Monday, May 18, 2015

स्त्री में कामेच्छा बढ़ाने के उपाय -Measures to increase libido in women

खान-पान (food and drink ) और व्यवहार के तौर-तरीके बदल गए है देखने में आ रहा है कि स्त्री और पुरुष दोनों ही प्यार करने के तरीके से संतुस्ट नहीं है तो फिर धीरे-धीरे एक मानसिक कुंठा ( Mental frustration ) बन जाती है फिर ये किसी से कहने में काफी Shameful  & laughable  लगता है कि आपके Life Partner आपके प्यार करने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं-आप अपने जीवनसाथी को Satisfied करने के कुछ तरीके अपना सकते  हैं-





स्त्री हो या पुरुष जब आप अपने पार्टनर की Sex Desire को पूरा नहीं कर पाते है आपकी शादीशुदा जिंदगी में कई समस्याएं पैदा हो जाती है कई बार तो सेक्स लाइफ में Unsatisfactorily तलाक का कारण भी बनती है-वैवाहिक जीवन का ख़राब होना अस्थिरता का एक प्रमुख कारण है-


यदि आप अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाना चाहते है तो सेक्स इच्छा बढ़ाना एक अच्छा तरीका हो सकता है-

(If you want to make your marriage happy can be a good way to increase sex desire )


शादी से पहले लडकियों में Pregnancy  को रोकने के लिए प्रयोग की गई दवाओं से भी आपके सेक्स लाइफ पर अतिरिक्त असर (side effect ) हो सकता है -अत: इसके सेवन से भी बचना चाहिए-ये धीरे-धीरे आपकी कामोत्तेजना पे विपरीत प्रभाव पैदा करती है-

(Pregnancy before marriage in girls to prevent the use of drugs, the additional impact on your sex life (side effect) could be -at: The drug should also be avoided-they gradually produces the opposite effect on your sex drive is )


कुछ तरीके अपनाए (Some methods ):-


आप एक दूसरे ख़ुशी और स्वास्थ का भरपूर ख्याल रक्खे जितना हो सके एक दुसरे की खुशियों को नित्य बढाने का प्रयास करे - एक दूसरे के रिश्ते को मजबूती देने के लिए एक दूसरे को अपनी समस्या से अवगत कराये और एक दूसरे के लिए समर्पित भाव से अपनी छवि बनाने में मददगार बने -

प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में सामंजस्य बनाए जिससे जिससे आपके वैवाहिक सम्बन्धों में बेहतरी हो -


महिलाए बांझपन रोकने के तरीके आप कई खाद्य पदार्थों का सेवन कर अपनी कामेच्छा बढ़ा सकती हैं।तथा ये खाद्य पदार्थ आपके वैवाहिक जीवन खुशहाली लाने के लिए काफी उपयोगी हैं। इनमे से कुछ खाद्य पदार्थ हैं-

अजवाइन यह एक अच्छा खाद्य पदार्थ है जो भारतीय बाजार में और किचन में आसानी से मिल जाता है। चूँकि इसमें एंड्रोस्टेरोन (Androsterone ) नामक हार्मोन होता है इसलिए ये यौन संबंध के लिए अच्छा है। यह एक बिना गंध वाला हार्मोन है जो कि सेक्स उत्तेजना के लिए वास्तव में बहुत प्रभावशाली है-




एवोकैडो फोलिक एसिड एक पोषक तत्व है जो कि महिलाओं के लिए बहुत जरुरी है। चूँकि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले शारीरिक गठन में कमजोर होती हैं इसलिए यह उन्हें ताकत और ऊर्जा प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें पोटैशियम और विटामिन B6 (Potassium and vitamin B6 ) की अधिकता भी होती है-

सीप का सेवन महिलाओं के लिए सेक्स इच्छा बढ़ने के लिहाज से बहुत अच्छा है। इसमें ज़िंक की अधिकता होने से यह सेक्स से जुड़े हार्मोन्स बढ़ा देता है। खाने में इसके सेवन से पुरुषों में भी शुक्राणुओं की मात्रा बढ़ सकती है।




अंडा भी पोषक खाद्य पदार्थों में से एक है जो कि सभी के लिए उपयोगी है। विटामिन B5 और B6 की अधिकता के कारण यह हार्मोन्स का विस्तार करने की दृष्टि से अच्छा है। इससे कामेच्छा आसानी से बढ़ाई जा सकती है।


Many women find these really bad that they do not enjoyable intercourse. But it is possible that they liked sex, but getting them to be the kind of sex they do not enjoyable.Pay attention to changes in such circumstances, they should think of each other's needs, while not ignoring the cohesion to solve the problem



सेब नारी में कामोत्तेजना के बढ़ावा देवे में मदद करता है ।एक से दो सेब का खाने वाली महिलाओं में कामोत्तेजना बढ़ जाती  है .सेब में Phlorizin की मात्रा जादा होने के कारण उत्तेजना में सहायक है ये रेड वाइन और चाकलेट में भी पाया जाता है ये योनी की तरफ जाने वाले खून की गति को बढ़ा देता है खून की गति तेज होने से कामोत्तेजना बढ़ जाती है .


फ्लोरीजिन का असर बहुत हद तक स्त्री सेक्स हॉरमोन Estradiol से मिलता जुलता है इसलिए स्त्री को एक से दो सेब प्रतिदिन सेवन करना ही सेक्स लाइफ को बेहतर बनाने के लिए खाना चाहिए .


Estrogen skin creams and tablets available in the market by its use of the benefits from its use Draines Vajaina ends and there is no pain during sex. Indeed, the drop in estrogen levels caused by the Minopoj.


उपचार और प्रयोग-http://www.upcharaurprayog.com

Sunday, May 17, 2015

कब्ज क्यों होता है-

हमारे अप्राकृतिक आहार,विहार और विचार के चलते कब्ज उत्पन्न होती है | जब शरीर में मल की अधिकता हो जाती है तब मल निष्कासक अंग इसे पूरी तरह से बाहर नही निकाल पाते फलस्वरूप यह शरीर में एकत्र होकर रक्त के साथ मिलकर अन्य अनेक रोग उत्पन्न कर देता है |







इसके मुख्य कारण ये है :-
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अप्राकृतिक जीवन शैली

कम रेशायुक्त भोजन का सेवन करना

शरीर में पानी का कम होना

कम चलना या काम करना

कुछ खास दवाओं का सेवन करना

बड़ी आंत में घाव या चोट के कारण यानि बड़ी आंत में कैंसर

थायरॉयड हार्मोन का कम बनना

कैल्सियम और पोटैशियम की कम मात्रा

मधुमेह के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या

कंपवाद (पार्किंसन बीमारी)

कब्ज, पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति  का मल बहुत कडा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। कब्ज के रोगी को सिर में भारीपन या दर्द बना रहता है | गैस,एसिडिटी,अजीर्ण आदि लक्षण भी प्रगटहोने लगते हैं |

आप  करे इसका ये उपचार :-
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सबसे पहले ध्यान रक्खे कि आप रेशायुक्त भोजन का अत्यधित सेवन करे .

