Saturday, January 31, 2015

छोटे-छोटे कुछ प्रयोग इन्हें भी आजमाए ....!


युवावस्था मे होने वाले सफ़ेद बालो को काला करने का उपाय:-
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जिसे थेलिसिमिया, परनीसियास एनीमिया, सिक़ल सेल एनीमिया, एडिसन डीजीज, क्रोनह डीजीज हो वह यह दवा न ले। जिसे इन बीमारियों के नाम न पता हो वह चिंता न करे क्योंकि ये रोग बहुत कम होते है और जिसे होते हैं उसे पता चल जाता है।


भृंगराज चूर्ण- 100 ग्राम
आमलकी रसायन- 100 ग्राम
मिश्री- 100 ग्राम


भृंगराज चूर्ण पीसा हुआ मिले तो वह ले नहीं तो साबुत को खरीद कर पीस ले।तथा आमलकी रसायन कृष्ण गोपाल आयुर्वेद भवन, गुरुकुल काँगड़ी या दिव्य फार्मेसी का ले।अब आप तीनों को मिला कर रख ले। इस दवा को  1-1 छोटा चम्मच सुबह शाम पानी से या दूध से ले। 6 महीने मे बाल काले हो जाएगे और इससे स्थायी कब्ज भी इससे दूर हो जाती है ये दवा लीवर (यकृत/ जिगर ) की क्रिया को सुधारती है। अम्लपित्त को नष्ट करती है दवा के साथ प्रतिदिन सुबह 1से 3 मिंनट तक शीर्षासन करे। सुबह या दोपहर मे नाक मे 2 बूंद गाय का घी या बादाम रोगन डाले। नाक मे दवाई नहाने से 1 घंटा पहले डाले या नहाने के बाद जब बाल सुख जाए तब डाले। गीले सिर नाक मे दवा न डाले। नाक मे दवा डाल कर 1 घंटे तक ठंडा पानी न पिए।तथा आप सिर पर सरसो या तिल का तेल लगाए।

बच्चों को सर्दी या बुखार हो:-
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दो-तीन तुलसी के पत्ते और छोटा सा टुकड़ा अदरक को सिलबट्टे पर पीस कर मलमल के कपड़े की सहायता से रस निकाल कर 1 चम्मच शहद मिला कर दिन में 2-3 बार देने से सर्दी में आराम मिलता है।


लौंग को पानी की बूंदों की सहायता से रगड़ कर उसका पेस्ट माथे पर और नाभि पर लगाना चाहिए।


एक कप पानी में चार-पाँच तुलसी के पत्ते और एक टुकड़ा अदरक ड़ाल कर उबाल लें पानी की आधी मात्रा रह जाने पर उसमें एक चम्मच गुड़ ड़ाल कर उबाल लें। दिन में दो बार दें। आराम आ जायेगा।


उल्टी:-
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तुलसी के रस में बराबर की मात्रा में शहद मिला कर चाटने से उल्टी बन्द हो जाती है।


2 चम्मच शहद में बराबर मात्रा में प्याज़ का रस मिला कर चाटने से उल्टी बन्द हो जाती है।


दिन में 5-6 बार एक-एक चम्मच पोदीने का रस पीने से उल्टी बन्द हो जाती है।


जब बार-बार मूत्र आये:-
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सुबह-शाम एक-एक गुड़ और तिल से बना लड्ड़ु खाना चाहिए।


शाम के समय काले भुने हुए चने छिल्का सहित खाएं और एक छोटा सा टुकड़ा गुड़ का खाकर पानी पी लें।


दस्त की समस्या:-
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खाना खाने के बाद एक कप लस्सी में एक चुटकी भुना ज़ीरा और काला नमक ड़ाल कर पीएं। दस्त में आराम आयेगा।


अदरक का रस नाभि के आस-पास लगाने से दस्त में आराम मिलता है।


मिश्री और अमरूद खाने से भी आराम मिलता है।


कच्चा पपीता उबाल कर खाने से दस्त में आराम मिलता है।


नाभि के अपने स्थान से खिसक जाने पर:-
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मरीज़ को सीधा लिटाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आंवले का आटा बना कर उसमें अदरक का रस मिलाकर बांध दें और दो घंटों के लिए सीधा ही लेटे रहने दें। दो बार ऐसा करने से नाभि अपने स्थान पर आ जायेगी। दर्द और दस्त जैसे कष्ट भी दूर होंगे। ऐसे समय में मरीज़ को मुंग की दाल वाली खिचड़ी खाने में देनी चाहिए।अदरक और हींग का सेवन भी फायदा करता है।


पेट में वायु की अधिकता:-
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ऐसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए भोजन के बाद 3-4 मोटी इलायची के दाने चबा कर ऊपर से नींबू पानी पीने से पेट हल्का होता है।


सुबह-शाम 1/4 चम्मच त्रिफला का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट नर्म होता है।


अजवायन और काला नमक को समान मात्रा में मिला कर गर्म पानी से पीने से पेट का अफारा ठीक होता है।


पैर में मोच:-
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आक या पान का पत्ता या आम का पत्ते को चिकना कर नमक लगा कर उस स्थान पर बांधने से काफी लाभ होता है।


चोट लगने पर नमक में काले तिल, सूखा नारियल और हल्दी मिला कर पीस कर गरम कर चोट वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है।


घुटनों के दर्द के कुछ उपाय:-
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सुबह खाली पेट तीन-चार अखरोट की गिरियां निकाल कर कुछ दिनों तक खाना चाहिए। इसके नियंत्रित सेवन से घुटनों के दर्द में आराम मिलता है।तथा नारियल की गिरी भी खाई जा सकती है। इससे घुटनों के दर्द में राहत मिलती है।


अस्थमा की समस्या:-
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तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर उनमें पिसी काली मिर्च डालकर खाने के साथ देने से दमा नियंत्रण में रहता है।


गर्म पानी में अजवाइन डालकर स्टीम लेने से भी दमे को नियंत्रित करने में राहत मिलती है।


किड़नी में पथरी की समस्या:-
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तीन हल्की कच्ची भिंड़ी को पतली-पतली लम्बी-लम्बी काट लें। कांच के बर्तन में दो लीटर पानी में कटी हुई भिंड़ी ड़ाल कर रात भर के लिए रख दें। सुबह भिंड़ी को उसी पानी में निचोड़ कर भिंड़ी को निकाल लें। ये सारा पानी दो घंटों के अन्दर-अन्दर पी लें। इससे किड़नी की पथरी से छुटकारा मिलता है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

आपको पता है कि सिगरेट मेँ क्या मिला होता है...?

