेय पदार्थों के सेवन से वजन और मूड में भारी उतार-चढ़ाव हो सकता है। इन पेय पदार्थों से मोटापा, दांतों में छेद, डायबिटीज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही, पुरुषों की सेक्स लाइफ पर भी इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ता है।



वे पुरुष जो बहुत अधिक पैकिंग फूड का सेवन करते हैं, उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि इनकी कोटिंग में कुछ खास किस्म का मेटल इस्तेमाल किया जाता है, जो पुरुषों की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जा सकता है।



खराब क्वालिटी के तेल में बने पदार्थ फ्री रैडिकल उत्पन्न करते हैं, जो कि पुरुषों के शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं।



मिंट भले ही सांस की बदबू दूर करने का सबसे बेहतरीन उपाय है, लेकिन काम वासना पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। मिंट में मेंथोल होता है, जिससे कामोत्तेजना कम होती है। 



शराब पीने के बाद आप अच्छा महसूस कर सकते हैं, लेकिन इससे नींद आती है और आप अपने वातावरण के प्रति कम संवेदनशील हो जाते हैं। शराब से ऐसी रासायनिक क्रिया आरम्भ हो जाती है जो टेस्टोस्ट्रोन के उत्पादन को कम करती है। ऐसा होना पुरुषों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।



जंकफूड की हाइड्रोजन युक्त वसा टेस्टोस्ट्रोन स्तर को कम करती है और पुरुषों में निम्न गुणवत्ता वाले और असमान्य शुक्राणु उत्पन्न करती है।


उपचार और प्रयोग -

Saturday, November 29, 2014

फ‌र्स्ट एड की एक जानकारी........!


* घर में पत्नी खाना बना रही हैं और अचानक उनका हाथ जल जाता है। समझ में नहीं आता कि क्या किया जाए। जल जाना, कहीं चोट लग जाना, नाक से खून बहना या करंट लग जाना। ऐसे छोटे मोटे हादसे किसी के साथ कभी भी हो सकते हैं। कई बार इन मामलों में देर भारी पड़ जाती है। इसलिए फ‌र्स्ट एड की थोड़ी जानकारी होना सभी के लिए जरूरी है।

* क्या है फ‌र्स्ट एड....?

* फ‌र्स्ट एड, वह चिकित्सकीय मदद है जो छोटे-मोटे हादसे के बाद डाक्टरी मदद मिलने तक पीड़ित को उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए घर पर ही कुछ जरूरी दवाओं से भरी फ‌र्स्ट एड किट बनाएं। इसमें रबर के दस्ताने, कैंची, रुई, डेटाल, बैंड एड, एक क्रेप बैंड एड, थर्मामीटर और कुछ दवाएं जैसे कफ सिरप, बुखार ठीक करने की दवा, इनहेलर, सर्दी-खांसी, आंख, सिरदर्द की दवा, विटामिन की गोली, ग्लूकोस और इलेक्ट्राल वगैरह हो।

फर्स्ट एड किट के सामान....

  • * हर आकार की कम से कम दो-तीन बैंडेज और मेडिकल टेप- कटने छिलने या बच्चों के फोडे-फुंसी होने पर इस्तेमाल के लिए।



  • गॉज स्क्वायर्स और रूई का छोटा रोल- बडे घावों को ढककर इंफेक्शन से बचाने के लिए। 



  • लैटेक्स या प्लास्टिक के ग्लव्स- घाव की साफ-सफाई और बैंडेज करने में सहायक।



  • सेवलॉन, डिटॉल की शीशी या दूसरे एंटीबैक्टीरियल सोप- घाव को साफ करके तुरंत लगाने के लिए।




  • छोटी कैंची और छोटी चिमटी- बैंडेज, गॉज, टेप आदि को काटने और शरीर में चुभे कांटे या कांच को निकालने के लिए।




    • सोफरामाइसीन जैसे एंटी बैक्टीरियल या एंटीबॉयोटिक ऑइंटमेंट- जलने, कटने, छिलने आदि में उपचार के लिए।



    • पेरासिटामोल, एवोमिन, कोरेक्स जैसी सामान्य दवाइयां- बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सर्दी-खांसी और पेट दर्द आदि में राहत के लिए।



    • डिजिटल थर्मामीटर।



    • घर में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हार्ट पेशेंट हैं तो उसकी दवाई भी किट में रखें। 


    • *किट को ऎसे रखें....

      • किट मजबूत प्लास्टिक के मध्यम आकार के डिब्बे में बनाएं, ताकि उसमें सारा सामान आसानी से आ सके।

      • किट के ऊपर लाल टेप या लाल स्कैच पेन से क्रॉस का निशान बनाएं, जिससे डिब्बे को देखकर ही उसके फर्स्ट एड किट होने का पता चल सके।

      • किट के ऊपर अपने डॉक्टर, मेडिकल स्टोर, एंबुलेंस का पता और फोन नंबर लिखकर चिपका दें, ताकि जरूरत पडने पर कोई भी डॉक्टर को बुला सके।

      • घर में किट को ऎसी जगह पर रखें, जिससे वह छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रहे, साथ ही इसकी जानकारी सभी को हो ताकि वक्त पडने पर उसका उपयोग किया जा सके।

      • यदि आप लंबे सफर पर जा रहे हैं, तो किट को अपने हैंडबैग में साथ जरूर ले जाएं, जिससे जरूरत के समय यह आपके काम आ सके।

      • सामान्य हादसे और उनके उपचार -
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      • जल जाना:--

      • *जले हुए अंग पर 10 मिनट तक ठंडा पानी डालें। घाव को रुई से अच्छी तरह साफ करें जिससे संक्रमण न हो। घर में बरनाल न हो तो टूथ पेस्ट लगाना भी फायदेमंद होगा।

      • कट जाने या चोट लगने पर :--
      • * घाव को पानी से धोएं जिससे गंदगी साफ हो जाए। साफ रुई को घाव पर रखें जिससे खून निकलना बंद हो जाए। बैंड एड या दवा लगाकर पट्टी करें। ध्यान रखें कि घाव पर पानी न गिरे। इससे घाव पक सकता है। चोट पर हल्दी रखी जा सकती है। इससे न सिर्फ खून बहना बंद होगा, संक्रमण से भी बचाव होगा।

      • नाक से खून बहने पर:--

      • चोट, हाई ब्लड प्रेशर या संक्रमण की वजह से ऐसा हो सकता है। पीड़ित को इस तरह बैठाएं की वह थोड़ा आगे की तरफ झुका रहे। उसे मुंह से सांस लेने को बोलें। नाक का नाजुक हिस्सा दस मिनट तक दबाएं रखें।
      • 4.चक्कर आने पर: कमजोरी या ब्लड प्रेशर कम होने पर ऐसा हो सकता है। पीड़ित को नमक शक्कर का घोल पिलाएं। ग्लूकोज दिया जा सकता है।

