Saturday, February 28, 2015

नारियल का प्रयोग करे तो दूर होगी ये समस्याए ....!

* आप सभी जानते हें की नारियल एक ऐसी वस्तु है जो कि किसी भी सात्त्विक अनुष्ठान, सात्त्विक पूजा, धार्मिक कृत्यों तथा हरेक मांगलिक कार्यों के लिये सबसे अधिक महत्व
पूर्ण सामग्री है. इसकी कुछ विभिन्न विधियों द्वारा हम अपने पारिवारिक, दाम्पत्य तथा आर्थिक परेशानियों से निजात पा सकते हैं जाने केसे करे ये उपाय ...!
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in



* यदि आपके व्यापार में लगातार हानि हो रही हो, घाटा रुकने का नाम नही ले रहा हो तो
गुरुवार के दिन एक नारियल सवा मीटर पीले वस्त्र में लपेटे. एक जोड़ा जनेऊ, सवा पाव मिष्ठान के साथ आस-पास के किसी भी विष्णु मन्दिर में अपने संकल्प के साथ चढ़ा दें. तत्काल ही लाभ प्राप्त होगा. व्यापार चल निकलेगा.

* यदि धन का संचय न हो पा रहा हो, परिवार आर्थिक दशा को लेकर चिन्तित हो तो आप
शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के मन्दिर में एक जटावाला नारियल, गुलाब, कमल पुष्प माला, सवा मीटर गुलाबी, सफ़ेद कपड़ा, सवा पाव चमेली, दही, सफ़ेद मिष्ठान एक जोड़ा जनेऊ के साथ माता को अर्पित करें. माँ की कपूर व देसी घी से आरती उतारें तथा श्रीकनकधारास्तोत्र का जाप करें. धन सम्बन्धी समस्या तत्काल समाप्त हो जायेगी.

* घर में किसी भी प्रकार की आर्थिक समस्या हो और कोई भी परेशानी हो तो आप एक नारियल पर चमेली का तेल मिले सिन्दूर से स्वास्तिक का चिन्ह बनायें. कुछ भोग (लड्डू अथवा गुड़ चना) के साथ हनुमान जी के मन्दिर में जाकर उनके चरणों में अर्पित करके ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें. तत्काल लाभ प्राप्त होगा.ये प्रयोग सात मंगलवार करे तो कर्ज से भी मुक्ति मिलती है आप प्रार्थना करे .

* किसी भी प्रकार की बाधा, नजर दोष, किसी भी प्रकार का भयंकर ज्वर, गम्भीर से गम्भीर रोगों की समस्या विशेषकर रक्त सम्बन्धी हो तो आप  शनिवार के दिन एक नारियल, लाल कपड़े में लपेटकर उसे अपने ऊपर सात बार उवारें. किसी भी हनुमान मन्दिर में ले जाकर उसे हनुमान जी के चरणों में अर्पित कर दें. इस प्रयोग से तत्काल लाभ होगा.

* शनि, राहू या केतु जनित कोई समस्या हो, कोई ऊपरी बाधा हो, बनता काम बिगड़ रहा हो, कोई अनजाना भय आपको भयभीत कर रहा हो अथवा ऐसा लग हो कि किसी ने आपके परिवार पर कुछ कर दिया है तो इसके निवारण के लिये आप  शनिवार के दिन एक जलदार जटावाला नारियल लेकर उसे काले कपड़े में लपेटें. 100 ग्राम काले तिल, 100 ग्राम उड़द की दाल तथा एक कील के साथ उसे बहते जल में प्रवाहित करें. ऐसा करना बहुत ही लाभकारी होता है.

* यदि आप किसी गम्भीर आपत्ति में घिर गये हैं. आपको आगे बढ़ने का कोई रास्ता नही दिख रहा हो तो आप  दो नारियल, एक चुनरी, कपूर, गूलर(अगर आपको मिले ) के पुष्प की माला से देवी दुर्गा का दुर्गा मंदिर में पूजन करें. एक नारियल चुनरी में लपेट कर (यथासम्भव दक्षिणा के साथ) माता के चरणों में अर्पित कर दें. माता की कपूर से आरती करें. ‘हुं फ़ट्’ बोलकर दूसरा नारियल फ़ोड़कर माता को बलि दें. सभी प्रकार के अनजाने भय तथा शत्रु बाधा से तत्काल लाभ होगा.

* यदि कुण्ड़ली में शनि, राहू, केतु की अशुभ दृष्टि, इसकी अशुभ दशा , शनि की ढ़ैया या साढ़े साती चल रही तो आप  एक सूखे मेवे वाला नारियल लेकर उस पर मुँह के आकार का एक कट करें. उसमें पाँच रुपये का मेवा और पाँच रुपये की चीनी का बुरादा भर कर ढ़क्कन को बन्द कर दें. पास ही किसी किसी पीपल के पेड़ के नीचे एक हाथ या सवा हाथ गढ्ढ़ा खोदकर उसमें नारियल को स्थापित कर दें. उसे मिट्टी से अच्छे से दबाकर घर चले जायें. ध्यान रखें कि पीछे मुड़कर नही देखना. सभी प्रकार के मानसिक तनाव से छुटकारा मिल जायेगा.

* यदि राहू की कोई समस्या हो, तनाव बहुत अधिक रहता हो, क्रोध बहुत अधिक आ रहा हो, बनता काम बिगड़ रहा हो, परेशानियों के कारण नींद न आ रही हो तो आप  बुधवार की रात्रि को एक नारियल को अपने पास रखकर सोयें. अगले दिन अर्थात् वीरवार की सुबह वह नारियल कुछ दक्षिणा के साथ गणेश जी के चरणों में अर्पित कर दें. मन्दिर में यथासम्भव 11 या 21 लगाकर दान कर कर दें. हर प्रकार का अमंगल, मंगल में बदल जायेगा

* सभी उपरोक्त प्रयोग विश्वाश के साथ करे अविश्वास और शंका होने पे निष्फल होने पर दोष आपका है "विश्वासम : फल्दायाकम"
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

Friday, February 27, 2015

ऊपरी हवाओं से बचाव के लिए अनुभूत प्रयोग -


इस संसार में कुछ नकारात्मक उर्जा या अतृप्त शक्तियां मौजूद है जो कभी-कभी अचानक ही कमजोर या कम इक्षा शक्ति वाले लोगो को प्रभावित कर सकती है और व्यक्ति परेशान हो सकता है इस तरह किसी भी प्रकार पीड़ित व्यक्ति ये प्रयोग करके लाभ ले .




लहसुन के तेल में हींग मिलाकर दो बूंद नाक में डालने, नीम के पत्ते, हींग, सरसों, बच व सांप की केंचुली की धूनी देने तथा रविवार को काले धतूरे की जड़ हाथ में बांधने से ऊपरी बाधा दूर होती है।

इसके अतिरिक्त गंगाजल में तुलसी के पत्ते व काली मिर्च पीसकर घर में छिड़कने, गायत्री मंत्र के (सुबह की अपेक्षा संध्या समय किया गया गायत्री मंत्र का जप अधिक लाभकारी होता है) जप, हनुमान जी की नियमित रूप से उपासना, राम रक्षा कवच या रामवचन कवच के पाठ से नजर दोष से शीघ्र मुक्ति मिलती है। साथ ही, पेरीडॉट, संग सुलेमानी, क्राइसो लाइट, कार्नेलियन जेट, साइट्रीन, क्राइसो प्रेज जैसे रत्न धारण करने से भी लाभ मिलता है।

उपचार और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

"हनुमानजी के सिंदूर" से जिद और गुस्सा हो जाते हैं गायब करे प्रयोग ....!

