Monday, November 30, 2015

दिमाग का एक अचूक टॉनिक - A surefire tonic Brains


आज की भाग दौड़ और तनाव भरी जीवन शैली से उत्पन्न चितां, शोक, भय तथा क्रोध आदि का मस्तिष्क पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है परिणाम स्वरूप स्मरणशक्ति की हानि छोटी-छोटी बातों पर अत्याधिक भावुक होना व रोना, क्रोध, बेचैनी, सिरदर्द, आत्मविश्वास में कमी आदि लक्षण उत्पन्न होते है इन सब लक्षणों से बचाव एवं मुक्ति के लिए एक अनुभुत नुस्खा प्रस्तुत है-




अचूक नुस्खा (Surefire treatment )


आंवला-50 ग्राम

शखपुष्पी-50 ग्राम

ब्राह्मी-50 ग्राम

गिलोय- 50 ग्राम

जटामांसी- 50 ग्राम

उपरोक्त सभी सामग्री लेकर महीन चुर्ण करके अच्छी तरह मिलाकर रख लें। इसकी एक-एक चम्मच मात्रा शहद, जल या आंवले के शर्बत के साथ दिन में तीन बार सेवन करें। बच्चों को इसकी आधी मात्रा सेवन कराएं। यह नुस्खा बच्चों से लेकर वृद्ध तक सभी के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित है।

गर्भवती महिला यदि पुरे गर्भ काल में नियमित इसका सेवन करती रहती है तो उनके होने वाले शिशु हर प्रकार के मानसिक रोगों से सुरिक्षित रहता है।

उपचार और प्रयोग-

विवाहित जीवन को सुखी और सार्थक बनाए - Maintain a happy and meaningful Married Life

विवाह एक जीवन -भर का पवित्र बंधन है इसमें आप जितनी वफादारी करेगे उतना ही आपका जीवन सार्थक होगा जिस तरह जीवन में सांस लेना कोई व्यापारिक समझौता नहीं होता है उसी तरह ये बंधन एक -दुसरे के प्रति वफादार रहना अत्यधिक आवश्यक है -



वफादारी पारस्परिक भरोसे के योग्य बनने का दूसरा नाम है .

विवाहित जीवन की स्थिरता के लिए पारस्परिक-विश्वास बड़ा महत्वपूर्ण है जहाँ पारस्परिक-विश्वास घर में स्वर्गीय-सुख का कारण बनता है वहां अविश्वास से अत्यंत दुःख और नरक पैदा होता है -

कृतज्ञता से पारस्परिक विश्वास, वफादारी और प्रेम की उत्पत्ति होती है, जबकि कृतघ्नता दुखमय घर और नारकीय परिवार का कारण बनती है -

यदि पति-पत्नी माता-पिता के रूप में एक शांतिमय और गौरवपूर्ण घर बनाना चाहते हैं तो प्रत्येक पति को अपनी पत्नी को और प्रत्येक पत्नी को अपने पति को अपने दैनिक व्यवहारिक जीवन में सन्मान देना चाहिए -

विवाह का सम्बन्ध एक बहुत घनिष्ट सम्बन्ध है, और क्योंकि विवाहित जोड़े को सदा एक-दूसरे के साथ रहना तथा एक- दूसरे के लिए जीना होता है, इसलिए इस घनिष्ट मेल-जोल में एक-दूसरे को घृणा करने का डर बना रहता है . विवाह के कुछ समय बाद प्राय: वह एक-दूसरे को कटु-वचन भी कहने लगते हैं और धैर्यहीन पति क्रोध में आकर अपनी पत्नियों को मार भी बैठते हैं पति-पत्नी में इस प्रकार कटु-वचनों का प्रयोग तथा मार-पीट से बढ़कर जीवन में और कोई भूल नहीं हो सकती -

विवाहित जीवन का कार्य संतान की उत्पत्ति और विकास है . माता-पिता को यह नहीं भूलना चाहिए कि बच्चों की विरासत में उनका बड़ा हाथ है; और उनका परस्पर व्यवहार बच्चों के लिए एक वातावरण उत्पन्न करता है .

आखिर विवाहित जीवन का उद्देश्य क्या है....?

विवाह-बंधन में बंधने से पूर्व लड़की या लड़का बस साधारण व्यक्ति से अधिक कुछ नहीं होते . अनुष्ठान द्वारा उन्हें एक-दूसरे के निकट लाया जाता है . अब देखा जाए कि सामान्यत: इस मिलन का आधार क्या है-तो साधारणत: विषय वासना की तृप्ति इस सम्बन्ध की पृष्ठभूमि है . दूल्हा और दुल्हन के विचार और क्रियाएं अधिकतर इसी इच्छा के इर्द-गिर्द घूमते हैं . उनके विवाहित जीवन का कोई उच्च-उदेश्य नहीं होता . वे प्राय: अपने आत्मिक-जीवन की उन्नति और विकास के सम्बन्ध में एस-दूसरे से बात भी नहीं करते . जीवन की बुराइयों, पापाचार या अशुद्ध भावों से छुटकारा पाने के लिए कभी विचार नहीं करते . साधारणत: अपने पारिवारिक-जीवन को श्रेष्ठ और उच्च बनाने या पारस्परिक संबंधों को धार्मिक पुट देने के लिए कभी गंभीरता से चर्चा भी नहीं करते .

जब विवाहित जोड़े एक- दूसरे को केवल वासना की दृष्टि से ही देखते हैं, तो उनके परस्पर के सम्बन्ध पवित्र और उच्च क्योंकर हो सकते हैं... ? पति-पत्नी जब केवल काम-वासना सम्बन्धी चर्चा और मखौल ही करते हैं तो उनका सम्बन्ध श्रेष्ठ हो ही कैसे सकता है ...?

काम वासना स्वयं कोई बुराई नहीं है . इस वासना की अनुपस्थिति में मानव संतान की उत्पत्ति और मानवजाति की स्थिरता ही सम्भव नहीं . परन्तु इसी इच्छा के साथ बंध जाने से ‘मनुष्य’ यौवन की अनेक निधियां खो बैठता है और जीवन के मानसिक तथा नैतिक पहलुओं से दिवालिया हो जाता है . यही कारण है कि अधिकतर लोग बहुत सीमित समय तक ही यौवन का आनंद ले पाते हैं . हमारे स्त्री-पुरुषों, युवक-युवतियों की यह स्थिति कितनी दु:खदायी है.. ! क्या ऐसे निर्बल लोगों के बच्चों के दुनिया में आने से कभी हमारी जाती या राष्ट्र सशक्त और सतेज बन सकता है...?

केवल विवाहित अवस्था में ही नहीं, विवाह होने और जीवन-साथी को पा जाने के बाद भी . इसके लिए मनुष्य को काम-वासना की ग़ुलामी से बचना अनिवार्य है . उक्त ग़ुलामी से बचकर ही विवाहित जीवन में पवित्रता की कल्पना की जा सकती है . काम-अनुराग से मुक्त न होकर कोई पुरुष स्त्री जाती के प्रति शुद्ध आदर-भाव रख ही नहीं सकता, न ही स्त्री जाती के प्रति कभी उसकी अभिवृतियाँ उन्नत और प्रतिष्ठित हो सकती हैं .

विवाह के पश्चात पति-पत्नी यदि अपने घरों को स्वर्गीय बनाना और रखना चाहते हैं तो उन्हें पारस्परिक प्रेम, विश्वास, वफादारी, सेवा और बलिदान को मुख्य स्थान देना चाहिए ..!

उपचार और प्रयोग -

पेशाब (बहुमूत्र ) का सरल उपचार - Urination (diabetes insipidus), the simple treatment

यदि बार-बार पेशाब आता है यदि बहुमूत्र रोग हो गया है तो उसके उपचार के लिए आंवले के पांच ग्राम रस में हल्दी की चुटकी घोलिए और उसमें पांच ग्राम शहद मिलाकर पी जाइये ऐसा करने से जरा-जरा सी देर में पेशाब का आना बंद हो जाता है-


मूली के नियमित प्रयोग से बहुमूत्र में आराम मिलता है

आंवले का रस का सूखा चूर्ण गुड के साथ मिलाकर लेने से पेशाब खुलकर आता है

जवाखार और मिश्री तीन तीन ग्राम ताजे जल के साथ कुछ दिन लेने से बहुमूत्र का रोग समाप्त हो जाता है

राई काले तिल कलमी शोरा टेसू के फ़ूल एवं दालचीनी सभी को समभाग मेंलेकर चूर्ण बना लें,रोज दो ग्राम सुबह शाम शहद के साथ खाने पर बहुमूत्र रोगसे मुक्ति मिलती है

बहुमूत्र में बबूल का गोंद घी मे भून कर मक्खन के साथ सुबह को खाने से फ़ायदा होता है

अदरक का ताजा रस सेवन करने से रुका हुआ मूत्र जल्दी बाहर निकल जाता है,साथ ही बहुमूत्र की शिकायत भी दूर होती है

