Thursday, July 30, 2015

गर्भावस्था में क्या खाए .?

माँ बनने की सुखद अनुभूति सिर्फ एक माँ ही जान सकती है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है किअपने गर्भ में पलते शिशु के लिए जरुरी सभी पोषक तत्व मिल सकेंगे। इसलिए ये यह जरुरी है की आप अच्छा खाएं।

आपको गर्भावस्था के दौरान कुछ और अधिक कैलोरी की भी ज़रूरत होगी। गर्भावस्था में सही आहार का मतलब है आप क्या खा रही हैं, न की कितना खा रही हैं। जंक फूड का सेवन सीमित मात्रा में करें, क्योंकि इसमें केवल कैलोरी ज्यादा होती है और पोषक तत्व कम या न के बराबर होते हैं।

आपका आहार शुरुआत से ही ठीक नहीं है, तो यह और भी महत्वपूर्ण है की आप अब स्वस्थ आहार खाएं। आपको अब और अधिक विटामिन और खनिज, विशेष रूप से फॉलिक एसिड और आयरन की जरूरत है।

आपको मलाईरहित (स्किम्ड) दूध, दही, छाछ, पनीर लेना चाहिए क्युकि इन खाद्य पदार्थों में कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन बी -12 की उच्च मात्रा होती है। अगर आपको लैक्टोज असहिष्णुता है, या फिर दूध और दूध से बने उत्पाद नहीं पचते, तो अपने खाने के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

अगर आप मांस नहीं खाती हैं, तो ये सब प्रोटीनके अच्छे स्रोत हैं। शाकाहारीयों को प्रोटीन के लिए प्रतिदिन 45 ग्राम मेवे और 2/3 कप फलियों की आवश्यकता होती है। एक अंडा, 14 ग्राम मेवे या ¼ कप फलियां लगभग 28 ग्राम मांस, मुर्गी या मछली के बराबर मानी जाती हैं।

खूब सारे पेय पदार्थों का सेवन करें, खासकर पानी और ताजा फलों के रस का। सुनिश्चित करें कि आप साफ उबला हुआ या फ़िल्टर किया पानी ही पियें । घर से बाहर जाते समय अपना पानी साथ लेकर जाएं या फिर प्रतिष्ठित ब्रांड का बोतल बंद पानी ही पीएं। अधिकांश रोग जलजनित विषाणुओं की वजह से ही होते हैं। डिब्बाबंद जूस का सेवन कम ही करें, क्योंकि इनमें बहुत अधिक चीनी होती है ।

घी, मक्खन. नारियल के दूध और तेल में संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) की उच्च मात्रा होती है, जो की अधिक गुणकारी नहीं होती। वनस्पति घी में ट्रांस फैट (वसा) अधिक होती है, अत: वे संतृप्त वसा की तरह ही शरीर के लिए अच्छी नहीं हैं। वनस्पति तेल (वेजिटेबल तेल)वसा का एक बेहतर स्त्रोत है, क्योंकि इसमें असंतृप्त वसा अधिक होती है।

अपने गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए आपको अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में आयोडीन शामिल करने की आवश्यकता है।

आपको कितना भोजन करने की जरुरत है, इस बात का सर्वोत्तम संकेत आपकी अपनी भूख है। हो सकता है आप पाएं कि भोजन की मात्रा आपकी गर्भावस्था के दौरान बदलती रहती है।

ये हो सकता है पहले कुछ हफ्तों में आपको समुचित भोजन करने की इच्छा न हो, विशेष तौर पर यदि आपको मिचली या या उल्टी हो रही है। ऐसा हो, तो कोशिश करें की दिन भर में छोटी मात्रा में, लेकिन कई बार कुछ भोजन करती रहें। अपनी गर्भावस्था के मध्य हिस्से में आपको पहले की तरह ही भूख लग सकती है। भूख में कुछ बढ़ोतरी भी हो सकती है और हो सकता है आप सामान्य से अधिक खाना चाहें। गर्भावस्था के अंत में आपकी भूख संभवत: बढ़ जाएगी। यदि आपको अम्लता, जलन या खाने के बाद पेट भारी सा महसूस होता है, तो आपके लिए थोड़े-थोड़े अंतराल पर छोटा-छोटा भोजन करना सही रहेगा। जब भूख लगे तब खाएं। ज्यादा कैलोरी युक्त कम पोषण वाले व्यंजनों की बजाय स्वस्थ भोजन चुनें।

कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं, जिनसे गर्भावस्था के दौरान आपको दूर रहना चाहिए। ये आपके शिशु के लिए असुरक्षित साबित हो सकते हैं। जैसेः-

अपाश्च्युरिकृत दूध (भैंस या गाय का दूध) और इससे बने डेयरी उत्पादों का सेवन गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं है।

इनमें ऐसे विषाणुओं के होने की संभावना रहती है, जिनसे पेट के संक्रमण और तबियत खराब होने का खतरा रहता है।

गर्भावस्था के समय विषाक्त भोजन आपको बहुत बीमार कर सकता है क्योंकि संक्रमण के प्रति आप अधिक संवेदनशील होती हैं। कहीं बाहर खाना खाते समय भी पनीर से बने व्यंजनों जैसे टिक्का और कच्चे पनीर के सैंडविच आदि के सेवन से बचें, क्योंकि पनीर ताजा है या नहीं, यह बता पाना मुश्किल हो सकता है।

सफेद, फफुंदीदार पपड़ी वाली चीज़ जैसे ब्री और कैमेम्बर्ट या फिर नीली (ब्लू वेन्ड)चीज़। इसके अलावा भेड़ या बकरी आदि के दूध से बनी अपाश्च्युरिकृत मुलामय चीज से भी दूर रहें। इन सभी तरह की चीज़ में लिस्टीरिया जीवाणु होने का खतरा रहता है, जिससे लिस्टिरिओसिस नामक संक्रमण हो सकता है। यह संक्रमण आपके अजन्मे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है।
कच्चा या अधपका मांस , मुर्गी और अंडे। इन सभी में हानिकारक जीवाणु होने की संभावना रहती है, इसलिए सभी किस्म के मांस को तब तक पकाएं, जब तक कि उनसे सभी गुलाबी निशान हट जाएं। अंडे भी सख्त होने तक अच्छी तरह पकाएं।

डिब्बाबंद मछली अक्सर नमक के घोल में संरक्षित करके रखी जाती हैं। अधिक नमक शरीर में पानी के अवधारण की वजह बन सकता है। इसलिए डिब्बाबंद मछली का पानी अच्छी तरह निकाल दें और प्रसंस्कृत मछली का सेवन कभी-कभी ही करें। मादक पेय। गर्भावस्था में अत्याधिक शराब पीने से बच्चों में शारीरिक दोष, सीखने की अक्षमता और भावनात्मक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए बहुत से विशेषज्ञ , यह सलाह देते हैं की गर्भावस्था के दौरान शराब छोड़ देनी चाहिए।

ध्यान रखें कि सभी महिलाओं में एक समान वजन नहीं बढ़ता। अपनी गर्भावस्था में आपका वजन कितना बढ़ता है, यह कई कारणों पर निर्भर करता है। इसलिए स्वस्थ आहार खाने की ओर ध्यान दें। स्टार्चयुक्त कार्बोहाइड्रेट, फल और सब्जियों, प्रोटीन की उचित मात्रा और दूध और डेयरी उत्पादों का सेवन करें। वसा और शर्करा का कम मात्रा में उपभोग करें।

जब आपका वजन बढ़ता है, तो इसके साथ-साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि वजन कितनी मात्रा में बढ़ा है। हो सकता है पहली तिमाही में आपका वजन कुछ ज्यादा नहीं बढ़े। फिर दूसरी तिमाही में इसमें निरंतर वृद्धि होनी चाहिए। तीसरी तिमाही में आपका वजन सबसे अधिक बढ़ता है, क्योंकि गर्भ में आपका शिशु भी सबसे ज्यादा इसी तिमाही में बढ़ता है। यदि आपका वजन 90 किलोग्राम से अधिक या 50 किलोग्राम से कम है, तो आपकी डॉक्टर एक विशेष आहार की सलाह दे सकती है।

हो सकता है की आपको भूख न हो, परन्तु यह संभावना है कि आपका शिशु भूखा हो। इसलिए हर चार घंटे कुछ खाने की कोशिश करनी चाहिए। कभी-कभी सुबह या फिर सारे दिन की मिचली, कुछ खाद्य पदार्थों को नापसंद करना, अम्लता या अपच के कारण खाना खाने में मुश्किल हो सकती है। दिन में तीन बार बड़े भोजन करने की बजाय पांच या छह बार कम मात्रा में भोजन का सेवन करने की कोशिश करें। आपके शिशु को नियमित रूप से आहार की जरूरत है, और आपको अपनी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने की जरूरत है, तो कोशिश करें की सही समय पर खाना ज़रूर खाएं। उच्च फाइबर और पूर्ण अनाज के भोजन खाने से आपका पेट ज्यादा देर तक भरा हुआ रहेगा और ये अधिक पौष्टिक भी होंगे।

आप गर्भवती हैं, इसलिए आपको अपने सभी पंसदीदा खाद्य पदार्थ छोड़ने की आव श्यकता नहीं है। परन्तु प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) या अत्याधिक तला हुआ भोजन एवं स्नैक्स तथा चीनी से भरे मिष्ठान आपके आहार का मुख्य हिस्सा नहीं होने चाहिए। जहाँ तक स्नैक्स की बात है, आईसक्रीम की बजाय एक केला खाएं अथवा कैलोरियों से भरपूर जलेबी की जगह बादाम या केसर का दूध पीएं। यदि आपको कभी-कभी चॉकलेट या गुलाब जामुन खाने का मन हो, तो संकोच न करें। उसके हर एक निवाले का आनंद भी लें-

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

Wednesday, July 29, 2015

बुधि वर्धक और मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाये -

मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने के लिए कुछ प्रयोग नीचे दिए जा रहे है इनमे से आप किसी एक का भी प्रयोग करके लाभ ले -



बबूल का गोंद आधा किलो शुद्ध गौ घृत में तल कर फूले निकाल लें और ठण्डे करके बारीक पीस लें। इसके बराबर मात्रा में पिसी मिश्री व पांच ग्राम दालचीनी का पाउडर इसमें मिला लें। बीज निकाली हुई मुनक्का 250 ग्राम और बादाम की छिली हुई गिरी 100 ग्राम-दोनों को खल बट्टे (इमाम दस्ते) में खूब कूट-पीसकर इसमें मिला लें और कांच के बर्तन में ढक्कन बन्द कर रखें।

अब आप इसे सुबह नाश्ते के रूप में इसके दो चम्मच खूब चबा-चबा कर खाएं। साथ में एक गिलास मीठा दूध घूंट-घूंट करके पीते.रहे।इसके बाद जब खूब अच्छी भूख लगे तभी भोजन करें। इस प्रयोग से मस्तिष्क को बल मिलता है और याददास्त भी अच्छी होती है -छात्र-छात्राओं के साथ दिमागी महनत करने वाले भी इसका प्रयोग करके लाभ प्राप्त करें।

चार-पांच बादाम की गिरी पीसकर गाय के दूध और मिश्री में मिलाकर पीने से भी मानसिक शक्ति बढ़ती है।

ब्राह्मी, शंखपुष्पी, वच, असगंध, जटामांसी, तुलसी समान मात्रा में लेकर चूर्ण का प्रयोग नित्य प्रतिदिन दूध के साथ करने पर मानसिक शक्ति, स्मरण शक्ति में वृध्दि होती है।

देशी गाय का शुध्द घी, दूध, दही, गोमूत्र, गोबर का रस समान मात्रा में लेकर गरम करें। घी शेष रहने पर उतार कर ठंडा करके छानकर रख लें। यह घी ‘पंचगव्य घृत’ कहलाता है। रात को सोते समय और प्रात: देशी गाय के दूध में 2-2 चम्मच पिघला हुआ पंचगव्य घृत, मिश्री, केशर, इलायची, हल्दी, जायफल, मिलाकर पिएं। इससे बल, बुध्दि, साहस, पराक्रम, उमंग और उत्साह बढ़ता है। हर काम को पूरी शक्ति से करने का मन होता है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

ब्रह्मी दिमागी शक्ति बढाने की मशहूर जडी-बूटी है। इसका एक चम्मच रस नित्य पीना हितकर है। इसके ७ पत्ते चबाकर खाने से भी वही लाभ मिलता है। ब्राह्मी मे एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं जिससे दिमाग की शक्ति घटने पर रोक लगती है।