      • बेहोश होने पर : --

      • बेहोश व्यक्ति को पीठ के बल इस तरह लिटाएं कि उसके पैर सिर की अपेक्षा ऊंचाई पर रहें। ऐसा करने से खून दिमाग और हृदय की ओर बहेगा। मुंह पर पानी का छींटा मारें।
      • 6.मोच आने पर: प्रभावित हिस्से को ज्यादा हिलाएं नहीं। सूजन के लिए बर्फ को कपड़े में बांध कर सूजन वाले हिस्से पर रखें।

      • करंट लगने पर :--

      • तुरंत बिजली का मेन स्विच बंद करें। पीड़ित व्यक्ति को कंबल में लपेटें। ध्यान दें, ऐसा करते हुए आपने चप्पल पहन रखी हो और पानी से भींगे न हों।

      • कीड़े, सांप, मकड़ी, कुत्तो के काटने पर:--

      • सांप के काटने पर व्यक्ति को लिटाएं, हिलने डुलने न दें। घाव को फौरन साफ पानी से धोएं। जहां सांप ने काटा हो उससे थोड़ा ऊपर कस कर कपड़ा बांधे ताकि जहर शरीर में न फैल सके। मकड़ी या किसी कीड़े के काटने पर बर्फ लगाएं। इससे सूजन नहीं होगी। पंट्टी भूल कर भी न बांधे। कुत्तो को काटने पर घाव को धोएं। फौरन डाक्टर के पास जाएं। यह जरूर जांच कराए कि कुत्तो को रेबीज तो नहीं था।

      • फ‌र्स्ट एड देने के बाद भी यदि पीड़ित की स्थिति बिगड़ रही हो तो फौरन डाक्टर से संपर्क करें।

      • यह हर्गिज न करें--

      • 1.जल जाने पर घी वगैरह कभी मत लगाएं।
      • 2.खून बहने पर ज्यादा देर तक पानी के नीचे घाव को न रखें। इससे खून तो ज्यादा बहता ही है घाव के पकने का खतरा भी हो जाता है।
      • 3.किसी के जहर खा लेने पर उसके मुंह में अंगुली डालकर उलटी कराने की कोशिश न करें। इससे उसकी सांसें रुक सकती हैं।
       

    बबासीर के मस्सों को कैसे नष्ट करें.....!


    * नीम के कोमल पत्तियों को घी में भूनकर उसमें थोड़े-से कपूर डालकर टिकिया बना लें। टिकियों को गुदाद्वार पर बांधने से मस्से नष्ट होते हैं।

    * आधा चम्मच हर्र का चूर्ण गर्म पानी से सुबह-शाम खाने से बादी बवासीर बन्द हो जाती है।

    * नीम के कोमल पत्तियों को घी में भूनकर उसमें थोड़े-से कपूर डालकर टिकिया बना लें। टिकियों को गुदाद्वार पर बांधने से मस्से नष्ट होते हैं।

    * छोटी मक्खी को शहद और गाय का घी बराबर मात्रा में लेकर मस्सों पर लगायें। इस मिश्रण को बवासीर के मस्सों पर लगाने से कुछ सप्ताह में ही मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

    * थूहर के दूध में हल्दी का बारीक चूर्ण मिलाकर उसमें सूत का धागा भिगोकर छाया में सुखा लें। इस धागे से मस्सों को बांधें, मस्से को धागे से बांधने पर 4-5 दिन तक खून निकलता है तथा बाद में मस्से सूख कर गिर जाते हैं। ध्यान रहे- इसका प्रयोग कमजोर रोगी पर न करें।

    * नीलाथोथा 20 ग्राम और अफीम 40 ग्राम लेकर इसे महीन कूट लें। इस चूर्ण को 40 ग्राम सरसों के तेल में मिलाकर पकायें। प्रतिदिन सुबह-शाम उस मिश्रण (पेस्ट) को रूई से मस्सों पर लगाने से मस्से 8 से 10 दिनों में ही सूखकर गिर जाते हैं।

    * मदार का दूध और हल्दी को पीसकर मस्सों पर रखकर लगोट बांधें। इसको लगाने से मस्से सूखकर ठीक हो जाते हैं।

    * कालीमिर्च और स्याहजीरा (काला जीरा) को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनायें। यह चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से बवासीर ठीक होता है तथा बवासीर के मस्से भी ठीक होते हैं।

    * कालीमिर्च 3 ग्राम, पीपल 5 ग्राम, सौंठ 10 ग्राम तथा जिमीकन्द 20 ग्राम को सूखाकर महीन चूर्ण बना लें। उस चूर्ण में 200 ग्राम गुड़ डालकर अच्छी तरह मिला लें। इससे बेर के बराबर गोलियां बनाकर 1-1 गोली दूध या जल के साथ प्रतिदिन दो बार पीने से खूनी तथा बादी दोनों बवासीर ठीक होती है।

    * लौकी के पत्तों को पीसकर बवासीर के मस्सों पर बांधने से कुछ ही दिनों में लाभ दिखना शुरू हो जाता है।

    * लौकी या तुलसी के पत्तों को जल के साथ पीसकर अर्श (बवासीर) के मस्से पर दिन में दो से तीन बार लगाने से पीड़ा व जलन कम होती है तथा मस्से भी नष्ट होते है।

    * नीम की निबौली, कलमीशोरा, रसौत और हरड़ 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर, बारीककर मूली के रस में घोटकर जंगली बेर के बराबर गोलियां बना लें। सुबह-शाम एक-एक गोली ताजे पानी या मट्ठा के साथ खाने से खूनी बवासीर से खून आना पहले ही दिन बन्द हो जाता है और बादी बवासीर एक महीने के प्रयोग से पूरी तरह नष्ट हो जाती है।

    * मूली के रस में नीम की निबौली की गिरी पीसकर कपूर मिलाकर मस्सों पर लेप करने से मस्से सूख जाते हैं।

    * सूखे आंवलों का चूर्ण 20 ग्राम लेकर 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रातभर भिगोकर रखें। दूसरे दिन सुबह उसे हाथों से मलकर छान लें तथा छने हुए पानी में 5 ग्राम चिरचिटा की जड़ का चूर्ण और 50 ग्राम मिश्री मिलाकर पीयें। इसको पीने से बवासीर कुछ दिनों में ही ठीक हो जाते हैं और मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

    * करेले के बीजों को सूखाकर इसका महीन पाउडर बनाकर इसे कपड़े से छान लें। इसके पाउडर में थोड़ी-सी शहद तथा सिरका मिलाकर मलहम बना लें। इस मलहम को लगातार 20 दिन तक मस्सों पर लगाने से मस्से सूख जाते हैं, तथा बवासीर (अर्श) रोग ठीक हो जाता है।

    * बवासीर के मस्सों को दूर करने के लिए 2 प्याज को भूमल (धीमी आग या राख की आग) में सेंककर छिलका उताकर लुगदी बनाकर मस्सों पर बांधने से मस्से तुरन्त नष्ट हो जाते हैं।