नास्ते  में आप गेहूं का दलिया या कोई मौसमी फल ले .

दोपहर को आप हरी सब्जी (बिना मिर्च-मसाले की) + सलाद + चोकर समेत बनी आंटे की रोटी ले .

शाम 4:00 बजे- सब्जियों का सूप 250 मिली ले .

रात को मिक्स वेजिटेबल दलिया या कोई हरी सब्जी + चोकर सहित आंटे की रोटी ले .

अन्य उपाय :-
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ताजा फल का जादा सेवन करे सेब फल को धो कर छिलके सहित खाए जादा से जादा पानी का सेवन करे तथा वसायुक्त भोजन का सेवन भी कम करे .

छोटी हरड और काल नमक समान मात्रा में मि‍लाकर पीस लें। नि‍त्‍य रात को इसकी दो चाय की चम्‍मच गर्म पानी से लेने से दस्‍त साफ आता हैं।

दो चाय चम्‍मच ईसबगोल 6 घण्‍टे पानी में भि‍गोकर इतनी ही मि‍श्री मि‍लाकर जल से लेने से दस्‍त साफ आता हैं। केवल मि‍श्री और ईसबगोल मि‍ला कर बि‍ना भि‍गोये भी ले सकते हैं।

कब्‍ज वालों के लि‍ए चना उपकारी है। इसे भि‍गो कर खाना श्रेष्‍ठ है। यदि‍ भीगा हुआ चना न पचे तो चने उबालकर नमक अदरक मि‍लाकर खाना चाहि‍ए। चेने के आटे की रोटी खाने से कब्‍ज दूर होती है। यह पौष्‍ि‍टक भी है। केवल चने के आटे की रोटी अच्‍छी नहीं लगे तो गेहूं और चने मि‍लाकर रोटी बनाकर खाना भी लाभदायक हैं। एक या दो मुटठी चने रात को भि‍गो दें। प्रात: जीरा और सौंठ पीसकर चनों पर डालकर खायें। घण्‍टे भर बाद चने भि‍गोये गये पानी को भी पी लें। इससे कब्‍ज दूर होगी।

पका हुआ बेल का गूदा पानी में मसल कर मि‍लाकर शर्बत बनाकर पीना कब्‍ज के लि‍ए बहुत लाभदायक हैं। यह आँतों का सारा मल बाहर नि‍काल देता है।

नीम्‍बू का रस गर्म पानी के साथ रात्रि‍ में लेने से दस्‍त खुलकर आता हैं। नीम्‍बू का रस और शक्‍कर प्रत्‍येक 12 ग्राम एक गि‍लास पानी में मि‍लाकर रात को पीने से कुछ ही दि‍नों में पुरानी से पुरानी कब्‍ज दूर हो जाती है।

सुबह नाश्‍ते में नारंगी का रस कई दि‍न तक पीते रहने से मल प्राकृति‍क रूप से आने लगता है। यह पाचन शक्‍ति‍ बढ़ाती हैं।

मैथी के पत्‍तों की सब्‍जी खाने से कब्‍ज दूर हो जाती है।

गेहूं के पौधों (गेहूँ के जवारे) का रस लेने से कब्‍ज नहीं रहती है।

सोते समय आधा चम्‍मच पि‍सी हुई सौंफ की फंकी गर्म पानी से लेने से कब्‍ज दूर होती है।

दालचीनी ,सोंठ, इलायची जरा सी मि‍ला कर खाते रहने से लाभ होता है।

रात में चुकंदर (बीट) की सब्जी खाएं.

रात में दूध में 8-10 मुनक्का डालकर उबालें और बीज निकाल कर खा लें |

सुबह उठकर दो ग्लास तांबे के बर्तन में रखा पानी पियें ।

रात में अजवाईन (आधी चम्मच) गुड के साथ खायें और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें ।

एरण्ड तेल में २-४ काली छोटी हरड सेककर सुबह खाली पेट खायें ।

दूध मे गुलकन्द मिलाकर ले ।

टिण्डा, तोरइ का प्रयोग, दोपहर के भोजन के बाद छाछ पियें ।

टमाटर कब्‍ज दूर करने के लि‍ए अचूक दवा का काम करता है। अमाशय, आँतों में जमा मल पदार्थ नि‍कालने में और अंगों को चेतनता प्रदान करने में बडी मदद करता है। शरीर के अन्‍दरूनी अवयवों को स्‍फूर्ति‍ देता है।

कब्ज का प्रमुख कारण शरीर मे तरल की कमी होना है। पानी की कमी से आंतों में मल सूख जाता है और मल निष्कासन में जोर लगाना पडता है। अत: कब्ज से परेशान रोगी को दिन मे २४ घंटे मे मौसम के मुताबिक ३ से ५ लिटर पानी पीने की आदत डालना चाहिये। इससे कब्ज रोग निवारण मे बहुत मदद मिलती है।

किसी भी प्रकार का रिफाइंड तेल और सोयाबीन, कपास, सूर्यमुखी, पाम, राईस ब्रॉन और वनस्पति घी का प्रयोग विषतुल्य है । उसके स्थान पर मूंगफली, तिल, सरसो व नारियल के घानी वाले तेल का ही प्रयोग करें ।

चीनी/शक्कर का प्रयोग ना करें, उसके स्थान पर गुड़ या धागे वाली मिश्री (खड़ी शक्कर) का प्रयोग करें ।

आयोडीन युक्त नमक से नपुंसकता होती है इसलिए उसके स्थान पर सेंधा नमक या ढेले वाले नमक प्रयोग करें । जब से आयोडीन नमक का प्रचार -प्रसार जादा  हुआ घेंघा तो कम नहीं हुआ हाँ नपुंसकता जरुर जादा बढ़ गई है जबकि पहले के लोग देशी नमक खा के भी आज के लोगो से जादा स्वस्थ थे .