* सभी माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देना चाहते हैं, अपने बच्चों की सभी इच्छाएं पूरी करना चाहते हैं, ऐसे में कई बार बच्चे जिद्दी भी हो जाते हैं। जैसे-जैसे बच्चा बड़े होते जाता है उसकी जिद भी बढ़ती जाती है जो कि कई परेशानियों का कारण भी बन सकती है। वैसे इससे बचने के लिए कई उपाय बताए जाते हैं लेकिन शास्त्रों के अनुसार भी एक सटीक उपाय बताया गया है।

* कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों को मनवाने के लिए जिद करते हैं और यही आदत धीरे-धीरे बड़ी होती जाती है। ऐसे में अक्सर माता-पिता को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। बच्चों को अच्छे से समझने और समझाने से उनकी जिद कम हो सकती है।

* शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि अगर कोई बच्चा ज्यादा जिद्दी हो, चिडचिड़ा हो, क्रोध अधिक करता हो, माता-पिता या अन्य बड़े लोगों की बातें नहीं सुनता हो, जमीन पर लौट लगाता हो तो उसको हनुमानजी के बांए पैर का सिंदूर हर मंगलवार और शनिवार को लगाएं। सिंदूर मस्तक या माथे पर लगाएं।

* ऐसा माना जाता है कि हनुमानजी के बाएं पैर का सिंदूर माथे पर लगाने से सद्बुद्धि प्राप्त होती है। हनुमानजी को बल और बुद्धि का दाता माना जाता है, इसी वजह से यह उपाय अपनाने वाले लोगों को काफी लाभ प्राप्त होते हैं। जो लोग अधिक जिद करते हैं या गुस्सा करते हैं उनके लिए यह उपाय काफी फायदेमंद है। इससे उनका गुस्सा तो कम होगा ही पुण्य लाभ भी प्राप्त होगा।
उपचार स्वास्थ और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

Thursday, February 26, 2015

स्वाइन फ्लू के लिए.....!

आयुर्वेदिक दुकानों में स्वाइन फ्लू के लिए.....!

नाम -Septillin (टेबलेट और सिरप में उपलब्ध )

एक शेयर ही कई लोगो की जान बचा सकता है ....!

* ये टेबलेट और सिरप दोनों में उपलब्ध है .

* Septilin के immunomodulatory, एंटीऑक्सिडेंट, साइड इफेक्ट और रोगाणुरोधी गुणों सामान्य बनाए रखने में फायदेमंद होते हैं। यह इस तरह के संक्रमण से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को ऊपर उठाने, एंटीबॉडी के गठन की कोशिकाओं के स्तर बढ़ जाता है। Septilin संक्रमण combats जो मैक्रोफेज (श्वेत रक्त कोशिकाओं) सक्रियण, द्वारा phagocytosis (घूस के माध्यम से बैक्टीरिया के उन्मूलन) को उत्तेजित करता है।

* Septilin ज्वरनाशक (कम कर देता है बुखार) गुणों के पास। यह भी जीर्ण tonsillitis, ग्रसनीशोथ, क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, नाक की सर्दी (श्वसन तंत्र की श्लेष्मा झिल्ली में सूजन) और गलत बैठ सहित श्वसन तंत्र में संक्रमण, में फायदेमंद है।

* ऊपरी और निचले श्वसन तंत्र में संक्रमण, ऊपरी श्वसन तंत्र की एलर्जी संबंधी विकार, त्वचा और कोमल ऊतकों में संक्रमण, दंत चिकित्सा और periodontal संक्रमण, आंख में संक्रमण, हड्डी और संयुक्त संक्रमण और मूत्र मार्ग में संक्रमण के प्रबंधन में एक immunomodulator के रूप में है किसी भी प्रकार के वाइरस से लड़ने की अदभुद छमता है .

* For early recovery in postoperative conditions

* संक्रमण की आशंका वाले व्यक्तियों में पुनरावृत्ति को कम करने के लिए तथा विरोधी संक्रामक उपचार के लिए एक सहायक के रूप मेंऔर एंटीबायोटिक चिकित्सा के लिए प्रतिरोध करता है .

इसमें प्रयुक्त मुख्य सामग्री:-
------------------------------

गुग्गुलु भारतीय- 0.324gm

शंख भस्म (शंख / शंख bhasma)- 64mg

Maharasnadi Quath- 130mg

Guduchi / Gulancha tinospora (गिलोय)- 98mg

Manjishtha भारतीय / मजीठ (रुबिया cordifolia)- 64mg

Amalaki भारतीय / करौदा (Emblica officinalis)- 32mg

Shigru / हार्स-मूली पेड़ (Moringa pterygosperma)- 32mg

Yashti-मधु (Glycyrrhiza glabra)- 12mg

* Tinospora Gulancha (Guduchi) एंटीबॉडी के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है जो immunostimulatory गुण है कि एक शक्तिशाली रोगाणुरोधी है। इस संक्रमण के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के निर्माण में मदद करता है।

* नद्यपान (Yashtimadhu) immunostimulation को बढ़ाता है और इन विट्रो में समारोह (एंटीबॉडी ingests कि सफेद रक्त कोशिकाओं) बृहतभक्षककोशिका बढ़ जाती है। यह भी एक antiviral एजेंट और अस्थमा, तीव्र या पुराना ब्रोंकाइटिस और पुरानी खांसी में लाभकारी है जो एक expectorant है।

* भारतीय गुग्गल (गुग्गुलु) एक गले में खराश को शांत करना और सूजन को कम करने में मदद की, जो anti-inflammatory properties है। एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में, भारतीय गुग्गल समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है।

उपयोग के लिए दिशा - निर्देश:-
--------------------------------

* सबसे अच्छा - खुराक लेने की सलाह के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

* गोलियों के रूप में या एक सिरप के रूप में उपलब्ध है।

दुष्प्रभाव:-
---------

Septilin निर्धारित मात्रा प्रति के रूप में लिया गया है  अगर कोई साइड इफेक्ट के लिए नहीं जाना जाता है।

मार्केट कीमत मात्र -एक सौ पांच के लगभग

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

Wednesday, February 25, 2015

प्यार और स्त्री की आकांक्षाये .....!

एक विशेष आलेख है आपको समझने का...

"प्रेम कल और आज की स्त्री का "











प्रेम एक ऐसी अबूझ पहेली है, जिसके रहस्य को जानने की कोशिश में जाने कितने प्रेमी दार्शनिक, कवि और कलाकार बन गए। एक बार प्रेम में डूबने के बाद व्यक्ति दोबारा उससे बाहर नहीं निकल पाता। स्त्रियों का प्रेम पुरुषों के लिए हमेशा से एक रहस्य रहा है। कोई स्त्री प्यार में क्या चाहती है, यह जान पाना किसी भी पुरुष के लिए बहुत मुश्किल और कई बार तो असंभव भी हो जाता है।


प्यार एक ऐसा खूबसूरत एहसास है, जो हर इंसान के दिल के किसी न किसी कोने में बसा होता है। इस एहसास के जागते ही कायनात में जैसे चारों ओर हजारों फूल खिल उठते हैं जिंदगी को जीने का नया बहाना मिल जाता है। स्त्री के जीवन में प्यार बहुत मायने रखता है। प्यार उसकी सांसों में फूलों की खुशबू की तरह रचा-बसा होता है, जिसे वह ताउम्र भूल नहीं पाती।  शायद जब इस संसार की रचना हुई होगी और धरती पर पहली बार आदम और हौवा ने धरती पर कदम रखा होगा, तभी से औरत ने आदमी के साथ मिलकर जिंदगी़ मुश्किलों से लडते हुए साथ मिलकर रहने की शुरुआत की होगी और वहीं से उसके जीवन में पहली बार प्यार का पहला अंकुर फूटा होगा।


शायद रहस्य को ढूंढने के उधेडबुन से परेशान होकर ही किसी विद्वान पुरुष ने संस्कृत के इस श्लोक की रचना की होगी...

" स्त्रियश्चरित्रं पुरुषस्य भाग्यं दैवो न जानाति कुतो मनुष्य:।"

पुरुषों के बीच एक यह प्रचलित पुराना जुमला है ..!