    * चाय की पत्तियों को पीसकर मलहम बना लें और इसे गर्म करके मस्सों पर लगायें। इस मलहम को लगाने से मस्से सूखकर गिरने लगते हैं।

    * लगभग 60 ग्राम काले तिल खाकर ऊपर से ठंड़ा पानी पीने से बिना खून वाली बवासीर (वादी बवासीर) ठीक हो जाती है। दही के साथ पीने से खूनी बवासीर भी नष्ट हो जाती है।

    * मेंहदीं के पत्तों को जल के साथ पीसकर गुदाद्वार पर लगाकर लंगोट बांधे। इससे मस्से सूख कर गिर जाते हैं।

    * बैंगन को जला लें। इनकी राख शहद में मिलाकर मरहम बना लें। इसे मस्सों पर लगायें। मस्से सूखकर गिर जायेंगें।

    * हरसिंगार के बीजों को छील लें। 10 ग्राम बीज में 3 ग्राम कालीमिर्च मिलाकर पीसकर गुदा पर लगाने से बादी बवासीर ठीक होती है।

    * छोटी हरड़, पीपल और सहजने की छाल का चूर्ण बनाकर उसी मात्रा में मिश्री मिलाकर खायें। इससे बादी बवासीर ठीक होती है।

    * सांप की केंचुली को जलाकर उसे सरसों के तेल में मिलायें। इस तेल को गुदा पर लगाने से मस्से कटकर गिर जाते हैं।

    * कपूर को आठ गुना अरण्डी के गर्म तेल में मिलाकर मलहम बनाकर रखें। पैखाने के बाद मस्सों को धोकर और पौंछकर मस्सों पर मलहम को लगायें। इसको लगाने से दर्द, जलन, चुभन आदि में आराम रहता है तथा मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

    * फूली हुई और दर्दनाक बवासीर पर हरी या सूखी भांग 10 ग्राम अलसी, 30 ग्राम की पुल्टिश बनाकर बांधने से दर्द और खुजली मिट जाती है।

    * तुलसी के पत्ते का रस निकालकर इसे नीम के तेल में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मस्सों पर लगाएं। मस्सों पर इसको लगाने से मस्से जल्द ठीक हो जाते हैं।

    * चुकन्दर खाने व रस पीते रहने से बवासीर के मस्से समाप्त हो जाते हैं।

    * बवासीर के मस्सों पर करीब एक महीने तक लगातार पपीते का दूध लगाने से मस्से सूख जाते हैं।

    * भूनी फिटकरी और नीलाथोथा 10-10 ग्राम को पीसकर 80 ग्राम गाय के घी में मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम मस्सों पर लगायें। इससे मस्से सूखकर गिर जाते हैं।

    * कनेर की जड़ को ठंड़े पानी के साथ पीसकर शौच जाते समय जो मस्से बाहर निकल जाते है उन पर लगाने से वे मिट जाते हैं।

    Friday, November 28, 2014

    शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय.......!

    तुलसी ---
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    * 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।
    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -











    लहसुन ---
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    * 200 ग्राम लहसुन पीसकर उसमें 60 मिली शहद मिलाकर एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर ढक्कन लगाएं और किसी भी अनाज में 31 दिन के लिए रख दें। 31 दिनों के बाद 10 ग्राम की मात्रा में 40 दिनों तक इसको लें। इससे यौन शक्ति बढ़ती है।
    जायफल ---
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    * एक ग्राम जायफल का चूर्ण प्रातः ताजे जल के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही यौन दुर्बलता दूर होती है।

    * दालचीनी दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य बढ़ता है और यौन दुर्बलता दूर होती है।
    खजूर ---
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    * शीतकाल में सुबह दो-तीन खजूर को घी में भूनकर नियमित खाएं, ऊपर से इलायची- शक्कर डालकर उबला हुआ दूध पीजिए। यह उत्तम यौन शक्तिवर्धक है।
    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -


    अंग में ताकत ही नहीं.......!

    आपके  लिए कुछ लाये है उत्तम योग ....









    पहला प्रयोग:-
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    मुलैठी का चूर्ण- २० ग्राम

    अश्वगंधा का चूर्ण -२० ग्राम

    विधारा चूर्ण- १० ग्राम

    * इन सबको कस कर घोंट लीजिये और फिर इस मिश्रित चूर्ण में से तीन ग्राम मात्रा लेकर सिद्ध मकरध्वज एक रत्ती(१२५ मिलीग्राम) मिला कर मिश्री मिले दूध के साथ दिन में दो बार भोजन के बाद लीजिये।

    दूसरा प्रयोग :-
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    मन्मथ रस एक गोली

    पानी में भिगो कर छिलका निकाला इमली के बीज जिसे चियां या चिंचोका भी कहते हैं १ ग्राम पीसा हुआ .

    गुड दो ग्राम  .

    * तीनो को आपस मिला कर सुबह शाम दूध से लीजिये।

    * औषधि सेवन काल में सम्भोग से परहेज करिये फिर चालीस दिन बाद जब आपकी समस्या हल हो जाए तो आप सामान्य जीवन जियें। कब्जियत न होने दें आवश्यकता होने पर त्रिफ़ला चूर्ण ले लीजियेगा

    कई बीमारियों का इलाज करवाते हुए हम थक जाते हैं -

    लेकिन अच्छे से अच्छे और महंगा से महंगा इलाज करवाने पर भी बीमारी ठीक नहीं हो पाती। ऐसे में हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा आजमाएं हुए सौ-प्रतिशत कारगर नुस्खे ही एक मात्र उम्मीद होते हैं। वाकई में ये नुस्खे काम भी करते हैं इन्हें आयुर्वेद की भाषा में रासायन कहा जाता है। ऐसा ही एक योग है अमृत संजीवनी रासायन योग जिसे आप घर पर ही बनाकर कई जानलेवा बीमारियों का इलाज कर सकते हैं-




    बनाने की विधि और सामग्री :-



    अमृता, खस, नीम की छाल, मछेछी (एक प्रकार का ओषिधि जो तालाब के किनारे उग आती है ), अडूसा, गोबर मुदपर्णी, सेमल, मूसली, शतावर, सभी को अलग-अलग कर एक किलो लेकर जौकुट करके आठ गुने पानी में पकाएं। जब पानी 4 भाग शेष रह जाएं। तब एक किलो गुड़ (बिना मसाले का) अडूसा, शतावरी, आंवला, मछेछी का कल्क प्रत्येक 160-160 ग्राम-काली गाय के घी में धीमी आंच पर पकाएं।सभी सामान उपलब्ध हो जाएगा आयुर्वेद जड़ी बूटी विक्रेता से मगर मछेछी जो ताजा ही चाहिए इसे गाँव का रहने वाला और पहचान रखने वाला ही व्यक्ति आप को उपलब्ध करा सकता है इसके फूल सफ़ेद होते है और इसमें मछली जैसी ही गंध आती  है इसलिए इसको मत्स्यगंधा भी  कहते है -