मैदे का प्रयोग शरीर के लिये हानिकारक है इसलिए इसका प्रयोग ना करें ।

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नियमित अपनाए कुछ नुस्खे, दूर करते हैं बीमारियां और बढ़ाते हैं ताकत.....!

* आजकल अनियमित दिनचर्या के चलते काफी लोगों को कम उम्र में ही कमजोरी और बुढ़ापे से संबंधित रोगों की शिकायत हो जाती है। इन बीमारियों से बचने के लिए गरुड़ पुराण में खाने-पीने की चीजों से जुड़े कुछ देसी नुस्खे बताए गए हैं। आप अगर नियमित रूप से रोजमर्रा के जीवन में इसका उपयोग करे तो आपको काफी लाभदायक सिद्ध होगा ...!




* आपको यहां बताए जा रहे नुस्खों में उपयोग की जाने वाली औषधियां बाजार में किसी भी औषधि की दुकान से आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं।

* जो व्यक्ति हर रोज भोजन के बाद थोड़े से गुड़ का सेवन करता है, उसे शारीरिक रूप से काफी लाभ प्राप्त होता है। गुड़ पुराना होगा तो अधिक फायदेमंद रहता है। भोजन के बाद थोड़ा-सा मीठा खाने पर पाचन तंत्र को मदद मिलती है।

* काला नमक, हींग और सोंठ का काढ़ा बनाकर पीने से पेट से संबंधित कई रोग दूर होते हैं। पेट साफ और स्वस्थ रहेगा तो शरीर ऊर्जावान और शक्तिशाली बना रहता है।

* यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक बुढ़ापे के रोगों से बचना चाहता है और कमजोरी को दूर रखना चाहता है तो नियमित रूप से गाय के दूध का सेवन करना चाहिए। यदि दूध में घी और शहद भी मिला लिया जाए तो यह आयु बढ़ाने वाला होता है।

* खाना खाने के बाद मिश्री और मक्खन का सेवन करना भी लाभदायक होता है। इस उपाय से बुद्धि बढ़ती है और शरीर को ऊर्जा प्राप्त होती है। यदि गाय के दूध से बना मक्खन होगा तो ज्यादा बेहतर रहता है।

* शहद और त्रिफला चूर्ण का सेवन किया जाए तो लंबे समय तक आंखें स्वस्थ रहती हैं और आंखों से संबंधित कई छोटी-छोटी बीमारियां दूर ही रहती हैं।

* घी के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए। यह आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

* हर रोज सोने से पहले शहद और घी का सेवन करने से शरीर को शक्ति प्राप्त होती है।

* तिल, अश्वगंधा, मूसली, काली तुलसी और गुड़ को परस्पर समान भाग में मिलाएं और इसके छोटी-छोटी गोलियां बनाएं। इन गोलियों का सेवन करने पर भी शरीर को ताकत मिलती है।

* उड़द, अलसी, गेहूं और पिप्पली को पीसकर उसमें घी मिलाएं और शरीर पर लगाएं। ऐसा नियमित रूप से करने पर त्वचा लंबे समय तक चमकदार और स्वस्थ बनी रहती है।

* पिप्पली, लौहचूर्ण, सोंठ, आंवला, सेंधा नमक, शहद और मिश्री को समान मात्रा में एक साथ मिलाएं। इस मिश्रण का सेवन नियमित रूप से करते रहेंगे तो व्यक्ति लंबे समय तक बलवान बने रह सकता है।

* गरुड़ पुराण के अनुसार जो लोग अधिक बलवान होना चाहते हैं, उन्हें हर रोज मिश्री, शहद और मक्खन को एक साथ मिलाकर सेवन करना चाहिए। मक्खन और मिश्री सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है, यह इस बात से समझा जा सकता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने बालपन में मक्खन-मिश्री की सेवन किया था। आज भी श्रीकृष्ण को मुख्य प्रसाद के रूप में यही अर्पित किया जाता है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

Saturday, May 16, 2015

एक जादू है किशमिश जाने इसके फायदे ......!

* किशमिश एक  खट्टा-मीठा ड्रायफूट है जो अंगुर को सुखाकर तैयार किया जाता है। इसमें भी अंगूर के सारे गुण विद्यमान होते हैं। दूध के लगभग सभी तत्त्व किशमिश में पाए जाते हैं। दूध के अभाव में इसका उपयोग किया जा सकता है। किशमिश दूध की अपेक्षा जल्दी पचती है।

* मुनक्के के नित्य सेवन से थोड़े ही दिनों में रस, रक्त, शुक्र आदि धातुओं तथा ओज की वृद्धि होती है।


* वृद्धावस्था में किशमिश या मुनक्के का प्रयोग न केवल स्वास्थ्य की रक्षा करता है बल्कि आयु को बढ़ाने में भी सहायक होता है।

* माना जाता है कि किसी भी रोगी के लिए ये विशेष रूप से लाभदायक होती है। अंगूर को जब विशेषरूप से सुखाया जाता है तब उसे किशमिश कहते हैं.  यह दो प्रकार का होता है, लाल और काला. किशमिश खाने से खून बनता है, वायु दोष दूर होता है, पित्त दूर होता है, कफ दूर करता है

* कई रोगों में इसका उपयोग औषधि की तरह भी किया जा सकता है आइए जाने मुनक्का के कुछ ऐसे ही औषधिय प्रयोगों के बारे में:-

* आंखों की ज्योति बढाने, नाखूनों की बीमारी होने पर, सफेद दाग, महिलाओं में गर्भाशय की समस्या में अंगूर लाभप्रद होते हैं। इन समस्याओं में मुनक्का को दूध में पकाकर थोड़ा घी व मिश्री मिलाकर पीने से फायदा होता है। जितना पच सके उतने मुनक्का रोज खाने से सातों धातुओं का पोषण होता है।मुनक्का 12 नग, छुहारा पांच नग, छह नग फूल मखाना दूध में मिलाकर खीर बनाकर सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है।जिनका ब्लडप्रेशर कम रहता है, उन्हें हमेशा अपने पास नमक वाले मुनक्का रखना चाहिए। यह ब्लडप्रेशर को सामान्य करने का सबसे आसान उपाय है।

