Friday, May 29, 2015

घर में निर्धनता है कही आप येसा तो नहीं करते है -

कुछ चीजे जो हम -आप जाने-अनजाने में ही कर जाते है -जिनके बारे में आपको जानकारी नहीं है  इसलिए हम आपको कुछ इस प्रकार की कुछ बातो से अवगत करा रहे है- जिनको समझे और अपनाए कि आप क्या न करे -





आप कही दांत से नाखून तो नहीं काटते है अगर येसा है तो बंद कर दे इससे दरिद्रता आती है और येसा व्यक्ति स्वास्थ्य से भी निर्बल होता है -

आप फटे हुए कपड़े न पहने ये भी दरिद्रता लाती है -

आप सांझ में न सोये ये भी आपके घर में दरिद्रता लाती  है -

आप टुटी हूई कन्घी से बाल न सँवारे यदि आपके घर में है तो तुरंत हटाये तथा घर में कूड़ा-करकट न रक्खे -

घर आये मेहमान पे आप नाराज न हो जिस प्रकार की श्रद्धा बन सके उसका स्वागत करे यदि ये मेहमान रोज-रोज आ जाने वाले बेशर्म टाइप के लोग हो तो आप फिर उनसे अपनी मदद करने की डिमांड करना शुरू कर दे वो बार-बार शर्मिंदा होगा और बेवजह आना छोड़ देगा - आपका समय भी खराब नहीं होगा -

औरतों को दरवाजे की देहरी पे खड़े-खड़े बालो को बांधना भी शुभ नहीं होता है -

पुरुष चालीस दिन से ज्यादा बाल न रक्खे बनवाते रहे -

रसोई घर के पास में पेशाब करना अन्नपूर्णा का अपमान है -

घर में टूटा हुआ सामान और बिखरा हुआ न रक्खे -

सुबह सूरज निकलने के बाद तक सोते,रहना नहीं चाहिए हमेशा सूर्य निकालने से पहले उठे  स्वयं की हथेली को सबसे पहले देखे और भूमि को प्रणाम करके ही भूमि पे अपना सबसे पहले दाहिना पाँव नीचे रक्खे पूरे दिन मन प्रसन्न रहेगा -

आमदनी से ज्यादा खर्च करना भी आपको परेशानी में डालता है इसलिए घर के खर्च का चार्ट बनाये और खर्च करे .यदि शादी शुदा है तो पत्नी से सलाह ले और अपनी सलाह और आमदनी का पूरा व्यौरा दे -

किसी भी पेड़ के नीचे पेशाब न करे अतृप्त आत्माओं का अपमान होता है .

दाँत से रोटी काट कर या खीच कर न खाए रोटी के निवाले को मुंह में तोड़ कर डाले .

पलंग या चारपाई के सिरहाने की तरफ ही सर रख कर सोना चाहिए उल्टा न सोये .

श्मशान भूमि में या जिसके भी गमी में जाए शांत रहे बेमतलब लोगो से बात न करे .शमशान भूमि में हंसना भी उपयुक्त नहीं होता है .

रात में पीने के पानी को हमेशा ढक कर रक्खे खुला न छोड़े .इसका वैज्ञानिक एवं सांसारिक दोनों कारण है .

धर्मग्रन्थ को पवित्रता से ही पढ़ना चाहिए और पूजा करते वक्त बाते न करे .

बिना हाथ धोये खाना नहीं खाना चाहिए ,खड़े-खड़े खाना भी उचित नहीं है शरीर में रोगों की प्रधानता होती है अगर आपको शादी -पार्टी में मज़बूरी में खाना भी पड़े तो कोशिस करे कि आपको बेठने का स्थान मिल जाए और भोजन बेठ के करना चाहिए आपको गुठने की दर्द की शिकायत नहीं होगी .

आप कभी भी लहसुन और प्याज के छिलके न जालाये .

अपनी औलाद को न कोसे - न जाने कब आपकी आत्मा से निकली आवाज से उसका अहित हो जाए -

फूंक मार के दीपक को कभी भी नहीं बुझाना चाहिए -

जब भी भोजन करे इश्वेर को धन्यवाद दे -हो सके तो पहला कौर भगवान् को अर्पित करके ही भोजन करे और उस कौर को शुद्ध स्थान पे रख दे जहाँ से कोई भी जीव उसे खा सके -

बात -बात में गलत होने पे झूठी कसम न खाए .

जूते या चप्पल को उल्टा देखे तो तुरंत सीधा कर दे और जूते या चप्पल को एक के ऊपर रखने से बचे उनको हो सके तो कमरे में न लाये इससे नकारात्मक उर्जा घर में नहीं आती है -

वर्जित या प्रदोष काल में हजामत न कराये .

घर में मकड़ी का जाला लगने पे हटा देना चाहिए .और रात को कभी भी घर में झाड़ू न लगाए अगर मज़बूरी में लगाना भी पड़े तो कूड़ा बाहर न निकाले एक कोने में कर दे और सुबह जब झाड़ू लगाये तब उसे साथ में उठा ले .

अँधेरे में भोजन नहीं करना चाहिए और घड़े में कभी भी मुंह लगा के पानी न पिए -

भिखारी या मांगने वाले से कभी किसी भी वस्तु को न ले न ही खरीदे -

इस प्रकार बहुत सी बाते है लेकिन आज-कल के लोग इसे अंधविश्वास ही समझते है जबकि हर चीज का एक वैज्ञानिक कारण होता है -

उपचार और प्रयोग -

Thursday, May 28, 2015

भूंख न लगना भी एक समस्या है करे ये प्रयोग -

आजकल भूख न लगने की समस्या एक गंभीर रोग की तरह होने लगी है, और लोग भूख बढ़ाने के लिए तरह तरह के सप्लीमेंटस लेने लगते हैं जो शरीर और स्वास्थ दोनों के लिए खतरनाक है-




पाचन तंत्र में किसी गड़बड़ी के कारण भोजन न पचने को अजीर्ण या अपच कहते हैं | कई बार समय-असमय भोजन करने से,कभी-भी,कहीं-भी,कुछ-भी खाने-पीने तथा बार-बार खाते रहने से पहले खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता है और दूसरा भोजन पेट में पहुँच जाता है | ऐसे में पाचनतंत्र भोजन को पूर्ण रूप से नहीः पचा पाता जो अजीर्ण का मुख्य कारण है | अधिक तला-भुना या मिर्च मसाले युक्त भोजन के सेवन से भी अजीर्ण या अपच हो जाता है | इस रोग में रोगी को भूख नहीं लगती,खट्टी डकारें आती हैं,छाती में तेज़ जलन होती है,पेट में भारीपन महसूस होता है तथा बैचैनी सी होती रहती है |

अनियमित दिनचर्या व खान-पान के कारण कब्ज व एसिडिटी की समस्या हो जाती है। ऐसे में इन प्रॉब्लम्स के कारण धीरे-धीरे भूख कम होने लगती है। भूख कम होने से शरीर को पर्याप्त व जरूरी आहार नहीं मिल पाता, जिसके कारण अन्य रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। अगर आप भी भूख न लगने या कम भूख लगने की समस्या से परेशान हैं.

