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Saturday, December 5, 2015

मनीप्लांट पौधे लगाने के फायदे और नुकसान - Advantages and disadvantages Money plant plantation

घरों का सुंदरता बढ़ाने के लिये मनी प्लांट्स लगाए जाते हैं ये शुक्र के कारक हैं मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर होते हैं लेकिन आप इसके फायदे और नुकसान दोनों पे अवश्य विचार करे-



लोगो की मान्यता है कि मनी प्लांट का पौधा घर में लगाने से घर में धन का आगमन बढ़ता है और सुख-समृद्धि में इजाफा होता है। इसी मान्यता के कारण बहुत से लोग अपने घरों में मनी प्लांट का पौधा लगाते हैं लेकिन मनी प्लांट को लगाने के बाद भी धनागमन में कोई अंतर नहीं होता है बल्कि कई बार आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है-

पौधे भी घर के हर हिस्से तथा हर वस्तु उसमें रहने वाले लोगों के जीवन को किसी न किसी तरह से प्रभावित करते  है। यहां तक कि घर में रखे फूल व पौधे भी परिवार के सदस्यों पर अपना असर डालते हैं-

वास्तु विज्ञान के अनुसार हर पौधे के लिए एक दिशा निर्धारित है। अगर उचित दिशा में पेड़-पौधा लगाते हैं तो वातावरण की सकारात्मक उर्जा का लाभ मिलता है। लेकिन गलत दिशा में वृक्षारोपण करने से लाभ की बजाय नुकसान होने लगता है-

वास्तु विज्ञान में मनी प्लांट का पौधा लगाने के लिए आग्नेय दिशा यानी दक्षिण-पूर्व को उत्तम माना गया है। आग्नेय दिशा के देवता गणेश जी हैं और प्रतिनिधि ग्रह शुक्र है। गणेश जी अमंगल का नाश करते हैं और शुक्र सुख-समृद्धि का कारक होता है। बेल और लता का कारक शुक्र होता है इसलिए आग्नेय दिशा में मनी प्लांट लगाने इस दिशा सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है-

मनी प्लांट के लिए सबसे नकारात्मक दिशा ईशान यानी उत्तर पूर्व को माना गया है। इस दिशा में मनी प्लांट लगाने पर धन वृद्धि की बजाय आर्थिक नुकसान हो सकता है। ईशान का प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति है। शुक्र और बृहस्पति में शत्रुवत संबंध होता है क्योंकि एक राक्षस के गुरू हैं तो दूसरे देवताओं के गुरू। शुक्र से संबंधित चीज इस दिशा में होने पर हानि होती है-

वास्तु विज्ञान के अनुसार उत्तर पूर्व दिशा के लिए सबसे उत्तम तुलसी का पौधा होता है। इसलिए ईशान दिशा में मनी प्लांट लगाने की बजाय चाहें तो तुलसी लगा सकते हैं। अन्य दिशाओं में मनी प्लांट का पौधा लगाने पर इसका प्रभाव कम हो जाता है-

परिवार में यदि कोई बीमार हो तो उसके आस-पास ताजा फूल रखना शुभ है किंतु रात को वहां से हटा देना चाहिए-फँगशुई के अनुसार बांस के पौधे सुख व समृद्धि के प्रतीक होते हैं-

गुलाब, चंपा व चमेली के पौधे मानसिक तनाव व अवसाद में कमी लाते हैं। इन्हें लगाना अच्छा होता है।

शयन कक्ष के नैऋत्य कोण में टेराकोटा या चीनी मिट्टी के फूलदानों में सूरजमुखी का पौधा मन में उल्लास पैदा करता है-


Sunday, October 25, 2015

उतारा क्या है और किस दिन केसे प्रयोग करे-

उतारा शब्द का तात्पर्य व्यक्ति विशेष पर हावी बुरी हवा अथवा बुरी आत्मा, नजर आदि के प्रभाव को उतारने से है - ये उतारे आमतौर पर जादा तर मिठाइयों द्वारा किए जाते हैं क्योंकि मिठाइयों की ओर ये शीघ्र आकर्षित होते हैं-





उतारा करने की विधि :-




उतारे की वस्तु सीधे हाथ में लेकर नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति के सिर से पैर की ओर सात अथवा ग्यारह बार घुमाई जाती है। इससे वह बुरी आत्मा उस वस्तु में आ जाती है। उतारा की क्रिया करने के बाद वह वस्तु किसी चौराहे, निर्जन स्थान या पीपल के नीचे रख दी जाती है और व्यक्ति ठीक हो जाता है।


किस दिन किस मिठाई से उतारा करना चाहिए-इसका विवरण यहां प्रस्तुत है:-




रविवार को नमक अथवा सूखे फलयुक्त बर्फी से उतारा करना चाहिए।


सोमवार को बर्फी से उतारा करके बर्फी गाय को खिला दें।


मंगलवार को मोती चूर के लड्डू से उतार कर लड्डू कुत्ते को खिला दें।


बुधवार को इमरती से उतारा करें व उसे कुत्ते को खिला दें।


गुरुवार को सायं काल एक दोने में अथवा कागज पर पांच मिठाइयां रखकर उतारा करें। उतारे के बाद उसमें छोटी इलायची रखें व धूपबत्ती जलाकर किसी पीपल के वृक्ष के नीचे पश्चिम दिशा में रखकर घर वापस जाएं। ध्यान रहे, वापस जाते समय पीछे मुड़कर न देखें और घर आकर हाथ और पैर धोकर व कुल्ला करके ही अन्य कार्य करें।


शुक्रवार को मोती चूर के लड्डू से उतारा कर लड्डू कुत्ते को खिला दें या किसी चौराहे पर रख दें।


शनिवार को उतारा करना हो तो इमरती या बूंदी का लड्डू प्रयोग में लाएं व उतारे के बाद उसे कुत्ते को खिला दें।


इसके अतिरिक्त रविवार को सहदेई की जड़, तुलसी के आठ पत्ते और आठ काली मिर्च किसी कपड़े में बांधकर काले धागे से गले में बांधने से ऊपरी हवाएं सताना बंद कर देती हैं।


नजर उतारने अथवा उतारा आदि करने के लिए कपूर, बूंदी का लड्डू, इमरती, बर्फी, कड़वे तेल की रूई की बाती, जायफल, उबले चावल, बूरा, राई, नमक, काली सरसों, पीली सरसों मेहंदी, काले तिल, सिंदूर, रोली, हनुमान जी को चढ़ाए जाने वाले सिंदूर, नींबू, उबले अंडे, गुग्गुल, शराब, दही, फल, फूल, मिठाइयों, लाल मिर्च, झाडू, मोर छाल, लौंग, नीम के पत्तों की धूनी आदि का प्रयोग किया जाता है।


स्थायी व दीर्घकालीन लाभ के लिए संध्या के समय गायत्री मंत्र का जप और जप के दशांश का हवन करना चाहिए।


हनुमान जी की नियमित रूप से उपासना, भगवान शिव की उपासना व उनके मूल मंत्र का जप, महा-मृत्युंजय मंत्र का जप, मां दुर्गा और मां काली की उपासना करें। स्नान के पश्चात्‌ तांबे के लोटे से सूर्य को जल का अर्य दें।


मानसिक शान्ति और सम्पन्नता के लिए पूर्णमासी को सत्यनारायण की कथा स्वयं करें अथवा किसी कर्मकांडी ब्राह्मण से सुनें। संध्या के समय घर में दीपक जलाएं, प्रतिदिन गंगाजल छिड़कें और नियमित रूप से गुग्गुल की धूनी दें। प्रतिदिन शुद्ध आसन पर बैठकर सुंदर कांड का पाठ करें। किसी के द्वारा दिया गया सेव व केला न खाएं। रात्रि बारह से चार बजे के बीच कभी स्नान न करें।


बीमारी से मुक्ति के लिए नीबू से उतारा करके उसमें एक सुई आर-पार चुभो कर पूजा स्थल पर रख दें और सूखने पर फेंक दें। यदि रोग फिर भी दूर न हो, तो रोगी की चारपाई से एक बाण(बान जिससे चारपाई को बिना जाता है ) निकालकर रोगी के सिर से पैर तक छुआते हुए उसे सरसों के तेल में अच्छी तरह भिगोकर बराबर कर लें व लटकाकर जला दें और फिर राख पानी में बहा दें।


अभिचार कर्म से मुक्ति के उपाय :-




यदि आपको ऐसा लग रहा हो कि कोई आपको मारना चाहता है तो पपीते के 21 बीज लेकर शिव मंदिर जाएं व शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाकर धूप बत्ती करें तथा शिवलिंग के निकट बैठकर पपीते के बीज अपने सामने रखें। अपना नाम, गौत्र उच्चारित करके भगवान् शिव से अपनी रक्षा की गुहार करें व एक माला महामृत्युंजय मंत्र की जपें तथा बीजों को एकत्रित कर तांबे के ताबीज में भरकर गले में धारण कर लें।


