Wednesday, September 30, 2015

जाने सम्भोग की सही परिभाषा - The correct definition of sex

हर व्यक्ति अपने-अपने तरीके से परिभाषित करता है, किन्तु अगर हम इस बात पर अध्यन करे यह क्रिया जीवन में क्या स्थान रखती है और जीवन में ये कितनी बार नैतिक है तो भी इसका कोई हल सामने आ पाना बहुत ही जटिल है-







सुकरात की एक कथा :-





"एक बार जब सुकरात के शिष्य ने उनसे संभोग विषय में पूछा तो सुकरात का कहना ये था ये यह क्रिया मनुष्य को जीवन में सिर्फ एक बार संतानुत्पत्ति के समय पर ही करनी चाहिए, तब उनके शिष्य ने पूछा की अगर व्यक्ति मात्र एक बार इस क्रिया को करने से संतुष्ट न हो तो वो क्या करे तब सुकरात ने कहा की अगर जीवन में एक बार इस क्रिया द्वारा संतुष्टि न मिले तो एक वर्ष में एक बार वह इस सम्भोग क्रिया को कर सकता है , तो फिर शिष्य ने पूछा अगर उससे भी संतुष्टि न मिले तो-



तब सुकरात ने कहा ऐसी परिस्थिति में माह में एक बार और अगर उससे भी सतुष्टि ना मिले तो हफ्ते में एक बार ,तो फिर शिष्य ने पूछा अगर उससे भी संतुष्टि न मिले तो-तो सुकरात ने उत्तर दिया ऐसी परिस्थिति में वो पहले अपनी कब्र खोद ले और और फिर उससे जो करना है वो करे"





अगर हम पुराने प्रख्यात दार्शनिक और सम्मानित पुस्तकों का अध्यन करे तो आसानी से पा जायेंगे की सभी ने वीर्य संचय को एक बहुत ही बड़े कार्य की तरह माना है और इसे एक उच्च दर्जा दिया है साथ ही यह भी स्पष्ट किया है की मात्र वीर्य संचय के माध्यम से ही मनुष्य सच्ची सफलता को प्राप्त कर सकता है , पर जब हम आज के वातावरण पर नज़र डाले तो हर व्यक्ति इस क्रिया के पीछे छुपे हुए भोग को छुपाने के लिए नित्य नए मिथ्या तर्क देता है हर तरह से इस बात को साबित करने की कोशिश करता है की यह इंसान की रोज़मर्रा की आवश्यकता की तरह है या फिर इस फायदे होने की बात को प्रस्तुत कर इसे जरुरी बताता है -





वासना की अग्नि में भस्म करके मनुष्य खुद को उत्कृष्ठ साबित नहीं कर सकता है ।तब उनकी आयु भी जादा होती थी और असमय बाल सफ़ेद होना दांतों का गिरना या आज की प्रचलित बीमारियाँ नहीं हुआ करती थी आज के युग की नई -नई बीमारियों का कही भी नामोनिशान भी न था कोई इन्हें जानता तक न था आज जितने डॉक्टर उपलब्ध है उससे जादा बीमारियों ने घेर लिया है -





युवा हस्तमैथुन जेसी आदत और सेक्स से ओतप्रोत है जीवन का मूल उदेश्य समझ बेठे है . नासमझी की तर्कहीन बाते है इसलिए त्रस्त है और इन कारणों से असमय जवान होना और असमय बुढ़ापा आ जाना इन्ही नासमझी का दुष्परिणाम है -


सच चाहे जो भी हो मगर एक बात तो सिद्ध है की खुद को इस तरह की वैसे भी जब लोग नियम-पूर्वक संतानोत्पति के लिए इस क्रिया करते थे रोग का इजाफा कम था आज खान -पान का व्यवहार बदल गया है युवा पीढ़ी को पौष्टिक खाना नहीं है -



जीवन के सार को समझे जीवन की जीवनी शक्ति को यूँ ही न बर्बाद करे संजोये ये ही है जो आपका है सब कुछ करना समयानुसार ही उचित है क्युकि वक्त जब हाथ से निकल जाता है फिर कुछ नहीं मिलता है-




