Saturday, November 7, 2015

चाक्षुषोपनिषद स्तोत्र से बढ़ाएं अपनी नेत्र ज्योति -

बात उन दिनों की है जब हम साधना में नए-नए आये ही थे हमने गुरु श्री निखिलेश्वरानंद जी से दीक्षा ली ही थी कि अचानक इलहाबाद में मेरे एक मिलने वाले थे उनकी किसी कारण से नेत्रों की ज्योति लगभग 70 प्रतिशत समाप्त हो चुकी थी उनका एक अच्छा-ख़ासा रेस्टोरेंट हुआ करता था मुझसे उनकी ये हालत देखी नहीं जा रही थी-




उनका फेसला था कि उनके घर में उनके कारोबार को कोई देखने वाला नहीं था इसलिए रेस्टोरेंट को बंद करने का विचार बना चुके थे तभी मुझे गुरदेव से प्राप्त हुई "चाक्षुषोपनिषद स्तोत्र" का ख़याल आया कि क्यों न इसका उपयोग करके  इसके जीवन में रोशनी कि एक नई किरण का संचार किया जाए।

बस उस वक्त हमने इस प्रयोग को सम्पन्न किया और सफल पाया आज आपके सामने हम इस प्रयोग का वर्णन करने जा रहे है। ताकि पीड़ित व्यक्ति के लिए कोई भी संकल्प ले के उसके लाभ के लिए प्रयोग श्रधा और विश्वास से करके उसे लाभ करा सकता है .

आपकी नेत्र ज्योति कमजोर है और बचपन में ही आपको चश्मा पहनना पड़  गया है तो इस चाक्षुषोपनिषद स्तोत्र के नियमित जप से आप भी अपनी नेत्र ज्योति (Eye Sight)  ठीक कर सकते हैं।  यह चाक्षुषोपनिषद स्तोत्र इतना प्रभाव शाली है की यदि आपको आँखों से सम्बंधित कोई बीमारी है तो अगर एक ताम्बे के लोटे में जल भरकर, पूजा स्थान में रखकर उसके सामने नियमित इस स्तोत्र के २१ बार पाठ करने के उपरान्त उस जल से दिन में ३-४ बार आँखों को छींटे मारने पर कुछ ही समय में नेत्र रोग से मुक्ति मिल जाती है।  बस आवश्यकता है , श्रद्धा, विश्वास एवं अनुष्ठान आरम्भ करने की।


आईये इस स्तोत्र  को जानते हैं:-



किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष  रविवार को सूर्योदय के आसपास आरम्भ करके रोज इस स्तोत्र के ५ पाठ करें।

सर्वप्रथम भगवान सूर्य नारायण का ध्यान करके दाहिने हाथ में जल, अक्षत, लाल पुष्प लेकर विनियोग मंत्र पढ़े-

विनियोग मंत्र :-



ॐ अस्याश्चाक्षुषीविद्याया अहिर्बुधन्य ऋषिः गायत्री छन्दः सूर्यो देवता चक्षुरोगनिवृत्तये  विनियोगः।


भावार्थ :-

'ॐ इस चाक्षुषी विद्या क ऋषि अहिर्बुध्न्य हैं, गायत्री छन्द है, सूर्यनारायण देवता हैं तथा नेत्ररोग  शमन हेतु इसका जाप होता है।

अब इस चाक्षुषोपनिषद स्तोत्र का पाठ आरम्भ करें-


 " ॐ चक्षुः चक्षुः चक्षुः तेजः स्थिरो भव।  मां पाहि पाहि। त्वरितम् चक्षुरोगान शमय शमय। मम जातरूपम् तेजो दर्शय दर्शय।  यथाहम अन्धो न स्यां कल्पय कल्पय।  कल्याणम कुरु कुरु।  यानि मम पूर्वजन्मोपार्जितानी चक्षुः प्रतिरोधकदुष्क्रतानि सर्वाणि निर्मूलय निर्मूलय।  ॐ नमः चक्षुस्तेजोदात्रे दिव्याय भास्कराय।  ॐ नमः करुणाकरायामृताय।  ॐ नमः सूर्याय।  ॐ नमो भगवते सूर्यायाक्षितेजसे नमः।  खेचराय नमः।  महते नमः।  रजसे नमः।  तमसे नमः।  असतो मां सदगमय।  तमसो मां ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय।  उष्णो भगवाञ्छुचिरूपः।  हंसो भगवान शुचिरप्रतिरूपः।  य इमां चक्षुष्मतिविद्यां  ब्राह्मणो नित्यमधीते न तस्याक्षिरोगो भवति। न तस्य कुल अन्धो भवति।  अष्टौ ब्राह्मणान ग्राहयित्वा विद्यासिद्धिर्भवति। "