* आजकुछ बात करते है धूम्रपान (Smoking) छोड़ने की। वैसे तो धूम्रपान की आदत को छोड़ना आसान नही होता, लेकिन यदि आप मेरे लिखे कुछ प्वाइंट्स के आजमाएंगे तो यकीनन आप धूम्रपान की आदत से छुटकारा पा जाएंगे।

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* इसके पहले मै आपको कुछ बताना चाहूंगा। स्कूल और कालेज टाइम मे मैने भी स्मोकिंग के ढेरो रिकार्ड तोड़े थे, हर सिगरेट, बीड़ी और सिगार को ट्राई किया था। ट्राई क्या जी, एक सिगरेट बुझती नही थी और दूसरी जलाने के लिए मन मचलने लगता था। ऐसा कोई ब्रांड नही था जो हमने ट्राई नही किया था। जाहिर है संगत भी वैसी थी। लेकिन आज अगर कोई बगल मे खड़ा होकर सिगरेट पीता है तो धुंए से दिक्कत होती है। तो आइए हम अपने अनुभव से कुछ प्वाइंट बताते है जिससे आप अपनी (अथवा अपने साथियों की) स्मोकिंग छुड़वा सकते है। हो सकता है आप हमारे कुछ अनुभवों से सीख ले सकें, अन्यथा आप इन अनुभवों को दूसरे धूम्रपान करने वालों को बता सकते है।

* आप अपने परिवार की एक ग्रुप फोटो अपने पास जरुर रखें। जब भी आप सिगरेट पीजिए, तो धुंए के आर-पार उस फोटो को देखिए। वैसे भी असली जिंदगी मे यही होता है, सिगरेट आप पीते है, और आपका पूरा परिवार पैसिव स्मोकिंग झेलता है। धुंए के पार फोटो देखने से आपको लगेगा कि आप सिगरेट पी रहे है, लेकिन धुंआ आपका परिवार झेल रहा है।

* यह निश्चय करें कि आप सिगरेट छोड़ना चाहते है। कारण चाहे कोई भी हो, लेकिन बिना आपकी मर्जी के, कोई भी आपसे सिगरेट नही छुड़वा सकता। ये बात आपके अंदर से ही आनी चाहिए, तभी कुछ आगे बात बनेगी।

* आप कभी भी जल्दबाजी या आवेश मे आकर सिगरेट छोड़ने की गलती नही करें। यदि आप तैश मे आकर सिगरेट छोड़ने की कसम खाते है तो यकीनन आपका दिमाग अगले ही पल कसम तोड़ने के बहाने तलाशने लगेगा। इसलिए सिगरेट छोड़ने का फैसला पूरे होशो हवाश, बिना आवेग मे आकर करें।दॄढ निश्चय के बाद दूसरी सबसे जरुरी चीज जो आपको चाहिए होगी, वो है आत्मसंयम। यदि आप अपने ऊपर कंट्रोल नही रख पाएंगे तो सारा किया धरा धुंए मे उड़ जाएगा। इसलिए आत्म संयम और आत्म नियंत्रण बहुत जरुरी है। हो सकता है शुरु- शुरु मे दिक्कत आएं, लेकिन आप कर सकते है।

* आपके पास कम से कम एक किताब तो ऐसी जरुर होनी चाहिए जिसमे सिगरेट पीने के बुरे परिणामो के बारे मे लिखा हो। कोशिश करिएगा कि उस किताब मे कुछ चित्र भी हो। जब भी आपके पास खाली समय हो, उस किताब के पन्ने जरुर पलटिएगा।

* आप जितनी चाहे सिगरेट पीजिएगा, लेकिन अपनी ऐश ट्रे को साफ मत करिएगा, ये आपको याद दिलाती रहेगी कि आपने कितनी सिगरेट पी है। हफ़्ते के हफ़्ते (अथवा हर पंद्रह दिनो में) आप अपनी ऐश ट्रे मे बुझी सिगरेटों की गणना करिएगा, और निश्चय करिएगा कि अगली गणना मे यह संख्या और कम हो। यदि आप अलग अलग जगहों पर सिगरेट पीते है, ध्यान रखिएगा आप बुझी सिगरेट की बट अपने साथ घर ले आएं और घर मे एक गिलास मे सारे बट डालकर रखें, ताकि आपको यह पी हुई सिगरेट की याद दिलाता रहे।
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अब जाने सिगरेट के बारे में :-
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* अमूमन एक नजर मेँ देखने पर हमेँ सिगरेट कागज मेँ लिपटी हुई तम्बाकू से ज्यादा कुछ नहीँ लगेगा, पर सिगरेट बनाने वाली कंपनिया इसके धुएं मेँ फ्लेवर देने के लिए क्या मिलाती हैँ, ये कभी नहीँ बताती, सिगरेट सुलगाने के बाद और भी ज्यादा खतरनाक उत्पाद बनते हैँ।

आप जाने सबकी लिस्ट इस प्रकार है.....

एसीटिक एसिड (सिरका)
अमोनिया (टॉयलेट क्लीनर)
आर्सेनिक (जहर)
ब्यूटेन (एक तरह की ज्वलनशील गैस)
कैडमियम (बैटरी मेँ प्रयुक्त होने वाला तत्व)
कार्बन मोनो ऑक्साइड (कोयले के जलने पर बनने वाली गैस)
मीथेन (सीवर गैस)
निकोटीन (कैँसर कारक)

इसके अलावा कुछ मात्रा मेँ ये तत्व भी बनते हैँ..

हेक्सामाइन
इन्सेक्टीसाइड
पेन्ट
टॉलूईन

आपने देखा तो धूम्रपान त्यागिए क्योँकि एक सिगरेट पीने से आप इतना जहर अपने शरीर मेँ उतार रहे होते हैँ.

****तो मित्रों आप कब सिगरेट छोड रहे है मेरे लिए नहीं अपने और अपने परिवार के लिए ....?
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दुबलेपन से परेसान है तो वजन बढ़ाये -


आपने अकसर लोगों को वजन घटाने या वजन प्रबंधन के बारे में बात करते हुए सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वजन बढ़ाने की बात करते हैं। दरअसल, वे उस वर्ग के लोग हैं जिन्हे या तो भूख बहुत कम लगती है और उनका वजन कम है या फिर जो लोग जरूरत से ज्यादा पतले हैं। वजन बढ़ाने के लिए कई दवाईयां आती हैं, लेकिन वजन बढ़ाने के लिए किसी दवाई का प्रयोग न करके बल्कि प्राक़तिक या आयुर्वेदिक प्रणाली का ही इस्तेमाल करना चाहिए-




वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाने से किसी तरह को कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता।

आयुर्वेद के अनुसार अत्यंत मोटे तथा अत्यंत दुबले शरीर वाले व्यक्तियों को निंदित व्यक्तियों की श्रेणी में माना गया है। वस्तुतः कृशता या दुबलापन एक रोग न होकर मिथ्या आहार-विहार एवं असंयम का परिणाम मात्र है।

दुबलापन रोग होने का सबसे प्रमुख कारण मनुष्य के शरीर में स्थित कुछ कीटाणुओं की रासायनिक क्रिया का प्रभाव होना है जिसकी गति थायरायइड ग्रंथि पर निर्भर करती हैं। यह गले के पास शरीर की गर्मी बढ़ाती है तथा अस्थियों की वृद्धि करने में मदद करती है। यह ग्रंथि जिस मनुष्य में जितनी ही अधिक कमजोर और छोटी होगी, वह मनुष्य उतना ही कमजोर और पतला होता है। ठीक इसके विपरीत जिस मनुष्य में यह ग्रंथि स्वस्थ और मोटी होगी-वह मनुष्य उतना ही सबल और मोटा होगा।