भूख न लगने को कारण:-


* अधिक चटपटे और फास्ट फूड़ का सेवन करना।
* जरूरत से ज्यादा मीठा अपने खाने में करना।
* चाय व काॅफी का सेवन ज्यादा करना।
* अचार और खट्टा भोजन करना।
* रात में देर तक जागना।
* ज्यादा तेल, घी में तले भोजन का सेवन करना।
* किसी के ख्यालों में खोये रहना।
* शाररिक श्रम न करना।

 * ये मुख्य कारण होते हैं भूख न लगने के। आखिर कौन से उपाय हैं जो आपकी भूख की क्षमता को बढ़ायेगें।

आप आजमाए ये नुस्खे:-


1- एक गिलास गर्म पानी में खाने वाले सोड़े की आधी चम्मच मिलाकर पीते रहें, एैसा करने से ज्लद ही भूख न लगने की समस्या दूर होगी। भूंख लगना शुरू होने पे बंद कर दे .

2- यदि भूख कम लगती है तो आप अदरक, नींबू, भुना जीरा और काला नमक को मिलाकर चटनी बनायें और इसका सेवन करें।

3- सलाद में अदरक के छोटे-छोटे टुकड़ों को काटकर उन पर नमक और नीबू  लगाकर इसे खाना खाते समय जरूर खायें। यह आपकी भूख की क्षमता को बढ़ायेगा।

4- 30 ग्राम पानी में हरे धनिये का रस मिलाकर रोज पीते रहने से थोड़े ही दिनों में भूख न लगने की बीमारी दूर होने लगती है।

5- अजवायन -200 ग्राम , हींग -4 ग्राम और कालानमक -20 ग्राम को एक साथ पीसकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण 2 -2 ग्राम की मात्रा में सुबह -शाम गुनगुने पानी से खाने से लाभ होता है |

6- मेथी को पीस कर चूर्ण बना लें | इस चूर्ण को दिन में तीन बार 1-1 चम्मच गर्म पानी से खाने से अपच , पेटदर्द व भूख न लगना आदि दूर होता है |

7- अजवाइन को सेकें और उसे पीसकर उसका चूर्ण बनायें फिर उसमें थोड़ा सा नमक मिलाकर खाना खाने के बाद एक चुटकी मुंह में रखें। यह भूख बढ़ाने का कारगर वैदिक उपाय भी है।

8- भोजन करने से पहले यदि आप 1 चम्मच अदरक का रस और 1 चम्मच नींबू का रस और थोड़ा-सा काला नमक को पानी में घोलकर पीतें रहना चाहिए।

9- काली मिर्च को पीसकर चूर्णं बनायें और उसमें थोड़ा नमक मिलाकर मूली पर लगायें, और इसे भोजन के समय खायें।

10- हरड़ , पिप्पली व सौंठ बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण 3 -3 ग्राम दिन में दो बार , पानी के साथ सेवन करने से अजीर्ण में लाभ होता है |

11- अनार, मैथी, पपीता, बेर, अमरूद, चावल आदि को अपने भोजन में किसी न किसी तरह लेते रहें।

12-धनिये, नींबू और अदरक की मिक्स चटनी बनायें और इसे डेली अपने खाने में इस्तेमाल करने से भूख बढ़ती है।

13- रात में सोते समय आंवला 3 भाग, हरड़ 2 भाग तथा बहेड़ा 1 भाग बारीक चूर्ण करके एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेने से सुबह पेट साफ हो जाता है और भूख खुलकर लगती है।

14- खाना खाने के बाद अजवाइन का चूर्ण थोड़े से गुड़ के साथ खाकर गुनगुना पानी पीने से भोजन आसानी से पच जाता है व नियत समय पर भूख लगती है और खाने में रुचि पैदा होती है।

15- भोजन के एक घंटा पहले एक चम्मच पंचसकार चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से भूख खुलकर लगती है।

16-छाछ गरिष्ठ वस्तुओं को पचाने में बहुत लाभकारी होता है | छाछ में सेंधा नमक , भुना जीरा तथा कालीमिर्च मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण रोग दूर होता है |

इन उपायों को करने से आपकी भूख न लगने की समस्या दूर होगी।

उपचार और प्रयोग -

उत्साहहीन महसूस करते है मालकांगनी प्रयोग करे- Used Malkangni Feel tepid

बाजार मे मिलने वाले जीतने भी टॉनिक है (च्यवन प्राश, होर्लिक्स, बोर्नविटा, बूस्ट, बॉडी बिल्डिंग के सप्लीमेंट्स आदि ) यदि उन सब को भी बराबर मे रख दिया जाए तो हजारो रुपए के ये टॉनिक मालकंगनी के सामने कुछ नहीं। सर्दी मे इसके समान टॉनिक दूसरा कोई नहीं है। गरीब के लिए सोना चांदी च्यवनप्राश से हजार गुना बेहतर है तो पढे लिखे मूर्ख के लिए होर्लिक्स से हजार गुणा गुणकारी है -




यह एक पौधे के बीज हैं जो पूरे भारत मे सभी जड़ी बूटी वाले के यहाँ आसानी से मिल जाते हैं। इनमे एक गाढ़ा गहरे पीले रंग का तेल होता है। यह बहुत कड़वा होता है। बाजार मे मिलने वाले अधिकांश मालकंगनी के तेल नकली हैं। हमदर्द कंपनी इसे रोगन मालकंगनी के नाम से बेचती है। यह भी सभी आयुर्वेदिक दवाई बेचने वालो की दुकान पर मिलता है। ये 100% सुरक्षित और शुद्ध है।

बाजार मे यह बीज व तेल के रूप मे मिलती है। इन दोनों के गुण समान हैं। क्योंकि तेल बहुत कड़वा होता है इसलिए बीज का ही प्रयोग अधिक किया जाता है। इसके 1 बीज मे 6 छोटे बीज होते हैं। इसलिए जब मात्रा 1 बीज कही जाए तो उसका अर्थ है चने के आकार का बीज जिसमे 4-6 छोटे बीज होते हैं। इसका संस्कृत नाम ज्योतिष्मति है ...

उपयोग :-


इसका सबसे बड़ा उपयोग है आयुर्वेद मे जो बुद्धि बढ़ाने वाली दवाइयाँ हैं उनमे यह मालकंगनी भी है। विद्यार्थियो के लिए सर्दी मे यह अमृत है। च्यवन प्राश, कोड लीवर आयल आदि इसके सामने कोई गुण नहीं रखते। प्राचीन वैद्यो ने इसके स्मृति ,याददाश्त, मेमोरी बढ़ाने वाले गुण की बहुत प्रशंसा की है। इसका प्रभाव बढ़ाने के लिए इसके साथ साथ शंखपुष्पी चूर्ण का प्रयोग किया जा सकता है. 5 साल से लेकर 100 साल तक का कोई ही व्यक्ति इसका प्रयोग कर सकता है। मानसिक कार्य करने वालो के लिए गुणकारी है। वृद्धावस्था मे जब स्मृति भ्रंश (Alzimar’s Disease) हो जाता है तब भी यह काम करती है। जो व्यक्ति अपनी इच्छा से नशा छोडना चाहते हैं उन्हे भी इसका उपयोग करना चाहिए। इससे मानसिक शक्ति बढ़ती है और नशा छोडने से होने वाले दुष्प्रभावो मे कमी आती है।

डिप्रेशन जैसे मानसिक रोगो मे इसका बहुत अच्छा प्रभाव है। डिप्रेशन जैसे अनेक मानसिक रोगो मे मालकंगनी से तत्काल लाभ होता है। मनोरोग की एलोपैथी दवाइया प्रायः नींद को बढ़ाती है, परंतु यह नींद को सामन्य ही रखती है। सभी साइकोएक्टिव दवाइया (मानसिक रोगो की अङ्ग्रेज़ी दवाइया) सुस्ती लाती है, आँख, कान की शक्ति को कम करती है कमजोरी लाती है और खून की कमी कर देती है परंतु इसमे एसी कोई समस्या नहीं है। इसका प्रभाव बढ़ाने के लिए इसके साथ साथ शंखपुष्पी चूर्ण का प्रयोग किया जा सकता है.पहले जाने डिप्रेशन क्या है ...?