    घी मात्र जब शेष रह जाए तो छानकर खस, चंदन, त्रिजातक, त्रिकुटा, त्रिफला, त्रिकेशर ( नागकेशर, कमल केशर) वंश लोचन, चोरक, सफेद मुसली, असगंध, पाषाण भेद, धनिया, अडूसा, अनारदाना, खजूर, मुलैठी, दाख, निलोफर, कपूर, शीलाजीत, गंधक सभी दस-दस ग्राम लेकर कपड़छन करके उपरोक्त घी में मिला दें।

    मात्रा:-



    सुबह खाली पेट 10 ग्राम घृत गौ- दूध में डालकर सेवन करें और एक घंटे तक कुछ भी ना खाएं।

    गुण:-


    सभी प्रकार के कैंसर में प्रथम व द्वितीय अवस्था तक के अलग-अलग अनुपान से, पुराना गठिया, घुटनो में सुजन व दर्द, साइटिका, अमाशय में पितरोग, नामर्दी, शुक्राणु का अभाव, शीघ्र पतन, पागलपन, अवसाद, बिगड़ी हुई खांसी, गलगंड, पीलिया, वात रोग, रक्तरोग, रसायन, वाजीकरण, श्वास रोग, गले के रोग, हृदय रोग, पिताशय की पथरी में लाभकारी।

    जो स्त्री रजोदोष से पीडि़त हो, जिस स्त्री के रजनोप्रवृति प्रारंभ ही न हुई हो, जो कष्ट पीडि़त हो तथा जिन स्त्रियों को बार-बार संतान होकर मर जाती हो, उन सभी को राहत मिलेगी। मासिक धर्म शुरू होकर बीच में ही बंद हो गया हो और अनेकों औषधी व मंत्रों के प्रयोग से संतान उत्पन्न न हुई हो उन्हें निश्चित ही संतान होगी।
    उपचार और प्रयोग -

    एक प्रयोग जो 40 दिन में आंखों की सारी कमजोरी दूर कर देगा.....!

    * आंखें हर इंसान को भगवान का दिया एक अनमोल तोहफा है।अगर इनका ख्याल न रखा जाए तो छोटी-सी परेशानी जिंदगी भर की तकलीफ बन सकती है।

    * अधिकांश लोग #आंखों की कमजोरी जैसे आंखों में से पानी आना, आंखों में जलन, लाल होना , आंखों में जाले आना, आंख का चिपकना, आंख की पलकों पर सूजन आना आदि परेशानियों को अनदेखा करते हैं।

    * आगे चलकर ये लापरवाही ज्यादा परेशानी देने वाली साबित हो सकती है। इसीलिए रोजाना सुबह-शाम मुंह में पानी भरकर आंखों पर खूब पानी छिड़के। पर्याप्त नींद लें व साथ ही नीचे लिखे आयुर्वेदिक नुस्खें को भी अपनाएं।

    नुस्खा:-
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    * बादाम गिरी तथा साफ की हुई बढिय़ा सौंफ 100-100 ग्राम लें। सौंफ का महीन चूर्ण करें, इसमें बादाम गिरी को खूब महीन कतरकर तथा सौंफ के उक्त चूर्ण के साथ खूब अच्छी तरह पीसकर रखें। रोज रात इस मिश्रण को 10-10 ग्राम मात्रा में मुख में रखकर धीरे-धीरे खाकर सो जाएं, इसके ऊपर पानी या दूध नहीं पीना है।
                                                                             उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

    Wednesday, November 26, 2014

    बड़े रोगों की रामबाण दवा है गिलोय.?


    गिलोय (टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया) की एक बहुवर्षिय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते कि तरह होते हैं। आयुर्वेद मे इसको कई नामो से जाना जाता है जैसे अमृता, गुडुची, छिन्नरुहा,चक्रांगी, आदि। गिलोय इतनी गुणकारी है कि इसका नाम अमृता रखा गया है।


    आयुर्वेद जगत में यह बुखार की महान औषधि के रूप में मानी गई है। गिलोय की लता जंगलों, खेतों की मेड़ों, पहाड़ों की चट्टानों आदि स्थानों पर सामान्यतया कुण्डलाकार चढ़ती पाई जाती है। यह पत्‍तियां नीम और आम के पेड़ों के आस पास पाई जाती हैं। जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनती है, उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं । इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है।


    आप गिलोय को अपने घर के गमले में लगा कर रस्‍सी से उसकी लता को बांध सकते हैं। इसके बाद इसके रस का प्रयोग कर सकते हैं। गिलोय एक दवाई के रूप में जानी जाती है, जिसका रस पीने से शरीर के अनेको कष्‍ट और बीमारियां दूर हो जाती हैं।


    आजकल  तो बाजार में गिलोय की गोलियां, सीरप, पाउडर आदि भी मिलना शुरु हो चुके हैं। गिलोय शरीर के दोषों (कफ ,वात और पित्) को संतुलित करती है और शरीर का कायाकल्प करने की क्षमता रखती है। गिलोय का उल्टी, बेहोशी, कफ, पीलिया, धातू विकार, सिफलिस, एलर्जी सहित अन्य त्वचा विकार, चर्म रोग, झाइयां, झुर्रियां, कमजोरी, गले के संक्रमण, खाँसी, छींक, विषम ज्वर नाशक, टाइफायड, मलेरिया, डेंगू, पेट कृमि, पेट के रोग, सीने में जकड़न, जोडों में दर्द, रक्त विकार, निम्न रक्तचाप, हृदय दौर्बल्य,(टीबी), लीवर, किडनी, मूत्र रोग, मधुमेह, रक्तशोधक, रोग पतिरोधक, गैस, बुढापा रोकने वाली, खांसी मिटाने वाली, भूख बढ़ाने वाली पाकृतिक औषधि के रूप में खूब प्रयोग होता है।


    वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार इसमें एल्केलाइड गिलोइन नामक कड़वा ग्लूकोसाइड, वसा, अल्कोहल, ग्लिस्टरोल, अम्ल व उडऩशील तेल होते हैं। इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। वायरसों की दुश्मन गिलोय रोग संक्रमण रोकने में सक्षम होती है। यह एक श्रेष्ठ एंटीबयोटिक है।


    टाइफायड, मलेरिया, डेंगू, एलीफेंटिएसिस, विषम ज्वर, उल्टी, बेहोशी, कफ, पीलिया, तिल्ली बढऩा, सिफलिस, एलर्जी सहित अन्य त्वचा विकार, झाइयां, झुर्रियां, कुष्ठ आदि में गिलोय का सेवन आश्चर्यजनक परिणाम देता है। यह शरीर में इंसुलिन उत्पादन क्षमता बढ़ाती है। गिलोय बीमारियों से लडऩे, उन्हें मिटाने और रोगी में शक्ति के संचरण में यह अपनी विशिष्ट भूमिका निभाती है।