देखा जाए तो 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति का वजन यदि उसके शरीर और उम्र के अनुपात सामान्य से कम है तो वह दुबला व्यक्ति कहलाता है। जो व्यक्ति अधिक दुबला होता है वह किसी भी कार्य को करने में थक जाता है तथा उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे व्यक्ति को कोई भी रोग जैसे- सांस का रोग, क्षय रोग, हृदय रोग, गुर्दें के रोग, टायफाइड, कैंसर बहुत जल्दी हो जाते हैं। ऐसे व्यक्ति को अगर इस प्रकार के रोग होने के लक्षण दिखे तो जल्दी ही इनका उपचार कर लेना चाहिए नहीं तो उसका रोग आसाध्य हो सकता है और उसे ठीक होने में बहुत दिक्कत आ सकती है। अधिक दुबली स्त्री गर्भवती होने के समय में कुपोषण का शिकार हो सकती है

अत्यंत दुबले व्यक्ति के नितम्ब, पेट और ग्रीवा शुष्क होते हैं। अंगुलियों के पर्व मोटे तथा शरीर पर शिराओं का जाल फैला होता है, जो स्पष्ट दिखता है। शरीर पर ऊपरी त्वचा और अस्थियाँ ही शेष दिखाई देती हैं।

इसमें अग्निमांद्य या जठराग्नि का मंद होना ही अतिकृशता का प्रमुख कारण है। अग्नि के मंद होने से व्यक्ति अल्प मात्रा में भोजन करता है, जिससे आहार रस या ‘रस’ धातु का निर्माण भी अल्प मात्रा में होता है। इस कारण आगे बनने वाले अन्य धातु (रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्रधातु) भी पोषणाभाव से अत्यंत अल्प मात्रा में रह जाते हैं, जिसके फलस्वरूप व्यक्ति निरंतर कृश से अतिकृश होता जाता है। इसके अतिरिक्त लंघन, अल्प मात्रा में भोजन तथा रूखे अन्नपान का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से भी शरीर की धातुओं का पोषण नहीं होता।

वजन बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो आपका फिट रहना जरूरी है। आप वजन बढ़ाना चाहते हैं इसका ये अर्थ नहीं कि आप फिजीकली बिल्कुल भी सक्रिय नहीं होंगे। व्यायाम और एक्सरसाइज करना तब भी जरूरी होगा।
वजन बढ़ाने के लिए सबसे बढि़या उपाय है आप हाई कैलोरी का खाना खाएं। उन खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करें जिनमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो। लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि आप जंकफूड भारी मात्रा में खाने लगे। बल्कि आपको हेल्दी और हाई कैलोरी भोजन को प्राथमिकता देनी हैं। अगर आप वजन हेल्दी रूप से बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सुबह का नाश्ता हेवी करना होगा। च्यवनप्राश वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधी है। यह लगभग सभी के लिए आमतौर पर भी हेल्दी रहता है। इससे न सिर्फ शारीरिक उर्जा बढ़ती है बल्कि मेटाबोलिज्म भी मजबूत रहता है। शतावरी कल्पा लेने से न सिर्फ आंखें और मसल्स अच्छी रहती है बल्कि इससे वजन भी बढ़ता है। वसंतकुसुमकर रस शरीर को न सिर्फ आंतरिक उर्जा देता है बल्कि वजन को जल्दी बढ़ाने में भी लाभकारी है।

इसके अन्य कारण ये है :-

* पाचन शक्ति में गड़बड़ी के कारण व्यक्ति अधिक दुबला हो सकता है।
* मानसिक, भावनात्मक तनाव, चिंता की वजह से व्यक्ति दुबला हो सकता है।
* यदि शरीर में हार्मोन्स असंतुलित हो जाए तो व्यक्ति दुबला हो सकता है।
* चयापचयी क्रिया में गड़बड़ी हो जाने के कारण व्यक्ति दुबला हो सकता है।
* बहुत अधिक या बहुत ही कम व्यायाम करने से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है।
* आंतों में टमवोर्म या अन्य प्रकार के कीड़े हो जाने के कारण भी व्यक्ति को दुबलेपन का रोग हो सकता है।
* मधुमेह, क्षय, अनिद्रा, जिगर, पुराने दस्त या कब्ज आदि रोग हो जाने के कारण व्यक्ति को दुबलेपन का रोग हो जाता है।
* शरीर में खून की कमी हो जाने के कारण भी दुबलेपन का रोग हो सकता है।

यह जानना जरूरी है कि आपके बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के हिसाब से यह जानने कि कोशिश करें कि आपकी लंबाई और उम्र के हिसाब से आपका वजन क‌ितना होना चाहिए।  इसका फार्मूला ये है-
बीएमआई = वजन (किलोग्राम) / (ऊंचाई X ऊंचाई (मीटर में))
आमतौर पर 18.5 से 24.9 तक बीएमआई आदर्श स्थिति है इसलिए वजन बढ़ाने के क्रम में ध्यान रखें कि आप इसके बीच में ही रहें।


जाने कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय :-


* डाइट में कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ाएं। अध‌िक कैलोरी वाली डाइट जैसे रोटियां, रेड मीट, राजमा, सब्जियां, मछली, चिकन, ऑलिव्स और केले जैसे फल आदि की मात्रा बढ़ाएं। दिन में कम से कम पांच बार थोड़ी-थोड़ी डाइट लें।

* नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी  का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा।

* भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढाएं। दालों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।बादाम,काजू का नियमित सेवन करें।

* च्यवनप्राश वजन बढाने की और स्वस्थ रहने की मशहूर आयुर्वेदिक औषधि है। सुबह -शाम दूध के साथ सेवन करते रहें।

* आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी  के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है।३-३  ग्राम  दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें। वसंतकुसुमाकर रस भी काफ़ी असरदार  दवा है।

* रोज सुबह ३-४ किलोमीटर  घूमने का नियम बनाएं। ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म  भी ठीक रह्र्गा।और भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये। दांत का काम आंत पर डालना उचित नहीं है। दोनों वक्त शोच निवृत्ति की आदत डालें।

* ५० ग्राम किश मिश रात को पानी में भिगोदे  सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं।  २-३ माह के प्रयोग से वजन बढेगा।किशमिश में अनाज की 99 % कैलोरी पायी जाती है और फाइबर भी बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है। ये शरीर के फैट को हटा के स्वस्थ कैलोरी में परिवर्तित करता है।

* मलाई- मिल्क क्रीम में आवश्यकता से ज्यादा फैटी एसिड होता है। और ज्यादातर खाद्य उत्पादों की तुलना में अधिक कैलोरी की मात्रा होती है। मिल्क क्रीम को पास्ता और सलाद के साथ खाने से वजन तेजी से बढ़ेगा।

* अखरोट में आवश्यक मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में प्रदान करता है। रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से प्राप्त होगा।

* तुरंत वजन बढाना हो तो केला खाइये। रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन तंत्र भी अच्छा रहेगा। केले को दूध में फेट के भी ले सकते है ..