अवसाद(डिप्रेशन) क्या है-

जीवन में कभी-कभार उत्साह हीन महसूस करना एक सामान्य बात है. लेकिन जब ये एहसास बहुत समय तक बना रहे और आपका साथ ना छोड़े तो ये depression या अवसाद हो सकता है. ऐसे में जीवन बड़ा नीरस और खाली-खाली सा लगने लगता है . ऐसे में ना दोस्त अच्छे लगते हैं और ना ही किसी और काम में मन लगता है. जीवन उद्देश्य रहित लगने लगती है और अच्छी बातें भी बुरी लगने लगती हैं. यदि आपके साथ भी ऐसा होता है तो घबराने की ज़रुरत नहीं है. ज़रुरत है डिप्रेशन के लक्षणो और कारणों को समझने की और फिर उसका इलाज करने की.

हम सभी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं.कभी सफलता मिलने पर बहुत ख़ुशी मिलती है तो कभी असफल होने पे इंसान दुखी हो जाता है. कई बार लोग छोटे-मोटे दुःख को भी depression का नाम दे देते हैं, जो कि बिलकुल गलत है. यह सामान्य उदासी से बहुत अलग होता है. आइये इसकी परिभाषा को समझते हैं:

“अवसाद एक ऐसी मानसिक स्थिति या स्थायी मानसिक विकार है जिसमे व्यक्ति को उदासी, अकेलापन, निराशा, कम आत्मसम्मान, और आत्मप्रतारणा महसूस होती है ; इसके संकेत समाज से कटना ,और कम भूख लगना और अत्यधिक नीद आना या नींद बिलकुल ना आना में नज़र आते हैं.

यदि आपको नीचे दिए गए लक्षण आपके साथ मिलते दीखते हैं तो आपके डिप्रेशन मे होने की सम्भावना है:-

तो आपको नीद नहीं आती या बहुत अधिक नीद आती है.

आप ध्यान नहीं केन्द्रित कर पाते और जो काम आप पहले आसानी से कर लेते थे उन्हें करने में कठिनाई होती है.

आप आशाहीन और उत्साह हीन महसूस करते हैं.

आप चाहे जितनी कोशिश करें पर अपनी गलत सोच को नहीं रोक पाते हैं.

या तो आपको भूख नहीं लगती या आप बहुत ज्यादा खाते हैं.

आप पहले से कहीं जल्दी खीज जाते है या आक्रामक हो जाते हैं, और गुस्सा करने लगते हैं.

आप ज्यादा शराब पीते हैं.

आपको लगता है कि ज़िन्दगी जीने लायक नहीं है और आपके मन में आत्म हत्या के विचार आते हैं.

नजले जुकाम, बार बार होने वाले जुकाम, मौसम बदलते ही होने वाले जुखाम, सारी सर्दी बने रहने वाले जुकाम मे चमत्कार दिखाती है। जो भी नजले, जुखाम से परेशान है वह इसका प्रयोग जरूर करे। कुछ दिन प्रयोग करने से 1 साल तक समस्या से मुक्ति पा लेंगे। बहुत से व्यक्ति जिन्हे बड़े अस्पतालो के ENT के विशेषज्ञो ने कह दिया था कि सारी उम्र दवाई खानी होगी उन्हे इससे कुछ ही दिन मे मुसीबत से मुक्ति मिल गई । यह ना सोचे कि हमने तो बड़े अस्पतालो मे हजारो रुपए के टेस्ट करवा लिए हजारो की दवाई खा चुके हमे कुछ नहीं हुआ तो इससे क्या होगा। तो एक बार जरूर आजमाए। जो वैद्य केवल स्वर्ण भस्म, मकरध्वज, सहस्रपुटी अभ्रक भस्म और मृगाक रस जैसी कीमती दवाइयो को ही आयुर्वेद मानते है एक बार वह ही इसका चमत्कार देखे। जो इन महंगी दवाइयो से ठीक ना हुए हो वह भी इस मामूली सी दवाई से ठीक हो जाएगे।

जो व्यक्ति सर्दी मे प्रतिदिन सुबह घर से निकलते है वह इसका प्रयोग जरूर करे। जिसे सर्दी अधिक सताती है वह भी इसका जादू जरूर देखे। यह शरीर मे सर्दी सहन करने की क्षमता को बहुत अधिक बढ़ा देती है।

जो बहुत जल्दी थक जाते है जिसे लगता है आधा दिन काम करने के बाद ही सारा शरीर दर्द कर रहा है जो बार बार चाय पीकर थकावट को दूर करने की कोशिश करते हैं उनके लिए यह आयुर्वेद की संजीवनी बूटी है। 10 दिन प्रयोग करने के बाद शरीर मे थकावट महसूस नहीं होगी।

जिन्हे तनाव से या नजले से या किसी भी कारण से सिर मे दर्द रहता है वह भी इसके प्रयोग से लाभ उठाए।

यह पाचन शक्ति व भूख को बढ़ाती है। जो व्यक्ति इसका प्रयोग करे वह भोजन समय पर करे तथा चाय पीकर अपनी भूख को नष्ट ना करे नहीं तो यह लाभ के स्थान पर हानि करती है। इसके प्रयोग करने वाले को दूध घी का प्रयोग अधिक करना चाहिए

जो भी अपना वजन बढ़ाने के या जिम मे जाकर अपनी सेहत बनाने के इच्छुक हैं वह इसका प्रयोग जरूर करे। इसके साथ साथ अश्वगंधा, शतावरी आदि का प्रयोग इसके साथ करे। कोई भी स्टीरायड या सप्लीमेंट्स इसके बराबर स्टेमिना नहीं बढ़ाता। जो खिलाड़ी है या जिम मे जाते हैं वह इसके साथ शतावरी या अश्वगंधा का प्रयोग जरूर करे।

इसका प्रयोग श्वास,दमा(ASTHMA )मे भी किया है और बहुत गुणकारी पाया है परंतु इस रोग मे अधिक सावधानी की जरूरत है इसलिए आयुर्वेद से अनभिज्ञ को दमे मे इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

इसके प्रयोग की विधि इस प्रकार है :-


तेल केसे ले :-


एक बूंद से दस  बूंद तक दिन मे 2 बार। शुरु मे 1 बूंद ले बाद मे बढ़ाते हुए 10 बूंद तक लिया जा सकता है। अधिक मात्रा लेने से गर्मी लने लगती है। ध्यान दे यह बहुत ही कड़वा है। इसे चम्मच मे लेकर चाट ले ऊपर से दूध पी ले। यदि इसे 4 बूंद  देशी घी या बादाम रोगन मे मिलाकर प्रयोग किया जाए तो अधिक लाभ होता है और हानि की संभावना कम हो जाती है।

बीज खाने की  विधि :-


1-साबुत बीज 1 से 30 तक लिए जा सकते है। पहले दिन दूध से 1 बीज दूसरे दिन 2 बीज इसी तरह 30 बीज तक लिए जा सकते है। यदि  गर्मी लगे तो मात्रा कम कर दे.