जामुन की गुठली एवं बहेडे का छीलका दोनो बारीक पीस लें आठ दिन तक चार ग्राम रोज पानी के साथ लें,बार बार पेशाब आना बंद हो जायेगा

कलमी शोरा दस ग्राम दूध दो सौ पचास ग्राम और पानी एक किलो इन सबकोमिलाकर दिन में दो बार पियें पेशाब खुलकर आयेगा बहुमूत्र रोग ठीक होजायेगा

पिस्ता छ: दाने मुनक्का तीन दाने और काली मिर्च तीन दाने इन्हे सुबह शाम चबाकर पंद्रह दिन खाने से पेशाब बार बार नही आयेगा

काले तिल भुने हुए आधा किलो + आंवला १५० ग्राम इन दोनो में आवश्यकतानुसार देसी गुड(गन्ने का) मिला कर १५ या २० ग्राम के लड्डू बना लें। सुबह-शाम सेवन करें और इसे खाने के आधे घंटे तक पानी न पियें। बस आपकी समस्या जादू की तरह से गायब हो जाएगी।

उपचार और प्रयोग-

Sunday, November 29, 2015

गर्भवती महिला का आहार - Diet of pregnant woman

आज के लाइफ स्टाइल में गर्भवती महिलाओं के लिए शिशु को जन्म देना किसी चैलेंज से कम नहीं है। परिवार में जब बच्चा जन्म लेने वाला होता है तो ऐसे में पति-पत्नी के लिए सावधानियां बरतनी और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है तब  ऐसी स्थिति में थोड़ी सी असावधानी भी बाद में जाकर जच्चा-बच्चा के लिए जानलेवा साबित हो सकती है-


गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपना विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दौरान महिलाओं को संतुलित आहार लेना चाहिए। संतुलित आहार महिलाओं के लिए वरदान साबित होता है। उन्होंने कहा कि हल्का व्यायाम इसमें फायदेमंद होता है।

गर्भावस्था के दौरान ध्यान दें(Attention during pregnancy)

गर्भधारण करने के बाद से महिलाओं को स्त्री रोग विशेषज्ञ से रेगुलर जांच करवाते रहना चाहिए।
गर्भधारण के शुरू के दो महीनों में भूख कम लगती है। इस दौरान महिलाओं को थोड़े-थोड़े अंतराल में हल्का भोजन लेना चाहिए।
दो महीने के बाद भूख बढ़नी शुरू हो जाती है। उस स्थिति में पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन का सेवन करना चाहिए।
गर्भवती महिला के भोजन में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट्स, विटामिन, खनिज-लवण व जल आदि का समुचित संतुलन होना जरूरी है।
गर्भवती महिला अगर पौष्टिक आहार का सेवन नहीं करती तो उसे अनीमिया (खून की कमी) होने का अंदेशा बना रहता है।
गर्भवती महिला को खट्टे, बासी व चर्बी वाले भोजन से गुरेज करना चाहिए।
गर्भावस्था में दौड़ लगाना, तैरना, टेनिस खेलना व घुड़सवारी करना करना वर्जित है। महिला को भारी काम करने से भी गुरेज करना चाहिए। इस अवस्था में हल्का व्यायाम अच्छा रहेगा।
शारीरिक तंदुरुस्ती के साथ-साथ मानसिक तंदरुस्ती की ओर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।
गर्भवती महिला को तनाव होने की सूरत में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व गर्भपात होने की आशंका बनी रहती है।
गर्भवती महिला को माहिर डाक्टर की सलाह से टेटनेस का इंजेक्शन जरूर लगवा लेना चाहिए।


गर्भवती महिला को हर महीने अपना यूरिन (मूत्र) टेस्ट अवश्य करवाना चाहिए।

आचार्य चरक कहते हैं कि गर्भिणी के आहार का आयोजन तीन बातों को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए :-

गर्भवती के शरीर का पोषण, स्तन्यनिर्मिती की तैयारी व गर्भ की वृद्धि  माता यदि सात्त्विक, संतुलित, पथ्यकर एवं सुपाच्य आहार का विचारपूर्वक सेवन करती है तो बालक सहज ही हृष्ट-पुष्ट होता है और प्रसव भी ठीक समय पर सुखपूर्वक होता है | अत: गर्भिणी रुचिकर, सुपाच्य, मधुर रसयुक्त, चिकनाईयुक्त एवं जठराग्नि प्रदीपक आहार लें |

पानी को १५-२० मिनट उबालकर ही लेना चाहिये जितना सम्भव हो तो पानी उबालते समय उसमें उशीर (सुंगधीबाला ), चंदन, नागरमोथ आदि डालें तथा शुद्ध चाँदी या सोने (२४ कैरेट) का सिक्का या गहना साफ़ करके डाला जा सकता है |

दूध ताजा व शुद्ध होना चाहिये | फ्रीज का ठंडा दूध योग्य नहीं हैं | यदि दूध पचता न हो या वायु होती हो तो २०० मि.ली. दूध में १०० मि.ली. पानी के साथ १० नग वायविडंग व १ से.मी. लम्बा सौंठ का टुकड़ा कूटकर डालें व उबालें | भूख लगनेपर एक दिन में १-२ बार लें सकते हैं | नमक, खटाई, फलों और दूध के बीच २ घंटे का अंतर रखें |

गर्भावस्था के अंतिम तीन-चार मासों में मस्से या पाँव पर सूजन आने की सम्भावना होने से मक्खन निकाली हुई एक कटोरी ताज़ी छाछ दोपहर के भोजन में नियमित लिया करें |

आयुर्वेद ने घी को अमृत सदृश बताया है | अत: प्रतिदिन १-२ चम्मच घी पाचनशक्ति के अनुसार सुबह-शाम लें |

घी का छौंक लगा के नींबू का रस डालकर एक कटोरी दाल रोज सुबह के भोजन में लेनी चाहिये, इससे प्रोटीन प्राप्त होते है | दालों में मूंग सर्वश्रेष्ठ है | अरहर भी ठीक है | कभी-कभी राजमा, चना, चौलाई, मसूर कम मात्रा में लें | सोयाबीन पचने में भारी होने से न लें तो अच्छा है |

लौकी गाजर, करेला, भिन्डी, पेठा, तोरई, हरा ताजा मटर तह सहजन बथुआ, सुआ, पुदीना आदि हरे पत्तेवाली सब्जियाँ रोज लेनी चाहिये | ‘भावप्रकाश निघुंट’ ग्रन्थ के अनुसार सुपाच्य, ह्र्द्यपोषक, वाट-पित्त का संतुलन करनेवाली, वीर्यवर्धक एवं सप्तधातु पोषक ताज़ी, मुलायम लौकी की सब्जी, कचूमर (सलाद), सूप या हलवा बनाकर रूचि अनुसार उपयोग करें |

शरीर में रक्तधातू लौह तत्त्व पर निर्भर होने से लौहवर्धक काले अंगूर, किशमिश, काले खजूर, चुकन्दर, अनार, आँवला, सेब, पुराना देशी गुड़ एवं पालक, मेथी हरा धनिया जैसी शुद्ध व ताज़ी पत्तोंवाली सब्जियाँ लें | लौह तत्त्व के आसानी से पाचन के लिये विटामिन ‘सी’ की आवश्यकता होती है, अत: सब्जी में नींबू निचोड़कर सेवन करें | खाना बनाने के लिये लोहे की कढाई, पतीली व तवे का प्रयोग करे |

हरे नारियल का पानी नियमितसे गर्भोदक जल की उचित मात्रा बनी रहने में मदद मिलती है | मीठा आम उत्तम पोषक फल हैं, अत: उसका उचित मात्र में सेवन करे | वर, कैथ, अनन्नास, स्ट्राँबेरी, लीची आदि फल ज्यादा न खायें | चीकू, रामफल, सीताफल, अमरुद, तरबूज, कभी-कभी खा सकती हैं | पपीते का सेवन कदापि ण करें | कोई भी फल काटकर तुरंत खा लें | फल सूर्यास्त के बाद न खाये-

गर्भिणी निम्न रूप से भोजन का नियोजन करे( Following the placement of food to Pregnant)

सुबह – ७ – ७.३० बजे नाश्ते में रात के भिगोये हुए १-२ बादाम, १-२ अंजीर व ७-८ मुनक्के अच्छे-से चबाकर खाये |

साथ में पंचामृत पाचनशक्ति के अनुसार ले .वैद्यकीय सलाहानुसार आश्रमनिर्मित शक्तिवर्धक योग – सुवर्णप्राश, रजतमालती, च्यवनप्राश आदि ले सकती हैं |

सुबह ९ से ११ के बीच तथा शाम को ५ से ७ ले बीच प्रकृति-अनुरूप ताजा , गर्म, सात्त्विक, पोषक एवं सुपाच्य भोजन करें |