    दीर्घायु प्रदान करने वाली अमृत तुल्य गिलोय और गेहूं के ज्वारे के रस के साथ तुलसी के 7 पत्ते तथा नीम के पत्ते खाने से कैंसर जैसे रोग में भी लाभ होता है। गिलोय और पुनर्नवा मिर्गी में लाभप्रद होती है। इसे आवश्यकतानुसार अकेले या अन्य औषधियों के साथ दिया जाता है। अनेक रोगों में इसे पशुओं के रोगों में भी दिया जाता है।


    बुखार को ठीक करने का इसमें अद्भुत गुण है। यह मलेरिया पर अधिक प्रभावी नहीं है लेकिन शरीर की समस्त मेटाबोलिक क्रियाओं को व्यवस्थित करने के साथ सिनकोना चूर्ण या कुनाईनं (कोई भी एंटी मलेरियल) औषधि के साथ देने पर उसके घातक प्रभावों को रोक कर शीघ्र लाभ देती हे।


    गिलोय की जड़ें शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है। यह कैंसर की रोकथाम और उपचार में प्रयोग की जाती है।


    गिलोय उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए, शर्करा का स्तर बनाए रखने में मदद करता है। यह शरीर को दिल से संबंधित बीमारियों से बचाए रखता है।


    गिलोय एक रसायन है, यह रक्तशोधक, ओजवर्धक, ह्रुदयरोग नाशक ,शोधनाशक और लीवर टोनिक भी है। यह पीलिया और जीर्ण ज्वर का नाश करती है अग्नि को तीव्र करती है, वातरक्त और आमवात के लिये तो यह महा विनाशक है।


    गिलोय के 6″ तने को लेकर कुचल ले उसमे 4 -5 पत्तियां तुलसी की मिला ले इसको एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर इसका काढा बनाकर पीजिये। और इसके साथ ही तीन चम्मच एलोवेरा का गूदा पानी में मिला कर नियमित रूप से सेवन करते रहने से जिन्दगी भर कोई भी बीमारी नहीं आती। और इसमें पपीता के 3-4 पत्तो का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है यह चिकन गुनियां डेंगू स्वायन फ्लू और बर्ड फ्लू में रामबाण होता है।


    गैस, जोडों का दर्द ,शरीर का टूटना, असमय बुढापा वात असंतुलित होने का लक्षण हैं। गिलोय का एक चम्मच चूर्ण को घी के साथ लेने से वात संतुलित होता है ।


    गिलोय का चूर्ण शहद के साथ खाने से कफ और सोंठ के साथ आमवात से सम्बंधित बीमारीयां (गठिया) रोग ठीक होता है।


    गिलोय और अश्वगंधा को दूध में पकाकर नियमित खिलाने से बाँझपन से मुक्ति मिलती हैं।


    गिलोय का रस और गेहूं के जवारे का रस लेकर थोड़ा सा पानी मिलाकर इस की एक कप की मात्रा खाली पेट सेवन करने से रक्त कैंसर में फायदा होगा।


    गिलोय और गेहूं के ज्वारे का रस तुलसी और नीम के 5 – 7 पत्ते पीस कर सेवन करने से कैंसर में भी लाभ होता है।


    क्षय (टी .बी .) रोग में गिलोय सत्व, इलायची तथा वंशलोचन को शहद के साथ लेने से लाभ होता है।


    गिलोय और पुनर्नवा का काढ़ा बना कर सेवन करने से कुछ दिनों में मिर्गी रोग में फायदा दिखाई देगा।


    एक चम्मच गिलोय का चूर्ण खाण्ड या गुड के साथ खाने से पित्त की बिमारियों में सुधार आता है और कब्ज दूर होती है।


    गिलोय रस में खाण्ड डालकर पीने से पित्त का बुखार ठीक होता है। और गिलोय का रस शहद में मिलाकर सेवन करने से पित्त का बढ़ना रुकता है।


    प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी में मिलाकर या शहद गुड़ या मिश्री के साथ गिलोय का रस मिलकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।


    गिलोय ज्वर पीडि़तों के लिए अमृत है, गिलोय का सेवन ज्वर के बाद टॉनिक का काम करता है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। शरीर में खून की कमी (एनीमिया) को दूर करता है।


    फटी त्वचा के लिए गिलोय का तेल दूध में मिलाकर गर्म करके ठंडा करें। इस तेल को फटी त्वचा पर लगाए वातरक्त दोष दूर होकर त्वचा कोमल और साफ होती है।


    इसका नियमित प्रयोग सभी प्रकार के बुखार, फ्लू, पेट कृमि, खून की कमी, निम्न रक्तचाप, दिल की कमजोरी, टीबी, मूत्र रोग, एलर्जी, पेट के रोग, मधुमेह, चर्म रोग आदि अनेक बीमारियों से बचाता है। गिलोय भूख भी बढ़ाती है। एक बार में गिलोय की लगभग 20 ग्राम मात्रा ली जा सकती है।


    मुंहासे, फोड़े-फुंसियां और झाइयो पर गिलोय के फलों को पीसकर लगाये मुंहासे, फोड़े-फुंसियां और झाइयां दूर हो जाती है।


    मट्ठे के साथ गिलोय का 1 चम्मच चूर्ण सुबह शाम लेने से बवासीर में लाभ होता है।


    गिलोय का रास शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पेट का दर्द ठीक होता है।


    गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानो में दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है। और गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके इस रस को कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।



    गिलोय की बेल गले में लपेटने से भी पीलिया में लाभ होता है। गिलोय के काढ़े में शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार पीने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। गिलोय के पत्तों को पीसकर एक गिलास मट्ठा में मिलाकर सुबह सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।


    एक चम्मच गिलोय का चूर्ण गुड के साथ खाने से पित्त की बिमारियों में सुधार आता है और कब्ज दूर होती है।


    गिलोय और पुनर्नवा का काढ़ा बना कर सेवन करने से कुछ दिनों में मिर्गी रोग में फायदा दिखाई देगा।


    टी .बी .रोग में गिलोय सत्व, इलायची तथा वंशलोचन को शहद के साथ लेने से लाभ होता है।


    गिलोय और गेहूं के ज्वारे का रस तुलसी और नीम के 5-7 पत्ते पीस कर सेवन करने से कैंसर में भी लाभ होता है।


    गिलोय का रस और गेहूं के जवारे का रस लेकर थोड़ा सा पानी मिलाकर इस की एक कप की मात्रा खाली पेट सेवन करने से रक्त कैंसर में फायदा होगा।


    गिलोय और अश्वगंधा को दूध में पकाकर नियमित खिलाने से बाँझपन से मुक्ति मिलती हैं।


    गिलोय का चूर्ण शहद के साथ खाने से कफ और सोंठ के साथ आमवात से सम्बंधित बीमारीयां (गठिया) रोग ठीक होता है।


    प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी में मिलाकर या शहद या मिश्री के साथ सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।


    डेंगू बुखार का इलाज:-
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    यदि आपके किसी भी जानकार को यह रोग हुआ हो और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो तो चार चीज़ें रोगी को दें :-

    (1) अनार जूस
    (2) गेहूं घास रस
    (3) पपीते के पत्तों का रस
    (4) गिलोय/अमृता/अमरबेल सत्व


    अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है। यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है।


    पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है, पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है। उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में दो से तीन बार दें, एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढ़ने लगेगी।


    गिलोय बेल की डंडी ले, डंडी के छोटे टुकड़े करे। उसे दो गिलास पानी मे उबालें, जब पानी आधा रह जाये तो ठंडा होने पर काढ़े को रोगी को पिलायें। मात्र 45 मिनट बाद cells सेल्स बढ़ने शुरू हो जाएँगे-


    गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में दो तीन बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है। यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर “गिलोय घनवटी” ले आयें, जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में तीन बार दें। यदि बुखार एक दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें।


    यदि रोगी बार-बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा निम्बू मिलाकर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी। यदि रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है, तब भी यह (उक्त) चीज़ें रोगी की बिना किसी डर के दी जा सकती हैं। डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है और रोग जल्दी ख़त्म होता है।

    रोगी के खान पान का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि बिना खान पान कोई दवाई असर नहीं करती।

    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

    Tuesday, November 25, 2014

    सौंदर्य के लिये फायदेमंद दही......!


    * अगर आपको अपनी उम्र छुपानी हो तो अपने चेहरे को एकदम दमकता हुआ सा बना लें। कॉस्मेटिक्स से आपके चेहरे की रंगत कुछ समय के लिए बरकरार रह सकती है लेकिन घर में मौजूद प्राकृतिक दही को चेहरे पर लगाने से उसकी रंगत हमेशा बरकरार बनी रहेगी। त्वचा की रंगत निखारने में दही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। दही खाना ना केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि इसे शरीर पर उबटन या किसी फेस पैक में मिला कर भी लगाया जा सकता है। तो ऐसे में चलिये जानते हैं दही का त्‍वचा पर निखार किस प्रकार से होता है।
    दही के गुण-
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    रूखी त्‍वचा के लिये दही....
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    * यदि आपकी त्वचा रूखी है तो आप आधा कप दही में एक छोटा चम्मच जैतून का तेल तथा एक छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाकर गुनगुने पानी से चेहरा धोने से त्वचा का रूखापन समाप्त हो जाता है।
    रंग साफ करे....
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    * दही को आप किसी फेस पैक या फल के साथ मिला कर लगा सकती हैं या फिर ऐसे ही दही को त्वचा पर लगाकर त्वचा को गुनगुने पानी से धोने से आपकी त्वचा नर्म व मुलायम होती है। फलों व सब्जियों का पैक- एक कटोरी दही में आधी कटोरी गाजर, ककड़ी, पपीता आदि मौसमी फलों का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से आपकी त्वचा में निखार आएगा। आप चाहे तो मौसमी सब्जियों के रस को भी दही में मिलाकर पैक तैयार कर सकते हैं।
    मुंहासे से मुक्‍ती दिलाए....
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    * दही में एंटी बैक्‍टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। पिंपल से छुटकारा पाने के लिये दही को सीधे चेहरे पर लगाएं और इसे 30 मिनट के बाद धो लें।
    झुर्रियां मिटाए....
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    * अगर उम्र से पहले ही झुर्रियों ने अपना प्रकोप फैलाना शुरु कर दिया है तो इनकी रफतार को धीमा कर दें। झुर्रियों को प्राकृतिक तरीके से कम करें जिसके लिये दही का फेस मास्‍क लगाएं। इसमें मौजूद लैक्‍टिक एसिड मृत्‍य कोशिकाओं को दूर कर के पोर्स को टाइट करती हैं।
    * इस प्रकार गुणकारी दही से आपकी त्वचा में नई रंगत व चमक आती है। दही के साथ आप बेसन या चोकर मिलाकर भी चेहरे पर लगा सकती हैं। इस प्रकार दही का एक गुणकारी सौंदर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग कर आप अपनी त्वचा में निखार ला सकती हैं।

    दुर्बलता मिटाने के इन असरदार #टिप्स को अपनाएं.....!

    * किसी भी इंसान की डाइट (भोजन) का हमारे शरीर और मन पर पूरा-पूरा असर पड़ता है। #उचित आहार के अभाव में न सिर्फ शरीर कमजोर हो सकता है बल्कि दूसरी शारीरिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। कहते हैं, जब तन और मन स्वस्थ नहीं होगा, प्रफुल्लित नहीं होगा तो फिर सेक्स के दौरान आप आनंद नहीं उठा पाएंगे।

    * भागदौड़ और तनावपूर्ण जिंदगी में लोग अपने भोजन पर पूरी तरहध्यान नहीं दे पाते, जिसके कारण कई बार बीमारियों का भी शिकार हो जाते हैं। ऐसे में लोगों की सेक्स क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। आखिर ऐसा क्या खाएं जिससे हमारा #आहार संतुलित हो और सेक्स जीवन भी। तो क्या हो आहार जो बढ़ाए सेक्स पॉवर के लिए ......







    संतुलित खाएं, सेक्स पॉवर बढ़ाएं:-

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    * एक जानकारी के मुताबिक विटामिन ई की कमी से पुरुष नपुंसकता और नामर्दी का शिकार हो जाते हैं। विटामिन ई की कमी से स्त्रियों के स्तन भी सिकुड़ जाते हैं, जिससे उनका आकर्षण कम हो जाता है। सी फूड, सब्जियां, अंकुरित अनाज, राजमा, सोयाबीन, अलसी आदि को अपने आहार में शामिल कर इस कमी को पूरा किया जा सकता है।

    नपुंसकता मिटाता है यह आहार:-

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    सूखे मेवे:-

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    बदाम, काजू, किशमिश, दूध, शहर को अपने भोजन में शामिल करिए, इससे आपकी यौन क्षमता पर सकारात्मक असर होगा। शरीर भी शक्तिशाली बनेगा।

    सलाद और सब्जी :- 

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    भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग करें साथ ही लहसुन, प्याज और अदरक का भी उचित मात्रा में उपयोग करें। नियमित रूप से हरी एवं पत्तेदार सब्जियों का उपयुक्त मात्रा में सेवन करें।

    पौष्टिक पदार्थ :- 

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    दूध, मक्खन और घी आदि का भी उचित मात्रा में उपयोग करें। ‍

    और भी है असरदार तरीके:-

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    * वैसे तो मांसाहार से भी बहुत फायदे हैं लेकिन जरूरी नहीं कि आप मांसाहार का सेवन करें, शाकाहार के माध्यम से भी आप अपने शरीर को स्वस्थ और फिट रख सकते हैं। यदि शरीर स्वस्थ है तो यौन संबंधों के दौरान भी आप कमजोर साबित नहीं होंगे। अच्छी सेहत के लिए उचित आहार ही जरूरी नहीं है, इसके साथ ही हमें अपनी दिनचर्या में योग और व्यायाम को भी शामिल करना चाहिए।

    इन चीजों को खाने से आती है यौन दुर्बलता:-

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    * फास्ट फूड, पिज्जा, बर्गर आदि का नियमित सेवन शरीर में फैट्‍स और मोटापा बढ़ाता है। तले-गले और मसालेदार भोजन से भी परहेज करें। इससे सेक्स पॉवर में कमी आती है।

    * यदि अत्यधिक भोजन हानिकारक है तो अत्यधिक मात्रा में डाइटिंग और उपवास भी उतना ही नुकसानदायक है। इससे शरीर में कमजोरी आती है। दिनभर के भोजन में आपको पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी मिलनी चाहिए।

    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

    Sunday, November 23, 2014

    शिलाजीत एक टॉनिक भी है.?