2-इसके 100 ग्राम बीजो को 100 ग्राम देशी घी मे धीमी आग पर भून ले। ध्यान दे जल ना जाए। फिर पीस ले। 1/4 चम्मच से 2 चम्मच तक दूध से ले। छोटे बच्चो को मीठा मिलाकर भी दे सकते है।


अब जाने इसका प्रयोग किसे नहीं करना चाहिए :-


1-जिसे भी स्थायी एनीमिया (Anemia) है वह इसका प्रयोग बिलकुल ना करे नहीं तो बहुत नुकसान होगा। जैसे थेलिसिमिया, परनीसियस एनीमिया, सिकल सेल एनीमिया, एडिसन डीजीज आदि।

2-नव विवाहित पति पत्नी इसका प्रयोग ना करे। व्याभिचारी बदचलन युवक युवती भी इससे दूर रहे। इसके सेवन करते समय संयम की जरूरत है। संयमी को ही इसका पूरा लाभ मिलता है।

3-जिसे शरीर के किसी भी हिस्से से खून बहता है या 1 साल के अंदर इस समस्या से पीड़ित रहा है वह इसका प्रयोग ना करे।

4-जिसे पेट मे अल्सर या अम्लपित्त है वह प्रयोग ना करे।

5-जिसे 1 साल के भीतर पीलिया (हेपटाइटिस) हुआ है वह इसका प्रयोग ना करे।

6-जिसे गहरे पीले रंग का मल आता है और बार बार शौच के लिए जाना पड़ता है वह भी इसका प्रयोग ना करे।

7-जिसे KIDNEY गुर्दे का कोई रोग है या शरीर पर सूजन है वह भी इसका प्रयोग ना करे।

8-जिसे इस्नोफिलिया है वह भी इसका प्रयोग ना करे।

9-जिसके मुंह मे बार बार छाले हो जाते है जो एक्जीमा, सोराइसिस या खुजली से ग्रस्त हैं वह भी इसका प्रयोग ना करे।

10-मुझे गर्भवती स्त्री पर इसका कोई अनुभव नहीं है इसलिए गर्भवती इसका प्रयोग ना करे।

उपचार और प्रयोग -

हमारे जीवन का खान-पान बदल गया है....!

* आज हमें बाज़ार में शुद्ध वस्तुए प्राप्त नहीं होती है मिलावट के कारण इसका प्रभाव भी हमारे जीवन पे विपरीत असर डालता है -






* रोगों की संख्या में दिनों-दिन इजाफा हुआ है - इसलिए जब हम मार्केट से खाने-पीने की वस्तु खरीदे तो जांच परख के ले क्युकि दुकानदार हमें कोई वस्तु फ्री  में  नहीं दे रहा है - रिफाइंड तेल लेने जाओ -तो दुकानदार हमें वही चीज बेचना चाहता है जिसमे उसे जादा मुनाफा मिल रहा है वो उस चीज की इतनी तारीफ़  करेगा कि आपको असली वस्तु नकली नजर आने लगेगी -वो ये नहीं कहेगा कि इसमें हमें मुनाफा जादा  है -सबसे पहले रिफाइंड आयल से बचे -अगर खाना मज़बूरी है तो सिर्फ सूर्यमुखी या मोमफली का तेल ही सेवन करे -शुद्ध तो सिर्फ सरसों का तेल ही है वो भी अगर घानी का हो -क्युकि सरसों में भी मिलावट हो रही है इसमें भी बिनौला नामक चीज मिला देते है जो हमारे नेत्रों के लिए अहितकारी है ..!

* तेल का सेवन सब्जी में नाम मात्र और वनस्पति तेलों का प्रयोग भी कम करे ये आपको कोलेस्ट्रोल से बचाएगा .चावल बहुत ही चमकदार लेना -मतलब उसमे अब कुछ नहीं बचा है -मिल में इतनी पालिस की गई है कि अब आप सिर्फ भूसा ही खा रहे है -आटा भी छिलका उतारा आपके हेल्थ के लिए बेकार है उसमे जब फाइबर ही नहीं है तो कब्ज तो होगा ही -सफ़ेद रोटी बने इसलिए महिलाए प्रभावित होती है जबकि आप अपने पतियों और बच्चो को बीमार बना रही है इसमें आपका भी योगदान है -पहले स्त्रियाँ गेहूं लेके धोके चक्की में पिसवाया करती थी मगर अब "सीरियल" के लिए समय जादा  है इसलिए समय अभाव के कारण पेकिंग वाले आटे की  तरफ प्रभावित है -लेकिन आप ही अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं है ...

* अगर समझदार गृहणी है तो शुद्ध वस्तु भी खरीद सकती है और धन भी बचा सकती है ...हमेशा सीजन में कुछ वस्तुओ को खरीद लेना चाहिए उस समय सस्ता मिल जाता है -हल्दी,धनिया,लाल मिर्च,इत्यादि सीजन में लेके पिसवा ले शुद्ध भी  होगा और धन का अपव्यय भी नहीं होगा ..!

* सरसों का तेल सीजन में सरसों लेके उसका तेल भी निकालवा के हम रख सकते है - कुछ वस्तुओ से अगर हम बच सकते है तो फिर क्यों नहीं करते -बीमारियों से निजात के लिए अगर थोडा समय लगाना भी आवश्यक है तो हमें करना चाहिए - कम से कम डॉक्टर अपना नहीं तो शरीर तो अपना है .

* फास्ट फ़ूड कभी भी किसी भी कीमत पे आपके लिए लाभदायक नहीं हो सकता है इनसे बचना आपकी समझदारी है - स्मार्ट  बनो मगर आधुनिक युग में अपने शरीर को सुरक्षित रखते हुए -बाज़ार की वस्तुयों में प्रयोग होने वाला तेल बार-बार एक टेम्प्रेचर पे इतना गर्म हो जाता है कि उसमे तली गई वस्तु जहर में तली गई के सामान है जो हमें हानि पहुंचती है हमारे शरीर की सफ़ेद रक्त कणिकाओ  की जीवाणुओ से लड़ने की भी एक सीमा है -अगर वो सीमा ख़तम तो समझे आप भी .....!

* हमारे शरीर के आस पास हर समय करोडो बैक्टीरिया और वायरस मौजूद होते है. हमारे शरीर कि रोग प्रतिकार शक्ति / प्रतिरक्षा प्रणाली इन खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस से हमारे शरीर कि रक्षण करती है. आपने देखा होंगा कि, समान परिस्थिति में भी कुछ व्यक्ति अक्सर जल्दी बीमार हो जाते है तो कुछ व्यक्ति अच्छी रोग प्रतिकार शक्ति होने की वजह से लम्बे समय तक बीमार नहीं होते है. हमारे शरीर कि रोग प्रतिकार शक्ति कई चीजो पर निर्भर करती है जैसे कि हमारा खान - पान और हमारी जीवनशैली. शरीर को स्वस्थ और रोग मुक्त बनाने के लिए अच्छी सशक्त रोग प्रतिकार शक्ति होना बेहद आवश्यक है.