बादाम 9 नग रात को पानी में गलाएं।सुबह छिलके उतारकर बारीक पीस कर पेस्ट बनालें। अब एक गिलास दूध गरम करें और उसमें बादाम का पेस्ट घोलें।  इसमें ३ चम्मच शहद भी डालें।भली प्रकार उबल जाने पर उतारकर मामूली गरम हालत में पीयें। यह मिश्रण पीने के बाद दो घंटे तक कुछ न लें। यह स्मरण शक्ति वृद्दि करने का जबर्दस्त उपचार है। दो महीने तक करें।

अखरोट  जिसे अंग्रेजी में वालनट कहते हैं स्मरण शक्ति बढाने में सहायक है। नियमित उपयोग हितकर है। 20 ग्राम वालनट और साथ में 10 ग्राम किशमिस लेना चाहिये।

जिन फ़लों में फ़ास्फ़ोरस तत्व पर्यात मात्रा में पाया जाता है वे स्मरण शक्ति बढाने में विशेषतौर पर  उपयोगी होते है।  अंगूर ,खारक ,अंजीर एवं संतरा दिमागी ताकत बढाने के लिये नियमित उपयोग करना चाहिये।

दालचीनी का पावेडर बनालें। 10 ग्राम पावडर शहद में मिलाकर चाटलें। कमजोर दिमाग की अच्छी दवा है।

आंवला का रस एक चम्मच 2 चम्मच शहद मे मिलाकर उपयोग करें। भुलक्कड पन में आशातीत लाभ होता है।

अदरक ,जीरा और मिश्री  तीनों को पीसकर लेने से कम याददाश्त की स्थिति में लाभ होता है।

काली मिर्च का पावडर एक चम्मच असली घी में मिलाकर उपयोग करने से याददाश्त में इजाफ़ा होता है।

दूध और शहद मिलाकर पीने से भी याद दाश्त में बढोतरी होती है। विद्ध्यार्थियों के लिये फ़ायदेमंद उपचार है।250 मिलि गाय के दूध में 2 चम्मच शहद मिलाकर उपयोग करना चाहिये।

 गाजर में एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं। इससे रोग प्रतिरक्छा प्राणाली ताकतवर बनती है।  दिमाग की ताकत बढाने के उपाय के तौर पर इसकी अनदेखी नहीं करना चाहिये।

तुलसी के 9 पत्ते ,गुलाब की पंखुरी और काली मिर्च नग एक  खूब चबा -चबाकर खाने से दिमाग के सेल्स को ताकत मिलती है।

आम रस (मेंगो जूस) मेमोरी बढाने में विशेष सहायक माना गया है। आम रस में २ चम्मच शहद मिलाकर लेना उचित है।

उपचार और प्रयोग -

Tuesday, July 28, 2015

विवाह में देरी .?

कभी- कभी जन्मकुंडली में कई ऐसे योग होते हैं जिनकी वजह से कोई भी पुरुष या स्त्री विवाह की खुशी से वंचित रह सकते हैं….कई बार ये रूकावट बाहरी बाधाओं की वजह से भी आती हैं. उम्र लगातार बढती जाती है और लाख प्रयास के बाद भी रिश्ते बन नहीं पाते हैं या मनचाहे रिश्तों का तो जैसे आकाल ही पड़ जाता है इस प्रकार की स्थिति होने पर शीघ्र विवाह के उपाय करने में समझदारी रहती है.






इन उपाय को करने से शीघ्र विवाह के मार्ग बनते है, तथा विवाह मार्ग की समस्त बाधाएं दूर होती है| यहाँ पर हम कुछ बहुत ही आसान किन्तु अचूक उपाय बता रहे है जिनको सच्चे मन से करने से वर एवं कन्या दोनों को ही निश्चित रूप से मनवांछित लाभ प्राप्त होगा।

शीघ्र विवाह के लिए सोमवार को 1200 ग्राम चने की दाल व सवा लीटर कच्चे दूध का दान करें| यह प्रयोग तब तक करते रहना है जब तक कि विवाह न हो जाय|

कन्या जब किसी कन्या के विवाह में जाये और यदि वहाँ पर दुल्हन को मेहँदी लग रही हो तो अविवाहित कन्या कुछ मेहँदी उस दुल्हन के हाथ से लगवा ले इससे विवाह का मार्ग शीघ्र प्रशस्त होता है|

विवाह वार्ता के लिए घर आए अतिथियों को इस प्रकार बैठाएं कि उनका मुख घर में अंदर की ओर हो, उन्हें द्वार दिखाई न दे।

विवाह योग्य युवक-युवती जिस पलंग पर सोते हों उसके नीचे लोहे की वस्तुएं या कबाड़ का सामान कभी भी नहीं रखना चाहिए।

यदि विवाह के पूर्व लड़का-लड़की मिलना चाहें तो वह इस प्रकार बैठे कि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर न हो।

कन्या सफेद खरगोश को पाले तथा अपने हाथ से उसे भोजन के रूप में कुछ दे|

कन्या के विवाह की चर्चा करने उसके घर के लोग जब भी किसी के यहाँ जायें तो कन्या खुले बालों से,लाल वस्त्र धारण कर हँसते हुए उन्हें कोई मिष्ठान खिला कर विदा करे| विवाह की चर्चा सफल होगी|

पूर्णिमा को वट वृक्ष की 108 परिक्रमा देने से भी विवाह बाधा दूर होती है|

गुरूवार को वट वृक्ष, पीपल, केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर होती है|

जिन व्यक्तियों को शीघ्र विवाह की कामना हों उन्हें गुरुवार को गाय को दो आटे के पेडे पर थोड़ा हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए. तथा इसके साथ ही थोड़ा सा गुड व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ होता है|

किसी भी शुभ दिवस पर मिटटी का एक नया कुल्हड़ लाएँ तथा उसमे एक लाल वस्त्र,सात काली मिर्च एवं सात ही नमक की साबुत कंकड़ी रख दें, हांडी का मुख लाल कपडे से बंद कर दें एवँ कुल्हड़ के बाहर कुमकुम की सात बिंदियाँ लगा दे फिर उसे सामने रख कर निम्न मंत्र की ५ माला जप करेँ । मन्त्र जप के पश्चात हांडी को चौराहे पर रखवा देँ| यह बहुत ही असरदायक प्रयोग है ।

मन्त्र:-
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गौरी आवे ,शिव जो ब्यावे.अमुक का विवाह तुरंत सिद्ध करेँ,
देर ना करेँ, जो देर होए , तो शिव को त्रिशूल पड़े, गुरु गोरखनाथ की दुहाई फिरै ।।

अमुक के स्थान पर जिस लड़की का विवाह न हो रहा हो उसका नाम लिख सकते है !

यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !

प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी |

शिव-पार्वती का पूजन करने स भी विवाह की मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। इसके लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन करें।

विवाह योग्य लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए. भोजन में केसर का सेवन करने से विवाह शीघ्र होने की संभावनाएं बनती है|

विवाह योग्य व्यक्ति को सदैव शरीर पर कोई भी एक पीला वस्त्र धारण करके रखना चाहिए|

गुरुवार की शाम को पांच प्रकार की मिठाई, हरी ईलायची का जोडा तथा शुद्ध घी के दीपक के साथ जल अर्पित करना चाहिये | यह प्रयोग लगातार तीन गुरुवार को करना चाहिए,इससे शीघ्र विवाह के योग निस्संदेह बनते है ।

गुरुवार को केले के वृ्क्ष पर जल अर्पित करके शुद्ध घी का दीपक जलाकर गुरु के 108 नामों का उच्चारण करने से जल्दी ही जीवनसाथी की तलाश पूर्ण हो जाती है ।

बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है इनकी पूजा से विवाह के मार्ग में आ रही सभी अड़चनें स्वत: ही समाप्त हो जाती हैं। इनकी पूजा के लिए गुरुवार का विशेष महत्व है।

गुरुवार को बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए पीले रंग की वस्तुएं चढ़ानी चाहिए। पीले रंग की वस्तुएं जैसे हल्दी, पीला फल, पीले रंग का वस्त्र, पीले फूल, केला, चने की दाल आदि इसी तरह की वस्तुएं गुरु ग्रह को चढ़ानी चाहिए। साथ ही शीघ्र विवाह की इच्छा रखने वाले युवाओं को गुरुवार के दिन व्रत रखना चाहिए। इस व्रत में खाने में पीले रंग का खाना ही खाएं, जैसे चने की दाल, पीले फल, केले खाने चाहिए। इस दिन व्रत करने वाले को पीले रंग के वस्त्र ही पहनने चाहिए।

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रों स: गुरूवे नम: ॥ मंत्र का पांच माला प्रति गुरुवार जप करें।

अगर किसी का विवाह कुण्डली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है, तो ऎसे व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ तथा शनिवार के दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए. इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है.

शिव-पार्वती का पूजन करने से भी विवाह की मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं। इसके लिए प्रतिदिन शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन करें।

जिन व्यक्तियों की विवाह की आयु हो चुकी है. परन्तु विवाह संपन्न होने में बाधा आ रही है उन व्यक्तियों को यह उपाय करना चाहिए. इस उपाय में शुक्रवार की रात्रि में आठ छुआरे जल में उबाल कर जल के साथ ही अपने सोने वाले स्थान पर सिरहाने रख कर सोयें तथा शनिवार को प्रात: स्नान करने के बाद किसी भी बहते जल में इन्हें प्रवाहित कर दें|

यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो :- शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें ! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रसाद  चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें !

शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार को सात केले, सात गौ ग्राम गुड़ और एक नारियल लेकर किसी नदी या सरोवर पर जाएं। अब कन्या को वस्त्र सहित नदी के जल में स्नान कराकर उसके ऊपर से जटा वाला नारियल ऊसारकर नदी में प्रवाहित कर दें। इसके बाद थोड़ा गुड़ व एक केला चंद्रदेव के नाम पर व इतनी ही सामग्री सूर्यदेव के नाम पर नदी के किनारे रखकर उन्हें प्रणाम कर लें। थोड़े से गुड़ को प्रसाद के रूप में कन्या स्वयं खाएं और शेष सामग्री को गाय को खिला दें। इस टोटके से कन्या का विवाह शीघ्र ही हो जाएगा।

शादी वाले दिन से एक दिन पहले एक ईंट के ऊपर कोयले से “बाधायें” लिखकर ईंट को उल्टा करके किसी सुरक्षित स्थान पर रख दीजिये,और शादी के बाद उस ईंट को उठाकर किसी पानी वाले स्थान पर डाल कर ऊपर से कुछ खाने का सामान डाल दीजिये, विवाह के समय और विवाह के बाद में वर/वधु के दाम्पत्य जीवन में बाधायें नहीं आयेंगी, यह काम वर - वधु या उनके घर का कोई भी सदस्य कर सकता है लेकिन यह काम बिल्कुल चुपचाप करना चाहिए ।

बृहस्पति, शुक्र, बुद्ध और सोम इन वारों में विवाह करने से कन्या सौभाग्यवती होती है। विवाह में चतुर्दशी, नवमी इन तिथियों को त्याग देना चाहिए।

विवाह के पश्चात एक वर्ष तक पिण्ड-दान,मृक्ति का स्नान, तिलतर्पण, तीर्थ-यात्रा,मुण्डन,प्रेतानुगमन आदि नहीं करना चाहिये.

जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा हो या प्रेम विवाह में विलंब हो रहा हो, उन्हें शीघ्र मनपसंद विवाह के लिए श्रीकृष्ण के इस मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए ।

शीघ्र विवाह के लिए भगवान श्री कृष्ण का मन्त्र:-
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"क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।"

यदि किसी कन्या का विवाह नहीं हो पा रहा है तो वह कन्या आज विवाह की कामना से भगवान श्रीगणेश को मालपुए का भोग लगाए तो शीघ्र ही उसका विवाह हो जाता है।

यदि किसी युवक के विवाह में परेशानियां आ रही हैं तो वह भगवान श्रीगणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं तो उसका विवाह भी जल्दी हो जाता है।

शादी के दिन वर,कन्या सुखी विवाहिक जीवन के लिए अपनी राशि के अनुसार अवश्य ही पूजन करें:-
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जिनका विवाह होने वाला है, वह जातक यदि अपनी शादी के दिन कुछ समय निकालकर अपनी राशी के अनुसार बताये गये देवी-देवता का पूजन करें, तो उनके दाम्पत्य जीवन में सदैव प्रेम, सुख, शांति व वैभव बना रहेगा ।

मेष- मेष राशि वाले जातक भगवान गणेश जी को दूर्वा अर्पित करके मोदक का भोग लगाये तत्पश्चात ‘गं गणपतये नम:’ की 9 माला का जाप करें।

वृषभ- इस राशि वाले नौ वर्ष से कम उम्र की कन्या का पूजन करके उसे कोई भी उपहार दें एवं उसके बाद माँ दुर्गा को लाल फूल चड़ाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

मिथुन- मिथुन राशि वाले जातक भगवान शिव के शिवलिंग पर कच्चा दूध चड़ाकर ॐ नमा शिवाये मन्त्र की पाँच माला का जाप करें ।

कर्क- इस राशि वाले गुरु के दर्शन करके उनसे आशीर्वाद लें एवं भगवन शिव पर कच्चा दूध,बेल पत्र और धतूरा चड़ाकर शिव चालीसा का पाठ करें।

सिंह- इस राशि वाले प्रात: सूर्य देव को लाल चन्दन, अक्षत,और फूल मिला जल चड़ाकर आदित्यह्रदयस्तोत्रम का पाठ करें।

कन्या- इस राशि वाले जातक माता दुर्गा के दर्शन एव गणेश चालीसा का पाठ करें।

तुला- तुला राशि वाले जातक प्रभु राधाकृष्ण के दर्शन करें एवं ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’की पाँच माला का जाप करें।

वृश्चिक- इस राशि वाले जातक भगवान शिवजी के दर्शन करके शिव के बारह ज्योतिर्लिंग के नाम का उच्चारण करें।

धनु- इस राशि वाले जातक दत्त भगवान के दर्शन करके गुरु का पाठ करें।

मकर- इस राशि वाले हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान जी के दर्शन करके हनुमान चालीसा का पाठ करें।

कुंभ- इस राशि वाले जातक भगवान राम-सीता के दर्शन करके रामरक्षा स्तोत्र का पाठ अवश्य करें।

मीन- इस राशि वाले श्री गणेश भगवान या श्री सांईं बाबा के दर्शन करके उन्हें लडुओं का भोग लगायें ।

उपरोक्त दिए गए उपाय बहुत ही सरल और अचूक है, इनको करने में कोई बहुत ज्यादा समय या व्यय भी नहीं लगाना पड़ेगा और इनका शुभ प्रभाव आपके पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

रहस्यमयी मंदिर-

हमारा भारत एक प्राचीनतम सभ्यता वाला सांस्कृतिक देश हैं. यह विश्व के उन गिने-चुने देशों में से एक है जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग शांतिपूर्वक रहते हैं. यहां की भगौलिक स्थिति, जलवायु और विविध संस्कृति को देखने के लिए ही विश्व के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं. वैसे अपनी भारत यात्रा के दौरान पर्यटकों को जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आती है तो वह हैं भारत की प्राचीनतम मंदिर. मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं. इनमें से कई मंदिर तो ऐसे भी हैं जो कई हजारों साल पुराने हैं और जिनके बारे में जानना पर्यटकों के लिए कौतुहल का विषय है. आइए ऐसे ही मंदिरों पर प्रकाश ड़ालते हैं-


करनी माता का मंदिर:-
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राजस्थान में बीकानेर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देशनोक शहर में करनी माता का मंदिर है. यहां पहुंचने पर आपको इंसानों से ज्यादा शायद आपको चूहे नजर आएंगे. मान्यता है कि ये चूहे मंदिर में स्थित करनी माता की संतानें और वंशज हैं.

लोक कथाओं के अनुसार करनी माता, देवी दुर्गा की अवतार मानी जाती हैं जो बचपन से ही लोक कल्याण करने लगी थीं इसलिए उनका नाम करनी माता पड़ गया. ऐसी मान्यता है कि करनी माता के सौतेले बेटे की मृत्यु हो जाने पर माता ने यमराज को उनके बेटे को जीवित करने का आदेश दिया. माता के आदेशानुसार उनका बेटा जीवित तो हो गया लेकिन वह चूहा बन गया. माता ने जिस जगह अपना देह त्याग किया वहीं आज करनी माता का मंदिर बना है और मंदिर में हजारों चूहे खुलेआम घूमते नजर आते हैं.


हडिंबा देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश):-
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मनाली में हडिंबा देवी मंदिर, भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. इस मंदिर का आकर्षण इसकी संरचना है जिसे जापान की एक शैली ‘पगोडा’ से लिया गया है. यह पूरा मंदिर लकड़ी से बनाया गया है. पुरातत्वविदों की मानें तो इस मंदिर का निर्माण 1553 में किया था.


शिव मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश): -
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आपको जानकार हैरानी होगी कि इस मंदिर का निर्माण किसी पहाड़ या समतल जगह पर नहीं किया गया है बल्कि यह मंदिर पानी पर बना है. कहने का अर्थ है कि यह शिव मंदिर आंशिक रूप से नदी के जल में डूबा हुआ है. बगल में ही सिंधिया घाट ,  जिसे शिन्दे घाट भी कहते हैं, इस मंदिर की शोभा बढ़ाता है. इस मंदिर में आध्यात्मिक कार्य नहीं होते और यह फिलहाल बंद है. इस मंदिर के बारे में जानने के लिए आज भी लोग जिज्ञासा रखते हैं.


ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर, राजस्थान):-
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यह भगवान ब्रह्मा का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे पूरे विश्व में जाना जाता है. कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासन काल में मंदिरों को नष्ट करने के आदेश के बाद जो एकमात्र मंदिर बचा था वह यही है. इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था. इसके निर्माण को लेकर कई रोचक कथाएं कही जाती हैं. मंदिर के बगल में ही एक मनोहर झील है जिसे पुष्कर झील के नाम से जाना जाता है. पुष्कर झील हिन्दुओं के एक पवित्र स्थान के रूप में जानी जाती है.


चाइनीज काली मंदिर (कोलकाता):-
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कोलकाता के टांगरा में एक 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर है. इस जगह को चाइनाटाउन भी कहते हैं. इस मंदिर में स्थानीय चीनी लोग पूजा करते हैं. यहीं नहीं दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग भी इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं. यहां आने वालों में ज्यादातर लोग या तो बौद्ध हैं या फिर ईसाई. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां आने वाले लोगों को प्रसाद में नूडल्स, चावल और सब्जियों से बनी करी परोसी जाती है.


स्तंभेश्वर महादेव मंदिर (कावी, गुजरात): -
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आप यह कल्पना नहीं कर सकते लेकिन यह बात सच है कि यह मंदिर पल भर के लिए ओझल हो जाता है और फिर थोड़ी देर बाद अपने उसी जगह वापिस भी जाता है. यह मंदिर अरब सागर के बिल्कुल सामने है और वडोदरा से 40 मील की दूरी पर है. खास बात यह है कि आप इस मंदिर की यात्रा तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार कम हो. ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है.


ओम बन्ना मंदिर (जोधपुर, राजस्थान ):-
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जोधपुर में ओम बन्ना का मंदिर अन्य सभी मंदिरों से बिल्कुल् ही अलग है. ओम बन्ना मंदिर की विशेषता है कि इसमें पूजा की जाने वाले भगवान की मूर्ति नहीं है बल्कि एक मोटरसाइकिल और उसके साथ ही ओम सिंह राठौर की फोटो रखी हुई है, लोग उन्हीं की पूजा करते हैं. इस मोटरसाइकिल के बारे में कहा जाता है कि इसी मोटरसाइकिल से 1991 में ओम सिंह का एक्सिडेंट हो गया था. एक्सिडेंट में ओम सिंह की तत्काल मौत हो गई. लोकल पुलिस मोटरसाइकिल को पुलिस थाने लेकर चली गई लेकिन दूसरे दिन मोटरसाइकिल वापस एक्सिडेंट वाली जगह पर पहुंच गई.

उपचार और प्रयोग-http://www.upcharaurprayog.com

काले मस्से चेहरे से हटाये .?

शरीर पर मस्‍से बहुत अजीब लगते हैं। काले मस्‍से तो चेहरे की खूबसूरती को बिगाड़ देते हैं। त्‍वचा पर पेपीलोमा वायरस के कारण छोटे, खुरदुरे कठोर पिंड बन जाते हैं जिसे मस्‍सा कहते हैं। मस्‍से काले और भूरे रंग के होते हैं। मस्‍से 8 से 12 प्रकार के होते हैं। मस्‍से अक्‍सर अपने-आप समाप्‍त हो जाते हैं, लेकिन कुछ मस्‍से इलाज के बाद जाते हैं-





मस्‍से को काटने और फोड़ने के कारण मस्‍से का वायरस शरीर के अन्‍य हिस्‍सों में भी चला जाता है जिसके कारण मस्‍से हो जाते हैं। कभी कभी मस्‍से का वायरस एक आदमी से दूसरे आदमी की त्‍वचा पर आकर मस्‍सा बना देते हैं।

कई बार मस्‍से आपके लिए परेशानी और शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं। अगर आप इनसे राहत पाना चाहते हैं, तो कुछ घरेलू उपाय आजमा सकते हैं। ये उपाय आपको त्‍वचा के इन बिन बुलाये मेहमानों से राहत दिलाने में मदद करेंगे।

लहसुन की कली को छील लीजिए, उसके बाद उसे काटकर मस्‍सों पर र‍गडि़ए, कुछ दिन बाद मस्‍से सूखकर झड़ जाएंगे।

बेकिंग सोडा और अरंडी के तेल को रात में मस्सों लगाकर सो जाइए, ऐसा करने से मस्‍से धीरे-धीरे मस्‍से समाप्‍त हो जाते हैं।

इनमें से सलिसिलिक अम्ल (salicylic acid) का मस्से पर प्रयोग सबसे कारगर पाया गया है।

मस्‍से को समाप्‍त करने के लिए प्‍याज भी फायदेमंद है। एक प्याज को लेकर उसके रस को दिन में एक बार नियमित रूप से लगाने से मस्‍से समाप्‍त होते हैं।

खट्टे सेब लेकर उनका जूस निकाल लीजिए और उसको दिन में कम से कम तीन बार मस्से की जगह पर लगाइए। इस जूस को नियमित रूप से लगाने पर आप पाएंगे कि मस्से धीरे-धीरे झड़ रहे हैं और तीसरे सप्ताह तक लगभग समाप्‍त हो जाएंगे।

मस्से को समाप्‍त करने के लिए एक अगरबत्ती जला लें और अगरबत्ती के जले हुए गुल को मस्से का स्पर्श कर तुरन्त हटा लें। ऐसा 8-10 बार करें, ऐसा करने से #मस्सा सूखकर झड़ जाएगा। अगर ज्‍यादा मस्से हों तो बारी-बारी से सभी मस्सों को इसी तरीके से जलाकर झड़ा दें। ध्यान रहे, अगरबत्ती का स्पर्श सिर्फ मस्से पर ही होना चाहिए।

मस्‍से वाले हिस्‍से को पाइनेपल के जूस में रखिए, इससे मस्‍से नष्‍ट करने वाले एंजाइम होते हैं।

अगर आपके घर पर एलोवेरा है, तो उसका एक छोटा का टुकड़ा काटिये और ताजा जैल मस्‍से पर लगायें। इससे मस्‍सा जल्‍दी ठीक हो जाता है।

रात को सोने से पहले और सुबह उठने के बाद मस्‍सों पर शहद लगाइए, इससे मस्‍से खत्‍म हो जाते हैं।

आलू का प्रयोग करने से भी मस्‍से समाप्‍त होते हैं। आलू को छीलकर काट लीजिए, उसके कटे हुए हिस्‍से को मस्‍सों पर रगडि़ए, ऐसा करने से कुछ दिनों में मस्‍से समाप्‍त हो जाते हैं।

बरगद के पेड़ के पत्तों का रस मस्सों के उपचार के लिए बहुत ही असरदार होता है। इस प्रयोग से त्वचा सौम्य हो जाती है और मस्से अपने आप गिर जाते हैं।

केले के छिलके को अंदर की तरफ से मस्से पर रखकर उसे एक पट्टी से बांध लें। और ऐसा दिन में दो बार करें और लगातार करते रहें जब तक कि मस्से ख़तम नहीं हो जाते।

अरंडी का तेल नियमित रूप से मस्सों पर लगायें। इससे मस्से नरम पड़ जायेंगे और धीरे धीरे गायब हो जायेंगे। अरंडी के तेल के बदले कपूर के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं।

पान में खाने का चूना मिलाकर घिसें। अम्लाकी को मस्सों पर तब तक मलते रहें जब तक मस्से उस रस को सोख न लें। या अम्लाकी के रस को मस्से पर मल कर पट्टी से बांध लें।