* आलू कार्बोहाइड्रेट और काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है। ये ज्यादा खाने से शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है।

*  नारियल का दूध - यह आहार तेलों का समृद्ध स्रोत है और भोजन के लिए अच्छा तथा स्वादिस्ट जायके के लिए जाना जाता है। नारियल के दूध में भोजन पकाने से खाने में कैलोरी बढ़ेगी। जिससे आपके वजन में वृधि होगी।

* जो लोग शाकाहारी है और नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है। यह सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदत नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है।

* मक्खन में सबसे ज्यादा कैलोरी पाई जाती है। मक्खन खाने के स्वाद को सिर्फ बढ़ाता ही नहीं बल्कि वजन बढ़ाने में भी मदद करता है।

* ब्राउन राइस कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की एक स्वस्थ खुराक का स्रोत है। भूरे रंग के चावल कार्बोहाइड्रेट का भंडार है इसलिए नियमित रूप से इसे खाने से वजन तेजी से हासिल होगा।

* काजू स्वस्थ काया पाने का आसान तरीका है। काजू के तेल में न केवल वजन बढ़ाने बल्कि काजू रोज़ खाने से आपकी त्वचा कोमल और बाल चमकदार दिखने लगेने।

* जैतून के तेल में आवश्यक कैलोरी बहुत बड़ी मात्रा में पाई जाती है। और यह हृदय रोग से लड़ने में भी बहुत मदद करता है।

* अश्वगंघा अवलेह को पानी और दूध से लेने से जल्दी असर करता है और वजन प्रबंधन में भी मदद करता है । इसका चूर्ण दूध, घी या शहद से लेने में भी असरकारक है। द्रकशरिष्ठा को लगातार एक महीने को गर्म और ठंडे पानी में शहद मिलाकर लेने से अच्छा रहता है। इन आयुर्वेदिक औषधियों को लेने से कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा और आप आराम से अपना वजन भी बढा़ सकते हैं।

* मोटापा घटाने एवं बजन कम करने के लिये ये भी आजमा सकते है इस 

प्रयोग को करने से आप एक माह में पाँच किलो तक बजन कम कर 

सकते हैं...



* आप 2चम्मच असली शहद एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर 

सुबह खाली पेट पियें  दोनो टाइम खाना खाने के आधा घँटे बाद आधा 

चम्मच पाचक चूर्ण पानी के साथ लें .




इसे आप बनाये इस प्रकार:- 




छोटी हरड,बहेडा,आँवला,सोंठ,पीपर,कालीमिर्च,कालानमक ये सब 20-

20ग्राम असली हींग दो ग्राम सब कूट पीसकर रख लें पाचक चूर्ण तैयार 

है ये रात का खाना सोने से 2 घंटे पहले अवश्य खालें और रात को सोते 

समय 2 छोटी हरड का चूर्ण थोडे गुनगुने पानी से लें तथा बसा और 

ज्यादा मिर्च मसाले युक्त भोजन न करें-


उपचार और प्रयोग -

Friday, January 30, 2015

मोटी आवाज है बनाये आप सुरीली आवाज .....!

* हर व्यक्ति कद्रदान है मीठी,स्पष्ट लहजे वाली और मन में गहरे उतर जाने वाली आवाज और ये सभी चाहते हैं। यह आपको मिलती भी है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसका असर कम होता जाता है। अगर आप अपनी आवाज पर उम्र का असर नहीं होने देना चाहते है तो कुछ उपाय है जिनको करके पा सकते है सुरीली आवाज ...!
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* आप गले को हमेशा तर रखिये मेरा मतलब पानी तथा नारियल पानी जैसे कुछ पेय पदार्थों से है। आपकी वोकल कॉर्ड्‌स हमेशा अपने आस-पास उपस्थित ग्लैंड्स से निकलने वाले लार जैसे पदार्थ से चिकनी बनी रहती हैं। इस चिकनेपन को बनाए रखने के लिए शरीर को पर्याप्त नम बनाए रखने की जरूरत होती है। तो बस गला तर करते रहिए।

* बहुत ज्यादा मसालेदार, चटपटा तथा चरबीयुक्त भोजन भी गले के लिए खतरनाक हो सकता है। पेट में होने वाली गड़बड़ियों के फलस्वरूप 'एसिड रिफ्लक्स' जैसी दिक्कत पनप सकती है। इससे गला बार-बार चोक होता है व आवाज पर असर पड़ता है।

* रोज कुछ न कुछ बक-बक कीजिए जी हाँ ..रोजाना कुछ देर की गई बातचीत वोकल कॉर्ड्स को एक तरह की कसरत करवाती हैं और इन्हें लंबे समय तक जवान बनाए रखती हैं।

* शॉवर के नीचे नहाते हुए गाना गाने से आपकी 'लैरिंक्स' (कंठ) की मांसपेशियां ताकतवर बनी रहती हैं। साथ ही वॉइस बॉक्स में चिकनापन बना रहता है।

* आप चिल्लाओ मत इससे वोकल कॉर्ड्स को खुलने-बंद होने में परेशानी होगी। अगर ऐसा बार-बार हुआ तो कॉर्ड्स में नोड्यूल्स यानी सेल्यूलोज जैसा जमाव हो सकता है। इससे कंठ की मांसपेशियां जल्दी थकेंगी और आराम की स्थिति में नहीं रहेंगी।

* दांतों की हिफाजत करे  जी हां, जब आप कोई भी दांत खोते हैं तो जबड़े की हड्डी ढीली हो जाती है। और परिणामस्वरूप आपका चेहरा अंदर की ओर धंसने लगता है और अब मुंह की मसल्स बोलने में पहले जैसी मदद नहीं कर पातीं। साथ ही जबान को भी बोलते समय मुंह में गति करने में दिक्कत आती है। इसलिए कोशिश करें कि बेवजह दांतों को नुकसान न पहुंचे।

* थके और ढीले तरीके से खड़े रहने-बैठने से भी आवाज पर असर पड़ता है। इसके कारण पूरी वोकल ट्रेक्ट बदल जाती है।
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करे आप ये उपाय :-
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* 2-2 ग्राम मुलहठी, आँवले और मिश्री का 20 से 50 मिलिलीटर काढ़ा देने से या भोजन के पश्चात् 1 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण में घी डालकर चटाने से लाभ होता है।

* आवाज सुरीली बनाने के लिए 10 ग्राम बहेड़ा की छाल को गोमूत्र में भावित कर (किसी चूर्ण को किसी द्रव्य के साथ मिलाकर सूख जायें तब तक घोंटना = भावित करना) चूसने से आवाज एकदम सुरीली होती है। यह प्रयोग खाँसी में भी लाभदायक है।