हमारे शरीर कि रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने के कुछ उपाय निचे दिए गए है:-
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* हमारे शरीर के साथ साथ हमारे शरीर के रोग प्रतिकार शक्ति के लड़ाकू लड़ाकू टी कोशिकाओं और मैक्रोफेज को भी नियमित पौष्टिक समतोल आहार कि आवश्यकता होती है. आपने देखा होंगे कि, समतोल आहार लेने वाले बच्चो कि तुलना में कुपोषित बच्चे जल्दी बीमार पड़ जाते है. शरीर कि रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने के लिए जिंक, आयरन, सेलेनियम, तांबा, फोलिक एसिड और विटामिन ए, बी -6, सी, ई जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों और विरोधी oxidants कि जरुरत होती है.

* आहार में ज्यादा प्रमाण में पौष्टिक फल, सब्जी और प्रोटीन युक्त चीजो का समावेश करे और वसायुक्त चीजे कम रखे.

आइये जाने आहार में कौन सी चीज कितनी मात्रा में लेना चाहिए:-
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बीटा कैरोटीन
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यह खुबानी (खुबानी), हरी फूलगोभी (ब्रोकोली), चुकंदर (बीट), पालक (पालक), टमाटर (टमाटर), मका (मकई) और गाजर (गाजर) में पाया जाता है.

सेलेनियम
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यह जौ (जई), प्याज (प्याज), सूर्यमुखी फूल के बिज (सूरजमुखी के बीज), कुकरमुत्ता (मशरूम), भूरे चावल (ब्राउन राइस), अंडा (अंडे), मछली (मछली) और मटन (मांस) में पाया जाता है. यह कई प्रकार के कैंसर से शरीर को बचाने में मदद करता है.

विटामिन ए
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यह शक्कर कंद (मीठे आलू), गाजर (गाजर), खुबानी (खुबानी), हरी सब्जिया (हरी सब्जियां), लाल मिर्च (लाल मिर्च), cantaloupe (खरबूजा) में अधिक पाया जाता है.

विटामिन बी 2
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यह पालक (पालक), बदाम (बादाम), सोयाबीन (सोयाबीन), कुकरमुत्ता (मशरूम), गाय का दूध (गाय का दूध) में पाया जाता है.

विटामिन बी -6
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यह पालक (पालक), केला (केला), आलू (आलू), सूर्यमुखी फूल के बिज (सूरजमुखी के बीज) में पाया जाता है.

विटामिन सी
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यह संत्रा (संतरे), टमाटर (टमाटर), पपीता (पपीता), स्ट्रॉबेरी (स्ट्रॉबेरी), पत्तागोभी (फूलगोभी) में पाया जाता है.

विटामिन ई
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यह गाजर (गाजर), पपीता (पपीता), पालक (पालक), सूर्यमुखी फूल के बिज (सूरजमुखी के बीज), बदाम (बादाम) में पाया जाता है.

विटामिन डी
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यह दूध (मिल्क), कुकरमुत्ता (मशरूम), अंडा (अंडे), सामन (सामन), सार्डिन मछली (सार्डिन) में पाया जाता है.

जिंक
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यह लौकी के बिज (कद्दू के बीज), तिल (तिल के बीज), जौ (जई), दही (दही), झींगा (झींगा), शुक्ति (कस्तूरी), मटन (मांस) में पाया जाता है.  

* दिन भर में कम से कम 8 ग्लास पानी लेना चाहिए. योग्य प्रमाण में पानी पिने से शरीर को बल प्राप्त होता है और पाचन ठीक से होता है. पानी शरीर के अनावश्यक पदार्थो को शरीर से बाहर निकलता है. .  

* खाना बनाते समय और खाना खाते समय सफाई का विशेष ख्याल रखे. बाहर का चटपटा खाने कि जगह पर घर के स्वच्छ और स्वादिष्ट खाने को प्राथमिकता देना चाहिए. अस्वच्छ और बासी खाना खाने से कई अनचाही पाचन से जुडी बीमारी हो सकती है जो कि आपके रोग प्रतिकार शक्ति को कमजोर कर देती है.

जड़ी बूटी
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* अपनी रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ाने के लिए आप कुछ प्रख्यात जड़ी बूटियों का भी उपयोग कर सकते है जैसे कि गुडूची सत्व, अश्वगंधा चूर्ण, लहसुन, अदरक, जिनसेंग, हल्दी इत्यादि. अभी सर्दी का मौसम है और यह मौसम रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ने के लिए सबसे उत्तम समय है. इस मौसम में आप नियमित व्यायाम और साथ में रोज सुबह और रात में गरम दूध के साथ 1 चमच्च च्यवनप्राश लेकर अपनी रोग प्रतिकार शक्ति को बल दे सकते है.

जीवन शैली को बदले :-
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* रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ने के लिए आहार के साथ साथ हमारे दिनचर्या में बदलाव करना भी जरुरी है. अगर हम अपनी कुछ बुरी आदते बदल दे तो, कुछ बीमारियो से बच सकते है और अपनी रोग प्रतिकार शक्ति भी बढ़ा सकते है.

* कोशिश करे कि आप भय, क्रोध, चिंता और तनाव इन शरीर के मानसिक शत्रुओ से दूर रहे. जब हम तनावग्रस्त रहते है तब हमारे शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का ज्यादा मात्रा में निर्माण होता है. इस हार्मोन के कारण मोटापा, हृदयरोग, कर्करोग जैसी कई समस्या पैदा हो सकती है. आप तनावमुक्त रहने के लिए योगा, प्राणायाम, ध्यान या अपना पसंदीदा काम कर सकते है. ज्यादा तनाव होने पर किसी मनोचिकित्सक कि सलाह लेना चाहिए.

*  जो लोग सप्ताह में 5 दिन नियमित 30 से 40 मिनिट तक व्यायाम करते है, वह लोग अन्य लोगो कि तुलना में 50 से 60% कम बीमार पड़ते है. नियमित व्यायाम करने से आपका वजन भी नियंत्रित रहता है और रोग प्रतिकार शक्ति भी बढती है. नियमित व्यायाम असल में एक स्वस्थ जीवन कि कुंजी है.

* आज के युग में मोटापे कि समस्या एक महामारी कि तरह फ़ैल रही है. मोटापा अपने साथ कई गम्भीर बीमारियो को आमंत्रण देता है. अपनी रोगप्रतिकार शक्ति बढ़ाने के लिए और स्वस्थ रहने के लिए वजन को काबू में रखना बेहद जरुरी है.

वजन नियंत्रण के बारे में अधिक जानकारी के लिए:-
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वजन प्रबंधन
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*  दिन भर काम करने के बाद आपके मन और शरीर के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे कि नींद जरुरी है. जो लोग अपने मन और शरीर को पर्याप्त आराम देते है वे अधिक कार्यक्षम और निरोगी रहते है.  

