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Tuesday, December 15, 2015

दाढ़ी के बाल कम है - The hair is short beard

वैसे बिना दाढ़ी वाले चिकने और सपाट चेहरे में भी चुंबकीय आकर्षण होता है, बावजूद इसके कुछ पुरुषों को दाढ़ी से लगाव होता है। बड़ी संख्या में पुरुष अलग-अलग स्टाइल में दाढ़ी रखना पसंद करते हैं और उसे अलग-अलग तरह से उगाते भी हैं। ऐतिहासिक रूप से दाढ़ी को शक्ति का प्रतीक माना गया है। कड़ी और मजबूत दाढ़ी पुरुषों के ताकत से जुड़ी होती है। दाढ़ी मर्दानगी का प्रतीक है और हर पुरुष ऐसी दाढ़ी रखने में सफल नहीं हो पाते हैं-
दाढ़ी के बाल कम है - The hair is short beard

दाढ़ी को बढ़ाना किसी की भी जिंदगी का एक खुशनुमा राज हो सकता है। सारे पुरुषों को दाढ़ी बढ़ाने का आसान तरीका पता नहीं होता है। हालांकि कुछ ऐसे तरीके हैं, जिसे अपनाकर आप दाढ़ी की वृद्धि दर को थोड़ा बढ़ा सकते हैं। दाढ़ी के बढऩे की गति और इसका घनापन आपकी उम्र और जेनेटिक पर निर्भर करेगा।
किसी किसी की दाढ़ी तेजी से बढ़ती है तो किसी की बिल्‍कुल ही नहीं बढ़ती, और किसी की बढ़ती भी है तो चेहरे के कुछ ही भाग पर।सामान्‍य रूप से दाढ़ी बढ़ाने के लिये युवक एक ही नुस्‍खा अपनाते हैं और वह है शेविंग। शेविंग जैसे नुस्‍खे अपना कर युवा वर्ग एक हद तक इस समस्‍या से निजात तो पा जाते हैं मगर चेहरे के अलग अलग हिस्‍सों की दाढ़ी जैसी समस्‍या से निजात नहीं मिल पाती।
हर युवक की यह कामना होती है उसकी दाढ़ी बढ जाये। मगर कभी कभी हारमोनल की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पाता।अगर आप अपनी दाढ़ी को तेजी से बढ़ाना और मजबूत बनाना चाहते हैं तो आपको इसकी ठीक ढंग से देखभाल करनी होगी। दाढ़ी को जल्दी बढ़ाने के लिए जिंदगी की अन्य चीजों की तरह ही इसे भी जरूरी चीजें मुहैया करानी होगी और इसपर भी बराबर ध्यान देना होगा। अगर आप हफ्ते में कम से कम एक बार चेहरे की त्वचा का एक्सफोलिएशन करेंगे तो इससे दाढ़ी को तेजी से बढऩे में मदद मिलेगी। साथ ही आपको कुछ तेल के जरिए चेहरे का मसाज भी करना होगा, ताकि दाढ़ी को जरूरी पोषण मिले और इसे तेजी से बढऩे में मदद मिले।

कुछ ऐसे उपाय है आप इनको करे तो आपकी समस्या का समाधान हो सकता है :-
  1. ज्यदा प्रोटीन वाले भोजन खाना, तनाव न लेना और ज्यादा सोना दाढ़ी को तेजी से बढ़ने में मदद कर सकता है। प्रोटीन शरीर को ऐसे पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है जो ज्यादा बालों को उगाता है और सोना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी समय पौष्टिक तत्व अपना काम करता है। साथ ही दिन में 8 ग्लास पानी पीने से भी घने और स्वस्थ बालों के विकास में मदद मिलेगी। बालों को झड़ने से रोकने के लिए जहां तक हो सके तनावमुक्त रहने की कोशिश करें।
  2. अपने आहार और ब्यूटी प्रोडक्ट में विटामिन बी को शामिल करें। विटामिन बी1, बी6 और बी12 भी बालों को जल्दी बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही रोज बायोटीन का सेवन करें। यह भी बालों और नाखुनों को तेजी से बढ़ाने के लिए जाना जाता है। 
  3. प्राकृतिक रूप से घनी दाढ़ी पाने के लिये शेविंग एक अच्‍छा उपाय है। अगर आपके दाढी के बालों का विकास धीमी रफ्तार से हो रहा है तो बेहतर होगा कि एक सप्‍ताह में तीन बार शेविंग करें। 
  4. उल्‍टी दिशा में शेविंग करना ज्‍यादा असरदार होगा। इस तरह शेविंग करने से आपके बाल की विकास भी तेजी से होगी और आप जल्‍दी घनी दाढ़ी भी पा सकेंगे।अच्‍छा होगा कि आप उपर से नीचे की तरफ या फिर दायें से बायें तरफ शेविंग करें। मगर इस तरह की तकनीक अपनाने से पहले सावधान रहें क्‍योंकि रेजर से आपके स्किन कट भी सकती है।
  5. चेहरे की बाल को बढ़ाने के लिये आंवले का तेल से चेहरे की मालिश करना एक अच्‍छा विकल्‍प है। आंवले की तेल से रोजाना अपने चेहरे की 20 मिनट तक मसाज करें और फिर उसे ठंडे पानी से धुल लें।
  6. आंवले की तेल के साथ सरसो की पत्‍ती को मिलाकर भी मसाज किया जा सकता है। इसके लिये पहले आप सरसो की पत्‍ती का पेस्‍ट बना लें और फिर उसमें एकाद बूंद आंवला तेल मिक्‍स करें। इसके बाद उस पेस्‍ट को दाढ़ी वाले हिस्‍से पर लगायें और 20 मिनट के लिये छोड़ दें। ठंडे पानी से चेहरे को धुल कर उसे साफ कपड़े से साफ करें। ऐसा सप्‍ताह में 3 या 4 बार करने से आप घनी दाढी पा सकते हैं।
  7. दालचीनी के पाउडर में नीबू का रस मिलाकर पेस्‍ट तैयार कर लें। इसे चेहरे पर लगाये और 15 मिनट के लिये छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से चेहरा साफ कर सूती कपड़े से पोछ लें। ऐसा करने से आपके चेहरे की मासूमियत और नमी बनी रहेगी। हफ्ते में दो बार करने से घनी दाढ़ी और मासूमियत दोनों आसनी से पाया जा सकता है।
  8. शेविंग के अलावा ट्रिमिंग के जरिये भी आप घनी दाढ़ी पा सकते हैं। ट्रिमिंग से आपको अनचाहें बालों से छुटकारा भी मिल जायेगा और आप के बालों की विकास भी तेजी से होगी।

Monday, December 7, 2015

पैर के तलवे पर जलन होने का उपचार

पैरों में जलन की समस्या को आमतौर पर छोटी समस्या माना जाता है और कुछ लोग यह भी मान लेते हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाएगी। लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि यह समस्या शरीर के अन्य हिस्सों में भी तकलीफ पैदा कर सकती है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि हमें आने वाली बीमारी का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लग पाता। देखा जाए तो पैरों से संबंधित बहुत सी ऐसी बीमारियां होती हैं, जो लोगों को परेशान करती हैं। ऐसी ही एक परेशानी है पैरों में जलन की समस्या। अक्सर बहुत से लोग इस परेशानी से जूझ रहे होते हैं और इसकी अनदेखी भी कर रहे होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि पैरों में जलन की वजह कुछ और भी हो सकती है।

विटामिन बी, फोलिक एसिड या कैल्शियम की कमी भी इसके कारण हो सकते हैं। यह समस्या सिर्फ एक ही आयु के लोगों में नहीं होती, बल्कि किसी भी आयु में हो सकती है। संतुलित और पौष्टिक आहार लेने की कोशिश तो सभी लोग करते हैं। फिर भी आज की व्यस्त जीवनशैली की वजह से खानपान में कुछ कमी जरूर रह जाती है। शरीर के पोषण में विटमिन बी-12 और विटामिन बी एक ऐसा तत्व है, जिसकी कमी सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह साबित होती है। विटमिन बी-12 हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने और उनकी मरम्मत में सहायता करता है। यह ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और न‌र्व्स के कुछ तत्वों की रचना में भी सहायक होता है। हमारी लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण भी इसी से होता है। यह शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का भी काम करता है।
यह ऐसा विटमिन है, जिसका अवशोषण हमारी आंतों में होता है। वहां लैक्टो बैसिलस (फायदेमंद बैक्टीरिया) मौजूद होते हैं, जो बी-12 के अवशोषण में सहायक होते हैं। हमारे शरीर में विटमिन बी-12 की कमी होने से हाथ-पैरों में झनझनाहट और जलन होती है। याद्दाश्त में कमी, व्यवहार में अस्थिरता, अनावश्यक थकान, डिप्रेशन आदि भी होती है। अगर शरीर में विटमिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाए तो इससे स्पाइनल कॉर्ड के न‌र्व्स नष्ट होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पैरालिसिस तक हो सकता है।
इसलिए शाकाहारी लोगों को अपने खानपान के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए और उन्हें मिल्क प्रोडक्ट्स का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। आम तौर पर किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में इसकी मात्रा 400-500 पिकोग्राम/ मिली लीटर होनी चाहिए।
शाकाहारी लोगों को अपने खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। उन्हें दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन, सोया मिल्क या टोफू का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। नॉन-वेजटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकेन और सी फूड से विटमिन बी-12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है।