उपचार और प्रयोग -

गर्भवती होने के कुछ बेहतरीन उपाय - Some of the best ways to get pregnant

जीवन में माँ बनना जिन्दगी का एक बेहतरीन अनुभव में एक है -मातत्व की राह इतनी मुश्किल भी नहीं है - माँ बनने के लिए हर उम्र में गर्भावस्था के समय कुछ खास परेशानियाँ आती है जिनसे आपको सामना करना पड़ता है -


जानें गर्भवती होने के कुछ बेहतरीन उपाय।कई मामलों में ऐसा होता है कि कोई महिला गर्भवती नहीं होना चाहती फिर भी वो गर्भवती हो जाती है। ठीक इसके विपरीत कई मामलों में ऐसा होता है कि कोई महिला गर्भवती होकर मातृत्व सुख प्राप्त करना चाहती है लेकिन लाख चाहने के बावजूद वो गर्भवती नहीं हो पाती।


अगर आपकी अभी-अभी शादी हुई है और आप गर्भवती होना चाहती हैं या कई सालों तक परिवार नियोजन अपनाने के बाद अब आप गर्भधारण करना चाहती हैं या लाख चाहने के बावजूद आप गर्भवती नहीं हो पा रही हैं तो निम्नलिखित उपायों को अपनाकर आप सफलतापूर्वक गर्भधारण कर सकती हैं।

गर्भ-धारण के कुछ आसान उपाय :-



गर्भवती होने के लिए सिर्फ सहवास करना जरुरी नहीं होता बल्कि सही समय पर सहवास करना जरुरी होता है।

अगर आप कंसीव करने के लिये सोंच रही हैं तो आपको अपने वजन को कंट्रोल करने के बारे में भी सोंचना पडे़गा। ओवरवेट होने से आपके प्रेगनेंट होने के चांस कम हो जाते हैं-

व्यायाम करने से आप कुछ मासपेशियों को कम कर सकती हैं साथ ही आपका हार्मोन भी सही प्रकार से प्रवाह करेगा। कभी भी गर्भाशय पर जोर देने वाली कठोर एक्समरसाइज न करें।

ओव्यूएलेशन कैलेंडर यह आपको बताएगा कि आपका कौन सा दिन कंसीव करने के लिये अच्छा रहेगा। ऐसा आपके पीरियड का आखिरी दिन देख कर और औसत चक्र की लंबाई को ध्याछन में रख कर किया जाता है।


महिला का शरीर ऐसा नहीं होता जो कभी भी गर्भवती हो सके। उसका एक निश्चित समय होता है, एक छोटी सी अवधि होती है। आप उस  अवधि को पहचानें और उस समय सहवास करें।


गर्भवती होने के लिए ओवयूलेशन के पहले सेक्स यानि सहवास करना जरुरी होता है।ओव्यूबलेशन स्ट्रिप इस पट्टी को योन‍ में डाल कर देखा जाता है कि यह लाल है कि नहीं। अगर यही लाल रंग की हो जाती है तब आपका गर्भधारण करने के लिये यह बिल्कुअल सही समय है।


सेक्स के वक्त तनाव में न रहे। गर्भवती होने के लिए सेक्स के वक्त आपको उसका आनंद उठाना चाहिए ताकि आपकी योनि से उचित मात्रा में तरल पदार्थों का स्राव होता रहे जो शुक्राणु को गर्भधारण करने में सहयोग दे सके। गर्भधारण करने के लिए सेक्स की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


पार्टनर स्पलर्म काउंट अपनी प्रजनन क्षमता को बढाना जितना जरुरी है उससे भी जरुरी है आपके पार्टनर का स्प्र्म काउंट और उसकी गुणवत्ताा। देखिये कि कहीं वे स्मोकिंग तो नहीं करते और एक्स्रसाइज करते हैं या नहीं।


ये सेवन न करे :-




धूम्रपान से भी गर्भधारण करने में मुश्किल होती है। अगर आप गर्भवती हो भी जाती हैं तो सिगरेट आपके पेट में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डालेगा और इससे आपका गर्भपात भी हो सकता है।