* स्वस्थ और निरोगी शरीर के लिए शराब, धूम्रपान, गुटखा और तंबाखू सेवन इत्यादि बुरी आदतो का त्याग करे. इन आदतो से आपको कुछ क्षण के लिए सुख कि अनुभूति होती होंगी पर आपके सेहत और आपके परिवार के लिए यह आदते किसी जहर से कम नहीं है. जिन लोगो को ऐसी बुरी आदते होती है वह जल्दी बीमार होते है और इन्हे होनेवाली बीमारी सामान्य व्यक्ति को होनेवाली बीमारी से गम्भीर होती है.

* अपने शरीर के साथ - साथ अपने आस - पास के माहौल को स्वच्छ रखे. केवल स्वच्छता रखने से ही, आप लगभग 50% बीमारियो को दूर भगा सकते है. खुद स्वच्छ रहे और बाकि लोगो को भी स्वच्छता रखने के लिए प्रेरित करे, जिससे आप बाकि लोगो से होनेवाली बीमारियो से बच सके.

* रोजाना स्नान करे तथा दिन में दो बार दात साफ करे  हमेशा अच्छे से हाथ साफ करे अगर आप कही बाहर जाते है या सफ़र कर रहे है तो जीवाणुरोधी हाथ प्रक्षालक साथ रखे  हफ्ते दो बार हर्बल शैम्पू करे

* आहार, दिनचर्या और व्यायाम संबंधी सलाह का अनुकरण कर आप अपनी रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ा सकते है और साथ ही निरोगी स्वस्थ जीवन का आनंद उठा सकते है.

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

Tuesday, May 26, 2015

नोट करे और वक्त पे काम में ले ....!

* अजवायन और काला नमक समभाग बारीक पीसकर रखें | पेट में गैस अथवा दर्द होने पर ३ ग्राम मिश्रण फाँक के ऊपर से गुनगुना पानी पीने से राहत मिलती हैं |

* एक चम्मच अरंडी के तेल में एक चम्मच ताजा दूध मिलाकर पीने से पेट में वायु का गोला उठने से होनेवाले भयंकर दर्द से राहत मिलती हैं |

* नींबू के छिलके पर २ बूँद सरसों का तेल डालकर दाँतो व मसूड़ों पर घिसने से दाँत मजबूत व चमकीलें बने रहते हैं और मसूड़े स्वास्थ बनते हैं |

* ये भी  बनाए :-

हल्दी- 100 ग्राम,

मेथीदाना- 100 ग्राम

आँवला- 200 ग्राम

अब आप तीनों को पीसकर काँच की शीशी में भरकर रखें | पांच-पांच  ग्राम मिश्रण सुबह-शाम गुनगुने पानी से लेने से कंधे, घुटने, कमर एवं जोड़ों के दर्द में आराम मिलता हैं |
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

Thursday, May 21, 2015

पीलिया, अस्‍थमा, डायबिटीज़ आदि का निदान


पीलिया, अस्‍थमा, डायबिटीज़ आदि का निदान


पीलिया, अस्‍थमा, हैजा, मलेरिया, टायफाइड, पेशाब का रूक जाना, डायबिटीज, बुखार, डिप्रेशन, मोटापा, बहुमूत्र रोग जैसी खतरनाक बीमारियों से हमारा अक्‍सर सामना होता है। हम इन बीमारियों का डट कर मुकाबला भी करते हैं। यदि हमें होम रेमेडीज की थोड़ी भी जानकारी हो तो इन रोगों को घातक और जानलेवा रोग बनने से रोका भी जा सकता है। पर बहुतायत में लोगों को होम रेमेडीज की जानकारी नहीं होती है। हम में से हर कोई किसी न किसी बीमारी के लिए, दूसरों से घरेलू उपायों की पूछतांछ और जानकारी हासिल करने में जुटा रहता है। आपकी इसी समस्‍या को देखते हुए मैंनें अपना (Blog) आप सबको स‍मर्पित किया है। इसे पढ़कर आप जरूर स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हासिल करेंगें, ऐसी मेरी कामना है। पर ध्‍यान रहे मेरे बताए नुस्‍खों को अजमाने से पहले आप रजिस्‍टर्ड वैध अथवा डॉक्‍टर से सलाह जरूर ले लें।


हैजा हो जाने पर...


१ * १० रत्‍ती घी में भुनी हुई हींग, १० रत्‍ती काली मिर्च, अफीम ८ रत्‍ती को एक साथ मिलाकर १२ गोलियां बना लें और दिन में ३ – ४ बार एक-एक गोली पानी के साथ लेने से बहुत फाएदा होता है।

२ * अजमोद के पत्‍तों को अच्‍छी तरह धोकर पीस लें और उसका रस निकाल कर रोगी को एक-एक घंटे के अंतराल पर दें। ध्‍यान रहे पहली बार चार बड़े चम्‍मच भर कर दें और बाद में २ – २ चम्‍मच। हैजे में बहुत आराम मिलेगा।

३ * लौंग के तेल की २ – ३ बूंद चीनी या बताशे में देने से हैजे में बहुत लाभ होता है।

४ * हींग ५ ग्राम, कपूर १० ग्राम, कत्‍था १० ग्राम और नीम के १० – १२ कोमल पत्तियां लेक तुलसी के रस में पीस कर मटर के आकार की गोलियां बना लें और १ – १ गोली दिन में ३ – ४ बार गुलाब (Rose)  के अर्क में देने से हैजे में बहुत लाभ होता है।

५ * हैजे की शुरूआत में ही १ – १ रत्‍ती हींग (Heeng) मिलाया हुआ प्‍याज का रस आधे आधे घंटे के अंतराल पर देने से हैजा दूर होता है।

६ * जायफल का चूर्णं १० ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ मिलाकर ३ – ४ ग्राम की गोलियां बनाइए। फिर एक – एक गोली आधे आधे घंटे पर देने से और ऊपर से थोड़ा सा गर्म पानी पीने से हैजे के दस्‍त बंद हो जाते हैं।


मोटापा दूर करने का उपाय...


१ * सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस एक चम्‍मच शहद के साथ मिलाकर पिएं। मोटापा दूर करने का यह अजमाया और जाना माना नुस्‍खा है।

२ * तीन – चार महीने तक रोजाना सुबह दस से बारह करीपत्‍ता खाएं। यह फैट गलाने में सहायक होता है।

३ * तीन चम्‍मच नींबू के रस में आधा ग्राम काली मिर्च का पाउडर और थोड़ा सा शहद मिलाकर तीन से चार माह तक पीएं। मोटापे से राहत मिलेगी।

४ * रोजाना सुबह नाश्‍ते में दो टमाटर खाएं। यह आपकी कैलोरी लेने की क्षमता को कम करता है। पर टमाटर की एक खासियत यह है कि चमड़ी का रंग भी काला करता है। इसलिए लड़कियों को टमाटर सोच समझ कर खाना चाहिए। अधिक मात्रा में टमाटर खाने से उनका रंग काला हो सकता है।

५ * ग्रीन टी वजन कम करने में बहुत सहायक होती है। आप रोजाना तीन से चार कप ग्रीन टी अवश्‍य पिएं। इससे मोटापा दूर होता है।


मलेरिया का बुखार हो जाने पर इन्‍हें अजमाएं...