हिंदी भावार्थ :-


"हे परमेश्वर, हे चक्षु के अभिमानी सूर्यदेव। आप मेरे चक्षुओं में चक्षु के तेजरूप से स्थिर हो जाएँ। मेरी रक्षा करें। रक्षा करें। मेरी आँखों का रोग समाप्त करें। समाप्त करें। मुझे आप अपना सुवर्णमयी तेज दिखलायें। दिखलायें। जिससे में अँधा न होऊं। कृपया वैसे ही उपाय करें, उपाय करें। आप मेरा कल्याण करें, कल्याण करें। मेरे जितने भी पीछे जन्मों के पाप हैं जिनकी वजह से मुझे नेत्र रोग हुआ है उन पापों को जड़ से उखाड़ दे, दें। हे सच्चिदानन्दस्वरूप नेत्रों को तेज प्रदान करने वाले दिव्यस्वरूपी भगवान भास्कर आपको नमस्कार है। ॐ सूर्य भगवान को नमस्कार है। ॐ नेत्रों के प्रकाश भगवान सूर्यदेव आपको नमस्कार है। ॐ आकाशविहारी आपको नमस्कार है। परमश्रेष्ठ स्वरुप आपको नमस्कार है। ॐ रजोगुण रुपी भगवान सूर्यदेव आपको नमस्कार है। तमोगुण के आश्रयभूत भगवान सूर्यदेव आपको नमस्कार है। हे भगवान आप मुझे असत से सत की और  जाईये। अन्धकार से प्रकाश की और ले जाइये। मृत्यु से अमृत की और ले चलिये। हे सूर्यदेव आप उष्णस्वरूप हैं, शुचिरूप हैं। हंसस्वरूप भगवान सूर्य, शुचि तथा अप्रतिरूप रूप हैं। उनके तेजोमयी स्वरुप की समानता करने वाला कोई भी नहीं है। जो ब्राह्मण इस चक्षुष्मतिविद्या का नित्य पाठ करता है उसे कभी नेत्र सम्बन्धी रोग नहीं होता है। उसके कुल में कोई अँधा नहीं होता। आठ ब्राह्मणो को इस विद्या को देने (सिखाने) पर इस विद्या की सिद्धि प्राप्त हो जाती है। "

इस मन्त्र पाठ के समय एक कांसे की थाली में पानी रख ले उस थाली में अक्षत और गुडहल (सूर्य को प्रिय )डाले और उसमे सूर्य का प्रतिबिम्ब देखते हुए मन्त्र जप करे एवं मन्त्र समाप्ति के बाद थाली में रक्खे जल से रोगी के आँखों का प्रक्षालन करे तथा हर रविवार को ब्रत रक्खे और एक समय फलाहार करे . रविवार को 11 बार इसी मन्त्र से हवन सूर्य को अर्पित करे तथाआहुति गाय के देशी घी की दे  .ये प्रयोग कम से कम 13 रविवार करना चाहिए . प्रयोग समाप्त होते -होते आँखों के 70 प्रतिशत रोग समाप्त हो जाते है और उसके एक माह बाद व्यक्ति पूर्णत स्वस्थ हो जाता है ये मेरा आजमाया हुआ प्रयोग है और सफल भी हुआ है बीच में किसी भी कारण ये प्रयोग खंडित होने पे दुबारा करने का प्रविधान है प्रयोग को रविपुष्य योग में आरम्भ करने से सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है .

नेत्र रोग शमन के लिए अन्य उपयोगी सूर्य साधनाएं :-



नेत्र रोग से पीड़ित व्यक्ति प्रतिदिन सुबह हल्दी के घोल से अनार की कलम से  दिए गए यन्त्र को कांसे की थाली में बनाये। फिर उस यंत्र पर तांबे की थाली में चतुर्मुख (चार बत्ती वाला) घी का दीपक जलाये। फिर लाल पुष्प, चावल, चन्दन आदि से इस यन्त्र की पूजा करें। इसके बाद पूर्व दिशा की और मुख करके बैठ जाएँ। और हल्दी की माला से "ॐ ह्रीं हंसः" इस मन्त्र की ७ माला जाप करें।  उसके पश्चात ऊपर लिखा चाक्षुषोपनिषद स्तोत्र  12 पाठ करें व अन्त में "ॐ ह्रीं हंसः" मन्त्र की पुनः ७ माला जाप करें। इसके बाद भगवान सूर्य को सिन्दूर मिश्रित जल से अर्घ्य दें व अपना नेत्र रोग की ठीक होने की प्रार्थना करें।


नेत्र रोग को ठीक करने हेतु इस अक्ष्युपनिषद स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत लाभकारी है।

"हरिः ॐ। अथ ह सांकृतिर्भगवानादित्यलोकम जगाम। स आदित्यं नत्वा चक्षुष्मतिविद्यया तमस्तुवत। ॐ नमो भगवते श्रीसूर्यायाक्षितेजसे नमः। ॐ खेचराय नमः। ॐ महासेनाय नमः। ॐ तमसे नमः। ॐ रजसे नमः ॐ सत्वाय नमः। ॐ असतो मा सद गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय। हंसो भगवाञ्छुचिरूपः अप्रतिरूपः। विश्वरूपम घृणिनं जातवेदसं हिरण्यमयं ज्योतिरूपं तपन्तम्। सहस्र रश्मिः शतधा वर्तमानः पुरः प्रजानामुदयत्येष सूर्यः। ॐ नमो भगवते श्री सूर्यायादित्या याक्षितेजसे अहोवाहिनी वाहिनी स्वाहेति। एवं चक्षुष्मतिविद्यया स्तुतः श्रीसूर्यनारायणः सुप्रीतो ब्रवीच्चक्षुमतिविद्यां ब्राह्मणो यो नित्यमधीते न तस्याक्षिरोगो भवति। न तस्य कुले अन्धो भवति। अष्टौ ब्राह्ममाण ग्राहयित्वाथ विद्यासिद्धिर्भवति।  य एवं वेद स महान भवति।"

उपचार और प्रयोग -

कैसे जाए यदि दिशा शूल है - Kese Jaaye Yadi Disha Shool Hai

क्यों बड़े बुजुर्ग तिथि देख कर आने जाने की रोक टोक करते हैं ?आज की युवा पीढ़ी भले हि उन्हें आउटडेटेड कहे -लेकिन बड़े सदा बड़े ही रहते हैं -इसलिए आदर करे उनकी बातों का - क्युकि कल आपको भी आपके बच्चे आउटडेटेड बनाने वाले है -दिशाशूल समझने से पहले हमें दस दिशाओं के विषय में ज्ञान होना आवश्यक है-









हम सबने पढ़ा है कि दिशाएं 4  होती हैं -

पूर्व

पश्चिम

उत्तर

दक्षिण

परन्तु जब हम उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं तो ज्ञात होता है कि वास्तव में दिशाएँ दस होती हैं |