* 10-10 ग्राम अदरक व नींबू के रस में एक ग्राम सेंधा नमक मिलाकर दिन में तीन बार धीरे-धीरे पीने से आवाज मधुर होती है।

* आवाज सुरीली करने के लिए घोड़ावज का आधा या 1 ग्राम चूर्ण 2 से 5 ग्राम शहद के साथ लेने से लाभ होता है। यह प्रयोग कफ होने पर भी लाभकारी है।

* जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियाँ बना लें। दो-दो गोली नित्य चार बार चूसें। इससे बैठा गला खुल जाता है। आवाज का भारीपन ठीक हो जाता है। अधिक बोलने-गानेवालों के लिए यह विशेष चमत्कारी प्रयोग है।

* 400 ग्राम शक्कर 400 ग्राम गाय का घी 64 ग्राम बिदारी कंद 128 ग्राम बंस लोचन 128 ग्राम शहद इन सभी को एक मिटटी के पात्र में मिला के रख ले और 25 ग्राम सुबह प्रात काल इसका सेवन करे दो माह आवाज सुरीली हो जायेगी..!
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Thursday, January 29, 2015

शुक्राणु कम -चूने को प्रयोग और गुण देखे -

बिद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अच्छा है जो लम्बाई बढाता है  गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए,दही नही है तो दाल में मिला के खाओ,दाल नही है तो पानी में मिला के पियो - इससे लम्बाई बढने के साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छा होता है ।




जिन बच्चों की बुद्धि कम काम करती है यानी कि मतिमंद बच्चे है उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना जिन बच्चो में बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे ।


अगर किसी भाई के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे; और जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी बहुत अच्छी दवा है ये चूना ।चूना नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है

जैसे किसी को पीलिया हो जाये ये जॉन्डिस कहलाता है  तो उसकी सबसे अच्छी दवा है चूना  गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है ।

बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो भी उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना । हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म बंद  हुआ है उनकी सबसे अच्छी दवा है  गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना ।

ये चूना घुटने का दर्द  को भी ठीक करता है ,कमर का दर्द ठीक करता है ,कंधे का दर्द ठीक करता है.

एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो भी चूने से ठीक होता है । कई बार हमारे रीढ़की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दूरी बढ़ जाती है और उनमे गेप आ जाता है उसे भी ये चूना ही ठीक करता है रीड़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होता है ।अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है ।चूना खाइए सुबह को खाली पेट ।

जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए इसे अनार के रस में खिलाए आप अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फायदे होंगे एक तो माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगा,और दूसरा फायदा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त होगा तीसरा फ़ायदा ये है कि  बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया और अंतिम सबसे बड़ा फायदा ये है कि बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत  ही इंटेलिजेंट और ब्रिलियेंट होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है ।

जिसके भी मुंह में ठंडा -गरम पानी लगता है तो चूना खाओ बिलकुल ठीक हो जाता है .

मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है ।

जब शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए .एनीमिया का सुगम और सस्ता इलाज है . चूना पीते रहो गन्ने के रस में या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में - अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढता है और बहुत जल्दी खून बनता है बस एक कप अनार के  रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ले ।

जो लोग चूने से पान खाते है, वो बहुत होशियार लोग है पर तम्बाकू नही खाना, तम्बाकू ज़हर है और चूना अमृत है .. तो चूना खाइए तम्बाकू मत खाइए और पान खाइए चूने का उसमे कत्था मत लगाइए, कत्था केन्सर करता है,पान में सुपारी मत डालिए सोंठ  डालिए उसमे ,इलाइची डालिए ,लौंग डालिए.केशर डालिए ;ये सब डालिए पान में चूना लगा के पर तम्बाकू नही , सुपारी नही और कत्था नही ।

घुटने में घिसाव आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा खाइए घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे ।

अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।

चूना घी और शहद को बराबर मात्रा में ले कर बिच्छू के काटे गए स्थान पे लगाने से जहर तुरंत ही उतर जाता है .

हमारे राजीव भाई कहते है चूना खाइए पर चूना लगाइए मत किसको भी ये चूना लगाने के लिए नही है खाने के लिए है क्युकि  आजकल हमारे देश में चूना लगाने वाले बहुत है पर ये भगवान ने खाने के लिए दिया है ।

उपरोक्त लेख स्व.भाई राजीव दीक्षित द्वारा -

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Tuesday, January 27, 2015

किले में वीर की एक लात से बन गया तालाब, महाभारत काल में हुआ निर्माण.....!

पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने वाला राजस्थान खुद में कई रोचक तथ्य छुपाए हुए है। यहां पर बने किलों का इतिहास हजारों साल पुराना है। माना जाता है कि महाभारत के पात्र भीम ने यहां करीब 5000 वर्ष पूर्व एक किले का निर्माण करवाया था। उसका नाम था 'चित्तौड़गढ़ का किला'। समुद्र तल से 1338 फीट ऊंचाई पर स्थित 500 फीट ऊंची एक विशाल आकार में, पहाड़ी पर निर्मित यह किला लगभग 3 मील लंबा और आधे मील तक चौड़ा है। 

चित्तौड़गढ़ का किला भारत के सभी किलों में सबसे बड़ा माना जाता है। यह 700 एकड़ में फैला हुआ है। माना जाता है कि पांडव के दूसरे भाई भीम जब संपत्ति की खोज में निकले तो रास्ते में उनकी एक योगी से मुलाकात हुई। उस योगी से भीम ने पारस पत्थर मांगा। इसके बदले में योगी ने एक ऐसे किले की मांग की जिसका निर्माण रातों-रात हुआ हो।

भीम ने अपने बल और भाइयों की सहायता से किले का काम लगभग समाप्त कर ही दिया था, सिर्फ थोड़ा-सा कार्य शेष था। इतना देख योगी के मन में कपट उत्पन्न हो गया। उसने जल्दी सवेरा करने के लिए यति से मुर्गे की आवाज में बांग देने को कहा। जिससे भीम सवेरा समझकर निर्माण कार्य बंद कर दे और उसे पारस पत्थर नहीं देना पड़े। मुर्गे की बांग सुनते ही भीम को क्रोध आया और उसने क्रोध से अपनी एक लात जमीन पर दे मारी। जहां भीम ने लात मारी वहां एक बड़ा सा जलाशय बन गया। आज इसे 'भीमलात' के नाम से जाना जाता है।


चित्तौड़गढ़ का किला भारत के सभी किलों में सबसे बड़ा माना जाता है। यह 700 एकड़ में फैला हुआ है। यह किला 3 मील लंबा और आधे मील तक चौड़ा है। किले के पहाड़ी का घेरा करीब 8 मील का है। इसके चारो तरफ खड़े चट्टान और पहाड़ थे। साथ ही साथ दुर्ग में प्रवेश करने के लिए लगातार सात दरवाजे कुछ अन्तराल पर बनाए गये थे। इन सब कारणों से किले में प्रवेश कर पाना शत्रुओं के लिए बेहद मुश्किल था।