* एक मुनक्का का बीज निकालकर उसमें लहसुन की एक कली रखकर खाने से हाईब्लडप्रेशर में आराम मिलता है। प्रतिदिन सोने से एक घंटा पहले दूध में उबाली गई 11 मुनक्का खूब चबा-चबाकर खाएं और दूध को भी पी लें। इस प्रयोग से कब्ज की समस्या में तत्काल फायदा होता है।

* रात में लगभग 10 या 12 मुनक्का को धोकर पानी में भिगो दें। इसके बाद सुबह उठकर मुनक्का के बीजों को निकालकर इन मुनक्का को अच्छी तरह से चबाकर खाने से शरीर में खून बढ़ता है। भूख न लगती हो तो बराबर मात्रा में मुनक्का (बीज निकाल दें), हरड़ और चीनी को पीसकर चटनी बना लें। इसे पांच ग्राम की मात्रा में (एक छोटा चम्मच), थोड़ा शहद मिला कर खाने से पहले दिन में दो बार चाटें।रोजाना मुनक्का का दूध उबालकर उसमें घी व मिश्री डालकर पीने से वजन बढ़ता है।

* जिनके गले में निरंतर खराश रहती है या नजला एलर्जी के कारण गले में तकलीफ बनी रहती है, सुबह-शाम दोनों वक्त चार- पांच मुनक्का को बीज सहित खूब चबाकर खा लें, लेकिन ऊपर से पानी ना पिएँ। दस दिनों तक निरंतर ऐसा करें। दस मुनक्का एक अंजीर के साथ सुबह पानी में भिगोकर रख दें।रात में सोने से पहले मुनक्का और अंजीर को दूध के साथ उबालकर इसका सेवन करें। ऐसा तीन दिन करें। कितना भी पुराना बुखार हो, ठीक हो जाएगा।

* जब किशमिश को खाई जाती है तो यह पेट में जा कर पानी को सोख लेती हैं। जिस वजह से यह फूल जाती है और कब्ज में राहत दिलाती है।

* हर मेवे की तरह किशमिश भी वजन बढाने में मददगार साबित होती है क्योंकि इसमें फ्रकटोज़ और ग्लूकोज़ पाया जाता है जिससे एनर्जी मिलती है। अगर आपको भी अपना वजन बढाना है और वो भी कोलेस्ट्रॉल बढाए बिना तो आज से ही किशमिश खाना शुरु कर दें।

* जब खून में एसिड बढ जाता है तो यह परेशानी पैदा हो जाती है। इसकी वजह से स्किन डिज़ीज, फोडे़, गठिया, गाउट, गुर्दे की पथरी, बाल झड़ने, हृदय रोग, ट्यूमर और यहां तक कि कैंसर होने की संभावना पैदा हो जाती है। किशमिश में अच्छी मात्रा में पोटैशियम और मैगनीशियम पाया जाता है जिसको खाने से अम्लरक्तता की परेशानी दूर हो जाती है।

* किशमिश में भारी मात्रा में आयरन होता है जो कि सीधे एनीमिया से लड़ने की शक्ति रखता है। खून को बनाने के लिये विटामिन बी कॉमप्लेक्स की जरुरत को भी यही किशमिश पूरी करती है। कॉपर भी खून में लाल रक्त कोशिका को बनाने का काम करता है।

* किशमिश में मौजूद फिनॉलिक पायथोन्यूट्रियंट जो कि जर्मीसाइडल, एंटी बॉयटिक और एंटी ऑक्सीडेंट तत्वों की वजह से जाने जाते हैं, बैक्टीरियल इंफेक्शन तथा वाइरल से लड़ कर बुखार को जल्द ठीक कर देते हैं।

* दिलाये शराब के नशे से छुटकारा- शराब पीने की इच्छा हो तब शराब की जगह 10 से 12 ग्राम किशमिश चबा-चबाकर खाते रहें या किशमिश का शरबत पियें। शराब पीने से ज्ञानतंतु सुस्त हो जाते हैं परंतु किशमिश के सेवन से शीघ्र ही पोषण मिलने से मनुष्य उत्साह, शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव करने लगता है। यह प्रयोग प्रयत्नपूर्वक करते रहने से कुछ ही दिनों में
शराब छूट जायेगी।

* यौन दुर्बलता की समस्या के लिये रोजाना किशमिश खाएं क्योंकि यह कामेच्छा को प्रोत्साहित करती है। तथा इसमें मौजूद अमीनो एसिड, यौन दुर्बलता को दूर करता है। इसीलिये तो शादी-शुदा जोडों को पहली रात दूध का गिलास दिया जाता है जिसमें किशमिश और केसर होता है।

* हड्डी की मजबूती बढ़ाये -किशमिश में बोरोन नामक माइक्रो न्यूट्रियंट पाया जाता है जो कि हड्डी को कैल्शियम सोखने में मदद करता है। बोरोन की वजह से ऑस्टियोप्रोसिस से बडी़ राहत मिलती है साथ ही किशमिश खाने से घुटनों की भी समस्या नहीं पैदा होती।

* इसमें एंटी ऑक्सीडेंट प्रोपर्टी पाई जाती है, जो कि आंखों की फ्री रैडिकल्स से लड़ने में मदद करता है। किशमिश खाने से कैटरैक, उम्र बढने की वजह से आंखों की कमजोरी, मसल्स डैमेज आदि नहीं होता। इसमें विटामिन ए, ए-बीटा कैरोटीन और ए-कैरोटीनॉइड आदि होता है, जो कि आंखों के लिये अच्छा होता है।

* * आपको अक्सर चक्कर आते हैं, कमजोरी महसूस होती है तो हो सकता है कि आप लो ब्लड प्रेशर के शिकार हों। ज्यादा मानसिक तनाव, कभी क्षमता से ज्यादा शारीरिक काम करने से अक्सर लोगों में लो ब्लडप्रेशर की शिकायत होने लगती है। कुछ लोग इसे नजरअन्दाज कर देते हैं तो कुछ लोग डॉक्टर के यहां चक्कर लगाकर परेशान हो जातें हैं। लेकिन आयुर्वेद में लो ब्ल्डप्रेशर को कन्ट्रोल करने के लिए कारगर इलाज है वो है किशमिश।

* नीचे बताई जा रही विधि को लगातार 32 दिनों तक प्रयोग में लाने से आपको कभी भी लो ब्लड प्रेशर की शिकायत नहीं होगी।