१ * पिप्‍पली, अतीस ५० ग्राम, तुलसी के सूखे पत्‍ते ५० ग्राम, सोंठ व लौंग १० – १० ग्राम लेकर चूर्णं बना लें। फिर एक ग्राम चूर्णं को दिन में चार बार गर्म दूध के साथ देने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।

२ * एक गिलास ठंडे पानी में खांड या पीली शक्‍कर डालकर अच्‍छी तरह मिलाएं और एक दो नींबू का रस उसमें निचोड़ दें। यह शर्बत मलेरिया के बुखार के लिए बहुत फाएदेमंद है।

३ * तुलसी के ६ – ७ पत्‍ते, एक काली मिर्च और १ पिप्‍पली को पीस कर शक्‍कर के साथ मिलाकर पानी के साथ देने से बुखार कम होता है।

४ * २५ ग्राम पिप्‍पली, को ४०० मिली. पानी में धीमी आंच पर पकाएं। आधा पानी रह जाने पर छानकर शीशी में भर लें। फिर २ – २ टी स्‍पून की मात्रा में दिन तीन चार बार पिलाने पर मलेरिया बुखार में बहुत आराम मिलता है।

(मलेरिया बहुत घातक बीमारी होती है। इसमें पीडि़त व्‍यक्ति को बहुत तेज सर्दी लगती है। यह जानलेवा भी होता है। इसलिए आप मलेरिया का शक होते ही, मलेरिया की जांच कराएं और अंग्रेजी इलाज हेतू फौरन अस्‍पताल जाएं। होम रेमेडीज आपकी मदद कर सकती हैं पर अंग्रेजी इलाज सर्वोत्‍तम है)


डिप्रेशन का सटीक निदान...


१ * आप मुठठी भर ताजी गुलाब की पत्तियों को पानी में डालकर उबालें और फिर डिप्रेशन महसूस होने पर इसे पिएं। आपको डिप्रेशन से निजात अवश्‍य मिलेगी।

२ * दूध या शहद के साथ एक सेब खाने से खराब मूड भी अच्‍छा हो जाता है।

३ * २ – ३ छोटी इलायची को पीस कर पाउडर बना लीजिए और फिर एक कप गुनगुने पानी में चीनी के साथ मिलाकर दिन में दो तीन बार पिएं। डिप्रेशन भाग जाएगा।


टायफाइड हो जाने पर इन्‍हें अजमाएं...


१ * सुबह शाम दूध से मलाई निकाल कर उसमें तुलसी की २ – ३ पत्तियां डालकर चाय बना कर पिएं आपको लाभ होगा।

२ * टायफाइड में बार बार करवट बदलने से बहुत राहत मिलती है।

३ * शरीर को गुनगुने पानी से लगातार पोंछते रहें, पोंछे हुए कपड़े को गर्म पानी में उबालकर साफ करें।

४ * हर दूसरे तीसरे दिन एनिमा लें।

५ * यदि आप मांसाहारी हैं, तो बकरे के फेफड़ो का सेवन करें। बकरे के फेफड़े प्‍याज में स्‍टू की तरह पकाएं (टू प्‍याजा) यह अंग्रेजी अथवा हर्बल इलाज के बीच दी जाने वाली अचूक औषधि है।

६ * एक गिलास मलाई रहित दूध में मोसम्‍मी का रस धीरे धीरे मिलाएं। जब दूध फटने लगे तो रस मिलाना बंद कर दें। फिर इस रस में थोड़ी सी शक्‍कर या पिसी हुई मिश्री मिलाकर रोगी को पिलाएं। रोगी को बहुत लाभ होगा।


डायबिटीज के कुछ घरेलू उपचार...


१ * तेजपत्‍ते को कूट कर कपड़े से छन जाने योग्‍य चूर्णं बनाएं। फिर सुबह उठते ही पांच ग्राम की मात्रा में यह चूर्णं गुनगुने पानी के साथ लें। १० दिन के अंदर ही डायबिटीज में लाभ होगा।

२ * लगातार तीन महीने तक करेले की सब्‍जी देशी घी में बनाकर खाने से डायबिटीज में बहुत लाभ होता है।

३ * आंवला, मेथी और हल्‍दी तीनों को बराबर मात्रा मे लेकर अच्‍छी तरह पीस लें। फिर इस चूर्णं को सुबह, दोपहर, शाम को पानी के साथ एक चम्‍मच की मात्रा में लें। २ माह में आराम मिलेगा।

४ * जामुन के कोमल हरे पत्‍तों को पीसकर नियमित रूप से २५ दिन तक सुबह पानी के साथ पीने से पेशाब में शुगर जाना बंद हो जाती है।

५ * रात में मेथी के दाने भिगोकर रख दें। फिर सुबह उठ कर मेथी के दानों का पानी पीकर धीरे धीरे मेथी चबा लें। डायबिटीज धीरे धीरे ठीक हो जाएगी।

६ * सुबह टमाटर, संतरा और जामुन का नाश्‍ता करें। यह फल डायबिटीज विरोधी हैं।

७ * रात को काली किशमिश भिगोकर रख दें और फिर सुबह उठकर उसका पानी छानकर पी जाएं। आपको बहुत लाभ होगा।

८ * केले का रस पीने से भी डायबिटीज में फाएदा होता है।

९ * आंवले के चूर्णं को भिगोकर कुछ देर रख दें। फिर उसे छानकर, नींबू का रस मिलाकर सुबह उठते ही पी लें।

१० * आम और जामुन का रस समान मात्रा में मिला कर दिन में तीन चार बार लगातार एक महीने तक लें। आपको बहुत लाभ होगा।


सामान्‍य बुखार होने पर...


१ * आप खूब पानी पिएं।

२ * रात को त्रिफला चूर्णं खाएं।

३ * बुखार कम करने के लिए आप रोज ८ – १० तुलसी की पत्तियां और ३ – ४ काली मिर्च चबाएं।

४ * सोंठ, गुड़, तुलसी और काली मिर्च का ५० मि.ली. काढ़ा बनाकर उसमें आधा नींबू का रस मिलाकर पीने से भी बुखार दूर हो जाता है।

५ * पेट साफ रखें।

६ * तुलसी की चाय का सेवन भी बुखार में लाभकारी है।

७ * भोजन के बाद शहद में अदरक के रस की ३ – ४ बूंदें मिलाकर चाटें। आपको लाभ होगा।

८ * चाय में आधा टी-स्‍पून दालचीनी, २ चुटकी सोंठ और २ बड़ी इलायची का चूर्णं बनाकर दिन में तीन चार बार पिएं।


पेशाब रूक जाने पर...


१ * अरंडी का तेल ५० ग्राम की मात्रा में लेकर, गर्म पानी में डाल कर रोगी को पिलाने से लाभ होता है।

२ * फिटकरी ५० ग्राम, कलमीशोरा ५० ग्राम, सफेद चंदन का चूरा २५ ग्राम लेकर कपड़े से छन जाने योग्‍य चूर्णं बनाएं। फिर इसे ३ ग्राम की मात्रा में दिन में ३ बार ताजे पानी से लें। इसके प्रयोग से मूत्र संबंधी सभी बीमारियां दूर हो जाती हैं।

३ * आंवलों को पीसकर नाभि के नीचे लेप करने से पेशाब उतरता है।

४ * बारहसिंगा के सींग को पत्‍थर पर चंदन की भांति घिस कर नाभि के चारों ओर लेप करने से १५ मिनट में ही पेशाब उतरने लगती है।


अस्‍थमा दूर करने के कुछ उपाय...