पूर्व

पश्चिम

उत्तर

दक्षिण

उत्तर - पूर्व

उत्तर - पश्चिम

दक्षिण – पूर्व

दक्षिण – पश्चिम

आकाश

पाताल

हमारे सनातन धर्म के ग्रंथो में सदैव 10 दिशाओं का ही वर्णन किया गया है,जैसे हनुमान जी ने युद्ध इतनी आवाज की कि उनकी आवाज दसों दिशाओं में सुनाईदी -हम यह भी जानते हैं कि प्रत्येक दिशा के देवता होते हैं -

दसों दिशाओं को समझने के पश्चात अब हम बात करते हैं वैदिक ज्योतिष की ज्योतिष शब्द “ज्योति” से बना है जिसका भावार्थ होता है “प्रकाश” 

वैदिक ज्योतिष में अत्यंत विस्तृत रूप में मनुष्य के जीवन की हरपरिस्तिथियों से सम्बन्धित विश्लेषण किया गया है कि मनुष्य यदि इसको तनिक भी समझले तो वह अपने जीवन में उत्पन्न होने वाली बहुत सी समस्याओं से बचसकता है और अपना जीवन सुखी बना सकता है -

आप जब भी बाहर की यात्रा के लिए जाए तो कार्य सफलता के लिए दिशा शूल का विचार करके जाए -ताकि आने वाली परेशानी से बचा जा सके -


किस दिन कहाँ न जाए-



सोमवार और शनिवार को पूर्व दिशा

रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा

मंगल वार और बुधवार को उत्तर दिशा

गुरु वार को दक्षिण दिशा

सोमवार और गुरूवार को (अग्ने ) south east

रविवार और शुक्रवार को (नेतरअगये ) south west

मंगलवार को (वायवे ) north west

बुध और शनि को (ईशान ) north east----दिशा शूल होता है

अर्थात इस दिन इन दिशायो की और यात्रा नहीं करनी चाहिए...

बुध को उत्तर दिशा का स्वामी होते हुए भी बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा निषेध है-


विशेष:-



यदि एक जगह से रवाना हो कर उसी दिन गंतव्य स्थान पर पहुंचं जाना तय हो तो ऐसी यात्रा में तिथि- वार नक्षत्र,दिशा-शूल,प्रतिशुक,योगनी आदि का विचार नहीं होता है -


आपातकालीन यात्रा :-



यदि फिर भी किसी कारन वश आपातकालीन यात्रा करनी पड ही जाये और दिशा शूल भी हो, तो नीचे  लिखे उपाए कर के यात्रा कर सकते है-

रविवार = दलिया और घी

सोमवार = दर्पण देख कर

मंगलवार = गुड खा कर

बुधवार = धनिया या तिल खा कर

वीरवार = दही खा कर

शुक्रवार = जों खा कर

शनिवार = अदरक या उड़द खा कर

ये करके दिशा शूल के प्रकोप से बचा जा सकता है| और आप अपनी यात्रा को सुखद पूर्वक और मंगलमय बना सकते है-

उपचार और प्रयोग-

Friday, November 6, 2015

कभी न रक्खे ये छ चीजे घर में - Never Please enter these six things in the house

हम अपने घर को सुंदर दिखाने के लिए हम कई शोपीस लगाते हैं लेकिन कई बार ये नुकसादायक हो सकते हैं क्युकि हमें इनके प्रभाव का पता नहीं होता है -




भारतीय वास्तु विज्ञान चाइनीज फेंगसुई से काफी मिलता-जुलता है। यह प्राकृतिक शक्तियों को मनुष्य के लिए उपयोगी बनाने का एक कलात्मक परंपरा है। हम अक्सर सुनते आए हैं कि घर में क्या रखना अच्छा होता है और क्या रखना बुरा। आज आपको बताते हैं कि घर में कौन सी 6 चीजें कभी नहीं रखनी चाहिए-



महाभारत की तस्वीरें या प्रतीक (Picture or symbol of the Mahabharata )




महाभारत को भारत के इतिहास का सबसे भीषण युद्ध माना जाता है। कहते हैं कि इस युद्ध के प्रतीकों, मसलन तस्वीर या रथ इत्यादि को घर में रखने से घर में क्लेश बढ़ता है। यही नहीं, महाभारत ग्रंथ भी घर से दूर ही रखने की सलाह दी जाती है-





नटराज की मूर्ति (Nataraja statue )



नटराज नृत्य कला के देवता हैं। लगभग हर क्लासिकल डांसर के घर में आपको नटराज की मूर्ति रखी मिल जाती है। लेकिन नटराज की इस मूर्ति में भगवान शिव श्तांडव नृत्य की मुद्रा में हैं जो कि विनाश का परिचायक है। इसलिए इसे घर में रखना भी अशुभ फलकारक होता है-



ताजमहल (Taj Mahal )



ताजमहल प्रेम का प्रतीक तो है, लेकि न साथ ही वह मुमताज की कब्रगाह भी है। इसलिए ताजमहल की तस्वीर या उसका प्रतीक घर में रखना नकारात्मकता फैलाता है। माना जाता है कि ऎसी चीजें घर पर रखी होने से हमारे जीवन पर बहुत गलत असर पड़ सकता है। यह सीधे-सीधे मौत से जुड़ा है इसलिए इसे घर पर न रखें-


डूबती हुई नाव या जहाज (Sinking boat or ship)



डूबती नाव अगर घर में रखी हो तो अपने साथ आपका सौभाग्य भी डुबा ले जाती है। घर में रखी डूबती नाव की तस्वीर या कोई शोपीस सीधा आपके घर के रिश्तों पर आघात करता है। रिश्तों में डूबते मूल्यों का प्रतीक है यह चिह्न। इसे अपने घर से दूर रखें-