भोजनसे पूर्व हाथ-पैर धोकर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके सीधे बैठकर ‘गीता’ के १५ वे अध्याय का पाठ करे और भावना करे कि ‘ह्रदयस्थ प्रभु को भोजन करा रही हूँ |

मासानुसार गर्भिणी परिचर्या(Masanusar with child care )


हर महीने में गर्भ-शरीर के अवयव आकार लेते हैं, अत: विकासक्रम के अनुसार हर महीने गर्भिणी को कुछ विशेष आहार लेना चाहए -

पहला महिना :-


गर्भधारण का संदेह होते ही गर्भिणी सादा मिश्रीवाला सहज में ठंडा हुआ दूध पाचनशक्ति के अनुसार उचित मात्रा में तीन घंटे के अंतर से ले अथवा सुबह-शाम ले | साथ ही सुबह १ चम्मच ताजा मक्खन (खट्टा न हो) ३ - ४ बार पानी से धोकर रूचि अनुसार मिश्री व १- २ कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर ले तथा हरे नारियल की ४ चम्मच गिरी के साथ २ चम्मच सौंफ खूब देर तक चबाकर खाये | इससे बालक का शरीर पुष्ट, सुडौल व गौरवर्ण का होगा | इस महीने के प्रारम्भ से ही माँ को बालक में इच्छित धर्मबल, नीतिबल, मनोबल व सुसंस्कारों का अनन्य श्रद्धापूर्वक सतत मनन-चिंतन करना चाहिए | ब्रम्हनिष्ठ महापुरुषों का सत्संग एवं उत्तम शास्त्रों का श्रवण, अध्ययन, मनन-चिंतन करना चाहिए |

दूसरा महीना : -


इसमें शतावरी, विदारीकंद, जीवंती, अश्वगंधा, मुलहठी, बला आदि मधुर औषधियों के चूर्ण को समभाग मिलाकर रख लें | इनका १ से २ ग्राम चूर्ण २०० मि.ली. दूध में २०० मि.ली. पानी डाल के मध्यम आँच पर उबालें, पानी जल जाने पर सेवन करें |

तीसरा महीना :-


इस महीने में दूध को ठंडा कर १ चम्मच शुद्ध घी व आधा चम्मच शहद )अर्थात घी व शहद विषम मात्रा में ) मिलाकर सुबह-शाम लें | उलटियाँ हो रही हों तो अनार का रस पीने तथा ‘ॐ नमो नारायणाय’ का जप करने से वे दूर होती हैं |

चौथा महीना :-


इसमें प्रतिदिन १० से २५ ग्राम मक्खन अच्छे-से धोकर, छाछ का अंश निकाल के मिश्री के साथ या गुनगुने दूध में डालकर अपनी पाचनशक्ति के अनुसार सेवन करें | इस मास में बालक सुनने-समझने लगता है | बालक की इच्छानुसार माता के मन में आहार-विहार संबंधी विविध इच्छाएँ उत्पन्न होने से उनकी पूर्ति युक्ति से (अर्थात अहितकर न हो इसका ध्यान रखते हुए) करनी चाहिए | यदि गर्भाधान अचानक हो गया हो तो चौथे मास में गर्भ अपने संस्कारों को माँ के आहार-विहार की रूचि द्वारा व्यक्त करता है | आयुर्वेद के आचार्यों का कहना है कि यदि इस समय भी हम सावधान होकर आग्रहपूर्वक दृढ़ता से श्रेष्ठ विचार करने लगें और श्रेष्ठ सात्त्विक आहार ही लें तो आनेवाली आत्मा के खुद के संस्कारों का प्रभाव कम या ज्यादा हो जाता है अर्थात रजस, तमस प्रधान संस्कारों में बदला जा सकता हैं एवं यदि सात्त्विक संस्कारयुक्त है तो उस पर उत्कृष्ट सात्त्विक संस्कारों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है |

पाँचवाँ महीना :-


इस महीने से गर्भ में मस्तिष्क का विकास विशेष रूप से होता हैं , अत: गर्भिणी पाचनशक्ति के अनुसार दूध में १५ से २० ग्राम घी ले या दिन में दाल-रोटी, चावल में १-२ चम्मच घी, जितना हजम हो जाय उतना ले | रात को १ से ५ बादाम (अपनी पाचनशक्ति के अनुसार) भिगो दे, सुबह छिलका निकाल के घोंटकर खाये व ऊपर से दूध पिये | इस महीने के प्रारम्भ से ही माँ को बालक में इच्छित धर्मबल, नीतिबल, मनोबल व सुसंस्कारों का अनन्य श्रद्धापूर्वक सतत मनन-चिंतन करना चाहिए | 

छठा व सातवाँ महीना : -


इन महीनों में दूसरे महीने की मधुर औषधियों (इसमें शतावरी, विदारीकंद, जीवंती, अश्वगंधा, मुलहठी, बला आदि मधुर औषधियों के चूर्ण को समभाग मिलाकर रख लें | इनका १ से २ ग्राम चूर्ण २०० मि.ली. दूध में २०० मि.ली. पानी डाल के मध्यम आँच पर उबालें) में गोखरू चूर्ण का समावेश करे व दूध-घी से ले | आश्रम-निर्मित तुलसी-मूल की माला कमर में धारण करें | इस महीने से प्रात: सूर्योदय के पश्चात सूर्यदेव को जल चढ़ाकर उनकी किरणें पेट पर पड़ें, ऐसे स्वस्थता से बैठ के ऊंगलियों में नारियल तले लगाकर पेट की हलके हाथों से मालिश (बाहर से नाभि की ओर) करते हुए गर्भस्थ शिशु को सम्बोधित करते हुए कहे : ‘जैसे सूर्यनारायण ऊर्जा, उष्णता, वर्षा देकर जगत का कल्याण करते हैं, वैसे तू भी ओजस्वी, तेजस्वी व परोपकारी बनना |’ माँ के स्पर्श से बच्चा आनंदित होता है | बाद में २ मिनट तक निम्न मंत्रो का उच्चारण करते हुए मालिश चालू रखे |

"ॐ भूर्भुवः स्व: | तत्सवितुर्वरेन्य भर्गो देवस्य धीमहि | धियो यो न: प्रचोदयात् || (यजुर्वेद :३६.३)
रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रामेशं भजे रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: |
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोsस्म्यहं रामे चित्तलय: सदा भवतु में भो राम मामुद्धर || (श्री रामरक्षास्तोत्रम्)
रामरक्षास्तोत्र के उपर्युक्त श्लोक में ‘र’ का पुनरावर्तन होने से बच्चा तोतला नहीं होता | पिता भी अपने प्रेमभरे स्पर्श के साथ गर्भस्थ शिशु को प्रशिक्षित करे |"

सातवें महीने में स्तन, छाती व पेट पर त्वचा के खिंचने से खुजली शुरू होने पर ऊँगली से न खुजलाकर देशी गाय के घी की मालिश करनी चाहिए |

आठवाँ व नौवाँ महीना :-


इन महीनों में चावल को ६ गुना दूध व ६ गुना पानी में पकाकर घी दाल के पाचनशक्ति के अनुसार सुबह-शाम खाये अथवा शाम के भोजन में दूध-दलियें में घी डालकर खाये | शाम का भोजन तरल रूप में लेना जरूरी है | गर्भ का आकार बढ़ने पर पेट का आकार व भार बढ़ जाने से कब्ज व गैस की शिकायत हो सकती है | निवारणार्थ निम्न प्रयोग अपनी प्रकृति के अनुसार करे  आठवें महीने के १५ दिन बीत जाने पर २ चम्मच एरंड तेल दूध से सुबह १ बार ले, फिर नौवें महीने की शुरआत में पुन: एक बार ऐसा करे अथवा त्रिफला चूर्ण या इसबगोल में से जो भी चूर्ण प्रकृति के अनुकूल हो उसका सेवन वैद्यकीय सलाह के अनुसार करे | पुराने मल की शुद्धि के लिए अनुभवी वैद्य द्वारा निरुह बस्ति व अनुवासन बस्ति ले | चंदनबला लाक्षादि तेल से अथवा तिल के तेल से पीठ, कटि से जंघाओं तक मालिश करे और इसी तेल में कपडे का फाहा भिगोकर रोजाना रात को सोते समय योनि के अंदर गहराई में रख लिया करे | इससे योनिमार्ग मृदु बनता है और प्रसूति सुलभ हो जाती है |