निकट ही महावीर स्वामी का मन्दिर है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार महाराणा कुम्भा के राज्यकाल में ओसवाल महाजन गुणराज ने करवाया थ। हाल ही में जीर्ण-शीर्ण अवस्था प्राप्त इस मंदिर का जीर्णोद्धार पुरातत्व विभाग ने किया है। इस मंदिर में कोई प्रतिमा नहीं है। आगे महादेव का मंदिर आता है। मंदिर में शिवलिंग है तथा उसके पीछे दीवार पर महादेव की विशाल त्रिमूर्ति है, जो देखने में समीधेश्वर मंदिर की प्रतिमा से मिलती है। कहा जाता है कि महादेव की इस विशाल मूर्ति को पाण्डव भीम अपने बाजूओं में बांधे रखते थे। 


यह स्तम्भ वास्तुकला की दृष्टि से अपने आप अनुठा है। इसके प्रत्येक मंजिल पर झरोखा होने से इसके भीतरी भाग में भी प्रकाश रहता है। इसमें भगवानों के विभिन्न रुपों और रामायण तथा महाभारत के पात्रों की सैकड़ों मूर्तियां खुदी हैं। कीर्तिस्तम्भ के ऊपरी मंजिल से दुर्ग एवं निकटवर्ती क्षेत्रों का विहंगम दृश्य दिखता है। बिजली गिरने से एक बार इसके ऊपर की छत्री टूट गई थी, जिसकी महाराणा स्वरुप सिंह ने मरम्मत करायी।





किले के अंत में दीवार के 150 फीट नीचे एक छोटी-सी पहाड़ी (मिट्टी का टीला) दिखाई पड़ती है। यह टीला कृत्रिम है और कहा जाता है कि अकबर ने जब चित्तौड़ पर आक्रमण किया था, तब अधिक उपयुक्त मोर्चा इसी स्थान को माना और उस मगरी पर मिट्टी डलवा कर उसे ऊंचा उठवाया, ताकि किले पर आक्रमण कर सके। प्रत्येक मजदूर को प्रत्येक मिट्टी की टोकरी हेतु एक-एक मोहर दी गई थी।




इस किले में नदी के जल प्रवाह के लिए दस मेहरावें बनी हैं, जिसमें नौ के ऊपर के सिरे नुकीले हैं। यह दुर्ग का प्रथम प्रवेश द्वार है। कहा जाता है कि एक बार भीषण युद्ध में खून की नदी बह निकलने से एक पाड़ा (भैंसा) बहता-बहता यहां तक आ गया था। इसी कारण इस द्वार को पाडन पोल कहा जाता है।
पाडन पोल से थोड़ा उत्तर की तरफ चलने पर दूसरा दरवाजा आता है, जिसे भैरव पोल के रुप में जाना जाता है।

दुर्ग के तृतीय प्रवेश द्वार को हनुमान पोल कहा जाता है। क्योंकि पास ही हनुमान जी का मंदिर है। हनुमान जी की प्रतिमा चमत्कारिक एवं दर्शनीय हैं। हनुमान पोल से कुछ आगे बढ़कर दक्षिण की ओर मुड़ने पर गणेश पोल आता है, जो दुर्ग का चौथा द्वार है। इसके पास ही गणपति जी का मंदिर है। यह दुर्ग का पांचवां द्वार है और छठे द्वार के बिल्कुल पास होने के कारण इसे जोड़ला पोल कहा जाता है। दुर्ग के इस छठे द्वार के पास ही एक छोटा सा लक्ष्मण जी का मंदिर है जिसके कारण इसका नाम लक्ष्मण पोल है। लक्ष्मण पोल से आगे बढ़ने पर एक पश्चिमाभिमुख प्रवेश द्वार मिलता है, जिससे होकर किले के अन्दर प्रवेश कर सकते हैं। यह दरवाजा किला का सातवां तथा अन्तिम प्रवेश द्वार है। इस दरवाजे के बाद चढ़ाई समाप्त हो जाती है।
आभार -देनिक भास्कर 

Monday, January 26, 2015

जुंए और रुसी से परेशान तो करे ये उपचार ....!

जूं एक प्रकार के पैरासाइट होते हैं जो खोपड़ी में बालों के भीतर रहते हैं और सिर का खून चूसते रहते हैं। जूं होने की समस्‍या सबसे ज्‍यादा बच्‍चों में होती है। कई बार बच्‍चे बाहर खेलते हैं और दूसरे बच्‍चों से जूं भर लाते हैं और उन बच्‍चों के साथ रहने वाले लोगों को भी सिर में जूं हो जाते हैं।



* सिर में जूं होने से खुजली बहुत ज्‍यादा पड़ती है और हर समय झुनझुनी सी होती रहती है क्‍योंकि वो खून पीते रहते हैं। बाजार में कई ऐसे कैमिकल मिलते हैं जो दावा करते हैं कि उनसे जूं तुरंत निकल जाते हैं लेकिन ये कैमिकल होते है और आपके बच्‍चे की सिर की नाजुक त्‍वचा पर बुरा असर डाल सकते हैं


* लहसून की गंध बहुत तीखी होती है, अगर इसे पिसकर बालों में लगाया जाएं और घंटे भर बाद धो लिया जाएं, तो सारे जूं मरकर निकल जाते हैं। आप चाहें तो इस पेस्‍ट में नींबू का रस भी मिला सकते हैं।







* सोने से पहले, सफेद सिरका लें और उसके अपने बालों पर लगाएं, ठीक उसी तरह जैसे आप अपने बालों में तेल लगाती हैं। लगाने के बाद आप तौलिया से अपने सिर को कवर कर लें और रात भर लगा रहने दें। सुबह उठकर सिर धो लें। जब आप शैम्‍पू करने के बाद कंघी करेगी, तो सारे जूं अपने आप बाहर आ जाएंगे।





* जूं होने पर जैतून का तेल लगाकर कंघी कर लें। जैतून का तेल सप्‍ताह में तीन बार लगाएं, जिससे आपको जूं नहीं होगें।









* जूं होने पर नमक काफी कारगर सामग्री होती है। पांच चम्‍मच नमक लें और आधा कप सिरका में घोल लें। इस मिश्रण को अपनी खोपड़ी पर लगाएं और शॉवर कैप लगा लें। दो घंटे तक ऐसे ही रहने दें। इसके बाद बालों को धोकर कंघी कर लें। तीन दिन में आपको अच्‍छे रिजल्‍ट मिल जाएंगे।






* पेट्रोलियम जैली में ऐसे गुण होते हैं जो जूं को चिपका लेती है जिससे जूं का दम घुट जाता है और वह निकल जाती हैं। रात में सोने से पहले पेट्रोलियम जैली को लगा लें और रात भर लगा रहने दें। बाद में सुबह कंघा करें, ढ़ेर सारे जूं निकलेगें।