फव्वारा (Fountain)



फव्वारे या फाउन्टन आपके घर की खूबसूरती तो बढ़ाते हैं लेकिन इसके बहते पानी के साथ आपका पैसा और समृद्धि भी बह जाती है। घर में फाउन्टन रखना शुभ नहीं होता-












जंगली जानवरों का कोई प्रतीक (A symbol of wild animals)


किसी जंगली जानवर की तस्वीर या शो पीस घर पर रखना भी अच्छा नहीं माना जाता। इससे घर में रहने वालों का स्वभाव उग्र होने लगता है। घर में क्लेश और बेतरतीबी बढ़ती है।







और अधिक जाने-ज्योतिष-वास्तुशास्त्र-मन्त्र-तंत्र-यंत्र 

उपचार और प्रयोग-

Thursday, November 5, 2015

जोड़ो का कैसा भी दर्द हो इसे प्रयोग करे - How to use it even joint pain

आज कल जोड़ो के दर्द (Joint Pain) की समस्या आम हो गयी है और बढ़ती उम्र में ये बीमारी अक्सर लग जाती है डॉक्टर्स के पास जाकर भी इन दर्द से तब तक ही आराम होता है जब तक आप उनकी दवाईयाँ खाते रहते है और जैसे ही ट्रीटमेंट बंद किया फिर से वही प्रॉब्लम शुरू -


आखिर कब तक आप  इस प्रॉब्लम जे झुजते रहोगे, आएये आज हम आपको बताते है कि कैसे आप घर पर ही डॉक्टर जैसा ट्रीटमेंट कर सकते है वो भी घरेलु नुस्खो से- अगर ये नुस्खे आप कुछ दिनों लगातार करेंगे तो आप पायेगे की आप की बीमारी बहुत हद तक ठीक हो चुकी होगी-तो जानते है क्या है वो नुस्खे जिन्हें आप जानकर भी अनजान है-


एक जोड़ो का दर्द ऐसा है जो युवा व बुजुर्ग दोनों वर्गों में कभी भी हो जाता है वो है गर्दन का दर्द ( Nack Pain ) जी हा एक बार अगर हो गया तो फिर आपकी गर्दन सीधी ही रहेगी ना लेफ्ट होगी और ना राईट होगी शायद आप इस दर्द को पहचानते भी होंगे तो चलो इस दर्द से निजात पाने का नुस्खा बताते है -

पहला नुस्खा :-


आप पंसारी के यहाँ जाये ओर वहा से भमुने का तेल 15 ग्राम और महुवे का तेल 15 ग्राम ले आये अब आप इन दोनों को अच्छे से मिक्स कर ले और एक बोतल में रख ले -अब इस तेल को जहा भी जोड़ो का दर्द है जैसे गर्दन, घुटने आदि जहा भी जोड़ो का दर्द हो वहा इस तेल की मालिश करे, ध्यान रखे मालिश हमेशा नीचे से उपर की और करे, अगर आप इस तेल की मालिश धुप में बेठ कर करेंगे तो ये बहुत ज्यादा आराम करेगा, अगर प्रस्थिति न हो तब आप मालिश के बाद उस जगह की हलके हलके सेक सकते है -ये एक जादुई फार्मूला है इस नुस्खे से आप अपने दर्द को चुमंतर कर सकते है -पुराने जोड़ो के दर्द में इसका प्रयोग लगातार 10 से 15 दिन तक करे -


दूसरा नुस्खा:- 


जिसे आप सब जानते है पर उसके गुण नहीं पहचानते, जी हा वो है अजवायन, अजवायन दर्द निवारक तो है ही और गैस को मिटने वाली, भूख बढ़ने वाली और वायु रोग में भी कारगर है जोड़ो के दर्द में आप अजवायन का ये नुस्का अपनाये इससे आपको बहुत लाभ होगा सभी चीजे पंसारी के यहाँ मिल जाती है -

अजवायन का तेल- 10 ग्राम
पिपरमिंट- 10 ग्राम  
कपूर- 20 ग्राम 

उपरोक्त तीनो चीजो को आपस में मिलकर एक शीशी में रख दे थोड़ी देर में सब आपस में मिल जायेगे -जब इस मिश्रण को 7 या 8 घंटे हो जाये तब आप इसे प्रयोग में ला सकते है कैसा भी दर्द हो आप इस मिश्रण को हिलाकर, इसकी मालिश करने से दर्द से छुटकारा मिलेगा होगा-

अन्य प्रयोग :-


शहद में ढाक के बीज का चूर्ण मिला कर इस मिश्रण का लेप करने से भी जोड़ो के दर्द में फायदा होता है -

लहसुन की 10 छिली हुई कालिया, 150 ग्राम दूध व इतना ही पानी मिलकर इसे जब तक पकाए जब तक यह आधा न रह जाये , अब पके हुए लहसुन को निकालकार इसे पके दूध के साथ सेवन करेने से जॉइंट्स पैन में लाभ मिलता है -

रात को सोते समाये गुनगुने दूध में एकछोटी चमच हल्दी की मिलाकर पीने से भी जोड़ो के दर्द में आराम मिलता है -

घुटनों को फ्लेक्सिबल करने के लिए दाल चीनी, हल्दी, जीरा और अदरक का प्रयोग अपने खाने में करते रहे -

अगर आप घुटनों में दर्द रहता है तो आप काले चने रात को भीगा कर रख दे और सुबह चबाकर खाए तो आप के घुटनों के दर्द को आराम मिलेगा - ऐसे 20 से 25 दिन करे -

नशा घातक है इसे छुडाने का आसान उपाय ..?