"प्रेम के मामले में औरत के "ना" का मतलब "हां "होता है....ये पुरुषों द्वारा स्त्री के व्यक्तित्व को न समझ पाने की व्यथा को ही दर्शाता है। "

 सवाल ये  है कि आखिर स्त्रियां के मन की थाह लेना पुरुषों के लिए इतना मुश्किल क्यों है.....?

दरअसल स्त्री का मनोविज्ञान कुछ ऐसा होता है कि वह अपनी भावनाओं का इजहार करने के प्रति अत्यधिक सचेत होती है। इसकी सबसे बडी वजह यह है कि भारतीय समाज बचपन से ही लडकियों की परवरिश इस तरह की जाती है कि वे अपने व्यवहार की छोटी-छोटी बातों को लेकर बहुत सतर्क रहती हैं। उन्हें बचपन से कम बोलना सिखाया जाता है। इस वजह से ज्यादातर लडकियां अंतर्मुखी और शर्मीली होती हैं और प्यार के मामले में भी वे स्वयं अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के बजाय वे इस बात की उम्मीद रखती हैं कि उनका ब्वॉय फ्रेंड या प्रेमी स्वयं उसकी भावनाएं समझने की कोशिश करे।"

इस आधुनिक युग में पढी-लिखी लडकियां भी प्रेम के मामले में अपने प्रेमी से ही इस बात की उम्मीद करती हैं कि पहले उनका प्रेमी उनके सामने अपने प्यार का इजहार करे।

  "मेरे एक मित्र है उनकी पत्नी जो मेरी भाभी सामान है मुझे कभी -कभी हसंते हुए बताती है कि आपके मित्र और मेरी जान-पहचान पांच साल पहले हुई थी हम दोनों अच्छे दोस्त थे और हमारी गहरी दोस्ती बहुत पहले प्यार में तब्दील हो चुकी थी, लेकिन मैं उस घडी का इंतजार कर रही थी कि ये कब वह अपने प्यार का इजहार करें क्योंकि मेरे लिए अपने दिल की बात कह पाना बहुत मुश्किल हो रहा था। कभी-कभी मुझे इस बात पर खीझ भी होती थी कि आपके मित्र मुझे इतने करीब से जानते  है, फिर भी वह मेरी भावनाओं को क्यों नहीं समझ पा रहे है ....?  फिर एक दिन पहले उन्होंने ही मेरे सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, तब जाकर हमारी शादी हुई। आज हमारी शादी को भी तीन वर्ष हो चुके हैं और हम आज भी इस बात को याद करके बहुत हंसते हैं कि अगर इन्होने मुझे प्रोपोज नहीं किया होता तो शायद मेरा प्यार मेरे दिल के किसी कोने में ही दबा रह जाता।"

स्त्रियों को हमेशा से ऐसे पुरुष आकर्षित करते हैं, जो स्वयं शारीरिक और मानसिक रूप से इतने मजबूत और सक्षम हों कि वे उन्हें सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक तीनों स्तरों पर सुरक्षा दे सकें, उनकी जरूरतों का खयाल रखें। साथ ही वे दोस्ताना व्यवहार करने वाले खुशमिजाज इंसान हों, जिनके साथ वे बेतकल्लुफ हो कर अपने दिल की बातें शेयर कर सके।

अकसर हम जिन्हें छोटी-छोटी बातें समझकर नजरअंदाज कर देते हैं वे हमारी जिंदगी़ की खुशियों को बरकरार रखने के लिए बहुत जरूरी होती हैं।

पारंपरिक भारतीय समाज में हमेशा पत्नी से ही ये उम्मीद की जाती है कि वह अपने पति की हर छोटी-छोटी जरूरतों का खयाल रखे, जैसे-पति ने खाना खाया या नहीं, उनके कपडे प्रेस हुए या नहीं, उनके मोबाइल का बिल जमा हुआ या नहीं। ऐसे में घर और बाहर की दोहरी जिम्मेदारियां साथ-साथ निभाते हुए पत्नी थक जाती है। ऐसी स्थिति में अगर कभी पति सिर्फ इतना ही कह दे  कि "तुम थक गई होगी, रहने दो यह काम मैं खुद कर लूंगा" तो आपके  द्वारा कही गई इस छोटी-सी बात से ही पत्नी की सारी थकान दूर हो जाती है और यह एहसास किसी किसी भी औरत के लिए बहुत मायने रखता है कि वो जिससे प्यार करती हूं, उसे भी मेरी फिकर  रहती है।

प्रेम या दांपत्य संबंधों के मामले में युवा पीढी की सोच में एक नया बदलाव नजर आ रहा है। आज की शिक्षित और आत्मनिर्भर युवा स्त्री को अपनी व्यक्तिगत आजादी इतनी पसंद है कि वह उसे किसी भी कीमत पर, यहां तक कि प्यार पाने के लिए भी खोना नहीं चाहती।

पिछली पीढी की स्त्री की तरह वह प्यार में अपना सर्वस्व त्यागने को तैयार नहीं है। अब उसका स्वतंत्र व्यक्तित्व है, उसकी अपनी पसंद-नापसंद, रुचियां और इच्छाएं हैं। उसे अपनी पसंद का साथी चुनने की पूरी आजादी है। ऐसी स्थिति में उसके पास विकल्पों की कमी नहीं है। उसके पास अपने आप को बदलने की कोई वैसी मजबूरी भी नहीं है, जैसी कि उसकी पिछली पीढी की स्त्रियों की हुआ करती थी कि एक बार किसी पुरुष के साथ शादी या प्रेम के बंधन में बंध जाने के बाद उसके पास अपने साथी अनुरूप खुद को ढालने के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं होता था। पर आज वक्त के साथ स्थितियां तेजी से बदल रही हैं। ऐसा नहीं है आधुनिक युवती अपनी शर्तो पर प्रेम करती है और अपने प्यार की खातिर खुद को बदलने के लिए जरा भी तैयार नहीं है। आज भी प्रेम के प्रति उसका समर्पण कम नहीं हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज उसकी जीवन स्थितियां उसके अपने नियंत्रण में हैं, वह जिससे प्यार करती है, उसके लिए वह कुछ भी करने को तैयार है लेकिन वह अपनी निजी स्वतंत्रता को बरकरार रखना चाहती है।

इसलिए उसे प्रेम या दांपत्य संबंध के मामले में भी थोडे-से पर्सनल स्पेस की जरूरत महसूस होती है। वह जिससे प्यार करती है, उसका केयरिंग होना तो उसे अच्छा लगता है, लेकिन उसे यह बात जरा भी पसंद नहीं आती कि उसका साथी उसे छोटी-छोटी बातों पर उसे रोके-टोके या उसकी पसंद-नापसंद पर अपनी मर्जी थोपने की कोशिश करें। शायद यह पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित व्यक्तिवादी सोच की ही देन है, जिसके अंतर्गत इंसान अपने व्यक्तिगत जीवन में किसी की भी दखलंदाजी पसंद नहीं करता, चाहे वह उसका प्रेमी या जीवन साथी ही क्यों न हो। भारतीय स्त्री भी इस विदेशी संस्कृति के इस प्रभाव से अछूती नहीं है। वह जिससे प्रेम करती है, उससे इस बात की उम्मीद रखती है कि वह उसकी व्यक्तिगत आजादी की भावना का सम्मान करे।

हर लडकी का व्यक्तिगत जीवन भी होता है और अपने दिन के चौबीस घंटों में से कम से कम दो घंटे वह अपने तरीके से जरूर बिताना चाहती है, जिसमें वह अपनी रुचि और पसंद से जुडे काम कर सके।