* जैतून के तेल और एल्‍कोहल को मिला लें। इस मिश्रण को अपने सिर पर लगाएं और रात भर लगा रहने दें। इसके बाद, सुबह सिर धो लें। आप चाहें तो नीम का तेल, लौंग का तेल, दालचीनी का तेल आदि प्रकार के तेलों का इस्‍तेमाल भी कर सकते हैं।

* ट्री टी ऑयल एक प्राकृति इनसेक्‍टीसाइड होता है जो जूं को आसानी से बालों से हटा सकता है। इस ऑयल में गरी का तेल मिलाएं और बालों में सिरों पर लगाएं। आधे घंटे तक सिर में लगा रहने दें और बाद में सिर को धुलकर अच्‍छे से कंघी करें।
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* बेकिंग सोडा, जूं निकालने में काफी कारगर होता है। इसमें जैतून का तेल मिला लें और इसे अच्‍छी तरह सिर में लगा लें। रात भर लगा रहने के बाद सुबह धो लें।

* यह उपाय थोड़ा मंहगा है लेकिन बहुत कारगर है। गरी के तेल और सेब के सिरके को बराबर मात्रा में मिला लें और लगा लें। बाद में बालों को अच्‍छी तरह धुल लें और कंघी करें।

* हाईड्रोजन पैरोक्‍साइड और बोरेक्‍स को आपस में मिला लें। इस मिश्रण को बालों में लगाएं और रगडें, बाद में अच्‍छी तरह धो लें।

* डिटॉल एक एंटीसेप्टिक होता है जो जूं को भी दूर कर सकता है। इसे लगाने के बाद आप एक घंटे तक यूं ही रहे और फिर धो लें। गाढ़ा डिटॉल लगाने से अच्‍छा होगा कि आप उसमें हल्‍का सा पानी भी मिला लें, वरना त्‍वचा में जलन पड़ सकती है।
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नमी की कमी के कारण रूसी से निजात पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। परंतु नीचे दिए गए घरेलू उपचार आपकी समस्या को आसान कर सकते हैं:-

नीम सामग्री:-

*  ¼ कप नीम का रस, नारियल का दूध एवं चुकंदर का रस 1 चम्मच नारियल का तेल तरीका: ऊपर दी गई सारी चीजों को मिलाकर एक पैक बनाए तथा इस पैक को बालों में लगाएं। इस पैक को 20 मिनट के लिए अपने बालों में रहने दें और बाद में अपने बालों को हर्बल शैम्पू व कंड़ीशनर से धो लें। बेहतर परिणाम के लिए इस प्रक्रिया को सप्ताह में एक बार दोहराएं


मेथी सामग्री:-

*  2 बड़े चम्मच मेथी के दानें 1 कप पानी एक कप एप्‍पल साइडर वेनिगर तरीका: मेथी के दानों को रात भर पानी में भिगोएं। अगले दिन सुबह इन्हें पीसकर इसमें सेब साइडर सिरके को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को अपने बालों में लगाएं तथा 30 मिनट बाद अपने बालों को किसी सौम्य शैम्पू सो धोएं। यह तरीका खुजली व रूखेपन से राहत दिलाएंगा।

एस्पिरिन सामग्री:-

*  2 एस्पिरिन की गोलियां तरीका: पहले गोलियों को पीसें तथा उन्हें सामान्य शैंपू में मिलाकर 5 मिनट के लिए रहने दें। अब इस गोलियों के मिश्रण वाले शैंपू से अपने बालों को धोएं। अगर गोलियों का चूरा बालों में रह जाए तो बालों को फिर शैंपू करें।
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बेकिंग सोडा सामग्री:-

*  2 चम्मच बेकिंग सोडा पानी की कुछ बूँदें तरीका: बेकिंग सोड़ा में पानी की कुछ बूँदों को मिलाकर एक पेस्ट बनाएं। फिर अपने बालों को गुनगुने पानी से गीला करें तथा इस पेस्ट को 5 मिनट के लिए अपने सर में मलें। बाद में अपने बालों को शैंपू से धोलें।
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रीठा सामग्री: -

* 10-15 रीठा 1 बड़ा चम्मच आमला का पाउडर या आमला का रस 2 से 3 कप पानी तरीका: रात भर रीठा को पानी में भिगोएं। अगले दिन इन्हें उबालकर छान लें। अब इस पानी में आमला के रस को मिलाकर अपने बालों को धोएं। या फिर आमले के पाउडर में छाने हुए पानी को डालकर एक पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को अपने बालों में 30 मिनटों के लिए रहने दें तथा बाद में अपने बालों को शैम्पू से धो लें।

नींबू सामग्री:-

*  4 नींबूओं का रस या 4 नीबूओं के स्लाइस। तरीका: नींबू को काट कर अपने बालों में रगडें तथा इसे 10-15 मिनट के लिए रहने दें। फिर बाद में साफ पानी से बालों को धोएं। इसे सप्ताह में एक बार दोहराएं।
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एलोवेरा जेल सामग्री:-

*  5 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल तरीका: एलोवेरा जेल को नहाने से 30 मिनट पहले अपने बालों में लगाएं। बाद में अपने बालों को शैम्पू करें। जेल को लगाते वक्त आपके बालों में तेल नहीं लगा होना चाहिए। रूखे व घुंघराले बालों वाले लोग अपने बालों को मुलायम बनाने के लिए इस तरीके को आजमा सकते हैं। अतः रूसी से छुटकारा पाने के लिए इन प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं।
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सफ़ेद बालों की समस्या से परेशान है -

हर किसी को बाल काले ही अच्‍छे लगते हैं लेकिन जब यह बिना बुढापे के ही सफेद होने लगें तो दिल घबरा सा जाता है। पर आपको जानना होगा कि बाल सफेद क्‍यों हो जाते हैं वो भी तब जब हमारी खेलने खाने की उम्र होती है।



* जब बालों में मिलेनिन पिगमेंटेशन की कमी हो जाती है तब बाल अपना काला रंग खो देते हैं और सफेद हो जाते हैं।

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* हांलाकि बालों का सफेद होना आज कल आम सी बात हो गई है इसलिये इसके लिये घबराना बिल्‍कुल नहीं चाहिये। आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताएंगे जिसे आजमा कर आपके सफेद हो रहे बाल काले होने शुरु हो जाएगें....!

* बालों का असमय सफेद होना एक बड़ी समस्या बन चुकी है। इसके लिए कई लोग कलर का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कलर बालों को जड़ से कमजोर बना सकता है....!