पंचामृत :-


9 महीने नियमित रूप से प्रकृति व पाचनशक्ति के अनुसार पंचामृत ले |

पंचामृत बनाने की विधि :-


एक चम्मच ताजा दही, ७ चम्मच दूध, २ चम्मच शहद, १ चम्मच घी व १ चम्मच मिश्री को मिला लें | इसमें १ चुटकी केसर भी मिलाना हितावह है | यह शारीरिक शक्ति, स्फूर्ति, स्मरणशक्ति व कांति को बढ़ाता है तथा ह्रदय, मस्तिष्क आदि अवयवों को पोषण देता है | यह तीनों दोषों को संतुलित करता है व गर्भिणी अवस्था में होनेवाली उलटी को कम करता है | उपवास में सिंघाड़े व राजगिरे की खीर का सेवन करें | इस प्रकार प्रत्येक गर्भवती स्त्री को नियमित रूप से उचित आहार-विहार का सेवन करते हुए नवमास चिकित्सा विधिवत् लेनी चाहिए ताकि प्रसव के बाद भी इसका शरीर सशक्त, सुडौल व स्वस्थ बना रहे, साथ ही वह स्वस्थ, सुडौल व सुंदर और ह्रष्ट-पुष्ट शिशु को जन्म दे सके | इस चिकित्सा के साथ महापुरुषों के सत्संग-कीर्तन व शास्त्र के श्रवण-पठन का लाभ अवश्य लें |

इसे भी देखे - गर्भावस्था में की जाए क्या सावधानी - What precautions should be In pregnancy 

उपचार और प्रयोग -

गर्भावस्था में की जाए क्या सावधानी - What precautions should be In pregnancy

एक स्त्री  के गर्भाशय मे बालक के होने को गर्भावस्था (गर्भ + अवस्था) कहते हैं इसके उपरान्त महिला शिशु को जन्म देती है और आमतौर पर यह अवस्था मां बनने वाली महिलाओं में नौ माह तक रहती है-



एक स्वस्थ महिला को प्रत्येक माह मासिक-स्राव (माहवारी) होती है। गर्भ ठहरने के बाद मासिक-स्राव होना बंद हो जाता है। इसके साथ-साथ दिल का खराब होना, उल्टी होना, बार-बार पेशाब का होना तथा स्तनों में हल्का दर्द बना रहना आदि साधारण शिकायतें होती है। इन शिकायतों को लेकर महिलाएं, स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाती है। डाक्टर महिला के पेट और योनि की जाचं करती है और बच्चेदानी की ऊंचाई को देखती है। गर्भधारण करने के बाद बच्चेदानी का बाहरी भाग मुलायम हो जाता है। इन सभी बातों को देखकर डाक्टर महिला को मां बनने का संकेत देता है। इसी बात को अच्छे ढंग से मालूम करने के लिए डाक्टर रक्त या मूत्र की जांच के लिए राय देता है।

गर्भवती महिलाओं के रक्त और मूत्र में एच.सी.जी. होता है जो कौरिऔन से बनता है। ये कौरिऔन औवल बनाती है। औवल का एक भाग बच्चेदानी की दीवार से तथा की नाभि से जुड़ा होता है। इसके शरीर में पैदा होते ही रक्त और मूत्र में एच.सी.जी. आ जाता है। इस कारण महिला को अगले महीने के बाद से माहवारी होना रूक जाता है। एच.सी.जी. की जांच रक्त या मूत्र से की जाती है। साधारणतया डाक्टर मूत्र की जांच ही करा लेते है। जांच माहवारी आने के तारीख के दो सप्ताहे बाद करानी चाहिए ताकि जांच का सही परिणाम मालूम हो सके। यदि जांच दो सप्ताह से पहले ही करवा लिया जाए तो परिणाम हां या नहीं में मिल जाता है। यह वीकली पजिटिव कहलाता है।

कुछ स्त्रियां माहवारी के न आने पर दवाइयों का सेवन करना शुरू कर देती है। इस प्रकार की दवा का सेवन महिलाओं के लिए हानिकारक होता है। इसलिए जैसे ही यह मालूम चले कि आपने गर्भाधारण कर लिया है तो अपने रहन-सहन और खानपान पर ध्यान देना शुरू कर देना चाहिए।

गर्भधारण करने के बाद महिलाओं को किसी भी प्रकार की दवा के सेवन से पूर्ण डाक्टरों की राय लेना अनिवार्य होता है। ताकि आप कोई ऐसी दवा का सेवन न करें जो आपके और होने वाले बच्चे के लिए हानिकारक होता है।

यदि महिलाओं को शूगर का रोग हो तो इसकी चिकित्सा गर्भधारण से पहले ही करनी चाहिए। यदि मिर्गी, सांस की शिकायत या फिर टीबी का रोग हो तो भी इसके लिए भी डाक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए।

आपके विचार और आपके कार्य भी गर्भाधारण के समय ठीक और अच्छे होने चाहिए ताकि होने वाले बच्चे पर अच्छा प्रभाव पड़े।

जैसे ही पुष्टि हो जाती है कि आप गर्भवती हैं उसके बाद से प्रसव होने तक आप किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ की निगरानी मे रहें तथा नियमित रुप से अपनी चिकित्सीय जाँच कराती रहें।

गर्भधारण के समय आपको अपने रक्त वर्ग (ब्ल्ड ग्रुप), विशेषकर आर. एच. फ़ैक्टर की जांच करनी चाहिए। इस के अलावा रूधिरवर्णिका (हीमोग्लोबिन) की भी जांच करनी चाहिए।

यदि आप मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थाइराइड आदि किसी, रोग से पीड़ित हैं तो, गर्भावस्था के दौरान नियमित रुप से दवाईयां लेकर इन रोगों को नियंत्रण में रखें।

गर्भावस्था के प्रारंभिक कुछ दिनों तक जी घबराना, उल्टियां होना या थोड़ा रक्त चाप बढ़ जाना स्वाभाविक है लेकिन यह समस्याएं उग्र रुप धारण करें तो चिकित्सक से सम्पर्क करें।

गर्भावस्था के दौरान पेट मे तीव्र दर्द और योनि से रक्त स्राव होने लगे तो इसे गंभीरता से लें तथा चिकित्सक को तत्काल बताएं।

गर्भावस्था मे कोई भी दवा-गोली बिना चिकित्सीय परामर्श के न लें और न ही पेट मे मालिश कराएं। बीमारी कितना भी साधारण क्यों न हो, चिकित्सक की सलाह के बगैर कोई औषधि न लें।

यदि किसी नए चिकित्सक के पास जाएं तो उसे इस बात से अवगत कराएं कि आप गर्भवती हैं क्योकि कुछ दवाएं गर्भस्थ शिशु पर बुरा प्रभाव छोडती है।
चिकित्सक की सलाह पर गर्भावस्था के आवश्यक टीके लगवाएं व लोहतत्व (आयर्न) की गोलियों का सेवन करें।

गर्भावस्था मे मलेरिया को गंभीरता से लें, तथा चिकित्सक को तत्काल बताएं।
गंभीरता से चेहरे या हाथ-पैर मे असामान्य सूजन, तीव्र सिर दर्द, आखों मे धुंधला दिखना और मूत्र त्याग मे कठिनाई की अनदेखी न करें, ये खतरे के लक्षण हो सकते हैं।

गर्भ की अवधि के अनुसार गर्भस्थ शिशु की हलचल जारी रहनी चाहिए। यदि बहुत कम हो या नही हो तो सतर्क हो जाएं तथा चिकित्सक से संपर्क करें।

आप एक स्वस्थ शिशु को जन्म दें, इस के लिए आवश्यक है कि गर्भधारण और प्रसव के बीच आप के वजन मे कम से कम 10 कि.ग्रा. की वृद्धि अवश्य हो।

गर्भावस्था में अत्यंत तंग कपडे न पहनें और न ही अत्याधिक ढीले। इस अवस्था में ऊची एड़ी के सैंडल न पहने। जरा सी असावधानी से आप गिर सकती है

इस नाजुक दौर मे भारी श्रम वाला कार्य नही करने चाहिए, न ही अधिक वजन उठाना चाहिए। सामान्य घरेलू कार्य करने मे कोई हर्ज नही है।

इस अवधि मे बस के बजाए ट्रेन या कार के सफ़र को प्राथमिकता दें। आठवें और नौवे महीने के दौरान सफ़र न ही करें तो अच्छा है। गर्भावस्था मे सुबह-शाम थोड़ा पैदल टहलें। चौबीस घंटे मे आठ घंटे की नींद अवश्य लें। प्रसव घर पर कराने के बजाए अस्पताल, प्रसूति गृह या नर्सिगं होम में किसी कुशल स्त्री रोग विशेषज्ञ से कराना सुरक्षित रहता है।

गर्भावस्था मे सदैव प्रसन्न रहें। अपने शयनकक्ष मे अच्छी तस्वीर लगाए। हिंसा प्रधान या डरावनी फ़िल्में या धारावाहिक न देखें।