आज हमारे समाज में युवा पीढ़ी को नशे के ओर अग्रसर होते देख किसे दुःख नहीं होता - दुर्भाग्य से पिछले पांच से दस  सालों में यह बुराई बुरी तरह बढती जा रही है -कुछ लोग अपनी मर्जी से नशा करते हैं कुछ शोकिया होते हैं जो बाद में अपने आप को नशे की आग में झोंक देते हैं परन्तु कुछ कुसंगति के कारण इस लत का शिकार हो जाते हैं -




आजकल के कालेज लाइफ में ये रोग हमारी युवा पीढ़ी को इस प्रकार लग गया है कि अनेको घर के बच्चे बर्बादी की कगार पे पहुँच गए है घर वालो को तब पता चलता है जब वो पूरी तरह लिप्त हो जाते है इससे जादा गंभीर परिणाम यहाँ तक देखने को मिला है कि नशे कि लत पूरी करने के लिए राहजनी ,चोरी इत्यादि करने लगते है कालेज में लड़कियां भी खुद को स्मार्ट बताने के लिए भी नशे का सहारा ले रही है .

हमारे और आपके बच्चे जब  इसके शिकार हो सकते हैं | हर कोई इस बुरी लत से अपने बच्चों और अन्य सदस्यों को बचाना चाहेगा | खुद नशे की लत के शिकार कुछ लोग यही चाहते हैं की किसी तरह से इस लत से छुटकारा मिल जाए परन्तु उनका इस पर कोई वश नहीं |  नशा व्यक्ति की रगों में पहुँच कर व्यक्ति को अपना गुलाम बना लेता है व्यक्ति मानसिक रूप से पंगु हो जाता है |

यदि हर माँ बाप को यह भान हो जाये जिनका बच्चा  नशा कर रह है | तो शायद कुछ जिंदगियां बचा  सकें मेरा अभिप्राय केवल इंतना है | कि घरवालों को इसकी खबर ही नही लग पाती कि कब और कैसे उनके परिवार का सदस्य नशा करने लग गया है | नशे की लत्त को छुड़ाने के लिय सरकार ने नशा मुक्ति केन्द्र खोल रखे हैं | पता चलते ही वहां से मदद लेनी चाहिए |

यथासंभव यह प्रयास करना चाहिये जो कि नशा मुक्ति के लिए सीधा और सरल रास्ता है | मेरा यह लेख उन लोगो के लिए है जो नशा छोड़ना चाहते है लेकिन छोड़ नही पाते नशे का संबंध मन मस्तिष्क से है |

शराब पीना और विशेषरूप से धूम्रपान के साथ शराब पीना बहुत ही खतरनाक है | इससे अनेकों रोग जैसे कैंसर (मुह का ), महिलाओं में स्तन कैंसर, आदि रोग होते है | ऐसे बुरे व्यसन (आदत) एक मानसिक बीमारी है और इसे को छुडाने के लिए मानसिक बीमारी जैसे इलाज की आवश्यकता होती है | वात होने पर लोग चिंता और घबराहट को दबाने के लिए धूम्रपान का सहारा लेते है | पित्त बढने से शरीर के अन्दर गर्मी लेने की इच्छा होती है और धूम्रपान की इच्छा होती है | कफ बढने से शरीर के अन्दर डाली गयी तम्बाकू की शक्ति बढती है |

लेकिन आप इसका इलाज आयुर्वेद के माध्यम से कर सकते है और इसे बनाने के लिए १८-२० जड़ी – बूटियों का प्रयोग किया जाता है | सभी औषधियों को निश्चित मात्रा में मिलाकर यह दवा तैयार की जाती है | इस दवा का कोई बुरा प्रभाव नहीं है यदि इसे शरीर के वजन और स्वास्थ्य अनुसार दवा की मात्रा तयकर लिया जाता है | इस दवा का प्रयोग किसी का शराब का नशा छुड़ाने, धूम्रपान का नशा छुड़ाने, और अन्य का नशा छुड़ाने (जैसे गुटका, तम्बाकू) में प्रयोग किया जा सकता है |

जड़ी बूटियों का विवरण और मात्रा निम्न है :-



गुलबनफशा - 2 ग्राम

निशोध - 4 ग्राम

विदारीकन्द (कुटज) – 15 ग्राम

गिलोय – 4 ग्राम

नागेसर - 3 ग्राम

कुटकी - 2 ग्राम

कालमेघ - 1 ग्राम

भ्रिगराज – 6 ग्राम

कसनी - 6 ग्राम

ब्राम्ही – 6 ग्राम

भुईआमला - 4 ग्राम

आमला - 11 ग्राम

काली हर्र  - 11 ग्राम

लौंग - 1 ग्राम

अर्जुन - 6 ग्राम

नीम – 7 ग्राम

पुनर्नवा - 11 ग्राम

कैसे प्रयोग करे :-



उपर दी गयी सभी जड़ी – बूटियों को कूट और पीसकर पाऊडर बना लें । एक चम्मच दवा पाऊडर को एक दिन में दो बार खाना खाने के बाद पानी के साथ ले | इस दवा को खाने में मिलाकर भी दिया जा सकता है | जैसे – जैसे नशे की लत कम होने लगे इस दवा की मात्रा धीरे – धीरे कम कर दे | इस दवा का असर फ़ौरन पता चलने लगता है और लगभग दो माह में पूरी तरह से नशे की लत खत्म हो जाती है लेकिन दवा को कम मात्रा में और २-३ दिन के अंतर के लगभग 6 माह दे जिससे नशे की लत जड़ से खत्म हो जाए |

ये दवा विज्ञापन वाले बना कर टी वी में आपको ही उलटे सीधे और मनमाने दामो पे बेचते है जबकि आप इसे घर पे ही बना सकते है -