* आंवले को न सिर्फ डाइट में शामिल करें बल्कि मेंहदी में मिलाकर इसके घोल से बालों की कंडिशनिंग करते रहें। चाहे तो आंवले को बारीक काट लें और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं।

* आमला हो या उसका पाउडर, दोनों ही बालों को काला करने में मददगार होते हैं। आमला का रस अगर बादाम के तेल में मिक्‍स कर के बालों में लगाया जाए तो बाल काले होगें।

* काली मिर्च के दानों को पानी में उबाल कर उस पानी को बाल धोने के बाद सिर में डालें। लंबे समय तक बालों में इस तरह करने से यह असर दिखाती है।

* सफेद हो चुके बालों को अगर आप ब्लैक टी या कॉफी के अर्क से धोएंगें तो आपके सफेद होते बाल दोबारा से काले होने लगेगें। ऐसा आप दो दिन में एक बार जरूर करें। काली चाय को बनाने के लिए  पैन में पानी डालें, उसमें 2 चम्‍मच चाय की पत्‍ती डाल कर खौलाएं और जब यह पानी ठंडा हो जाए तो इसे छान कर बालों में लगाएं। इसे लगाने के बाद बालों में शैंपू न लगाएं वरना असर खत्‍म हो जाएगा।
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* अपनी डाइट में कडी पत्‍ता शामिल करें। इसे आप चटनी के रूप में खा सकते हैं। इसको खाने से बालों का सफेद होना रुक जाएगा। दक्षिण भारतीय महिलाए सबसे जादा कड़ी पत्ते का प्रयोग करती है और उनके बाल असमय सफ़ेद नहीं होते है .

* बालों में एलोवेरा जेल लगाने से भी बालों का झडऩा और #सफेद होना बंद हो जाता है। इसके लिए आप एलोवेरा जेल में नींबू का रस बना कर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को बालों में लगाएं।
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* हिना और दही को बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्ट बना लें और इस पेस्ट को बालों में लगाइये। इस घरेलू उपचार को हफ्ते में एक बार लगाने से ही #बाल काले होने लगते हैं।

* नहाने से कुछ देर पहले अपने बालों में #प्याज का पेस्ट लगायें। इससे आपके #सफेद बाल काले होने शुरू हो ही जाएंगे, बालों में चमक आएगी और साथ ही बालों का गिरना भी रुक जाएगा।

* भृंगराज और अश्वगंधा की जड़ें बालों के लिए वरदान मानी जाती हैं। इनका पेस्ट बना कर नारियल तेल में मिलाकर बालों की जड़ों में एक घंटे के लिए लगाएं। फिर बालों को गुनगुने पानी से अच्छी तरह से धो लें|

* प्रतिदिन देशी गाय का दूध बालों में लगाने से बाल कुदरती तौर पर काले होने लगते हैं। ऐसा हफ्ते में एक दिन करें | गाय का शुद्ध घी से सिर की मालिश करके भी #बालों के सफेद होने की समस्या दूर होगी |


* नहाने से पहले कढ़ी पत्ते को नहाने के पानी में छोड़ दें और एक घंटे के बाद उस पानी से सिर धो लें। या फिर आंवले की तरह कढ़ी पत्ते को भी बारीक काटकर और गर्म नारियल तेल में मिलाकर सिर पर लगाएं। नारियल तेल को कडी पत्‍ता और आमला के साथ गरम करें। इस तेल को लगातार लगाने से बाल मजबूत होगें और उसका पुराना रंग वापस आ जाएगा।


* बालों को सफेद होने से रोकने के लिये बालों और सिर की त्‍वचा पर अम्‍लान का रस लगाएं। इससे बाल ज्‍यादा उगते हैं और वह शाइनी और कोमल होते हैं।

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Saturday, January 24, 2015

माहवारी चक्र की अवधि में बदलाव -

अनियमित माहवारी और देर से माहवारी आने का अर्थ है माहवारी चक्र की अवधि में बदलाव होना। सामान्यतया महिला में मासिक चक्र की अवधि 28 से 30 दिनों तक की होती है। हर महिला के मासिक चक्रों में 8 दिनों का अंतर होता है। लेकिन 8 से 20 दिनों तक के अंतर को अनियमित माहवारी कहा जाता है।



ज्यादातर अनियमित माहवारी के लक्षण होते हैं, जल्दी-जल्दी माहवारी आना, दाग लगना, रक्त के थक्कों का आना। यह समस्या हार्मोन में असंतुलन के कारण हो सकती है और आसानी से ठीक हो जाती है। कुछ महिलाओं के जीवन में बिना कारण ही उन्हें किसी किसी महीने माहवारी नहीं होती। साल में किसी एक महीने में माहवारी का ना आना सामान्य है, लेकिन दो से तीन बार माहवारी में अनियमितता होना सही नहीं, उसका उपचार करने की जरूरत है।

आयुर्वेद के अनुसार महिला की माहवारी में अनियमितता के पीछे सबसे अधिक जिम्मेदार कारक अस्वस्थ खानपान और खाने का ठीक से न पचना है। अगर खाना सही तरीके से नहीं पच पाया तो यह शरीर में मौजूद टॉक्सिंस के उत्पादन को प्रभावित करता है। और यही टॉक्सिंस रक्त कोशिकाओं में मिल जाता है जिसके कारण खून में रुकावट और ठहराव हो जाता है। आयुर्वेद के जरिये पाचन संबंधी इन्हीं विकारों को दूर करके
अनियमित माहवारी को नियमित किया जा सकता है।

करे कुछ ये प्रयोग :-
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पुरानी किशमिश को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे लगभग 200 मिली पानी में रातभर भिगोयें, सुबह इसे उबालकर रख लें। जब यह एक चौथाई
की मात्रा में रह जाए तो छानकर इसका सेवन कीजिए।

तिल है फायदेमंद काला तिल 5 ग्राम लेकर गुड़ में मिलाकर माहवारी शुरू होने से 4 दिन पहले सेवन करें, जब मासिक धर्म शुरू हो जाए तो इसे बंद कर दें, इससे माहवारी न तो देर से आयेगी और न ही अनियमित होगी।

 चौलाई की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीस लीजिये, इसे लगभग 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय खाली पेट माहवारी शुरू होने से लगभग 7 दिनों पहले सेवन कीजिए। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर दीजिए, इससे मासिक धर्म समय पर होगा।

असगंध और खाण्ड को बराबर मात्रा में लेकर इसे बारीक पीस लें, फिर इसे 10 ग्राम लेकर पानी से खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले लें, जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तब इसका सेवन न करें।

रेवन्दचीनी 3 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय खाली पेट माहवारी शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक- धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार दूर हो जाते हैं।

आधा ग्राम कपूरचूरा में मैदा मिलाकर 4 गोलियां बनाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक गोली का सेवन मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 4 दिन पहले करें, मासिक-धर्म शुरू होने के बाद इसका सेवन बंद कर दीजिए, इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

विदारीकन्द का चूर्ण 1 चम्मच और मिश्री 1 चम्मच दोनों को पीसकर 1 चम्मच घी के साथ मिला लीजिए, इसे रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मासिक- धर्म में अधिक खून आना बंद होता है और माहवारी नियमित हो जायेगी।

 आप अनियमित माहवारी की समस्या से अगर जूझ रही हैं तो एक बार चिकित्सक से सलाह अवश्य लीजिए।

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