    * यह पत्थर की शिलाओं में ही पैदा होता है इसलिए इसे शिलाजीत कहा जाता है।

    * ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने में सूर्य  की प्रखर किरणों से पवर्त की शिलाओं से लाख की तरह पिघल कर यह बाहर निकल आता है जिसे बाद में इकट्ठा कर लिया जाता है।









     * महर्षि चरक ने कहा कि पृथ्वी पर कोई भी ऐसा रोग नहीं है, जो उचित समय पर, उचित योगों के साथ, विधिपूर्वक शिलाजीत के उपयोग से नष्ट न हो सके। स्वस्थ मनुष्य यदि शिलाजीत का विधिपूर्वक उपयोग करता है, तो उत्तम बल मिलता है। वस्तुतः यह रसायन भी है।

    * आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत की उत्पति शिला, अर्थात पत्थर से मानी गयी है। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की प्रखर किरणों के ताप से पर्वत की चट्टानों के धातु अंश पिघलने से जो एक प्रकार का स्राव होता है, उसे शिलाजतु कहा जाता है। इसी को ही शिलाजीत कहा गया है। शिलाजीत के गुण-धर्मः शिलाजीत कड़वा, कसैला, उष्ण, वीर्य शोषण तथा छेदन करने वाला होता है। शिलाजीत देखने में तारकोल के समान काला और गाढ़ा पदार्थ होता है जो सूखने पर चमकीला हो जाता है। यह जल में घुलनशील है, किंतु एल्कोहोल क्लोरोफॉर्म तथा ईथर में नहीं घुलता।

    * यह चार प्रकार का होता है। रजत, स्वर्ण ,लौह  तथा ताम्र शिलाजीत। प्रत्येक प्रकार की शिलाजीत के गुण अथवा लाभ अलग.अलग हैं। रजत शिलाजीत का स्वाद चरपरा होता है।

    * यह पित्त तथा कफ के विकारों को दूर करता है। स्वर्ण  शिलाजीत मधुर एवं  कसैला और कड़वा होता है जो बात और पित्त जनित व्याधियों का शमन करता है। लौह शिलाजीत कड़वा तथा सौम्य होता है। ताम्र शिलाजीत का स्वाद तीखा होता है। कफ जन्य रोगों के इलाज के लिए यह आदर्श है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। समग्र रूप में शिलाजीत कफए चर्बीए मधुमेह एवं  श्वास  मिर्गी एवं  बवासीर उन्माद एवं  सूजन एवं  कोढ़ एवं पथरी एवं  पेट के कीड़े तथा कई  अन्य प्रकार  रोगों को नष्ट करने में सहायक होता है।

    * यह जरूरी नहीं है कि शिलाजीत का सेवन तभी किया जाए जब कि कोई  बीमारी हो स्वस्थ मनुष्य भी इसका सेवन कर सकता है। इससे शरीर पुष्ट होता है और बल मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार सेवन के लिए मात्रा बारह रत्ती से दो रत्ती के बीच निर्धारित की जानी चाहिए। मात्रा का निर्धारण रोगी की शारीरिक स्थिति उसकी आयु और उसकी पाचन शक्ति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

    *शिलाजीत का सेवन दूध और शहद के साथ सुबह सूयोर्दय से पहले कर लेना चाहिए। इसके ठीक प्रकार पाचन के बाद अर्थात तीन.चार घंटे के बाद ही भोजन करना चाहिए।

    * दिमागी ताकत के लिए प्रतिदिन एक चम्मच मक्खन के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है । इससे दिमागी थकावट नहीं होती।

    * मधुमेह एवं  प्रमेह और मूत्र संबंधी विकारों के निराकरण में शिलाजीत बेहद उपयोगी सिद्ध हुआ है। एक चम्मच शहद एवं  एक चम्मच त्रिफला चूर्ण  के साथ लगभग दो रत्ती शिलाजीत का सेवन प्रमेह रोग को नष्ट कर देता है। इस मिश्रण का सेवन सूर्योदय  से पहले ही करना चाहिए। मधुमेह के इलाज के लिए थोड़ी-.थोड़ी मात्रा में प्रतिदिन लगातार शिलाजीत का सेवन तब तक किया जाना चाहिए जब तक कि लगभग पांच सेर मात्रा रोगी के शरीर में न पहुंच जाए। यह रोगी की स्थिति बहुत हद तक ठीक कर देता है।

    * मूत्रावरोध एवं  पीड़ा जलन और प्रमेह के उपचार के लिए पीपल और छोटी इलायची को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण  बनालें एवं  इस एक चम्मच चूर्ण  के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है। यदि किसी को बार.बार पेशाब आएए रात को भी पेशाब के लिए बार.बार उठना पड़े तथा एक साथ भारी मात्रा में पेशाब आए तो समझ लें कि ये लक्षण बहुमूत्रता के हैं। इस बीमारी को दूर करने के लिए शिलाजीत एवं  बंग भस्म एवं  छोटी इलायची के दाने और वंश लोचन को समान मात्रा में लेकर शहद के साथ मिलाकर दो-.दो रत्ती की गोलियां बनाकर गर्म दूध के साथ इनका सेवन करें। सुबह.शाम इसकी दो-.दो गोलियां लेना ही पयरप्त होता है। साथ ही इससे शरीर सुडौल और शक्तिशाली भी बनता है।

    * जो लोग शीघ्र पतन की समस्या से ग्रसित है उन्हें भी शिलाजीत से लाभ पहुंचता है इसके लिए बीस-.बीस ग्राम शिलाजीत और बंग भस्म में दस ग्राम लौह भस्म और छरू ग्राम अभ्रक  भस्म मिलाकर घोटकर दो-दो रत्ती की गोलियां बना लें। सुबह के समय एक गोली को मिश्री मिले दूध के साथ सेवन आश्चयर्जनक लाभ देता है। शाम को भी इस योग का प्रयोग किया जा सकता है परन्तु शाम को भोजन के दो-तीन घंटे के बाद ही इसका प्रयोग करें। विशेषज्ञों के अनुसार शिलाजीत का प्रयोग करने के पहले वमन एवं विरेचन आदि क्रियाओं को करके शरीर को शुद्ध किया जाना जरूरी है इससे लाभ अधिक होता है। साथ ही इसका सेवन सूयोर्दय से पहले शहद या दूध के साथ करना चाहिए इसका सेवन करने के बाद चावल एवं  दूध या जौ से बनी किसी चीज का सेवन करना चाहिए। शिलाजीत का प्रयोग उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिनके शरीर में पित्त का प्रकोप हो।

