Wednesday, December 23, 2015

ये रक्त विकार एक घातक रोग है


खून की खराबी अर्थात् रक्त विकार एक घातक रोग है| यदि समय रहते इसका उपचार न किया जाए तो कष्टदायी चर्म रोग घेर लेते हैं| इनसे व्यक्ति के मन में हीन भावना उत्पन्न हो जाती है| इस रोग में छुटकारा पाने के लिए सबसे पहले मिर्च, चाय, अचार, तेल, खटाई आदि का प्रयोग बंद कर देना चाहिए, तभी कोई उपचार कारगर सिद्ध होता है|
कारण:-
  1. समय में भोजन न करने, मिर्च-मसालों का अधिक प्रयोग, प्रकृति के विरुद्ध भोजन जैसे-मछली-दूध, केला-करेला, दही-नीबू, दही-शहद, शहद-नीबू आदि का सेवन, नाड़ी की दुर्बलता, कब्ज, अजीर्ण आदि कारणों से खून में खराबी पैदा हो जाती है|
  2. खून खराब होने पर तरह-तरह के चर्म रोग हो जाते हैं| त्वचा के ददोरे, फोड़े-फुन्सी, दाद-खाज, खुजली आदि अनेक रोग बन जाते हैं| त्वचा में खुजली होती है| चकत्ते पड़ जाते हैं| खून नीला-सा दिखाई देने लगता है| पेट साफ नहीं रहता| खांसी एवं वायु रोग का प्रकोप हो जाता है| 
नुस्खे:-
  1. रात को गरम पानी के साथ दो हरड़ का चूर्ण लें|
  2. दिन में दो बार एक-एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी से लें|
  3. नीम की छाल, उसवा और कुटकी - इन तीनों का चूर्ण 3-3 ग्राम दिन में दो बार शहद के साथ चाटें|
  4. चोपचीनी, मंजीठ और गिलोय का चूर्ण 3-3 ग्राम फांककर ऊपर से एक गिलास दूध पी लें|
  5. सौंफ, गावजबां, गुलाब के फूल तथा मुलहठी - सब 5-5 ग्राम की मात्रा में लेकर दो कप पानी डालकर आग पर रख दें| जब पानी जलकर आधा रह जाए तो छानकर उसमें मिश्री मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें| इससे पेट साफ हो जाएगा और साफ खून बनने की क्रिया शुरू हो जाएगी|
  6. लौकी की सब्जी बगैर नमक के उबली हुई खाने से भी खून की खराबी दूर होती है|
  7. 10 ग्राम गुलकंद का सेवन दूध के साथ करें|
  8. नीम की छाल को पानी में घिस लें| फिर उसमें कपूर मिलाकर शरीर के रोगग्रस्त भाग पर लगाएं|
  9. शरीर पर गोमूत्र मलकर थोड़ी देर तक यों ही बैठे रहें| फिर स्नान कर लें| गोमूत्र त्वचा रोगों के लिए बहुत लाभकारी है|
  10. खून की खराबी दूर करने के लिए सरसों के तेल में लाल मिर्च को पीसकर डालें| फिर यथास्थान लगाएं|
  11. अंजीर के पत्तों को पीसकर घी में मिला लें| स्नान से पूर्व शरीर पर इसकी मालिश करें|
  12. चर्म रोग वाले स्थान को दिन में तीन-चार बार फिटकिरी के पानी से धोना चाहिए|
  13. कच्चे पपीते का रस दो चम्मच सुबह के समय सेवन करें|
  14. करेले का रस एक-एक चम्मच सुबह-शाम सेवन करें|
  15. शरीर पर मूंगफली के तेल की मालिश करें|
  16. पानी में लहसुन का रस दो चम्मच की मात्रा में मिलाकर पिएं|
  17. गोबर को निचोड़कर उसके पानी से शरीर की मालिश करें|
  18. परवल पाचक, गरम, स्वादिष्ट, ह्वदय के लिए हितकर, वीर्यवर्धक, जठराग्निवर्धक, पौष्टिक, विकृत कफ को बाहर निकालने वाला और त्रिदोष नाशक है। यह सर्दी, खाँसी, बुखार, कृमि, रक्तदोष, जीर्ण ज्वर, पित्त के ज्वर और रक्ताल्पता को दूर करता है। परवल दो प्रकार के होते हैं- मीठे और कड़वे। सब्जी के लिए सदैव मीठे, कोमल बीजवाले और सफेद गूदेवाले परवल का उपयोग किया जाता है। जो परवल ऊपर से पीले तथा कड़क हो जाते हैं वे अच्छे नहीं माने जाते।
  19. श्वेत अर्कत्वक मूल चूर्ण में शक्कर मिलाकर सेवन करने से आमवात, कुष्ठ, उपदंश व अन्य रक्तविकारों में अत्यन्त लाभ होता है।
  20. रक्त शुद्ध करने के लिए चोबचीनी का प्रयोग बहुत अच्छा है।
  21. जटामांसी को घोट छानकर मधु मिलाकर पीने से रक्त शुद्ध होता है।
  22. मुनक्का रक्त को शुद्ध करके बढ़ाने वाला है।
  23. नारियल पानी से रक्त शुद्ध होता है।
  24. परवल के पत्तों को ओटा मधु मिलाकर पिलाने से रक्त शुद्ध होता है।
  25. वद्र्धमान पिप्पली के प्रयोग से रक्त शुद्ध होकर शरीर का मल बढ़ता है।
  26. सूखे पौदीने को पीस के फंकी लेने से रुधिर का जमना बन्द हो जाता है।
  27. भांगरे के पत्ते बलवद्र्धक और रक्तशोधन है।
  28. बकरी के कच्चे दूध में आठवां भाग मधु मिला के पिलाने से रुधिर शुद्ध हो जाता है जिन दिनों में यह प्रयोग किया जाए उन दिनों में उस रोगी को सांभर नमक और लालमिर्च के बदले में सैन्धा नमक और कालीमिर्च देनी चाहिए।
  29. पिस्ते के तेल का सेवन करने से रक्त में जो किसी तत्व की न्यूनता होती है वह मिट जाती है।
  30. गोरखमुण्डी के पुष्पों के प्रयोग से रक्त शुद्ध होता है।
  31. सफेद मुसली रक्त शोधक, मूत्र और पुरुषार्थवद्र्धक है।
  32. रत्नजोत के पत्तों के रस में मधु मिला के पिलाने से रक्त शुद्ध होता है।
  33. एरण्ड के पत्तों को रार्इ तेल से चुपड़ अगिन पर तपा के बांधने से शरीर में जमा हुआ रक्त बिखर जाता है।
  34. लज्जालू (छुर्इमुर्इ) सूजन रोकती है और रक्त को शुद्ध करती है।
  35. बादाम की जड़ का क्वाथ पीने से रक्त शुद्ध होता है।
  36. बिदारीकंद रक्त को शुद्ध करने वाली और दूध बढ़ाने वाली है।
  37. शरफोंका के पंचाग के क्वाथ में मधु मिलाकर पिलाने से रक्त शुद्ध होता है तथा फोड़े-फुनिसयां ठीक होते हैं।
  38. सफेद जीरा और अनन्तमूल का क्वाथ पिलाने से रक्त शुद्ध हो जाता है।
  39. बच्चों का रुधिर शुद्ध करके निर्बलता मिटाने के लिए अन्नतमूल को दूध और शक्कर के साथ औटा के पिलाना चाहिए।
  40. सेब खाने से शरीर पुष्ट तथा रुधिर शुद्ध होता है।
  41. वासापत्र, त्रिफला, खदिरत्वक नीम की अन्तरछाल, पटोल पत्र और गिलोय को बराबर भाग में लेकर यवकुट कर क्वाथ बना उसमें मधु या मिश्री मिलाकर पिएं।
  42. शतावरी मूल, चक्रमर्द मूल और बलामूल को समान मात्रा में लेकर इनका क्वाथ बनाकर (32 गुने जल में अष्टमांश शेष जल) इसमें मिश्री और इलायची मिलाकर पिलावें।
  43. शतावरी स्वरस में दुगुनी शक्कर मिलाकर शर्बत बनाएं। फिर उसमें केसर, जायफल, जावित्री और छोटी इलायची चूर्ण मिलाकर (शर्बत 40 मि.ली., चूर्ण 50 मि.ग्रा.) 42 दिनों तक पीने से रक्त विÑति जन्यविष मूत्र द्वारा बाहर निकल जाता है और रक्तशुद्धि हो जाती है। शर्बत में दूध या पानी भी मिलाया जा सकता है।
  44. शालपर्णी की जड़ और पत्तों का काढ़ा कालीमिर्च के साथ रक्त विकार शामक है।
  45. श्वेत सरिता, उष्णसरिता, माषपर्णी, मुग्दपर्णी, इलायची, लवंग, कचूर इनका क्वाथ बनाकर इस क्वाथ में अमलतास के गूदे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से प्राय: सभी प्रकार के रक्त विकार मिटते हैं।
  46. सरिवा (अनन्त मूल), सुगन्धबाला, नागरमोथा, सौंठ, कुटकी सम मात्रा में चूर्ण करके 2-3 ग्राम पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