क्या हैं इसके कारण
  1. अगर थाइरॉइड हार्मोन का स्तर कम हो तो भी पैरों में जलन की समस्या हो सकती है।
  2. अगर व्यक्ति की रक्त वाहिकाओं में संक्रमण हो, तब भी उसके पैरों में जलन या तेज जलन हो सकती है।
  3. उच्च रक्तचाप के कारण भी पैरों में जलन हो सकती है। उच्च रक्तचाप के कारण रक्त परिसंचरण में परेशानी होती है। इससे त्वचा के रंग में परिवर्तन, पैरों की पल्स रेट में कमी और हाथ-पैरों के तापमान में कमी होती है, जिससे पैरों में जलन की समस्या महसूस हो सकती है।
  4. कुछ लोगों को अचानक ही पैरों में जलन होने लगती है। कई बार यह अधिक बढ़ जाती है। ऐसे लोगों के सही उपचार के लिए विशेषज्ञ पूरी जांच करवाने और सही उपचार की सलाह देते हैं।
  5. गुर्दे से जुड़ी बीमारी होने पर पैरों में जलन होना स्वाभाविक है।
  6. ज्यादातर लोगों में पैरों में जलन का मुख्य कारण डायबिटीज होता है। ऐसे लोगों में इस बीमारी के निदान के लिए किसी अतिरिक्त परीक्षण की जरूरत नहीं पड़ती और उपचार कर रहा डॉक्टर इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण कर लेता है।
  7. दवाओं का दुष्प्रभाव, एचआईवी की दवाएं लेने और कीमोथेरेपी की दवा खाने से भी पैरों में जलन होने लगती है।
  8. पैरों में जलन का एक कारण न्यूरोपैथी बीमारी भी हो सकती है, क्योंकि न्यूरोपैथी का असर सभी नसों, मोटर न्यूरॉन्स आदि पर पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक रूप से सभी अंगों और तंत्रों को प्रभावित कर सकती है। इसमें पैरों में दर्द, जलन, चुभन काफी संवेदनशील तरीके से महसूस होती है।
  9. पैरों में जलन हल्के से लेकर गंभीर और तीव्र या क्रोनिक प्रकृति की हो सकती है। अकसर पैरों में जलन तंत्रिका तंत्र में नुकसान या शिथिलता के कारण होती है।
  10. विटामिन बी12 तंत्रिका तंत्र के कार्यों सहित हमारे शरीर के कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए बी12 झुनझुनी के साथ पैरों में जलन और बाहों में जलन का कारण बन सकता है।
  11. हाई ब्लड प्रेशर के कारण भी पैरों में जलन हो सकती है। उच्च रक्तचाप के कारण रक्त परिसंचरण में परेशानी होती है। इससे त्वचा के रंग में परिवर्तन पैरों की पल्स रेट में कमी और हाथ-पैरों के तापमान में कमी होती है। जिससे पैरों में जलन की समस्या महसूस हो सकती है।
  12. पैरों में जलन कई प्रकार की संक्रामक रोगों का प्रमुख लक्षण हो सकता है, लेकिन यह न्यूरोपैथी के कारण भी हो सकता है। कुछ बीमारियां जैसे कुछ एचआईवी/एड्स, लाइम रोग और ग्यूलियन बैरे में पैरों की समस्याएं शामिल होती है।
  13. ज्यादातर लोगों में पैरों में जलन का मुख्य कारण डायबिटीज होता है। ऐसे लोगों में इस बीमारी के निदान के लिए किसी अतिरिक्त परीक्षण की जरूरत नहीं पड़ती और उपचार कर रहा डॉक्टर इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण कर लेता है।
जांच से न बचें
  1. इलेक्ट्रोमायोग्राफी : ईएमजी टेस्ट के लिए मांसपेशियों में सुई डाली जाती है और इसकी क्रियाओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाती है।
  2. नर्व बायोप्सी : गंभीर परिस्थितियों में यह टेस्ट भी किया जाता है। इसके लिए डॉक्टर नर्व टिशू का एक टुकड़ा निकालकर माइक्रोस्कोप से उसका पूरी तरह से परीक्षण करते हैं।
  3. प्रयोगशाला टेस्ट : पैरों में जलन के कारणों का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला में खून, पेशाब और रीढ़ के लिक्विड का परीक्षण किया जाता है। सामान्य ब्लड टेस्ट के माध्यम से विटामिन के स्तरों की भी जांच की जाती है।
पैर के तलवे पर जलन होने का उपचार
  1. करेले के पत्ते पीस कर लेप करने से भी लाभ होता है।
  2. गर्मी के दिनों में जिन लोगों के पैरों में निरंतर जलन होती है उन्हे पैरों में मेहंदी लगाने से लाभ होता है।
  3. जिन्हे हाथ-पैर, तालुओं और शरीर में अक्सर जलन की शिकायत रहती हो उन्हे करीब 5 कच्चे बेल के फलों के गूदे को 250 मिली नारियल तेल में एक सप्ताह तक डुबोए रखना चाहिए और बाद में इसे छानकर जलन देने वाले शारीरिक हिस्सों पर मालिश करनी चाहिए, अति शीघ्र जलन की शिकायत दूर हो जाएगी।
  4. तलवों, हाथ पैरों में जलन हो तो देशी घी मलने से मिट जाती है।
  5. तुकमरिया को भीगोकर पैर के तलुओं में बाँधें। जलन दूर होगी।
  6. दो गिलास गर्म पानी में, एक चम्मच सरसों का तेल मिलाकर दोनों पैर इस पानी में रखें और पांच मिनट बाद धोएं। इससे पैर साफ हो जाएंगे, जलन दूर हो जाएगी।
  7. पैर अथवा हाथ में गोखरू होने पर उसे काटकर उसमें नीले थोथे का चूर्ण भर दें अथवा उबलते तेल का पोता रखने से गोखरू हमेशा के लिए मिट जाता है।
  8. पैरों में जलन होने पर करेले के पत्तों के रस की मालिश करने से लाभ होता है।
  9. मक्खन और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर दो चम्मच मिश्रण रोज चाटें।
  10. लौकी को काटकर इसका गूदा पैर के तलवों पर मलने से जलन दूर होती है।
  11. लौकी या घीया को काटकर इसका गूदा पैर के तलवों पर मलने से जलन दूर होती है।
  12. शरीर में किसी भी भाग या हाथ-पैर में जलन हो तो तरबूज के छिलके के सफेद भाग में कपूर और चंदन मिलकर लेप करें। जलन से शांति मिलेगी।
  13. शाकाहारी लोगों को अपने खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। उन्हें दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन, सोया मिल्क या टोफू का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। मांसाहारी लोगों को अंडे, मछली, रेड मीट, चिकन और सी फूड से विटामिन बी12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है।
  14. सरसों का तेल एक कुदरती औषधि होता है, जो पैरों की जलन को दूर करने में मदद करता है। एक कटोरी में दो चम्मच सरसों का तेल लें। अब इसमें दो चम्मच ठंडा पानी या बर्फ का एक टुकड़ा डाल कर अच्छे से मिलाएं। अब इससे अपने पैरों के तलवों की मसाज करें। सप्ताह में दो बार ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा।
  15. सिरका भी पैरों की जलन से छुटकारा दिलाता है। एक गिलास गर्म पानी में दो बड़े चम्मच कच्चा व अनफिल्टर्ड सिरका मिलाकर पिएं। ऐसा करने से आपके पैरों की जलन दूर हो जाएगी।
  16. सुखी धनिया और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण की दो चम्मच मात्रा ठंडे पानी से रोज चार बार लें।
  17. सेंधा नमक पैरों की जलन से तुरंत राहत देने में मदद करता है। मैग्नीशियम सल्फेट से बना सेंधा नमक सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है। इसके लिए एक टब गुनगुने पानी में आधा कप सेंधा नमक मिलाकर अपने पैरों को उसमें डालें। इस मिश्रण में अपने पैरों को 10 से 15 मिनट के लिए भीगा रहने दें। इस उपाय को कुछ दिनों के लिए नियमित रूप से करें। सेंधा नमक के पानी का इस्तेमाल डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
  18. हल्दी में भरपूर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व करक्यूमिन पूरे शरीर में रक्त प्रवाह में सुधार करता है। हल्दी में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पैरों की जलन और दर्द को दूर करने में मदद करता है। हल्दी को दूध के साथ भी ले सकते हैं।
  19. हाथ-पैरों में जलन आम की बौर रगडऩे से मिट जाती है।

Friday, December 4, 2015

रक्‍त साफ करने के लिए कुछ उपाय - Some Tips Blood clean

क्‍या आप हमेशा थकान महसूस करते है क्‍या आपको अक्‍सर फोडा फुंसी और दानों की शिकायत रहती है या पेट में गड़बड़ी रहती है क्‍या आपका वजन कम नहीं होता -




इसका साफ मतलब है कि आपके रक्‍त को शुद्धता की आवश्‍यकता है। दुनिया भर की पद्धतियों में वर्षो से रक्‍त साफ करने के प्रयास होते आ रहे है - इनमें आयुर्वेदिक और चाइनीज दवा प्रणाली भी शामिल है - रक्‍त की शुद्धता का अर्थ होता है कि उसमें स्थित अशुद्धि को दूर करना। रक्‍त में कई प्रकार के गंदे तत्‍व मिल जाते है जिससे शरीर की प्रणाली पर नकारात्‍मक असर पड़ता है। इन पद्धतियों के माध्‍यम से रक्‍त को साफ करने के अलावा उनमें पोषक तत्‍वों को शामिल करने का भी प्रयास किया जाता है ताकि मानव शरीर स्‍वस्‍थवर्धक हो-