* आप 32 किशमिश लेकर एक चीनी के बाउल में पानी में डालकर रात भर भिगोएं। सुबह उठकर भूखे पेट एक-एक किशमिश को खूब चबा-चबा कर खाएं,पूरे फायदे के लिए हर किशमिश को बत्तीस बार चबाकर खाएं। इस प्रयोग को नियमित बत्तीस दिन करने से लो ब्लडप्रेशर की शिकायत कभी नहीं होगी।

विशेष-जिसको लो बी पी की शिकायत हो और अक्सर चक्कर आते हों तो आवलें के रस में शहद मिलाकर चाटने से जल्दी आराम होता है।
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

Friday, May 15, 2015

मुंह के छाले के लिए करे ये उपाय -

जीवन में लगभग सभी  को कभी न कभी एक बार मुंह में छाले अवश्य ही हुआ होगा ,इसका दर्द तो केवल वही जानता है, जिसे कभी मुँह में छाले हुए हों-



मुँह में छाले होने पर तेज जलन और दर्द होता है, कुछ भी खाना या पीना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों को तो भोजन नली तक में छाले हो जाते हैं।


मुँह में छाले होना एक सामान्य तकलीफ है, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाती है। कुछ लोगों को ये छाले बार-बार होते हैं और परेशान करते हैं। ऐसे लोगों को अपनी पूरी डॉक्टरी जाँच करानी चाहिए, ताकि उनके कारणों का पता लगाकर उचित इलाज किया जा सके।

मुँह में छाले होने के कोई एक नहीं, अनेक कारण हैं। जरूरी नहीं कि जिस कारण से किसी एक को छाले हुए हों, दूसरे व्यक्ति को भी उसी कारण से हों। कई बार पेट की गर्मी से भी छाले हो जाते हैं। अत्यधिक मिर्च-मसालों का सेवन भी इसके लिए जिम्मेदार होता है, क्योंकि यदि पेट की क्रिया सही नहीं है, तो उसकी प्रतिक्रिया मुँह के छाले के रूप में प्रकट होती है।

भोजन में तीखे मसाले, घी, तेल, मांस, खटाई आदि अधिक मात्रा में खाने से पेट की पाचनक्रिया खराब हो जाती है जिससे मुंह व जीभ पर छाले पड़ जाते हैं। पेट में कब्ज होने से या गर्म पदार्थ खाने से गर्मी के कारण मुंह में छाले, घाव व दाने निकल आते हैं। ये छाले लाल व सफेद रंग के होते हैं। मुंह में छाले हो जाने पर मुंह में बार-बार लार आता रहता है। कभी-कभी मुंह के छालों से पीब भी निकलने लगती हैं। मुंह को ढकने वाली झिल्ली लाल, फूली और दर्द या जख्म से भरी होती है। इसमें जीभ लाल, फूली हुई और दांत के मसूढ़े फूले हुए होते हैं। तालुमूल में जलन होती रहती है। इस रोग में भोजन चबाने पर छाले व दानों पर लगने से दर्द होता है। पानी पीने व जीभ तालू में लगने से तेज दर्द होता है।

जब पेट के अंदर गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है तो जीभ की ऊपरी परत पर छाले उभर आते हैं। ऐसा उस दशा में होता है जब हम खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं। गर्म पदार्थों में आलू, चाट, पकौड़े, अदरक, खट्टी मीठी चीजें, अरहर या मसूर की दाल, बाजरे का आटा आते हैं। कभी-कभी शरीर भोजन को ठीक से नहीं पचा पाता है। तब आंतों में अपच का प्रदाह उत्पन्न हो जाता है। यदि हम किसी कारणवश मल-मूत्र को रोके रहते हैं तो तब मल दुबारा पचने लगता है और आंतों में सड़न क्रिया आरम्भ हो जाती है। इन सभी कारणों से जीभ पर छाले पड़ जाते हैं। इन छालों में असहनीय दर्द होता है लगता है जैसे कांटे चुभ रहे हों। मिर्च-मसालेदार चीजें खाने पर इनमें असहनीय दर्द होने लगता है तथा भोजन करना मुश्किल हो जाता है। साधारण भाषा में इसे मुंह का आना कहते हैं। इसके लिए धनिये का मिश्रण बहुत ही लाभकारी इलाज होता है।

इस रोग मे जीभ, तालु व होठों के भीतर छोटी-छोटी फुंसियां या छाले निकल आते हैं। ये दाने लाल व सफेद रंगों के होते हैं। इस रोग में मुंह में लार बार-बार आती है। मुंह में छाले होने पर मुंह से बदबू आने लगती है, छालों में जलन होती है तथा सुई चुभने की तरह दर्द होता है। मुंह में छाले होने पर भोजन करने में कठिनाई होती है। बच्चों के मुंह में छाले होने पर लाल छाले, जीभ लाल व होठ के भीतरी भाग में लाल-लाल दाने निकल आते हैं।

दांतों में गंदगी से भी मुंह में छाले पैदा हो जाते हैं अत: दिन में 2 से 3 बार दांत साफ करना जरूरी है। भोजन में लालमरसा का साग खायें। मुंह के छाले होने पर 2 केले रोजाना सुबह दही के साथ खायें। छाले होने पर टमाटर अधिक खाने चाहिए। ठण्डी फल व सब्जियां खायें। पेट की कब्ज खत्म करने के लियें सुबह 1 गिलास पानी शौच जाने से पहले पीने से लाभ होता है। भोजन में अधिक तेल, मिर्च, मांस, तेज मसाले व गर्म पदार्थ न खायें। पेट में कब्ज होने पर छाले बनते हैं। पेट में कब्ज को बनाने वाले कोई भी पदार्थ न खाएं। अधिक गरिष्ठ भोजन न करें। चाय, शराब, बीड़ी-सिगरेट या किसी भी नशीली चीज का सेवन न करें।

एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) की वजह से भी मुँह में छाले हो सकते हैं, विशेषकर लंबे समय तक एंटीबॉयोटिक दवाओं का इस्तेमाल करने से। अधिक मात्रा में एंटीबॉयोटिक का इस्तेमाल करने से हमारी आंतों में लाभदायक कीटाणुओं की संख्या घट जाती है। नतीजतन मुँह में छाले पैदा हो जाते हैं।

करे ये उपाय :-


नमक और बेकिंग सोडा को चुटकी भर पानी मिलाएं और छाले पर लगाकर 10 मिनट तक छोड़ दें। इसके बाद पानी से कुल्ला करें।

