Wednesday, December 23, 2015

सदाबहार से मधुमेह रोग से राहत मिलती है

सदाबहार ( सदाफूली ) की तीन -चार कोमल पत्तियाँ चबाकर रस चूसने से मधुमेह रोग से राहत मिलती है| सदाबहार ( सदाफूली ) के पौधे के चार पत्तों को साफ़ धोकर सुबह खाली पेट चबाएं और ऊपर से दो घूंट पानी पी लें| इससे मधुमेह ,मिटता है| यह प्रयोग कम से कम तीन महीने तक करना चाहिए -


आधे कप गरम पानी में सदाबहार ( सदाफूली ) के तीन ताज़े गुलाबी फूल 05 मिनिट तक भिगोकर रखें | उसके बाद फूल निकाल दें और यह पानी सुबह ख़ाली पेट पियें | यह प्रयोग 08 से 10 दिन तक करें | अपनी शुगर की जाँच कराएँ यदि कम आती है तो एक सप्ताह बाद यह प्रयोग पुनः दोहराएँ -




मधुमेह को नियंत्रण करने के कुछ आसन से घरेलू उपाय:-
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  • तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इनसुलिन के लिये सहायक होते है । इसलिए शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते को प्रतिदिन खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें।
  • 10 मिग्रा आंवले के जूस को 2 ग्राम हल्दी के पावडर में मिला लीजिए। इस घोल को दिन में दो बार लीजिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
  • काले जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए अचूक औषधि मानी जाती है। मधुमेह के रोगियों को काले नमक के साथ जामुन खाना चाहिए। इससे खून में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती है।
  • लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें।

गंजापन दूर करने के लिए उपचार

हमारे भोजन में कतिपय ऐसे मिनरल्स पाये जाते हैं जिनका गंजापन विरोधी प्रभाव होता है। सबसे महत्वपूर्ण तत्व जो गंजापन दूर कर सकते हैं वे हैं- जिंक, कापर ,लोह तत्व और सिलिका. जिंक में गंजापन नष्ट करने वाले तत्व पाये जाते हैं। केले, अंजीर,बेंगन ,आलू और स्ट्राबेरी में जिंक की संतोषप्रद मात्रा निहित होती है। कॉपर या ताँबा हमारे इम्युन-सिस्टम को को मजबूत करते हुए बालों की सुरक्षा करता है। रक्त में हीमोग्लोबिन की वृद्धि के लिये कॉपर सहायता करता है। दालें,सोयाबीन और वाल नट आदि में कॉपर तत्व पाया जाता है। लोह तत्व बालों की सुरक्षा और पोषण के लिये आवश्यक है। मटर,गाजर, चिकोरी, ककडी,और पालक में पर्याप्त आयरन होता है। अपने भोजन में इन्हें शामिल करना उचित है। सिलिका तत्व चावल और आम में मौजूद रहता है।अनुवांसिकता के आधार पे होने वाला गंजापन भी एक पर्याप्त कारण है। 


गंजेपन का उपचार
  1. उड़द की दाल को उबाल कर पीस लें। रात को सोते समय इस पिट्ठी का लेप सिर पर कुछ दिनों तक करते रहने से गंजापन समाप्त हो जाता है।
  2. मेथी को पूरी रात भिगो दें और सुबह उसे गाढ़ी दही में मिला कर अपने बालों और जड़ो में लगाएं। बीस मिनट बाद बालों को धो लें इससे रूसी और सिर की त्वचा में जो भी समस्या होगी वह दूर हो जाएगी। मेथी में निकोटिनिक एसिड और प्रोटीन पाया जाता है जो बालों की जड़ो को प्रोषण पहुंचाता है और बालों की ग्रोथ को भी बढ़ाता है। इसके प्रयोग से सूखे और डैमेज बाल भी ठीक हो जाते हैं। 
  3. हरे धनिए का लेप जिस स्थान पर बाल उड़ गए हैं, वहां करने से बाल उगने लगते हैं।
  4. थोड़ी सी मुलैठी को दूध में पीसकर, फिर उसमें चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से गंजेपन की समस्या दूर होती है।
  5. केले का गूदा निकालकर उसे नीँबू के रस में मिलाकर सिर पर लगाने से बालों के उडने की समस्या में लाभ होता है। 
  6. अनार की पती पीसकर पर लगाने से गंजेपन का निवारण होता है। 
  7. प्याज काटकर दो भाग करें। आधे प्याज को सिर पर 5 मिनिट रोज रगडें, बाल आने लगेंगे।