रक्‍त की सफाई प्रणाली कैसे काम करती है रक्‍त की सफाई का अर्थ रक्‍त से अशुद्धियों को दूर करना होता है। इसे लिवर में स्थित खून के जरिए साफ करने का प्रयास किया जाता है, दवाईयां दी जाती है जो पेट में पहुंचकर पेट के खून को साफ करती है और खून सर्कुलेशन के जरिए पूरी बॉडी में पहुंच जाता है। और एक समय के बार पूरी बॉडी का खून साफ हो जाता है। अगर शरीर का रक्‍त साफ नहीं होता है तो प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है-

रक्‍त की शुद्धता के बाद, आप इन खाद्य पदार्था का सेवन अवश्‍य करें ताकि आपके शरीर का रक्‍त हमेशा शुद्ध बना रहें। इसे अलावा, सही जीवनशैली भी अपनाएं-

फाइबर युक्‍त भोजन खाएं, जिसमें ब्राउन राइस, सब्जियों और ताजे फलों को शामिल करें। चुकंदर, गाजर, शलजम, मूली, वंदगोभी, ब्रोकली, स्‍पीरयूलिना, क्‍लोरिल्‍ला और समुद्री शैवाल आदि को खाएं। इनमें गजब की रक्‍त साफ करने की क्षमता होती है-

कुछ जड़े भी रक्‍त को शुद्ध करने में सहायक होती है। इसके अलावा, हर्ब और ग्रीन टी भी रक्‍त को प्‍यूरीफाई करने में सहायक होती है-

विटामिन सी का सेवन करें। इससे शरीर में ग्‍लूथाथियोन की मात्रा बढ़ती है और लीवर के रक्‍त की शुद्धता बढ़ती है-

हर दिन में कम से कम दो लीटर पानी अवश्‍य पिएं-

गहरी सांस लें ताकि आपके फेफड़ों में अच्‍छे से ऑक्‍सीजन पहुंचे और रक्‍त का संचार सही से हो। हमेशा सकारात्‍मक भावनाएं रखें-

हर दिन कम से कम 5 मिनट के लिए गर्म पानी में स्‍नान करें। इसके बाद 30 सेकेंड के लिए ठंडे पानी से नहाएं। ऐसा कम से कम तीन बार करें। इ सके बाद आराम करें और 30 मिनट के लिए सो जाएं-

अपने शरीर में पसीने को आने दें। या कोई ऐसा काम करें ताकि आपकी बॉडी से पसीना निकले-

अपनी बॉडी से डेड स्‍कीन को निकाल दें। पैरों को पैडीक्‍योर और हाथों को मैनीक्‍योर करें। इससे छिद्र खुल जाते है और रक्‍त में संचार अच्‍छे से होता है-

सौंफ रक्त को साफ करने वाली एवं चर्मरोग नाशक है-

उपचार और प्रयोग-

Thursday, December 3, 2015

सर्दियाँ आ गई खाए ये आहार - Winter came to eat these foods

सर्दियों का समय वह समय होता है जब आपका मन गर्म-गर्म रजाई से निकलने का नहीं करता तो इस दौरान अपने खाने का विशेष ख्‍याल रखना चाहिये तो चलिए आपको बताते है कि क्या खाए आप सर्दियों के इस मौसम में -



हमें ऐसा आहार खाना चाहिये जो हमें सर्दियों के समय में गर्म रखे। ऐसे गरम मसाले तथा आहार जो शरीर को गर्मी पहुंचाते हैं उनका नियमित सेवन करने से हमें-आपको कभी भी बीमारी नहीं होगी-

सर्दियों में आप ठंड और सर्दी-जुखाम से दूर रहें इसके लिये आपको ऐसे आहार खाने चाहिये जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए। प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) किसी जीव के भीतर होने वाली उन जैविक प्रक्रियाओं का एक संग्रह है जो रोगजनकों और अर्बुद कोशिकाओं को पहले पहचान और फिर मार कर उस जीव की रोगों से रक्षा करती है-

गाजर(Carrots) खाने से त्‍वचा हेल्‍दी रहती है आंखों की रौशनी बढ़ती है रोग प्रतिरोधक छमता(Defense capabilities) बढती है जिससे सर्दियों में शरीर को ठंड नहीं लगती। यह एक गर्म आहार है तो जिसे आपको जरुर खाना चाहिये-



संतरा हो चाहे नींबू, इनमें ढेर सारा विटामिन सी होता है जिससे शरीर को पोषण और फ्लेवीनॉइड प्राप्‍त होता है। यह शरीर को बीमारियों से लड़ने में मदद दिलवाता है। साथ ही यह अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल (Cholesterol ) को भी बढाता है। यह शरीर को गर्म रखने में मदद करता है।



चिकन और अंडे के सेवन से शरीर गर्म बना रहता है-



हर घर में भोजन में लहसुन और अदरक का प्रयोग जरुर किया जाता है। सर्दियों में इनके सेवन से सर्दी, जुखाम और कफ से राहत मिलती है। अगर आप मसाला चाय बना रही हैं तो उसमें अदरक डालना ना भूलें-



अमरुद में भी सिट्रस फल की तरह इसमें भी भारी मात्रा में विटामिन सी होता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता बढता है। साथ ही इसमें पोटैशियम और मैगनीशियम होता है-



शक्‍कर की जगह पर शहद(Honey) का सेवन करना लाभकारी हो सकता है। साथ ही यह खराश और ठंडक के लिये दवाई का भी काम करती है-



मेथी का साग विटामिन के, आयरन और फोलिक एसिड में अधिक होता है। इसे खाने से शरीर में खून बढ़ता है और शरीर गर्म रहता है-



अनार में काफी सारा एंटीऑक्‍सीडेंट आयरन, पोलिफिनॉल और विटामिन सी पाया जाता है। यह बुखार को कंट्रोल कर सकते हैं और ठंड लगने से बचाते हैं। इसे खाने से खून बनता है और ब्‍लॉक हुई धमनियां खुल जाती हैं-
उपचार और प्रयोग-

Wednesday, December 2, 2015

चेहरे के काले धब्बों पर सेम की पत्ती का रस लगाये - Bean leaf juice made The black spots on the face

सेम एक लता है। इसमें फलियां लगती हैं। फलियों की सब्जी खाई जाती है। इसकी पत्तियां चारे के रूप में प्रयोग की जा सकती हैं। आपको पता है कि ललौसी नामक त्वचा रोग सेम की पत्ती को संक्रमित स्थान पर रगड़ने मात्र से ठीक हो जाता है-



चेहरे के काले धब्बों पर सेम की पत्ती का रस लगाने से लाभ होता है.

वैद्यक में सेम मधुर, शीतल, भारी, बलकारी, वातकारक, दाहजनक, दीपन तथा पित्त और कफ का नाश करने वाली कही गई हैं।

वात कारक होने से इसे अजवाइन , हींग  , अदरक , मेथी पावडर और गरम मसाले के साथ फिल्टर्ड या कच्ची घानी के तेल में बनाए. सब्जी में गाजर मिलाने से भी वात नहीं बनता.

इसमें लौह तत्व , केल्शियम ,मेग्नेशियम , फोस्फोरस विटामिन ए आदि होते है.

इसके बीज भी शाक के रूप में खाए जाते हैं। इसकी दाल भी होती है। बीज में प्रोटीन की मात्रा पर्याप्त रहती है। उसी कारण इसमें पौष्टिकता आ जाती है।

सेम और इसकी पत्तियों का साग कब्ज़ दूर करता है.

सेम एक रक्तशोधक भी है, फुर्ती लाती है, शरीर मोटा करती है।

नाक के मस्सों पर सेम फली रगड़ कर फली को पानी में रखे. जैसे जैसे फली पानी में गलेगी , मस्से भी कम होते जाएंगे.

सेम की सब्जी खून साफ़ करती है और इससे होने वाले त्वचा के रोग ठीक करती है.

बिच्छु के डंक पर सेम की पत्ती का रस लगाने से ज़हर फैलता नहीं.

सेम के पत्तों का रस तलवों पर लगाने से बच्चों का बुखार उतरता है.