शराब एवं कुछ हानिकारक दवाइयों को लेने से बचें, इसी तरह से शराब एवं मादक दवाओं से भी दूर रहना चाहिए। क्योंकि ये आपके गर्भधारण में बाधक बन सकती हैं।


कैफीन युक्त खाद्य पदार्थ या पेय का सेवन भी गर्भधारण में बाधक बन सकता है। कैफीन से शरीर की आयरन एवं कैल्शियम ग्रहण करने की क्षमता घट जाती है। जिससे आपके गर्भवती होने की संभावना 27 फीसदी तक कम हो सकती है।


संतुलित आहार लें, और मीठी चीजें भी ज्यादा न खाएं। फोलिक एसिड गर्भधारण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन किया करें, जिनमें फोलिक एसिड पाए जाते हों।

ये सेवन करे :-



फोलिक एसिड खाएं, और दाल में फोलिक एसिड पाया जाता है, साथ ही दालें प्रोटीन का भी बहुत अच्छा स्रोत होती हैं। 


हरी पत्तेदार साग-सब्जियों में भी फोलिक एसिड प्रचूर मात्रा में होता है जैसे पालक इत्यादि। अतः हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में किया करें। जो आपको तंदरुस्त बनाते हैं एवं गर्भधारण में मदद करते हैं। इनके अलावा आप साबुत अनाज एवं फाइबर युक्त खाना भी खाए। गर्भवती होने के लिए पर्याप्त मात्रा में कैल्सियम का सेवन भी जरुरी होता है।

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योनी मुद्रा की जानकारी -

क्या आप जानते है कि योनी मुद्रा क्या है :-





हस्त मुद्राए कई प्रकार की होती है और सबके अलग-अलग स्वास्थ -लाभ है -यौगिक द्रष्टि से योग मुद्रा को भी एक ख़ास महत्व मिला है -हालांकि तंत्र-शास्त्र में इसका अलग-महत्व है -लेकिन यहाँ यह प्राण-वायु के लिए  उत्तम मानी गई है -यह बड़ी चमत्कारिक मुद्रा है-


योनि हस्त मुद्रा योग (yoni mudra yoga) के निरंतर अभ्यास के साथ मूलबंध क्रिया भी की जाती है।Vaginal currency को तीन तरह से किया जाता है। ध्यान के लिए अलग, सामान्य मुद्रा अलग लेकिन यहां प्रस्तुत है- कठिनाई से बनने वाली मुद्रा का एक विवरण-

जाने इसकी बिधि :-


पहले किसी भी सुखासन(Sukhaasn) की स्थिति में बैठ जाएं। फिर दोनों हाथों की अंगुलियों का उपयोग करते हुए सबसे पहले दोनों कनिष्ठा अंगुलियों को आपस में मिलाएं और दोनों अंगूठे के प्रथम पोर को कनिष्ठा के अंतिम पोर से स्पर्श करें।इसके पश्चात् फिर कनिष्ठा अंगुलियों के नीचे दोनों मध्यमा अंगुलियों को रखते हुए उनके प्रथम पोर को आपस में मिलाएं। मध्यमा अंगुलियों के नीचे अनामिका अंगुलियों को एक-दूसरे के विपरीत रखें और उनके दोनों नाखुनों को तर्जनी अंगुली के प्रथम पोर से दबाएं।

जाने इसके लाभ :-


योनि मुद्रा बनाकर और पूर्व मूलबंध की स्थिति में सम्यक् भाव से स्थित होकर प्राण-अपान को मिलाने की प्रबल भावना के साथ मूलाधार स्थान पर यौगिक संयम करने से कई प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं-

अंगूठा शरीर के भीतर की अग्नि को कंट्रोल करता है। तर्जनी अंगुली से वायु तत्व कंट्रोल में होता है। मध्‍यमा और अनामिका शरीर के पृथ्वी तत्व को कंट्रोल करती है। कनिष्ठा अंगुली से जल तत्व कंट्रोल में रहता है।

इसके निरंतर अभ्यास से जहां सभी तत्वों को लाभ मिलता है वहीं इससे इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की शक्ति बढ़ती है। इससे मन को एकाग्र करने की योग्यता का विकास भी होता है। यह शरीर की negative energy को समाप्त कर Affirmative का विकास करती है। इससे हाथों की मांसपेशियों पर अच्छा खासा दबाव बनता है जिसके कारण मस्तिष्क, हृदय और फेंफड़े स्वस्थ बनते हैं।


Tuesday, September 29, 2015

आक के पौधे को बेकार न समझे -

आप जानते ही है कि घर के आसपास जहां भी खाली और Unusable जगह होती है, वहां कई प्रकार के पौधे स्वत: ही पनप जाते हैं। आमतौर इन पौधों को भी Unusable ही माना जाता है। ऐसे स्थान पर एक पौधा, जिसे आंकड़ा कहा जाता है, वह भी पनप जाता है। इस पौधे को आंक, अकौआ भी कहते हैं। सामान्यत: आंकड़े का पौधा जंगलों में आसानी से पनप जाता है, लेकिन आजकल शहरी क्षेत्रों में भी यह आसानी से दिखाई दे जाता है। यह पौधा जहरीला(Poisonous) होता है। आंकडे के पौधे से सफेद दूध भी निकलता है। इस पौधे से प्राप्त होने वाले फूलों और फलों को शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। आंकड़े के कई उपाय भी बताए गए हैं, जिनसे धन संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।






आप की जानकारी के लिए इसके कुछ उपयोग दे रहा हूँ जिसका आपको लाभ मिले -




पहला उपाय ये करे:-

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यदि किसी व्यक्ति को अपने शरीर की रक्षा नकारात्मक शक्तियों से, बीमारियों से, बुढ़ापे की परेशानियों से करनी है तो उसे ये उपाय अपनाना चाहिए। उपाय के अनुसार आंकड़े के पौधे की जड़ का एक छोटा सा टुकड़ा गले में ताबीज के साथ धारण करना चाहिए।

ध्यान रखें, ताबीज के लिए काले धागे का प्रयोग करें। मार्केट में कई प्रकार के ताबीज आसानी से मिल जाते हैं। अत: उस ताबीज में आंकड़े की जड़ को डालकर धारण करें। इस उपाय से आपके शरीर की रक्षा होगी, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह ताबीज किसी कवच के समान काम करता है।



दूसरा उपाय ये करे :-

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यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से परेशान है तो वह रवि पुष्य नक्षत्र (हिंदी पंचांग से इस नक्षत्र की जानकारी मिल सकती है) के दिन आंकड़े एवं अरण्ड की जड़ निमंत्रण देकर तोड़कर ले आएं। जड़ तोड़ने से पहले जड़ को निमंत्रण दें कि आप हमारे साथ चलिए। इसके बाद घर पर इन जड़ों को गंगाजल से धोएं और सिंदूर आदि पूजन सामग्री अर्पित कर पूजन करें। पूजन के दौरान श्रीगणेशाय नम: मंत्र का जप 108 बार करें।

पूजन हो जाने पर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से इन जड़ों को सात बार सिर से पैर तक वार लें। इसके बाद शाम के समय इन जड़ों को किसी सुनसान स्थान पर जाकर जमीन में गाढ़ दें। इस उपाय के बाद दवाएं असर करने लगेंगी और रोगी जल्दी ठीक हो सकता है।



तीसरा उपाय ये करे :-

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शास्त्रों अनुसार आंकड़े के फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आंकड़े पौधा मुख्यद्वार पर या घर के सामने हो तो बहुत शुभ माना जाता है। इसके फूल सामान्यत: सफेद रंग के होते हैं। विद्वानों के अनुसार कुछ पुराने आंकड़ों की जड़ में श्रीगणेश की प्रतिकृति निर्मित हो जाती है जो कि श्वेतार्क गणेश के नाम से जानी जाती है। गणेशजी के इस स्वरूप की पूजा करने से साधक को शुभ फल प्राप्त होते हैं।

घर के सामने शुभ-दायी है ये पौधा :-

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ज्योतिष के अनुसार जिस घर के सामने या मुख्यद्वार के समीप आंकड़े का पौधा होता है, उस घर पर कभी भी किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा वहां रहने वाले लोगों को तांत्रिक बाधाएं कभी नहीं सताती। घर के आसपास सकारात्मक और पवित्र वातावरण बना रहता है जो कि हमें सुख-समृद्धि और धन प्रदान करता है। ऐसे लोगों पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है और जहां-जहां से लोग कार्य करते हैं वहीं से इन्हें धन लाभ प्राप्त होता है।

उपचार और प्रयोग-

आरोग्य स्वास्थ्य के लिये टोटके -

कभी- कभी जीवन में कुछ टोटके स्वास्थ लाभ के लिए भी लाभ-दायक होते है -इसका ये मतलब नहीं है कि हम आपको अंधविश्वास की तरफ ले जा रहे है -





सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें उसे 

पी कर बर्तनको उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत 


सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है।कुछ ही दिनों में आश्चर्यजनक 

स्वास्थ्य लाभ अनुभव करेंगे-




रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर 


में शांति बनी रहती है।



घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर हो या दीपक 


के मध्य में (फूलदार बाती) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है।



धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रखें।आश्चर्य जनक लाभ देखे -

मंदिर में गुप्त दान करें। इस तरह गुप्त दान किया गया भी रोगी को रोग मुक्त करता है -बस दान की जाने 


किसी भी सोमवार से यह प्रयोग करें। बाजार से कपास के थोड़े से फूल खरीद लें। रविवार शाम 5 फूल, आधा 

कप पानी में साफ कर के भिगो दें। सोमवार को प्रात: उठ कर फूल को निकाल कर फेंक दें तथा बचे हुए पानी 

को पी जाएं। जिस पात्र में घर में कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटाएं।



वाली वस्तु को रोगी के सर पर से सात बार क्लाक वाइज उतारा कर के गुप्त दान कर  दे -हफ्ते में एक बार 

अवस्य करे जब तक रोगी रोग मुक्त न हो -पहले हफ्ते से ही लाभ नजर आने लगेगा -


उपचार और प्रयोग-


क्या स्त्रियों में भी होता है स्‍वप्‍नदोष-What happens in women's dreams

पुरुष खासकर युवा ही स्वप्न-दोष का शिकार होते है -स्वप्न-दोष वह अवस्था है जिसमे सोते -सोते अचानक पुरुष को वीर्यपात हो जाता है -उनके कपड़ो में गीला-पन हो जाता है -यहाँ तक कि बिस्तर पर सफ़ेद दाग पड़ जाते है -और सुबह उठने पे शर्मिंदगी महसूस करते है -इसको ही भारतीय समाज में स्वप्न-दोष का नाम दिया गया है -




जबकि पश्चिम में इसे किसी तरह का दोष नहीं माना जाता, बल्कि वहां तो इसे वेट ड्रीम (wet dreams) कहा जाता है जो ज्‍यादा उचित शब्‍द है।


पुरुषों में स्‍वप्‍नदोष(Wet dreams):-



मनोचिकित्‍सकों के अनुसार, Sleep sexMasturbation या इसी तरह की किसी यौन उत्‍तेजना के उत्‍पन्‍न ख्‍याल से लिंग से Semen secretion हो जाता है। किशोरावस्‍था में यह बहुत सामान्‍य बात है। इसे लेकर किसी भी तरह की ग्रंथि नहीं पालनी चाहिए। सभी इससे गुजरते हैं, लेकिन यह जानकर आश्‍चर्य होगा कि Girls भी स्‍वप्‍नदोष की शिकार होती हैं। यह अलग बात है कि उनका जननांग भीतर की ओर होने की वजह से उन्‍हें अक्‍सर इसका पता नहीं चल पाता है।


पुरुषों में रात भर में करीब 4 से 5 बार लिंग उत्तेजित होता है। सुबह के समय इसकी stimulus बढ जाती है। स्‍वप्‍नदोष भी अक्‍सर सुबह के तीन से पांच के बीच ही अधिक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लिंग के उत्‍तेजना से नियमित रक्‍त संचालन होता रहता है, जो लिंग की मांसपेशियों व ऊतकों के स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से अच्‍छा है। यह एक तरह से लिंग की कसरत है। जब उत्‍तेजित लिंग वीर्य के भार को थामने में नाकाम नाकाम रहता है तो वीर्यपात हो जाता है, जो बहुत Natural है।



लडकियों का स्वप्न-दोष (Wet dreams of girls):-



गाइनकोलॉजिस्‍टों व मनोचिकित्‍सकों के अनुसार स्त्रियां भी Intense sexual अहसास से गुजरती हैं। किशोरावस्‍था, युवावस्‍था या फिर पति से बहुत अधिक दिनों तक दूर रहने पर कई बार महिलाओं में तीव्र यौन इच्‍छा जगती है और वह सोते से उठ जाती हैं। पुरुषों के समान उनमें वीर्यपात जैसा तो कुछ नहीं होता, लेकिन उत्‍तेजनावश उनकी Vagina अंदर से गीली और चिकनी हो जाती है।



महिलाए स्वप्न-दोष को नहीं समझ पाती :-



चूंकि महिलाओं का जननांग(Genital) अंदर की ओर विकसित होता है, इसलिए वह स्‍वप्‍नदोष को ठीक से समझ ही नहीं पाती हैं। महिलाओं को सोते वक्‍त कई बार जननांग या उसके आसपास दबाव पडने, घर्षण आदि के कारण कामोत्‍तेजना(Arousal) का अहसास होता है। ऐसा अक्‍सर टाइट पैंटी पहनने, जांघों के बीच हाथ दबाकर सोते वक्‍त हाथ से उत्‍पन्‍न घर्षण आदि अकेली स्‍त्री में अचानक से सोई हुई उत्‍तेजना को जगा देता है, जिससे उक्‍सर उनकी नींद खुल जाती है।



महिलाए कर सकती है एहसास :-



वैसे महिलाएं चाहें तो अपने स्‍वप्‍नदोष का अहसास कर सकती हैं-जब कभी रात में अचानक एक तीव्र व Pleasant feeling के साथ नींद के खुलते ही अपनी ऊंगली Vagina के अंदर ले जाने पर उन्‍हें चिप-चिपापन(Viscosity) और गीलेपन का अहसास होगा। 

किशोरियों को ऐसे समय किसी अनजान साथी का, युवा लड़की को अपने ब्‍वॉयफ्रेंड का और पति से दूर रही रही पत्‍नी को अपने पति की दूरी का तीव्रता से अहसास होता है। 

स्त्रियां कल्‍पना में भी यदि sexual intercourse करती हैं तो वह किसी अजनबी की जगह अपने साथी का ख्‍याल ही मन में लाती हैं।



कामोत्तेजना सेहत के लिए उचित :-



महिलाओं में भी कामोत्‍तेजना बढ़ने से Genital में रक्‍तसंचार होता है, जो यौन व प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य के हिसाब से बहुत उपयुक्‍त है। इससे योनि का लचीलापन बना रहता है, जो आगे चलकर पुरुष के साथ यौन संबंध बनाने में तो सहज करता ही है, प्रसव के समय बच्‍चे के बाहर आने में भी आसानी होती है।


स्वपन-दोष किसी प्रकार का कोई "दोष " नहीं :-




परंपरागत भारतीय समाज में वीर्य की रक्षा करने पर मुख्‍य जोर रहा है, शायद इसी वजह से स्‍वप्‍न की वजह से होने वाले वीर्य स्‍खलन को स्‍वप्‍नदोष कह दिया गया है। लेकिन आधुनिक मनोविज्ञानी इसे किसी भी तरह से दोष नहीं मानते हैं। सोते में कामुक कल्‍पनाओं का उभरता और उसके प्रभाव से वीर्यस्राव कहीं से बुरा नहीं है। वीर्य की मात्रा जब शरीर में बढ जाती है तो वह बाहर निकलने का रास्‍ता तलाशती है। इसे ऐसे समझिए कि जब पानी का टंकी भर जाता है तो Overflow हो जाता है। यह बहुत कुछ वैसा ही है।


सुझाव :-



अत्‍यधिक Erotic thoughts करना, Pornography पर ज्‍यादा समय व्‍यतीत करना, Alcohol, सिगरेट, अधिक तला, मसालेदार और खटटा खाने जैसे कुछ ऐसे कारण हैं तो इसकी बारंबारता को बढा देते हैं। मसालेदार भोजन यौन उत्‍तेजना बढाने में सहायक हैं। भारतीय समाज ने शायद किशोर-वस्था  में अधिक कामोत्‍तेजना, शराब, सिगरेट का सेवन और मसालेदार भोजन आदि से दूर रहने के लिए ही इसे दोष का नाम दिया। पोर्नोग्राफी, शराब, सिगरेट और मसालेदार भोजन से बचना तो वैसे भी स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उत्‍तम है, क्‍योंकि ये सभी एडिक्‍शन का खतरा पैदा करते हैं।


स्वप्न-दोष के लिए ये टिप्स अपनाए :-




आँवले का मुरब्बा रोज खाएँ ऊपर से गाजर का रस पिएँ।


तुलसी की जड़ के टुकड़े को पीसकर पानी के साथ पीना लाभकारी होता है। अगर जड़ नहीं उपलब्ध हो तो तो बीज 2 चम्मच शाम के समय लें।



लहसुन की दो कली कुचल कर निगल जाएँ। थोड़ी देर बाद गाजर का रस पिएँ।



मुलहठी का चूर्ण आधा चम्मच और आक की छाल का चूर्ण एक चम्मच दूध के साथ लें।



काली तुलसी के पत्ते 10-12 रात में जल के साथ लें।



रात को एक लीटर पानी में त्रिफला चूर्ण भिगा दें सुबह मथकर महीन कपड़े से छानकर पी जाएँ।



अदरक रस 2 चम्मच, प्याज रस 3 चम्मच, शहद 2 चम्मच, गाय का घी 2 चम्मच, सबको मिलाकर सेवन करने से स्वप्नदोष तो ठीक होगा ही साथ मर्दाना ताकत भी बढ़ती है।



नीम की पत्तियाँ नित्य चबाकर खाते रहने से स्वप्नदोष जड़ से गायब हो जाएगा।



आंवले  का मुरब्बारोज खाने से स्वप्र दोष में लाभ होता है।

 
कांच के गिलास में बीस ग्राम पिसा हुआ सुखा आंवला डाले। इसमें साठ ग्राम पानी भरें और फिर बारह घंटे भीगने दें। फिर छानकर इस पानी में एक ग्राम पीसी हुई हल्दी मिलाएं और पीएं।



पिसे हुए अनार के छिलके पांच ग्राम सुबह और शाम लेने से स्वप्न दोष नहीं होता।



केला स्वप्न दोष और प्रमेह में लाभदायक है। दो केले खाकर ऊपर से एक पाव गरम दूध तीन महीनें तक रोज पीएं।



लहसुन की दो कुली टुकड़े करके पानी से निगल जाएं। इससे स्वप्र दोष नहीं होगा। यह प्रयोग रात को सोते समय हाथ-पैर धोकर रोज करें।



प्याज दस ग्राम सफेद प्याज का रस, अदरक का रस आठ ग्राम, शहद पांच ग्राम, घी तीन ग्राम मिलाकर रात्रि को सोते समय पीने से स्वप्र दोष नहीं होता।



धनिये को पीसकर मिश्री मिलाकर ठण्डे जल से लेने से स्वप्र दोष नहीं होता।



तुलसी की जड़ के छोटे-छोटे टुकड़े पीसकर पानी में मिलाकर पीने से लाभ होता है।



सुखा धनिया कूट, पीसकर छान लें। इसमें समान मात्रा में पीसी हुई चीनी मिलाएं। सुबह भूखे पेट रात के पानी से एक चाय की चम्मच फक्की लें और एक घंटे तक कुछ न खाएं पीएं।


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