शत्रु अनावश्यक परेशान कर रहा हो तो नींबू को 4 भागों में काटकर चौराहे पर खड़े होकर अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए चारों दिशाओं में एक-एक भाग को फेंक दें व घर आकर अपने हाथ-पांव धो लें। तांत्रिक अभिकर्म से छुटकारा मिलेगा।


शुक्ल पक्ष के बुधवार को 4 गोमती चक्र अपने सिर से घुमाकर चारों दिशाओं में फेंक दें तो व्यक्ति पर किए गए तांत्रिक अभिकर्म का प्रभाव खत्म हो जाता है।


भूत-प्रेत आदि से ग्रसित व्यक्ति की पहचान कैसे करे:-




इस प्रकार के व्यक्ति के शरीर से या कपड़ों से गंध आती है। ऐसा व्यक्ति स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाता है।ऐसे व्यक्ति की आंखें लाल रहती हैं व चेहरा भी लाल दिखाई देता है। ऐसे व्यक्ति को अनायास ही पसीना बार-बार आता है। ऐसा व्यक्ति सिरदर्द व पेट दर्द की शिकायत अक्सर करता ही रहता है। ऐसा व्यक्ति झुककर या पैर घसीट कर चलता है। कंधों में भारीपन महसूस करता है। कभी-कभी पैरों में दर्द की शिकायत भी करता है। बुरे स्वप्न उसका पीछा नहीं छोड़ते।


जिस घर या परिवार में भूत-प्रेतों का साया होता है वहां शांति का वातावरण नहीं होता। घर में कोई न कोई सदस्य सदैव किसी न किसी रोग से ग्रस्त रहता है। अकेले रहने पर घर में डर लगता है बार-बार ऐसा लगता है कि घर के ही किसी सदस्य ने आवाज देकर पुकारा है जबकि वह सदस्य घर पर होता ही नहीं....?


इसे छलावा कहते हैं। भूत-प्रेत से ग्रसित व्यक्ति का उपचार कैसे करें: भूत-प्रेतों की अनेकानेक योनियां हैं। इतना ही नहीं इनकी अपनी-अपनी शक्तियां भी भिन्न-भिन्न होती हैं। इसलिए सभी ग्रसित व्यक्तियों का उपचार एक ही क्रिया द्वारा संभव नहीं है।


योग्य व विद्वान व्यक्ति ही इनकी योनी व शक्ति की पहचान कर इनका उपचार बतलाते हैं। अनेक बार ऐसा भी होता है कि ये उतारा या उपचार करने वाले पर ही हावी हो जाते हैं इसलिए इस कार्य के लिए अनुभव व गुरु का मार्ग दर्शन अत्यंत अनिवार्य होता है-

आइये जानते है कुछ सामान्य सा उपचार -



सामान्य उपचार भी ग्रसित व्यक्ति को ठीक कर देते हैं या भूत-प्रेतों को उनके शरीर से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर देते हें। ये उपचार उतारा या उसारा के रूप में किया जाता है। इन्हें आजमाएं।


ग्रसित व्यक्ति के गले में लहसुन की कलियों  की माला डाल दें। (लहसुन की गंध अधिकांशतः भूत-प्रेत सहन नहीं कर पाते इसलिए ग्रसित व्यक्ति को छोड़कर भाग जाते हैं।) रात्रिकाल में ग्रसित व्यक्ति के सिरहाने लहसुन और हींग को पीसकर गोली बनाकर रखें।


ग्रसित व्यक्ति की शारीरिक स्वच्छता बनाए रखने का प्रयास करें। ग्रसित व्यक्ति के वस्त्र अलग से धोएं व सुखाएं।


ग्रसित व्यक्ति के ऊपर से बूंदी का लड्डू उतारकर चैराहे या पीपल के नीचे रखें (रविवार छोड़कर)। तीन दिन लगातार करें।


किसी योग्य व्यक्ति से अथवा गुरु से रक्षा कवच या यंत्र आदि बनवाकर ग्रसित व्यक्ति को धारण कराना चाहिए। ग्रसित व्यक्ति को अधिक से अधिक गंगाजल पिलाना चाहिए व उस स्थान विशेष पर भी प्रतिदिन गंगाजल छिड़कना चाहिए। नवार्ण मंत्र (ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) की एक माला जप करके जल को अभिमंत्रित कर लें व पीड़ित व्यक्ति को पिलाएं।


हर मंगल और शनि के दिन श्री हनुमान जी के मंदिर में जाये और उनके चरणों में से सिन्दूर लेकर माथे पर लगाये -


बेकार के जादू-टोने -टोटको से दूर रहे अन्यथा ये लाभ की बजाय भयंकर नुकसान भी कर सकते है .. अतः किसी योग्य जानकर से परामर्श लेकर और समाज कल्याण के लिए ही इन सबका प्रयोग करे .. किसी को अनायास परेशान न करे.


उतारा आदि करने के पश्चात भलीभांति कुल्ला अवश्य करें।


इस तरह, किसी व्यक्ति पर पड़ने वाली किसी अन्य व्यक्ति की नजर उसके जीवन को तबाह कर सकती है। नजर दोष का उक्त लक्षण दिखते ही ऊपर वर्णित सरल व सहज उपायों का प्रयोग कर उसे दोषमुक्त किया जा सकता है।

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Wednesday, October 21, 2015

सभी कष्ट निवारण करता है अदभुत-बजरंग बाण-

आज के युग में हनुमान जी की शक्ति प्रथ्वी पे आज भी विद्धमान है- जिस मनुष्य को अकारण ही कोई कष्ट है या कोई आपका बुरा चाहता है अकारण ही अनिष्ट करने का प्रयास कर रहा है -या आपको भयानक स्वप्न आते है- या फिर घर में कलह या विशेष संकट है यदिकोई रोगी ठीक नहीं हो रहा है हनुमान चलीषा और बजरंग बान का दैनिक पाठ ही आपके कष्टों को दूर कर देता है बस ये याद रक्खे कि धन प्राप्ति या स्त्री वशीकरण के लिए हनुमान जी से प्रार्थना न करे-




जो व्यक्ति नित्य ही हनुमान चालीसा या हनुमान बाण का पाठ प्रतिदिन पूजा पाठ विधि-विधान से करता है | उसे भौतिक सुख की प्राप्ति, उच्च शिक्षा, परिवार में शांति मिलती है-


हनुमान जी की माता का नाम अंजना है-उनके पिता वायु देवता हैं-वायु के बिना मनुष्य का जीवन असंभव है | हनुमान जी को भूख लगी तब उन्होंने सूर्य भगवान को देखा-उन्होंने समझा लाल-लाल सुंदर मीठा फल है. हनुमान सूर्य को मुंह में दबाएं आकाश की ओर जा रहे थे | तब हनुमान ने सफेद ऐरावत पर सवार इंद्र को देखा व समझा कोई सफेद फल है | उधर भी झपट पड़े. देवता इंद्र बहुत क्रोधित हुए | अपने को हनुमान से बचाया | सूर्य को छुड़ाने के लिए हनुमान की ठुड्डी पर बज्र का प्रहार किया | वज्र के प्रहार से हनुमान का मुंह खुल गया और वह बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े | हनुमान को बेहोश देख कर वायु देवता ने क्रोध में आकर बहना बंद कर दिया. हवा रुक जाने के कारण तीनों लोकों के पशु-पक्षी मनुष्य देवी-देवतागण व्याकुल हो उठे | ब्रह्मा जी इंद्र सहित सभी देवताओं को लेकर वायु देवता के पास पहुंचे | उन्होंने आशीर्वाद देकर हनुमान जी को जीवित कर दिया. उन्होंने कहा कि आज से इस बालक पर किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का प्रभाव नहीं पड़ेगा | ठुड्डी वज्र से टूट गयी थी- इसलिए इनका नाम हनुमान पड़ा |


भगवान कृष्ण ने कहा है कि अंजनी पुत्र में मैं ही राम हूं, मैं ही हनुमान हूं, मैं ही योगीश्वर हूं | नवग्रहों के बाद तीन ग्रहों की खोज हुई. हर्षल, नेप्चयून और प्लूटो, जो ब्रह्मा विष्णु महेश हैं | जो हनुमान की निष्ठापूर्वक पूजा, उपासना करता है वह जातक सुखी रहता है | हनुमान जयंती पर्व हनुमान के जन्मदिवस पर मनाया जाता है-


सर्व प्रथम भगवान राम का  ध्यान करे | भगवान राम जहां हैं | वहां स्वयं भगवान हनुमान उपस्थित रहते हैं |यदि आपको किसी विशेष कार्य हेतु प्रयोग करना है तो आप ये विशिस्ट नियम से करे .