उपचार और प्रयोग-

Monday, November 30, 2015

दिमाग का एक अचूक टॉनिक - A surefire tonic Brains


आज की भाग दौड़ और तनाव भरी जीवन शैली से उत्पन्न चितां, शोक, भय तथा क्रोध आदि का मस्तिष्क पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है परिणाम स्वरूप स्मरणशक्ति की हानि छोटी-छोटी बातों पर अत्याधिक भावुक होना व रोना, क्रोध, बेचैनी, सिरदर्द, आत्मविश्वास में कमी आदि लक्षण उत्पन्न होते है इन सब लक्षणों से बचाव एवं मुक्ति के लिए एक अनुभुत नुस्खा प्रस्तुत है-




अचूक नुस्खा (Surefire treatment )


आंवला-50 ग्राम

शखपुष्पी-50 ग्राम

ब्राह्मी-50 ग्राम

गिलोय- 50 ग्राम

जटामांसी- 50 ग्राम

उपरोक्त सभी सामग्री लेकर महीन चुर्ण करके अच्छी तरह मिलाकर रख लें। इसकी एक-एक चम्मच मात्रा शहद, जल या आंवले के शर्बत के साथ दिन में तीन बार सेवन करें। बच्चों को इसकी आधी मात्रा सेवन कराएं। यह नुस्खा बच्चों से लेकर वृद्ध तक सभी के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित है।

गर्भवती महिला यदि पुरे गर्भ काल में नियमित इसका सेवन करती रहती है तो उनके होने वाले शिशु हर प्रकार के मानसिक रोगों से सुरिक्षित रहता है।

उपचार और प्रयोग-

Sunday, November 29, 2015

गर्भवती महिला का आहार - Diet of pregnant woman

आज के लाइफ स्टाइल में गर्भवती महिलाओं के लिए शिशु को जन्म देना किसी चैलेंज से कम नहीं है। परिवार में जब बच्चा जन्म लेने वाला होता है तो ऐसे में पति-पत्नी के लिए सावधानियां बरतनी और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है तब  ऐसी स्थिति में थोड़ी सी असावधानी भी बाद में जाकर जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवा साबित हो सकती है-


गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपना विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दौरान महिलाओं को संतुलित आहार लेना चाहिए। संतुलित आहार महिलाओं के लिए वरदान साबित होता है। उन्होंने कहा कि हल्का व्यायाम इसमें फायदेमंद होता है।

गर्भावस्था के दौरान ध्यान दें(Attention during pregnancy)

गर्भधारण करने के बाद से महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ से रेगुलर जांच करवाते रहना चाहिए।
गर्भधारण के शुरू के दो महीनों में भूख कम लगती है। इस दौरान महिलाओं को थोड़े-थोड़े अंतराल में हल्का भोजन लेना चाहिए।
दो महीने के बाद भूख बढ़नी शुरू हो जाती है। उस स्थिति में पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन का सेवन करना चाहिए।
गर्भवती महिला के भोजन में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट्स, विटामिन, खनिज-लवण व जल आदि का समुचित संतुलन होना जरूरी है।
गर्भवती महिला अगर पौष्टिक आहार का सेवन नहीं करती तो उसे अनीमिया (खून की कमी) होने का अंदेशा बना रहता है।
गर्भवती महिला को खट्टे, बासी व चर्बी वाले भोजन से गुरेज करना चाहिए।
गर्भावस्था में दौड़ लगाना, तैरना, टेनिस खेलना व घुड़सवारी करना करना वर्जित है। महिला को भारी काम करने से भी गुरेज करना चाहिए। इस अवस्था में हल्का व्यायाम अच्छा रहेगा।
शारीरिक तंदुरुस्ती के साथ-साथ मानसिक तंदरुस्ती की ओर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
गर्भवती महिला को तनाव होने की सूरत में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व गर्भपात होने की आशंका बनी रहती है।
गर्भवती महिला को माहिर डाक्टर की सलाह से टेटनेस का इंजेक्शन जरूर लगवा लेना चाहिए।


गर्भवती महिला को हर महीने अपना यूरिन (मूत्र) टेस्ट अवश्य करवाना चाहिए।

आचार्य चरक कहते हैं कि गर्भिणी के आहार का आयोजन तीन बातों को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए :-

गर्भवती के शरीर का पोषण, स्तन्यनिर्मिती की तैयारी व गर्भ की वृद्धि  माता यदि सात्त्विक, संतुलित, पथ्यकर एवं सुपाच्य आहार का विचारपूर्वक सेवन करती है तो बालक सहज ही हृष्ट-पुष्ट होता है और प्रसव भी ठीक समय पर सुखपूर्वक होता है | अत: गर्भिणी रुचिकर, सुपाच्य, मधुर रसयुक्त, चिकनाईयुक्त एवं जठराग्नि प्रदीपक आहार लें |

पानी को १५-२० मिनट उबालकर ही लेना चाहिये जितना सम्भव हो तो पानी उबालते समय उसमें उशीर (सुंगधीबाला ), चंदन, नागरमोथ आदि डालें तथा शुद्ध चाँदी या सोने (२४ कैरेट) का सिक्का या गहना साफ़ करके डाला जा सकता है |

दूध ताजा व शुद्ध होना चाहिये | फ्रीज का ठंडा दूध योग्य नहीं हैं | यदि दूध पचता न हो या वायु होती हो तो २०० मि.ली. दूध में १०० मि.ली. पानी के साथ १० नग वायविडंग व १ से.मी. लम्बा सौंठ का टुकड़ा कूटकर डालें व उबालें | भूख लगनेपर एक दिन में १-२ बार लें सकते हैं | नमक, खटाई, फलों और दूध के बीच २ घंटे का अंतर रखें |

गर्भावस्था के अंतिम तीन-चार मासों में मस्से या पाँव पर सूजन आने की सम्भावना होने से मक्खन निकाली हुई एक कटोरी ताज़ी छाछ दोपहर के भोजन में नियमित लिया करें |

आयुर्वेद ने घी को अमृत सदृश बताया है | अत: प्रतिदिन १-२ चम्मच घी पाचनशक्ति के अनुसार सुबह-शाम लें |

घी का छौंक लगा के नींबू का रस डालकर एक कटोरी दाल रोज सुबह के भोजन में लेनी चाहिये, इससे प्रोटीन प्राप्त होते है | दालों में मूंग सर्वश्रेष्ठ है | अरहर भी ठीक है | कभी-कभी राजमा, चना, चौलाई, मसूर कम मात्रा में लें | सोयाबीन पचने में भारी होने से न लें तो अच्छा है |

लौकी गाजर, करेला, भिन्डी, पेठा, तोरई, हरा ताजा मटर तह सहजन बथुआ, सुआ, पुदीना आदि हरे पत्तेवाली सब्जियाँ रोज लेनी चाहिये | ‘भावप्रकाश निघुंट’ ग्रन्थ के अनुसार सुपाच्य, ह्र्द्यपोषक, वाट-पित्त का संतुलन करनेवाली, वीर्यवर्धक एवं सप्तधातु पोषक ताज़ी, मुलायम लौकी की सब्जी, कचूमर (सलाद), सूप या हलवा बनाकर रूचि अनुसार उपयोग करें |

शरीर में रक्तधातू लौह तत्त्व पर निर्भर होने से लौहवर्धक काले अंगूर, किशमिश, काले खजूर, चुकन्दर, अनार, आँवला, सेब, पुराना देशी गुड़ एवं पालक, मेथी हरा धनिया जैसी शुद्ध व ताज़ी पत्तोंवाली सब्जियाँ लें | लौह तत्त्व के आसानी से पाचन के लिये विटामिन ‘सी’ की आवश्यकता होती है, अत: सब्जी में नींबू निचोड़कर सेवन करें | खाना बनाने के लिये लोहे की कढाई, पतीली व तवे का प्रयोग करे |

हरे नारियल का पानी नियमितसे गर्भोदक जल की उचित मात्रा बनी रहने में मदद मिलती है | मीठा आम उत्तम पोषक फल हैं, अत: उसका उचित मात्र में सेवन करे | वर, कैथ, अनन्नास, स्ट्राँबेरी, लीची आदि फल ज्यादा न खायें | चीकू, रामफल, सीताफल, अमरुद, तरबूज, कभी-कभी खा सकती हैं | पपीते का सेवन कदापि ण करें | कोई भी फल काटकर तुरंत खा लें | फल सूर्यास्त के बाद न खाये-

गर्भिणी निम्न रूप से भोजन का नियोजन करे( Following the placement of food to Pregnant)

सुबह – ७ – ७.३० बजे नाश्ते में रात के भिगोये हुए १-२ बादाम, १-२ अंजीर व ७-८ मुनक्के अच्छे-से चबाकर खाये |

साथ में पंचामृत पाचनशक्ति के अनुसार ले .वैद्यकीय सलाहानुसार आश्रमनिर्मित शक्तिवर्धक योग – सुवर्णप्राश, रजतमालती, च्यवनप्राश आदि ले सकती हैं |

सुबह ९ से ११ के बीच तथा शाम को ५ से ७ ले बीच प्रकृति-अनुरूप ताजा , गर्म, सात्त्विक, पोषक एवं सुपाच्य भोजन करें |

भोजनसे पूर्व हाथ-पैर धोकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके सीधे बैठकर ‘गीता’ के १५ वे अध्याय का पाठ करे और भावना करे कि ‘ह्रदयस्थ प्रभु को भोजन करा रही हूँ |

मासानुसार गर्भिणी परिचर्या(Masanusar with child care )


हर महीने में गर्भ-शरीर के अवयव आकार लेते हैं, अत: विकासक्रम के अनुसार हर महीने गर्भिणी को कुछ विशेष आहार लेना चाहए -

पहला महिना :-


गर्भधारण का संदेह होते ही गर्भिणी सादा मिश्रीवाला सहज में ठंडा हुआ दूध पाचनशक्ति के अनुसार उचित मात्रा में तीन घंटे के अंतर से ले अथवा सुबह-शाम ले | साथ ही सुबह १ चम्मच ताजा मक्खन (खट्टा न हो) ३ - ४ बार पानी से धोकर रूचि अनुसार मिश्री व १- २ कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर ले तथा हरे नारियल की ४ चम्मच गिरी के साथ २ चम्मच सौंफ खूब देर तक चबाकर खाये | इससे बालक का शरीर पुष्ट, सुडौल व गौरवर्ण का होगा | इस महीने के प्रारम्भ से ही माँ को बालक में इच्छित धर्मबल, नीतिबल, मनोबल व सुसंस्कारों का अनन्य श्रद्धापूर्वक सतत मनन-चिंतन करना चाहिए | ब्रम्हनिष्ठ महापुरुषों का सत्संग एवं उत्तम शास्त्रों का श्रवण, अध्ययन, मनन-चिंतन करना चाहिए |