लड़की जब एक लड़के से प्रेम करती है उसने ये सोचा होगा कि पढाई पूरी होने के बाद हम शादी कर लेंगे। फिर वो समय आता है कि शादी भी हो गई लेकिन धीरे-धीरे लड़की को जब यह महसूस होने लगता है कि वह मेरी निजी जिंदगी़ में जरूरत से ज्यादा दखलंदाजी करते  है। लड़का चाहता है  कि मेरी बीबी हर काम उससे पूछ कर करे , उसकी पसंद के कपडे पहने , उसकी मर्जी से  कहीं आना-जाना करे , दूसरे लडकों से मिलना-जुलना बिल्कुल न करे । ऐसी स्थिति में लड़की को  इस बात का एहसास होता है कि वो एक ऐसे इंसान के साथ जीवन बिताना बहुत मुश्किल है, जो मेरी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान न करे। इस वजह से लडके-लड़की के आपसी संबंधो में बिखराव आता है और कभी -कभी तो तलाक भी हो जाना स्वभाविक सा बन गया है  लड़की जो लड़के को प्यार करती है  उससे संबंध टूटने पर बहुत दुख होता है पर लड़की के पास इसके सिवा कोई चारा नहीं होता है ।और एक बार सम्बन्ध खत्म होने के बाद जिंदगी को सामान्य रूप से पटरी पे लाने में कठिनाई का सामना भी करना होता है जब जीवन सामान्य होता है और लड़की खुद व्यस्त करने में और पिछली बातो को भूलने से निकल कर बाहर आती है तब हमेशा यही कहती पायी जाती है  " कोई भी रिश्ता जिंदगी़ से बडा नहीं होता, जिंदगी़ के हर दौर में रिश्ते बनते-बिगडते रहते हैं।

भारतीय स्त्री शिक्षित, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही है और उसके व्यक्तित्व में यह बदलाव उसके संबंधों में भी देखने को मिलता है। साठ के दशक की प्रेम में समर्पित नायिका के मन में अपने साथी के प्रति ये उदगार रखती थी  "तुम्हीं मेरे मंदिर, तुम्हीं मेरी पूजा, तुम्हीं देवता हो"

वह अपने प्रेमी या पति के सामने अपनी निरीह स्थिति को खुशी-खुशी स्वीकार लेती थी। लेकिन पिछले तीस वर्षो से शिक्षित और जागरूक होने की वजह से उसमें आत्मविश्वास आया और वह घर-बाहर दोनों जगहों पर पुरुषों के साथ बराबरी के स्तर पर कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। इस वजह से अब वह अपने की पुरुषों की तुलना में किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं समझती और आज के पुरुषों का नजरिया भी स्त्रियों के प्रति काफी बदला है। अब उन्हें भी कमजोर और लाचार के बजाय साहसी, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी स्त्री ज्यादा प्रभावित करती है। इस वजह से आज का प्रेम संबंध भी बराबरी की भावना पर आधारित होता है। आज की स्त्री अपने प्रेमी या पति को भगवान मानने के बजाय अपनी ही तरह एक इंसान के रूप में देखती है। वह चाहती है कि उसका प्रेमी या पति भी उसकी भावनाओं को समझते हुए, उसके साथ दोस्ताना व्यवहार करे।

एक लड़की अपनी मां के दांपत्य जीवन की तुलना अपने जीवन से करती है  तो ऐसा महसूस होता है कि समय के साथ स्त्री-पुरुष के आपसी रिश्ते में काफी बदलाव आया है। पुराने समय में चाहे पति-पत्नी के बीच आपस में कितना ही प्यार क्यों न हो, लेकिन अपनी कमतर स्थिति को स्त्री सहजता से स्वीकारती थी। उसके मन में यह धारणा बनी हुई थी कि पुरुष हर हाल में स्त्री से श्रेष्ठ होता है। इस वजह से स्त्री को हर हाल में पुरुष का सम्मान करना चाहिए।  चाहे कितनी ही देर क्यों न हो जाए  मां हमेशा पापा को खिलाने के बाद ही खुद खाती थीं और जीवन भर उन्होंने इस नियम को खुशी-खुशी निभाया। जीवन में उन्होंने छोटे-से-छोटा निर्णय भी पिता की सहमति के बिना नहीं लिया।आज का परिवर्तन ये है कि कोई भी लड़की नहीं चाहती है उसे अपने पति से छोटी -छोटी बातो की परमीशन ले उसे अपनी मां की तरह खाने के लिए पति का बहुत देर तक इंतजार नहीं करना पड़े , अगर शाम को उन्हें घर आने में देर हो तो मैं बच्चों के साथ डिनर कर ले और पति को भी इस बात के लिए जरा भी बुरा न लगे ।

भारतीय समाज में अब तक पुरुषों की ऐसी पारंपरिक छवि बसी हुई थी, जिसमें पुरुषों के रौबदार, रफ-टफ, दबंग और गंभीर व्यक्तित्व की सराहना की जाती थी। पुराने समय की स्त्रियां ऐसे पुरुषोचित्त गुणों से परिपूर्ण पुरुषों के व्यक्तित्व के प्रति आकर्षित होती थीं। लेकिन आज महानगरों का मध्यवर्गीय समाज बहुत तेजी से बदल रहा है। युवा पीढी की लडकियां पुरुषों की इस पारंपरिक छवि से अलग हटकर मेट्रोसेक्सुअल पुरुषों को ज्यादा पसंद करती हैं, जिसका अर्थ महानगरों में रहने वाले ऐसे पुरुषों से है, जिनके पास खर्च करने के लिए बहुत सारा धन होता है और जो अपने व्यक्तित्व को निखारने और संवारने के प्रति अतिशय जागरूक होते हैं। इसके लिए वे जिम, हेल्थ क्लब, पार्लर जाना, स्टाइलिश ब्रैंडेड आउटिफट्स पहनना जरूरी समझते हैं और अपने बाहरी और आंतरिक व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने में विश्वास रखते हैं। इतना ही नहीं, ऐसे पुरुष भारतीय पुरुष की पारंपरिक छवि को सिरे से खारिज करते हुए यूरोपीय देशों की पुरुषों की तरह कुकिंग, घर की सफाई और बच्चों की नैपी बदलने जैसे काम करने का भी भरपूर लुत्फ उठाते हैं। स्पोर्टस, म्यूिजक और डांस में रुचि में रखने वाले युवा पीढी के ऐसे पुरुषों का सेंस ऑफ हृयूमर लडकियों को बहुत आकर्षित करता है।

इंसान जिस समाज में रहता है, वहां की स्थितियों से उसके संबंध निश्चित रूप से प्रभावित होते हैं।समाज के हर वर्ग की स्त्री की उम्मीदें अलग होती हैं।

निम्नवर्गीय समाज में रहने वाली स्त्री अपने प्यार में भी आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को भावनात्मक सुरक्षा की तुलना में ज्यादा अहमियत देती है, क्योंकि उसके लिए रोटी, कपडा और मकान जैसी जिंदगी़ की बुनियादी जरूरतें पूरी कर पाना ही इतनी बडी बात होती है कि अपनी दूसरी जरूरतों की ओर उसका ध्यान जाता ही नहीं। अगर उसका साथी उसकी इन जरूरतों को भी अच्छी तरह पूरा करता है तो इसी से वह संतुष्ट और खुश रहती है।

मध्यम वर्ग की स्त्री चाहती है कि उसका साथी उसकी भौतिक जरूरतों के साथ उसकी भावनात्मक मांगों को भी अच्छी तरह पूरा करे और उसके साथ बेहतर संवाद बनाए रखे। उच्चवर्ग के पास जीवन के लिए सभी जरूरी सुख-सुविधाएं मौजूद होती हैं लेकिन समाज के इस तबके पास सबसे बडी समस्या है-समय का अभाव। इस वजह से स्त्री-पुरुष के रिश्ते में अकसर संवादहीनता की स्थिति आ जाती है। इस वजह से यहां स्त्री की सबसे बडी चाहत यह होती है कि जिस किसी पुरुष से वह प्रेम करती है, वह उसे पूरा समय दे, उससे बातचीत करे, उसकी भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों को अच्छी तरह समझे। आज की शिक्षित मध्यवर्गीय भारतीय स्त्री आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो गई है, वह जागरूक है और जिंदगी़ के प्रति उसका नजरिया बदल गया है। अब उसमें इतना आत्मविश्वास आ गया है कि वह अपनी शारीरिक जरूरतों को भी स्वीकारने लगी है, पहले की तरह वह अपना पूरा जीवन इस इंतजार में नहीं बिता सकती कि शायद उसका जीवनसाथी कभी तो उसकी इस जरूरत को समझेगा।

आज की औरत अपनी सेक्सुअलिटी को पहचानने लगी है, यह अपने आप में बहुत बडा सामाजिक बदलाव है। यही वजह है कि आज तलाक की घटनाएं बढ रही हैं। पहले सिर्फ अपने वैवाहिक जीवन से नाखुश पुरुषों के ही विवाहेत्तर संबंध होते थे, लेकिन आज वैसी स्त्रियों के भी विवाहेत्तर संबंध बन रहे हैं, जिनके दांपत्य जीवन में प्यार की कमी है। यह सही है या गलत, यह बहस का एक अलग मुद्दा हो सकता है, लेकिन यह एक सहज सामाजिक बदलाव है और इस सच्चाई से हम ज्यादा समय तक नजरें नहीं चुरा सकते। अपने संबंधों को लेकर आज की स्त्री ज्यादा परिपक्व और भावनात्मक रूप से मजबूत है। अपने दांपत्य जीवन को अच्छी तरह चलाने के लिए आधुनिक स्त्री पहले की तरह आज भी काफी हद तक अपने आत्मसम्मान का त्याग करती है। भारत में विवाह संस्था सिर्फ स्त्री की वजह से ही टिकी हुई है।

आज की स्त्री निर्भीक और आत्मविश्वासी है। इस वजह से पहले की तुलना में आज वह अपने रिश्ते को लेकर ज्यादा ईमानदार है। अपने संबंध को बचाए रखने के लिए वह अपने बलबूते पर समाज से लडती है। पुराने समय में लडकियां दब्बू और डरपोक स्वभाव की होती थीं, साथ ही उन पर परिवार और समाज का प्रतिबंध भी ज्यादा होता था। अगर वे किसी से प्यार भी करती थीं तो उनका यह प्यार बहुत दबा-ढका होता था अकसर उनके मन में प्रेम को लेकर अपराधबोध की भावना होती थी कि माता-पिता की मर्जी के खिलाफ वे जो कुछ भी कर रही हैं, वह गलत है। अगर माता-पिता ज्यादा सख्ती से पेश आते और लडकी की शादी कहीं और तय कर देते तो उसका प्यार परवान चढने से पहले ही दम तोड देता था। जहां तक प्यार के लिए समाज से लडने की बात है तो इसकी जिम्मेदारी लडके की ही मानी जाती थी पर आज की स्त्री अपने प्यार को छिपाती नहीं और उसे हासिल करने के लिए वह खुद तैयार रहती है।

प्रेम एक शाश्वत भावना है, जो सदैव बनी रहती है। फिर भी बदलते वक्त के साथ प्रेम को लेकर स्त्री के विचारों में काफी बदलाव आया है। आधुनिक मध्यवर्गीय स्त्री का जीवन अति व्यस्त और कशमकश से भरा हुआ है। पहले वह घर की चारदीवारी में कैद रहती थी, इस वजह से उसकी इच्छाएं भी बहुत सीमित थीं और अपने बंद दायरे में भी वह खुश और संतुष्ट रहती थी। पहले बाहर की दुनिया से वह बेखबर थी लेकिन आज की शिक्षित और कामकाजी स्त्री के अनुभवों का दायरा पहले की तुलना में काफी विस्तृत है। ऐसी स्थिति में अब उसे समाज को ज्यादा करीब से देखने और समझने का अवसर मिला है।

अब वह अपने जीवन की तुलना दूसरी स्त्रियों से आसानी से कर सकती है। आज पुरुषों की तुलना में स्त्रियों का जीवन ज्यादा तेजी से बदला है। पहले की तुलना में उसके संबंधों में ज्यादा उथल-पुथल देखने को मिलता है। आज स्त्रियों के प्रेम में समर्पण की भावना खत्म होती जा रही है, इसी वजह से चाहे प्रेम हो या शादी उनके किसी भी रिश्ते के स्थायित्व के लिए खतरा पैदा हो गया है।

इसका एक सकारात्मक पहलू यह भी है पहले स्त्री के पास जीवन जीने का कोई विकल्प नहीं होता था। अगर उसका दांपत्य जीवन बहुत दुखमय हो तो भी उसके पास शोषण और प्रताडना झेलने के सिवा कोई चारा नहीं होता था। पहले विधवा या परित्यक्ता स्त्रियों की दोबारा शादी नहीं हो पाती थी, पर अब ऐसा नहीं है। अगर प्रेम की कमी की वजह से अगर किसी स्त्री के जीवन में सूनापन है तो वह नए सिरे से अपनी जिंदगी़ की शुरुआत करके आसानी से इस सूनेपन को दूर कर सकती है। यह स्त्री के जीवन में आने वाला सकारात्मक बदलाव है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए।
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

Monday, February 23, 2015

स्‍वाइन फलू से बचाव व इलाज, देश में फैली इस भयानक बीमारी से छुटकारा पाने के कुछ आसान असर कारक उपाय।


स्‍वाइन फलू से बचाव व इलाज


स्‍वाइन फलू टाइप के इन्‍फलुएंजा वायरस से होती है। इस वायरस को H-1 N-1 के नाम से जाना जाता है। इस वायरस से होने वाला स्‍वाइन फलू, साधारण मौसमी जुकाम, खांसी, बुखार जैसा ही होता है। इसलिए यह पहचानना मुश्किल है, कि रोगी को स्‍वाइन फलू हुआ है अथवा साधारण खांसी, जुकाम और बुखार। पर कहते हैं न, सावधानी ही बचाव है।
इसलिए साधारण खांसी, जुकाम, बुखार व गले में खराश हो, तो उसे अनदेखा न करें। यह स्‍वाइन फलू भी हो सकता है।
स्‍वाइन फलू का वायरस पीडि़त व्‍यक्ति के छींकने, खांसने, हाथ मिलाने, दरवाजों को छूने, की-बोर्ड माउस, व रिमोट इत्‍यादि को इस्‍तेमाल करने से फैल सकता है। इसलिए संक्रमित व्‍यक्ति से दूर रहने और उसके द्धारा प्रयोग की गई चीजों से दूर रहने में ही भलाई है।


स्‍वाइन फलू के लक्षण


१ * नाक लगातार बहना, छींक आना व नाक का जाम हो जाना।

२ * मसल्‍स में दर्द या अकड़न महसूस करना।

३ * सिरदर्द।

४ * गले में खराश होना, गला लाल होना।

५ * बुखार व दवा के इस्‍तेमाल के बावजूद बुखार कम होने के बजाए, बढ़ जाना।

६ * नींद रहना और थकान ज्‍यादा महसूस करना।

स्‍वाइन फलू का वायरस कैसे खत्‍म होता है?


यह वायरस प्‍लास्टिक व स्‍टील में २४ से ४८ घंटे तक जीवित रहता है। कपड़ों और कागज में ८ से १२ घंटे तक जीवित रहता है। टिश्‍यू पेपर में १५ मिनट तक तथा हाथों में ३० मिनट तक जीवित रहता है।
इस वायरस को खत्‍म करने के लिए आप डिटर्जेंट, ब्‍लीच, एल्‍कोहल तथा साबुन का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यदि रोगी में स्‍वाइन फलू के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं, तो वायरस फैलने का खतरा बढ़ जाता है।


आयुर्वेद में स्‍वाइन का उपचार मौजूद है।


महत्‍वपूर्णं उपचार

आप थोड़ा कपूर, छोटी इलायची, पुदीने की सूखीं पत्तियां व हल्‍दी का चूर्णं मिलाकर एक पोटली बना लें। इसके बाद दिन भर बार बार इस पोटली को सूंघने से स्‍वाइन फलू जैसी भयानक बीमारी से बचा जा सकता है। (यदि स्‍वाइन फलू हो ही गया है, तो अंग्रेजी इलाज भी कराएं, क्‍योंकि यह जानलेवा बीमारी है।

अन्‍य उपचार


१ * गिलोय सत्‍व २ रत्‍ती पौन ग्लिास पानी के साथ लें।

२ * ५ – ६ तुलसी के पत्‍ते और काली मिर्च के २ – ३ दाने पीसकर चाय में डाल कर दिन तीन चार बार पीएं। आराम मिलेगा साथ ही बचाव भी संभव होगा।

३ * चार पांच तुलसी के पत्‍ते, ५ ग्राम अदरक, एक चुटकी काली मिर्च और इतनी ही हल्‍दी का चूर्णं एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो तीन बार पीएं।

४ * आधा चम्‍मच हल्‍दी एक ग्‍लास दूध में उबालकर पीएं।

५ * आधा चम्‍मच हल्‍दी गरम पानी अथवा शहद में मिलाकर भी ली जा सकती है।

६ * गिलोय, कालमेध, भुईं आंवला, चिरायता, वासा, सरपुंखा इत्‍यादि जड़ी बूटियां भी बहुत लाभदायक हैं।

७ * आधा चम्‍मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो तीन बार पीने से बहुत लाभ होता है।

८ * जरांकुश (आज्ञाघास) व तुलसी के पत्‍ते उबालकर पीने से फाएदा होगा।

९ * दालचीनी का चूर्णं शहद के साथ या दालचीनी की चाय पीना भी लाभदायक होता है।


तो यह तो थे स्‍वाइन फलू के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार। साथ ही मैं फिर से कहना चाहूंगी कि इस संबंध में वैध, हकीम व डाक्‍टर की सलाह जरूर लें। साथ ही अंग्रेजी इलाज कराना बेहतर है। मैंने जो आयुर्वेदिक उपचार बताए हैं, उन्‍हें आप प्राथमिक चिकित्‍सा के तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। इस बीमारी का इलाज हौम्‍योपैथी में भी मौजूद है। इसके लिए आप हौम्‍योपैथिक डॉक्‍टर से मिल सकते हैं। साथ बचाव जितना कर सकें जरूर करें।
आप थ्री लेयर सर्जिकल मास्‍क को इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह मास्‍क चार घंटों तक तथा N-95 मास्‍क आठ घंटों तक सुरक्षा करता है। सिर्फ ये दो ही मास्‍क ऐसे हैं, जो स्‍वाइन फलू को वायरस को रोकने में सक्षम हैं। इसलिए सस्‍ते मास्‍क पर भूलकर भी भरोसा न करें। थ्री लेयर मास्‍क बाजार में १० – १२ रूपए तथा N-95 मास्‍क १०० से १५० रूपए में उपलब्‍ध है। ये मंहगें जरूर हैं। पर पैसा जान से बढ़कर नहीं होता। इसलिए इन्‍हें इस्‍तेमाल करने में संकोच न करें।


(सभी चित्र गूगल सर्च से साभार)  

Saturday, February 21, 2015

महिलाओं के स्वभाव को समझे उनके बालो से -

आइये आप जाने कि किस प्रकार के बालो से हम  कैसे किसी व्यक्ति के गुण, स्वभाव और व्यक्तित्व के बारे में बताता है। समुद्रशास्त्र में बालों की बनावट और रंग की चर्चा है, जिसे देखकर किसी भी महिला के व्यक्तित्व और स्वभाव का बड़ी आसानी से पता लगाया जा सकता है।





हम यहाँ सिर्फ बात कर रहे हैं हमारे बालों के नैचरल कलर और शेप के बारे में।
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com



जिन महिलाओं के बाल पैदाइशी सुनहरे होते हैं, उन्हें देखकर आप इतना तो जरूर कह सकते हैं कि वे अक्सर अपने दुर्बल और कमजोर शरीर को लेकर परेशान रहती हैं। हालांकि, यह भी सच है कि ऐसी महिलाएं ज्ञानी होती हैं और स्वभाव से बेहद सरल होती हैं।






जिन महिलाओं के बाल काले और बिल्कुल सीधे होते हैं वे स्पष्ट ख्याल की होती हैं। उन्हें बात घुमा-फिराकर कहना और समझना नहीं आता। वे जैसा सोचती हैं उन्हीं विचारों को अपने आस-पास फैला भी डालती हैं। वैसे ये ज्यादातर सरल और खुले विचारों वाली होती हैं।







जिनके बाल ब्राइट रेड कलर के होते हैं वो काफी तीक्ष्ण बुद्धि वाली होती हैं। आपके कुछ बोलने से पहले ही उनका दिमाग आपसे भी दूर पहुंच सकता है। इसलिए इन्हें अपने हिसाब से आंकना सही नहीं।









जिनके बाल काले और कर्ल लिए होते हैं ऐसी महिला जिंदगी को लेकर आशावादी होती हैं। स्वभाव से संकोची तो होती जरूर हैं, लेकिन मेहनत और मुश्किलों से वे कभी घबरातीं नहीं। जीवन में खुशियों और स्नेह को अहमियत देकर ही आगे बढ़ना इन्हें पसंद है।






भूरे बाल वाली महिलाएं काफी इमोशनल और रोमांटिक किस्म की होती हैं। प्यार में धोखा भी इन्हें आसानी से मिल जाता है। वैसे, जीवन को आजाद ख्यालों के साथ जीना ही इन्हें पसंद है। अपनी जिम्मेदारियों को लेकर काफी सजग होती हैं ये।







रेड हेयर वाली महिलाएं काफी साहसी होती हैं और कुछ झगड़ालू भी। ऐसे लोग बात-बात पर गुस्सा हो जाते हैं। रेड हेयर वाली महिलाएं स्वभाव से थोड़ी कठोर होती हैं।









जिन महिलाओं के बाल गहरे भूरे और सॉफ्ट होते हैं वे काफी चहेती होती हैं। किसी को भी अपनी तरफ खींचने की इनमें गज़ब की ताकत होती है। इनमें कॉन्फिडेंस भी खूब रहता है और ये सेंसिबल होती हैं।








घने और लहरदार बाल वाली महिलाएं स्वभाव से जिद्दी होती हैं। किसी भी काम को करने से पहले उसके बारे में सोच-विचार करना इन्हें बेवकूफी ही लगता है। वैसे सच यह भी है कि ये अपने मन की करती हैं और कामुक प्रवृत्ति की होती हैं।







पतले और दोमुंहे बाल वाली महिलाएं जिंदगी को लेकर उदासीन होती हैं और अपनी तबीयत को लेकर अक्सर ही परेशान रहती हैं।










हल्के घुंघराले बालों वाली महिलाएं काफी तेज और चालाक किस्म की होती हैं। स्वभाव से ये रोमांटिक होती हैं और कुछ भी बोलने और करने में इन्हें ज्यादा वक्त नहीं लगता।









सॉफ्ट, सिल्की और पतले बालों वाली महिलाएं दिल से सच्ची और सरल बुद्धि की होती हैं। इनके मन में कभी किसी के लिए दुर्भावना नहीं आती। किसी की भी मदद के लिए हर वक्त तैयार रहती हैं ये।








जिन महिलाओं के बाल रूखे और बेजान से होते हैं वे छोटी सोच वाली होती हैं। इनके पास दया नाम की कोई चीज नहीं होती। हालांकि, ये जीवन में विपरीत परिस्थितियों का सामना कुशलतापूर्वक कर लेती हैं।










जिनके बाल घने और सुलझे होते हैं वे बेहद कर्मठ और धैर्य वाली होती हैं। ऐसी महिलाएं जो करने की ठान लेती हैं उसे करके ही दम लेती हैं। ये बेहद शौकीन मिजाज की होती हैं, चाहे बात पहनने-ओढ़ने की हो या फिर खाने-पीने की, कहीं भी इन्हें समझौता पसंद नहीं।

* उपरोक्त लक्षण से आप अपने व्यक्तित्व को जाने और समझे .

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

Friday, February 20, 2015

पेशाब में जलन का घरेलू उपचार - Home Redemy For Irritation In Urine Area

पेशाब में जलन होना आम समस्‍या है कभी-कभी जोर लगाने पर पेशाब होती है, पेशाब में भारी जलन होती है, ज्यादा जोर लगाने पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब होती है। इस व्याधि को आयुर्वेद में मूत्र कृच्छ कहा जाता है। लेकिन बहुत से लोग इसे नजरअंदाज कर जाते हैं। कभी-कभी यह कुछ समय के लिये ही होती है और कभी यह महीनो तक चलती है। यह बीमारी महिलाओं और पुरुष दोनों को ही होती है-




इस समस्‍या के कई कारण हो सकते हैं जैसे, मूत्र पथ संक्रमण, किडनी में स्‍टोन या डीहाइड्रेशन आदि। आइये जानते हैं कि पेशाब में जलन को किस तरह से घरेलू उपचार से ठीक किया जा सकता है। पेशाब में जलन होने के कई कारण होते हैं जो कि बहुत से लोगो को पता ही नही होता है और वे उसके लिये कुछ भी नहीं करते-


घरेलू उपचार :-



सबसे पहले तो खूब सारा पानी पिये नहीं तो शरीर में पानी की कमी हो जाएगी और पेशाब पीले रंग की दिखाई पड़ने लगेगी। दिन में कुछ घंटो के भीतर 2-3 गिलास पानी पिये। अगर पेशाब करने के बाद अधिक देर तक जलन हो तो आपको मूत्र पथ संक्रमण है।


खट्टे फल यानी की सिट्रस फ्रूट खाइये क्‍योकि इसमें सिट्रस एसिड होता है जो कि मूत्र संक्रमण पैदा करने वाले बैक्‍टीरिया को मारता है।


आमला का रस भी पेशाब की जलन को ठीक करने में सहायक है। या इलायची और आंवले का चूर्ण समान भाग में मिलाकर पानी से पीने पर मूत्र की जलन ठीक होती है।


नारियल का पानी डीहाइड्रेशन तथा पेशाब की जलन को ठीक करता है। आप चाहें तो नारिल पानी में गुड और धनिया पाउडर भी मिला कर पी सकते हैं।


पलास के फूल सूखे या हरे पानी के साथ पीसकर थोड़ा सा कलमी शोरा मिलाकर नाभि के नीचे पेडू पर लगाने से ५.१० मिनट में पेशाब खुलकर आने लगता है।


आधा गिलास चावल के माण्ड में चीनी मिलाकर पिलायें, इससे जलन दूर होगी।


अनार का शर्बत नित्य दो बार पियें। पेशाब की जलन ठीक हो जायेगी। फालसा पेशाब की जलन को दूर करता है।


पाँच बादाम की गिरी भिगोकर छीलकर इसमें सात छोटी इलाइची स्वादानुसार मिश्री मिलाकर पीसकर एक गिलास पानी में घोलकर पियें।


संभोग करते वक्‍त प्रोटेक्‍शन बरते क्‍योंकि योनि में सूखापन आ जाने की वजह से पेशाब में जलन होने लगती है। यदि आप लुब्रिकेंट का प्रयोग कर रहे हैं तो वाटर बेस वाले लुब्रिकेंट का प्रयोग करें ना कि रसायन युक्‍त का।


एक पानी के गिलास में 1 चम्‍मच धनिया पाउडर मिला कर रातभर के लिये भिगो दें। सुबह उसे छान लें और उसमें चीनी या फिर गुड मिला कर पी लें।


जननांग की स्वच्छता बनाए रखें। कई बार, योनि या लिंग में संक्रमण होने की वजह से भी मूत्र मार्ग को प्रभावित करते हैं। यदि आपको यह समस्‍या हो चुकी है तो अब से कुछ सावधानियां बरते जैसे, दिन में 2-3 बार जननांग को धोएं।


यदि आपको किडनी स्‍टोन है तो पेशाब में जलन होगी। इसके लिये आपको बीयर पीनी चाहिये जिससे कि किडनी का स्‍टोन गल सके। लेकिन सुबह बीयर पीने से डीहाइड्रेशन हो सकता है इसलिये इसे नारियल पानी के साथ मिला कर पीजिये।


ताजे मक्के के भुट्टे पानी मेंं उबालकर उस पानी को छानकर मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन में लाभ होता है।


पेशाब की जलन में कच्चे दूध में पानी मिलाकर रोज पिएं, लाभ होगा।  ठंडे पानी या बर्फ के पानी में कपड़ा भिगोकर नाभि के नीचे बिछायें, रखें। लाभ होगा।


कलमी शोरा, बड़ी इलायची के दाने, मलाईरहित ठंडा दूध व पानी। कलमी शोरा व बड़ी इलायची के दाने महीन पीसकर दोनों चूर्ण समान मात्रा में लाकर मिलाकर शीशी में भर लें। उसके बाद एक भाग दूध व एक भाग ठंडा पानी मिलाकर फेंट लें, इसकी मात्रा 300 एमएल होनी चाहिए। एक चम्मच चूर्ण फांककर यह फेंटा हुआ दूध पी लें। यह पहली खुराक हुई। दूसरी खुराक दोपहर में व तीसरी खुराक शाम को लें। बस दो दिन तक यह प्रयोग करने से पेशाब की जलन दूर होती है व मुँह के छाले व पित्त सुधरता है। शीतकाल में दूध में कुनकुना पानी मिलाएँ।


ककड़ी गुणों का भंडार है। यह शीतल व पाचक है। ककड़ी खाने से पेशाब खुलकर लगती है। गर्मी के दिनों यह लू से बचाव में सहायक है। ककड़ी के बीजों में स्टार्च, तेल, शर्करा और राल पाए जाते है। ककड़ी में क्षारीय तत्व भी पाए जाते है, जो मूत्र संस्थान की कार्यप्रणाली के सुचारु रूप से संचालन में सहायक हैं। ककड़ी पेशाब की जलन को दूर करने में सहायक है। बदहजमी की स्थिति में ककड़ी के 8 से 10 बीजों का मट्ठे के साथ सेवन करने से राहत मिलती है। ककड़ी खाने केबाद 20 मिनट तक पानी न पिएं।


पिसी हुई हल्दी को एक-एक चम्मच सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।


तीन आँवलों का रस पानी में मिलाकर सुबह-शाम चार दिन पीने से बार-बार पेशाब जाना बंद हो जाता है।


एक केला खाकर आँवले के रस में शक्कर मिलाकर पिएं। लाभ होगा। अकेला केला खाने से भी लाभ होता है।


सेब खाने से रात को बार-बार पेशाब जाना बंद हो जाता है।


बूढ़े आदमी बार-बार पेशाब जाते हों तो नित्य छुआरे खिलायें। रात को छुआरे खाकर दूध पिएं।


रात को बार-बार पेशाब जाना शाम को पालक की सब्जी खाने से कम हो जाता है।


एक छटाँक भुने, सिके चने खाकर, ऊपर से थोड़ा सा गुड खायें। दस दिन लगातार खाने से बहुमूत्रता कम हो जाती है। वृद्धों को अधिक दिन तक यह सेवन करना चाहिए।


250 ग्राम गाजर का रस नित्य तीन बार पिएं। पेशाब का रंग पीला हो तो शहतूत के रस में शक्कर मिलाकर पीने से रंग साफ हो जाता है।


गुर्दे की खराबी से यदि पेशाब बनना बंद हो जाए तो मूली का रस दो औंस प्रति मात्रा पीने से वह फिर बनने लगता है।


नींबू के बीजों को पीसकर नाभि पर रखकर ठण्डा पानी डालें। रुका हुआ पेशाब होने लगता है।


जीरा और चीनी—दोनों को समान मात्रा में पीसकर दो चम्मच फंकी लेने से लाभ होता है।


केले के तने का रस चार चम्मच, घी दो चम्मच मिलाकर नित्य दो बार पिलाने से पेशाब खुलकर आता है।


यदि बार-बार और अधिक मात्रा में पेशाब आए, प्यास लगे तो आठ ग्राम पिसी हुई हल्दी नित्य दो बार पानी से फंकी लें। लाभ होगा। एक कप तेज गर्म पानी में से आधा कप पानी अलग लेकर इसमें गुलाबी रंग के सदाबहार के तीन फूल पाँच मिनट तक पड़े रहने दें। पाँच मिनट बाद फूल निकाल कर फेंक दें और पानी नित्य सात दिन पिएं और आधा कप गरम पानी और पिएं, लाभ होगा।


जामुन की गुठली का चूर्ण आधा चम्मच शाम को पानी के साथ लेने से पेशाब में शर्करा आना ठीक हो जाता है। जामुन की गुठली और करेले सुखाकर समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें और एक चम्मच सुबह शाम पानी से फंकी लें।


१५ ग्राम करेले का रस, १०० ग्राम पानी में करीब ३ महीने पिलाना चाहिए। छाया में सुखाए हुए करेलों का चूर्ण ६ ग्राम दिन में एक बार लेने से मूत्र में शर्करा आना बंद हो जाती है।


भिन्डी के डॉड काट लें। इन डॉडों को छाया में सुखाकर कूटकर मैदा की छलनी से छान लें। इसमें समान मात्रा में मिश्री मिलाकर आधा चम्मच भूखे पेट ठंडे पानी से रोज लें महुमेह में लाभ होगा।


अगर मधुमेह कन्ट्रोल में नहीं है जौ, चना, गेहूं (तीन किलो जौ, एक किलो गेहूँ, आधा किलो चना को मिलाकर पिसवा लें) इसकी रोटियाँ खानी चाहिए।

 डायबिटीज में कमजोरी मालूम पड़ने लगती है। कमजोरी दूर करने के लिए हरा कच्चा नारियल चबायें। काजू, मूँगफली और अखरोट भिगाेकर खाएँ। प्यास अधिक होने पर पानी में नींबू निचोड़कर पिलाने से लाभ होता है। यह तीन बार नित्य पिएं।


होमियोपैथिक चिकित्सा:-



डायबिटीज-इसीपीड्स(इसमें चीनी विल्कुल नही रहती) अधिक मात्र में और जल्दी जल्दी पेशाब होने के साथ पेशाब में यूरिया निकलना, उसके साथ प्यास, शीर्णता और बेचैनी रहना। इस तरह के मूत्र सबंधी बीमारी में हेलोनियस ३०,२०० काफी लाभप्रद है।


पेशाब रुक रुक कर होना, मानो मूत्र यंत्र में पक्षाघात हो गया हो।  प्रोस्टेट ग्रंथि की वृद्धि हो गयी हो तो इसके लिए कोनायम ३० का सेवन दिन में तीन बार करने से बीमारी में राहत  मिल जाती है। इस तरह की बीमारी में सेबलसेरु ३० भी काफी लाभप्रद है।


पेशाब करते वक्त नही बल्कि अन्य समय में मूत्राशय में जलन होने पर स्टेफिसेग्रिया ३० रामबाण अौषधी का काम करता है।


पेशाब का वेग बना रहना, रात के समय ही यह वेग ज्यादा रहना। वेग रहने पर भी मूत्राशय की शक्ति घट जाना, जिस कारण बहुत देर बैठने पर भी पेशाब का धीरे धीरे होना,पेशाब होने के बाद भी बूंद बूंद पेशाब टपका करना, आग की तरह पेशाब का गरम होना लक्षणों में केलि कार्ब ३० शक्ति की दवा का तीन बार चार चार गोली का सेवन करना चाहिए।


मूत्राशय के भीतर एक प्रकार का दर्द होता है,मानो  मूत्राशय फूल उठा हो बार बार और जल्दी जल्दी पेशाब का होना, पेशाब में बदबू रहती है, रोगी के शरीर पर सूजन आ जाती है और वह सो नही पाता  है, इस तरह की बीमारी में मैजलिस क्यू या ३ शक्ति की दवा का प्रयोग करें चाहिए।


रात में बार बार पेशाब बहुत मात्र में होना,एकाएक इतने जोर से पेशाब का लगना  मानों कपड़े में हो जायेगा,, बिछोने में ही पेशाब का हो जाना और ऐसा समझना की ठीक पेशाब की जगह पर ही पेशाब कर रहें हैं; किन्तु नींद खुलने पर मालूम होना की  था ऐसी स्थिति में क्रियोजोटम ६X शक्ति से १००० शक्ति की दवा का प्रयोग करना चाहिए।


पेशाब करते समय जोर लगाना, मूत्रावरोध, जलन, मूत्राशय ग्रीवा में दर्द,मूत्र पथरी निकलने के समय भयंकर दर्द, इसमें बायोकेमिक दवा मैग्नेशिया फास १२X काफी लाभप्रद है।  चार चार गोली ग्राम पानी के साथ लेने से रोग की तीव्रता में लाभदायक सिद्ध होती है।


बहुत मात्रा में पीले रंग का पेशाब का होना, छीकते या खांसते समय, या अनजाने में चलते चलते पेशाब का निकलना, पेशाब करते समय किसी के अगल बगल रहने पर पेशाब का न उतरना, ऐसी परिस्थिति में नेट्रम म्यूर ३X से उच्च शक्ति की दवा काफी लाभप्रद है।


बहुमूत्र रोग की प्रधान परिक्षित दवा नेट्रम फास १२X है।


पेशाब होने के पहले और बाद में मूत्र नली में जलन होने पर रोग कोई भी हो वल्गेरिस Q पाँच बून्द दो ५० मिली पानी में मिला कर तीन समय लें, शर्तिया लाभप्रद है।

उपचार और प्रयोग -

दाढ़ी और मूंछ के सफ़ेद बालो का करे उपचार -

बाल सफेद होने का कारण पैतृक प्रभाव भी होता है या बहुत ज्यादा तनाव लेना या बहुत ज्यादा सोंचना तथा शराब का ज्यादा सेवन और गर्मी पैदा करने वाले आहार का ज्यादा सेवन करना.








प्रयोग करे :-
=======


कडी पत्ता 100 मिलीलीटर पानी में थोडी सी कडी पत्तियों को डाल कर तब तक उबालें जब तक कि पानी आधा ना हो जाए। पानी आधा हो जाने के बाद इसे पी लें। रोजाना यह उपचार आजमाने से आपको फायदा मिलेगा। आपको अगर कड़ी पत्ता मिलने में दिक्कत है तो आप नर्सरी से लाके गमले में लगा ले ये आपके किचन में भी काम आती है .



थोडी सी कडी पत्ती ले कर उसे नारियल तेल में डाल कर उबालें। यह तेल हल्का ठंडा हो जाए तब इससे अपने सिर और दाढी की मालिश करें।


थोडी सी कडी पत्ती ले कर उसे पानी में उबाल कर पानी को आधा कर लें। उबलते पानी में आमला पाउडर मिलाएं। फिर जब पानी हल्का ठंडा हो जाए तब उसे पी लें।



आमला पाउडर और नारियल तेल को मिक्स करें। आमला की मात्रा 25 प्रतिशत नारियल तेल से ज्यादा होनी चाहिये। इसे 2 मिनट उबालें! जब यह तेल ठंडा हो जाए तब इससे अपनी दाढी और स्कैल्प को मसाज करें।


जिनकी दाढ़ी पक रही है उनको एक महीने तक आपको रोजाना आमला जूस पीना चाहिये। यह बहुत ही प्रभावशाली उपाय है।


आपको गाय के मक्खन से स्कैल्प और दाढी को मसाज करना चाहिये। इसे आपको महीने में 8 से 10 बार प्रयोग करना चाहिये।




नियमित आपको फल, हरी सब्जियां, दालें या दूसरी प्रोटीन वाले आहार खाएं।




सावधानियां :-
========

* जंक फूड खाना बंद करें चाय, काफी और डि्रंक ना पियें केमिकल डार्इ का प्रयोग ना करें


उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com