साधना के विशिष्ट नियम :-



किसी भी कार्य की प्राप्ति के लिए संकल्प करें | हनुमान जी की तस्वीर सामने रख कर पद्‌मासन में बैठ जायें | एक अखंड दीपक जलाकर हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें | साधना में पवित्रता और ब्रह्‌मचर्य का पालन करें | हनुमान जी को गुड़ चना विशेष रूप से अर्पण करें | गुगृल का हवन करें-


हनुमान चालीसा का प्रतिदिन 11 पाठ करें | विशेष कार्यों में जातक हनुमान कवच प्राण प्रतिष्ठित धारण कर पंचमुखी हनुमान साधना करें | जातक मंगलवार के दिन उपवास करें | जातक को मंगलवार के दिन चमेली के तेल से हनुमान जी का स्नान कराएं एवं पीला सिंदुर घी में मिलाकर बजरंगबली को लगायें | शनि ग्रह का अनिष्ट प्रभाव चल रहा है-तो शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर तिल के तेल का दीपक जलाकर 108 बार हनुमान बाण का पाठ करें | नवग्रह की शांति के लिए प्रतिदिन दो माला मंत्रों का जाप करें.


आपकी समस्या और समाधान:-



जब आप किसी कानूनी प्रक्रिया में फंसे हों. आप या आपके परिवार में कोई रोग से ग्रसित हो- किसी के द्वारा किया गया तंत्र  का प्रभाव हो और आपको या परिवार में किसी को भूत-प्रेत की ऊपरी बाधा हो आप शत्रुओं के जाल में फंसे हैं व अपने को निर्बल महसूस कर रहे हैं- कोई भी कार्य में सफलता रही मिल रही हो- जब आपके आत्मविश्वास या मनोबल की कमी हो- तब आप बिना चिंता किये अपनी समस्याओं के लिए करे सफलता अवस्य ही मिलेगी -



अगर आप किसी परिवार के अन्य सदस्य के लिए कर रहे है तब उसके नाम से संकल्प ले के भी कर सकते है ये आप गुरु निर्देशन या तंत्र साधक की सलाह से यह कार्य करें-


ब्रह्‌ममुहुर्त में जातक स्नानादि से निवृत होकर हनुमान यंत्र प्राण प्रतिष्ठित लेकर बाजोट(लकड़ी का पट्टा) पर लाल वस्त्र बिछाकर यंत्र स्थापित करें. यंत्र को चमेली के तेल से स्नान कराकर पीला सिंदूर घी में मिलाकर अर्पण करें. जातक लाल आसन पर पद्‌मासन में बैठें. 11 दीप प्रज्जवलित कर 108 बार हनुमान बाण का पाठ करें एवं दो माला मंत्रों का जाप करें. विशेष कार्य में रात्रि में पूजन करें-


मंत्र 1 - हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट.(जप के लिए मन्त्र )

मंत्र 2 - ऊं नमो भगवते आंजनेयाय, महाबलाय स्वाहा.(हवन के लिए प्रयोग करे )


ये है बजरंग बाण का अमोघ विलक्षण प्रयोग:-



भौतिक मनोकामनाओं की पुर्ति के लिये बजरंग बाण का अमोघ विलक्षण प्रयोग-


आप अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार का दिन चुन लें। हनुमानजी का एक चित्र या मूर्ति जप करते समय सामने रख लें। ऊनी अथवा कुशासन बैठने के लिए प्रयोग करें। अनुष्ठान के लिये शुद्ध स्थान तथा शान्त वातावरण आवश्यक है। घर में यदि यह सुलभ न हो तो कहीं एकान्त स्थान अथवा एकान्त में स्थित हनुमानजी के मन्दिर में प्रयोग करें।


हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी प्रमाण में लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ। बत्ती के लिए अपनी खुद की लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लें अथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहना चाहिए। हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें।


जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, हनुमानजी के निमित्त नियमित कुछ भी करते रहेंगे।यदि आप परिवार के किसी और व्यक्ति के लिए कर रहे है तब संकल्प में उस व्यक्ति के नाम से संकल्प ले कि " में अमुक व्यक्ति के अमुक कार्य हेतु इस प्रयोग को कर रहा हूँ ."


अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भ करें। “श्रीराम–” से लेकर “–सिद्ध करैं हनुमान” तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है।


गूगुल की सुगन्धि देकर जिस घर में बगरंग बाण का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट आ ही नहीं पाते। समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए।


बजरंग बाण ध्यान मन्त्र :-




श्रीराम



अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।
दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।
रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।।


दोहा




निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।


चौपाई



जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।

जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।
बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।

अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।

अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।

जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।

गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।
सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।

ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।
सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।

जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।

बन उपबन मग गिरि गृह माहीं। तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं॥
जनकसुता हरि दास कहावौ। ताकी सपथ बिलंब न लावौ॥

जै जै जै धुनि होत अकासा। सुमिरत होय दुसह दुख नासा॥
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं। यहि औसर अब केहि गोहरावौं॥

उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई। पायं परौं, कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥

ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल॥
अपने जन को तुरत उबारौ। सुमिरत होय आनंद हमारौ॥

यह बजरंग-बाण जेहि मारै। ताहि कहौ फिरि कवन उबारै॥
पाठ करै बजरंग-बाण की। हनुमत रक्षा करै प्रान की॥

यह बजरंग बाण जो जापैं। तासों भूत-प्रेत सब कापैं॥
धूप देय जो जपै हमेसा। ताके तन नहिं रहै कलेसा॥


दोहा



प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।
तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।


किसी भी प्रयोग में विश्वाश धेर्य निष्ठा संकल्प शक्ति की विशेष आवश्यकता होती है शंका करने वाले मनुष्य को सिर्फ शंका ही प्राप्त होती है जिनको शंका रहती हो उनके लिए व्यर्थ है कृपया अपने समय की बर्बादी न करे -यही उत्तम है - जिसने कर लिया वो कष्ट-मुक्त हो गया -

उपचार और प्रयोग -

पति या पत्नी से परेसान लोग आजमाए -

समाज में सभी तरह की मानसिकता के लोग है कोई पत्नी से परेशान है तो कोई पत्नी अपने पति से परेशान है - कारण अलग-अलग है - पति का मन एक से भर गया तो वो दूसरे जगह मुंह मारता है मगर कभी-कभी जीवन में इसका विपरीत भी होता है कि पति अच्छा हो तो पत्नी उसका लाभ उठा लेती है और बेचारा पति चाह कर भी कुछ नहीं कर पाता है -काफी कोशिशो के बाद भी पति अपनी पत्नी को समझाने में नाकामयाब हो जाता है -




जब आँख के आगे जिद का पर्दा पड़ा हो तो बड़ा मुस्किल होता है -घर और परिवार टूटने की कगार तक पहुँच जाता है यहाँ तक कि कभी बात तलाक तक पहुँच जाती है -

स्त्रियों की पहले ये प्रथा होती थी कि पति के भोजन के बाद पत्नियाँ या तो उनकी जूठी थाली में भोजन करती थी या फिर पति थोडा भोजन छोड़ देता था ये उनके आपसी प्यार को बढ़ावा देता था -धीरे-धीरे वक्त बदलता गया और लोग स्मार्ट युग में प्रवेश कर गए - पढ़ी लिखी लडकियों ने अपने बुजुर्गो के संस्कार को एक किनारे करना ही जादा उचित समझा - कुछ कहती है एक दुसरे का जूठा ग्रहण करने से पति के अंदर की बिमारी मुझे भी लग जायेगी - मतलब अब पति -परमेश्वर नहीं रोग का घर बन गया - सच ये है कि पहले एक संयुक्त परिवार होते थे आपसी प्यार और समन्वय की भावना होती थी - आपको पता है -पहले तलाक की संख्या कम होती थी -

मायके वालो का भी आजकल अपनी बेटी के परिवार को तोड़ने में एक बड़ा रोल सामने आने लगा है - शादी के बाद दिन में तीन-चार बार मोबाइल पे बेटी का हाल जानना और उसमे अपनी सलाह -मशविरा का पुट भरना उनका नैतिक कर्तव्य बन गया है -बेचारी लड़की ये भी नहीं समझती कि उसे किसकी बात माननी है -

सीरियल का दौर भी है खाली समय है - टी वी पे सास बहूँ के सीरियल से अच्छाई की मानसिकता कम लेकिन जवाब देना और किसी प्रकार उसका पति -घर वालो से खिलाफ हो इसकी विशेष बात  को  मन-मस्तिस्क में बिठा लेना एक आम बात  बन  गई  है -

कुछ प्रयोग जो आपका जीवन बदल सकते है बस भावना किसी के अहित की न हो और इक्छाशक्ति पूर्ण निष्ठा से हो तभी ये कार्य सफल होते है -अंधविश्वास से दूर रहने वालो के करने से इसका कोई फल नहीं मिलता है क्युकि उनकी इक्छाशक्ति इसको निगेटिव की ओर ले जाती है -