दूसरा महीना : -


इसमें शतावरी, विदारीकंद, जीवंती, अश्वगंधा, मुलहठी, बला आदि मधुर औषधियों के चूर्ण को समभाग मिलाकर रख लें | इनका १ से २ ग्राम चूर्ण २०० मि.ली. दूध में २०० मि.ली. पानी डाल के मध्यम आँच पर उबालें, पानी जल जाने पर सेवन करें |

तीसरा महीना :-


इस महीने में दूध को ठंडा कर १ चम्मच शुद्ध घी व आधा चम्मच शहद )अर्थात घी व शहद विषम मात्रा में ) मिलाकर सुबह-शाम लें | उलटियाँ हो रही हों तो अनार का रस पीने तथा ‘ॐ नमो नारायणाय’ का जप करने से वे दूर होती हैं |

चौथा महीना :-


इसमें प्रतिदिन १० से २५ ग्राम मक्खन अच्छे-से धोकर, छाछ का अंश निकाल के मिश्री के साथ या गुनगुने दूध में डालकर अपनी पाचनशक्ति के अनुसार सेवन करें | इस मास में बालक सुनने-समझने लगता है | बालक की इच्छानुसार माता के मन में आहार-विहार संबंधी विविध इच्छाएँ उत्पन्न होने से उनकी पूर्ति युक्ति से (अर्थात अहितकर न हो इसका ध्यान रखते हुए) करनी चाहिए | यदि गर्भाधान अचानक हो गया हो तो चौथे मास में गर्भ अपने संस्कारों को माँ के आहार-विहार की रूचि द्वारा व्यक्त करता है | आयुर्वेद के आचार्यों का कहना है कि यदि इस समय भी हम सावधान होकर आग्रहपूर्वक दृढ़ता से श्रेष्ठ विचार करने लगें और श्रेष्ठ सात्त्विक आहार ही लें तो आनेवाली आत्मा के खुद के संस्कारों का प्रभाव कम या ज्यादा हो जाता है अर्थात रजस, तमस प्रधान संस्कारों में बदला जा सकता हैं एवं यदि सात्त्विक संस्कारयुक्त है तो उस पर उत्कृष्ट सात्त्विक संस्कारों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है |

पाँचवाँ महीना :-


इस महीने से गर्भ में मस्तिष्क का विकास विशेष रूप से होता हैं , अत: गर्भिणी पाचनशक्ति के अनुसार दूध में १५ से २० ग्राम घी ले या दिन में दाल-रोटी, चावल में १-२ चम्मच घी, जितना हजम हो जाय उतना ले | रात को १ से ५ बादाम (अपनी पाचनशक्ति के अनुसार) भिगो दे, सुबह छिलका निकाल के घोंटकर खाये व ऊपर से दूध पिये | इस महीने के प्रारम्भ से ही माँ को बालक में इच्छित धर्मबल, नीतिबल, मनोबल व सुसंस्कारों का अनन्य श्रद्धापूर्वक सतत मनन-चिंतन करना चाहिए | 

छठा व सातवाँ महीना : -


इन महीनों में दूसरे महीने की मधुर औषधियों (इसमें शतावरी, विदारीकंद, जीवंती, अश्वगंधा, मुलहठी, बला आदि मधुर औषधियों के चूर्ण को समभाग मिलाकर रख लें | इनका १ से २ ग्राम चूर्ण २०० मि.ली. दूध में २०० मि.ली. पानी डाल के मध्यम आँच पर उबालें) में गोखरू चूर्ण का समावेश करे व दूध-घी से ले | आश्रम-निर्मित तुलसी-मूल की माला कमर में धारण करें | इस महीने से प्रात: सूर्योदय के पश्चात सूर्यदेव को जल चढ़ाकर उनकी किरणें पेट पर पड़ें, ऐसे स्वस्थता से बैठ के ऊंगलियों में नारियल तले लगाकर पेट की हलके हाथों से मालिश (बाहर से नाभि की ओर) करते हुए गर्भस्थ शिशु को सम्बोधित करते हुए कहे : ‘जैसे सूर्यनारायण ऊर्जा, उष्णता, वर्षा देकर जगत का कल्याण करते हैं, वैसे तू भी ओजस्वी, तेजस्वी व परोपकारी बनना |’ माँ के स्पर्श से बच्चा आनंदित होता है | बाद में २ मिनट तक निम्न मंत्रो का उच्चारण करते हुए मालिश चालू रखे |

"ॐ भूर्भुवः स्व: | तत्सवितुर्वरेन्य भर्गो देवस्य धीमहि | धियो यो न: प्रचोदयात् || (यजुर्वेद :३६.३)
रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रामेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: |
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोsस्म्यहं रामे चित्तलय: सदा भवतु में भो राम मामुद्धर || (श्री रामरक्षास्तोत्रम्)
रामरक्षास्तोत्र के उपर्युक्त श्लोक में ‘र’ का पुनरावर्तन होने से बच्चा तोतला नहीं होता | पिता भी अपने प्रेमभरे स्पर्श के साथ गर्भस्थ शिशु को प्रशिक्षित करे |"

सातवें महीने में स्तन, छाती व पेट पर त्वचा के खिंचने से खुजली शुरू होने पर ऊँगली से न खुजलाकर देशी गाय के घी की मालिश करनी चाहिए |

आठवाँ व नौवाँ महीना :-


इन महीनों में चावल को ६ गुना दूध व ६ गुना पानी में पकाकर घी दाल के पाचनशक्ति के अनुसार सुबह-शाम खाये अथवा शाम के भोजन में दूध-दलियें में घी डालकर खाये | शाम का भोजन तरल रूप में लेना जरूरी है | गर्भ का आकार बढ़ने पर पेट का आकार व भार बढ़ जाने से कब्ज व गैस की शिकायत हो सकती है | निवारणार्थ निम्न प्रयोग अपनी प्रकृति के अनुसार करे  आठवें महीने के १५ दिन बीत जाने पर २ चम्मच एरंड तेल दूध से सुबह १ बार ले, फिर नौवें महीने की शुरआत में पुन: एक बार ऐसा करे अथवा त्रिफला चूर्ण या इसबगोल में से जो भी चूर्ण प्रकृति के अनुकूल हो उसका सेवन वैद्यकीय सलाह के अनुसार करे | पुराने मल की शुद्धि के लिए अनुभवी वैद्य द्वारा निरुह बस्ति व अनुवासन बस्ति ले | चंदनबला लाक्षादि तेल से अथवा तिल के तेल से पीठ, कटि से जंघाओं तक मालिश करे और इसी तेल में कपडे का फाहा भिगोकर रोजाना रात को सोते समय योनि के अंदर गहराई में रख लिया करे | इससे योनिमार्ग मृदु बनता है और प्रसूति सुलभ हो जाती है |

पंचामृत :-


9 महीने नियमित रूप से प्रकृति व पाचनशक्ति के अनुसार पंचामृत ले |

पंचामृत बनाने की विधि :-


एक चम्मच ताजा दही, ७ चम्मच दूध, २ चम्मच शहद, १ चम्मच घी व १ चम्मच मिश्री को मिला लें | इसमें १ चुटकी केसर भी मिलाना हितावह है | यह शारीरिक शक्ति, स्फूर्ति, स्मरणशक्ति व कांति को बढ़ाता है तथा ह्रदय, मस्तिष्क आदि अवयवों को पोषण देता है | यह तीनों दोषों को संतुलित करता है व गर्भिणी अवस्था में होनेवाली उलटी को कम करता है | उपवास में सिंघाड़े व राजगिरे की खीर का सेवन करें | इस प्रकार प्रत्येक गर्भवती स्त्री को नियमित रूप से उचित आहार-विहार का सेवन करते हुए नवमास चिकित्सा विधिवत् लेनी चाहिए ताकि प्रसव के बाद भी इसका शरीर सशक्त, सुडौल व स्वस्थ बना रहे, साथ ही वह स्वस्थ, सुडौल व सुंदर और ह्रष्ट-पुष्ट शिशु को जन्म दे सके | इस चिकित्सा के साथ महापुरुषों के सत्संग-कीर्तन व शास्त्र के श्रवण-पठन का लाभ अवश्य लें |

इसे भी देखे - गर्भावस्था में की जाए क्या सावधानी - What precautions should be In pregnancy 

उपचार और प्रयोग -

गर्भावस्था में की जाए क्या सावधानी - What precautions should be In pregnancy

एक स्त्री  के गर्भाशय मे बालक के होने को गर्भावस्था (गर्भ + अवस्था) कहते हैं इसके उपरान्त महिला शिशु को जन्म देती है और आमतौर पर यह अवस्था मां बनने वाली महिलाओं में नौ माह तक रहती है-



एक स्वस्थ महिला को प्रत्येक माह मासिक-स्राव (माहवारी) होती है। गर्भ ठहरने के बाद मासिक-स्राव होना बंद हो जाता है। इसके साथ-साथ दिल का खराब होना, उल्टी होना, बार-बार पेशाब का होना तथा स्तनों में हल्का दर्द बना रहना आदि साधारण शिकायतें होती है। इन शिकायतों को लेकर महिलाएं, स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाती है। डाक्टर महिला के पेट और योनि की जाचं करती है और बच्चेदानी की ऊंचाई को देखती है। गर्भधारण करने के बाद बच्चेदानी का बाहरी भाग मुलायम हो जाता है। इन सभी बातों को देखकर डाक्टर महिला को मां बनने का संकेत देता है। इसी बात को अच्छे ढंग से मालूम करने के लिए डाक्टर रक्त या मूत्र की जांच के लिए राय देता है।