एक और नशा मुक्ति उपाय :-


लेख- राजीव दीक्षित द्वारा

एक आयुर्वेदिक ओषधि है जिसको आप सब अच्छे से जानते है और पहचानते हैं हमारे राजीव भाई ने उसका बहुत इस्तेमाल किया है लोगो का नशा छुड्वने के लिए और उस ओषधि का नाम है अदरक  और ये आसानी से सबके घर मे होती है  इस अदरक के टुकड़े कर लो छोटे छोटे और उस मे नींबू निचोड़ दो थोड़ा सा काला नमक मिला लो और इसको धूप मे सूखा लो  सुखाने के बाद जब इसका पूरा पानी खतम हो जाए तो इन अदरक के टुकड़ो को अपनी जेब मे रख लो जब भी दिल करे गुटका खाना है तंबाकू खाना है बीड़ी सिगरेट पीनी है  तो आप एक अदरक का टुकड़ा निकालो मुंह मे रखो और चूसना शुरू कर दो  और यह अदरक ऐसे भी अदभुत चीज है आप इसे दाँत से काटो मत और सवेरे से शाम तक मुंह मे रखो तो शाम तक आपके मुंह मे सुरक्षित रहता है  इसको चूसते रहो आपको गुटका खाने की तलब ही नहीं उठेगी  तंबाकू सिगरेट लेने की इच्छा ही नहीं होगी शराब पीने का मन ही नहीं करेगा  जैसे ही इसका रस लाड़ मे घुलना शुरू हो जाएगा आप देखना इसका चमत्कारी असर होगा आपको फिर गुटका –तंबाकू शराब –बीड़ी सिगरेट आदि की इच्छा ही नहीं होगी  सुबह से शाम तक चूसते रहो  और आप ने ये 10 -15 -20 दिन लगातार कर लिया  तो हमेशा के लिए नशा आपका छूट जाएगा .

मेरा खुद का अनुभव किया है गुटका छुड़ाने के लिए हमने दो साल पहले इसका उपयोग किया था में पूरा दिन गुटका खाता था और कभी -कभी रात को भी खा के सोता था एक समय ये भी आया जब मुझे खाना खाने में तकलीफ होने लगी तो आप यकीन करे परिक्षण के लिए ये प्रयोग हमने स्वयं पे आजमाया और सिर्फ तीन दिन में ही मुझे गुटके से नफरत होने लगी लेकिन हमने इसे एक माह जारी रखा और तब से आज तक कभी भी मेरा मन नहीं हुआ है .

अदरक मैं ऐसे क्या चीज है  यह अदरक मे एक ऐसे चीज है जिसे हम रसायनशास्त्र (केमिस्ट्री ) मे कहते है इसे सल्फर !

अदरक मे सल्फर बहुत अधिक मात्रा मे है ! और जब हम अदरक को चूसते है जो हमारी लार के साथ मिल कर अंदर जाने लगता है ! तो ये सल्फर जब खून मे मिलने लगता है ! तो यह अंदर ऐसे हारमोनस को सक्रिय कर देता है ! जो हमारे नशा करने की इच्छा को खत्म कर देता है ! और विज्ञान की जो रिसर्च है सारी दुनिया मे वो यह मानती है की कोई आदमी नशा तब करता है ! जब उसके शरीर मे सल्फर की कमी होती है ! तो उसको बार बार तलब लगती है बीड़ी सिगरेट तंबाकू आदि की ! तो सल्फर की मात्रा आप पूरी कर दो बाहर से ये तलब खत्म हो जाएगी ! इसका राजीव भाई ने हजारो लोगो पर परीक्षण किया और बहुत ही सुखद प्रणाम सामने आए है ! बिना किसी खर्चे के शराब छूट जाती है बीड़ी सिगरेट शराब गुटका आदि छूट जाता है ! तो आप इसका प्रयोग करे !

अब आप ये सब नहीं कर सकते है तो होमिओपेथी की भी दवा है लीजिए अब  इसके उपयोग का एक दूसरे उपयोग का तरीका भी जाने ...!

अदरक के रूप मे सल्फर भगवान ने बहुत अधिक मात्रा मे दिया है ! और सस्ता भी है. इसी सल्फर को आप होमिओपेथी की दुकान से भी प्राप्त कर सकते हैं ! आप कोई भी होमिओपेथी की दुकान मे चले जाओ और विक्रेता को बोलो मुझे सल्फर नाम की दवा  दे दो ! वो दे देगा आपको शीशी मे भरी हुई दवा दे देगा और सल्फर नाम की दावा होमिओपेथी मे पानी के रूप मे आती है प्रवाही के रूप मे आती है जिसको हम  घोल (Dilution )भी कहते है अँग्रेजी मे .

यह पानी जैसे आएगी देखने मे ऐसे ही लगेगा जैसे यह पानी है ये 5 मिली लीटर दवा की शीशी दस या पन्द्रह रूपये की आती है और उस दवा का एक बूंद जीभ पर दाल लो सवेरे सवेरे खाली पेट फिर अगले दिन और एक बूंद डाल लो .ये 3 खुराक लेते ही 50 से 60 % लोग की दारू छूट जाती है  और जो ज्यादा पियक्कड  है जिनकी सुबह दारू से शुरू होती है और शाम दारू पर खतम होती है  वो लोग हफ्ते मे दो दो बार लेते रहे तो एक दो महीने तक करे बड़े बड़े पियक्कड की दारू छूट जाएगी .बस हो सकता है कि दो या तीन महीने का समय लगे . यही सल्फर अदरक मे होता  है .और इसका अर्क ही होमिओपेथी की दुकान मे भी उपलब्ध है आप आसानी से खरीद सकते है लेकिन जब आप होमिओपेथी की दुकान पर खरीदने जाओगे तो वो आपको पुछेगा कितनी ताकत (पोटेंसी)की दवा दूँ आप उसको कहे 200 potency की दवा देदो या आप सल्फर 200 कह कर भी मांग सकते है.लेकिन जो बहुत ही पियकर है उनके लिए आप 1000 Potency की दवा ले. अगर समाज सेवा करनी है तो आप 200 मिली लीटर का बोतल खरीद लो एक 150 से रुपए मे मिलेगी और आप उससे 10000 लोगो की शराब छुड़वा सकते हैं.लेकिन साथ मे आप मन को मजबूत बनाने के लिए रोज सुबह बायीं नाक से सांस ले  और अपनी इच्छा शक्ति मजबूत करे.