जाने और करे :-


पति-वशीकरण प्रयोग :-



यदि आपको लगता हो कि पति के अंदर आपके लिए प्यार न रहा हो तो किसी शुक्रवार को भगवान कृष्ण को याद करें करते हुए तीन इलायची अपने शरीर से स्पर्श कराकर अपने पास रख लें। अब शनिवार सुबह इसी इलायची को पीसकर खाने में या चाय में मिलाकर उन्हें पिला दें-ऐसा तीन हफ्ता हर शुक्रवार को करें तो आपको उनके व्यवहार में फर्क नजर आने लगेगा- इसे आगे भी जारी रख सकती है -


यदि आपको डर हो कि कहीं आपका पति आपको बीच रास्ते ही आपको छोड़कर न चल दे तो इसके लिए यह टोटका अपनाएं। नारियल, धतूरे के बीज, कपूर को पीसकर इसमें शहद मिला लें। हर रोज इसी लेप से लेकर तिलक करें, वह आपको छोड़कर कभी नहीं जायेगे -

यदि पिछले कुछ समय से पति की रुचि पत्नी में कम हो गई हो तो आप दोनों साथ भोजन करें और भोजन के समय चुपके से पत्नी पति के खाने में अपनी थाली से थोड़ा भोजन रख दे। ऐसा करने से पति फिर से पत्नी के प्रति आकर्षित हो जाता है-

अक्सर किसी न किसी के साथ होता है कि पति किसी अन्य औरत के करीब आ जाता है। ऐसे में परेशान पत्नी यदि यह उपाय कर ले तो उसका पति उस महिला के कब्जे से बाहर निकल सकता है। गुरुवार को रात 12 बजे चुपके से पति के थोड़े बाल काट लें और फिर इसे जला डालें। इसके बाद जले हुए अवशेष को अपने पैरों से मसल दें, देख लीजिए कि पति कैसे सुधर जाता है-

शुक्ल पक्ष के रविवार को 5 लौंग लें और इसे शरीर में ऐसे स्थान पर रखें, जहां पसीना आता हो। इसके बाद उस लौंग को सुखा लें और चूर्ण बना लें। फिर यही चूर्ण किसी भी चीज में मिलाकर उन्हें पिला दी जाए तो आपके प्रति उनका आकर्षण बना रहेगा-

पत्नी वशीकरण प्रयोग :-


स्त्री को हमेशा ही अपना बना के रखना हो तो काकजंघा, तगर, केसर इन सबको मिलाकर आपस में पीस लें और इसे उस स्त्री के मस्तक पर तथा पैर के नीचे डाल दें-वह आपको छोड़ कर कभी भी नहीं जाएगी-

यह प्रयोग बड़ा ही आसान प्रयोग है और शीघ्र प्रभाव देने वाला भी-इसीलिए इस प्रयोग को दुर्लभ माना जाता है
वैसे भी यह प्रयोग कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को मंगलवार के दिन किया जाता है-परंतु हमारे कुछ भाई लोगो ने इस प्रयोग को मंगलवार -अष्टमी या कृष्ण पक्ष का कोई अच्छया तिथि हो सम्पन्न करके सफलता हासिल की है और अब आप भी करके तो देखो-इस प्रयोग मे एक पान का पत्ता लेना है जो किसी पान के दुकान मे आसानी से मिल जाता है और इस पत्ते को कत्था लगाकर खाया जाता है (नागरवेल)-तो  आप इस पत्ते पे जिसे वश करना है उस व्यक्ति का नाम लिखे और नाम को देखते हुये निम्न मंत्र का जाप 108 बार करे और पत्ते पे तीन बार फुक मारे-

मन्त्र -  "क्लीं क्रीं हुं क्रों स्फ़्रों कामकलाकाली स्फ़्रों क्रों हुं क्रीं क्लीं स्वाहा "

इसके पश्चात इस अभिमंत्रित पत्ते को अपने मुह मे डालकर धीरे-धीरे चबाते हुये निम्न मंत्र जाप जब तक करे जब तक कि पूरा पत्ता चबाना खत्म ना हो जाये तब तक करना है-

" ॐ ह्रीं क्लीं अमुकी क्लेदय क्लेदय आकर्षय आकर्षय मथ मथ पच पच द्रावय द्रावय मम सन्निधि आनय आनय हुं हुं ऐं ऐं श्रीं श्रीं स्वाहा "

इसके बाद जब मुंह का पत्ता समाप्त हो जाए तो थोडा सा पानी पीजिये और जिसको वश में करना है उसका मानसिक स्मरण करते हुए फिर से निम्न मन्त्र का 108 बार जप करे -

"क्लीं क्रीं हुं क्रों स्फ़्रों कामकलाकाली स्फ़्रों क्रों हुं क्रीं क्लीं स्वाहा "

नोट :- मित्रगण जाने कि कभी -कभी अगर किसी के अहित के हेतु आप ये प्रयोग करना चाहते है तो आपकी इक्छाशक्ति और आत्मशक्ति इस प्रयोग को निष्फल करती है- ये सभी प्रयोग किसी घर परिवार को बनाने के लिए है - बुरे कार्य का परिणाम असफल ही होता है -

एक शाबर प्रयोग :-

बहुत परेशान पतियों के लिए एक उम्द्दा प्रयोग है बस इसका दुरूपयोग न करे -

मन्त्र -

 "जंगल की योगिनी पाताल के नाग

उठो मेरे वीरो ...........को ल्याओ हमारे पास

यहाँ यहाँ हमारे सहाई

अब नाज भरी ताज भरी अग्नि तक फूंक फिरो

मन विसरे मेरे गुरु गोरखनाथ की दुहाई "

इसको कैसे करे :-


इस मन्त्र का जप ग्रहण-काल में करे या फिर दिवाली -की रात्री को दिवाली के दीपक पे इस मन्त्र को पढ़ते हुए हाथ में अक्षत लेकर 108 बार बोलते हुए दीपक की लो पर छोड़ते जाए -बस मन्त्र सिद्ध हो जाएगा -फिर कभी भी इसका प्रयोग कर सकते है -

प्रयोग-विधि :-


उपर दिए गए मन्त्र के खाली स्थान पर उसका (स्त्री ) नाम प्रयोग करे हर रोज एक माला (108 दाने की ) इक्कीस दिन जप करे और प्रभाव देखे -


उपचार और प्रयोग-

Saturday, October 17, 2015

कुछ इसे भी आजमाए - Some Even Tried It

कभी -कभी आप कर्म बहुत करते है और आपका प्रयास निरर्थक चला जाता है और आप बार -बार हताश हो कर निराश हो जाते है भाग्य आपका साथ नहीं देता है जिस काम में आप हाथ डालते है उसमे नुकसान होता है जब इस प्रकार की समस्या हो तो क्या करे -





ये प्रयोग किसी भी शनिवार (Saturday  ) को आजमाए -

गेहूं के आंटे (Flour ) और पुराने गुड को पानी में फेंट कर सरसों के तेल से सात पुए बनाए तथा सात मदार यानी आक के फूल, सिंदूर , सरसों के तेल का ही जलता हुआ एक दीपक आप किसी पत्तल या फिर अरंडी के पत्ते पर रख-कर किसी चौराहे पर रक्खे और हाथ जोड़ कर प्रार्थना करे - " हे दुर्भाग्य मै तुझे यही छोड़-कर जा रहा हूँ कृपया मेरा पीछा न करे "

ये सारा सामान वही रख-कर वापस आ जाए और पीछे मुड़कर न देखे चाहे कोई आवाज भी दे - ये प्रयोग अगर एक शनिवार को सफल नहीं होता है तो सात शनिवार तक करे अवस्य ही आपको अनुभूति होगी कि आपके बिगड़े काम बनने लगे है -

विश्वास और श्रधा से किया जाना ही काम में सफलता देता है शंकालु लोग ये प्रयोग न करे क्युकि सफल नहीं होता है -

विवाह न हो रहा हो आपका व्यापार में नुकसान हो रहा हो या परीक्षा और इंटरव्यू में नकारात्मक उत्तर मिलता हो -इसे विश्वास से आजमाना चाहिए -

उपचार और प्रयोग-

Tuesday, October 6, 2015

घट-स्थापना नियम क्या है -Pitcher has established rules

नवरात्र आरंभ होने जा रहा है। बड़े-बड़े पंडालों एवं घरों में मां दुर्गा की पूजा की जाएगी। लेकिन मां की पूजा से पहले नवरात्र पूजा की सफलता हेतु घट- स्थापन का नियम है। घट स्थापन हमेशा शुभ मुहूर्त में किया जाता है-




जहां घट- स्‍थापना करनी हो, उस स्‍थान को शुद्ध जल से साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें। फिर अष्टदल बनाएं। उसके ऊपर एक लकड़ी का पाटा रखें और उस पर लाल रंग का वस्‍त्र बिछाएं। लाल वस्‍त्र के ऊपर अंकित चित्र की तरह पांच स्‍थान पर थोड़े-थोड़े चावल रखें। जिन पर क्रमशः गणेशजी, मातृका, लोकपाल, नवग्रह तथा वरुण देव को स्‍थान दें। सर्वप्रथम थोड़े चावल रखकर श्रीगणेजी का स्मरण करते हुए स्‍थान ग्रहण करने का आग्रह करें।