थूहर का दूध या कार्बोलिक एसिड सावधानीपूर्वक लगाने से मस्से निकल जाते हैं।

आश्चर्य जनक लाभ के लिए आप उसपर कच्चा लहसून भी लगा सकते हैं। दोनों को मस्सों पर लगाकर उसपर पट्टी बांधकर एक सप्ताह तक रहने दें। एक सप्ताह बाद पट्टी खोलने पर आप पाएंगे की मस्से गायब हो गए हैं।

मस्सों का होम्योपैथिक उपचार:-


थूजा:-


ये एक प्रधान एंटीसाइकोटिक दवाहै। इस औषधि का प्रयोग किसी भी प्रकार के मस्सों में किया जा सकता है। मस्सों के यह सबसे अच्छी औषधि है। मस्सों के झुण्ड निकलने, सिर के पीछे मस्से जैसे दाने होने, ठोड़ी पर मस्से होने, लटकने वाले मस्से होने, खूनी मस्से जिससे कभी-कभी खून निकलता रहता है। इन सभी प्रकार के मस्सों को ठीक करने के लिए थूजा औषधि की 30 और 200  शक्ति का सेवन करना लाभदायक होता है। इन मस्सों में थूजा औषधि के सेवन के साथ-साथ थूजा Q (मूल अर्क ) को रूई पर लगाकर मस्सों पर लगाना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान स्त्री को पहले कुछ दिनों तक सल्फर औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और फिर कुछ दिनों तक थूजा औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और अंत में मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति सेवन कराने से बच्चे को मस्से नहीं होते। यदि त्वचा पर मस्से गोभी की तरह दिखाई दे तो इस औषधि का प्रयोग करना लाभकारी होता है। योनि के ऊपर -उसमे  दर्द होता है की हाथ लगाया  जाता  स्वर यंत्र के अर्बुद में थूजा काफी लाभप्रद है।

नाइट्रिक ऐसिड का प्रयोग :-


फूलगोभी की तरह बड़े खुरदरे मस्से, टेढ़े-मेढ़े मस्से एवं ऐसे मस्से जिसे धोने से बदबूदार खून निकलने लगता हो। छूने  पर भी खून निकलने लगता है।इस तरह के मस्सों में नाइट्रिक ऐसिड औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है। इस औषधि का प्रयोग लटकने एवं होंठों पर मस्से की तरह दाने होने पर भी किया जाता है।

नैट्रम म्यूर :-


पुराने मस्से, ऐसे मस्से जिसमें दर्द हो और मस्से को हल्का सा छू देने पर असहनीय दर्द हो। मस्से कभी-कभी जख्म में बदल जाता है।हाथ और अंगूठे में अनगिनित मस्से, ऐसे लक्षणों वाले मस्सों का उपचार नैट्रम-म्यूर औषधि की 30 शक्ति से फयदेमन्द होता है। यह रक्तहीन,कमजोर और हरित पाण्डु रोग ग्रस्त स्त्रियों की बीमारी में खास रूप से फायदा करती है।

ऐन्टिम टार्ट :-


पुरुषों के जननेन्द्रिय की सुपारी के पीछे मस्से हो गए हों तो ऐन्टिम टार्ट औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है।

कॉस्टिकम :-


कास्टिकम एक प्रधान सॉरा-बिष-नाशक और फास्फोरस की विरोधिनी दवा है। अगर शरीर पर छोटे-छोटे बहुत से ठोस मस्से हो गए हों जिसके जड़ मुलायम एवं ऊपर के मुंह कठोर और नोकदार  हो तो ऐसे मस्सों को ठीक करने के लिए कॉस्टिकम औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता है। नाखूनों के किनारे, बाहों, हाथों, पलकों एवं चेहरे पर होने वाले मस्सों में भी इस औषधि का उपयोग किया जाता है।

कैलि म्यूर :-


हाथों पर मस्से होने पर कैलि म्यूर औषधि का सेवन करने के साथ इस औषधि की 3x मात्रा को एक चम्मच पानी में मिलाकर लोशन बनाकर मस्सों पर लगाना भी चाहिए।

सीपिया :-


जननेन्द्रिय की आगे की त्वचा के अगले भाग या शरीर पर बड़े-बड़े कठोर एवं काले मस्से होने पर सीपिया औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना हितकारी होता है। सीपिया के बाद सल्फर की जरूरत पड़ती है।

नैट्रम-म्यूर :-


हथेलियों पर मस्से होने पर नैट्रम-म्यूर औषधि की 3x से 200  शक्ति का सेवन करना लाभकारी होता है।

उपचार और प्रयोग -

Monday, July 27, 2015

बिना खर्च मोटापा घटाए -

मोटापे से दुनिया की आज आधी आबादी परेशान है। मोटापा बढने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से प्रमुख है- अधिक चर्बीयुक्त आहार का सेवन करना, कम व्यायाम करना और स्थिर जीवन-यापन करना, असंतुलित व्यवहार और मानसिक तनाव की वजह से लोग ज्यादा भोजन करने लगते हैं, जो मोटापा का कारण बनता है, शारीरिक क्रियाओं के सही ढंग से नहीं होने पर भी शरीर में चर्बी जमा होने लगती है, बाल्यावस्था और युवावस्था के समय का मोटापा व्यस्क होने पर भी रह सकता है और हाइपोथाइरॉयडिज़्म आदि जैसे कारण मेन हैं-




यदि आप मोटे हैं तो कम खाइये और ज्‍यादा से ज्‍यादा व्‍यायाम कीजिये। पर ऐसा नहीं है, यदि ऐसा होता तो काफी लोग अपना वजन आसानी से कम कर चुके होते। अगर आप भी मोटापे का शिकार हैं और आपका वजन व्‍यायाम करने के बाद भी कम नहीं हो रहा है तो कहीं ना कहीं कुछ कमी रह गई है। यानी इसका यह मतलब नहीं है कि आप जरुरत से कम खाने लगे या फिर बहुत ज्‍यादा व्‍यायाम करने लगें। इसका यह मतलब होता है कि आपको अपनी लाइफस्‍टाइल में कुछ मामूली और जरुरी परिवर्तन करने होंगे-

यदि आप ने मोटापा घटाने का प्‍लान नहीं बनाया तो समझिये कि आप कभी पतले नहीं हो सकते। एक असली गोल बनाइये कि आप कितने दिनों में कितना वजन कम कर सकते हैं। एक बात का ख्‍याल रखियेगा कि खुद को परेशानी में ना डालियेगा-

नींद मोटापे से लड़ती है। रिसर्च के मुताबिक 7 से 8 घंटो की कम नींद भूख पैदा करती है, जिससे आप जरुरत से ज्‍यदा खा लेते हैं और मोटापा बढ जाता है-

लोग खाना भी 4 टाइम खाएंगे और स्‍नैक्‍स भी। यदि आपको मिनट-मिनट पर स्‍नैक्‍स खाने की आदत है तो खाना थोड़ा कम खाइये क्‍योंकि इससे शरीर में कैलोरीज बढ जाती है।

कई लोग बस दिनभर खाते रहते हैं और उन्‍हें पता ही नहीं होता कि वे कितना खाना खा जाते हैं। आपने दिनभर में कितना खाया उसका हिसाब रखिये।

65 प्रतिशत लोग शुगर वाला पेय या कोल्‍ड्रिक्‍स आदि बहुत पीते हैं, जिससे पेट तो भरता नहीं बल्कि कैलोरी अलग से मिलती है।

एक कडक डाइट पर जाना आपके दिमाग और शरीर पर दोनों पर ही भारी पड़ सकता है। इसलिये एक सफल डाइट प्‍लान पर टिके रहने के लिये हफ्ते में एक बार पिज्‍जा या चाउमीन खा सकते हैं। ऐसा करने से आप संतुष्‍ट बने रहेंगे और अपनी डाइट को अच्‍छे से फॉलो करेंगे।

वेट लॉस करना है तो अपने आहार से पास्‍ता, चावल और ब्रेड आदि को हटा कर फल और सब्‍जियां शामिल करें। इससे अगर आप ज्‍यादा भी खाएंगे तो भी वजन नहीं बढेगा।

यदि आपके पास जिम के लिये पैसे नहीं हैं तो घर पर ही रस्‍सी कूदिये। पहले 50 बार कूदिये और बाद में उसे बढा कर 100 कर दीजिये।


आसान और फ्री उपाय :-



जी हाँ मोटापा घटाने की एक फ्री का उपाय है- जिसमे कुछ खर्च भी नहीं है और केवल दिन भर में पन्द्रह मिनट रस्सी कूदने से अनुमानत: उतना ही फायदा होता है जितना आधा घंटा दौड़ने या तैरने से या साइकिल चलाने से मिलता है। जिन व्यक्तियों के पास समय की कमी हैं, उनके लिए भी यह उपयुक्त व्यायाम है।यह आसान व्यायाम या खेल है रस्सी कूदना। रस्सी कूदने से शरीर में स्फूर्ति आती है, शरीर सुडौल व छरहरा बनता है। रस्सी कूदने से शरीर के वजन पर नियंत्रण रखा जा सकता है और मोटापे जैसे भयंकर रोग जो कई गंभीर रोगों का कारण है, से छुटकारा पाया जा सकता है। रस्सी कूदने से शरीर पर चढ़ी अतिरिक्त चर्बी छट जाती है। रस्सी कूदने के लिए जहां 15 मिनट का समय ही बहुत है इससे बहुत ही जल्दी मोटापा घट जाता है -

लोग दिन में दो से तीन बार खाना खाते हैं उन्‍हें हफ्ते में 1 दिन उपवास जरुर रखना चाहिये। यह एक अच्‍छी टेक्‍नीक है जिससे आप आराम से वजन कम कर सकते हैं।

दिनभर में खूब सारा पानी पीजिये। इससे आपको भूख नहीं लगेगी और पेट भी भरा रहेगा। भोजन करने के पहले भी 1 गिलास पानी पीना चाहिये, इससे आप मोटापे से बचे रहेंगे।
उपचार और प्रयोग-

Sunday, July 26, 2015

पायें स्वस्थ , मजबूत और चमकदार बाल -How to care of hair find healthy

सुन्दर काले व चमकदार बाल नारी की सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं। पुराने समय में बालों के रखरखाव व निखार के लिए नारियाँ अनेक तरीके इस्तेमाल में लाती थीं- जिनसे बाल वास्तव में ही काले, घने, मजबूत और चमकदार बनते थे -लेकिन आज के युग में कई तरह के साबुन और अन्य चीजों को बालों की सार-संभाल के लिए प्रयोग में लाया जाने लगा है-





बालों के रख रखाव के बारे में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ देने जा रहे हैं, जिन्हें इस्तेमाल में लाकर बालों को सुदृढ़, काले और चमकदार बनाया जा सकता है....


घी खाएं और बालों के जड़ों में घी मालिश करें।


गेहूं के जवारे का रस पीने से भी बाल कुछ समय बाद काले हो जाते हैं।


तुरई या तरोई के टुकड़े कर उसे धूप मे सूखा कर कूट लें। फिर कूटे हुए मिश्रण में इतना नारियल तेल डालें कि वह डूब जाएं। इस तरह चार दिन तक उसे तेल में डूबोकर रखें फिर उबालें और छान कर बोतल भर लें। इस तेल की मालिश करें। बाल काले होंगे।


नींबू के रस से सिर में मालिश करने से बालों का पकना, गिरना दूर हो जाता है। नींबू के रस में पिसा हुआ सूखा आंवला मिलाकर सफेद बालों पर लेप करने से बाल काले होते हैं।


बर्रे(पीली) का वह छत्ता जिसकी मक्खियाँ उड़ चुकी हो 25 ग्राम, 10-15 देसी गुड़हल के पत्ते,1/2 लीटर नारियल तेल में मंद मंद आग पर उबालें सिकते-सिकते जब छत्ता काला हो जाये तो तेल को अग्नि से हटा दें. ठंडा हो जाने पर छान कर तेल को शीशी में भर लें. प्रतिदिन सिर पर इसकी हल्के हाथ से मालिश करने से बाल उग जाते हैं और गंजापन दूर होता है.