खजूर नर्वस सिस्टम को भी नियंत्रित करता है-

आसानी से उपलब्ध खजूर आपके शरीर के नर्वस-सिस्टम को नियंत्रित करता है -इसमें पोटेशियम प्रचुर-मात्रा में होता है और सोडियम की मात्रा काफी कम होती है -
  1. शोध में यह भी बात सामने आई है कि पोटाशियम स्ट्रोक के खतरे को कम करता है। शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्राल स्तर कम करने में भी खजूर मददगार है। हालांकि डायबिटीज के रोगियों को खजूर से दूर रहना चाहिए।
  2. खजूर कोलेस्ट्राल फ्री होता है। इसमें वसा बहुत ही कम मात्रा में होता है। खजूर में विटामिन्स और मिनरल्स की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। खजूर प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी-वन, बी-टू, बी-थ्री और बी-फाइव का बेहतर स्रोत है। इसमें विटामिन ए-1 और सी भी मौजूद होता है। इसमें मौजूद फाइबर और विभिन्न तरह का एमिनो एसिड पाचन क्रिया दुरूस्त रखता है। 
  3. भागदौड़ भरी जिंदगी अक्सर हमें थका देती है। ऐसे में खजूर बढ़िया एनर्जी बूस्टर है। इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर जैसे ग्लूकोज सुक्रोज और फ्रूकटोज तुरंत एनर्जी देने का काम करते हैं। खजूर के और भी बेहतर फायदे के लिए इसे दूध में मिलाकर ले सकते हैं। यह स्वादिष्ट स्नैक्स है। जो लोग स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूक होते हैं, उनके लिए खजूर बढि़या विकल्प हैं। इसमें कैलरी की मात्रा बहुत कम होती है। 
  4. इसमें उच्च मात्रा में आयरन होता है, जो एनिमिया से लड़ने में मदद करता है। एनिमिया के मरीजों को प्रचुर मात्रा में खजूर खाना चाहिए। 
  5. बच्चों से लेकर बड़े तक दांत की समस्या से परेशान रहते हैं। #खजूर में मौजूद फ्लोराइड दांतों की रक्षा करता है। कब्ज से परेशान लोग इसका सेवन कर कब्ज से छुटकारा पा सकते हैं। ज्यादा फायदे के लिए खजूर को रात में पानी में भिगो दें और सुबह गुनगुने पानी के साथ खा लें। 
  6. मोटापे से परेशान लोग खजूर का सेवन सीमित मात्रा में करें। खजूर वजन बढ़ाने में मदद करता है। जो लोग बहुत ज्यादा पतले हैं उनके लिए खजूर फायदेमंद है। 
  7. खजूर शरीर में जहरीला प्रभाव कम करने में भी मदद करता है। साथ ही एबडामिनल #कैंसर से भी बचाता है और इसे ठीक करने में भी कारगर है। 
  8. नजर कमजोर है तो खजूर का इस्तेमाल कीजिए। यह आई साइट मजबूत करता है। #नाइट ब्लाइंडनेस (रतौंधी) जैसी परेशानी से भी निजात दिलाने में खजूर मददगार है।

आर्थराइटिस और सभी तरह के ज्वाइंट पेन का इलाज है आप घुटने मत बदलिए


दोनों तरह के आर्थराइटिस (Osteoarthritis और Rheumatoid arthritis) मे आप एक दावा का प्रयोग करे जिसका नाम है चूना ...! जी हाँ वो ही चुना जो आप पान मे खाते हो। ये आसानी से आपको पान की सभी दुकानों में मिल जाता है आप इसे गेहूं के दाने के बराबर चूना रोज सुबह खाली पेट एक कप दही मे मिलाके खाना चाहिए अगर बराबर दही न मिल सके तो दाल मे मिलाके ले ले अगर वो भी नही तो पानी मे मिलाके पीना लगातार तिन महीने तक, तो आर्थराइटिस ठीक हो जाती है। ध्यान रहे पानी पिने के समय हमेशा बैठ के पीना चाहिए नही तो ठीक होने मे समय लगेगा। अगर आपके हाथ या पैर के हड्डी मे खट खट आवाज आती हो तो वो भी चुने से ठीक हो जायेगा।

दोनों तरह के आर्थराइटिस के लिए और एक अच्छी दावा है मेथी का दाना। एक छोटा चम्मच मेथी का दाना एक काच की गिलास मे गरम पानी ले के उसमे डालना, फिर उसको रात भर भिगो के रखना। सबेरे उठके पानी सिप- सिप करके पीना और मेथी का दाना चबाके खाना। तीन महीने तक लेने से आर्थराइटिस ठीक हो जाती है। यहाँ भी ध्यान रहे पानी पिने के समय हमेशा बैठ के पीना चाहिए नही तो ठीक होने मे समय लगेगा।

ऐसे आर्थराइटिस के मरीज जो पूरी तरह बिस्तर पकड़ जुके है, चालीस साल से तकलीफ है या तीस साल से तकलीफ है, कोई कहेगा बीस साल से तकलीफ है, और ऐसी हालत हो सकती है के वे दो कदम भी न चल सके, हाथ भी नही हिला सकते है, लेटे रहते है बेड पे, करवट भी नही बदल सकते ऐसी अवस्था हो गयी है ....?