इसके बाद मातृका, लोकपाल, नवग्रह और वरुण देव को स्‍थापित करें और स्‍थान लेने का आह्वान करें। फिर गंगाजल से सभी को स्नान कराएं। स्नान के बाद तीन बार कलावा लपेटकर प्रत्येक देव को वस्‍त्र के रूप में अर्पित करें। अब हाथ जोड़कर देवों का आह्वान करें। देवों को स्‍थान देने के बाद अब आप अपने कलश के अनुसार जौ मिली मिट्टी बिछाएं। कलश में जल भरें। अब कलश में थोड़ा और जल-गंगाजल डालते हुए 'ॐ वरुणाय नमः' मंत्र पढ़ें और कलश को पूर्ण रूप से भर दें।


इसके बाद आम की टहनी (पल्लव) डालें। जौ या कच्चा चावल कटोरे में भरकर कलश के ऊपर रखें। फिर लाल कपड़े से लिपटा हुआ कच्‍चा नारियल कलश पर रख कलश को माथे के समीप लाएं और वरुण देवता को प्रणाम करते हुए रेत पर कलश स्थापित करें। कलश के ऊपर रोली से ॐ या स्वास्तिक लिखें। मां भगवती का ध्यान करते हुए अब आप मां भगवती की तस्वीर या मूर्ति को स्‍थान दें। एक नंबर पर थोड़े से चावल डालें। मां की षोडशोपचार विधि से पूजा करें। अब यदि सामान्य द्वीप अर्पित करना चाहते हैं, तो दीपक प्रज्‍ज्वलित करें।


यदि आप अखंड दीप अर्पित करना चाहते हैं, तो सूर्य देव का ध्यान करते हुए उन्हें अखंड ज्योति का गवाह रहने का निवेदन करते हुए जोत को प्रज्‍ज्वलित करें। यह ज्योति पूरे नौ दिनों तक जलती रहनी चाहिए। इसके बाद पुष्प लेकर मन में ही संकल्प लें कि मां मैं आज नवरात्र की प्रतिपदा से आपकी आराधना अमुक कार्य के लिए कर रहा/रही हूं, मेरी पूजा स्वीकार करके इष्ट कार्य को सिद्ध करो।


पूजा के समय यदि आप को कोई भी मंत्र नहीं आता हो, तो केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' से सभी पूजन सामग्री चढ़ाएं। मां शक्ति का यह मंत्र अमोघ है। आपके पास जो भी यथा संभव सामग्री हो, उसी से आराधना करें। संभव हो तो श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरूर चढ़ाएं।


यदि आप दुर्गा सप्तशती पाठ करते हैं, तो संकल्प लेकर पाठ आरंभ करें। सिर्फ कवच आदि का पाठ कर व्रत रखना चाहते हैं, तो माता के नौ रूपों का ध्यान करके कवच और स्तोत्र का पाठ करें। इसके बाद आरती करें। दुर्गा सप्तशती का पूर्ण पाठ एक दिन में नहीं करना चाहते हैं, तो दुर्गा सप्तशती में दिए श्रीदुर्गा सप्तश्लोकी का 11 बार पाठ करके अंतिम दिन 108 आहुति देकर नवरात्र में श्री नवचंडी जपकर माता का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।


माता की पूजा में सिर्फ मन की श्रधा का विशेष प्रभाव भी है इस कलियुग में इसलिए जो लोग विधान पूर्वक न कर सके वो श्रधा से भी मन्त्र जप कर सकते है-


उपचार और प्रयोग-

Tuesday, September 29, 2015

आरोग्य स्वास्थ्य के लिये टोटके -

कभी- कभी जीवन में कुछ टोटके स्वास्थ लाभ के लिए भी लाभ-दायक होते है -इसका ये मतलब नहीं है कि हम आपको अंधविश्वास की तरफ ले जा रहे है -





सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें उसे 

पी कर बर्तनको उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत 


सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है।कुछ ही दिनों में आश्चर्यजनक 

स्वास्थ्य लाभ अनुभव करेंगे-




रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर 


में शांति बनी रहती है।



घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक 


के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है।



धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रखें।आश्चर्य जनक लाभ देखे -

मंदिर में गुप्त दान करें। इस तरह गुप्त दान किया गया भी रोगी को रोग मुक्त करता है -बस दान की जाने 


किसी भी सोमवार से यह प्रयोग करें। बाजार से कपास के थोड़े से फूल खरीद लें। रविवार शाम 5 फूल, आधा 

कप पानी में साफ कर के भिगो दें। सोमवार को प्रात: उठ कर फूल को निकाल कर फेंक दें तथा बचे हुए पानी 

को पी जाएं। जिस पात्र में घर में कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटाएं।



वाली वस्तु को रोगी के सर पर से सात बार क्लाक वाइज उतारा कर के गुप्त दान कर  दे -हफ्ते में एक बार 

अवस्य करे जब तक रोगी रोग मुक्त न हो -पहले हफ्ते से ही लाभ नजर आने लगेगा -


उपचार और प्रयोग-


Sunday, September 6, 2015

क्या शुभ और क्या अशुभ है -

पुरानी परंपराओं का नाम देते हुए हमारे घर के बूढ़े-बुज़ुर्ग कुछ बातों को लेकर शुभ-अशुभ की अवधारणा से हमें परिचय अक्सर कराते रहते हैं। उनके इन कथनों में कितनी सचाई है, इसपर चर्चा करना बेकार है, क्योंकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इन बातों में अटूट यकीन रखते हैं। आइए जानें, रोजमर्रा की जिंदगी में लोग किन चीजों का होना शुभ मानते हैं और किनका अशुभ-


हमारी संस्कृति में अंधविश्वास को भी एक खास जगह दी गई है। ऐसा नहीं कि केवल गांव के लोग ही इन चीजों में यकीन रखते हैं, बल्कि कई बार शहर के और खूब पढ़े-लिखे लोग भी इन चीजों को मानने से इनकार नहीं करते। आपने कभी न कभी अपनों से जरूर सुना होगा कि बिल्ली ने रास्ता कट दिया, यह अशुभ है या फिर बिल्ली रो रही है तो यह भी अशुभ है। क्या आपने कभी कुत्तों के बारे में सुना है- ये प्रस्तुतिकरण आप के ऊपर थोपा नहीं जा रहा है - जो लोग नहीं मानते है -उनको कोई जरुरत नहीं कि वो  माने -

कहते हैं घर से निकलते ही यदि आप बचना चाहकर भी वर्षा से भीग जाएं तो समझ लीजिए आपका आर्थिक संकट जल्द ही दूर होनेवाला है।

कहा जाता है कि अगर सुबह-सुबह जागते ही शंख, घंटा आदि का स्वर सुनाई दे तो अत्यंत शुभ होता है। इसी तरह वीणा का स्वर सुनाई दे तो इसे भी शुभ संकेत माना जाता है।

पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्नान करना शुभ माना जाता है तथा अन्य दिशाओं की ओर मुख करके स्नान करना अशुभ होता है।

अगर आप संध्याकाल में यात्रा के लिए निकलें और बन्दर दिखायी पड़े तो आपकी यात्रा मंगलमय होगी।इसी तरह दिन में कहीं जाते वक्त अगर बंदर दिखे तो यह शुभ प्रतीक है। कार्य में सफलता मिलेगी।

अगर आप कहीं जा रहे हैं और अचानक बिल्ली आपका रास्ता काट दे तो यह अशुभ होता है। ऐसे में यात्रा को टाल देना ही सही रहता है।

यदि आप भोजन कर रहे हैं और उसी समय कुत्ते का रोना सुनाई दे, तो वह बेहद अशुभ होता है।

ऐसा माना जाता है कि किसी मकान की छत पर यदि उल्लू बैठ जाए तो उस घर पर कोई संकट आने वाला है।

किसी कार्य के आरम्भ में अथवा यात्रा में मोर की आवाज सुनाई दे तो उस कार्य में सफलता अवश्य मिलेगी।

यदि आप कहीं जा रहें और आपने सूअर देख लिया तो यह शुभ होता है और जिस भी कार्य के लिए आप जा रहे हैं वह कार्य पूरा होगा।

यदि आप कहीं जा रहें हैं और उस समय आपको कोई टोक दे तो जिस कार्य हेतु जा रहें है, उसमें असफलता ही हाथ लगेगी।

कहते हैं कि कपड़ा पहनते वक्त या फिर जब आप घर से बाहर कहीं जा रहे हों उस वक्त यदि आपकी जेब से सिक्का नीचे गिर पड़े तो यह शुभ संकेत होता है। कई लोगों का तो यहां तक कहना है कि यह आपको धन मिलने का संकेत देती है।

कुछ पुराने लोग ऐसा भी कहते हैं कि यदि आप किसी को पैसे दे रहे हों और आपके हाथ से पैसा छूट जाए तो इसे भी शुभ संकेत ही समझें।

कहीं जाते वक्त आपका कपड़ा किसी दरवाजे या किसी पेड़-पौधे में फंस जाए तो इसे हमारे पूर्वज अशुभ मानते थे।

कुछ लोग दूध को भी शकुन-अपशकुन के साथ जोड़कर देखते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि घर का कोई सदस्य यदि घर से बाहर जा रहा हों तो उनके खाने में दूध की चीजें या फिर उनके नजर के सामने दूध रखना भी अपशकुन होता है।

यदि राह चलके कोई चिड़िया आपके सिर पर बीट कर दे तो इसे शुभ संकेत ही माना जाता है। इसके पीछे मान्यता यह है कि आपको जल्द ही आर्थिक फायदा मिलने वाला है।

आप किसी काम से घर से निकलने के लिए तैयार हों और सामने कोई कुत्ता आकर अचानक बेवजह खूब भौंकने लग जाए तो यह शुभ संकेत नहीं है।

यदि आप किसी खास प्रयोजन से घर से बाहर निकल रहे हों और घर के सामने आपको कुत्ता अपना शरीर खुजलाता नजर आ जाए तो समझें कि आपका वह खास काम बिगड़ भी सकता है।

कभी किसी यात्रा पर निकलने के दौरान यदि सामने कोई कुत्ता मुंह में हड्डी दबाए नजर आ जाए तो समझिए कि आपको उस यात्रा में तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए पहले से ही सतर्क होकर चलें।

यदि आपको शाम के बाद या रात के समय कई कुत्तों के मिलकर रोने की आवाज सुनाई दे तो यह बहुत बड़ा अपशकुल माना गया है। माना जाता है कि यह किसी न किसी की होनेवाली मौत या सामूहिक विपत्ति की सूचना देता है हमें।

यदि कहीं पर बेवजह बहुत सारे कुत्ते इकट्ठे हो जाएं और जोर-जोर से भौंकनें लगें तो समझना चाहिए कि वहां रह रहे लोगों की आपस में जमकर लड़ाई-झगड़ा होने का संकेत है यह।

कुत्ता यदि खुद में मग्न बैठा हो, लेकिन आप पर नजर पड़ते ही चौंक जाए तो समझ लें कि आपके रास्ते में कुछ विघ्न पैदा होनेवाला है।

पालतू कुत्ता यदि बार-बार आपकी गाड़ी पर चढ़कर या गाड़ी की ओर मुड़कर भौंके तो यह एक अशुभ संकेत देता है। दुर्घटना आदि का संकेत देता है यह।

Thursday, September 3, 2015

आर्थिक तंगी और कर्ज -मुक्ति के लिए -

कभी-कभी मज़बूरी वश या अपनी आवश्यकताओं के कारण लोगो को कर्जा लेना ही पड़ता है। कर्ज लेने वाले व्यक्ति को सामने वाले की बहुत सी सही और गलत मनमानी शर्तों को भी मानना पड़ता है।




आजकल तो हर छोटा बड़ा आदमी कहीं न कहीं से मकान, गाड़ी,गृह उपोयोगी वस्तुओं,शिक्षा, व्यापार आदि के लिए कर्ज लेता है ।कई बार गलत समय पर कर्ज लेने के कारण या किसी भी अन्य कारण से कर्ज लेने के बाद उसे लौटाना व्यक्ति को भारी हो जाता है वह लाख चाहकर भी कर्ज समय पर नहीं चुका पाता है उस पर कर्ज लगातार बहुत अधिक बड़ता ही जाता है और कई बार तो उसकी पूरी जिंदगी कर्ज चुकाते-चुकाते समाप्त हो जाती है।


वेसे व्यक्ति को यथा संभव कर्जा लेने से बचना चाहिए। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कर्ज लेने व देने संबंधी कुछ आसान से उपाय बता रहे है इन पर अमल करने पर निश्चित ही आपका कर्ज, बिलकुल समय से सुविधानुसार आपके सिर से उतर जाएगा-

कर्जा मुक्ति मन्त्र:-



 “ॐ ऋण-मुक्तेश्वर महादेवाय नमः”

 “ॐ मंगलमूर्तये नमः”

 “ॐ गं ऋणहर्तायै नमः”

इनमे से किसी भी एक मन्त्र के नित्य कम से कम एक माला के जप से व्यक्ति को अति शीघ्र कर्जे से मुक्ति मिलती है ।


किसी के सिर पर कर्जा है तो एक सफेद कपड़ा ले लिया और पाँच फूल गुलाब के ले लिए पहले एक फुल हाथ में लिया और गायत्री मंत्र बोलना है  :-

ॐ भू र्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् |

अब इस फूल को  कपड़े पर रख दिया इसी प्रकार  ऐसे ही पाँचो फुल गायत्री मंत्र जपते हुये कपडे पर रख दिये और कपड़े को गठान लगाईं और प्रार्थना करना है कि मेरे सिर पर जो भार है - हे भगवान, हे भागीरथी गंगा !! वो भार भी बह जाये, दूर हो जाये, नष्ट हो जाये ऐसा करके जो कपड़ा बाँधा है फूल रखकर बहते जल में उसे प्रवाहित कर  दे |


एक और कर्ज से मुक्ति हेतु उपाय :-




जब भी शुक्ल पक्ष हो किसी भी मास का, शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को शिवलिंग पर दूध व जल के बाद मसूर की दाल अर्पण करते हुये ये मंत्र बोले :-

"ॐ ऋणमुक्तेश्वर महादेवाय नम: " तो इसे ऋण, कर्जे से मुक्ति मिलती है |

गुरूवार के पूजन से स्थायी लक्ष्मी :-



हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोडा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है | तथा तुलसी की पूजा करने वाले के घर में लक्ष्मी स्थायी हो जायेगी |


आर्थिक परेशानी से बचने हेतु :-




हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि - कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसको घर में आर्थिक कष्ट रहते है वो शाम  के समय या संध्या के समय जप-तप करें, दीप-दान शिवमंदिर में कर दें और रात को जब १२ बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक पाठ हनुमान चालीसा का करें | तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी |


वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम  को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना | प्रार्थना कर देना, बैठ के जप करना | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जलदी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है |


वार्षिक महाशिवरात्रि :-



इस दिन तो सुबह से सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पानी भी न पिये | हर महाशिवरात्रि को अगर कोई करे भाग्य की रेखा ही बदल सकती है | ये करना ही चाहिये 15 से लेकर 45 साल के उम्र के लोगों को |


त्रयोदशी को मंगलवार उसे भोम प्रदोष योग कहते है ....उस दिन नमक, मिर्च नहीं खाना चाहिये, उससे जल्दी  फायदा होता है | मंगलदेव ऋणहर्ता देव हैं। उस दिन संध्या के समय यदि भगवान भोलेनाथ का पूजन करें तो भोलेनाथ की, गुरु की कृपा से हम जल्दी ही कर्ज से मुक्त हो सकते हैं। इस दैवी सहायता के साथ थोड़ा स्वयं भी पुरुषार्थ करें। पूजा करते समय यह मंत्र बोलें –

" मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः।।"


कुछ बातो  का ध्यान भी रक्खे :-




पूर्णिमा व मंगलवार के दिन उधार दें और बुधवार को कर्ज लें।

कभी भूलकर भी मंगलवार को कर्ज न लें एवं लिए हुए कर्ज की प्रथम किश्त मंगलवार से देना शुरू करें। इससे कर्ज शीघ्र उतर जाता है।

कर्ज मुक्ति के लिए ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें |

कर्जे से मुक्ति पाने के लिए लाल मसूर की दाल का दान दें।

अपने घर के ईशान कोण को सदैव स्वच्छ व साफ रखें।

ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का शुक्लपक्ष के बुधवार से नित्य पाठ करें।

बुधवार को सवा पाव मूंग उबालकर घी-शक्कर मिलाकर गाय को खिलाने से शीघ्र कर्ज से मुक्ति मिलती है|

सरसों का तेल मिट्टी के दीये में भरकर, फिर मिट्टी के दीये का ढक्कन लगाकर किसी नदी या तालाब के किनारे शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय जमीन में गाड़ देने से कर्ज मुक्त हो सकते हैं।

घर की चौखट पर अभिमंत्रित काले घोड़े की नाल शनिवार के दिन लगाएं।

5 गुलाब के फूल, 1 चाँदी का पत्ता, थोडे से चावल, गुड़ लें। किसी सफेद कपड़े में 21 बार गायत्री मन्त्र का जप करते हुए बांध कर जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा 7 सोमवार को करें।

सर्व-सिद्धि-बीसा-यंत्र धारण करने से सफलता मिलती है।

मंगलवार को शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर मसूर की दाल “ॐ ऋण-मुक्तेश्वर महादेवाय नमः”मंत्र बोलते हुए चढ़ाएं।