उपचार और प्रयोग-

घर में बनाये आयुर्वेदिक फेसपैक - Homemade herbal face pack

आजकल त्वचा को वातावरण के प्रदूषण, धूल-मिट्टी, धूप इत्यादि का सामना करना ही पड़ता है। ऐसे में त्वचा मुरझाई-सी दिखने लगती है। उम्र के साथ होने वाले हार्मोनल परिवर्तन से, प्रदूषण से व कई अन्य कारणों से स्कीन प्रॉब्लम्स सताने लगती हैं। अगर आपके साथ भी कोई स्कीन प्रॉब्लम हैं तो घर पर ही नीचे लिखी विधि से आयुर्वेदिक फेसपैक बनाकर उससे मुक्ति पा सकते हैं-



चेहरे पर चेचक, छोटी माता या बड़ी फुंसियों के दाग रह गए हैं तो दो पिसे हुए बादाम, दो चम्मच दूध और एक चम्मच सूखे संतरों के छिल्कों का पावडर मिलाकर आहिस्ता-आहिस्ता फेस पर मलें और छोड़ दें।

हफ्ते में एक बार स्क्रब करें। घरेलु स्क्रब बनाने के लिए एक चम्मच दरदरा चावल का आटा, 1 चम्मच दरदरी मसूर की दाल का पाउडर, 1/2 उड़द की दाल का दरदरा पाउडर, 1 चम्मच गुलाब जल और 1/2 चम्मच शहद मिलाकर गाढा पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। हलका सूखने पर स्क्रब करते हुए हटाएं। रंग निखर जाएगा।

हल्दी को मलाई में डालकर चेहरे पर रगडऩे से त्वचा चमकीली बनती है। हल्दी को कच्चे दूध में डालकर मुंहांसों पर लगाने से मुंहासे दूर हो जाते हैं।

आधा चम्मच संतरे का रस लेकर उसमें 4-5 बूंद नींबू का रस, आधा चम्मच मुल्तानी मिट्टी, आधा चम्मच चंदन पाउडर और कुछ बूंदें गुलाब जल की। इन सबको मिलाकर कर थोड़ी देर के लिए फ्रिज में रख दें। इसे लगा कर 15-20 मिनट तक रखें। इसके बाद पानी से इसे धो दें। यह तैलीय त्वचा का सबसे अच्छा उपाय है।

अगर आपकी त्वचा ड्राई है, तो काजू को रात भर दूध में भिगो दें और सुबह बारीक पीसकर इसमें मुल्तानी मिट्टी और शहद की कुछ बूंदें मिलाकर स्क्रब करें।

धूप से हुई सांवली त्वचा में फिर से निखार लाने के लिए नारियल पानी, कच्चा दूध, खीरे का रस, नींबू का रस, बेसन और थोड़ा-सा चंदन का पावडर मिलाकर उबटन बनाएं, इसे नहाने के एक घंटे पहले लगा लें। सप्ताह में दो बार करें। सांवलापन खत्म हो जाएगा।

रोमछिद्र ज्यादा बड़े हो गए हों तो उन पर टमाटर का रस, नींबू का रस और कच्चा दूध तीनों का पैक बनाकर लगाएं।
उपचार और प्रयोग-

Saturday, November 28, 2015

सुंदर दिखे शादी से पहले तो क्या करे- Looks good before marriage So please

विवाह से एक महीने पहले इनका प्रयोग करना शुरू करें तो चेहरे को कांतिमाय बनाने में आपको बहुत मदद मिलेगी। चेहरा चमकाने के लिए आजकल की महिलाएँ क्या-क्या नहीं करतीं। कभी पार्लरों के चक्कर लगाना कभी नए-नए कॉस्मेटिक्स चेहरे पर लगाना वगैरह-वगैरह, लेकिन इन सभी के दूरगामी परिणाम चेहरे की त्वचा का ढीलापन व त्वचा पर मुहासे व दाग-धब्बों का उभर आना होता है-



हमारी त्वचा को भी पोषण की आवश्यकता होती है। धूल-धूप, प्रदूषण आदि के संपर्क में रहने से हमारी त्वचा अपनी कुदरती चमक खो देती है। ऐसे में त्वचा की सही देखभाल करना बेहद जरूरी है। घरेलू #फेस पैक त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि ये अनाज, सब्जियों व फलों को मिलाकर बनाए जाते हैं अत: हमारी त्वचा पर इनके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं।

दुल्हन शादी के समय सुन्दर लगे, इसके लिए घरेलू #पैक व स्क्रब से बेहतर कुछ और नहीं। कोई भी महंगा रेडीमेड फेस पैक लगाने के बजाय घर में कुछ अनोखे और खास फेस पैक व स्क्रब तैयार कीजिए -

आपके लिए है कुछ नायाब फेस पैक व स्क्रब:-


आंखों के नीचे काले घेरे होने पे प्रयोग :-


सामग्री:-

2 बडे चम्मच सूखे लाल गुलाब का पाउडर

1 बडा चम्मच खीरे के बीज का पाउडर

1/2 बडा चम्मच मसूर दाल पाउडर


बनाने की विधि:-


सारी सामग्री को चाय के ठंडे पानी के साथ मिलाकर 10-15 मिनट तक आंखों के नीचे काले घेरों पर लगाएं और ठंडे पानी से धो लें। इसके बाद बादाम के तेल की हल्की मालिश करें।

धूप से झुलसी त्वचा के लिए प्रयोग :-


सामग्री:-


2 बडे चम्मच ज्वार का आटा

1 बडा चम्मच तुलसी पाउडर

3 बडे चम्मच तरबूज के बीज का पाउडर

बनाने की विधि:-


जब भी जरूरत हो, तो थोडे से दही में सारी सामग्री मिलाएं और चेहरे, गर्दन और बांहों पर इस पैक को 20 मिनट तक लगा कर रखें। ठंडे पानी से धो लें। ऎसा दिन में 2 बार करें।

तैलीय त्वचा के लिए पैक :-

सामग्री:-


2 चम्मच मुलतानी मिट्टी

1 बडा चम्मच पोदीना पाउडर

1/2 बडा चम्मच मेथीदाना पाउडर

बनाने की विधि:-


सारी सामग्री को गुलाबजल या ताजे गुलाब के पेस्ट में मिलाकर चेहरे पर 10 मिनट तक लगा कर रखें ठंडे पानी से चेहरे को धो लें। यह बढिया एस्टिंरजेंट का भी काम करता है और तैलीय त्वचा में कसाव लाता है। इस पैक को आप सप्ताह में 3 दिन लगा सकती हैं।

मुंहासे-युक्त त्वचा के लिए पैक :-


सामग्री :-

1 बडा चम्मच चंदन पाउडर

1 बडा चम्मच नीम पाउडर

1 बडा चम्मच तुलसी पाउडर

1 बडा चम्मच समुद्री झाग

बनाने की विधि:-


सारी सामग्री को मिलाकर किसी एअरटाइट डिब्बे में रखें। जब भी इस्तेमाल करना हो, तो ताजे फलों के रस या गुनगुने दूध के साथ मिलाकर चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें और सादे पानी से चेहरा धो लें। इस पैक को आप सप्ताह में 3 दिन लगा सकती हैं। लगातार 3 दिन के बजाय 1-2 दिन अंतराल में इस पैक का इस्तेमाल करें।

शुष्क त्वचा के लिए पैक सामग्री :-

सामग्री :-


2 बडे चम्मच मसूर दाल पाउडर

1 बडा चम्मच चिरौंजी पाउडर

3 बडे चम्मच मिल्क पाउडर चुटकीभर हल्दी पाउडर

बनाने की विधि:-


सारी सामग्री को थोडे से दूध में मिला कर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर 10 मिनट तक लगाकर रखें। ठंडे पानी से चेहरा धो लें। सप्ताह में इसे 1-2 दिन अंतराल में 3 बार प्रयोग कर सकती हैं।

चेहरे पर कोई भी फेस पैक लगाने से पहले आपको अपनी स्किन टोन को जानकर उसी के अनुसार फेस पैक लगाना चाहिए। फेस को आप आसानी से घर पर बना सकते हैं और साधारण कॉस्मेटिक्स की तुलना में ये घरेलू फेस कई गुना ज्यादा फायदेमंद होते हैं।

त्वचा में रौनक लाने के लिए फेस पैक :-

सामग्री :-


1 अंडे की जर्दी

2 बड़ा चम्मच जौ का आटा

1 चम्मच शहद

1 आलू का रस

इनको आपस में मिला चेहरे पर लगाएँ तथा यह फेस पैक लगाने के 10 मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।

केले को मेश करके उसमें बेसन व अंडे की जर्दी मिलाकर चेहरे पर लगाएँ तथा 15 मिनट बाद चेहरे को धो लें।

ब्लीच पैक :-


अक्सर महिलाएँ अपने ब्लीच कराती हैं परंतु ब्लीच का अधिक इस्तेमाल हमारी त्वचा के लिए नुकसानदेह होता है। इसकी बजाय यदि आप घरेलू ब्लीच पैक का इस्तेमाल करें तो आपके चेहरे के रोओं का रंग कुदरती रूप से परिवर्तित होने लगेगा।

संतरे के रस में नींबू का रस और शहद मिलाकर गाढा बनाएँ। इसको लगाने के कुछ समय बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें।

2 बड़े चम्मच संतरे के छिलके के पावडर को दूध में मिलाएँ। अब इस गाढ़े मिश्रण को चेहरे पर लगाकर चेहरा धो लें। आप हफ्ते में तीन बार इस पैक को लगा सकते हैं।

मुल्तानी मिट्टी फेस पैक मुल्तानी मिट्टी का फेस मास्क लगा कर मुहांसे का उपचार करना पुरानी भारतीय परंपरा है। यह आपको किसी भी स्टोर पर आसानी से मिल जाएगा और इसमें बड़ी मात्रा में आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं जो मुहांसे से छुटकारा दिलाता है। फेस पैक तैयार करने के लिए आप मुल्तानी मिट्टी में कुछ बूंद गुलाब जल और नींबू का रस मिला सकते हैं।

काबुली चने का आटा दो चम्मच काबुली चने का आटा और एक कप दही को मिला कर पेस्ट तैयार कर लें। अब इसे चेहरे पर लगाकर 30 से 45 मिनट तक छोड़ दें। जब यह सूख जाए तो इसे पानी से भिगो कर सर्कुलर मोशन में स्क्रब करें। बाद में पानी से धो लें। इससे आपके चेहरे पर नमी आ जाएगी। बेहतर परिणाम के लिए हफ्ते में दो बार ऐसा करें।

पुदीना फेस पैक पुदीना फेस पैक पूरी तरह से हर्बल होता है और इससे त्वचा में ठंडापन भी आता है। एक कटोरे में पुदीना की कुछ पिसी हुई पत्ती लेकर इसमें 2-3 बूंद शहद मिला दें। अब इसे तबतक चेहरे पर लगाकर रखें, जब तक कि यह सूख न जाए। सूखने के बाद इसे सामान्य पानी से धो लें। अच्छे परिणाम के लिए हफ्ते में जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके इस फेश पैक को लगाएं।

खीरे का फेस मास्क खीरा शरीर से गर्मी को सोखता है, जिससे यह मुहांसे और जलन से निजात पाने का एक बेहतरीन जरिया बन जाता है। यह पिंपल को बहुत हद तक खत्म कर देता है। सबसे पहले खीरे को मशीन के जरिए बारीक कर लें। अब इसे रेफ्रीजरेटर में रखने से पहले इसका रस निचोड़ लें। खीरे का गूदा जब बहुत ठंड हो जाए तो इसके जरिए रस को चेहरे पर लगाकर आप नमी हासिल कर सकते हैं।

पपीता पैक आप एक फ्रूट पैक बनाने के लिए एक से ज्यादा फलों का इस्तेमाल कर सकते हैं। आप उपलब्धता के अनुसार केला, पपीता, एवाकाडो और तरबूज का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक दो फलों को मसल लें और इसे शहद और दही के साथ मिला लें। चेहरे पर लगाने के बाद धोने से पहले इसे अच्छी तरह से सूख जाने दें।

मुंहासों, दानों से छुटकारा पाने के लिये घरेलू हल्दी फेस पैक, फेस मास्क:-

त्वचा के उपचार के लिये हल्दी सभी मसालों में से बेहतर है। यह त्वचा की रंगत को हल्का करता है तथा त्वचा के मुंहासों और दानों को ठीक करता है। त्वचा के लिये हल्दी अपपर्णन और शोधन करने वाला है। हल्दी कवक विरोधी और जीवणु विरोधी एजेंट की तरह कार्य करता है। जो चेहरे से मुंहासे और दानों को हटाने में मदद कर सकता है। हल्दी प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाता है और अद्भुत चमक देता है। हल्दी त्वचा के अपपर्णन, भरे और अवरूद्ध छिद्रों को साफ करता है।

हल्दी और बेसन का फेस पैक:-


 सामग्री:-


2 चुटकी हल्दी

4-5 चम्मच बेसन

4-5 चम्मच कच्चा दूध

3-4 चम्मच शहद

बनाने की विधि :-


एक कांच के कटोरे में हल्दी और बेसन को लेकर उसमें दूध और शहद को मिलायें। इन सब को अच्छे से मिलाकर चिकना लेप बना लें। अब इस लेप को चेहरे पर लगा लें। दूध और शहद ह्यूमेक्टेंटस की तरह कार्य करते हुए आपके चेहरे को नम रखते हैं। 15-20 मिनट बाद सहने लायक गर्म पानी से धो दें। यह फेस मास्क सूखी त्वचा की रंगत के लिये उपयुक्त होगा।

हल्दी और शहद का फेस पैक:-


सामग्री:-


3-4 चुटकी हल्दी

आधा कप दही

बनाये :-


दही को हल्दी के साथ मिलाकर अपने चेहरे पर लगायें और 15 मिनट बाद चेहरे को ठण्डे पानी से धुलें। यह फेस पैक त्वचा, हांथ, पैर, चेहरे आदि पर से सूर्य के कारण हुए भूरेपन को हटाने में सहायता कर सकता है। इसे भूरेपन के क्षेत्र पर लगा लें और 15-20 मिनट बाद धो दें।

हल्दी और चंदन का फेस पैक:-


सामग्री:-


3-4 चुटकी हल्दी पाउडर

1-2 चम्मच चंदन पाउडर

1-2 चम्मच दूध

विधि :-


एक कटोरे में चंदन पाउडर और हल्दी लेकर उसमे दूध को मिलायें। इसे चिकनी क्रीम बना लें। इस लेप से चेहरे पर गोल गोल मसाज करें। 10-15 मिनट तक सूखने के लिये छोड़ दें। इस सूखे फेस पैक को ठण्डे पानी से धो दें। पैक का चंदन चेहरे की चमक को बढ़ाने और गहरी त्वचा की रंगत को हल्का करने में मदद करता है।

हल्दी और शहद का फेस पैक:-


सामग्री:-


2 चुटकी हल्दी पाउडर

2-3 चम्मच शहद

1-2 चम्मच गुलाब जल

विधि :-


हल्दी पाउडर, शहद को मिलाने के बाद गुलाब जल डालकर लेप तैयार कर लें। इसे आप चेहरे और गर्दन के पास लगा लें। यह फेस पैक चेहरे की झुर्रियों को आने से बचाता है। यह फेस पैक चेहरे को नम रखता है।

हल्दी और नींबू जूस का फेस पैक:-


सामग्री:-


1 चम्मच हल्दी

1-2 चम्मच नींबू रस

विधि :-


हल्दी पाउडर को नींबू रस मे मिलाकर चेहरे पर इस लेप को लगायें। यह फेस पैक चेहरे के लिये विरंजक का कार्य करता है। यह चेहरे की चमक को भी बढ़ाताहै। संसार में बेहतर रूप के लिये ऊपर बताये गये फेस पैक का उपयोग करें। सभी पैक सुंदरता की देखभाल के लिये सिद्ध पैक है।

नीम और हल्दी का फेस पैक:-


जो लोग दानों की समस्या से ग्रस्त हैं उनके लिये यह विशेष फेस पैक बहुत अच्छा है। इस पैक में लाल चंदन की लकड़ी है, जो मुंहासो के निशान को प्रभावी ढ़ंग से हल्का करता है। आप इससे त्वचा में कसाव, रंगत और निशान में अद्भुत लाभ पा सकते है।

सामग्री:-


1 चम्मच लाल चंदन पाउडर

1 चम्मच ताज़ी नीम की पत्तियों का लेप

नीम का पानी

1 चम्मच अम्बी हल्दी पाउडर

1 चम्मच शहद

विधि :-


सबसे पहले हल्दीऔर चंदन को मिलाये और अब इसमे ताज़ी नीम की पत्तियों का लेप और शहद मिलायें। आप इस लेप को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये नीम का पानी भी मिला सकते है। यह पैक उन लोगों के लिये अच्छा होगा, जिन लोगों को मुंहासों की समस्या लम्बे समय से है।

हल्दी और दूध का फेस पेक :-

सामग्री:-

जई- 2 चम्मच

गुलाब जल

ग्रीन टी बैग

दूध पाउडर- 1 चम्मच

विधि :-


एक कांच के कटोरे में जई को दूध पाउडर के साथ कुचलें। अब इसमे गुलाब जल मिलायें। इन सबको मिलाकर इसमें टी बैग को डुबा दें। फेस पैक तैयार करके, चेहरे को अच्छे से साफ करके लगा लें। 2 मिनट बाद धो कर अंतर को देखें।

पपीता और हल्दी फेस पैक:-


पपीता फेस पैक कई लोगों द्वारा पसंद किया जाता है। यह आपकी त्वचा के लिये गुणकारी है। इसमें अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होता है। पपीते में उपलब्ध एंज़ाइम आपकी त्वचा को हल्का और चमक लाने के लिये प्रभावी होता है। इस फल में विटामिन सी और विटामिन ए भरपूर मात्रा में मिलता है। जिससे त्वचा के भूरेपन को हटाना आसान हो जाता है।

सामग्री :-


पका पपीता- 4 टुकड़ा

अम्बी हल्दी- 1 चम्मच

शहद- 1 चम्मच

विधि:-


सबसे पहले पपीते को मसल ले और इसमे शहद और हल्दी को अच्छे से मिला दें। अब इसे चेहरे पर लगा लें। इसे आपको एक बार में 20 मिनट तक लगा के रखना होगा और फिर गुनगुने पानी से धो दें।

हल्दी और संतरे का फेस पैक:-


सामग्री:-


संतरे के छिलके का पाउडर- आधा चम्मच

शहद- 1 चम्मच

बेसन- 1 चम्मच

दूध आवश्यकता के अनुसार

हल्दी- एक चुटकी

विधि:-


सामग्री सूची के सभी पाउडरों को एक बर्तन में लें। इसमें दूध डालकर चलायें। इससे आपको एक अच्छा मिश्रण या लेप प्राप्त होगा। इसे अपने चेहरे और गर्दन पर इस प्रकार लगाये कि वह आपकी त्वचा के हर हिस्से को ढ़क लें। इसे कुछ समय बाद धो डालें और तेल रहित मॉइस्चराइज़र को लगा लें। अब आपको चमकदार और कांतिमय त्वचा इससे प्राप्त होगी।

हल्दी और केसर का फेस पैक:-


भारतमें आपकी त्वचा को गोरा करने के लिये केसर या सैफरॉन वास्तविक्ता में प्रभावी है। यहाँ तक कि गर्भवती महिला को केसर पीने के लिये कहा जाता है जिससे जन्म लेने वाला शिशु गोरा हो। इस विशेष सूत्र को हल्दी और केसर के पैक में लाया गया है।

सामग्री:-


केसर- 10 रेशा

दही- 2 चम्मच

बेसन- 1 चम्मच

हल्दी- एक चुटकी

विधि:-


इस फेस पैक को बनाने के पहले आपको कुछ कार्य करना होगा। एक कटोरी दही में केसर को सारी रात के लिये भिगो दें। बेहतर होगा कि इसे आप रेफ्रिजरेटर में रखें। इसको लगाने से पहले बेसन को मिला लें। इसको अच्छी तरह से मिलाकर अपनी त्वचा पर लगाकर 15 मिनट के लिये छोड़ दें। आपकी त्वचा से भूरेपन को हटाने में यह वास्तविक्ता में प्रभावी है।

हल्दी और दूध क्रीम के साथ गुलाब जल:-


सामग्री:-


हल्दी पाउडर- आधा चम्मच

गुलाब जल- 1 चम्मच

दूध क्रीम- 2 चम्मच

विधि:-


इन सभी सामग्रियों को लेकर अच्छे से मिलायें। अब अपने चेहरे पर लगाकर 1 घण्टे के लिये छोड़ दें। इसे सूखने दें और इन सभी पत्तियों का, या बाज़ार से इनका पाउडर खरीदकर, लेप बनायें। इस लेप को चंदन के साथ मिलाकर लेप तैयार कर लें। अब इसे चेहरे पर लगा लें। 30 मिनट तक लेप को लगाये रखने के बाद सादे पानी से धो दें। आप अपनी चमक को वापस आते हुए देखेंगे। अगर आप इसका लगातार प्रयोग करते हैं तो मुंहासों को जाते हुए देखेंगे।फिर सादे पानी से धो दें। अब चिकनाई रहित मॉइस्चराइज़र को लगाना बेहतर परिणाम देगा।

नीम, तुलसी, चंदन और हल्दी पाउडर का पेक :-


सामग्री:-


नीम पत्ती- 10 पत्तियां

तुलसी या बैसिल- 10 पत्तियां

चंदन- एक चम्मच

हल्दी पाउडर- 1 चुटकी

विधि:-

सभी सामग्री को आपस में मिला कर पेस्ट बना कर इस पैक को आधे घंटे लगाए और फिर पानी से धो ले आपका चेहरा कुछ दिनों में दमकने लगता है -

उपचार और प्रयोग -

Friday, November 27, 2015

क्या आप खुजली से परेशान है - Are you bothered by itching

खुजली एक त्‍वचा रोग है, जिससे ब्‍याक्ति काफी परेशान और निराश हो जाता है त्वचा पर खुजली चलने, दाद हो जाने, फोड़े-फुंसी हो जाने पर खुजा-खुजाकर हाल, बेहाल हो जाता है और लोगों के सामने शर्म भी आती है खुजली के लिए सबसे कारगर उपाय है तेल की मालिश जिससे रूखी और बेजान त्‍वचा को नमी मिलती है-




कनेर के सौ गाम पत्ते ले आये और इस मात्रा को 500 मिलीलीटर सरसों के तेल में पकाएं। जब यह पकते-पकते आधा बच जाए तो इसे छानकर शीशी में भर लें। इसे प्रतिदिन खुजली पर लगाने से खुजली दूर होती है। इसका प्रयोग अनेक प्रकार की त्वचा रोग को दूर करने के लिए भी किया जाता है-



कनेर के पत्ते को सरसों तेल में भूनकर खुजली पर मलने से त्वचा की खुजली खत्म होती है।

कनेर के पत्ते को 250 मिलीलीटर सफेद तिल के तेल में पकाकर त्वचा पर लगाने से गीली और सूखी दोनो तरह की खुजली दूर होती है।

आप कोई क्रीम या दवा लगाना न चाहें या लगाने पर भी आराम न हो तो घर पर ही यह चर्म रोगनाशक तेल बनाकर लगाएँ, इससे यह व्याधियाँ दूर हो जाती हैं।

तेल बनाने की विधि :-


सामग्री :-


नीम की छाल- 25 ग्राम

चिरायता-25 ग्राम

हल्दी- 25 ग्राम

लाल चन्दन- 25 ग्राम

हरड़- 25 ग्राम

बहेड़ा- 25 ग्राम

आँवला- 25 ग्राम

अड़ूसे के पत्ते- 25 ग्राम

तिल्ली का तेल- कल्क के वजन का चार गुना ले

बनाने की विधि :-

इन सभी आठो द्रव्य को लेकर पांच से छ: घंटे पानी में भिगो दे सिर्फ तिल्ली के तेल को छोड़कर । फूल जाने पर इसे पीस कर कल्क बना लें।

कल्क (पीठी)  से चार गुनी मात्रा में तिल का तेल और तेल से चार गुनी मात्रा में पानी लेकर मिलाकर एक बड़े बरतन में डाल दें। इसे मंदी आंच पर इतनी देर तक उबालें कि पानी जल जाए सिर्फ तेल बचे। इस तेल को शीशी में भरकर रख लें।

फिर जहाँ भी खुजली चलती हो, दाद हो वहाँ या पूरे शरीर पर इस तेल की मलिश करें। यह तेल चमत्कारी प्रभाव करता है। लाभ होने तक यह मालिश जारी रखें, मालिश स्नान से पहले या सोते समय करें और चमत्कार देखें।

खुजली के कुछ घरेलू इलाज:-


खुजली होने पर प्राथमिक सावधानी के तौर पर सफाई का पूरा ध्‍यान रखिए।

साबुन का प्रयोग जितना भी हो सकता है कम कर दें और सिर्फ मृदु साबुन का ही प्रयोग करें। या नीम साबुन का इस्तेमाल करे .

कभी कभी त्‍वचा को सुगंधित पदार्थों, क्रीम, लोशन, शैंपू, जूतों या कपड़ों में पाए जाने वाले रसायनों से भी एलर्जि हो जाती है। इसलिए सही तरीके का लोशन इत्‍यादि ही लगाएं।

अगर आपको कब्‍ज है तो उसका भी इलाज करवाएं।

हफ्ते में दो बार मुल्‍तानी मिट्टी और नीम की पत्‍ती का लेप लगाएं, उसके बाद साफ पानी से शरीर को धो लें।

थोडा सा कपूर लेकर उसमें दो बड़े चम्‍मच नारियल का तेल मिलाकर खुजली वाले स्‍थान पर नियमित लगाने से खुजली मिट जाती है। हां, तेल को हल्‍का सा गरम करके ही कपूर में मिलाए।

यदि जनेंद्रिय पर खुजली की शिकायत हो, तो गर्म पानी में फिटकरी मिलाकर उसे लगाएं।

नारियल तेल का दो चम्‍मच लेकर उसमें एक चम्‍मच टमाटर का रस मिलाइए। फिर खुजली वाले स्‍थान पर भली प्रकार से मालिश करिए। उसके कुछ समय बाद गर्म पानी से स्‍नान कर लें। एक सप्‍ताह ऐसा लगातार करने से खुजली मिट जाएगी।

यदि गेहूं के आटे को पानी में घोल कर उसका लेप लगाया जाए, तो विविध चर्म रोग, खुजली, टीस, फोडे-फुंसी के अलावा आग से जले हुए घाव में भी राहत मिलती है।