ऐसे रोगियों के लिए एक बहुत अच्छी औषधि है जो इसीके लिए काम आती है। एक पेड़ होता है उसे हिंदी में हरसिंगार कहते है, संस्कृत पे पारिजात कहते है, बंगला में शिउली कहते है , उस पेड़ पर छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और फुल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमे खुसबू बहुत आती है, रात को फूल खिलते है और सुबह जमीन में गिर जाते है ।

आप इस पेड़ के छह सात पत्ते तोड़ के पत्थर में पीस के चटनी बनाइये और एक ग्लास पानी में इतना गरम करो के पानी आधा हो जाये फिर इसको ठंडा करके रोज सुबह खाली पेट पिलाना है जिसको भी बीस तीस या चालीस साल पुराना आर्थराइटिस हो या जोड़ो का दर्द हो। यह उन सबके लिए अमृत की तरह काम करेगा। इसको तीन महिना लगातार देना है अगर पूरी तरह ठीक नही हुआ ...तो फिर 10-15 दिन का गैप देके फिर से तीन महीने देना है।

अधिकतम केस मे जादा से जादा एक से ढेड महीने मे रोगी ठीक हो जाते है। आपको इसको हर रोज नया बना के पीना है। ये औषधि एक्सुसिव है और बहुत स्ट्रोंग औषधि है इसलिए अकेली ही देना चाहिये, इसके साथ कोई भी दूसरी दावा न दे नही तो तकलीफ होगी। इसमें भी ध्यान रहे पानी पिने के समय हमेशा बैठ के पीना चाहिए ....नही तो ठीक होने मे समय लगेगा। अगर पारिजात के पत्ते मिलने में परेशानी हो तो आप इसे नर्सरी से लाये और घर पे लगा ले आप का भला हो तो ये दूसरों के भी काम आएगा क्युकि ये परिजात के पेड को स्वर्ग की एक अनुपम धरोहर थी जो अब लुप्त हो रही है .

घुटने मत बदलिए :-

RA Factor जिनका प्रोब्लेमाटिक है और डॉक्टर कहता है के इसके ठीक होने का कोई चांस नही है। कई बार कार्टिलेज पूरी तरह से ख़तम हो जाती है और डॉक्टर कहते है के अब कोई चांस नही है Knee Joints आपको replace करने हि पड़ेंगे, Hip joints आपको replace करने ही पड़ेंगे। तो जिनके घुटने निकाल के नया लगाने की नौबत आ गयी हो, Hip joints निकालके नया लगाना पड़ रहा हो उन सबके लिए यह औषधि है जिसका नाम है हरसिंगार का काड़ा।

राजीव भाई का कहना है के आप कभी भी Knee Joints को और Hip joints को replace मत कराइए। चाहे कितना भी अच्छा डॉक्टर आये और कितना भी बड़ा गारंटी दे पर कभी भी मत करिये। भगवान की जो बनाई हुई है आपको कोई भी दोबारा बनाके नही दे सकता। आपके पास जो है उसी रिपेयर करके काम चलाइए।

हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री अटलजी ने यह प्रयास किया था, Knee Joints का replace हुआ अमेरिका के एक बहुत बड़े डॉक्टर ने किया पर आज उनकी तकलीफ पहले से जादा है। पहले तो थोडा बहुत चल लेते थे अब चलना बिलकुल बंध हो गया है कुर्सी पे ले जाना पड़ता है। आप सोचिये जब प्रधानमंत्री के साथ यह हो सकता है आप तो आम आदमी है।