    * जिनके शरीर में गर्मी बढ़ी हुई  हो उन्हें भी शिलाजीत से परहेज ही रखना चाहिए।

    * शिलाजीत के सेवन के दौरान मिर्च-मसाले एवं  खटाई एवं  मांस,मछली एवं  अंड़े तथा शराब आदि का प्रयोग वर्जित है साथ ही कब्ज एवं मानसिक शोक तथा तनाव एवं रात में जागना एवं  दिन में सोना तथा लगातार ज्यादा मात्रा में शारीरिक श्रम आदि से भी बचना चाहिए। यदि शिलाजीत का सेवन केवल कुछ दिनों तक सेवन किया जाता है तो इससे कोई  नुकसान नहीं है।

    * स्वप्नदोष से ज्यादातर तो अविवाहित युवक ही पीड़ित पाए जाते हैं पर विवाहित पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं-

    शुद्ध शिलाजीत- 25 ग्राम,

    लौहभस्म- 10 ग्राम,

    केशर- 2 ग्राम,

    अम्बर- 2 ग्राम,

    * इन सबको मिलाकर खरल में खूब घुटाई करके महीन कर लें और दो -दो  रत्ती की गोलियां बना लें। एक-एक  गोली सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से स्वप्न दोष होना तो बंद होता ही है, साथ ही पाचन -शक्ति, स्मरण शक्ति और शारीरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है, इसलिए यह प्रयोग छात्र-छात्राओं के लिए भी उपयोगी है।यदि शीघ्रपतन के रोगी विवाहित पुरुष इसे सेवन करें तो उनकी यह व्याधि नष्ट होती है। शरीर में बल और पुष्टि आती है।खटाई और खट्टे पदार्थों का सेवन बंद करके इन दोनों में से कोई एक नुस्खा कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए।


    * शिलाजीत एक पौष्टिक द्रव्य है। परन्तु राह चलते या पटरी पर बैठे खरीददार से शिलाजीत खरीदने में धोखा हो सकता है इसलिए उसकी जांच करके ही खरीदें जो शिलाजीत पानी में डालते ही तार.तार होकर तली में बैठ जाए वही असली शिलाजीत है। साथ ही सूखने पर उसमें गोमूत्र जैसा गंध आए एवं  रंग काला एवं  वजन हल्का तथा छूने में  चिकनी हो तो समझ लें कि यही असली शिलाजीत है।

    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -


    नारियल के ये है फायदे ....!

    * नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है। ऐसा इसकी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ औषधीय गुणों के कारण कहा जाता है। नारियल में विटामिन, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन और खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। 

    * नारियल कई बीमारियों के इलाज में काम आता है। नारियल में वसा और कॉलेस्ट्रॉल नहीं होता है, इसलिए नारियल मोटापे से भी निजात दिलाने में मदद करता है। 


    आइए जानते हैं नारियल के चमत्कारी गुणों के बारे में:-



    * नकसीर की समस्या कई लोगों को हो सकती है। नाक से खून निकलने पर कच्चे नारियल का पानी का सेवन नियमित रूप से करना फायदेमंद होता है। अगर खाली पेट नारियल का सेवन किया जाए तो खून का बहाव बंद हो जाता है।

    * नारियल खाने से याद्दाश्त बढ़ती है। नारियल की गरी में बादाम, अखरोट एवं मिश्री मिलाकर हर रोज खाने से स्मृति में बढ़ती है। बच्चों को नारियल खिलाना चाहिए, इससे बच्चों का दिमागी विकास होता है।

    *नारियल के पानी में कार्बोहाइड्रेट, मिनरल और क्षार काफी मात्रा में पाया जाता है।

    * इसमें विटामिन और अनेक लाभदायक तत्व मिलते हैं। नारियल के पानी में मैग्नीशियम और कैल्शियम भी होता है। सूखे नारियल में इन तत्वों की मात्रा कम होती है।

    * मौसमी असर के कारण या गलत खान-पान के कारण होने वाले पेट दर्द में नारियल पानी पीने से आराम मिलता है।

    * गर्मी के मौसम में नारियल पानी पीने से गला काफी लंबे समय तक तर रहता है और आपको प्यास नही लगती।

    * डिहाइड्रेशन होने पर और उल्टी की परेशानी होने पर नारियल पानी में स्वादअनुसार नमक डाल कर पीने से आराम मिलता है।

    * नारियल पानी को चेहरे पर रोज लगाने से चेहरे के कील- मुंहासे और उनसे होने वाले दाग-धब्बे ठीक हो जाते हैं।

    * चेचक की बीमारी के बाद चेहरे पर होने वाले चेचक के निशान को नारियल पानी की मदद से दूर किए जा सकते हैं।

    * अगर किसी कारण से गीला नारियल उपलब्ध नहीं है तो आप सूखे नारियल को घिसकर बुरादा बना लें। फिर एक कप पानी में एक चौथाई कप बुरादा भिगो दें। दो घंटे बाद इसे छानकर नारियल का बुरादा निकालकर पीस लें। इसकी चटनी-सी बनाकर भिगोए हुए पानी में घोलकर पी जाए। इस प्रकार इसे प्रतिदिन तीन बार पीने से खांसी, फेफड़ों के रोग और टी.बी. में लाभ होता है।

    * इसके अलावा नारियल के तेल की सिर में मालिश करने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है।

    * नारियल तेल से भी दाग दूर होते हैं। शरीर के किसी भाग के जलने पर प्रतिदिन उस स्थान पर नारियल का तेल लगाने से जलन भी शांत होती है तथा निशान भी नहीं पड़ता है।

    * #नारियल के तेल और कपूर को मिलाकर एग्जिमा वाले स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

    *नारियल के पानी में दूध से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रोल और वसा की मात्रा नहीं है। नारियल पानी में बेहद गुण पाए जाते हैं। इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट और पोटेशियम पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर और दिल की गतिविधियों को दुरुस्त करने में सहयोगी होता है।

    * इसके इस्तेमाल से रक्त स्राव तेज गति से काम करता है और पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है। नारियल का पानी न केवल शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है बल्कि शरीर में मौजूद बहुत से वायरसों से भी लड़ाई करता है। अगर आपको किडनी में पथरी की समस्या है तो यह आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

    * नारियल का पानी लगातार सेवन करने से किडनी में मौजूद पथरी अपने आप खत्म हो जाती है। अगर आपको किडनी से संबंधित अन्य कोई समस्या हो तब भी फौरन एक गिलास नारियल पानी पी लीजिए, मिनटों में निजात मिल जाएगी। नशे को कम करने में भी नारियल पानी बहुत ही प्रभावी है।