कुछ दिनों तक, नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।


नीबू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर सिर पर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।


तिल का तेल भी बालों को काला करने में कारगर है।


आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।


नीम का पेस्ट सिर में कुछ देर लगाए रखें। फिर बाल धो लें। बाल झड़ना बंद हो जाएगा।


चाय पत्ती के उबले पानी से बाल धोएं। बाल कम गिरेंगे।


बेसन मिला दूध या दही के घोल से बालों को धोएं। फायदा होगा।


दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।


50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें। इस उबले हुए पानी से बालों को धोएं। इससे बाल 1 महीने में ही काफी लंबे हो जाते हैं।


नीम और बेर के पत्तो को पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा लें और इसके 2-3 घण्टों के बाद बालों को धो डालें। इससे बालों का झड़ना कम हो जाता है और बाल लंबे भी होते हैं।


लहसुन का रस निकालकर सिर में लगाने से बाल उग आते हैं।


सीताफल(शरीफा ) के बीज और बेर के बीज के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। ऐसा करने से बाल लंबे हो जाते हैं।


10 ग्राम आम की गिरी को आंवले के रस में पीसकर बालों में लगाना चाहिए। इससे बाल लंबे और घुंघराले हो जाते हैं।


शिकाकाई और सूखे आंवले को 25-25 ग्राम लेकर थोड़ा-सा कूटकर इसके टुकड़े कर लें। इन टुकड़ों को 500 ग्राम पानी में रात को डालकर भिगो दें। सुबह इस पानी को कपड़े के साथ मसलकर छान लें और इससे सिर की मालिश करें। 10-20 मिनट बाद नहा लें। इस तरह शिकाकाई और आंवलों के पानी से सिर को धोकर और बालों के सूखने पर नारियल का तेल लगाने से बाल लंबे, मुलायम और चमकदार बन जाते हैं।


ककड़ी में सिलिकन और सल्फर अधिक मात्रा में होता है जो बालों को बढ़ाते हैं। ककड़ी के रस से बालों को धोने से तथा ककड़ी, गाजर और पालक सबको मिलाकर रस पीने से बाल बढ़ते हैं। यदि यह सब उपलब्ध न हो तो जो भी मिले उसका रस मिलाकर पी लें। इस प्रयोग से नाखून गिरना भी बन्द हो जाता है।


कपूर कचरी 100 ग्राम, नागरमोथा 100 ग्राम, कपूर तथा रीठे के फल की गिरी 40-40ग्राम, शिकाकाई 250 ग्राम और आंवले 200 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी का चूर्ण तैयार कर लें। इस मिश्रण के 50 ग्राम चूर्ण में पानी मिलाकर लुग्दी(लेप) बनाकर बालों में लगाना चाहिए। इसके पश्चात् बालों को गरम पानी से खूब साफ कर लें। इससे सिर के अन्दर की जूं-लींकें मर जाती हैं और बाल मुलायम हो जाते हैं।


गुड़हल के फूलों के रस को निकालकर सिर में डालने से बाल बढ़ते हैं।


गुड़हल के ताजे फूलों के रस में जैतून का तेल बराबर मिलाकर आग पर पकायें, जब जल का अंश उड़ जाये तो इसे शीशी में भरकर रख लें। रोजाना नहाने के बाद इसे बालों की जड़ों में मल-मलकर लगाना चाहिए। इससे बाल चमकीले होकर लंबे हो जाते हैं।


बालों को छोटा करके उस स्थान पर जहां पर बाल न हों भांगरा के पत्तों के रस से मालिश करने से कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकलते हैं जिनके बाल टूटते हैं या दो मुंहे हो जाते हैं।


त्रिफला के चूर्ण को भांगरा के रस में 3 उबाल देकर अच्छी तरह से सुखाकर खरल यानी पीसकर रख लें। इसे प्रतिदिन सुबह के समय लगभग 2 ग्राम तक सेवन करने से बालों का सफेद होना बन्द जाता है तथा इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।


आंवलों का मोटा चूर्ण करके, चीनी के मिट्टी के प्याले में रखकर ऊपर से भांगरा का इतना डाले कि आंवले उसमें डूब जाएं। फिर इसे खरलकर सुखा लेते हैं। इसी प्रकार 7भावनाएं (उबाल) देकर सुखा लेते हैं। प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ सेवन से करने से असमय ही बालों का सफेद होना बन्द जाता है। यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने वाला, उम्र को बढ़ाने वाला लाभकारी योग है।


भांगरा, त्रिफला, अनन्तमूल और आम की गुठली का मिश्रण तथा 10 ग्राम मण्डूर कल्क व आधा किलो तेल को एक लीटर पानी के साथ पकायें। जब केवल तेल शेष बचे तो इसे छानकर रख लें। इसके प्रयोग से बालों के सभी प्रकार के रोग मिट जाते हैं।


250 ग्राम अमरबेल को लगभग 3 लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाये तो इसे उतार लें। सुबह इससे बालों को धोयें। इससे बाल लंबे होते हैं।


त्रिफला के 2 से 6 ग्राम चूर्ण में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है।


खट्टी दही में चुटकी भर ‍िफटकरी मिला लें,साथ ही थोड़ी सी हल्दी भी मिला लें। इस मिश्रण को सिर के बालों में लगाने से सिर की गंदगी तो दूर होती ही,साथ ही सिर में फैला संक्रमण भी दूर होता है। इस क्रिया को करने से सिर के बाल निखर उठते हैं।


बालों को धोने के बाद गोलाकार कंघी से बालों में भली प्रकार से ब्रश करना चाहिए। इसके बाद सिर के बालों की जड़ों में उंगली घुमाते हुए अपना हाथ ऊपर से नीचे की ओर ‍िफराएँ। ऐसा करने से आपके बाल हमेशा मुलायम बने रहेंगे।


भूलकर भी अपने सिर के बालों के साथ ज्यादा एक्सपेरिमेंट न करें। ऐसा करने से बाल कमजोर होकर असमय टूटने लगते हैं।


बालों की साफ-सफाई में लापरवाही न बरतें। याद रखें कि पसीना बालों की जड़ों में पहुँचने पर बालों को नुकसान पहुँचाता है। इससे बचने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार बालों की सफाई जरूर करें।


तीन चम्मच बेसन में डेढ़ गिलास पानी मिला कर इसे सिर के बालों में आधा घन्टे तक लगाए रखें। इसके बाद बालों को गुनगुने पानी से धो डालें। सूखने पर अच्छी तरह से बालों को झाड़ लें। ऐसा करने से सिर में लगे बेसन के कण अच्छी तरह से सिर के बालों से निकल जाते हैं और बाल चमकदार लगने लगते हैं।


लंबे बालों के लिए आंवले का रस और तिल का तेल बराबर मात्रा मिलाकर तब तक गर्म करें जब तक उसमें का पानी ना जल जाए। इसे ठंड़ा कर के शीशी में भरकर रख लें और नियमित रुप से बालों में लगाएं इससे सिर ठंडा तथा बाल लंबे, काले व मजबूत बोते हैं। बाजार में बिकने में वाले तेल केमिकल युक्त होने के कारण बालों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। साथ ही बाल धोने के लिए सुखे आंवले को रात में भिगों दे फिर उसी से बाल धोएं। इससे बाल मजबूत व मुलायम होते हैं।

उपचार और प्रयोग -

Saturday, July 25, 2015

रहस्मयी अनोखे खज़ाने जो आज भी रहस्य है-

खजानों की खोज का विचार हमेशा से इंसानी दिमाग में आता रहा है। बहुत से लोगों ने इस तरह की खोजों में अपना जीवन लगा दिया। ऐसे कुछ खजाने खोज भी लिए गए लेकिन कुछ खजाने केवल किवदंतियां बन कर रह गए।

इस दुनिया में सैंकड़ों ऐसे खजाने दबे और छुपे हुए हैं जो कभी किसी काल में खो गए थे। इस तरह के खजाने या तो जानबूझ कर छुपाए गए या फिर दुर्घटनावश वह खो गए। समुद्र के गर्भ में, पहाडियों को चोटी पर, पूजा घरों में, कुओं में, महलों में, और भी जाने कहां कहां इन खजानों को छुपाने का प्रयास किया गया था। भारत में भी ऐसे खजाने और उनकी कहानियों की कोई कमी नहीं है।

हम आपको बताएंगे भारत के ऐसे कुछ खोए हुए खजानों के बारे में जिनकी कहानी भी बेहद दिलचस्प है। हालांकि इनमें से कौन सी कहानी सच्ची है और कौन सी कल्पना इसके बारे में ठीक-ठीक कुछ कहा नहीं जा सकता।


चारमीनार की सुरंग का खजाना:-
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ऐसा माना जाता है कि कभी ऐतिहासिक गोलकुंडा किला और चारमीनार के बीच 15 फुट चौड़ी और 30 फुट ऊंची एक भूमिगत सुरंग थी। इस सुरंग को सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने बनवाया था। और माना जाता है कि इस सुरंग में शाही परिवार ने अपना शाही खजाना छिपाकर रखा था जो स्‍थानीय किस्सों के अनुसार आज भी यहां मौजूद है।

सुल्तान ने यूं तो इस सुरंग को इसलिए बनवाया था कि मुश्किल वक्त में जान बचाई जा सके लेकिन बाद में इस सुरंग में उन्होंने गुप्त तहखाने भी बनवाए जिनमें उन्होंने खरबों रुपये के खजाने को छुपा दिया। सैंकडों सालों तक पैसा, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य रत्न जमा किए गए थे और फिर इस सुरंग में दफना दिए गए। 1936 में निजाम मीर ओसमान अली ने एक सर्वे कराया था और साथ ही नक्शा भी बनवाया था। हालांकि उस दौरान यहां खुदाई नहीं कराई गई थी।

इस खजाने का रहस्य अभी तक भी सुलझ नहीं पाया है और इसके सुलझने की संभावना भी कम ही है लेकिन भी भी इसमें लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है।


पद्मनाभ मंदिर का खजाना:-
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आज-कल फिलहाल में जिस खजाने की चर्चा सबसे ज्यादा हुई थी वह था पद्मनाभ स्वामी मंदिर का खजाना। माना जाता है कि करीब एक लाख करोड़ का खजाना अभी तक वहां मिल चुका है जबकि इससे कहीं अधिक वहां के तहखानों में बंद है।

कहा जाता है कि 10 वीं शताब्दी में आए राजवंश ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। कहीं-कहीं इस मंदिर के 16वीं शताब्दी के होने का भी जिक्र है। इसके बाद 1750 में त्रावणकोर के एक योद्धा मार्तंड वर्मा ने आसपास के इलाकों को जीत कर संपदा बढ़ाई।

त्रावणकोर के शासकों ने शासन को दैवीय स्वीकृति दिला दी थी और राज्य भगवान को समर्पित कर दिया था। मंदिर से भगवान विष्णु की एक मूर्ति भी मिली है जो शालिग्राम पत्थर से बनी हुई है।

मार्तंड वर्मा ने पुर्तगाली समुद्री बेडे और उसके खजाने पर भी कब्जा कर लिया था। यूरोपीय लोग मसालों खासकर काली मिर्च के लिए भारत आते थे। त्रावणकोर ने इस व्यवसाय पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया था।

यह मंदिर एक ऐसे इलाके में बना हुआ है जहां कभी कोई विदेशी हमला नहीं हुआ। 1790 में टीपू सुल्तान ने मंदिर पर कब्जे की कोशिश की थी लेकिन कोच्चि में उसे हार का सामना करना पड़ा था।

1991 में त्रावणकोर के अंतिम महाराजा बलराम वर्मा की मौत हो गई। 2007 में एक पूर्व आईपीएस अधिकारी सुंदरराजन ने एक याचिका कोर्ट में दाखिल कर राज परिवार के अधिकार को चुनौती दी। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने तहखाने खोलकर खजाने का ब्यौरा तैयार करने को कहा।

27 जून 2011, यही वो तारीख थी जब तहखाने खोलने का काम शुरू किया गया। तहखाने खुले तो लोगों की आंखे खुली रह गई। पांच तहखानों में करीब एक लाख करोड़ की संपत्ति निकली है जबकि एक तहखाना अभी भी नहीं खोला गया है। उस तहखाने को जोड़कर कई अंधविश्वास जनित कहानियां सुना दी गईं!

माना जा रहा है कि इस तहखाने में जितना खजाना है वह इस पूरे खजाने से बड़ा है। सोचिए उस तहखाने से क्या निकलेगा? क्या यही है दुनिया का सबसे बड़ा खजाना.?