कुत्ता काटने पर चिकित्सा - भाई राजीव दीक्षित

अगर घरेलु कुत्ता काटे तो कोई दिक्कत नही है पर पागल कुत्ता कटे तोसमस्या है। सड़क वाला कुत्ता काटले तो आप जानते है नही उसकोइंजेक्शन दिए हुए है या नही, उसने काट लिया तो आप डॉक्टर के पासजायेंगे फिर वो 14 इंजेक्शन लगाएगा वो भी पेट में लगाता है, उससे बहुतदर्द होता है और खर्च भी हो जाता है कम से कम 50000 तक कई बार,गरीब आदमी के पास वो भी नही है।
कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंतामत करिए बिलकुल ठीक होगा वो आदमी बस उसको एक दावा दे दीजिये। दावा का नाम है Hydrophobinum 200 और इसको 10-10 मिनट परजिव में तिन ड्रोप डालना है । कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दावादे दीजिये और भूल जाइये के कोई इंजेक्शन देना है। इस दावा को सूरजकी धुप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है।
रेबिस सिर्फ पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटनेसे रेबिस नही होता। आवारा कुत्तों अगर काट दिया है तो राजीव भाई के अनुसार आप अपना मन का बहम दूर करने के लिए ये दावा दे सकते हैलेकिन उससे कुछ नही होता वो हमारा मन का बहम है जिससे हमपरिसान रहते है, और कुछ डर डॉक्टरों ने बिठा रखा है के इंजेक्शन तोलेना ही पड़ेगा। अपने शरीर में थोड़े बहुत resistance सबके पास हैअगर कुत्ते के काटने से उनके लार ग्रंथी के कुछ वायरस चले भी गये है तो उनको ख़तम करने के लिए हमारे रक्त में काफी कुछ है और वो ख़तम कर हि लेता है । लेकिन क्योंकि मन में भय बिठा दिया है शंका हो जाती है हमको confirm नही होता जबतक 20000-50000 खर्च नही कर लेते येउस समय लिए राजीव भाई ने ये दावा लेने की बात कही है। और इसका एक एक ड्रोप 10-10 मिनट में जीभ पे तीन बार डाल के छोड़ दीजिये । 30मिनट में ये दावा सब काम कर देगा ।
कई बार कुत्ता घर के बच्चों से साथ खेल रहा होता है और गलती से उसका कोई दाँत लग गया तो आप उस जखम में थोडा हल्दी लगा दीजिये पर साबुन से उस जखम को बिलकुल मत धोये नही तो वो पक जायेगा;हल्दी Antibiotic, Antipyretic, Antititetanatic, Antiinflammatory है।

बैंगन क्यों खाए और क्यों न खाए

बैंगन की सब्जी बनाते समय यदि तीन बातों का ध्यान रखिये तो सब्जी आपको फायदा ही करेगी- 

  1. बैंगन की ढेंप (ताज) भी सब्जी में डाला जाये।
  2. सब्जी में तेल भरपूर मात्रा में हो। 
  3. सब्जी में हींग जरूर डाली जाए। साथ ही बैंगन की सब्जी केवल ठंड में खाई जाए अर्थात बैगन खाने का उपयुक्त समय दीपावली से होली तक है। 
कौन बैगन खाए और कौन नहीं -
  1. बुखार से पीड़ित व्यक्ति को बैंगन नहीं खाना चाहिए।
  2. अनिद्रा के रोगी को भी बैंगन नहीं खाना चाहिए।
  3. किसी भी दिमागी बिमारी के रोगी को भी बैंगन नहीं खाना चाहिए। (मानसिक तनाव, उन्माद आदि रोग में )
  4. बवासीर के रोगी को तो कतई बैगन नहीं खाना चाहिए।
  5. त्वचा रोग ,एलर्जी आदि में भी बैगन नहीं खाना चाहिए।
  6. एसिडिटी हो तो बैगन की तरफ देखिये भी नहीं।
  7. गर्भवती महिलायें भी बैगन से परहेज करें।
  8. बैगन की तो कई किस्में पाई जाती हैं लेकिन काले और गोल बैगन जो बीज रहित हों ,सबसे ज्यादा गुणकारी होते हैं। बीज वाले बैगन कभी नहीं खाने चाहिए। ये पित्त बढ़ाते हैं। छोटे छोटे कोमल बैगन पित्त और कफ को दूर करते हैं।
  9. बैगन में विटामिन ए ,बी ,सी ,आयरन, कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन भरपूर पाये जाते हैं।
  10. यदि लीवर और तिल्ली बढ़ गयी हो तो कोमल बैगन आग में भून कर पुराना गुड मिला कर खाएं, सुबह खाली पेट। एक माह लगातार खाए ,लाभ दिखाई देगा।
  11. शरीर में हवा का गोला घूमता हुआ सा महसूस होता हो तो बैगन का सूप हींग और लहसुन मिला कर बनाएं और रोजाना पीयें।
  12. बैगन मूत्रल है। इसकी सब्जी रोजाना खाने से ज्यादा मूत्र होगा और किडनी और मूत्राशय में बनने वाली पथरी गल कर बाहर निकल जाएगी।
  13. अगर आपको खुल कर भूख नहीं लगती है तो बैंगन और टमाटर का सूप बनाकर लगातार २१ दिन जरूर पीयें ,भूख खुल कर लगने लगेगी।
  14. आपको नींद नहीं आती है टोबैगन आग में भूनिये ,छिलका उतारिये। बचे हुए गूदे में शहद मिलाकर शाम के समय खा लीजिये। लगातार २१ दिन खाएं। नींद अच्छी और गहरी आयेगी। रक्तचाप सामान्य रहेगा।
  15. खांसी बहुत ज्यादा परेशान कर रही है तो बैगन को पानी में उबाल कर सूप बनाये फिर इस सूप में हल्दी और मिश्री मिला कर पी जाएँ ,जल्दी आराम मिलेगा।
  16. बैगन की सब्जी हार्ट को भी मजबूती प्रदान करती है।
  17. कब्जियत दूर करने के लिए बैगन और पालक का सूप पीजिये ,सेंधा नमक मिला कर।
  18. आपकी हथेलियाँ और पैर के तलुए पसीने से भीगे रहते हों तो उनपर बैगन का रस मल लीजिये।
  19. बैगन के बीज पेट के कीड़ों को खत्म करते हैं। बीजो को शहद मिलकर खा लीजिये।
  20. बवासीर के मस्सो पर बैगन का ढेप पीस कर लगा दीजिये ,अद्भुत आराम मिलेगा।