अमरूद के पत्तों का पेस्ट बनाकर छाले पर लगाएं, इससे तुरंत आराम मिलेगा।

आंवला को उबालकर पेस्ट बनाएं और छाले पर लगाएं। छाला जल्दी ठीक होगा।

नारियल पानी न सिर्फ पेट के लिए अच्छा है बल्कि छालों के दर्द में भी आराम देता है और मुंह को ठंडक पहुंचाता है।

शहद में केला मिलाकर खाने से भी मुंह के छाले जल्दी ठीक होते हैं और दर्द कम होता है। बहुत अधिक तकलीफ पर इनका पेस्ट बनाकर भी लगाया जा सकता है।

कैमोमाइल नींद उत्प्रेरण करता है और लोगों को मुंह के अंदर छालों के दर्द को महसूस करना भुला देता है । १ मिनट के लिए पानी में इस चाय की बैग भिगोकर छालों पर ५-१० मिनट के लिए रख दें ।

लाल मिर्च में कप्सैसिन की उपस्थिति गर्म होती है। लेकिन यह घटक शरीर के भीतर दर्द प्रतिक्रियाओं को कम करता है। यह घटक नासूर घावों के लिए अद्भुत उपाय माना जाता है।लाल मिर्च का पाउडर १ चम्मच गर्म पानी में मिलाएं । इसमें रुई को  डुबोकर प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। राहत पाने के लिए दिन में २-३ बार इस्तेमाल करें ।

दही किण्वित दूध से बनाया गया है| उसके कार्बोहाइड्रेट कार्बनिक अम्ल में बदलने से आप कीटाणुओं से समृद्ध पदार्थ प्राप्त करते हैं। दही विविध रोगों के इलाज के लिए प्रयोग किया जाता है। मुंह के छाले और नासूर दही खाने से खत्म किये जा सकते हैं । दही का १ बड़ा चम्मच दिन में ३ बार खाएं ।

एक  बड़ा चम्मच मधुमक्खी के छत्ते का मोम पिघलाकर २ बड़े चम्मच नारियल तेल के साथ मिलाएं और दिन में २ से ३ बार छालों पर लगायें ।

बेनाड्रिल और मालोक्स का १ हिस्सा मिलाकर कुल्ला करके थूक दें ।

विटामिन ई कैप्सूल का तेल दिन में कई बार लगाने से छाले कम होते हैं ।

सौंफ को मुंह में रखकर चबाने से मुंह के छाले, पीब और दाने आदि खत्म हो जाते हैं।

भोजन करने के बाद थोड़ी सौंफ खाने से मुंह में नए छाले नहीं होते हैं।

सौंफ का चूर्ण बनाकर छालों पर लगाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

जिन लोगों के मुंह में छाले अक्सर होते रहते हैं वे खाने के पश्चात थोड़ी सौंफ खाया करें तो उनके मुंह में छाले नही होते हैं।

छोटी हरड़ को बारीक पीसकर छालों पर दिन में दो तीन बार लगाने से मुंह तथा जबान दोनों के छाले ठीक हो जाते हैं।

तुलसी की चार पांच पत्तियां रोजना सुबह और शाम को चबाकर ऊपर से थोड़ा पानी पी लें( ऐसा चार पांच दिनों तक करें) ।

करीब दो ग्राम सुहागे का पावडर बनाकर थोड़ी सी ग्लिसरीन में मिलाकर छालों पर दिन में दो तीन बार लगाएं छालों में जल्दी फायदा होगा।

उपचार और प्रयोग -

Sunday, May 10, 2015

सावधान लडकियों जब आप डेटिंग पे जाती है ....!

* आज के प्रचलित स्मार्ट फेशन में कालेज के लड़के- लड़कियां  अपने -अपने बॉय फ्रेंड के साथ डेटिंग पे जाती  है माँ -बाप अगर समझाए तो ओल्ड हो कह कर उनका मुंह करा देना और न समझना कभी -कभी उनको मुसीबत में डाल सकता है पच्क्षिमी सभ्यता का इतना बोल बाला हो गया है कि आज भारत की संस्कृति उनको वाहियात लगती है ,आजकल के बच्चे समझाने पे अपने बुजुर्गो का मजाक उड़ाते नजर आते है -वो ये समझते है कि हम पढ़ लिख चुके है और ज्ञानवान बन गए अब किसी के सलाह की जरुरत ही  नहीं है -उनका सोचना गलत है -अनुभव उम्र के उस पड़ाव से मिलता है जहाँ आज आपके बुजुर्ग है  .

* अभी भी आप सच्चे प्यार से नदारत हैं, अपने साथ एक हमसफर को खड़ा देखना चाहते हैं, तो माउस के कुछ क्लिक से आप अपने जीवनसाथी से मिल सकते हैं। विज्ञान और टैकनोलजी के ज़रिए सच्चा प्यार पाना अब आसान हो चुका है। इंटरनेट के ज़रिए उस ख़ास शख़्स को ढूंढ़ने की प्रकिया को Online Dating (ऑनलाइन डेटिंग) कहते हैं। आज से 15 साल पहले, अप्रैल 1995 में सबसे बड़ी ऑनलाइन डेटिंग साइट लॉन्च हुई थी और आज सिर्फ 90 मिलियन अमेरिकी ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की जनता भी डेटिंग के पुराने तौर-तरीकों को छोड़कर ऑनलाइन डेटिंग के ज़रिए अपना पार्टनर तलाश रही है।

* अगर आप भी इसी दौड़ में शामिल हो चुकी है तो फिर पढ़े ये लेख और रक्खे सावधानी ...!

* क्या आपको पता है कि ये लड़के कितनी हँसी उड़ाते हैं जब डेट पर तुमसे मिलकर आते हैं।

अगर जा ही रही है तो फिर कुछ बातो का ध्यान ही रक्खे :-
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* सबसे पहले जानने का प्रयास करे आपके डेटिंग पार्टनर कि च्वाइस क्या -क्या है .