बहुत ज्यादा चाय और काफी पीने वालों के शरीर मे आर्सेनिक (ARSENIC ) तत्व की कमी होती है,उसके लिए आप ARSENIC- 200 का प्रयोग करे.चाय और काफी भी छुट जायेगी .

गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी पीने वालों के शरीर मे फास्फोरस (PHOSPHORUS) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप PHOSPHORUS 200 का प्रयोग करे ये गुटका,तंबाकू,सिगरेट,बीड़ी इत्यादि छुडा देगा .

शराब पीने वाले मे सबसे ज्यादा सल्फर (SULPHUR) तत्व की कमी होती है उसके लिए आप SULPHUR 200 का प्रयोग करे ये शराब को छुडा देता है लेकिन हो सके तो आप बाज़ार में मिलने वाली अदरक से ही शुरुवात करे आप को इससे ही पूरा लाभ मिल जाएगा ...!

उपचार और प्रयोग -

क्या आप शादी कर रहे है तो एक बार ये भी सोचे- If you are married even once thought

सभी के जीवन में शादी का महत्व है हर लड़के या लड़की की इक्षा होती है कि उसका जीवन साथी योग्य और उसकी अपेक्षाओं पे खरा उतरने वाला हो तो फिर आप को अपनी गर्ल-फ्रेंड या होने वाली जीवन संगिनी के विषय में उसकी बेसिक आदतों का जानना आपके लिए आवश्यक है वर्ना आपके सपनो को चकनाचूर होते देर नहीं लगेगी भले ये रिश्ता आपके पेरेंट्स ही की मर्जी से हुआ हो -




यदि आपकी होने वाली गर्ल-फ्रेंड या जीवन संगिनी बात -बात में झूठ बोलती है या लम्बी-लम्बी फेकने वाली बात करती है अपने झूठे सम्मान को बरकरार रखने के लिए तो आपको इस प्रकार के रिश्ते को जोड़ने से पहले अवस्य सोचना चाहिए अपना अतीत छुपाना लडकियों में एक ख़ास आदत होती है पैसे से सम्बंधित बातो पे झूठ बोलना भी आपके लिए आने वाले समय में कलह का कारण भी बन सकती है हम ये नहीं कहते कि परिवर्तन नहीं होता है मगर शुरू-शुरू में ये सामंजस्य बिठाना आपके लिए मुश्किल से कम नहीं होता और ये धीरे-धीरे आपके मन में एक शक का बीज अंकुरित कर सकता है -

विशेष बात तो ये है कि आपको देखना है कि कही आपकी होने वाली जीवन-संगिनी आलसी तो नहीं है आपका पूरा परिवार और आपकी जिम्मेदारी से ताल-मेल बिठा सकती है या फिर बस आपको ही दो रोटी देने के बाद आलसियों की तरह लेटे रहने वाली है -क्युकि आलसी लोगो को आगे चल कर रोग होने की संभावना काफी जादा होती है और आपको उसकी देखभाल के लिए डॉक्टर को आय का एक हिस्सा देना होगा जो आगे चल कर तकलीफ का कारण बन सकता है -

जो होने वाली जीवन-संगिनी हर छोटे-छोटे कामो के प्रति भी दूसरो पे आश्रित है वो भी आपके लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है इस प्रकार की शादी से पहले आप खुद को ही काम करने के लिए तैयार  कर ले -

स्वभाव का परिचय भी जाने कि- हमेशा दूसरो से बात करते वक्त उसका व्यवहार हमेशा नम्र है या कठोर -कठोर जुबान या स्वभाव की जीवन -संगिनी आपके माता-पिता या रिश्तेदारों से कैसा व्यवहार करेगी इसकी कल्पना आप स्वयं ही करे-

जो शादी से पहले बात-बात में आपको अपनी आदतों को बदलने के लिए दबाव डालती रहे और खुद में कोई कमी नजर न आये इस प्रकार की पत्नी आपके जीवन में घडी-घडी आपकी कमियों से अवगत कराने की बजाय झगडे का कारण बना सकती है - सलाह देना और बदलना दोनों विपरीत बात है -हो सकता है कुछ आदते आपकी दूसरो के हित की हो और आपको अपना परिवार बाँध के रखने में सहायक हो लेकिन वो उस बंधन से मुक्त होने के लिए और अपनी आजादी के लिए भी आपके जीवन में दबाव डाल सकती है और आगे चल कर आपको शायद एहसास भी हो कि आपने गलती की है -उस परिस्थिति में कभी-कभी लौट के आने का भी लाभ नहीं होता है -बस आपको इस रिश्ते से कन्नी-काट लेना ही उचित है -

छोटी-छोटी बातो पे झगड़ने वाली या इमोशनल अत्याचार करने वाली पत्नी आपके जीवन को कभी भी सुखी नहीं बना सकती है अगर आप उसे बदलने का भी प्रयास करेगे तो उसका इगो हर्ट होगा जो उसके और आपके दोनों के लिए ही नुकसान दायक होगा -

अंतिम बात ये है-भले ही देर हो जाए उसका उतना पश्चाताप नहीं होगा जितना जल्दी में लिया गया फैसला आपको जीवन भर पछताने के सिवा कुछ नहीं देगा -शादी जीवन का अटूट बंधन है इसलिए भले 1001 बार सोचने को मजबूर हो लेकिन एक बार जरूर सोचे -शादी से पहले अगर आप किसी गर्ल-फ्रेंड से प्यार करते है तो हो सकता है आपको उसमे कोई भी बुराई नजर न आये तो इसकी जिम्मेदारी आप अपने निकटवर्ती मित्र या परिवार के सदस्य को सौंप दे -जो आपका विश्वास-पात्र हो या सही मार्ग-दर्शक हो -उसकी बातो को भी तवज्जो दे -

तो फिर कब करेगे शादी सोच समझ कर ..?