सवेरे खाली पेट 30-35 ग्राम नीम का रस पीने से चर्म रोगों में लाभ होता है, क्‍योंकि नीम का रस रक्‍त को साफ करता है।

खुजली से परेशान लोगों को चीनी और मिठाई नहीं खानी चाहिए। परवल का साग, टमाटर, नीबू का रस आदि का सेवन लाभप्रद है।

उपचार और प्रयोग -

Thursday, November 26, 2015

अपनी तोंद कम करने के लिए नमक का सेवन कम करे- To reduce salt intake To reduce your belly

आजकल बढ़ते मोटापे से देश में सभी परेशान हैं जिसे देखो बाहर निकले पेट से परेशान है पेट का बाहर निकल आना न सिर्फ भद्दा लगता है बल्कि कई बीमारियों को न्यौता देने वाला भी साबित हो सकता है लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं-



वैज्ञानिकों ने इसका उपाय खोज लिया है। एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, प्रतिदिन अपने भोजन में नमक (Salt ) की मात्रा घटाकर और पोटैशियम से भरपूर फाइबर युक्त (Fiber ) भोजन खाकर हम तोंद से बच सकते हैं-


पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में तोंद निकलने की शिकायत अधिक होती है। इसका मुख्य कारण यह है कि औरतों के आंत की लंबाई अधिक होती है-महिलाओं एवं पुरुषों के पाचन तंत्र (Digestive System ) में कुछ मूल अंतर होते हैं। इसलिए पेट को निकलने से बचाने के लिए कुछ परहेज (Avoiding)बरते जाने चाहिए-

आप नमक कम खाएं क्युकि भोजन में नमक का अधिक प्रयोग करने से भी पेट फूल सकता है। एक दिन में अधिकतम 1,500 मिलीग्राम नमक ही खाना चाहिए-

घुलनशील एवं अघुलनशील(Soluble and insoluble) रेशेयुक्त भोजन की मिश्रित मात्रा का प्रयोग करना चुस्त-दुरुस्त एवं छरहरा रहने का सबसे अच्छा तरीका है। पेट के अत्यधिक भरे होने से बचें, क्योंकि इससे कब्ज (Constipation)होती है-

सोडियम चूंकि शरीर में जल के स्तर को बनाए रखता है, वहीं पोटैशियम अतिरिक्त जल से निजात दिलाने में मददगार होता है। केले और शकरकंद जैसे पोटैशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन करने से कमर के मध्य हिस्से को पतला करने में मदद मिलती है इसलिए आप पोटैशियम से भरपूर भोजन लें-

शरीर में पानी की मात्रा बरकरार रखेंः पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से भोजन के रेशे अपना कार्य कहीं बेहतर तरीके से कर पाते हैं और कब्ज की शिकायत को दूर रखते हैं-

ऐसे खाद्य पदार्थों से दूर रहें जो पचने में मुश्किल हों, जैसे चीनी या वसायुक्त खाद्य(Fatty food) पदार्थ-

फ्लेवर्ड पेय पदार्थों कम कार्बाेहाइड्रेट वाले एवं चीनी रहित खाद्य पदार्थों को हमारा शरीर आसानी से नहीं पचा पाता। बड़ी आंत में पाए जाने वाले जीवाणु(Bacteria) उन्हें फर्मेंट करने की कोशिश करते हैं, जिसके कारण पेट में गैस बनती है और पेट फूल जाता है। इसलिए आप कृत्रिम मिठास (artificial sweeteners)वाले पदार्थों से बचें-

उपचार और प्रयोग-

Wednesday, November 25, 2015

फिटकरी के ख़ास गुण - Exclusive Properties of Alum

‪फिटकरी‬ का इस्तमाल खासतौर से बारिश के मौसम में पानी को साफ करने के लिए किया जाता है। फिटकरी को लोग सालों से काम में लेते आए हैं। फिटकरी आमतौर पर सब घरों में प्रयोग होती है आइये जाने इसके गुण -



यह लाल व सफेद दो प्रकार की होती है। अधिकतर सफेद फिटकरी का प्रयोग ही किया जाता है।




जानिए फिटकरी के खास ‪‎गुण‬:-


जिन लोगो को शरीर से ज्यादा ‪पसीना‬ आने की समस्या हो तो वो लोग नहाते समय पानी में फिटकरी को घोलकर नहाने से पसीना आना कम हो जाता है।

फिटकरी के पानी से ‪योनि‬ को सुबह-शाम नियमित धोएं। पंसारी से संगे जराहत और फिटकरी लेकर दोनों पीस लें और इस आधा ग्राम चूर्ण की फंकी ताजे पानी के साथ या गाय के दूध के साथ सुबह, दोपहर और शाम दिन में तीन बार लें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से अवश्य लाभ होगा।

सर्दियों के समय में पानी में ज्यादा काम करने से हाथों की उंगुलियों में सूजन या खुजली हो जाती है इससे बचने के लिए हो थोड़े पानी में फिटकरी को डालकर उबाल लें और अब इस पानी से उंगुलियों को धोने से ‪#‎सूजन‬ और खुजली में काफी आराम मिल जाता है।

यदि चोट या खरोंच लगकर घाव हो गया हो और उससे खून बह रहा हो घाव को फिटकरी के पानी से धोएं तथा घाव पर फिटकरी का चूर्ण बनाकर बुरकने से ‪खून‬ बहना बंद हो जाता है।

फिटकरी और काली मिर्च पीसकर दांतों की जड़ों में मलने से ‪दांतों‬ की पीड़ा में लाभ होते है।

सेविंग करने के बाद चेहरे पर फिटकरी लगाने से ‪चेहरा‬ मुलायम हो जाता है।

आधा ग्राम पिसी हुई फिटकरी को शहद में मिलाकर चाटने से ‪दमा‬ और खांसी में बहुत लाभ मिलता है।

भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ लेने से खून की उल्टी बंद हो जाती है।

दांत दर्द से बचने के लिए फिटकरी और काली मिर्च को पीसकर दांतों की जड़ों में मलने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है।

फुलाई हुई फिटकरी एक तोला और मिश्री दो तोला दोनों को महीन पीसकर रख लें। एक-एक माशा नित्य सवेरे खाने से दमा के रोग में लाभ होता है।

प्रतिदिन दोनों समय फिटकरी को गर्म पानी में घोलकर कुल्ला करें ,इससे दांतों के ‪कीड़े‬ तथा मुंह की बदबू दूर हो जाती है ।

डेढ़ ग्राम फिटकरी पाउडर को फांककर ऊपर से दूध पीने से चोट लगने से होने वाला ‪दर्द‬ दूर हो होता हैं।

टांसिल‬ की समस्या होने पर गर्म पानी में चुटकी भर फिटकरी और नमक डालकर गरारे करें। इससे टांसिल की समस्या में जल्दी ही आराम मिल जाता है।

दस्त और ‪पेचिश‬ की परेशानी से बचने के लिए थोड़ी फिटकरी को बारीक पीसकर भून लें और अब इस भुनी हुई फिटकरी को गुलाब जल के साथ मिलाकर पीने से खूनी दस्त आना बंद हो जाता है।

एक लीटर पानी में 10 ग्राम फिटकरी का चूर्ण घोल लें। इस घोल से प्रतिदिन सिर धोने से ‪जुएं‬ मर जाती हैं।

दस ग्राम फिटकरी के चूर्ण में पांच ग्राम सेंधा नमक मिलाकर मंजन बना लें। इस मंजन के प्रतिदिन प्रयोग से ‪दांतो‬ के दर्द में आराम मिलता है ।

भुनी हुई फिटकरी एक तोला, भुना हुआ तूतिया छह माशा, कत्छा एक तोला, इन सबको कूट पीसकर ‪‎मंजन‬ बनाकर लगाने से दांतों की पीड़ा दूर होती है और दांत मजबूत तथा सुदृढ़ होते हैं।

कान‬ में फुंसी हो अथवा ‪मवाद‬ आता हो तो एक प्याले में थोड़ी-सी फिटकरी पीसकर पानी डालकर घोलें और पिचकारी द्वारा कान धोएं।

शहद में फिटकरी मिलाकर आंखों में डालने से ‪आंखों‬ की लाली समाप्त हो जाती है।

खुजली‬ वाली जगह को फिटकरी वाले पानी से धोएं और बाद में उस जगह पर थोड़ा-सा कड़वा तेल लगा लें। उस पर थोड़ा-सा कपूर भी डाल लें।

एक लीटर पानी में बीस ग्राम फिटकरी को  घोल के दिन में दो या तीन बार सफ़ेद पानी की शिकायत होने पर गुप्तांग को घोने से एवं एक ग्राम फिटकरी को एक पके केले में चीर  भर के सात दिन खाने से आराम होता है -

उपचार और प्रयोग -