* लड़कों को सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर आता है कि लड़कियाँ उन्हें बदलने की कोशिश करती है। जब पहली बार उनके साथ हों या अकेले में क्वॉलिटी टाइम बिताएँ तब बात-बात पर मत टोकिए। उन्हें ऐसा न लगें कि आप उनकी टीचर हैं। वे चाहते हैं कि जैसे वे हैं, वैसे ही उन्हें स्वीकार किया जाए। भले ही यह बात वे खुलकर न कह पाएँ।

*  डेट का मतलब, शिकवे-शिकायत, लड़ाई-झगड़ा़ रूठना-मनाना तो कतई नहीं है। बड़ी मुश्किल से आप दोनों अपना समय चुरा कर एक-दूजे से मिलने पहुँचे हैं। अगर एक-दूसरे के विरूद्ध ढेर सारी बातें कहने की हैं भी तो अंदाज सॉफ्ट रखिए। हो सकें तो अपनी बात को कुछ यूँ रखिए कि 'देखो, उस दिन तुमने जो किया उस पर मुझे कुछ कहना है लेकिन मैं नहीं चाहती कि अपनी डेट खराब हो इसलिए आज उस बात को मैं पेंडिंग रख रही हूँ पर हाँ नेक्स्ट टाइम अगर यह रीपिट हुआ तो शायद डेट पर ही लड़ बैठूँ।

* एक ही डेट पर जमाने भर की पोटली खोलकर ना बैठ जाएँ। हर डेट के लिए कुछ नया होना चाहिए। अपनी उलझनों को तब ही रखें जब वह आपसे पूछे। उसे सुनिए ज्यादा और बोलिए कम। एकदम चुप्पी भी अच्छी नहीं। पर हाँ, हर बार का डोज डिसाइड होना चाहिए। स्माइल भी बिना मतलब ना खर्च करें संतुलित और संयमित स्माइल का जादू देर तक रहता है। बिना मतलब की हँसी वह झेल तो लेगा लेकिन कहीं ना कहीं आपको लेकर वह शंकित हो सकता है कि आप नकली तो नहीं?

* जाने से पहले सबसे पहली बात ध्यान में रखें कि आप ज्यादा थके हुए न हों। इससे बचने के लिए भरपूर नींद लें। यदि कहीं लांग ड्राइव पर जा रहे हैं तो पूरी तरह से पैक होकर जाएं। ध्यान रखें कि ज्यादा लंबी दूरी तक ड्राइव न करना पड़े नहीं तो आप थक जाएंगे।

* यदि आप प्यार करती भी हैं और नहीं भी करती हैं। यह कभी हाँ, कभी ना वाली सिचुएशन लड़कों को इरिटेट करती है। एक बार अगर स्वीकार कर लिया कि दोनों के बीच प्यार-व्यार जैसा कुछ है तो फिर डाइलेमा क्रिएट ना करें। बीच-बीच में यह ना दर्शाएँ कि गलत निर्णय ले लिया है, चलो फिर लौट चलें पीछे। जब डेट पर जाएँ तब पूरे होशोहवास में उसी समय में रहें। यह नहीं कि फ्यूचर की बिना मतलब की चिंता में सारी डेट का सत्यानाश कर बैठें। फ्यूचर की चिंता जरूरी है लेकिन उसके लिए बेचैनी ना जताएँ बल्कि पूरी गंभीरता से सोचें अपने पार्टनर को परखें।

* जहां तक हो सके कपड़ों के चयन में सावधानी बरतें। ऐसा कुछ न पहनें जिससे आपको परेशानी हो, न ही ऐसा कुछ पहनें जिससे आपको शर्मिदगी उठानी पड़े। साथ ही कपड़ों के रंग का चयन करते समय ये ध्यान रखें कि आपके पार्टनर को कौनसा रंग पसंद है। निश्चित ही ये बहुत छोटी सी बात है लेकिन इसे आप खुद ही महसूस करेंगे, जब उनका पसंदीदा रंग पहनकर उनसे मिलेंगे.

* डेटिंग के लिए स्थान का विशेष ध्यान रखें। किसी भी ऐसी जगह पर डेट के लिए न जाएं जो वीरान हो और न ही किसी ऐसे सार्वजनिक स्थल का चयन करें, जहां परिवार के लोग आते हों क्योंकि इससे बार-बार उनकी नजरें तो आपको भेदेंगी ही आप भी उनकी उपस्थिति के कारण बातचीत में व्यवधान पाएंगे।

* आपस में बातचीत करते समय अपनी आवाज को कंट्रोल में रखें। जोश में आकर जोर-जोर से न बोलने लगें और न ही इतना धीमे बात करें कि आपके पार्टनर को ही सुनाई न दे।

*  ये सही है कि आप उनसे मिलने के लिए बहुत बेताब हैं और उन्हें प्रभावित करने के लिए काफी अच्छे से तैयार भी हो रही हैं लेकिन इस बात को न भूलें कि उनके अलावा भी कई सारी नजरें आपको देखेंगी। इसलिए अपने मेकअप पर ध्यान दें। भड़कीला मेकअप आपके साथी को  भी पसंद नहीं होगा।

* आपको सुंदर दिखना सबसे जरूरी है। इसका यह मतलब नहीं कि पूरा मेकअप करके जाएं। अगर आपकी आंखें अच्छी हैं तो उन्हें उभारें। अगर होंठ या गाल अच्छे हैं तो उन्हें उभारें। मस्कारा जरूर लगाएं। लेकिन हां आखों पर इतना काजल भी ना लगा लें कि भूतनी दिखने लगें.

* बहुत कसे या ढीले कपडे पहनकर न जाएं। शालीनता स्त्री का आभूषण है। इस बात का ध्यान रखें। पहली ही मुलाकात में अपने इस आभूषण को उतारने की कोई जरूरत नहीं

* डेट का समय कम रखें। ताकि वह आपमें अधिक रुचि ले और अधिक जानकारी के लिए दूसरी डेट के लिए आपसे गुजारिश करे। यानि कि पहली बॉल पर वह चौका मारना भी चाहे तो उस तक बॉल को पहुंचने ना दें.

* अपने डेट के पूरे व्यक्तित्व के बारे में जानने की कोशिश करें। उससे यह मालूम करें कि उसे क्या पसंद है और क्या नापसंद। लेकिन हां अपने बारें में सस्पेंश बनाएं रखे ठीक वैसे ही जैसे कि राम गोपाल वर्मा की फिल्मों का सस्पेंस फिल्म् खत्म होने के बाद भी नहीं खुलता.

* यह जानने की कोशिश करें कि उसका स्त्रियों के प्रति क्या दृष्टिकोण है। वह उनका कितना सम्मान करता है।

* अपनी बॉडी लैंग्वेज पर विशेष ध्यान दें। शालीनता से बैंठें। मतलब ज्यादा हाथ पांव ऊपर नीचे ना करें, आंखो को ध्यान से इधर-उधर करें.