हनुमानजी के चरणों में मंगलवार व शनिवार के दिन तेल-सिंदूर चढ़ाएं और माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं।हनुमान चालीसा या बजरंगबाण का पाठ करें|

घर अथवा कार्यालय मे गाय के आगे खड़े होकर वंशी बजाते हुए भगवान श्री कृष्ण का चित्र लगाने से कर्जा नहीं चडता और दिए गए धन की डूबने की सम्भावना भी कम रहती है |

यदि व्यक्ति अपने घर के मंदिर में माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ 21 हक़ीक पत्थरों की भी पूजा करें फिर उन्हें अपने घर में कहीं पर भी जमीन में गाड़ दे और ईश्वर से कर्जे से मुक्ति दिलाने के लिए प्रार्थना करें तो उसे शीघ्र ही कर्जे से छुटकारा मिल जायेगा ।

कर्जे से मुक्ति प्राप्त करने के लिए व्यक्ति लाल वस्त्र पहनें या लाल रूमाल साथ रखें। भोजन में गुड़ का उपयोग करें।

बुधवार को स्नान पूजा के बाद व्यक्ति सर्वप्रथम गाय को हरा चारा खिलाये उसके बाद ही खुद कुछ ग्रहण करें तो उसे शीघ्र ही कर्जे से छुटकारा मिल जाता है।

कर्जा लेने वाला व्यक्ति यदि अपनी तिजोरी में स्फुटिक श्रीयंत्र के साथ साथ मंगल पिरामिड की स्थापना करें और नित्य धूप दीप दिखाएँ तो उसे शीघ्र ही ऋण से मुक्ति मिलती है ।

उपचार और प्रयोग-http://www.upcharaurprayog.com

Wednesday, September 2, 2015

जन्माष्टमी व्रत विधि - Janmashtami fast method

जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि धर्म की पुन: स्थापना और अत्याचारी कंस का वध करने के लिए भगवान विष्णु जी ने कृष्ण जी का अवतार लिया था। लीलाधर भगवान श्री कृष्ण को माधव, केशव, कान्हा, कन्हैया, देवकी नन्दन, बाल गोपाल आदि कई नामों से जाना जाता हैं-



भगवान श्री कृष्ण का जनमोत्सव है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी को भारत में हीं नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं।


श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। भगवान श्रीकृष्ण विष्णुजी के आठवें अवतार माने जाते हैं। यह श्रीविष्णु का सोलह कलाओं से पूर्ण भव्यतम अवतार है। श्रीराम तो राजा दशरथ के यहाँ एक राजकुमार के रूप में अवतरित हुए थे, जबकि श्रीकृष्ण का प्राकट्य आततायी कंस के कारागार में हुआ था।


श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी व श्रीवसुदेव के पुत्ररूप में हुआ था। कंस ने अपनी मृत्यु के भय से बहिन देवकी और वसुदेव को कारागार में क़ैद किया हुआ था।  कृष्ण जन्म के समय घनघोर वर्षा हो रही थी। चारों तरफ़ घना अंधकार छाया हुआ था। श्रीकृष्ण का अवतरण होते ही वसुदेव–देवकी की बेड़ियां खुल गईं, कारागार के द्वार स्वयं ही खुल गए, पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए। वसुदेव किसी तरह श्रीकृष्ण को उफनती यमुना के पार गोकुल में अपने मित्र नन्दगोप के घर ले गए। वहां पर नन्द की पत्नी यशोदा को भी एक कन्या उत्पन्न हुई थी। वसुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को ले गए। कंस ने उस कन्या को पटककर मार डालना चाहा। किन्तु वह इस कार्य में असफल ही रहा। श्रीकृष्ण का लालन–पालन यशोदा व नन्द ने किया। बाल्यकाल में ही श्रीकृष्ण ने अपने मामा के द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसों को मार डाला और उसके सभी कुप्रयासों को विफल कर दिया। अन्त में श्रीकृष्ण ने आतातायी कंस को ही मार दिया। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का नाम ही जन्माष्टमी है।


कृष्णजन्म के सम्पादन का प्रमुख समय है ‘श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी की अर्धरात्रि’ (यदि पूर्णिमान्त होता है तो भाद्रपद मास में किया जाता है)। यह तिथि दो प्रकार की है–

बिना रोहिणी नक्षत्र की तथा रोहिणी नक्षत्र वाली।

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण की जयंती मनाई जाती है।

हिन्दू धर्मानुसार प्रत्येक मनुष्य को जन्माष्टमी का व्रत अवश्य करना चाहिए। इस साल जन्माष्टमी का व्रत 05 सितंबर, दिन शनिवार को रखा जाएगा।

जन्माष्टमी व्रत विधि :-



व्रत के दिन प्रात: व्रती को सूर्य, सोम (चन्द्र), यम, काल, दोनों सन्ध्याओं (प्रात: एवं सायं), पांच भूतों, दिन, क्षपा (रात्रि), पवन, दिक्पालों, भूमि, आकाश, खचरों (वायु दिशाओं के निवासियों) एवं देवों का आह्वान करना चाहिए, जिससे वे उपस्थित हों। उसे अपने हाथ में जलपूर्ण ताम्र पात्र रखना चाहिए, जिसमें कुछ फल, पुष्प, अक्षत हों और मास आदि का नाम लेना चाहिए और संकल्प करना चाहिए–

‘मैं कृष्णजन्माष्टमी व्रत कुछ विशिष्ट फल आदि तथा अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए करूंगा।’

तब वह वासुदेव को सम्बोधित कर चार मंत्रों का पाठ करता है, जिसके उपरान्त वह पात्र में जल डालता है। उसे देवकी के पुत्रजनन के लिए प्रसूति-गृह का निर्माण करना चाहिए, जिसमें जल से पूर्ण शुभ पात्र, आम्रदल, पुष्पमालाएं आदि रखना चाहिए, अगर बत्ती  जलाना चाहिए और शुभ वस्तुओं से अलंकरण करना चाहिए तथा षष्ठी देवी को रखना चाहिए। गृह या उसकी दीवारों के चतुर्दिक देवों एवं गन्धर्वों के चित्र बनवाने चाहिए

भविष्यपुराण के अनुसार जन्माष्टमी व्रत के दिन मध्याह्न में स्नान कर एक सूत घर (छोटा सा घर) बनाना चाहिए। उसे पद्मरागमणि और वनमाला आदि से सजाकर द्वार पर रक्षा के लिए खड्ग, कृष्ण छाग, मुशल आदि रखना चाहिए। इसके दीवारों पर स्वस्तिक और ऊं आदि मांगलिक चिह्न बनाना चाहिए। सूतिका गृह में श्री कृष्ण सहित माता देवकी की स्थापना करनी चाहिए।

एक पालने या झूले पर भगवान कृष्ण की बाल गोपाल वाली तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। सूतिका गृह को जितना हो सके उतना सजाकर दिखाना चाहिए। इसके बाद पूर्ण भक्तिभाव के साथ फूल, धूप, अक्षत, नारियल, सुपारी ककड़ी, नारंगी तथा विभिन्न प्रकार के फल से भगवान श्री कृष्ण के बाल रुप की पूजा करनी चाहिए।

कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी की मध्य रात्रि या आधी रात को हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी के दिन अर्द्ध रात्रि के समय भगवान कृष्ण जी के जन्म-अवसर पर आरती करनी चाहिए और प्रसाद बांटना चाहिए। व्रती को नवमी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराकर उसे दक्षिणा दे कर विदा करना चाहिए। जन्माष्टमी का व्रत करने वाले भक्तों को नवमी के दिन ही व्रत का पारण करना चाहिए।

जन्माष्टमी पूजन के मंत्र :-



 " ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: "

उपरोक्त मंत्र का जाप दिन भर करते रहना चाहिए
                               
 " योगेश्वराय योगसम्भवाय योगपताये गोविन्दाय नमो नमः "

उपरोक्त मंत्र द्वारा श्री हरि का ध्यान करें

 " यज्ञेश्वराय यज्ञसम्भवाय यज्ञपतये गोविन्दाय नमो नमः "

उपरोक्त मंत्र द्वारा श्री कृष्ण की बाल प्रतिमा को स्नान कराएं

 " वीश्वाय विश्वेश्वराय विश्वसम्भवाय विश्वपतये गोविन्दाय नमो नमः "

उपरोक्त मंत्र द्वारा भगवान को धूप ,दीप, पुष्प, फल आदि अर्पण करें

 " धर्मेश्वराय धर्मपतये धर्मसम्भवाय गोविन्दाय नमो नमः "

उपरोक्त मंत्र से नैवेद्य या प्रसाद अर्पित करें

जन्माष्टमी व्रत का फल :-



भविष्यपुराण के अनुसार जन्माष्टमी व्रत के पुण्य से जातक के सभी प्रकार की इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इसके अलावा माना जाता है कि जो एक बार भी इस व्रत को कर लेता है वह विष्णुलोक को प्राप्त करता है यानि मोक्ष को प्राप्त करता है।