बच्चो के पेट के कीड़े से परेशान..?


आमाशय और अंतड़ियों में बहुत से विकार पाए जाते हैं। उनमें से कृमि रोग भी बच्चे को परेशान करता है। ये कृमि लगभग 20 प्रकार के होते हैं जो अंतड़ियों में घाव पैदा कर देते हैं। अत: रोगी बेचैन हो जाता है। ये पेट में वायु को बढ़ा देते हैं जिसके कारण हृदय की धड़कन बढ़ जाती है। कृमि रोग में रोगी को उबकाई आती रहती है। कई बार भोजन के प्रति अरुचि भी उत्पन्न हो जाती है। चक्कर आने लगते हैं तथा प्यास अधिक लगती है।
यह रोग गंदगी के कारण होता है। मक्खियों द्वारा गंदा भोजन, जल, दूध आदि के सेवन से इसका प्रसार तेजी से होता है। रोगी की आंतों से कृमि के अण्डे मल के साथ निकलकर बाहर आ जाते हैं और धरती पर फैल जाते हैं। फिर ये लार्वा रेंगते-रेंगते बड़े हो जाते हैं। जब व्यक्ति सड़क, घास आदि पर चलता है तो ये उसके पैरों में चिपट जाते हैं तथा त्वचा भेदकर शरीर के भीतर पहुंच जाते हैं।