१ * सोंठ और बड़ी हरड़ को पीस कर ५ – ५ ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ ३ – ३ घंटे के अंतराल पर लेते रहें। यह प्रयोग १० से १२ दिनों तक करें। आपको लाभ होगा।

२ * सांस फूलने की शिकायत होने पर तुलसी के पत्‍ते काले नमक के साथ खाने से आराम मिलता है।

३ * एक पके केले को दीपक की लौ में या गैस चूल्‍हे की धीमी आंच पर गर्म करें। फिर इसे छील कर उस पर पिसी हुई काली मिर्च बुरक कर रोगी को खिलाएं। इससे रोगी को आराम मिलेगा।

४ * काली तुलसी के पत्‍तों को छोटी मधुमक्खियों के शहद के साथ खाने से बहुत लाभ होता है। आप १३ ग्राम शहद में २० मि.ली. तुलसी की पत्तियों का रस निकाल कर मिलाएं और इसे चाटें। रोगी को दमा से राहत मिलेगी।

५ * रात को सोने से पहले भुने चने खाकर ऊपर से गर्म दूध पी‍एं। इससे सांस की नली साफ होती है और दमा की शिकायत भी दूर हो जाती है।

६ * सोने से पहले २ – ३ काली मिर्च चबाएं। तुलसी के पत्‍तों में काली मिर्च मिलाकर खाने से भी बहुत लाभ होता है।

७ * आप रोज २५ – ३० ग्राम आंवले का मुरब्‍बा, ५ ग्राम पिप्‍पली का पाउडर और ५ ग्राम शहद एक साथ मिलाकर सेवन करने से भी दमे में बहुत आराम मिलता है।

८ * पुरानी हल्‍दी की गांठ को पीस कर चूर्णं बना लें। फिर आधा बड़ा चम्‍मच चूर्णं २ चम्‍मच पुराने शहद के साथ शहद में मिलाकर लेने से बहुत फाएदा होता है।

९ * नींबू का रस अदरक के साथ लेने से दमा रोग में बहुत लाभ होता है।


यदि बच्‍चे को अस्‍थमा है, तो उसे मूंगफली न खिलााएं

अस्‍थमा से ग्रस्‍त बचचों को मूंगफली से एलर्जी हो सकती है। अमेरिका में ओहियो स्थित मर्सी चिल्‍ड्रंस अस्‍पताल से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता रॉबर्ट कॉन के अनुसार सांस लेते वक्‍त घरघराहट, कफ या फिर तेज सांस चलना इसके लक्षण हो सकते हैं। इस ताजा रिसर्च के मुताबिक इस बारे में लोगों को जानकारी नहीं है, क्‍योंकि इसके लक्षणों का पता ही नहीं चलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पेरेंटस को अस्‍थमा से पीडि़त बच्‍चों का मूंगफली से होने वाली एलर्जी (पीनट एलर्जी) का टेस्‍ट जरूर कराना चाहिए। पीनट एलर्जी से जुड़े सांस संबंधी दिक्‍कतों के लक्षण अस्‍थमा अटैक का कारण भी बन सकते हैं। अस्‍पताल के पीडिएट्रिक क्‍लीनिक में 1500 से अधिक बच्‍चों पर किए गए अध्‍ययन के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इनमें से 11% बच्‍चों को जानकारी ही नहीं थी, कि उन्‍हें मूंगफली से एलर्जी है। इसलिए आप भी मूंगफली का इस्‍तेमाल सावधानी से करें। क्‍योंकि सावधानी में ही सुरक्षा है।


बहुमूत्र रोग के निदान हेतू कुछ उपाय...


१ * अजवायन २० ग्राम, काला तिल ४० ग्राम को एक साथ मिलाकर पीस लें और फिर इसमें ६० ग्राम गुड़ मिलाएं। इस नुस्‍खे को ५ – ६ ग्राम की मात्रा में खाने से बहुमूत्र रोग में बहुत लाभ होता है। (जो बच्‍चे बिस्‍तर में पेशाब कर देते हैं, उनके लिए य‍ह बहुत उपयोगी है)

२ – दालचीनी, शक्‍कर, रूमी मस्‍तंगी इन तीनों चीजों को समान मात्रा में लेकर चूर्णं बना लें और फिर ३ ग्राम की मात्रा में सुबह शाम गर्म पानी के साथ लें। ७ दिन में ही बहुमूत्र की शिकायत दूर हो जाती है।

३ * रीठे की गुठली का चूर्णं आधा आधा ग्राम सुबह शाम ताजे पानी के साथ सेवन करने से बहुमूत्र रोग एक सप्‍ताह में ही ठीक हो जाता है।

४ * खसखस २० ग्राम व गुड़ २० ग्राम मिलाकर रख लें। फिर इसे एक – एक ग्राम सुबह शाम पानी के साथ खाएं। ऐसा करने से बहूमूत्र रोग ठीक हो जाता है।

५ * काले तिल व पुराना गुड़ बराबर मात्रा में लेकर एक – एक ग्राम की गोलियां बना लें। फिर एक – एक गोली दिन में तीन बार खाएं। बहुमूत्र में लाभ होगा।

६ * मिश्री ४० ग्राम, काली‍ मिर्च २० ग्राम, मुलहठी ३० ग्राम लेकर सभी को अच्‍छी तरह पीस कर चूर्णं बनाएं। फिर इस चूर्णं को ४ – ५ ग्राम की मात्रा में घी के साथ मिलाकर चाटें। ऐसा करने से एक सप्‍ताह में ही बहूमूत्र ठीक हो जाएगा।


पीलिया हो जाने पर...


१ * पीपल और लसोढ़े के ७ – ७ या ११ – ११ पत्‍ते घोंट कर या पीस कर नमक मिला लें। फिर खाली पेट ११ दिन तक पिएं।

२ * पीपल की छाल का नर्म गूदा पचास ग्राम जौकुट करके २५० मि.ली. पानी में मिटटी के कुल्‍हड़ में भिगो दें। सुबह पानी निथार कर पिएं। पीलिया में आराम मिलेगा।

३ * एक ग्राम पीपल की छाल की राख खाकर एक या दो गिलास छाछ पिएं। इससे सारा पीला पन निकल जाएगा।

४ * आप रोज बेल के १५ पत्‍ते पानी के साथ पीस कर एक सप्‍ताह तक पीने से पीलिया जाता रहता है।

५ * गन्‍ना चूसने या गन्‍ने का रस पीने से पीलिया दूर हो जाता है।

६ * १० ग्राम सोंठ के चूर्णं में गुड़ मिलाकर सुबह शाम दो बार गुनगुने पानी के साथ एक सप्‍ताह तक लें। पीलिया दूर होगा।

७ * १० ग्राम पिसी हुई हल्‍दी ५० से १०० ग्राम दही में मिलाकर पीने से पीलिया कुछ ही दिनों में चला जाता है।

८ * गाय के दूध की ताजा छाछ या १० तोले मटठे में आधा तोला हल्‍दी मिलाकर सुबह शाम पीने से पीलिया खत्‍म हो जाता है।



(समाप्‍त)