गर्भवती महिलाओं के रक्त और मूत्र में एच.सी.जी. होता है जो कौरिऔन से बनता है। ये कौरिऔन औवल बनाती है। औवल का एक भाग बच्चेदानी की दीवार से तथा की नाभि से जुड़ा होता है। इसके शरीर में पैदा होते ही रक्त और मूत्र में एच.सी.जी. आ जाता है। इस कारण महिला को अगले महीने के बाद से माहवारी होना रूक जाता है। एच.सी.जी. की जांच रक्त या मूत्र से की जाती है। साधारणतया डाक्टर मूत्र की जांच ही करा लेते है। जांच माहवारी आने के तारीख के दो सप्ताहे बाद करानी चाहिए ताकि जांच का सही परिणाम मालूम हो सके। यदि जांच दो सप्ताह से पहले ही करवा लिया जाए तो परिणाम हां या नहीं में मिल जाता है। यह वीकली पजिटिव कहलाता है।

कुछ स्त्रियां माहवारी के न आने पर दवाइयों का सेवन करना शुरू कर देती है। इस प्रकार की दवा का सेवन महिलाओं के लिए हानिकारक होता है। इसलिए जैसे ही यह मालूम चले कि आपने गर्भाधारण कर लिया है तो अपने रहन-सहन और खानपान पर ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए।

गर्भधारण करने के बाद महिलाओं को किसी भी प्रकार की दवा के सेवन से पूर्ण डाक्टरों की राय लेना अनिवार्य होता है। ताकि आप कोई ऐसी दवा का सेवन न करें जो आपके और होने वाले बच्चे के लिए हानिकारक होता है।

यदि महिलाओं को शूगर का रोग हो तो इसकी चिकित्सा गर्भधारण से पहले ही करनी चाहिए। यदि मिर्गी, सांस की शिकायत या फिर टीबी का रोग हो तो भी इसके लिए भी डाक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए।

आपके विचार और आपके कार्य भी गर्भाधारण के समय ठीक और अच्छे होने चाहिए ताकि होने वाले बच्चे पर अच्छा प्रभाव पड़े।

जैसे ही पुष्टि हो जाती है कि आप गर्भवती हैं उसके बाद से प्रसव होने तक आप किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ की निगरानी मे रहें तथा नियमित रुप से अपनी चिकित्सीय जाँच कराती रहें।

गर्भधारण के समय आपको अपने रक्त वर्ग (ब्ल्ड ग्रुप), विशेषकर आर. एच. फ़ैक्टर की जांच करनी चाहिए। इस के अलावा रूधिरवर्णिका (हीमोग्लोबिन) की भी जांच करनी चाहिए।

यदि आप मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थाइराइड आदि किसी, रोग से पीड़ित हैं तो, गर्भावस्था के दौरान नियमित रुप से दवाईयां लेकर इन रोगों को नियंत्रण में रखें।

गर्भावस्था के प्रारंभिक कुछ दिनों तक जी घबराना, उल्टियां होना या थोड़ा रक्त चाप बढ़ जाना स्वाभाविक है लेकिन यह समस्याएं उग्र रुप धारण करें तो चिकित्सक से सम्पर्क करें।

गर्भावस्था के दौरान पेट मे तीव्र दर्द और योनि से रक्त स्राव होने लगे तो इसे गंभीरता से लें तथा चिकित्सक को तत्काल बताएं।

गर्भावस्था मे कोई भी दवा-गोली बिना चिकित्सीय परामर्श के न लें और न ही पेट मे मालिश कराएं। बीमारी कितना भी साधारण क्यों न हो, चिकित्सक की सलाह के बगैर कोई औषधि न लें।

यदि किसी नए चिकित्सक के पास जाएं तो उसे इस बात से अवगत कराएं कि आप गर्भवती हैं क्योकि कुछ दवाएं गर्भस्थ शिशु पर बुरा प्रभाव छोडती है।
चिकित्सक की सलाह पर गर्भावस्था के आवश्यक टीके लगवाएं व लोहतत्व (आयर्न) की गोलियों का सेवन करें।

गर्भावस्था मे मलेरिया को गंभीरता से लें, तथा चिकित्सक को तत्काल बताएं।
गंभीरता से चेहरे या हाथ-पैर मे असामान्य सूजन, तीव्र सिर दर्द, आखों मे धुंधला दिखना और मूत्र त्याग मे कठिनाई की अनदेखी न करें, ये खतरे के लक्षण हो सकते हैं।

गर्भ की अवधि के अनुसार गर्भस्थ शिशु की हलचल जारी रहनी चाहिए। यदि बहुत कम हो या नही हो तो सतर्क हो जाएं तथा चिकित्सक से संपर्क करें।

आप एक स्वस्थ शिशु को जन्म दें, इस के लिए आवश्यक है कि गर्भधारण और प्रसव के बीच आप के वजन मे कम से कम 10 कि.ग्रा. की वृद्धि अवश्य हो।

गर्भावस्था में अत्यंत तंग कपडे न पहनें और न ही अत्याधिक ढीले। इस अवस्था में ऊची एड़ी के सैंडल न पहने। जरा सी असावधानी से आप गिर सकती है

इस नाजुक दौर मे भारी श्रम वाला कार्य नही करने चाहिए, न ही अधिक वजन उठाना चाहिए। सामान्य घरेलू कार्य करने मे कोई हर्ज नही है।

इस अवधि मे बस के बजाए ट्रेन या कार के सफ़र को प्राथमिकता दें। आठवें और नौवे महीने के दौरान सफ़र न ही करें तो अच्छा है। गर्भावस्था मे सुबह-शाम थोड़ा पैदल टहलें। चौबीस घंटे मे आठ घंटे की नींद अवश्य लें। प्रसव घर पर कराने के बजाए अस्पताल, प्रसूति गृह या नर्सिगं होम में किसी कुशल स्त्री रोग विशेषज्ञ से कराना सुरक्षित रहता है।

गर्भावस्था मे सदैव प्रसन्न रहें। अपने शयनकक्ष मे अच्छी तस्वीर लगाए। हिंसा प्रधान या डरावनी फ़िल्में या धारावाहिक न देखें।


उपचार और प्रयोग-

घर में बनाये आयुर्वेदिक फेसपैक - Homemade herbal face pack

आजकल त्वचा को वातावरण के प्रदूषण, धूल-मिट्टी, धूप इत्यादि का सामना करना ही पड़ता है। ऐसे में त्वचा मुरझाई-सी दिखने लगती है। उम्र के साथ होने वाले हार्मोनल परिवर्तन से, प्रदूषण से व कई अन्य कारणों से स्कीन प्रॉब्लम्स सताने लगती हैं। अगर आपके साथ भी कोई स्कीन प्रॉब्लम हैं तो घर पर ही नीचे लिखी विधि से आयुर्वेदिक फेसपैक बनाकर उससे मुक्ति पा सकते हैं-



चेहरे पर चेचक, छोटी माता या बड़ी फुंसियों के दाग रह गए हैं तो दो पिसे हुए बादाम, दो चम्मच दूध और एक चम्मच सूखे संतरों के छिल्कों का पावडर मिलाकर आहिस्ता-आहिस्ता फेस पर मलें और छोड़ दें।

हफ्ते में एक बार स्क्रब करें। घरेलु स्क्रब बनाने के लिए एक चम्मच दरदरा चावल का आटा, 1 चम्मच दरदरी मसूर की दाल का पाउडर, 1/2 उड़द की दाल का दरदरा पाउडर, 1 चम्मच गुलाब जल और 1/2 चम्मच शहद मिलाकर गाढा पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। हलका सूखने पर स्क्रब करते हुए हटाएं। रंग निखर जाएगा।

हल्दी को मलाई में डालकर चेहरे पर रगडऩे से त्वचा चमकीली बनती है। हल्दी को कच्चे दूध में डालकर मुंहांसों पर लगाने से मुंहासे दूर हो जाते हैं।

आधा चम्मच संतरे का रस लेकर उसमें 4-5 बूंद नींबू का रस, आधा चम्मच मुल्तानी मिट्टी, आधा चम्मच चंदन पाउडर और कुछ बूंदें गुलाब जल की। इन सबको मिलाकर कर थोड़ी देर के लिए फ्रिज में रख दें। इसे लगा कर 15-20 मिनट तक रखें। इसके बाद पानी से इसे धो दें। यह तैलीय त्वचा का सबसे अच्छा उपाय है।

अगर आपकी त्वचा ड्राई है, तो काजू को रात भर दूध में भिगो दें और सुबह बारीक पीसकर इसमें मुल्तानी मिट्टी और शहद की कुछ बूंदें मिलाकर स्क्रब करें।

धूप से हुई सांवली त्वचा में फिर से निखार लाने के लिए नारियल पानी, कच्चा दूध, खीरे का रस, नींबू का रस, बेसन और थोड़ा-सा चंदन का पावडर मिलाकर उबटन बनाएं, इसे नहाने के एक घंटे पहले लगा लें। सप्ताह में दो बार करें। सांवलापन खत्म हो जाएगा।

रोमछिद्र ज्यादा बड़े हो गए हों तो उन पर टमाटर का रस, नींबू का रस और कच्चा दूध तीनों का पैक बनाकर लगाएं।
उपचार और प्रयोग-

Saturday, November 28, 2015

सुंदर दिखे शादी से पहले तो क्या करे- Looks good before marriage So please

विवाह से एक महीने पहले इनका प्रयोग करना शुरू करें तो चेहरे को कांतिमाय बनाने में आपको बहुत मदद मिलेगी। चेहरा चमकाने के लिए आजकल की महिलाएँ क्या-क्या नहीं करतीं। कभी पार्लरों के चक्कर लगाना कभी नए-नए कॉस्मेटिक्स चेहरे पर लगाना वगैरह-वगैरह, लेकिन इन सभी के दूरगामी परिणाम चेहरे की त्वचा का ढीलापन व त्वचा पर मुहासे व दाग-धब्बों का उभर आना होता है-



हमारी त्वचा को भी पोषण की आवश्यकता होती है। धूल-धूप, प्रदूषण आदि के संपर्क में रहने से हमारी त्वचा अपनी कुदरती चमक खो देती है। ऐसे में त्वचा की सही देखभाल करना बेहद जरूरी है। घरेलू #फेस पैक त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि ये अनाज, सब्जियों व फलों को मिलाकर बनाए जाते हैं अत: हमारी त्वचा पर इनके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं।

दुल्हन शादी के समय सुन्दर लगे, इसके लिए घरेलू #पैक व स्क्रब से बेहतर कुछ और नहीं। कोई भी महंगा रेडीमेड फेस पैक लगाने के बजाय घर में कुछ अनोखे और खास फेस पैक व स्क्रब तैयार कीजिए -

आपके लिए है कुछ नायाब फेस पैक व स्क्रब:-


आंखों के नीचे काले घेरे होने पे प्रयोग :-


सामग्री:-

2 बडे चम्मच सूखे लाल गुलाब का पाउडर

1 बडा चम्मच खीरे के बीज का पाउडर

1/2 बडा चम्मच मसूर दाल पाउडर


बनाने की विधि:-


सारी सामग्री को चाय के ठंडे पानी के साथ मिलाकर 10-15 मिनट तक आंखों के नीचे काले घेरों पर लगाएं और ठंडे पानी से धो लें। इसके बाद बादाम के तेल की हल्की मालिश करें।

धूप से झुलसी त्वचा के लिए प्रयोग :-


सामग्री:-


2 बडे चम्मच ज्वार का आटा

1 बडा चम्मच तुलसी पाउडर

3 बडे चम्मच तरबूज के बीज का पाउडर

बनाने की विधि:-


जब भी जरूरत हो, तो थोडे से दही में सारी सामग्री मिलाएं और चेहरे, गर्दन और बांहों पर इस पैक को 20 मिनट तक लगा कर रखें। ठंडे पानी से धो लें। ऎसा दिन में 2 बार करें।

तैलीय त्वचा के लिए पैक :-

सामग्री:-


2 चम्मच मुलतानी मिट्टी

1 बडा चम्मच पोदीना पाउडर

1/2 बडा चम्मच मेथीदाना पाउडर

बनाने की विधि:-


सारी सामग्री को गुलाबजल या ताजे गुलाब के पेस्ट में मिलाकर चेहरे पर 10 मिनट तक लगा कर रखें ठंडे पानी से चेहरे को धो लें। यह बढिया एस्टिंरजेंट का भी काम करता है और तैलीय त्वचा में कसाव लाता है। इस पैक को आप सप्ताह में 3 दिन लगा सकती हैं।

मुंहासे-युक्त त्वचा के लिए पैक :-


सामग्री :-

1 बडा चम्मच चंदन पाउडर

1 बडा चम्मच नीम पाउडर

1 बडा चम्मच तुलसी पाउडर

1 बडा चम्मच समुद्री झाग

बनाने की विधि:-


सारी सामग्री को मिलाकर किसी एअरटाइट डिब्बे में रखें। जब भी इस्तेमाल करना हो, तो ताजे फलों के रस या गुनगुने दूध के साथ मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें और सादे पानी से चेहरा धो लें। इस पैक को आप सप्ताह में 3 दिन लगा सकती हैं। लगातार 3 दिन के बजाय 1-2 दिन अंतराल में इस पैक का इस्तेमाल करें।

शुष्क त्वचा के लिए पैक सामग्री :-

सामग्री :-


2 बडे चम्मच मसूर दाल पाउडर

1 बडा चम्मच चिरौंजी पाउडर

3 बडे चम्मच मिल्क पाउडर चुटकीभर हल्दी पाउडर

बनाने की विधि:-


सारी सामग्री को थोडे से दूध में मिला कर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर 10 मिनट तक लगाकर रखें। ठंडे पानी से चेहरा धो लें। सप्ताह में इसे 1-2 दिन अंतराल में 3 बार प्रयोग कर सकती हैं।

चेहरे पर कोई भी फेस पैक लगाने से पहले आपको अपनी स्किन टोन को जानकर उसी के अनुसार फेस पैक लगाना चाहिए। फेस को आप आसानी से घर पर बना सकते हैं और साधारण कॉस्मेटिक्स की तुलना में ये घरेलू फेस कई गुना ज्यादा फायदेमंद होते हैं।

त्वचा में रौनक लाने के लिए फेस पैक :-

सामग्री :-


1 अंडे की जर्दी

2 बड़ा चम्मच जौ का आटा

1 चम्मच शहद

1 आलू का रस

इनको आपस में मिला चेहरे पर लगाएँ तथा यह फेस पैक लगाने के 10 मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।

केले को मेश करके उसमें बेसन व अंडे की जर्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएँ तथा 15 मिनट बाद चेहरे को धो लें।

ब्लीच पैक :-


अक्सर महिलाएँ अपने ब्लीच कराती हैं परंतु ब्लीच का अधिक इस्तेमाल हमारी त्वचा के लिए नुकसानदेह होता है। इसकी बजाय यदि आप घरेलू ब्लीच पैक का इस्तेमाल करें तो आपके चेहरे के रोओं का रंग कुदरती रूप से परिवर्तित होने लगेगा।

संतरे के रस में नींबू का रस और शहद मिलाकर गाढा बनाएँ। इसको लगाने के कुछ समय बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।

2 बड़े चम्मच संतरे के छिलके के पावडर को दूध में मिलाएँ। अब इस गाढ़े मिश्रण को चेहरे पर लगाकर चेहरा धो लें। आप हफ्ते में तीन बार इस पैक को लगा सकते हैं।

मुल्तानी मिट्टी फेस पैक मुल्तानी मिट्टी का फेस मास्क लगा कर मुहांसे का उपचार करना पुरानी भारतीय परंपरा है। यह आपको किसी भी स्टोर पर आसानी से मिल जाएगा और इसमें बड़ी मात्रा में आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं जो मुहांसे से छुटकारा दिलाता है। फेस पैक तैयार करने के लिए आप मुल्तानी मिट्टी में कुछ बूंद गुलाब जल और नींबू का रस मिला सकते हैं।

काबुली चने का आटा दो चम्मच काबुली चने का आटा और एक कप दही को मिला कर पेस्ट तैयार कर लें। अब इसे चेहरे पर लगाकर 30 से 45 मिनट तक छोड़ दें। जब यह सूख जाए तो इसे पानी से भिगो कर सर्कुलर मोशन में स्क्रब करें। बाद में पानी से धो लें। इससे आपके चेहरे पर नमी आ जाएगी। बेहतर परिणाम के लिए हफ्ते में दो बार ऐसा करें।

पुदीना फेस पैक पुदीना फेस पैक पूरी तरह से हर्बल होता है और इससे त्वचा में ठंडापन भी आता है। एक कटोरे में पुदीना की कुछ पिसी हुई पत्ती लेकर इसमें 2-3 बूंद शहद मिला दें। अब इसे तबतक चेहरे पर लगाकर रखें, जब तक कि यह सूख न जाए। सूखने के बाद इसे सामान्य पानी से धो लें। अच्छे परिणाम के लिए हफ्ते में जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके इस फेश पैक को लगाएं।

खीरे का फेस मास्क खीरा शरीर से गर्मी को सोखता है, जिससे यह मुहांसे और जलन से निजात पाने का एक बेहतरीन जरिया बन जाता है। यह पिंपल को बहुत हद तक खत्म कर देता है। सबसे पहले खीरे को मशीन के जरिए बारीक कर लें। अब इसे रेफ्रीजरेटर में रखने से पहले इसका रस निचोड़ लें। खीरे का गूदा जब बहुत ठंड हो जाए तो इसके जरिए रस को चेहरे पर लगाकर आप नमी हासिल कर सकते हैं।

पपीता पैक आप एक फ्रूट पैक बनाने के लिए एक से ज्यादा फलों का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप उपलब्धता के अनुसार केला, पपीता, एवाकाडो और तरबूज का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक दो फलों को मसल लें और इसे शहद और दही के साथ मिला लें। चेहरे पर लगाने के बाद धोने से पहले इसे अच्छी तरह से सूख जाने दें।

मुंहासों, दानों से छुटकारा पाने के लिये घरेलू हल्दी फेस पैक, फेस मास्क:-

त्वचा के उपचार के लिये हल्दी सभी मसालों में से बेहतर है। यह त्वचा की रंगत को हल्का करता है तथा त्वचा के मुंहासों और दानों को ठीक करता है। त्वचा के लिये हल्दी अपपर्णन और शोधन करने वाला है। हल्दी कवक विरोधी और जीवणु विरोधी एजेंट की तरह कार्य करता है। जो चेहरे से मुंहासे और दानों को हटाने में मदद कर सकता है। हल्दी प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाता है और अद्भुत चमक देता है। हल्दी त्वचा के अपपर्णन, भरे और अवरूद्ध छिद्रों को साफ करता है।

हल्दी और बेसन का फेस पैक:-


 सामग्री:-


2 चुटकी हल्दी

4-5 चम्मच बेसन

4-5 चम्मच कच्चा दूध

3-4 चम्मच शहद

बनाने की विधि :-


एक कांच के कटोरे में हल्दी और बेसन को लेकर उसमें दूध और शहद को मिलायें। इन सब को अच्छे से मिलाकर चिकना लेप बना लें। अब इस लेप को चेहरे पर लगा लें। दूध और शहद ह्यूमेक्टेंटस की तरह कार्य करते हुए आपके चेहरे को नम रखते हैं। 15-20 मिनट बाद सहने लायक गर्म पानी से धो दें। यह फेस मास्क सूखी त्वचा की रंगत के लिये उपयुक्त होगा।

हल्दी और शहद का फेस पैक:-


सामग्री:-


3-4 चुटकी हल्दी

आधा कप दही

बनाये :-


दही को हल्दी के साथ मिलाकर अपने चेहरे पर लगायें और 15 मिनट बाद चेहरे को ठण्डे पानी से धुलें। यह फेस पैक त्वचा, हांथ, पैर, चेहरे आदि पर से सूर्य के कारण हुए भूरेपन को हटाने में सहायता कर सकता है। इसे भूरेपन के क्षेत्र पर लगा लें और 15-20 मिनट बाद धो दें।

हल्दी और चंदन का फेस पैक:-


सामग्री:-


3-4 चुटकी हल्दी पाउडर

1-2 चम्मच चंदन पाउडर

1-2 चम्मच दूध

विधि :-


एक कटोरे में चंदन पाउडर और हल्दी लेकर उसमे दूध को मिलायें। इसे चिकनी क्रीम बना लें। इस लेप से चेहरे पर गोल गोल मसाज करें। 10-15 मिनट तक सूखने के लिये छोड़ दें। इस सूखे फेस पैक को ठण्डे पानी से धो दें। पैक का चंदन चेहरे की चमक को बढ़ाने और गहरी त्वचा की रंगत को हल्का करने में मदद करता है।

हल्दी और शहद का फेस पैक:-


सामग्री:-


2 चुटकी हल्दी पाउडर

2-3 चम्मच शहद

1-2 चम्मच गुलाब जल

विधि :-


हल्दी पाउडर, शहद को मिलाने के बाद गुलाब जल डालकर लेप तैयार कर लें। इसे आप चेहरे और गर्दन के पास लगा लें। यह फेस पैक चेहरे की झुर्रियों को आने से बचाता है। यह फेस पैक चेहरे को नम रखता है।

हल्दी और नींबू जूस का फेस पैक:-


सामग्री:-


1 चम्मच हल्दी

1-2 चम्मच नींबू रस

विधि :-


हल्दी पाउडर को नींबू रस मे मिलाकर चेहरे पर इस लेप को लगायें। यह फेस पैक चेहरे के लिये विरंजक का कार्य करता है। यह चेहरे की चमक को भी बढ़ाताहै। संसार में बेहतर रूप के लिये ऊपर बताये गये फेस पैक का उपयोग करें। सभी पैक सुंदरता की देखभाल के लिये सिद्ध पैक है।

नीम और हल्दी का फेस पैक:-


जो लोग दानों की समस्या से ग्रस्त हैं उनके लिये यह विशेष फेस पैक बहुत अच्छा है। इस पैक में लाल चंदन की लकड़ी है, जो मुंहासो के निशान को प्रभावी ढ़ंग से हल्का करता है। आप इससे त्वचा में कसाव, रंगत और निशान में अद्भुत लाभ पा सकते है।

सामग्री:-


1 चम्मच लाल चंदन पाउडर

1 चम्मच ताज़ी नीम की पत्तियों का लेप

नीम का पानी

1 चम्मच अम्बी हल्दी पाउडर

1 चम्मच शहद

विधि :-


सबसे पहले हल्दीऔर चंदन को मिलाये और अब इसमे ताज़ी नीम की पत्तियों का लेप और शहद मिलायें। आप इस लेप को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये नीम का पानी भी मिला सकते है। यह पैक उन लोगों के लिये अच्छा होगा, जिन लोगों को मुंहासों की समस्या लम्बे समय से है।

हल्दी और दूध का फेस पेक :-

सामग्री:-

जई- 2 चम्मच

गुलाब जल

ग्रीन टी बैग

दूध पाउडर- 1 चम्मच

विधि :-


एक कांच के कटोरे में जई को दूध पाउडर के साथ कुचलें। अब इसमे गुलाब जल मिलायें। इन सबको मिलाकर इसमें टी बैग को डुबा दें। फेस पैक तैयार करके, चेहरे को अच्छे से साफ करके लगा लें। 2 मिनट बाद धो कर अंतर को देखें।

पपीता और हल्दी फेस पैक:-


पपीता फेस पैक कई लोगों द्वारा पसंद किया जाता है। यह आपकी त्वचा के लिये गुणकारी है। इसमें अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होता है। पपीते में उपलब्ध एंज़ाइम आपकी त्वचा को हल्का और चमक लाने के लिये प्रभावी होता है। इस फल में विटामिन सी और विटामिन ए भरपूर मात्रा में मिलता है। जिससे त्वचा के भूरेपन को हटाना आसान हो जाता है।

सामग्री :-


पका पपीता- 4 टुकड़ा

अम्बी हल्दी- 1 चम्मच

शहद- 1 चम्मच

विधि:-


सबसे पहले पपीते को मसल ले और इसमे शहद और हल्दी को अच्छे से मिला दें। अब इसे चेहरे पर लगा लें। इसे आपको एक बार में 20 मिनट तक लगा के रखना होगा और फिर गुनगुने पानी से धो दें।

हल्दी और संतरे का फेस पैक:-


सामग्री:-


संतरे के छिलके का पाउडर- आधा चम्मच

शहद- 1 चम्मच

बेसन- 1 चम्मच

दूध आवश्यकता के अनुसार

हल्दी- एक चुटकी

विधि:-


सामग्री सूची के सभी पाउडरों को एक बर्तन में लें। इसमें दूध डालकर चलायें। इससे आपको एक अच्छा मिश्रण या लेप प्राप्त होगा। इसे अपने चेहरे और गर्दन पर इस प्रकार लगाये कि वह आपकी त्वचा के हर हिस्से को ढ़क लें। इसे कुछ समय बाद धो डालें और तेल रहित मॉइस्चराइज़र को लगा लें। अब आपको चमकदार और कांतिमय त्वचा इससे प्राप्त होगी।

हल्दी और केसर का फेस पैक:-


भारतमें आपकी त्वचा को गोरा करने के लिये केसर या सैफरॉन वास्तविक्ता में प्रभावी है। यहाँ तक कि गर्भवती महिला को केसर पीने के लिये कहा जाता है जिससे जन्म लेने वाला शिशु गोरा हो। इस विशेष सूत्र को हल्दी और केसर के पैक में लाया गया है।

सामग्री:-


केसर- 10 रेशा

दही- 2 चम्मच

बेसन- 1 चम्मच

हल्दी- एक चुटकी

विधि:-


इस फेस पैक को बनाने के पहले आपको कुछ कार्य करना होगा। एक कटोरी दही में केसर को सारी रात के लिये भिगो दें। बेहतर होगा कि इसे आप रेफ्रिजरेटर में रखें। इसको लगाने से पहले बेसन को मिला लें। इसको अच्छी तरह से मिलाकर अपनी त्वचा पर लगाकर 15 मिनट के लिये छोड़ दें। आपकी त्वचा से भूरेपन को हटाने में यह वास्तविक्ता में प्रभावी है।

हल्दी और दूध क्रीम के साथ गुलाब जल:-


सामग्री:-


हल्दी पाउडर- आधा चम्मच

गुलाब जल- 1 चम्मच

दूध क्रीम- 2 चम्मच

विधि:-


इन सभी सामग्रियों को लेकर अच्छे से मिलायें। अब अपने चेहरे पर लगाकर 1 घण्टे के लिये छोड़ दें। इसे सूखने दें और इन सभी पत्तियों का, या बाज़ार से इनका पाउडर खरीदकर, लेप बनायें। इस लेप को चंदन के साथ मिलाकर लेप तैयार कर लें। अब इसे चेहरे पर लगा लें। 30 मिनट तक लेप को लगाये रखने के बाद सादे पानी से धो दें। आप अपनी चमक को वापस आते हुए देखेंगे। अगर आप इसका लगातार प्रयोग करते हैं तो मुंहासों को जाते हुए देखेंगे।फिर सादे पानी से धो दें। अब चिकनाई रहित मॉइस्चराइज़र को लगाना बेहतर परिणाम देगा।

नीम, तुलसी, चंदन और हल्दी पाउडर का पेक :-


सामग्री:-


नीम पत्ती- 10 पत्तियां

तुलसी या बैसिल- 10 पत्तियां

चंदन- एक चम्मच

हल्दी पाउडर- 1 चुटकी

विधि:-

सभी सामग्री को आपस में मिला कर पेस्ट बना कर इस पैक को आधे घंटे लगाए और फिर पानी से धो ले आपका चेहरा कुछ दिनों में दमकने लगता है -

उपचार और प्रयोग -