कारण:- बच्चों द्वारा मिट्टी खाने, दूषित भोजन ग्रहण करने, गंदे कपड़े पहनने, शरीर की उचित सफाई न करने, मांस, मछली, गुड़, दही, सिरका आदि अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट में कीड़े हो जाते हैं।


पहचान:- बच्चों को बदहजमी, पेट में दर्द, बुखार आदि की शिकायत हो जाती हैं। उनके चेहरे का रंग उड़ जाता है। दस्त लग जाते हैं तथा भोजन में अरुचि उत्पन्न होने लगती है।


नुस्खे :- 
  1. एक चम्मच करेले का रस, एक चम्मच नीम की पत्तियों का रस, एक चम्मच पालक का रस और जरा-सा सेंधा नमक-सबको मिलाकर दो खुराक बनाएं। सुबह-शाम भोजन के बाद इसका सेवन करें। इन रसों में कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाएंगे।
  2. छाछ में काला नमक और कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं। 
  3. लहसुन की चटनी बनाकर सुबह निहार मुंह खाकर ऊपर से पानी पी लें। कीड़े मर जाएंगे। 
  4. गरम पानी में आधा चम्मच हल्दी डालकर एक सप्ताह तक रोज इसका सेवन करें। 
  5. एक चम्मच नीम की पत्तियों के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर नित्य सुबह-शाम सेवन करें। 
  6. अनार के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर सेवन करें। 
  7. 2 ग्राम बायबिड़ंग का चूर्ण और 8-10 पत्ते तुलसी-दोनों की चटनी बनाकर सुबह-शाम खाएं। 
  8. नारंगी के छिलके 10 ग्राम और बायबिड़ंग 10 ग्राम - दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें। 3-3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम खाकर ऊपर से गरम पानी पी लें। 
  9. थोड़े से अनार के छिलके सुखा-पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 3 ग्राम चूर्ण छाछ के साथ सेवन करें। 
  10. 3 ग्राम अजवायन, 3 ग्राम बायबिड़ंग तथा 1 ग्राम कपूर-इन सबको पीसकर उसमें जरा-सा गुड़ मिलाएं। 3 ग्राम दवा दिन के भोजन के बाद लें। 
  11. करेले के रस में एक चुटकी हींग डालकर पीने से पेट के कृमि मल के साथ निकल जाते हैं। 
  12. 25 ग्राम राई का चूर्ण गोमूत्र में मिलाकर सुबह-शाम लें। 
  13. आम की गुठली की पुतली या गिरी निकालकर चूर्ण बना लें। फिर 5 ग्राम चूर्ण में जरा-सा नमक डालकर सेवन करें। 
  14. केले की सब्जी लगातार चार दिनों तक खाने से कृमि मर जाते हैं। 
  15. गाजर का रस रोज एक कम की मात्रा में एक सप्ताह तक नित्य पीने से कृमि रोग नष्ट हो जाता है। 
  16. प्याज के रस में जरा-सा नमक मिलाकर पिलाने से बच्चों के पेट में कीड़े मल द्वारा बाहर निकल जाते हैं। 
  17. शहतूत का शरबत पेट के कीड़े मारने के लिए बहुत उपयोगी है। 
  18. 5 ग्राम बथुए के बीज पीसकर शहद मिलाकर सेवन करें। 
  19. पपीते के बीजों को सुखाकर उनका चूर्ण बना लें। एक चुटकी चूर्ण दिन में तीन बार शहद के साथ दें। 
  20. अजवायन का चूर्ण एक चुटकी की मात्रा में दिन में दो बार गुड़ के साथ देना चाहिए। 
  21. एक चम्मच बथुए का रस सुबह बिना कुछ खिलाए पिला दें। 
  22. केसर तथा कपूर-दोनों एक-एक रत्ती की मात्रा में पीसकर दूध के साथ चार-पांच दिन तक दें। कीड़े मल के साथ निकल जाएंगे। 
  23. पत्थरधोड़ी का चूर्ण दो रत्ती की मात्रा में शहद से चटाएं। 
  24. चौथाई चम्मच बायबिड़ंग का चूर्ण शहद के मिलाकर चटाना चाहिए। 
  25. एक चम्मच तुलसी का रस गरम करके बच्चे को पिलाएं। 
  26. बच्चे को सुबह-शाम एक-एक रत्ती की मात्रा में हींग भूनकर दें। 
  27. शहद में आधा चम्मच पारिजात के पत्तों का रस मिलाकर पिलाएं। 
  28. बायबिरंग, नारंगी का सूखा छिलका, चीनी(शक्कर) को समभाग पीसकर रख लें। 6ग्राम चूर्ण को सुबह खाली पेट सादे पानी के साथ 10दिन तक प्रतिदिन लें। दस दिन बाद कैस्टर आयल (अरंडी का तेल) 25ग्राम की मात्रा में शाम को रोगी को पिला दें। सुबह मरे हुए कीड़े निकल जायेंगे। 
  29. पिसी हुई अजवायन 5ग्राम को चीनी के साथ लगातार 10दिन तक सादे पानी से खिलाते रहने से भी कीड़े पखाने के साथ मरकर निकल जाते है। 
  30. पका हुआ टमाटर दो नग, कालानमक डालकर सुबह-सुबह 15 दिन लगातार खाने से बालकों के चुननू आदि कीड़े मरकर पखाने के साथ निकल जाते है। सुबह खाली पेट ही टमाटर खिलायें, खाने के एक घंटे बाद ही कुछ खाने को दें। 
  31. बायबिरंग का पिसा हुआ चूर्ण तथा त्रिफला चूर्ण समभाग को 5ग्राम की मात्रा में चीनी या गुड़ के साथ सुबह खाली पेट एवं रात्रि में खाने के आधा घंटे बाद सादे पानी से लगातार 10दिन दें। सभी तरह के कृमियों के लिए लाभदायक है। 
  32. नीबू के पत्तों का रस 2ग्राम में 5 या 6 नीम के पत्ते पीसकर शहद के साथ 9 दिन खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। 
  33. पीपरा मूल और हींग को मीठे बकरी के दूध के साथ 2 ग्राम की मात्रा में 6दिन खाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।