सोनगुफा का खजाना:-
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बिहार के राजगीर में भी खजाना दबे होने की बात कही जाती है। यहां की पहाड़ियों में सोन गुफा का महत्व बेहद खास है। माना जाता है कि इन पहाड़ियों के सीने में दफन है बेशुमार सोना।

कहा जाता है कि यह जगह महाभारत कालीन है। किदवंती है कि यहां भीम ने जरासंध का वध किया था। पहले इस जगह को राजगृह कहा जाता था। कालांतर में यह जगह मगध साम्राज्य के आधीन आ गई।

बौद्ध और जैन धर्म को मानने वाले भी इन गुफाओं को पवित्र मानते हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग के मुताबिक ये गुफाएं तीसरी-चौथी शताब्दी की हैं। वहां स्थित सरकारी शिलालेखों के मुताबिक यहां रथ के पहियों के निशान मिले थे और शंख भाषा में लिखे कुछ अंश भी मिले थे।
बिम्बिसार को अजातशत्रु ने इसी जगह पर कैद करके रखा था। यहां से लोहे की हथकड़ियां भी मिली थीं। पिप्पल गुफा में भागवान बुद्ध आया करते थे ऐसा भी माना जाता है।

खजाना किसका है और कबसे यहां दबा पड़ा है ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिलते। कोई खजाने को महाभारत कालीन मानता है तो कोई बिम्बिसार और अजातशत्रु का बताता है। ऐसा भी कहा जाता है कि खजाना अजातशत्रु को ना मिल पाए इसलिए उसके पिता बिम्बिसार ने खजाने को गुफाओं की भूलभुलैया में दफना दिया था।

अंग्रेजों ने भी तोप से इन गुफाओं तो उड़ाने की कोशिश की थी लेकिन असफल रहे। तोप के गोले के निशान अभी भी वहां पर मौजूद हैं। माना जाता है कि शंख भाषा में जो लिखा है वही खजाने की असली कुंजी है लेकिन इस भाषा का कोई जानकार इस दुनिया में नहीं है।
गुफाएं पॉलिश की हुईं है और भागवान विष्णु की मूर्ति भी यहां मिली थी। वर्तमान में यह मूर्ति नालंदा संग्रहालय में रखी है।




जयगढ़ के किले का खजाना:-
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राजस्थान के कुछ खजानों की चर्चा समय समय पर होती रही है। इन्हीं में से एक है मान सिंह प्रथम का खजाना। मान सिंह अकबर का सेनापति था। माना जाता है कि 1580 में उन्होंने अफगानिस्तान को जीत लिया था। वहां से मुहम्मद गजनी के खजाने को लेकर वह हिंदुस्तान तो आ गया लेकिन उसने इसके बारे में अकबर को नहीं बताया। उसने इस खजाने को जयगढ़ किले में दफना दिया। यह माना जाता है कि उसने महल के नीचे तहखाने बनाए और खजाने को उसमें भर दिया। कहा तो ये भी जाता है कि 1976 में इमरजेंसी के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी इस खजाने की तलाश में जान लगा दी , कई महीनों तक खुदाई चलती रही, लेकिन उनकी ये खोज व्यर्थ गई।

हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि छह महीने के बाद खुदाई जब रुकी तो ट्रकों का काफिला किले से निकला। दिल्ली जयपुर रोड को आम आदमियों के लिए बंद कर दिया गया और फौजी ट्रकों में खजाने के प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचा दिया गया। एक स्थानीय पत्रकार ने RTI के माध्यम से ये जानना चाहा कि क्या सरकार ने वाकई ऐसी कोई खुदाई कराई थी जिसमें खजाना निकला हो। लेकिन सरकार ने इस RTI का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया।

इस खजाने को लेकर एक और भी कहानी राजस्थान में प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि मान सिंह ने इस खजाने के बारे में जोधा बाई को बता दिया था। जोधा ने इस खजाने को फतेहपुर सीकरी स्थित एक मंदिर में रखवा दिया था। वक्त की रेत में ये मंदिर दफन हो गया और साथ ही खो गया खजाने का रहस्य भी। स्थानीय लोग मानते हैं कि खजाना अभी भी उसी मंदिर में है।

हिमाचल प्रदेश की कमरुनाग झील का खजाना:-
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हिमाचल प्रदेश की कमरुनाग झील के बारे में माना जाता है कि इसका अंत पाताल में होता है और खजाने की रक्षा करते हैं नाग देवता। मंडी से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस झील को लोग पवित्र मानते हैं। माना जाता है कि अगर इस झील में आभूषण अर्पित किए जाएं तो मनोकामना पूरी होती है। लोग दूर दूर से आते हैं और गहने आदि इस झील को अर्पित कर देते हैं। वह मानते हैं कि उनकी भेंट सीधे देवताओं तक पहुंच जाती है।

मंदिर के इतिहास के बारे में कोई ठीक-ठीक दावा कर पाना मुश्किल है । दावा तो यह भी किया जाता है कि यह झील महाभारत काल की है। यहां एक लकड़ी का मंदिर भी बना है। इस मंदिर में कमरुनाग की एक पुरानी मूर्ति भी रखी है। स्थानीय लोग इस झील को चमत्कारी भी मानते हैं। कहा जाता है कि रात के वक्त झील से गड़गड़ाहट की आवाजें आती हैं और पानी उपर उठ कर मंदिर तक आता है। पानी प्राचीन मूर्ति के चरणों तक आता है और फिर वापस लौट जाता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

सदियों से झील में गहने चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। झील की तलहटी में जमा खजाने का आकार कितना होगा या उसकी कीमत कितनी होगी यह कोई नहीं जानता लेकिन इसकी कीमत अरबों में होगी इसमें कोई दो राय नहीं।

आखिर सदियों से जमा हो रहे गहनों की कीमत इससे कम हो भी कैसे सकती है?

आधारित-(रहस्यमयी हिन्दी उपन्यास एवं कथाये)

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आपकी उम्र बैठे रहने से कम हो रही है -

अधिक टीवी देखने अथवा बैठे रहने वाले व्यक्ति कम जीते हैं। यह निष्क्रियता उम्र घटाने का काम करती है। येसा अमरीका के एक शोध ने दावा किया है - आंकडों से पता चला कि कुर्सी पर जमे रहने से होने वाली विभिन्न बीमारियों से मरने का खतरा 27 फीसदी और टेलीविजन देखने से होने वाली बीमारियों से मौत होने का खतरा 19 फीसदी होता है।


अगर दफ्तरों में कोई व्यक्ति महज 3 घंटे प्रतिदिन ही कुर्सी पर बैठता है, तो उसकी उम्र में 2  वर्षों का इजाफा हो सकता है। लेकिन भारत में 8 घंटे से लेकर 12 घंटे काम लिया जाता है और आयु कम होती जा रही है तथा मानसिक चिंता भी इसका मुख्य कारण है -पहले के खान-पान का ढंग भी बदल गया है -


टेलीविजन देखने के समय में प्रतिदिन 2 घंटों की कमी करने से भी उम्र में 1.5 वर्षों का इजाफा होता है। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों को शामिल किया था। आज टी वी का उपयोग बच्चो में असमय ही द्रष्टि -संकर की बिमारी में इजाफा कर रहा है -कम उम्र में ही चस्मे का उपयोग ,माइग्रेन की शिकायत जेसी बीमारियों में वृधि इसका मुख्य कारण है -


दफ्तरों के व्यस्त माहौल और कुर्सी पर बिताए जाने वाले समय का दुष्प्रभाव स्वास्थ्य पर पड़ता है और इसके फलस्वरूप विभिन्न बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें रक्तचाप, हृदय रोग इत्यादि प्रमुख हैं। टेलीविजन, कंप्यूटर इत्यादि देखने में अधिक समय बिताने से भी निष्क्रियता को बढा़वा मिलता है, जिससे इन बीमारियों के बढ़ने की संभावना रहती है।

उपचार और प्रयोग-

लाश को भी बदल देता है डायमंड में-

यदि आप अपने किसी प्रियजन कि मृत्यु के बाद उसकी यादों को डायमंड के रूप में सहज के रखना चाहे तो आप संपर्क करे रिनाल्डो विल्ली (Rinaldo Willy) से जिनका काम लाशों को डायमंड में परिवर्तित करना है।




जी हाँ यह बात सुनने में बड़ी ही अजीब लग सकती है पर यह है एकदम सत्य-


स्विट्ज़रलैंड के रिनाल्डो विल्ली एक कम्पनी Algordanza चलाते है जहा कि उन्नत तकनीको का प्रयोग करते हुए, इंसान के अंतिम संस्कार के बाद बची राख को डायमंड में परिवर्तित किया जाता है।


Algordanza एक स्विस शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ होता है "यादें" ।  कंपनी हर साल लगभग 850 लाशों को डायमंड में तब्दील कर देती है।  इस काम कि कॉस्टिंग डायमंड के साइज़ पर निर्भर करती है जो कि 3 लाख से 15 लाख के बीच बैठती है।

कैसे आया यह विचार :-
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रिनाल्डो विल्ली को ह्यूमन एशेज से डायमंड बनाने का विचार कैसे आया इसकी कहनी भी बड़ी रोचक है। लगभग 10 साल पहले रिनाल्डो के एक टीचर ने उसे एक आर्टिकल पढ़ने को दिया जो कि सेमी कंडेक्टर इंडस्ट्री में प्रयोग होने वाले सिंथेटिक डायमंड के उत्पादन के ऊपर था। उस आर्टिकल में यह बताया गया था कि किस तरह एशेज( राख ) से डायमंड बनाए जा सकते है। रिनाल्डो ने गलती से इसे ह्यूमन एशेज समझ लिया जबकि आर्टिकल में वेजिटेबल एशेज का जिक्र था। रिनाल्डो को यह आईडिया पसंद आया और उसने अपने टीचर से ह्यूमन एशेज को डायमंड में बदलने के ऊपर और जानकारी मांगी। तब टीचर ने उसे बताया कि तुम गलत समझ रहे हो या ह्यूमन एशेज कि नहीं बल्कि वेजिटेबल एशेज कि बात हो रही है। इस अपर रिनाल्डो ने कहा कि अगर वेजिटेबल एशेज को डायमंड में बदला जा सकता है तो ह्यूमन एशेज को क्यों नहीं. ?


टीचर को यह विचार पसंद आया और उसने उस आर्टिकल के लेखक से संपर्क किया , जो कि वही स्विट्ज़रलैंड में रहता था तथा जिसके पास सिंथेटिक डायमंड बनाने कि कुछ मशीने थी। फिर उन्होंने उस आईडिया पर मिल के काम किया और कम्पनी  Algordanza  अस्तित्व में आई।


कैसे बनता है डायमंड : -
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ह्यूमन एशेज से डायमंड बनाने के लिए वो सबसे पहले ह्यूमन एशेज को स्विट्ज़रलैंड स्तिथ अपनी लैब में मंगवाते है। लैब में एक विशेष प्रकिया के द्वारा उस ह्यूमन एशेज से कार्बन को अलग किया जाता है। इस कार्बन को बहुत अधिक तापमान पर गर्म करके ग्रेफाइट में परिवर्तित किया जाता है। फिर इस ग्रेफाइट को एक मशीन में रखा जाता है जहा पर ऐसी कंडीशन बनाई जाती है जैसी कि जमीन के बहुत नीचे होती है यानि कि बहुत अधिक दवाब और बहुत अधिक तापमान। इस कंडीशन में ग्रेफाइट को कुछ महीनो के लिए रखा जाता है जिससे कि वो ग्रेफाइट डायमंड में बदल जाता है।


सिंथेटिक डायमंड और रियल डायमंड में फर्क :-
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रासायनिक संरचना और गुणों के आधार पे सिंथेटिक डायमंड और रियल डायमंड में कोई फर्क नहीं होता है। दोनों कि रासायनिक संरचना और रासायनिक गुण समान होते है।  एक मात्र फर्क इनकी कीमतो में होता है। रियल डायमंड, सिंथेटिक डायमंड से महंगे आते है। इन दोनों डायमंड में फर्क करना बहुत मुश्किल होता है यहाँ तक कि एक अनुभवी ज्वेलर्स भी उनमे फर्क नहीं कर सकता है।  इनमे फर्क करने का एक मात्र तरीका केमिकल स्क्रीनिंग है जो कि लैब में हो सकती है।


वर्ल्ड में इनकी फिलहाल 12 देशों में ब्रांच है, जिनमे से एशिया में 4 (जापान, सिंगापूर, हांगकांग, थाइलैंड) है।   जहा कि आप अपना आर्डर दे सकते है। भारत में फिलहाल ब्रांच नहीं है। Algordanza के टोटल बिज़नस में अकेले जापान का हिस्सा 25 पर्सेंट है। इसके दो कारण है एक तो जापानिओ का अपनों के प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव होता है और दूसरा वहाँ अधिकतर लोगो का विधुत शवगृह में अंतिमसंस्कार किया जाता है जिससे कि ह्यूमन एशेज प्राप्त हो जाती है। जबकि वेस्टर्न कन्ट्रीज में अधिकतर शवो को दफनाया जाता है।

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Friday, July 24, 2015

पीलिया क्या है .?