* वह अगर आपको किसी एकांत जगह डेट के लिए बुलाता है तो कोई बहाना बना कर उसे मना कर दें। एक बात अच्छी तरह से याद रखें कि लड़के चाहे कितने भी अलग बनें लेकिन होते एक से है और अकेले में लड़की मिलने पर ना चाहते हुए भी उनमें एक जानवर आ ही जाता है J

* अगर आप शेप में नहीं है तो जिम जरूर जाएं, ताकि उस दिन आप फिट और आकर्षक नजर आएं। लडके दिमाग के साथ-साथ लडकी की अच्छी फिगर पर भी ध्यान देते हैं। वैसे ज्यादातर लड़के लड़कियों में दिमाग खोजते ही नहीं हैं इसलिए अगर सिर्फ फिगर मैंटेन रखोगी तो भी काम चल जाएगा.

* डेटिंग के दौरान अपने किसी ब्वॉयफ्रेंड का जिक्र भूल कर भी न करें। न ही अपनी पहली डेट का विवरण दें। लडकों को ये बातें अच्छी नहीं लगतीं।

* आप में आत्मविश्वास झलकना जरूरी है, लेकिन यह न दर्शाएं कि आप जरूरत से ज्यादा बोल्ड हैं। इस बात का ध्यान रखें कि लडके इसका गलत फायदा भी उठा सकते हैं।

*  घर से निकलने से पहले अपनी किसी खास सखी या जिम्मेदार रिश्तेदार को बता कर जाएं कि आप किससे मिलने और कहां जा रही हैं। साथ ही कितने बजे वापस आएंगी.. लेकिन हां ऐसी सहेली को भी ना बताएं जो आपसे पहले लड़के से मिलने चली जाए या ऐसे रिश्तेदार को भी ना बताएं जो आपके घर में बता दे. दोनों ही कंडिशन में आपकी डेट पर सुनामी का पानी फिर जाएगा.

* अगर डेट के दौरान लडका पॅजेसिव नजर आए तो तय कर लें कि दोबारा उससे नहीं मिलेंगी।

* किसी भी शादीशुदा पुरुष के साथ डेट पर भूलकर भी न जाएं। क्योंकि वह डेट को मौज-मस्ती या टाइम पास के तौर पर लेगा। वह आपके लिए अपनी पत्नी को छोडने या दापंत्य जीवन को संकट में कभी नहीं डालेगा।

* बातें, बातें और बातें... यही तो उद्देश्य है आपकी डेट का। लेकिन ऐसा नहीं हो कि आपमें से कोई एक अपनी कहता रहे और दूसरा सुनता रहे। दोनों के पास ढेरों बातें होंगी एक-दूसरे को बताने के लिए। इसलिए अपने साथी को भी कुछ कहने दें।

* उपहार वो जरिया हैं जिनसे आप अपने प्यार को और भी अच्छी तरह से जता सकते हैं लेकिन ये जरूरी नहीं कि हर बार उपहार दिया जाए। आपके बीच कुछ बातें ऐसी हो सकती हैं, जो अपने आप में किसी उपहार से कम न हों।

सिर्फ एक दिन ही मदर डे ....?

* क्या हमारी संस्कृति इतनी बेकार और पुरानी हो गई है कि हम अपनी भी माँ को सिर्फ एक दिन याद करेगे बाकी दिन गर्ल फ्रेंड के है -शर्म आने लगी है हमें उन आज के नौजवान पीढियों पे - जब वो जानते ही नहीं कि विदेशो में ये पक्छिमी सभ्यता का विकास वहां क्यों हुआ था ...?

* विदेशो में जो कल्चर है उसमे जाके देखे तो समझ आ जाएगा कि वहां मदर डे और फादर डे क्यों मनाते है ...?

* वहां शुरू से बच्चो को शिक्षा के लिए जन्म के बाद सरकार  की खुद की  या माँ-बाप सर्विस के कारण अपने बच्चो को बोर्डिंग में भेज देते है जब बच्चा बड़ा होता है वो भी दिन रात इतना काम ,या प्राइवेसी में लगा रहता है कि उसके पास अपने ही माँ -बाप के लिए समय नहीं होता है .तो वो जब साल में एक बार उनको सम्मान देने के लिए एक दिन बना देते है और जाके उनको बधाई दे आते है .

* जबकि भारत में माँ के रिश्ते का एक अटूट बंधन है हमारी माँ जो गाय से लेके जगत्जननी के रूप में भी इस संसार में पूजी जाती है तो फिर अपनी जन्म देने वाली माँ के लिए एक दिन क्यों नियत करते जा रहे है -क्या इसी तरह हम अपनी संस्कृति को हमेशा के लिए गर्त की गोद में नहीं डाल रहे है .

* माँ का प्यार भरा आँचल और उसका  वो लाड-दुलार ,हमारी छोटी बड़ी सभी इच्छाएँ वह चुटकियों में पूरी करने  के लिए सदा तत्पर ,अपनी सारी खुशियाँ अपने बच्चों की एक मुस्कान पर निछावर कर देने वाली ममता की मूरत माँ का ऋण क्या हम कभी उतार सकते है ..?

* दुनिया की हर माँ अपने बच्चे पर निस्वार्थ ममता लुटाते हुए उसे भरोसा और सुरक्षा प्रदान करती हुई उसे जिंदगी के उतार चढाव पर चलना सिखाती है । फिर हम क्यों एक दिन को मदर डे बनाने पे तुले है -कही येसा न हो कि आगे आने वाली आपकी नई पीढ़ी आपको भूल ही न जाए कि आप ही उसके माता-पिता हो ये तो आपके साथ भी हो सकता है -उस दिन के कष्ट का अनुभव करो कि आपको कितना बुरा लगेगा -तो भूल जाओ ये एक दिन विदेशी संस्कारों की देन और रोज मनाये -मदर डे-अपनी माँ के आँचल में ....!

* माँ ही  है जो इस दुनिया में आने से पहले ही अपने बच्चे के प्रेम में डूब जाती है,यही प्रेमरस अमृत की धारा बन प्रवाहित होता है उसके सीने में ,जो बच्चे का पोषण करते हुए माँ और बच्चे को जीवन भर के लिए अटूट बंधन में बाँध देता है |

* सोचो कि भारत की माताए भी सिर्फ एक दिन "सन डे" मनाने लग गई तो फिर आप विदेशो के सारे "डे" मानना भूल जायेगे ....!

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -