Tuesday, November 3, 2015

बाल काले करने के लिए कमल का फूल -

जी आप हँसे नहीं ये मजाक नहीं है आयुर्वेद हमारे ऋषियों मुनियों द्वारा प्रदत्त कराई गई विद्या है जिसे अपने जीवन में जादा-से-जादा प्रयोग करके आप साइड इफेक्ट (side effect ) से बचे रह सकते है आइये जानते है कि कमल जो एक राष्ट्रीय फूल है वो हमारे जीवन में कितने काम का है -



कमल लक्ष्मी देवी का प्रिय फूल भी माना जाता है इसका लक्ष्मी पूजा में विशेष महत्व है फेंगशुई में भी इसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है आज आप इसके आयुर्वेदिक महत्व (Ayurvedic importance ) को जाने कि कैसे इसका फूल ,पत्ते,बीज,तना,जड़ ये सभी उपयोगी है -

आप अगर चाहते है कि आपके सर के सफ़ेद बाल काले हो जाए तो बस देर मत करे 500 ग्राम कमल के फूल लाये और इन फूलो को गाय के दूध में मिला कर एक बंद हांडी में कच्ची जमीन में दबा दे और एक माह बाद निकाल कर इसे सर पे लगाए जैसे तेल लगाते है दो घंटे बाद पानी से दो ले कुछ समय लगातार  करने से आपके बाल स्थाई रूप से काले होने शूरू हो जायेगे -

जिन लोगो की समस्या है कि न चाहते हुए भी वीर्यपात (Wet dreams ) हो जाता हो तो कमल की जड़ का चूरन चार ग्राम पानी से लेना शुरू कर दे एक माह तक आपका वीर्य पुष्ट होगा और अपने-आप वीर्यपात होने की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा -

कमल के बीजो को भून ले फिर उसके अंदर का छील कर सफ़ेद भाग निकाले उसे पीस कर शहद के साथ मिला कर खाने से उल्टी बंद हो जाती है -

नारी का आकर्षण उसके स्तन(breast ) है -स्तन ढीले है तो आप साधारण सा प्रयोग अपनाए कमल के बीजो को प्रतिदिन चार या पांच पीस ले और गाय के दूध के साथ पिए लगातार दो माह बस स्तन पुष्ट हो जायेगे-

जिन महिलाओं को हर शुरुवात के महीनो में गर्भ-स्राव (Miscarriage )की परेशानी है तो एक बार अवस्य ही प्रयोग करे -कमल की नाल और नागकेसर दोनों को आपस में पीस ले और एक ग्राम इस पिसे चटनी को गाय के दूध से लेना शुरू करे -गर्भ-स्राव नहीं होगा -

जिन लोगो को खूनी बवासीर (Bloody piles ) की शिकायत है उनके लिए कमल की केसर बड़े काम की है कमल की केसर आधा ग्राम मक्खन और चीनी के साथ ले एक सप्ताह में ही सार्थक परिणाम मिल जाएगा लेकिन इसे तब तक लेना है जब तक बिलकुल ठीक न हो जाए-

जिन लोगो को हार्ट-अटैक(heart attack ) की परेशानी है उनके लिए कमल का फूल अमृत से कम नहीं है -मुलेठी,नागरमोथा,सफ़ेद चन्दन को मिला दवा तैयार होती है जो ह्रदय-रोग ख़त्म करके हार्ट-अटैक नहीं होने देती है - दवा का निर्माण किसी कुशल वैध्य से कराये-

चर्म-रोग(Skin-disease) में कमल की जड़ को पानी में घिस के लेप बना के लगाने से फायदा होता है -

उपचार और प्रयोग-

Monday, November 2, 2015

प्रेम का विकसित होना सेक्स का क्षीण होना है..!

आप जानते है कि प्रेम (love ) और सेक्स (sex ) ये दो विरोधी चीजे है जब प्रेम बढ़ता है तो सेक्स क्षीण हो जाता है और प्रेम जितना कम होता है उतना सेक्स बढ़ जाता है -



हो सकता है ये बात सुनने और समझने में आपको अटपटी लगे लेकिन अपने जीवन में बिना तर्क के अनुभव का प्रयास करे जिस व्यक्ति में जितना भी जादा प्रेम पुलकित होगा उसका सेक्स यानि की काम वासना कम होगी जब मनुष्य प्रेम से परिपूर्ण होता जाता है उसके भीतर सेक्स जैसी चीज नहीं रह जाती है -और अगर आपके अंदर दिखावा मात्र प्रेम है यानि छलावा है तो सेक्स आपके भीतर सेक्स है -

सेक्स जहाँ है वहां प्रेम का स्थान नहीं और जहाँ प्रेम है सेक्स की इक्छा कदापि नहीं -भगवान् कृष्ण और गोपी का वास्तविक प्रेम इसका एक उदाहरण है -

सेक्स की शक्ति को परिवर्तन करना है तो उदात्तीकरण से होता है आप चाहते है कि सेक्स से मुक्त हो तो सेक्स को दबाने से कुछ भी नहीं होने वाला है क्युकि किसी भी चीज को दबाना वो और प्रखर हो उठता है और जादा पागल हो सकते है दुनिया में जितने पागल हैं, उसमें से सौ में से नब्बे संख्या उन लोगों की है, जिन्होंने सेक्स की शक्ति को दबाने की कोशिश की है-

जो व्यक्ति अनायास ही अपने सेक्स को दबाता है तो दबा हुआ सेक्स विक्षिप्तता पैदा करता है, अनेक बीमारियां पैदा करता है, अनेक मानसिक रोग पैदा करता है- मतलब ये है किसेक्स को दबाने की जो भी चेष्टा है वह भी एक पागलपन है-

कई योगी योग साधना से सेक्स को दबाने का अथक प्रयास में -बिना गुरु सानिध्य के पागल होते देखे गए है क्युकि वो नहीं समझते है कि सेक्स को दबाया नहीं जाता है अपनी सेक्स की शक्ति को उर्ध्वामुखी करके जो शक्ति प्राप्त होती है वो धीरे से प्रेम के प्रकाश में परिणित हो जाती है वो ही आपका प्रेम का प्रकाश बन जाती है क्युकि प्रेम सेक्स का क्रिएटिव उपयोग है, उसका सृजनात्मक उपयोग है-प्रेम को विस्तीर्ण करें - जीवन को प्रेम से भरें-

छोटे-छोटे बच्चे प्रेम चाहते हैं-मां उनको प्रेम देती है फिर वे बड़े होते हैं और वे और लोगों से भी प्रेम चाहते हैं परिवार उनको प्रेम देता है- फिर वे और बड़े होते हैं-अगर वे पति हुए तो अपनी पत्नियों से प्रेम चाहते हैं अगर वे पत्नियां हुईं  तो वे अपने पतियों से प्रेम चाहती हैं और जो भी प्रेम चाहता है वह दुख झेलता है- क्योंकि प्रेम चाहा नहीं जा सकता- प्रेम केवल किया जाता है चाहने में पक्का नहीं है मिलेगा या नहीं मिलेगा। और जिससे तुम चाह रहे हो, वह भी तुमसे चाहेगा। तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। दोनों भिखारी मिल जाएंगे और भीख मांगेंगे। दुनिया में जितना पति-पत्नियों का संघर्ष है, उसका केवल एक ही कारण है कि वे दोनों एक-दूसरे से प्रेम चाह रहे हैं और देने में कोई भी समर्थ नहीं है-

प्रेम करना और प्रेम चाहना, ये बड़ी अलग बातें हैं। हममें से अधिक लोग बच्चे ही रहकर मर जाते हैं। क्योंकि हरेक आदमी प्रेम चाहता है। प्रेम करना बड़ी अदभुत बात है। प्रेम चाहना बिलकुल बच्चों जैसी बात है-

आप इसे थोड़ा विचार करके देखे - आप अपने मन के भीतर। आपकी आकांक्षा प्रेम चाहने की है हमेशा। चाहते हैं, कोई प्रेम करे। और जब कोई प्रेम करता है, तो अच्छा लगता है। लेकिन आपको पता नहीं है, वह दूसरा भी प्रेम करना केवल वैसे ही है जैसे कि कोई मछलियों को मारने वाला आटा फेंकता है। आटा वह मछलियों के लिए नहीं फेंक रहा है। आटा वह मछलियों को फांसने के लिए फेंक रहा है। वह आटा मछलियों को दे नहीं रहा है, वह मछलियों को चाहता है, इसलिए आटा फेंक रहा है। इस दुनिया में जितने लोग प्रेम करते हुए दिखायी पड़ते हैं, वे केवल प्रेम पाना चाहने के लिए आटा फेंक रहे हैं। थोड़ी देर वे आटा खिलाएंगे, फिर-

दूसरा व्यक्ति भी जो उनमें उत्सुक होगा, वह इसलिए उत्सुक होगा कि शायद इस आदमी से प्रेम मिलेगा। वह भी थोड़ा प्रेम प्रदर्शित करेगा। थोड़ी देर बाद पता चलेगा, वे दोनों भिखमंगे हैं और भूल में थे; एक-दूसरे को बादशाह समझ रहे थे! और थोड़ी देर बाद उनको पता चलेगा कि कोई किसी को प्रेम नहीं दे रहा है और तब संघर्ष की शुरुआत हो जाएगी-

दुनिया में दाम्पत्य जीवन नर्क बना हुआ है, क्योंकि हम सब प्रेम मांगते हैं, देना कोई भी जानता नहीं है। सारे झगड़े के पीछे बुनियादी कारण इतना ही है। और कितना ही परिवर्तन हो, किसी तरह के विवाह हों, किसी तरह की समाज व्यवस्था बने, जब तक जो मैं कह रहा हूं अगर नहीं होगा, तो दुनिया में स्त्री और पुरुषों के संबंध अच्छे नहीं हो सकते। उनके अच्छे होने का एक ही रास्ता है कि हम यह समझें कि प्रेम दिया जाता है, प्रेम मांगा नहीं जाता, सिर्फ दिया जाता है-

प्रेम वह प्रसाद है, वह उसका मूल्य नहीं है। प्रेम दिया जाता है। जो मिलता है, वह उसका प्रसाद है, वह उसका मूल्य नहीं है। नहीं मिलेगा, तो भी देने वाले का आनंद होगा कि उसने दिया। अगर पति-पत्नी एक-दूसरे को प्रेम देना शुरू कर दें और मांगना बंद कर दें, तो जीवन स्वर्ग बन सकता है। और जितना वे प्रेम देंगे और मांगना बंद कर देंगे, उतना ही-अदभुत जगत की व्यवस्था है-उन्हें प्रेम मिलेगा। उतना ही वे अदभुत अनुभव करेंगे जितना वे प्रेम देंगे, उतना ही सेक्स उनका विलीन होता चला जाएगा-

उदहारण एक सत्य कथा से समझने का प्रयास करे तो समझ आ जाए - गांधी जी एक बार लंका गए और उनके साथ उनकी पत्नी कस्तूरबा भी गई -वहां जो व्यक्ति था, जिसने उनका परिचय दिया पहली सभा में, उसने समझा कि माँ आयी हैं साथ, शायद ये गांधी जी की मां होंगी। उसने परिचय में गांधी जी के कहा कि ‘यह बड़े सौभाग्य की बात है कि गांधी जी भी आए हैं और उनकी मां भी आयी हुई हैं-

कस्तूरबा तो बहुत हैरान हो गयीं। गांधी जी के सेक्रेटरी जो साथ थे, वे भी बहुत घबड़ा गए कि भूल तो उनकी है, उनको बताना चाहिए था कि कौन साथ है। वे बड़े घबड़ा गए कि शायद बापू डांटेंगे। शायद कहेंगे कि ‘यह क्या भद्दी बात करवायी- लेकिन गांधी जी ने जो बात कही, वह बड़ी अदभुत थी-

उन्होंने कहा कि ‘मेरे इन भाई ने मेरा जो परिचय दिया, उसमें भूल से एक सच्ची बात कह दी है। कुछ वर्षों से कस्तूरबा मेरी पत्नी नहीं है, मेरी मां हो गयी है। सच्चा संन्यासी वह है, जिसकी एक दिन पत्नी मां हो जाए; पत्नी को छोड़कर भाग जाने वाला नहीं। सच्ची संन्यासिनी वह है, जो एक दिन अपने पति को अपने पुत्र की तरह अनुभव कर पाए। पुराने ऋषि सूत्रों में एक अदभुत बात कही गयी है। पुराना ऋषि कभी आशीर्वाद देता था कि ‘तुम्हारे दस पुत्र हों और ईश्वर करे, ग्यारहवां पुत्र तुम्हारा पति हो जाए।’ बड़ी अदभुत बात थी। ये आशीर्वाद देते थे वधु को विवाह करते वक्त कि ‘तुम्हारे दस पुत्र हों और ईश्वर करे, तुम्हारा ग्यारहवां पुत्र तुम्हारा पति हो जाए।’ यह अदभुत कौम थी और अदभुत विचार थे। और इसके पीछे बड़ा रहस्य था- 

अगर पति और पत्नी में प्रेम बढ़ेगा, तो वे पति-पत्नी नहीं रह जाएंगे, उनके संबंध कुछ और हो जाएंगे। और उनसे सेक्स विलीन हो जाएगा और वे संबंध प्रेम के होंगे। जब तक सेक्स है, तब तक शोषण है। सेक्स वास्तविक में एक प्रकार का शोषण है- और जिसको हम प्रेम करते हैं, उसका शोषण कैसे कर सकते हैं? सेक्स एक व्यक्ति का, एक जीवित व्यक्ति का अत्यंत गर्हित और निम्न उपयोग है। अगर हम उसे प्रेम कर सकते हैं, तो हम उसके साथ ऐसा उपयोग कैसे कर सकते हैं? एक जीवित व्यक्ति का हम ऐसा उपयोग कैसे कर सकते हैं अगर हम उसे प्रेम करते हैं? जितना प्रेम गहरा होगा, वह उपयोग विलीन हो जाएगा। और जितना प्रेम कम होगा, वह उपयोग उतना ज्यादा हो जाएगा-

सेक्स एक सृजनात्मक शक्ति कैसे बने- कि सेक्स बड़ी अदभुत शक्ति है- शायद इस जमीन पर सेक्स से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। मनुष्य के जीवन का नब्बे प्रतिशत हिस्सा जिस चक्र पर घूमता है, वह सेक्स है; वह परमात्मा नहीं है। वे लोग तो बहुत कम हैं, जिनका जीवन परमात्मा की परिधि पर घूमता है। अधिकतर लोग सेक्स के केंद्र पर घूमते और जीवित रहते हैं-

सेक्स सबसे बड़ी शक्ति है। यानि अगर हम ठीक से समझें, तो मनुष्य के भीतर सेक्स के अतिरिक्त और शक्ति ही क्या है, जो उसे गतिमान करती है, परिचालित करती है। इस सेक्स की शक्ति को, इस सेक्स की शक्ति को ही प्रेम में परिवर्तित किया जा सकता है। और यही शक्ति परिवर्तित होकर परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग बन जाती है-

उपचार और प्रयोग-

युवावर्ग नपुंसकता और स्वप्नदोष की दवा खोजते है -भाग-दूसरा

पहले भाग का शेष -





सांतवा प्रयोग:-



गाजर- 1 किलो

चीनी - 400 ग्राम

खोआ - 250 ग्राम

दूध - 500 ग्राम

कद्दू -कश किया हुआ नारियल - 10 ग्राम

किशमिश - 10 ग्राम

काजू - 10-15 पीस

देशी घी - 4 चम्मच


गाजर को कद्दूकस करके कडा़ही में डालकर पकाएं। पानी के सूख जाने पर इसमें दूध, खोआ और चीनी डाल दें तथा इसे चम्मच से चलाते रहें। जब यह सारा मिश्रण गाढ़ा होने को हो तो इसमें नारियल, किशमिश, बादाम और काजू डाल दें। जब यह पदार्थ गाढ़ा हो जाए तो थाली में देशी घी लगाकर हलवे को थाली पर निकालें और ऊपर से चांदी का वर्क लगा दें। इस हलवे को चार-चार चम्मच सुबह और शाम खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिए। यह वीर्यशक्ति बढ़ाकार शरीर को मजबूत रखता है। इससे सेक्स शक्ति भी बढ़ती है। ये देशी गाजर-पाक(हलवा ) लोग जाड़े में प्रयोग करते है लेकिन नियमित प्रयोग से अदभुद शक्ति  आती  है -


अन्य प्रयोग:-



ढाक के 100 ग्राम गोंद को तवे पर भून लें। फिर 100 ग्राम तालमखानों को घी के साथ भूनें। उसके बाद दोनों को बारीक काटकर आधा चम्मच सुबह और शाम को दूध के साथ खाना खाने के दो-तीन घंटे पहले ही इसका सेवन करें। इसके कुछ ही दिनों के बाद वीर्य का पतलापन दूर होता है तथा सेक्स क्षमता में बहुत अधिक रुप से वृद्धि होती है।

100 ग्राम कौंच के बीज और 100 ग्राम तालमखाना को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। फिर इसमें 200 ग्राम मिश्री पीसकर मिला लें। हल्के गर्म दूध में आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर रोजाना इसको पीना चाहिए। इसको पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है तथा नामर्दी दूर होती है।

चार-पांच छुहारे, दो-तीन काजू तथा दो बादाम को 300 ग्राम दूध में खूब अच्छी तरह से उबालकर तथा पकाकर दो चम्मच मिश्री मिलाकर रोजाना रात को सोते समय लेना चाहिए। इससे यौन इच्छा और काम करने की शक्ति बढ़ती है।

आप आधा चम्मच सफेद प्याज का रस, आधा चम्मच शहद तथा आधा चम्मच मिश्री के चूर्ण को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करें। यह मिश्रण वीर्यपतन को दूर करने के लिए काफी उपयोगी रहता है।

एक चम्मच त्रिफला के चूर्ण को रात को सोते समय 5 मुनक्कों के साथ लेना चाहिए तथा ऊपर से ठंडा पानी पिएं। यह चूर्ण पेट के सभी प्रकार के रोग, स्वप्नदोष तथा वीर्य का शीघ्र गिरना आदि रोगों को दूर करके शरीर को मजबूती प्रदान करता है।

आधा ग्राम तुलसी के बीज तथा 5 ग्राम पुराने गुड़ को बंगाली पान पर रखकर अच्छी तरह से चबा-चबाकर खाएं। इस मिश्रण को विस्तारपूर्वक 40 दिनों तक लेने से वीर्य बलवान बनता है, संभोग करने की इच्छा तेज हो जाती है और नपुंसकता जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।

जायफल 10 ग्राम, लौंग 10 ग्राम, चंद्रोदय 10 ग्राम, कपूर 10 ग्राम और कस्तूरी 6 ग्राम को कूट-पीसकर इस मिश्रण के चूर्ण की 60 खुराक बना लें। इसमें से एक खुराक को पान के पत्ते पर रखकर धीरे-धीरे से चबाते रहें। जब मुंह में खूब रस जमा हो जाए तो इस रस को थूके नहीं बल्कि पी जाएं। इसके बाद थोड़ी सी मलाई का इस्तेमाल करें। यह चूर्ण रोजाना लेने से नपुंसकता जैसे रोग दूर होते हैं तथा सेक्स शक्ति में वृद्धि होती है। कुछ पान वाले इसे पलंग -तोड़ पान कह कर यही सब डाल के आपको देते है -

15 ग्राम जायफल, 20 ग्राम हिंगुल भस्म, 5 ग्राम अकरकरा और 10 ग्राम केसर को मिलाकर बारीक पीस लें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर इमामदस्ते में घोटें। उसके बाद चने के बराबर छोटी-छोटी गोलियां बना लें। रोजाना रात को सोने से 2 पहले 2 गोलियां गाढ़े दूध के साथ सेवन करें। इससे #शिश्न (लिंग) का ढ़ीलापन दूर होता है तथा नामर्दी दूर हो जाती है।

एक अच्छा सा बड़े आकार का सेब ले लीजिए। इसमें हो सके जितनी ज्यादा से ज्यादा लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। इसी तरह का एक अच्छा सा बड़े आकार का नींबू ले लीजिए। इसमें जितनी ज्यादा से ज्यादा हो सके, लौंग चुभाकर अंदर तक डाल दीजिए। दोनों फलों को एक सप्ताह तक किसी बर्तन में ढककर रख दीजिए। एक सप्ताह बाद दोनों फलों में से लौंग निकालकर अलग-अलग शीशी में भरकर रख लें। पहले दिन नींबू वाले दो लौंग को बारीक कूटकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इस तरह से बदल-बदलकर 40 दिनों तक 2-2 लौंग खाएं। यह एक तरह से सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला एक बहुत ही सरल उपाय है।

100 ग्राम अजवायन को सफेद प्याज के रस में भिगोकर सुखा लें। सूखने के बाद उसे फिर से प्याज के रस में गीला करके सुखा लें। इस तरह से तीन बार करें। उसके बाद इसे कूटकर किसी शीशी में भरकर रख लें। आधा चम्मच इस चूर्ण को एक चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ मिलाकर खा जाएं। फिर ऊपर से हल्का गर्म दूध पी लें। करीब-करीब एक महीने तक इस मिश्रण का उपयोग करें। इस दौरान संभोग बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। यह सेक्स क्षमता को बढ़ाने वाला सबसे अच्छा उपाय है।

सूखा आंवला, गोखरू, कौंच के बीज, सफेद मूसली और गुडुची सत्व- इन पांचो पदार्थों को समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच देशी घी और एक चम्मच मिश्री में एक चम्मच चूर्ण मिलाकर रात को सोते समय इस मिश्रण को लें। इसके बाद एक गिलास गर्म दूध पी लें। इस चूर्ण से सेक्स कार्य में अत्यंत शक्ति आती है।

इलायची के दानों का चूर्ण 2 ग्राम, जावित्री का चूर्ण 1 ग्राम, बादाम के 5 पीस और मिश्री 10 ग्राम ले लें। बादाम को रात के समय पानी में भिगोकर रख दें। सुबह के वक्त उसे पीसकर पेस्ट की तरह बना लें। फिर उसमें अन्य पदार्थ मिलाकर तथा दो चम्मच मक्खन मिलाकर विस्तार रुप से रोजाना सुबह के वक्त इसको सेवन करें। यह वीर्य को बढ़ाता है तथा शरीर में ताकत लाकर सेक्स शक्ति को बढ़ाता है।

वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है।

आधा चम्मच उड़द की दाल और कौंच की दो-तीन कोमल कली को बारीक पीसकर सुबह तथा शाम को लेना चाहिए। यह उपाय काफी फायदेमंद है। इस नुस्खे को रोजाना लेने से सेक्स करने की ताकत बढ़ जाती है।

4 ग्राम सोंठ, 4 ग्राम सेमल का गोंद, 2 ग्राम अकरकरा, 28 ग्राम पिप्पली तथा 30 ग्राम काले तिल को एकसाथ मिलाकर तथा कूटकर बारीक चूर्ण बना लें। रात को सोते समय आधा चम्मच चूर्ण लेकर ऊपर से एक गिलास गर्म दूध पी लें। यह रामबाण औषधि शरीर की कमजोरी को दूर करती है तथा सेक्स शक्ति को बढ़ाती है।

पीपल का फल और पीपल की कोमल जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चटनी बना लें। इस 2 चम्मच चटनी को 100 मि.ली. दूध तथा 400 मि.ली. पानी में मिलाकर उसे लगभग चौथाई भाग होने तक पकाएं। फिर उसे छानकर आधा कप सुबह और शाम को पी लें। इसके इस्तेमाल करने से वीर्य में तथा सेक्स करने की ताकत में वृद्धि होती है।

2 चम्मच आंवला के रस में एक छोटा चम्मच सूखे आंवले का चूर्ण तथा एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर दिन में दो बार सेवन करना चाहिए। इसके इस्तेमाल से सेक्स शक्ति धीरे-धीरे बढ़ती चली जाएगी।

सूर्यास्त से पहले बरगद के पेड़ से उसके पत्ते तोड़कर उसमें से निकलने वाले दूध की 10-15 बूंदें चीनी के बताशे पर रखकर खाएं। इसके प्रयोग से आपका वीर्य भी बनेगा और सेक्स शक्ति भी अधिक हो जाएगी।

पहला भाग देखे लिंक -युवावर्ग नपुंसकता और स्वप्नदोष की दवा खोजते है -प्रथम भाग 


युवावर्ग नपुंसकता और स्वप्नदोष की दवा खोजते है -प्रथम भाग

आज कल बाजारों में अधिक मात्रा में "सेक्स-शक्ति" को बढ़ाने वाली दवाईयां भी मिलती है। आज के युवा लोग इन दवाईयों को काफी मात्रा में प्रयोग कर रहे हैं-लेकिन वे सभी लोग यह नहीं जानते हैं कि ये दवाईयां उनके शरीर पर कितना गलत प्रभाव ड़ालती है। इनका साइड इफेक्ट भी इस प्रकार का है कि पहले तो ये स्थाई प्रभाव हीन है और दूसरे ये आपको इस प्रकार के रोगों से पीड़ित कर देती है जिनकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते है-






यही कारण है कि बाद में युवा वर्ग नपुंसकता और स्वप्नदोष जेसी दवा खोजते फिर रहे है -

कुछ लोग तो इस प्रकार की बाज़ार से खरीदी गई दवाओ से पेरालाइसिस ,उच्च रक्तचाप ,मधुमेह ,एलर्जी आदि का भी शिकार हो रहे है .उन सभी युवाओं से मेरा अनुरोध है कि स्वयं के शरीर को इन बाजारू दवाओ से मुक्त रक्खे -

आप कुछ ऐसे घरेलू उपाय है जिनको आप खुद ही तैयार करके प्रयोग में ला सकते हैं। ये घरेलू नुस्खें सरल, सस्ते, नुकसान रहित तथा लाभदायक है। थोड़ी सी मेहनत से आप इसे स्वयं बना सकते है -


पहला प्रयोग:-



तालमखाने के बीज-100 ग्राम

ढाक(पलाश ) का गोंद-100 ग्राम

चोबचीनी-100 ग्राम

मोचरस-100 ग्राम

मिश्री-250 ग्राम


उपरोक्त सभी चीजो को कूट-पीस के चूर्ण बना ले -रोजाना सुबह के समय एक चम्मच चूर्ण में 4 चम्मच मलाई मिलाकर खाएं। यह मिश्रण यौन रुपी कमजोरी, नामर्दी तथा वीर्य का जल्दी गिरना जैसे रोग को खत्म कर देता है-


दूसरा प्रयोग:-



आधा किलो इमली के बीज लेकर उसके दो हिस्से कर दें। इन बीजों को तीन दिनों तक पानी में भिगोकर रख लें। इसके बाद छिलकों को उतारकर बाहर फेंक दें और सफेद बीजों को खरल में डालकर पीसें। फिर इसमें आधा किलो पिसी मिश्री मिलाकर कांच के खुले मुंह वाली एक चौड़ी शीशी में रख लें। आधा चम्मच सुबह और शाम के समय में दूध के साथ लें। इस तरह से यह उपाय वीर्य के जल्दी गिरने के रोग तथा संभोग करने की ताकत में बढ़ोतरी करता है-


तीसरा प्रयोग:-



अश्वगंधा का चूर्ण-100 ग्राम

असगंध-100 ग्राम

बिदारीकंद-100 ग्राम


उपरोक्त सभी सामग्री ले के चूर्ण बना ले - इसमें से आधा चम्मच चूर्ण दूध के साथ सुबह और शाम लेना चाहिए। यह मिश्रण वीर्य को ताकतवर बनाकर शीघ्रपतन की समस्या से छुटकारा दिलाता है।


चौथा प्रयोग:-



उंटगन के बीज-6 ग्राम

तालमखाना- 6 ग्राम

गोखरू -6 ग्राम


इन सभी सामग्री को समान मात्रा में लेकर उसे आधा लीटर दूध में मिलाकर पकाएं। यह मिश्रण लगभग आधा रह जाने पर इसे उतारकर ठंडा हो जाने दें। इसे रोजाना 21 दिनों तक समय अनुसार लेते रहें। इससे नपुंसकता (नामर्दी) रोग दूर हो जाता है। ये प्रयोग बुढ़ापे में भी जवानी देने वाला है .


पांचवा प्रयोग:-



शंखपुष्पी- 100 ग्राम

ब्राह्नी- 100 ग्राम

असंगध- 50 ग्राम

तज- 50 ग्राम

मुलहठी -50 ग्राम

शतावर- 50 ग्राम

विधारा- 50 ग्राम

शक्कर -450 ग्राम


इन उपरोक्त सभी सामग्री को बारीक कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम को लेना चाहिए। इस चूर्ण को तीन महीनों तक रोजाना सेवन करने से नाईट-फाल (स्वप्न दोष), वीर्य की कमजोरी तथा नामर्दी आदि रोग समाप्त होकर सेक्स- शक्ति में ताकत आती है-


छठा प्रयोग:-




सालम मिश्री- 50 ग्राम

तालमखाना- 50 ग्राम

सफेद मूसली- 50 ग्राम

कौंच के बीज- 50 ग्राम

गोखरू - 50 ग्राम

ईसबगोल- 50 ग्राम

इन सबको समान मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस एक चम्मच चूर्ण में एक चम्मच मिश्री मिलाकर सुबह-शाम 250 ग्राम दूध के साथ पीना चाहिए। यह वीर्य को ताकतवर बनाता है तथा सेक्स शक्ति में अधिकता लाता है-

दूसरा भाग लिंक पे देखे-युवावर्ग नपुंसकता और स्वप्नदोष की दवा खोजते है -भाग-दूसरा

मानसिक रोग से मुक्ति के लिए उपचार -

तनाव भरी जिन्दगी ,काम की भागदौड ,घरेलू झगडे ,इसका आपके मस्तिष्क पे बुरा प्रभाव पड़ता है जिससे स्मरण-शक्ति का हास होना स्वाभाविक है और धीरे-धीरे समयानुसार आत्मविश्वास में कमी होने लगती है -



इन सभी कमियों को दूर करना भी आवश्यक है वर्ना कुछ समय बाद आपको भूलने जैसी बीमारी से दो-चार होना पड़ता है इस प्रकार का व्यक्ति क्रोध ,बैचेनी,सिरदर्द ,आत्म-ग्लानी का भी शिकार हो जाता है -

आप सभी के लिए एक नुस्खा है जिसे प्रयोग करके अपने मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाए -


सामग्री :-


शंखपुष्पी - 100 ग्राम

ब्राह्मी     - 100 ग्राम

गिलोय    - 100 ग्राम

आंवला    - 100 ग्राम (सूखा हुआ )

जटामासी - 100 ग्राम (सभी सामग्री आयुर्वेद जड़ी-बूटी विक्रेता से आसानी से प्राप्त )


प्रयोग विधि:- 


उपरोक्त सभी सामग्री को महीन कूट-पीस करछान कर एक एयर टाईट कांच के बर्तन में रख ले और प्रतिदिन इसकी एक-एक चम्मच मात्रा शहद ,या जल , या आंवले के शरबत के साथ दिन में तीन बार ले तथा बच्चो को इसकी मात्रा आधा चम्मच दे - गर्भवती महिला यदि गर्भ-काल में नियमित सेवन करती है तो होने वाला बच्चा हर प्रकार से स्वस्थ और मानसिक रोगों मुक्त रहता है- वृद्ध भी इसका सेवन कर सकते है - ये पूर्ण रूप से सुरक्षित प्रयोग है -

उपचार और प्रयोग-

Sunday, November 1, 2015

दूसरी स्त्री के प्रति आसक्ति दूर करे - To remove the attachment to another woman

अगर आपके पति किसी अन्य स्त्री पर आसक्त हैं और आप से लड़ाई-झगड़ा इत्यादि करते हैं पति स्वभाव ही चंचल प्रवर्ती का होता है बहुत कम लोग है जो इनसे भिन्न है जरा सा भी सुन्दरता या आकर्षण से उस ओर खिचे चले जाते है इस प्रकार के पतियों के लिए जो अन्य स्त्री के मोहजाल में फंस गये हों या आपस में प्रेम नहीं रखते हों तथा  लड़ाई-झगड़ा करते हों तो इस प्रयोग  द्वारा पति को अपने अनुकूल बनाया जा सकता है-



अगर आपके पति किसी अन्य स्त्री पर आसक्त हैं और आप से लड़ाई-झगड़ा इत्यादि करते हैं। तो यह प्रयोग आपके लिए बहुत कारगर है प्रत्येक रविवार को अपने घर तथा शयनकक्ष में गूगल की धूनी दें-धूनी करने से पहले उस स्त्री का नाम लें और यह कामना करें कि आपके पति उसके चक्कर से शीघ्र ही छूट जाएं। श्रद्धा-विश्वास के साथ करने से निश्चिय ही आपको लाभ मिलेगा।

जिन स्त्रियों के पति किसी अन्य स्त्री के मोहजाल में फंस गये हों या आपस में प्रेम नहीं रखते हों, लड़ाई-झगड़ा करते हों तो इस टोटके द्वारा पति को अनुकूल बनाया जा सकता है।