जन्माष्टमी का त्यौहार का एक मनोरंजक पक्ष दही-हांडी भी है। यह प्रकार का खेल है जिसमें बच्चे भगवान कृष्ण द्वारा माखन चुराने की लीला का मंचन करते हैं। महाराष्ट्र और इसके आसपास की जगहों पर दही-हांडी की छठा देखते ही बनती है।

उपचार और प्रयोग-

Tuesday, August 25, 2015

घर में पूजा केसे करे - How to worship in house

हम सभी हिन्दुओं के घर में पूजन के लिए छोटे छोटे मंदिर बने होते है जहां की वो भगवान की नियमित पूजा करते है। लेकिन हममे में से अधिकांश लोग अज्ञानतावश पूजन सम्बन्धी छोटे- छोटे नियमों का पालन नहीं करते है। जिससे की हमे पूजन का सम्पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। आज हम आपको घर में पूजन सम्बन्धी कुछ ऐसे ही नियम बताएँगे जिनका पालन करने से हमे पूजन का श्रेष्ठ फल शीघ्र प्राप्त होगा-



घर के मंदिर में ज्यादा बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि यदि हम मंदिर में शिवलिंग रखना चाहते हैं तो शिवलिंग हमारे अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए। शिवलिंग बहुत संवेदनशील होता है और इसी वजह से घर के मंदिर में छोटा सा शिवलिंग रखना शुभ होता है। अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी छोटे आकार की ही रखनी चाहिए। अधिक बड़ी मूर्तियां बड़े मंदिरों के लिए श्रेष्ठ रहती हैं, लेकिन घर के छोटे मंदिर के लिए छोटे-छोटे आकार की प्रतिमाएं श्रेष्ठ मानी गई हैं।



पूजा करते समय किस दिशा की ओर होना चाहिए अपना मुंह ये भी जाने कि घर में पूजा करने वाले व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होगा तो बहुत शुभ रहता है। इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। यदि यह संभव ना हो तो पूजा करते समय व्यक्ति का मुंह पूर्व दिशा में होगा तब भी श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।

घर में मंदिर ऐसे स्थान पर बनाया जाना चाहिए, जहां दिन-भर में कभी भी कुछ देर के लिए सूर्य की रोशनी अवश्य पहुंचती हो। जिन घरों में सूर्य की रोशनी और ताजी हवा आती रहती है, उन घरों के कई दोष स्वतः ही शांत हो जाते हैं। सूर्य की रोशनी से वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोतरी होती है।

यदि घर में मंदिर है तो हर रोज सुबह और शाम पूजन अवश्य करना चाहिए। पूजन के समय घंटी अवश्य बजाएं, साथ ही एक बार पूरे घर में घूमकर भी घंटी बजानी चाहिए। ऐसा करने पर घंटी की आवाज से नकारात्मकता नष्ट होती है और सकारात्मकता बढ़ती है।

पूजा में बासी फूल, पत्ते अर्पित नहीं करना चाहिए। स्वच्छ और ताजे जल का ही उपयोग करें। इस संबंध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि तुलसी के पत्ते और गंगाजल कभी बासी नहीं माने जाते हैं, अत: इनका उपयोग कभी भी किया जा सकता है। शेष सामग्री ताजी ही उपयोग करनी चाहिए। यदि कोई फूल सूंघा हुआ है या खराब है तो वह भगवान को अर्पित न करें।

घर में जिस स्थान पर मंदिर है, वहां चमड़े से बनी चीजें, जूते-चप्पल नहीं ले जाना चाहिए। मंदिर में मृतकों और पूर्वजों के चित्र भी नहीं लगाना चाहिए। पूर्वजों के चित्र लगाने के लिए दक्षिण दिशा क्षेत्र रहती है। घर में दक्षिण दिशा की दीवार पर मृतकों के चित्र लगाए जा सकते हैं, लेकिन मंदिर में नहीं रखना चाहिए। पूजन कक्ष में पूजा से संबंधित सामग्री ही रखना चाहिए। अन्य कोई वस्तु रखने से बचना चाहिए।

घर के मंदिर के आसपास शौचालय होना भी अशुभ रहता है। अत: ऐसे स्थान पर पूजन कक्ष बनाएं, जहां आसपास शौचालय न हो। यदि किसी छोटे कमरे में पूजा स्थल बनाया गया है तो वहां कुछ स्थान खुला होना चाहिए, जहां आसानी से बैठा जा सके। खास कर बेड रूम में न हो तो अच्छा है अगर किसी कारण से बनाये तो रात को सोते समय पर्दे से अवश्य ही ढक दे मंदिर को .

रोज रात को सोने से पहले मंदिर को पर्दे से ढंक देना चाहिए। जिस प्रकार हम सोते समय किसी प्रकार का व्यवधान पसंद नहीं करते हैं, ठीक उसी भाव से मंदिर पर भी पर्दा ढंक देना चाहिए। जिससे भगवान के विश्राम में बाधा उत्पन्न ना हो।

वर्षभर में जब भी श्रेष्ठ मुहूर्त आते हैं, तब पूरे घर में गौमूत्र का छिड़काव करना चाहिए। गौमूत्र के छिड़काव से पवित्रता बनी रहती है और वातावरण सकारात्मक हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार गौमूत्र बहुत चमत्कारी होता है और इस उपाय घर पर दैवीय शक्तियों की विशेष कृपा होती है। ये नकारात्मक उर्जा को और वाइरस को खत्म करता है .

खंडित मूर्तियां हो तो उसे पूजा के स्थल से हटा देना चाहिए और किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। खंडित मूर्तियों की पूजा अशुभ मानी गई है। इस संबंध में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि सिर्फ शिवलिंग कभी भी, किसी भी अवस्था में खंडित नहीं माना जाता है।

सदैव दाएं हाथ की अनामिका एवं अंगूठे की सहायता से फूल अर्पित करने चाहिए। चढ़े हुए फूल को अंगूठे और तर्जनी की सहायता से उतारना चाहिए। फूल की कलियों को चढ़ाना मना है, किंतु यह नियम कमल के फूल पर लागू नहीं है।

तुलसी के बिना ईश्वर की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। तुलसी की मंजरी सब फूलों से बढ़कर मानी जाती है। मंगल, शुक्र, रवि, अमावस्या, पूर्णिमा, द्वादशी और रात्रि और संध्या काल में तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए।तुलसी तोड़ते समय यह ध्यान रखना आवश्यक है कि उसमें पत्तियों का रहना भी आवश्यक है।

उपचार और प्रयोग -

Sunday, August 16, 2015

शरीर पे तिल लाभ भी-

तिल के लाभ ज्योतिष की नजर में :-
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महिला के लिए :-
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जिस महिला के गाल पर तिल होता है, उसे अच्छा पति मिलता है।

महिला के बाईं तरफ मस्तक पर तिल हो तो वह किसी भाग्यवान की रानी बनती है।

आँख पर तिल हो तो पति की बहुत अधिक प्रिय होती है।

गाल पर बाँईं तरफ तिल हो तो ऐशो-आराम का सुख मिलता है।

कान पर तिल हो तो आभूषण पहनने का सुख मिलता है।

छाती पर तिल हो तो पुत्र की प्राप्ति होती है।

जाँघ पर तिल हो तो नौकर-चाकर का सुख मिलता है।

पाँव पर तिल हो तो विदेश यात्रा का योग रहता है।

मस्तक पर तिल हो तो हर जगह इज्जत मिलती है।

नाक पर तिल हो तो वह महिला रूपवान होती है, पर घमंडी होती है। 


पुरुष के लिए :-
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जिस पुरुष के सिर (मस्तक) पर तिल होता है, वह हर जगह इज्जत पाता है।

आँख पर तिल होता है तो वह नायक पद पाता है।

मुख पर तिल होता है तो उसे बहुत दौलत मिलती है।

गाल पर तिल हो तो उसे स्त्री का सुख मिलता है।

ऊपर के होंठ पर तिल हो तो धन पाता है तथा चारों तरफ इज्जत मिलती है।

नीचे के होंठ पर तिल हो तो वह व्यक्ति कंजूस होता है।

कान पर तिल हो तो वह खूब पैसे वाला होता है।

गर्दन पर तिल हो तो उस व्यक्ति की लंबी उम्र होती है तथा उसे आराम मिलता है।

छाती की दाहिनी तरफ तिल हो तो अच्छी स्त्री मिलती है।

दाहिने कंधे पर तिल हो तो वह व्यक्ति कलाकार होता है। क्षेत्र कोई-सा भी हो सकता।

हाथ के पंजे पर तिल हो तो वह व्यक्ति दिलदार व दयालु रहता है। 

पाँव पर तिल हो तो उस व्यक्ति के विदेश यात्रा का योग बनता है।

उपरोक्त में दाहिने और बाए का विचार के साथ -कभी-कभी अन्य क्रूर ग्रह से भी मिलने वाला फल देर से मिलता है-

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -