Wednesday, December 23, 2015

पेचिश नई या पुरानी का उपचार


स्वच्छ सौंफ 300 ग्राम और मिश्री 300 ग्राम लें। सौंफ के दो बराबर हिस्से कर लें। एक हिस्सा तवे पर भून लें। भुनी हुई और बची हुई सौंफ लेकर बारीक पीस लें और उतनी ही मिश्री (पिसी हुई) मिला लें। इस चूर्ण को छः ग्राम (दो चम्मच) की मात्रा से दिन में चार बार खायें। ऊपर से दो घूँट पानी पी सकते हैं।
आंवयुक्त पेचिश - नयी या पुरानी (मरोड़ देकर थोडा-थोडा मल तथा आंव आना के लिए रामबाण है। सौंफ खाने से बस्ती-शूल या पीड़ा सहित आंव आना मिटता है। दही, भात, मिश्री के साथ खाने से आंव-मरोड़ी के दस्तों में आराम आता है। मत या मैथी (शुष्क दाना) का साग बनाकर रोजाना खावें अथवा मैथी दाना का चूर्ण तीन ग्राम दही में मिलाकर सेवन करें। आंव की बिमारी में लाभ के अतिरिक्त इससे पेशाब का अधिक आना भी बन्द होता है। प्रतिदिन मैथी का साग खाने से आंव की बिमारी अच्छी होती है। और पेशाब का अधिक आना बन्द होता है।
अनियमित ढंग से किये गए आहार-विहार के कारण पेट में अपच की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। पेट में आंव हो जाने पर शौच करते समय और शौच के बाद भी पेट में मरोड़ के साथ दर्द होता है। इसे आंव वाला दस्त यानी पेचिश कहते है। जब मल में आंव के साथ खून भी आने लगे तो इसे खूनी आंव वाले दस्त या खूनी पेचिश कहा जाता है। निम्न घरेलू इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है।

250ग्राम मेथी दाना को शुद्ध घी में अच्छी तरह भूनकर पीस लें। अब 250 ग्राम गुड़ को कढ़ाई में पिघलाकर इसमें मेथी पाउडर मिला दें। थोड़ा ठंढा हो जाने पर छोटे-छोटे लड्डू बना लें। यह लड्डू स्वाद में थोड़ा कड़वा होता है लेकिन गुण में उत्तम होता है। सुबह, दोपहर और शाम को एक-एक लड्डू खाकर 3 से 4 ग्लास पानी हर बार पीएं। यदि इतना पानी ना पिया जाये तो अपने सामर्थ के अनुसार पेट भरकर पी लें। इस प्रयोग से खूनी पेचिस शर्तिया ठीक हो जाते हैं।

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