वायु गैस या अफारा का उपचार

कभी-कभी भूख न लगना, गलत-खान पान और लापरवाही आदि के कारण पेट में दूषित वायु इकट्ठी हो जाती है, जो आध्यमान या अफारा को पैदा करती है, इसके परिणामस्वरूप पेट की नसों में खिंचाव महसूस होने लगता है। ऐसी अवस्था में मरीज बेचैन हो उठता है। पेट फूलने लगता है। जब यह गैस (अफारा) ऊपर की ओर बढ़ने लगती है तो हृदय पर दबाब बढ़ता है जिससे घबराहट सी महसूस होती है। यह गैस जब पेट में काफी समय तक रुक जाती है तो पेट में काफी दर्द करती है, जिसे अफारा या पेट में गैस का बनना कहते है।

उदर-वायु एक आम तथा कभी न कभी हर किसी को होने वाली समस्‍या है। पेट गैस को अधोवायु बोलते हैं। यह तब होती है जब शरीर में भारी मात्रा में गैस भर जाती है। इसे पेट में रोकने से कई बीमारियां हो सकती हैं, जैसे एसिडिटी, कब्ज, पेटदर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, बेचैनी आदि। 
अपनी ही भूल के कारण, खान-पान में अनियमितता करने के कारण हमारे पेट में बहुत गैस पैदा होने लगती है। यह बनकर निष्कासित होती रहे, तब तक तो तकलीफ नहीं होती मगर जब यह निकलने का नाम न ले और अफारा बना रहे, तब बड़ी ही कठिनाई होती है। असहनीय स्थिति से गुजरना पड़ता है। 
पेट में गैस बनने के कई कारण हो सकते हैं-
  1. आध्यमान (अफारा) यानी (पेट में गैस का बनना) वायु के इकट्ठा होने से पेट के फूलने के कारण पेट में कब्ज़ पैदा हो जाती है। कब्ज के कारण जब आंतों में मल एकत्रित (इकट्ठा) होता है तो मल के सड़ने से दूषित वायु (गैस) की उत्पति होती है। दूषित वायु को जब कहीं से निकलने का रास्ता नहीं मिलता है तो उस दूषित वायु से पेट फूलने लगता है। इससे अग्निमांद्य (भूख का न लगना, अपच) और अतिसार (दस्त) आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अधिक मात्रा में भोजन करने, बाजारों में अधिक तेल-मिर्च, गर्म मसालों का सेवन करने से पाचन क्रिया की विकृति के साथ आध्यमान की बढ़ोत्तरी होती है।
  2. कषैली, कड़वी, तीखी और रूक्ष (सूखा) वस्तुओं को खाने, खेद (दु:ख), अत्यन्त ठण्डे पदाथों का सेवन, अधिक संभोग के कारण वीर्य की कमी, मल-मूत्र के प्रेशर के रोकने से, चिंता, भय (डर), अधिक रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से मांस क्षीण, अधिक उल्टी और दस्त के कारण अफारा हो जाता है। आमदोष और वृद्धावस्था से व्यक्तियों की नसों में वायु (गैस) भरकर दोषों को बढ़ाकर शरीर के अंगों को जकड़ कर दर्द पैदा हो जाने से यह विकार उत्पन्न हो जाता है। 
  3. बैक्टीरिया का पेट में ओवरप्रोडक्‍शन होना । 
  4. जिस आहार में बहुत ज्‍यादा फाइबर होता है। 
  5. मिर्च-मसाला, तली-भुनी चीजें ज्यादा खाने से। 
पाचन संबधी विकार - बींस, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल, फास्ट फूड, ब्रेड और किसी-किसी को दूध या भूख से ज्यादा खाने से। खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक लेने से क्‍योंकि इसमें गैसीय तत्व होते हैं। इसके साथ बासी खाना खाने से और खराब पानी पीने से भी गैस हो जाती है।

भोजन और परहेज :- छोटा अनाज, पुराना शालि चावल, रसोन, लहसुन, करेला फल, शिग्रु, पटोल के पत्ते, फल और बथुआ आदि आध्यमान (अफारा) से पीड़ित रोगी इन सभी का प्रयोग खाने में कर सकते हैं। बंदगोभी, कचालू, अरबी, भिण्डी और ठण्डी चीजें वायुकारक खाद्य पदार्थ हैं, जिसके सेवन करने से पेट में वायु बनती है और अफारा हो जाता है। चावल, राजमा, उड़द की दाल, दही, छाछ, लस्सी और मूली का प्रयोग न करें क्योंकि यह अफारा को अधिक कर देता है। अफारा होने पर कड़वे, तीखे, कषैले, सूखे और भारी अनाज (अन्न), तिल, शिम्बी मांसाहारी भोजन, अप्राकृतिक और विषम आसन, मैथुन, रात में जागना, व्यायाम और क्रोध (गुस्सा) आदि को छोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से अफारा रोग होता है।

पेट में गैस बनने के घरेलू उपचार:-
  1. 1/2 चम्‍मच सूखा अदरक पाउडर लें और उसमें एक चुटी हींग और सेंधा नमक मिला कर एक कप गरम पानी में डाल कर पीएं।
  2. सोंठ का चूर्ण 3 ग्राम और एरण्ड का तेल 8 ग्राम सेवन करने से कब्ज के कारण होने वाला आध्यमान (अफारा) ठीक हो जाता है। 
  3. सोंठ का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम भाग में कालानमक मिलाकर सुबह और शाम लेने से लाभ होता है। 
  4. सोंठ और कायफल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से गैस मिट जाती है। 
  5. भोजन के साथ सलाद के रूप में टमाटर का प्रतिदिन सेवन करना लाभप्रद होता है। यदि उस पर काला नमक डालकर खाया जाए तो लाभ अधिक मिलता है। पथरी के रोगी को कच्चे टमाटर का सेवन नहीं करना चाहिए। 
  6. कुछ ताजा अदरक स्‍लाइस की हुई नींबू के रस में भिगो कर भोजन के बाद चूसने से राहत मिलेगी। 
  7. पेट में या आंतों में ऐंठन होने पर एक छोटा चम्मच अजवाइन में थोड़ा नमक मिलाकर गर्म पानी में लेने पर लाभ मिलता है। बच्चों को अजवायन थोड़ी दें। 
  8. भोजन के एक घंटे बाद 1 चम्‍मच काली मिर्च, 1 चम्‍मच सूखी अदरक और 1 चम्‍मच इलायची के दानो को 1/2 चम्‍मच पानी के साथ मिला कर पिएं। वायु समस्या होने पर हरड़ के चूर्ण को शहद के साथ मिक्स कर खाना चाहिए। 
  9. अजवायन, जीरा, छोटी हरड़ और काला नमक बराबर मात्रा में पीस लें। बड़ों के लिए दो से छह ग्राम, खाने के तुरंत बाद पानी से लें। बच्चों के लिए मात्रा कम कर दें। 
  10. अदरक के छोटे टुकड़े कर उस पर नमक छिड़क कर दिन में कई बार उसका सेवन करें। गैस परेशानी से छुटकारा मिलेगा, शरीर हलका होगा और भूख खुलकर लगेगी। 
  11. पेट में वायु-गैस बनने की अवस्था में भोजन के बाद 125 ग्राम दही के मट्ठे में दो ग्राम अजवायन और आधा ग्राम काला नमक मिलाकर खाने से वायु-गैस मिटती है। सप्ताह-दो सप्ताह आवश्यकतानुसार दिन के भोजन के पश्चात लें। इससे वायु-गोला, अफारा के अतिरिक्त कब्ज भी दूर होती है। 
  12. तारपीन के तेल की 60 से 120 बूंद को साबुन के घोल में मिलाकर बस्ति (एक क्रिया जिसमें गुदा मार्ग से पानी डालते हैं) देने से पेट की गैस दूर हो जाती है। 
  13. बैंगन को अंगारों पर सेंककर उसमें सज्जीखार मिलाकर पेट पर बांधने से, पेट में भार हो गया हो तो वह दूर होता है। 
  14. बैंगन की सब्जी में ताजे लहसुन और हींग का छौंक लगाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) को होने से रोकता है। 
  15. पेट में गैस या अफारा यदि ज्यादा परेशानी का कारण बन जाए तो सूखे धनिये, इलायची और हल्दी का सेवन करने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। 
  16. गैस की समस्या को दूर करने के लिए त्रिफला सबसे अधिक अचूक दवा होती है। इससे गैस और अपच पेट के विकारों से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है। त्रिफाल का एक चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ लें इससे गैस की समस्या दूर हो सकती है। 
  17. 3 ग्राम कालीमिर्च और 6 ग्राम मिश्री को पीसकर फंकी के द्वारा लें और ऊपर से पानी पी लें। 
  18. गुड़ और मेथी दाना को उबालकर पीने से अफारा मिट जाता है। 
  19. मेथी 250 ग्राम और सोया 250 ग्राम को लेकर, दोनों को तवे पर सेंक लें, मोटा-मोटा कूटकर (अधकुटा) करके 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से वायु, लार की अधिकता, अफारा (पेट में गैस का बनना), खट्टी हिचकियां और डकारें आने का कष्ट मिट जाता है। 
क्या करे और क्या न करे :-
  1. वायु कम से कम बने, इसलिये आलू, चावल, तेल, मांस, शराब आदि का सेवन बंद कर दें।
  2. भूखे मत रहें। पेट खाली रहेगा तो भी गैस बनेगी। 
  3. व्रत रखना एक अच्छा उपचार है। सात दिनों में केवल धा पौना दिन व्रत रखें। 
  4. पुदीना, अनारदाना, प्याज, धनिया आदि की चटनी जरूर लिया करें। 
  5. लहसुन, अदरक का प्रयोग अवश्य करें। 
  6. अपनी आदत बना लें कि एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ कर प्रतिदिन पिया करें। उसके बाद ही शौच आदि जाएं। 
  7. जिन्हें कब्ज, भी रहता हो और हवा भी काफी बनती हो वे खाना खाने के बाद काला नमक, जीरा, नींबू मिलाकर खारा सोडा पी लें। उससे काफी आराम मिलेगा। आंतड़ियां साफ हो जाएगी। 
  8. जिन्हें पेट में अधिक हवा बनने की तकलीफ रहती हो, वे गर्मी के मौसम में तरबूज, खरबूजा तथा आम आदि को अधिक मात्रा में न खाएं। इनसे भी हवा बनती है। 
  9. भोजन पचेगा, पेट साफ रहेगा तो गैस कम बनेगी। हरे साग जैसे बथुआ, पालक, सरसों का साग खाएं। खीरा, ककड़ी, गाजर, चुकंदर भी इस रोग को शांत रखते हैं। इन्हें कच्चा खाना चाहिये। 
  10. नारियल का पानी दिन में तीन बार पियें। इससे सारा कष्ट मिट जाएगा। 
  11. खानो खाने के बाद आइसक्रीम खाना या ठंडे पेय पीना भी हानि करता है। ऐसे में ठंडा जूस पीना भी ठीक नहीं रहता। 
  12. यदि किसी को चाय या काफी की आदत हो तो यह भी नुकसान करती है। इस आदत को छोड़ना ही अच्छा है। 
  13. मैदे से बने पदार्थ या सुपरफाइन आटे की रोटी आसानी से नहीं पचती। वायु पैदा करते हैं। अत: मोटे चोकर युक्त आटे से या चना अथवा सोयाबीन मिले आटे की रोटी खाएं। यह जल्दी पचेगी भी और अफारा जैसी तकलीफें नहीं होगी। इस प्रकार यदि हम अपने खानपान में सुधार कर लें तो गैस बनने या अफारा होने की तकलीफ नहीं रहेगी। 
तत्काल लाभ के लिए :- एक दो लहसुन की फांकें छीलकर बीज निकाली हुई मुनक्का में लपेटकर, भोजन करने के बाद, चबाकर निगल जाने से थोड़े समय में ही पेट में रुकी हवा निकल जायेगी।

पेचिश नई या पुरानी का उपचार


स्वच्छ सौंफ 300 ग्राम और मिश्री 300 ग्राम लें। सौंफ के दो बराबर हिस्से कर लें। एक हिस्सा तवे पर भून लें। भुनी हुई और बची हुई सौंफ लेकर बारीक पीस लें और उतनी ही मिश्री (पिसी हुई) मिला लें। इस चूर्ण को छः ग्राम (दो चम्मच) की मात्रा से दिन में चार बार खायें। ऊपर से दो घूँट पानी पी सकते हैं।
आंवयुक्त पेचिश - नयी या पुरानी (मरोड़ देकर थोडा-थोडा मल तथा आंव आना के लिए रामबाण है। सौंफ खाने से बस्ती-शूल या पीड़ा सहित आंव आना मिटता है। दही, भात, मिश्री के साथ खाने से आंव-मरोड़ी के दस्तों में आराम आता है। मत या मैथी (शुष्क दाना) का साग बनाकर रोजाना खावें अथवा मैथी दाना का चूर्ण तीन ग्राम दही में मिलाकर सेवन करें। आंव की बिमारी में लाभ के अतिरिक्त इससे पेशाब का अधिक आना भी बन्द होता है। प्रतिदिन मैथी का साग खाने से आंव की बिमारी अच्छी होती है। और पेशाब का अधिक आना बन्द होता है।
अनियमित ढंग से किये गए आहार-विहार के कारण पेट में अपच की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पेट में आंव हो जाने पर शौच करते समय और शौच के बाद भी पेट में मरोड़ के साथ दर्द होता है। इसे आंव वाला दस्त यानी पेचिश कहते है। जब मल में आंव के साथ खून भी आने लगे तो इसे खूनी आंव वाले दस्त या खूनी पेचिश कहा जाता है। निम्न घरेलू इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है।

250ग्राम मेथी दाना को शुद्ध घी में अच्छी तरह भूनकर पीस लें। अब 250 ग्राम गुड़ को कढ़ाई में पिघलाकर इसमें मेथी पाउडर मिला दें। थोड़ा ठंढा हो जाने पर छोटे-छोटे लड्डू बना लें। यह लड्डू स्वाद में थोड़ा कड़वा होता है लेकिन गुण में उत्तम होता है। सुबह, दोपहर और शाम को एक-एक लड्डू खाकर 3 से 4 ग्लास पानी हर बार पीएं। यदि इतना पानी ना पिया जाये तो अपने सामर्थ के अनुसार पेट भरकर पी लें। इस प्रयोग से खूनी पेचिस शर्तिया ठीक हो जाते हैं।

दुर्बलता दूर करने के असरदार टिप्स

दुर्बलता दूर करने के असरदार टिप्स

किसी भी इंसान की डाइट (भोजन) का हमारे शरीर और मन पर पूरा-पूरा असर पड़ता है। उचित आहार के अभाव में न सिर्फ शरीर कमजोर हो सकता है बल्कि दूसरी शारीरिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। कहते हैं, जब तन और मन स्वस्थ नहीं होगा, प्रफुल्लित नहीं होगा तो फिर सेक्स के दौरान आप आनंद नहीं उठा पाएंगे। भागदौड़ और तनावपूर्ण जिंदगी में लोग अपने भोजन पर पूरी तरह ध्यान नहीं दे पाते, जिसके कारण कई बार बीमारियों का भी शिकार हो जाते हैं। ऐसे में लोगों की सेक्स क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है।

आहार जो बढ़ाए सेक्स पॉवर संतुलित खाएं-सेक्स पॉवर बढ़ाएं-  सर्वेक्षण के अनुसार पाया गया है कि विटामिन ई की कमी से पुरुष नपुंसकता और नामर्दी का शिकार हो जाते हैं। विटामिन ई की कमी से स्त्रियों के स्तन भी सिकुड़ जाते हैं, जिससे उनका आकर्षण कम हो जाता है। आप इसकी कमी को सी फूड, सब्जियां, अंकुरित अनाज, राजमा, सोयाबीन, अलसी आदि को अपने आहार में शामिल कर इस कमी को पूरा कर सकते है ।
नपुंसकता मिटाता है यह आहार

  1. आप अपने जीवन में सूखे मेवे- बदाम, काजू, किशमिश, दूध, शहर को अपने भोजन में शामिल करिए, इससे आपकी यौन क्षमता पर सकारात्मक असर होगा। शरीर भी शक्तिशाली बनेगा।
  2. आप भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग करें साथ ही लहसुन, प्याज और अदरक का भी उचित मात्रा में उपयोग करें। नियमित रूप से हरी एवं पत्तेदार सब्जियों का उपयुक्त मात्रा में सेवन करें।
  3. आप नियमित रूप से दूध, मक्खन और घी आदि का भी उचित मात्रा में उपयोग करें।
  4. मांसाहार से भी बहुत फायदे हैं लेकिन जरूरी नहीं कि आप मांसाहार का सेवन करें-शाकाहार के माध्यम से भी आप अपने शरीर को स्वस्थ और फिट रख सकते हैं। यदि शरीर स्वस्थ है तो यौन संबंधों के दौरान भी आप कमजोर साबित नहीं होंगे। अच्छी सेहत के लिए उचित आहार ही जरूरी नहीं है, इसके साथ ही हमें अपनी दिनचर्या में योग और व्यायाम को भी शामिल करना चाहिए।

बचे इन चीजो से

  1. फास्ट फूड, पिज्जा, बर्गर आदि का नियमित सेवन शरीर में फैट्‍स और मोटापा बढ़ाता है। तले-गले और मसालेदार भोजन से भी परहेज करें। इससे सेक्स पॉवर में कमी आती है।
  2. यदि अत्यधिक भोजन हानिकारक है तो अत्यधिक मात्रा में डाइटिंग और उपवास भी उतना ही नुकसानदायक है। इससे शरीर में कमजोरी आती है। दिनभर के भोजन में आपको पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी मिलनी चाहिए।

Tuesday, December 15, 2015

दाढ़ी के बाल कम है - The hair is short beard

वैसे बिना दाढ़ी वाले चिकने और सपाट चेहरे में भी चुंबकीय आकर्षण होता है, बावजूद इसके कुछ पुरुषों को दाढ़ी से लगाव होता है। बड़ी संख्या में पुरुष अलग-अलग स्टाइल में दाढ़ी रखना पसंद करते हैं और उसे अलग-अलग तरह से उगाते भी हैं। ऐतिहासिक रूप से दाढ़ी को शक्ति का प्रतीक माना गया है। कड़ी और मजबूत दाढ़ी पुरुषों के ताकत से जुड़ी होती है। दाढ़ी मर्दानगी का प्रतीक है और हर पुरुष ऐसी दाढ़ी रखने में सफल नहीं हो पाते हैं-
दाढ़ी के बाल कम है - The hair is short beard

दाढ़ी को बढ़ाना किसी की भी जिंदगी का एक खुशनुमा राज हो सकता है। सारे पुरुषों को दाढ़ी बढ़ाने का आसान तरीका पता नहीं होता है। हालांकि कुछ ऐसे तरीके हैं, जिसे अपनाकर आप दाढ़ी की वृद्धि दर को थोड़ा बढ़ा सकते हैं। दाढ़ी के बढऩे की गति और इसका घनापन आपकी उम्र और जेनेटिक पर निर्भर करेगा।
किसी किसी की दाढ़ी तेजी से बढ़ती है तो किसी की बिल्‍कुल ही नहीं बढ़ती, और किसी की बढ़ती भी है तो चेहरे के कुछ ही भाग पर।सामान्‍य रूप से दाढ़ी बढ़ाने के लिये युवक एक ही नुस्‍खा अपनाते हैं और वह है शेविंग। शेविंग जैसे नुस्‍खे अपना कर युवा वर्ग एक हद तक इस समस्‍या से निजात तो पा जाते हैं मगर चेहरे के अलग अलग हिस्‍सों की दाढ़ी जैसी समस्‍या से निजात नहीं मिल पाती।
हर युवक की यह कामना होती है उसकी दाढ़ी बढ जाये। मगर कभी कभी हारमोनल की कमी के कारण ऐसा नहीं हो पाता।अगर आप अपनी दाढ़ी को तेजी से बढ़ाना और मजबूत बनाना चाहते हैं तो आपको इसकी ठीक ढंग से देखभाल करनी होगी। दाढ़ी को जल्दी बढ़ाने के लिए जिंदगी की अन्य चीजों की तरह ही इसे भी जरूरी चीजें मुहैया करानी होगी और इसपर भी बराबर ध्यान देना होगा। अगर आप हफ्ते में कम से कम एक बार चेहरे की त्वचा का एक्सफोलिएशन करेंगे तो इससे दाढ़ी को तेजी से बढऩे में मदद मिलेगी। साथ ही आपको कुछ तेल के जरिए चेहरे का मसाज भी करना होगा, ताकि दाढ़ी को जरूरी पोषण मिले और इसे तेजी से बढऩे में मदद मिले।

कुछ ऐसे उपाय है आप इनको करे तो आपकी समस्या का समाधान हो सकता है :-
  1. ज्यदा प्रोटीन वाले भोजन खाना, तनाव न लेना और ज्यादा सोना दाढ़ी को तेजी से बढ़ने में मदद कर सकता है। प्रोटीन शरीर को ऐसे पौष्टिक तत्व उपलब्ध कराता है जो ज्यादा बालों को उगाता है और सोना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसी समय पौष्टिक तत्व अपना काम करता है। साथ ही दिन में 8 ग्लास पानी पीने से भी घने और स्वस्थ बालों के विकास में मदद मिलेगी। बालों को झड़ने से रोकने के लिए जहां तक हो सके तनावमुक्त रहने की कोशिश करें।
  2. अपने आहार और ब्यूटी प्रोडक्ट में विटामिन बी को शामिल करें। विटामिन बी1, बी6 और बी12 भी बालों को जल्दी बढ़ाने में मदद करता है। साथ ही रोज बायोटीन का सेवन करें। यह भी बालों और नाखुनों को तेजी से बढ़ाने के लिए जाना जाता है। 
  3. प्राकृतिक रूप से घनी दाढ़ी पाने के लिये शेविंग एक अच्‍छा उपाय है। अगर आपके दाढी के बालों का विकास धीमी रफ्तार से हो रहा है तो बेहतर होगा कि एक सप्‍ताह में तीन बार शेविंग करें। 
  4. उल्‍टी दिशा में शेविंग करना ज्‍यादा असरदार होगा। इस तरह शेविंग करने से आपके बाल की विकास भी तेजी से होगी और आप जल्‍दी घनी दाढ़ी भी पा सकेंगे।अच्‍छा होगा कि आप उपर से नीचे की तरफ या फिर दायें से बायें तरफ शेविंग करें। मगर इस तरह की तकनीक अपनाने से पहले सावधान रहें क्‍योंकि रेजर से आपके स्किन कट भी सकती है।
  5. चेहरे की बाल को बढ़ाने के लिये आंवले का तेल से चेहरे की मालिश करना एक अच्‍छा विकल्‍प है। आंवले की तेल से रोजाना अपने चेहरे की 20 मिनट तक मसाज करें और फिर उसे ठंडे पानी से धुल लें।
  6. आंवले की तेल के साथ सरसो की पत्‍ती को मिलाकर भी मसाज किया जा सकता है। इसके लिये पहले आप सरसो की पत्‍ती का पेस्‍ट बना लें और फिर उसमें एकाद बूंद आंवला तेल मिक्‍स करें। इसके बाद उस पेस्‍ट को दाढ़ी वाले हिस्‍से पर लगायें और 20 मिनट के लिये छोड़ दें। ठंडे पानी से चेहरे को धुल कर उसे साफ कपड़े से साफ करें। ऐसा सप्‍ताह में 3 या 4 बार करने से आप घनी दाढी पा सकते हैं।
  7. दालचीनी के पाउडर में नीबू का रस मिलाकर पेस्‍ट तैयार कर लें। इसे चेहरे पर लगाये और 15 मिनट के लिये छोड़ दें। फिर ठंडे पानी से चेहरा साफ कर सूती कपड़े से पोछ लें। ऐसा करने से आपके चेहरे की मासूमियत और नमी बनी रहेगी। हफ्ते में दो बार करने से घनी दाढ़ी और मासूमियत दोनों आसनी से पाया जा सकता है।
  8. शेविंग के अलावा ट्रिमिंग के जरिये भी आप घनी दाढ़ी पा सकते हैं। ट्रिमिंग से आपको अनचाहें बालों से छुटकारा भी मिल जायेगा और आप के बालों की विकास भी तेजी से होगी।

Monday, December 14, 2015

कष्टार्तव अर्थात मासिक धर्म कष्ट का आना

कष्टार्तव (मासिक धर्म कष्ट से आना)

10 ग्राम अजवाइन को 100 ग्राम गुड़ के साथ लोहे की कड़ाही में घी डालकर हलवा बनायें। इस हलवे को 2-3 बार सेवन करने से मासिक धर्म की पीड़ा नष्ट हो जाती है।