* जब भी रोगी का यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है तथा उसे पीलिया हो सकता है, तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे व्यक्ति की हालत बिगडऩे लगती है।





* यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है। कई लोग यह मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए जबकि आयुर्वेद चिकित्सक ऐसा नहीं मानते उनका कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर व छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है यह रोगी को कोई नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाता है।

* पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि मकोय की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।

एक और अजमाया हुआ प्रयोग:-
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सरसों के तेल की खली 100 ग्राम का चूर्ण बना लें इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा 100 ग्राम दही में मिलाकर सुबह 8-9 बजे लें स्वाद अनुसार नमक या चीनी भी डाल सकते है एक सप्ताह लगातार लेने से पीलिया मल मार्ग से बाहर निकल जायेगा..लेकिन  घी तेल में तली चीजो से 10 दिनो तक परहेज करें तो सच माने आपका पीलिया एक सप्ताह में पीलिया जड से समाप्त हो जायेगा-

अन्य उपाय :-
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* नाश्ते में अंगूर ,सेवफल पपीता ,नाशपती तथा गेहूं का दलिया लें । दलिया की जगह एक रोटी खा सकते हैं।

* मुख्य भोजन में उबली हुई पालक, मैथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और ऐक गिलास छाछ लें।

* करीब दो बजे नारियल का पानी और सेवफल का जूस लेना चाहिये।

* रात के भोजन में एक कप उबली सब्जी का सूप , गेहूं की दो चपाती ,उबले आलू और उबली पत्तेदार सब्जी जैसे मेथी ,पालक ।

* रात को सोते वक्त एक गिलास मलाई निकला दूध दो चम्मच शहद मिलाकर लें।

* सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थौडी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियों और फलों का जूस पीना चाहिेये। कच्चे सेवफल और नाशपती अति उपकारी फल हैं।

* दालों का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है। लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में 3-4 बार नीबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिये।

* मूली के हरे पत्ते पीलिया में अति उपादेय है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी।

* धनिया के बीज को रातभर पानी में भिगो दीजिये और फिर उसे सुबह पी लीजिये। धनिया के बीज वाले पानी को पीने से लीवर से गंदगी साफ होती है।

* एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा हुआ त्रिफला रात भर के लिए भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छान कर पी जाएँ। ऐसा 12 दिनों तक करें।

* जौ आपके शरीर से लीवर से सारी गंदगी को साफ करने की शक्‍ति रखता है।

* जब आप पीलिया से तड़प रहे हों तो, आपको गन्‍ने का रस जरुर पीना चाहिये। इससे पीलिया को ठीक होने में तुरंत सहायता मिलती है।

* गोभी और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक गिलास रस तैयार करें। इस रस को कुछ दिनों तक रोगी को पिलाएँ।

* रोगी को दिन में तीन बार एक एक प्लेट पपीता खिलाना चाहिए।

* टमाटर पीलिया के रोगी के बहुत लाभदायक होता है। एक गिलास टमाटर के जूस में चुटकी भर काली मिर्च और नमक मिलाएं। यह जूस सुबह के समय लें। पीलिया को ठीक करने का यह एक अच्छा घरेलू उपचार है।

* टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिये यह लाइकोपीन में रिच होता है, जो कि एक प्रभावशाली एंटीऑक्‍सीडेंट हेाता है। इसलिये टमाटर का रस लीवर को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने में लाभदायक होता है।

* इस रोग से पीड़ित रोगियों को नींबू बहुत फायदा पहुंचाता है। रोगी को 20 ml नींबू का रस पानी के साथ दिन में 2 से तीन बार लेना चाहिए।

* आमला मे भी बहुत सारा विटामिन सी पाया जाता है। आप आमले को कच्‍चा या फिर सुखा कर खा सकते हैं। इसके अलावा इसे लीवर को साफ करने के लिये जूस के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं।

* यह एक प्राकृतिक उपाय है जिसेस लीवर साफ हो सकता है। सुबह सुबह खाली पेट 4-5 तुलसी की पत्‍तियां खानी चाहिये।

* नीम के पत्तों को धोकर इनका रस निकाले। रोगी को दिन में दो बार एक बड़ा चम्मच पिलाएँ। इससे पीलिया में बहुत सुधार आएगा।

* पीलिया के रोगी को लहसुन की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत लाभ मिलेगा।

पीलिया में क्या करे परहेज:-
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* पीलिया के रोगियों को मैदा, मिठाइयां, तले हुए पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, उड़द की दाल, खोया, मिठाइयां नहीं खाना चाहिए।

* पीलिया के रोगियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो कि आसानी से पच जाए जैसे खिचड़ी, दलिया, फल, सब्जियां आदि।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

What is jaundice.?

Whenever the patient took it that his body is yellow and the jaundice, it may increase the amount of water excreted from the body because the water content is low, the element gets in the blood. The person's condition does Bigdnhe.





* If raw papaya salad when taken as is also less affected by jaundice. Many believe that the jaundice patient should not eat sweet while Ayurveda practitioner will not accept it, they say, and whey cheese made from cow's milk jaundice patient could eat the dumpling comfort but it does no harm to the patient benefit Fires.

* Jaundice treatment in Ayurveda is unmistakable. According to Ayurveda practitioners consume the sap of the leaves boiled in hot water, so the disease is relieved soon. McCoy jaundice and the unmistakable drug abuse in any form, whether it is only beneficial to health.

Another experiment was Ajmaya: -
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Make the powder of 100 grams of mustard oil cake volume 100 g yogurt mixed with a teaspoon of this powder in the morning, take 8-9 hours a week to taste salt or sugar can also take persistent jaundice will get out of sewer. But fried in ghee oil visitation until 10 days avoided if you will accept jaundice jaundice Judd finished a week Jayega-

Other measures: -
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* Breakfast grapes, Sevfl papaya, and wheat groats Nashpti it. Can eat oatmeal instead of bread.

* In the main dining boiled spinach, Azadirachta, carrots, wheat bread and two glasses of buttermilk a guide it.

* About two o'clock coconut water and juices should Sevfl.

* Dinner, a cup of boiled vegetable soup, wheat two chapatis, boiled potatoes and boiled leafy vegetables like fenugreek, spinach.

* Rubbing out a glass of milk at bedtime, take two teaspoons of honey.

* All fatty foods such as butter, oil, butter, sour cream, do not use for at least 15 days. Then Thudi amount of butter or oil Zetoon can use. Chahieye abundant green vegetables and fruits juice drink. Raw Sevfl and Nashpti very helpful fruit.

* Do not just use pulses because pulses and Sdand ​​can cause swelling in the intestines. Protecting liver cells from the eye 3-4 times a day should drink lemon juice mixed with water.

* The green leaves of radish jaundice is the most viable. It is better to drink juice is extracted by grinding the leaves filter. This will increase hunger and bowel will be clean.

* Coriander seeds soaked in water overnight, please, and then take her morning drink. Coriander seeds, drinking water is clean dirt from the liver.

* A glass of water a tablespoon granulated triphala place for overnight soaking. Visit morning drink this water filter. Make it 12 days.

* Barley whole mess to clean up your body keeps power lever.

* If you're dying of jaundice, you should drink sugar cane juice must. This immediately helps to heal jaundice.

* Cabbage and carrot juice mixed in equal quantities, prepare a glass of juice. Pilaaa the juice for a few days the patient.

* Patients need to be fed three times a day a plate papaya.

* Tomatoes are very beneficial for patients of jaundice. A glass of tomato juice, add a pinch of pepper and salt. Take the juice in the morning. Jaundice is a good home remedies to fix it.

* Vitamin C is found in tomatoes, because it is rich in lycopene, a powerful antioxidant that Heata. Therefore tomato juice is beneficial in creating a healthy liver.

* The disease causes a lot of benefit to patients suffering from lime. The patient 20 ml lemon juice with water three times a day should be 2.

* Amla Vitamin C is found in a single lot. Amle you can eat raw or dried. In addition to cleaning up the lever can be used as juice.

* This is a natural remedy that can clear Jises lever. Early in the morning on an empty stomach should eat 4-5 basil leaves.

* Wash their juice extracted neem leaves. Pilaaa a tablespoon twice a day patient. This will greatly improve jaundice.

* Jaundice patients for five buds of garlic boiled in a glass of milk to drink milk, eat garlic buds too. Will benefit.

What to avoid jaundice: -
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* Jaundice patients flour, sweets, fried foods, more chili spices, urad dal, lost, should not eat sweets.

* Jaundice patients should food that is easily digestible such as cereal, oatmeal, fruits, vegetables.

Fitness health and exercise -

काली मिर्च क्या-क्या करती है ..?

* किंग ऑफ स्पाइस या ब्लैक पेपर नाम से प्रचलित काली मिर्च भोजन में इस्तेमाल किए जाने वाले गर्म मसाले का अहम् हिस्सा है। काली मिर्च हमारे भोजन का स्वाद ही नहीं बढ़ाती, कई बीमारियों के इलाज में सहायक साबित होती है। कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं के अनुसार विटामिन सी, ए, फ्लेवनॉयड्स, कैरोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण इसका सेवन कैंसर का रिस्क कम करता है। दिन भर की डाइट में आधा चम्मच काली मिर्च पाउडर का इस्तेमाल पर्याप्त है।


* काली मिर्च में मौजूद तत्व पेपरीन पाचन को ठीक रखने में मदद करता है। यह डायरिया, कॉन्स्टिपेशन और एसिडिटी से आराम दिलाने में मदद करती है।

* वजन घटाने में यह मददगार है। इसमें मौजूद पोटेंटफाइटोन्यूट्रियंट नामक तत्व फैट्स कोशिकाओं को तोड़ने का प्रयास करता है।

* एंटीबैक्टीरियल व एंटीइन्फ्लामेट्री गुडणों के कारण काली मिर्च त्वचा को भी साफ और बेदाग बनाती है। फेस पैक में काली मिर्च पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाने और 15 मिनट बाद धो लेने से यह बेहतर स्क्रब का काम करती है।

* बालों में रूसी की समस्या भी यह दूर करती है। एक कप दही में काली मिर्च पाउडर मिलाएं और सिर में लगाकर आधे घंटे के लिए छोड़ दें। फिर पानी से साफ करें और अगले दिन शैंपू करें।

* कफ की समस्या से भी काली मिर्च का सेवन बचाव करता है। काली मिर्च का इस्तेमाल सूप या रसम में करके कफ की समस्या को दूर किया जा सकता है।

* सर्दी, जुकाम-खांसी होने पर 8-10 काली मिर्च, 10-15 तुलसी के पत्ते मिलाकर चाय बनाकर पीने से आराम मिलता है।

* खांसी में काली मिर्च, पीपल और सोंठ बराबर मात्रा में पीस लें। तैयार 2 ग्राम चूर्ण शहद के साथ दिन में 2-3 बार चटाएं।

* 4-5 काली मिर्च करीब 15 दाने किशमिश के साथ खाना खांसी में लाभकारी है।

* 100 ग्राम गुड़ पिघला कर 20 ग्राम काली मिर्च का पाउडर मिलाएं। थोड़ा ठंडा होने पर उसकी छोटी-छोटी गोलियां बना लें। खाना खाने के बाद 2-2 गोलियां खाने से आराम मिलता है।

* खांसी में काली मिर्च को गर्म दूध में मिलाकर सेवन करना फायदेमंद है।

* सूखी खांसी होने पर 15-20 ग्राम देसी घी में 4-5 काली मिर्च लेकर एक कटोरी में गर्म करें। जब काली मिर्च कड़कड़ाने लगे और ऊपर आ जाए, तब उतार कर थोड़ा ठंडा करें। फिर इसमें 20ग्राम पिसी मिश्री मिलाएं। काली मिर्च चबाकर खा लें। इसके एक घंटे बाद तक कुछ खाएं नहीं। यह प्रक्रिया 2-3 दिन दोहराएं।

* 2 चम्मच दही, एक चम्मच चीनी और 6 ग्राम पिसी काली मिर्च मिलाकर चाटने से काली और सूखी खांसी में आराम मिलता है।

* एक चम्मच शहद में 2-3 पिसी काली मिर्च और चुटकी भर हल्दी मिलाकर खाने से जुकाम में बनने वाले कफ से राहत मिलेगी।