गुरुवार अथवा शुक्रवार की रात्रि में १२ बजे पति की चोटी (शिखा) के कुछ बाल काट लें और उसे किसी ऐसे स्थान पर रख दें जहां आपके पति की नजर न पड़े। ऐसा करने से आपके पति की बुद्धि का सुधार होगा और वह आपकी बात मानने लगेंगे। कुछ दिन बाद इन बालों को जलाकर अपने पैरों से कुचलकर बाहर फेंक दें। मासिक धर्म के समय करने से अधिक कारगर सिद्ध होगा।

शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार को प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर अपने पूजन स्थल पर आएं। एक थाली में केसर से स्वस्तिक बनाकर गंगाजल से धुला हुआ मोती शंख स्थापित करें और गंध, अक्षत पुष्पादि से इसका पूजन करें। पूजन के समय गोघृत का दीपक जलाएं और निम्नलिखित मंत्र का 1 माला जप स्फटिक की माला पर करें। श्रद्धा-विश्वास पूर्वक 1 महीने जप करने से किसी भी व्यक्ति विशेष का मोहन-वशीकरण एवं आकर्षण होता है। जिस व्यक्ति का नाम, ध्यान करते हुए जप किया जाए वह व्यक्ति साधक का हर प्रकार से मंगल करता है। यह प्रयोग निश्चय ही कारगर सिद्ध होता है।

मंत्र : ऊँ क्रीं वांछितं मे वशमानय स्वाहा।''

पति-पत्नी के बीच वैमनस्यता को दूर करने हेतु :-


रात को सोते समय पत्नी पति के तकिये में सिंदूर की एक पुड़िया और पति पत्नी के तकिये में कपूर की दो टिकियां रख दें। प्रातः होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें तथा कपूर को निकाल कर उस कमरे जला दें।


पति को वश में करने के लिए :-


ये प्रयोग किसी भी माह के शुक्ल पक्ष से आरम्भ करे आप एक पान का पत्ता ले कर उसके उपर चन्दन पावडर और केसर पावडर को मिला कर रक्खे तथा दुर्गा माँ की फोटो के सामने चढ़ाये माता जी की फोटो के सामने बैठ कर चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें तदुपरांत पाठ करने के उसी चन्दन और केसर का तिलक आप माथे पे लगा कर पति के सामने जाए यदि किसी कारण से पति घर पे न हो तो उनकी तस्वीर के समक्ष जाए  पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो - रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें - 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें - शीघ्र समस्या का समाधान होगा -

शनिवार की रात्रि में 7 लौंग लेकर उस पर 21 बार जिस व्यक्ति को वश में करना हो उसका नाम लेकर फूंक मारें और अगले रविवार को इनको आग में जला दें। यह प्रयोग लगातार 7 बार करने से अभीष्ट व्यक्ति का वशीकरण होता है।

उपचार और प्रयोग -

उच्च रक्तचाप का घरेलू उपचार - Home remedies for high blood pressure

जिनको हाई बीपी (रक्तचाप ) उनके लिए दवाइयों से बचने के लिए एक सुंदर, सफल उपाय खर्च भी खास नही और फायदा भी पक्का है -हाई बीपी के जो भी बीमार हो या मरीज हो उनके लिए ये आशीर्वाद रूप है -





आपको बस पहले दिन एक दाना किसमिस रात को गुलाब जल मे भीगा देना है और सुबह चबा के खाना है बस गुलाबजल उतना ले जितने मे किसमिस भीग जाए-

फिर दूसरे दिन दो किसमिस के दाने -

तीसरे दिन तीन -

चौथे दिन चार -

पाचवे दिन पाँच -

तो छटे दिन छे -

ऐसे 21 दाने तक बढाते ही चले जाओ -

फिर ये प्रयोग को 10-15 दिन बंद करें दे 

इसके बाद अब आपको वापस उसी प्रकार शुरू करना है -

फिर एक से 21 दाने तक -कोर्स शुरू करे जैसे पहले किया था-

बस ऐसे 1-2 कोर्स करें आपकी हाई बीपी चली जाएगी-

आप गुलाबजल बाजारू न ले ध्यान रखे घर में ही बना ले -

गुलाब के पत्तों को पानी मे उबाल कर उसकी भाप जमा कर ले -

ये प्रयोग करे और परिणाम खुद ही देखे -

साथ में ये भी करे :-


अपनी छोटी उंगली के नीचे की रेखा को ऊपर दबाने पे हृदय प्रॉब्लम में अद्भुत लाभ होता है हृदयामृत वटी दो-दो गोली सुबह शाम ले -

किसी भी तरह के हृदय रोगों के लिए लोकी का जूस बहुत ही जादा लाभकारी होता है लोकी के 200 एम् एल जूस में तुलसी व पुदीना के 7-7 पत्ते व 2-3 काली मिर्च साथ में मिला के पिए तो बहुत लाभ होगा-

अर्जुनारिस्ट को खाना खाने के बाद 4-4 चम्मच  ले सकते हैं-

राजीव भाई द्वारा अनुमोदित -

उपचार और प्रयोग -