तिल्ली में वृद्धि होने पर करे ये उपाय

  1. इस रोग की उत्पत्ति मलेरिया के कारण होती है। मलेरिया रोग में शरीर के रक्त कणों की अत्यधिक हानि होने से तिल्ली पर अधिक ज़ोर पड़ता है। ऐसी स्थिति में जब रक्त कण तिल्ली में एकत्र होते हैं तो तिल्ली बढ़ जाती है।
  2. तिल्ली में वृद्धि होने से पेट के विक़ार, खून में कमी तथा धातु क्षय की शिकायत शुरू हो जाती है।
  3. तिल्ली वृद्धि में स्पर्श से उक्त भाग ठोस और उभरा हुआ दिखाई देता है। इसमें पीड़ा नहीं होती, परंतु यथा समय उपचार न करने पर आमाशय प्रभावित हो जाता है। ऐसे में पेट फूलने लगता है। इसके साथ ही हल्का ज्वर, खांसी, अरुचि, पेट में कब्ज़, वायु प्रकोप, अग्निमांद्य, रक्ताल्पता और धातुक्षय आदि विकार उत्पन्न होने लगते हैं। अधिक लापरवाही से इस रोग के साथ-साथ जलोदर भी हो जाता है।
  4. यह रोग भी मनुष्य को बेचैनी एवं कष्ट प्रदान करता है। शुरू में इस रोग का उपचार करना आसान होता है, परंतु बाद में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

नुस्खे
  1. 1/2 ग्राम नौसादर को गरम पानी के साथ सुबह के वक्त लेने से रोगी को शीघ्र लाभ होता है। 
  2. गिलोय के दो चम्मच रस में 3 ग्राम छोटी पीपल का चूर्ण और एक-दो चम्मच शहद मिलाकर चाटने से तिल्ली का विकार दूर होता है। 
  3. त्रिफला, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, सहिजन की छाल, दारुहल्दी, कुटकी, गिलोय एवं पुनर्नवा के समभाग का काढ़ा बनाकर पी जाएं। 
  4. दो अंजीर को जामुन के सिरके में डुबोकर नित्य प्रात:काल खाएं। तिल्ली का रोग ठीक हो जाएगा। 
  5. प्लीहा वृद्धि (बढ़ी हुई तिल्ली) :- अपराजिता की जड़ बहुत दस्तावर है। इसकी जड़ को दूसरी दस्तावर और मूत्रजनक औषधियों के साथ देने से बढ़ी हुई तिल्ली और जलोदर (पेट में पानी की अधिकता) आदि रोग मिटते हैं तथा मूत्राशय की जलन भी मिटती है।
  6. बड़ी हरड़, सेंधा नमक और पीपल का चूर्ण पुराने गुड़ के साथ खाने से तिल्ली में आराम होता है। 
  7. सेंधा नमक (1/2 ग्राम) और अजवायन का चूर्ण (2 ग्राम) मिलाकर गरम पानी के साथ लेने से तिल्ली की वृद्धि में लाभ होता है।