* नाक बंद हो तो छोटे-से सूती कपड़े में दालचीनी, काली मिर्च, इलायची और जीरे की बराबर मात्रा में पोटली बांध लें। इन्हें सूंघने से नाक खुल जाएगी।

* नाक में एलर्जी होने पर 10-10 ग्राम सोंठ, काली मिर्च, पिसी इलायची और मिश्री को पीस कर चूर्ण बना लें। इसमें बीज निकला 50 ग्राम मुनक्का और तुलसी के 10 पिसे पत्ते डालकर अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण की 3-5 ग्राम की गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें। सुबह-शाम 2-2 गोलियां गर्म पानी के साथ लें।

* बुखार में तुलसी, काली मिर्च और गिलोय का काढ़ा पीना फायदेमंद है।

* काली मिर्च और काला नमक दही में मिलाकर खाने से पाचन संबंधी विकार दूर होते हैं। छाछ में काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेट के कीटाणु मरते हैं और पेट की बीमारियां दूर होती हैं।

* इससे रक्त संचार सुधरता है।यह दिमाग के लिए फायदेमंद होती है। गैस के कारण पेट फूलने पर कालीमिर्च असरदार होती है। इससे गैस दूर होती है।

* एक चम्मच शहद में 2-3 बारीक कुटी हुई कालीमिर्च और एक चुटकी हल्दी पाउडर मिलाकर लेने से कफ में राहत मिलती है।

* पेट में गैस की समस्या होने पर एक कप पानी में आधा नींबू का रस, आधा चम्मच पिसी काली मिर्च और आधा चम्मच काला नमक मिला कर पिएं।

* कब्ज होने पर 4-5 काली मिर्च के दाने दूध के साथ रात में लेने से आराम मिलता है।

* उल्टी-दस्त होने पर 5-5 ग्राम काली मिर्च, हींग और कपूर मिलाएं। छोटी-छोटी गोलियां बना लें। इन्हें हर 3 घंटे बाद सेवन करें।

* बदहजमी होने पर कटे नींबू के आधे टुकड़े के बीज निकाल कर काली मिर्च और काला नमक भरें। इसे तवे पर थोडम गर्म करके चूसें।

* काली मिर्च आंखों के लिए उपयोगी है। भुने आटे में देसी घी, काली मिर्च और चीनी मिला कर मिश्रण बनाएं। सुबह-शाम 5 चम्मच मिश्रण का सेवन करें।

* नमक के साथ काली मिर्च मिलाकर दांतों में मंजन करने से पायरिया ठीक होता है, दांतों में चमक आती है।

* मुंह से बदबू आती है तो दो काली मिर्च रात को ब्रश करने से पहले चबा लें।

* हाई ब्लड प्रेशर में आधा गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच काली मिर्च पाउडर घोल कर 2-2 घंटे के अंतराल से पीने पर आराम मिलता है।

* यदि आपका ब्लड प्रेशर लो रहता है, तो प्रतिदिन तीन दाने कालीमिर्च के साथ 21 दाने किशमिश का सेवन करे।

* काली मिर्च शहद में मिलाकर खाने से कमजोर याददाश्त में फायदा होता है।

* त्वचा पर कहीं भी फुंसी होने पर काली मिर्च पानी के साथ पीस कर लगाने से फुंसी दब जाती है।

* कालीमिर्च की चाय पीने से सर्दी-ज़ुकाम, खाँसी और वायरल इंफेक्शन में राहत मिलती है। कालीमिर्च पाचनक्रिया में सहायक होती है

* इससे शरीर की थकावट दूर होती है। कालीमिर्च से गले की खराश दूर होती है।

* कालीमिर्च सभी प्रकार के संक्रमण में लाभ देती है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

क्यों जरुरी और कितनी महत्वपूर्ण है हेल्थ पालिसी -

अधिकतर लोग हेल्थ पॉलिसी का चुनाव इंश्योरेंस एडवाइजर की सलाह पर करते हैं और ऐसे में वे सही जानकारी से महरूम रह जाते हैं।


विशाल जनसंख्या वाले इस देश में ज्यादातर लोगों के पास हेल्थ कवर नहीं है। जिनके पास है भी, उनको इसकी सही समझ नहीं होती कि उनके लिए कौन सा हेल्थ कवर ठीक है।




कस्टमर हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने में कहां गलती करते हैं :-
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जी हाँ मैं कस्टमर की गलती के विषय में नहीं बल्कि उनके अपेक्षाओं के बारे में बताना चाहूंगा। ये तीन महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाल रहा हूं। ज्यादातर उपभोक्ताओं को यह गलतफहमी रहती है कि हेल्थ इंश्योरेंस, हॉस्पिटल में होने वाले खर्च के बराबर होता है। यदि कंपनी की ओर से ग्रुप इंश्योरेंस कराई जाती है तो भी वह समझते हैं कि हेल्थकेयर के लिए सोचने की जरूरत नहीं है। इस तरह की गलती अममून बहुतायत उपभोक्ताओं के साथ देखने को मिलती है।

हेल्थ केयर का कास्ट कुछ सालों के अंदर कई गुणा बढ़ गया है। हालांकि हेेल्थ इंश्योरेंस बहुत जरूरी है। इसी को देखते हुए हम अपनी कंपनी 'बिगडिसिजन' के माध्यम से लोगों को जानकारी देते हैं कि उनके लिए कौन सा हेल्थ इंश्यारेंस जरूरी है।

यदि आप दूसरी मुख्य बात पर नजर डालें तो लोगों को सही पालिसी की समझ नहीं होती। कई ऐसी पालिसी होती है जो बीमारी को देखते हुए भुगतान करती है। कस्टमर को पालिसी लेने से पहले उससे जुड़ी जानकारियां जुटानी चाहिए या एडवाइजर से जानकारी लेनी चाहिए।

बीमा कंपनियां पैसे बनाने के लिए मार्केट में काम कर रही है। वे अपने लाभ को अधिक करने के लिए प्रीमियम अधिक लेना चाहते हैं। प्रीमियम की गणनना कस्टमर द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है। कंपनियां प्रीमियम की गणनना परिवार के इतिहास, तम्बाकू सेवन आदि को देखते हुए तय करती हैं। सही जानकारी देकर आप कम प्रीमियम भुगतान करके भी हेल्थ इंश्योरेंस ले सकते हैं।

पालिसी लेने पहला फैसला महत्वपूर्ण है:-
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यह हर किसी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है कि वह बीमार होने का इंतजार किए बिना, अपनी जरूरत को देखते हुए हेल्थ पालिसी लेनी चाहिए। जब आप युवा होते हैं तो आपका प्रीमियम कम होता है। उम्र बढऩे के साथ प्रीमियम बढ़ता जाता है। इसलिए प्रीमियम का चुनाव करने के लिए शुरुआती फै सला काफी महत्वपूर्ण होता है। अन्यथा पालिसी पर क्लेम का लाभ कम ही मिलता है और आश्चर्य अधिक होता है। आप किसी भी इंश्योंरेस कंपीनी के पास ऐसे इंश्योरेंस लिजिए जिसका प्रीमियम कम हो और सम इंश्योरर्ड ज्यादा हो। इसके साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि आपको उसी इंश्योरेंस कंपनी से ज्यादा लाभ मिल सके, जैसे कि अधिक विस्तृत कवर बीमारियों पर और ज्यादा नो-क्लेम बोनस।

आपकी बीमारी में जो खर्च हुआ उसके मुकाबले इंश्योरेंस कंपनी पैसा कम देती है। जानते है ऐसा क्यों होता है :-


ऐसा उस केस में होता है, जब बिल अमाउंट बीमा पालिसी में दिए हुए एश्योर्ड रकम से अधिक हो जाता है। ऐसी हालत में पालिसी-धारक को ही पैसा देना होता है। दूसरी स्थिति तब आती है जब खर्च की गई रकम बहुत ही कम होती है और उसे क्लेम नहीं किया जा सकता। इसके अलावा भी कई अन्य कारण हो सकते हैं, जो बेईमानी की ओर इशारा करते हैं।

इलाज का खर्च बहुत ही बढ़ गया है। एक आदमी इस बढ़ी हुई महंगाई में हेल्थ इंश्योरेंस कैसे ले.?

यही एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें इंसान गलती नहीं कर सकता है तो वह हेल्थ केयर है। आपको पता होना चाहिए की कुछ सालों के अंदर ही हेल्थ कास्ट किस तेजी से बढ़ गया है। हेल्थ इंश्योरेंस आपको इसमें मदद करता है।

वर्तमान में हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा काफी बढ़ गया है जो कि 5-10 साल पहले नहीं हुआ करता था। मान ले कि एक फैमिली मेंबर का हास्पिटल का बिल 10 लाख आया और इंश्योरेंस कावर मात्र तीन लाख रुपए का था।  हेल्थ इंश्योरेंस वास्तव में एक धन संरक्षण उपकरण है। यदि बीमा की रकम कम है तो यह आपके परिवार को कई साल पीछे कर देता है।

कम खर्च में पूरे परिवार का बीमा कैसे लिया जाए:-
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हेल्थ इंश्योरेंस में दो प्रकार से बीमा किया जाता है। पहला व्यक्तिगत बीमा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का बीमा होता है और दूसरा पूरे परिवार का बीमा, जिसमें परिवार के सदस्यों की कोई सीमा नहीं होती। यदि आप व्यक्तिगत बीमा कराते हैं और आपके परिवार में 4 लोग हैं और सभी की पालिसी 3 लाख रुपए है तो 12 लाख रुपए की पालिसी आपके पूरे परिवार की हुई। इस बीमा में व्यक्तिगत बीमा कवर 3 लाख रुपया हुआ, जबकि दूसरे केश में सदस्यों की कोई संख्या नहीं है। दूसरे हालात में प्रीमियम परिवार के सबसे बड़े सदस्य को देखते हुए तय किया जाता है। ज्यादातर मामलों में फैमिली फ्लोटर अच्छा होता है न्यूक्लियर फैमिली के मुकाबले, जब परिवार के सबसे बड़े सदस्य की आयु 30 से 40 साल हो। बड़े परिवार व्यक्तिगत पालिसी के मुकाबले फ्लोटर पालिसी अच्छी मानी जाती है।

बीमा पालिसी मुख्य रुप से निवेश के लिए इस्तेमाल होती है। इस स्थिति को कैसे सही किया जाए?

हमारे देश के अंदर ज्यादातर लोगों के पास बीमा पालिसी नहीं है और जिनके पास है भी उनका सम एश्योर्ड बहुत ही कम है। जिससे उनके परिवार का गुजर-बसर नहीं चल सकता है। बीमा की रकम कम होने से वे न तो अपने घर का लोन दे सकते हैं न ही कुछ और कर सकते है। इंश्योरेंस सेक्टर में काम कर रही कंपनियों को चाहिए कि वे लोगों को जागरुक करें और सम एश्योर्ड अमाउंट को बढ़ाएं। निवेश के जरिए बचत करना अच्छी बात है, पर इससे आपके परिवार की जरूरत भी पूरी होनी चाहिए।

यदि उपभोक्ता के पास हेल्थ कवर है तो अस्पतालों में ज्यादा चार्ज किया जाता है और उपभोक्ता को अगले साल अधिक प्रीमियम का भुगतान करना होता है।

आपसी  ताल-मेल से बीमा कंपनियों और हास्पिटल्स को साथ बैठकर इस मामले को सुलझाना चाहिए और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए। उपभोक्ताओं से बिल्कुल सही प्रीमियम लेना चाहिए। किसी की बीमारी से फायदा उठाना बहुत ही बुरी बात है। किसी व्यक्ति से सिर्फ इसलिए ज्यादा चार्ज लेना क्योंकि उसके पास हेल्थ कवर है, बहुत घटिया परंपरा है, इस अवश्य रोक लगनी चाहिए।

अंत में ये कहना है कि उपभोक्ता को अपनी जरूरत को देखते हुए सही पालिसी लेनी चाहिए। इसके लिए आप थोड़ा समय लें और सही तरह से समझने के बाद ही पालिसी का चुनाव करें। इसमें नई कार या फोन खरीदने जैसा रोमांच नहीं हो सकता है, पर इसका महत्व व इसकी कीमत बहुत बड़ी है।

आपका चुनाव और  सही निर्णय आपके जीवन के लिए सही फलीभूत होगा अत:सोचे समझे और फिर पालिसी ले -

उपचार और प्रयोग-http://www.upcharaurprayog.com