उपचार और प्रयोग-

Wednesday, November 4, 2015

आपको पता है छिलका के फायदे क्या है -

आइये आज जाने कि छिलके जिनको हमेशा गृहणियां बेकार समझ कर फेक दिया करती है ये बेकार छिलके भी आपके लिए कैसे उपयोगी है और इन के अंदर के गुणों को जान-कर आप भी इसका उपयोग करेगे-





छिलकों में कई चमत्कारिक गुण छिपे होते हैं, जिससे सौंदर्य ही नहीं निखरता, बल्कि कई रोगों को दूर करता है तो आप जाने छिलका क्या -क्या करता है :-


खरबूजे को छिलका समेत खाने से कब्ज दूर होती है।

खीरे के छिलके से भी कीट और झींगुर भागते हैं।

पपीते के छिलके सौंदर्यवर्धक माने जाते हैं। त्वचा पर लगाने से खुश्की दूर होती है। एड़ियों पर लगाने से वे मुलायम होती हैं।

चोट लगने पर केले के छिलके को रगड़ने से रक्तस्राव रुक जाता है।

कच्चे केले के छिलकों से चटपटी सब्जी बनती है।

मटर के मुलायम छिलकों की भी स्वादिष्ट सब्जी बनती है।

टमाटर और चुकंदर के छिलकों को चेहरे पर लगाने से चेहरे की चमक बढ़ती है और होठों की लालिमा बढ़ती है।

करेला जितना गुणकारी होता है उसके छिलके भी उतने फायदेमंद होते हैं। अलमारी में रखने से कीट भागते हैं।

तोरी और घीया के छिलके की सब्जी भी पेट रोगों में फायदा पहुँचाती है।

अनार का छिलका :-



जिन महिलाओं को अधिक मासिक स्राव होता है वे अनार के सूखे छिलके को पीसकर एक चम्मच पानी के साथ लें। इससे रक्त स्राव कम होगा और राहत मिलेगी।

जिन्हें बवासीर की शिकायत है वे अनार के छिलके का 4 भाग रसौत और 8 भाग गुड़ को कुटकर छान लें और बारीक-बारीक गोलियां बनाकर कुछ दिन तक सेवन करें। बवासीर से जल्दी आराम मिलेगा।

अनार के छिलके को मुंह में रखकर चूसने से खांसी का वेग शांत होता है।

अनार को बारीक पीसकर उसमें दही मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बनाकर सिर पर मलें। इससे बाल मुलायम होते हैं।

काजू का छिलका :-



काजू के छिलके से तेल निकालकर पैर के तलवे और फटे हुए स्थान पर लगाने से आराम मिलता है।

बादाम का छिलका :-



बादाम के छिलके व बबुल की फल्लियों के छिलके व बीज को जलाकर पीसकर थोड़ा नमक डालकर मंजन करें। इससे दांतों के कष्ट दूर होते हैं, मसूढ़ें स्वस्थ एवं दांत मजबूत बनता है।

नारियल का छिलका :-



नारियल का छिलका जलाकर महीन पीसकर दांतों पर घिसने से दांतें साफ होते हैं।

नारंगी का छिलका :-



दूध में नारंगी का छिलका छानकर दूध के साथ नियमित सेवन करने से खून साफ होता हैं।

पपीते का छिलका :-



पपीते के छिलके को धूप में सूखाकर, खूब बारीक पीसकर ग्लिसरीन के साथ मिलाकर लेप बनावें व चेहरे पर लगाये, मुंह की खुश्की दूर होती है।

आलू का छिलका : -



आलू के छिलके मुंह पर रगड़ने से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती।

लौकी का छिलका :-



लौकी के छिलके को बारीक पीसकर पानी के साथ पीने से दस्त में लाभ होता है।

तोरई का छिलका :-



तोरई का ताजा छिलका त्वचा पर रगड़ने से त्वचा साफ होती है।

इलायची का छिलका :-



इलायची के छिलके चाय की पत्तियां या शक्कर में डाल दें तो चाय स्वादिष्ट बनेगी।

संतरे का छिलका :-



संतरे के छिलके को दूध में पीसकर छान लें। इसे कच्चे दूध व हल्दी में मिलाकर चेहरे पर लगाये। इससे जहां चेहरे के दुश्मन मुहांसों-धब्बों का नाश होता है, वहीं त्वचा जमक उठता है।

तरबूज का छिलका :-



दाद, एकजीमा की शिकायत होने पर तरबूज के छिलकों को सूखाकर, जलाकर राख बना लें। तत्पश्चात् उस राख को कड़ुवे तेल में मिलाकर लगाये।

नींबू का छिलका :-



नींबू का छिलका दांत पर मलने से दांत चमकदार बनता है और मसूढ़ें भी मजबूत बनता है।

नींबू का छिलका जूते पर रगड़े व कुछ देर के लिए धूप में रख दें। फिर जूतों पर मालिश करें। जूतों में चमक आ जायेगी।

नींबू व संतरा के छिलकों को सूखाकर, खूब महीन चूर्ण बनाकर दांत पर घिसें। दांत चमकदार बनते हैं।

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