Monday, December 14, 2015

अलसी समाधि की ओर ले जाये

अलसी समाधि की ओर ले जाये
आसानी से आपको बाजार में उपलब्ध होने वाली तिलहन -अलसी के गुणों की व्याख्या जितनी भी की जाए कम है -
अलसी के गुण -
  1. अलसी आधुनिक युग में स्त्रियों की यौन-इच्छा, कामोत्तेजना, चरम-आनंद विकार, बांझपन, गर्भपात, दुग्धअल्पता की महान औषधि है।
  2. स्त्रियों की सभी लैंगिक समस्याओं के सारे उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी। “व्हाई वी लव” और “ऐनाटॉमी ऑफ लव” की महान लेखिका, शोधकर्ता और चिंतक हेलन फिशर भी अलसी को प्रेम, काम-पिपासा और लैंगिक संसर्ग के लिए आवश्यक सभी रसायनों जैसे डोपामीन, नाइट्रिक ऑक्साइड, नोरइपिनेफ्रीन, ऑक्सिटोसिन, सीरोटोनिन, टेस्टोस्टिरोन और फेरोमोन्स का प्रमुख घटक मानती है।
  3. सबसे पहले तो अलसी आप और आपके जीवनसाथी की त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनायेगी। आपके केश काले, घने, मजबूत, चमकदार और रेशमी हो जायेंगे।
  4. अलसी आपकी देह को ऊर्जावान और मांसल बना देगी। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी गहेगी, न क्रोध आयेगा और न कभी थकावट होगी। मन शांत, सकारात्मक और दिव्य हो जायेगा।
  5. अलसी में ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन, लिगनेन, सेलेनियम, जिंक और मेगनीशियम होते हैं जो स्त्री हार्मोन्स, टेस्टोस्टिरोन और फेरोमोन्स ( आकर्षण के हार्मोन) के निर्माण के मूलभूत घटक हैं। टेस्टोस्टिरोन आपकी कामेच्छा को चरम स्तर पर रखता है।
  6. अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट और लिगनेन जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं, जिससे कामोत्तेजना बढ़ती है।
  7. इसके अलावा ये शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प करती हैं जिससे मस्तिष्क और जननेन्द्रियों के बीच सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है। नाड़ियों को स्वस्थ रखने में अलसी में विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फोलेट, कॉपर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

जहरीला कीड़ा डंक मार दे तो क्या करे

मौसम बे मौसम में कीड़े, उड़ते रहते है और कभी कभी काट भी लेते है। विभिन्न प्रकार की चींटियॉ भी काट खाती है। इनके काटने से काफी जलन होता है। आक्रांत स्थान पर काफी सूजन हो जाती है। मधुमक्खियाँ भी बड़े जोर से काट खाती है और यह कभी कभी खतरनाक भी होता है। कुछ कीड़ों का डंक सूजन के साथ साथ काफी जलन और बेचैनी पैदा करने वाला होता है जिसका सही समय पर इलाज आवश्यक है। बाजार मे मिलने बाली कीड़ों के काटने की दवा से तुरंत आराम नही मिल पाता है, कभी कभी डाक्टर से सलाह लेना आवश्यक हो जाता है।लेकिन तुरंत आराम के लिए कुछ घरेलू उपाय भी अपनाएं जा सकते हैं...
जहरीला कीड़ा डंक मार दे तो क्या करे

  1. अनार के पत्तों को पीस कर लगाने से लाभ होता है।
  2. आम की गुठली पानी के साथ घिसकर लगाने से दर्द में आराम मिलता है।
  3. जहरीले जन्तु के काट लेने पर दंश स्थान पर लगाने से विष शमन होने लगता है।
  4. तुलसी के पत्तों को शरीर पर लगाएं और पत्तों को पीसकर इसका रस रोगी को पिलाएं।
  5. दंश के स्थान पर नीबू का रस लगाएँ।
  6. दंश स्थान पर आक के दूध का लेप करने से राहत मिलती है।
  7. दिलासलाई का मसाला पानी में घिसकर लगाएं।
  8. पुदीने की पत्ती चबाएं।
  9. मिट्टी की गीली पट्टी बांधे।
  10. विषैले कीड़े के काटने पर प्याज़ पीसकर शहद में मिलाकर काटे हुए स्थान पर लगाएँ।
  11. विषैले कीड़े, मधुमक्खी या बिच्छु के काटने पर नीम की पत्तियों को पीस कर लेप करें। नीम के पत्तों को चबाएं।
  12. विषैले दंश के स्थान पर नमक का पानी डालकर रगड़ें।

Tuesday, December 8, 2015

कांडोम की जानकारी

यह बहुत हीं उपयोगी है, बहुत हीं सस्ता है और इसका उपयोग करना बहुत सरल है कंडोम बनाने का आईडिया देने वाले ने सराहनीय काम किया है क्योंकि इसने कई कंपनियों को करोड़ों का लाभ तो पहुँचाया हीं है साथ हीं साथ इसने लोगों के सेक्स जीवन को बहुत हीं सरल बना दिया है। गर्भनिरोध के रूप में सबसे आसानी से उपलब्ध होने वाले साधनों में से सबसे आसन है कंडोम को पाना जिसका इस्तेमाल करना बहुत हीं सरल है और गर्भनिरोधक के रूप में जो बहुत हीं असरकारक है। कंडोम के आने से जन्म नियंत्रण और सुरक्षित यौन संबंध के रास्ते में एक क्रांति की शुरुआत हो गई थी जो आज भी बहुत ही सफलता के साथ चल रही है।
 कांडोम की जानकारी
कंडोम के फायदे
कंडोम ने आकर ये सुनिश्चित कर दिया है कि जन्म नियंत्रण करने का काम अब सिर्फ पारंपरिक शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रह गया बल्कि अब हर कोई जन्म नियंत्रण में अपनी भागीदारी निभा सकता है;
  • अब हर कोई कंडोम को अपनाकर बच्चों के जन्म पर नियंत्रण लगा सकता है।
  • कंडोम के आने से वाकई लोगों में जन्म नियंत्रण को लेकर जागरूकता भी फ़ैल गई थी।
  • कंडोम धन्यवाद का पात्र है जिसकी वजह से अब सुरक्षित सेक्स करना संभव हो गया है।
  • यह लगभग सबको पता चल गया है कि कंडोम के प्रयोग से आप काफी हद तक कई यौन संचारित रोगों को एक दूसरे से फैलने में रोक सकते हैं।
  • आमतौर पर किसी यौन रोग से संकर मित महिला से असुरक्षित सेक्स करने से पुरुष को यौन रोग लग सकता है या यौन रोग से संकर मित पुरुष से महिला को ये रोग पकड़ सकता है।
  • कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि कंडोम के इस्तेमाल से आप अनचाहे गर्भ को रोक सकते हैं और यौन संबंधी रोगों से बचे रह सकते हैं।
  • यह बहुत हीं आसानी से उपलब्ध हो जाता है मसलन यह लगभग हर छोटे बड़े दूकान पर मिलता है एवं सरकार इसे मुफ्त में भी बँटवाती है।
  • यह काफी सस्ता भी है और इसे इस्तेमाल करना भी बहुत हीं सरल है। यह कई कारणों से फायदेमंद है जिसकी वजह से यह हर वर्ग के लोगों में काफी लोकप्रिय है।
कंडोम कितना लोकप्रिय होगा इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि एक नहीं अनेकों कम्पनियां इसके निर्माण में जुटी रहती हैं और पूरा बाजार तरह तरह के कंडोम्स से भरा पड़ा रहता है । बाजार में सस्ते से सस्ता और महंगे से महंगा कंडोम उपलब्ध रहता है।

कंडोम के उपयोग की सही विधि
सेक्स को रोचक बनाने के लिए कंडोम प्रयोग के लिए भी कई युक्तियां अपनाई जाती हैं। हालांकि सुरक्षित सेक्स के लिए महिलाएं भी उपयुक्त गर्भनिरोधक ले सकती हैं, लेकिन उससे भी अधिक सुरक्षित होता हैं कंडोम का प्रयोग। आज के समय में कंडोम के प्रयोग की कई युक्तियां आ गई हैं। इतना ही नहीं इनमें सुरक्षा युक्तियों के साथ ही रोमांचक युक्तियां भी शामिल हैं जैसे- कंडोम का अलग-अलग रंग-रूप में आना। खुशबुदार कंडोम का होना। आइए जानें कंडोम प्रयोग की दस युक्तियों के बारे में। सेक्स एक कला है ठीक इसी तरह से कंडोम का इस्तेमाल करना भी एक कला है। नियमित रूप से लोग कंडोम का प्रयोग करते हैं,लेकिन ऐसे बहुत से लोग हैं,जो कि कंडोम प्रयोग की सही विधि नहीं जानते। ऐसे में कंडोम के प्रयोग से पहले यह जानकारी होना भी आवश्यक है कि कंडोम का प्रयोग करते समय कौन-कौन सी सावधानियां बरती जाएं। लोग कंडोम का प्रयोग करने से पहले उसकी समाप्ति की तारीख तक देखना भूल जाते हैं। आमतौर पर कंडोम सुविधाजनक होता है। आइए जानें कंडोम के उपयोग की सही विधि क्या है।
  • कंडोम के सही उपयोग के लिए जरूरी है कि पैकेट को सही तरह से खोला जाए जिससे सावधानी से कंडोम को बाहर निकाला जा सकें। इतना ही नहीं कंडोम के इस्तेमाल के समय हाथों में वाटर बेस्ड लुब्रिकेंट्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • कंडोम को खरीदने और उपयोग करने से पहले जरूरी है कि उसकी समाप्ति की तारीख देख लें।
  • कंडोम के प्रयोग से पहले हाथों को अच्छे क्लींजर से धोएं साथ ही साफ-सफाई का भी खास ख्याल रखें।
  • ध्यान रहे स्‍त्री या पुरूष दोनों में से कोई एक ही कंडोम का प्रयोग करें। दोनों एक साथ इसका प्रयोग न करें।
  • कंडोम का प्रयोग करते समय किसी तरह की अतिरिक्त चिकनाई या तैलीय पदार्थ का प्रयोग न करें।
  • एक कंडोम का प्रयोग एक ही बार करें और इसके बाद उसे तुरंत कूडे़दान में डालकर हाथों को अच्छी तरह से साफ कर लें।
  • कंडोम का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी है कि इसका प्रयोग इरेक्शरन के बाद और इजेक्यूकलेशन से पहले किया जाये।
  • डिस्चार्ज के बाद तुरंत बाद कंडोम को निकाल देना चाहिए, नहीं तो इंफेक्शन या अन्य बीमारियों का डर रहता है।
  • पुरूषों को अपने मन से ये भ्रम निकाल देना चाहिए कि कंडोम के इस्तेमाल से वह सेक्स का आनंद नहीं उठा पाएंगे। बल्कि उन्हें यह सोचना चाहिए कि कंडोम का प्रयोग कर वे कई तरह की बीमारियों, इंफेक्शन और असुरक्षित यौन संबंध से बचेंगे।
  • पुराने कंडोम का प्रयोग न करें और उस समय तो बिल्कु्ल भी नहीं जब उसकी अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी हो।
  • कंडोम के इस्तेमाल में शर्म न करें बल्कि झिझक को भूल कंडोम के फायदे और प्रयोग के बारे में आप डॉक्टर से भी कंसल्ट कर सकते हैं।
  • कंडोम सेक्स सुरक्षा युक्तियों में सर्वोपरि है। सुरक्षित सेक्स अभ्यास के लिए कंडोम से फायदेमंद चीज कोई नहीं।
  • कंडोम सिर्फ पुरूषों के लिए ही नहीं बल्कि महिलाओं के लिए भी उपलब्ध है।
  • कंडोम खरीदते समय क्वालिटी का खास ख्‍याल रखें। घटिया क्वालिटी का कंडोम प्रयोग करना आपके स्‍वास्‍थ्‍य के साथ खिलवाड़ हो सकता है।
  • कंडोम के साथ सेक्स का आनंद उठाने के लिए कलरफुल और खुशबुदार कंडोम का प्रयोग किया जा सकता है।
  • कंडोम के पैकेट को बहुत ज्यादा गर्म स्थान पर या पर्स इत्यादि में न रखें बल्कि घर के ही किसी ठंडे और सूखे स्थान पर रखें। नहीं तो कंडोम डैमेज हो सकता है।
  • कंडोम के प्रयोग से पहले जरूरी है कि उसको चैक कर लिया जाए कि वह कहीं से फटा हुआ न हो, न ही उसमें कोई छेद या फिर कोई पदार्थ चिपका हो।
  • कंडोम का पैकेट खरीदने के बाद उस पर लिखें दिशा-निर्देशों को जरूर पढ़े व उसी हिसाब से उसका पालन करें। इससे आप कंडोम की सुरक्षा युक्तियों के बारे में भी जान जाएंगे।
  • बहुत ज्यादा सूखे या बहुत ज्यादा चिपचिपे कंडोम का इस्तेमाल न करें। अन्यथा इंफेक्शकन के खतरे बढ़ जाते हैं।
  • कंडोम को पैकेट से निकालने के बाद बहुत ज्यादा देर तक न तो बाहर रखें और न ही बार-बार उसको हाथ लगाएं बल्कि उसको सीधे इस्तेमाल करें 
  • सेफ सेक्स के ऑप्शंस के साथ ही यह अनचाहे गर्भ से भी बचाता है। 
सेक्स के दौरान हर बार कंडोम का प्रयोग आपको सुरक्षित सेक्स में मदद करेगा।

सेक्स समस्याओं के बारे में आपसी बातचीत

यह तो सभी जानते हैं संबंधों में एक-दूसरे का साथ बेहद जरूरी है। पति-पत्नी के आपसी संबंधों में जहां शारीरिक संबंध जरूरी होते हैं वहीं मानसिक जुड़ाव भी बहुत जरूरी है। मानसिक जुड़ाव के साथ-साथ शारीरिक जुड़ाव संबंधों को अधिक मधुर बनाता है। एक तरफ जहां पति-पत्नी के संबंधों में सेक्स का बहुत महत्व है यही सेक्स समस्याओं को भी इनसे अलग रखकर नहीं देखा जा सकता।
 सेक्स समस्याओं के बारे में आपसी बातचीत
आमतौर पर पति-पत्नी सेक्स समस्याओं के बारे में बात करने से कतराते हैं, नतीजन सेक्स समस्या बढ़ती जाती है। ऐसे में पति और पत्नी दोनों में इतनी आपसी समझ होनी चाहिए कि एक-दूसरे से कोई भी बातें छुपाए बिना ना रह सकें। इतना ही नहीं इस मामले में महिलाएं कभी पहल नहीं करती। ऐसे में पुरूषों को चाहिए कि उनका व्यवहार ऐसा हो कि उनकी पत्नी उनसे हर बात शेयर कर सकें। आइए जानें सेक्स समस्याओं के बारे में कैसे बात करें।
  • जब भी महिलाओं को सेक्स समस्या होती है वह बताने से हिचकती है। सिर्फ महिलाएं ही नहीं पुरूषों के साथ भी ऐसी ही स्थिति होती है। ऐसे में समस्या बढ़ने की आशंका बराबर बनी रहती है।
  • यदि आप चाहते हैं कि कोई भी सेक्स समस्या है उसे आप अपने साथी से शेयर करें तो उसके लिए जरूरी है कि आपका अपने साथी को जानना कि उसकी आपकी इस समस्यास या परेशानी पर क्या प्रतिक्रिया होगी।
  • यदि आप अपने साथी से अपनी सारी बातें शेयर करते हैं तो आपको चाहिए कि आप अपने साथी से उन बातों को शेयर करने में भी सहज रहें जो आपने अब तक नहीं की है। 
सेक्स समस्याओं के बारे में बातचीत के लिए उपाय कुछ उपाय
  • विश्वास जीते- यदि आप चाहते हैं कि आप अपने साथी से सभी समस्याओं खासकर सेक्स समस्याओं के बारे में बातचीत कर सकें तो आपको अपने साथी को विश्वास में लेना होगा। यदि आपका अपने साथी पर भरोसा है तो आप बे झिझक अपने साथी को अपनी समस्या से रूबरू करवा सकते हैं।
  • अपने साथी को समझे- यदि आपका साथी आपसे कुछ बात करने का इच्छुक है लेकिन कह नहीं पा रहा तो आपको चाहिए कि आप अपने साथी को दिलासा दिलाए कि आप हरदम उसके साथ है इसीलिए कोई भी परेशानी है तो वह आपसे आराम से शेयर कर सकता है।
  • संवाद है जरूरी- किसी भी बात को अपने साथी को बताने के लिए जरूरी है कि आप अपने साथी से लगातार संवाद करते रहें। यदि आप दोनों के बीच अच्छी तरह से बातचीत होगी तो आप सहज रूप से अपनी बात कह सकेंगे।
  • प्यार जताएं- यदि आप अपने साथी को अपनी कोई सेक्स समस्या से रूबरू करवाने जा रहे हैं तो आप उसे सीधे-सपाट शब्दों में ना कहें बल्कि उसके लिए थोड़ा समय लें और अपने साथी को बातचीत और प्यार से सहज करें। इसके बात सामान्य बातचीत के बाद ही अपनी समस्या बताएं।
  • इशारों को समझे- आपको अपने साथी को इस तरह तैयार करना होगा कि वह आपकी बात बिना कहे भी समझ जाएं। यदि आप कोई बात शेयर करना चाहते हैं या फिर आप परेशानी में है तो आपके बिना बताएं आपका साथी आपको समझ जाए और आपसे खुद आपकी परेशानी को जानना चाहें।
पति-पत्नी के बीच प्यार तभी बरकरार रह सकता है जब आपसी सामंजस्य हो और दोनों के बीच खुलापन हो। ताकि दोनों में से कोई भी अपनी बात बताते समय मन में कोई डर या शंका ना रखें। पति पत्नी को आपस में भरोसा तो रखना ही पड़ेगा। 

कुछ उपाय रिश्ते बचाने के

Relationship
आज की जीवनशैली में रिश्तों में तनाव आना आम बात है, लेकिन जब बात तलाक के कारणों की हो और रिश्‍तों में तलाक तक बात पहुंच जाए तो यह किसी भी रिश्ते के लिए सही नहीं। कहने का अर्थ है झगड़ा हर रिश्ते में होता है फिर वह अफेयर हो या फिर पति-पत्नीं के बीच हो। लेकिन यह जरूरी नहीं कि आप अपने रिश्ते को बचाने के प्रयास बिल्कुल ना करें। यदि दिल से रिश्ते को बचाने के लिए कोशिश की जाए तो यह काम भी बहुत आसान है। आप अपने रिश्तें को मजबूत और बेहतर बनाने के लिए कई ऐसे फंडे अपना सकते हैं जिससे यदि आपके बीच कोई खटपट या झगड़ा हुआ भी है तो भी आप एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे। आइए जानें ऐसी 5 युक्तियां रिश्ते बचाने की।

  • विश्वास करें- किसी भी रिश्ते की नींव विश्वास पर टिकी होती है। यदि आप दोनों के बीच विश्वास है, आप दोनों एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं तो कोई भी तीसरा व्यक्ति आपके रिश्ते के बीच दरार नहीं डाल सकता। एक-दूसरे पर विश्वास बनाने के लिए आपको चाहिए कि आप आपस में किसी के कहने पर एक-दूसरे पर शक ना करें, बल्कि बात की तह तक जाने की कोशिश करें। यदि आप किसी की कही बातों को सच मान बैठेंगे या अपने पार्टनर को नजरअंदाज करने लगेंगे तो निश्चित तौर पर आपके संबंध खराब हो सकते हैं।
  • एक-दूसरे को समय दें- कई बार दूरियां भी रिश्तों में दरार डालने का काम करती हैं। यदि आप चाहते हैं कि आपके रिश्ते लॉंग टर्म तक चलें तो आपको चाहिए कि आप बीच-बीच में पिकनिक पर या फिर घूमने जाएं। आप लॉग ड्राइव पर जा सकते हैं, तीन-चार दिन के लिए ट्रि‍प पर जा सकते हैं। इतना ही नहीं आप चाहे तो अपने पार्टनर के लिए एकाध दिन की छुट्टी करके अपने पार्टनर को सरप्राइज दे सकते हैं, इससे आपके बीच की दूरियां कम होंगी और आप पाएंगे कि आप दोनों एक-दूसरे के काफी करीब आ गए हैं।
  • एक-दूसरे को समझें- आपको चाहिए कि आप अपने पार्टनर को समय देने के साथ-साथ उसकी भावनाओं को भी समझें। इसके लिए आपको अपने पार्टनर को इस हद तक समझना होगा जिससे आप बिना कहीं बातों को भी आराम से समझ जाएं। कई बार आपका साथी परेशान होता है जिससे वह अपनी बातें शेयर नहीं कर पाता। ऐसे में आपको चाहिए कि आप अपने पार्टनर की अनकही बातों को भी समझें।
  • एक-दूसरे का सम्मान करें- यदि आप एक-दूसरे का आदर करेंगे और एक-दूसरे के काम को महत्ता देंगे तो निश्चित तौर पर आपके रिश्तों में गहराई बढ़ेगी। कई बार रिश्तों में खट्टास का कारण होता है एक-दूसरे की कार्यशैली को ना समझना और महत्ता ना देना। इतना ही नहीं आप अपने पार्टनर के काम में हाथ भी बंटा सकते हैं। इससे आपको अपने पार्टनर के अधिक करीब आने का मौका भी मिलेगा।
  • संवाद है जरूरी- किसी भी रिश्ते को बचाने के लिए जरूरी है आपसी संवाद। यदि आप दोनों के बीच कम्यूनिकेशन गैप अधिक होगा तो आपके बीच गलतफहमियां जन्म ले सकती हैं लेकिन आप अकसर खूब बातें करते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख में पूरी भागीदारी देते हैं तो आप अपने बीच की कड़वाहट को भी जल्द ही दूर कर सकते हैं।

Ganapati Atharvashirsha - Om Namaste Ganapataye



गणपति अथर्वशीर्ष - ॐ नमस्ते गणपतये - ATHARVASHIRSHA
Ganapati Atharvashirsha - Om Namaste Ganapataye - ATHARVASHIRSHA

The Ganapati Atharvashirsa (गणपत्यर्थवशीर्ष, Gaṇapatyarthavaśīrṣa) is a Hindu scripture dedicated to the god Ganesha. It is a late Upanishad that celebrates Ganesha as the ultimate Brahman. The scripture asserts its own status as an upanishad in its final line, which reads "Thus, the Śrī Gaṇapati Atharvaśīrṣa Upanishad"; śrīgaṇapatyatharvaśīrṣopaniṣad). It is also referred to as the Sri Ganapati Atharva Sirsha, the Ganapati Atharvashirsha, the Ganapati Atharvasirsa, or the Ganapati Upanishad.

It is the most widely recited Sanskrit text among devotees of Ganesha in Maharashtra. The entire text is written over the entrance to the temple hall in the aṣṭavināyaka Ganesha shrine at Ranjangaon. Ghurye notes its emergence in the early 19th century, corresponding to the rise of the Ganapati worship in Maharashtra among Brahmins centered in Pune, but the text is probably somewhat older, dating to the 17th or 18th century; it is not part of the Muktikā canon of 108 Upanishads compiled in the mid-17th century, but it was mentioned c. 1800 by Upanishad Brahmayogin in his commentary on the Muktika canon. The text associates itself with the Atharvaveda, in a passage that Chinmayananda translates as "Thus says Atharvana" (इत्यथर्वणवाक्यम्; ityatharvaṇavākyam).


Ganapati Atharvashirsha (Ganapati Upanishad) - in sanskrit - stotra on Sri Ganesha - ATHARVASHIRSHA

Ganapati Atharvashirsha - Om Namaste Ganapataye

Monday, December 7, 2015

पैर के तलवे पर जलन होने का उपचार

पैरों में जलन की समस्या को आमतौर पर छोटी समस्या माना जाता है और कुछ लोग यह भी मान लेते हैं कि यह अपने आप ठीक हो जाएगी। लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि यह समस्या शरीर के अन्य हिस्सों में भी तकलीफ पैदा कर सकती है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई बार ऐसा होता है कि हमें आने वाली बीमारी का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लग पाता। देखा जाए तो पैरों से संबंधित बहुत सी ऐसी बीमारियां होती हैं, जो लोगों को परेशान करती हैं। ऐसी ही एक परेशानी है पैरों में जलन की समस्या। अक्सर बहुत से लोग इस परेशानी से जूझ रहे होते हैं और इसकी अनदेखी भी कर रहे होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि पैरों में जलन की वजह कुछ और भी हो सकती है।

विटामिन बी, फोलिक एसिड या कैल्शियम की कमी भी इसके कारण हो सकते हैं। यह समस्या सिर्फ एक ही आयु के लोगों में नहीं होती, बल्कि किसी भी आयु में हो सकती है। संतुलित और पौष्टिक आहार लेने की कोशिश तो सभी लोग करते हैं। फिर भी आज की व्यस्त जीवनशैली की वजह से खानपान में कुछ कमी जरूर रह जाती है। शरीर के पोषण में विटमिन बी-12 और विटामिन बी एक ऐसा तत्व है, जिसकी कमी सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह साबित होती है। विटमिन बी-12 हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने और उनकी मरम्मत में सहायता करता है। यह ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और न‌र्व्स के कुछ तत्वों की रचना में भी सहायक होता है। हमारी लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण भी इसी से होता है। यह शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का भी काम करता है।
यह ऐसा विटमिन है, जिसका अवशोषण हमारी आंतों में होता है। वहां लैक्टो बैसिलस (फायदेमंद बैक्टीरिया) मौजूद होते हैं, जो बी-12 के अवशोषण में सहायक होते हैं। हमारे शरीर में विटमिन बी-12 की कमी होने से हाथ-पैरों में झनझनाहट और जलन होती है। याद्दाश्त में कमी, व्यवहार में अस्थिरता, अनावश्यक थकान, डिप्रेशन आदि भी होती है। अगर शरीर में विटमिन बी-12 की बहुत ज्यादा कमी हो जाए तो इससे स्पाइनल कॉर्ड के न‌र्व्स नष्ट होने लगते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पैरालिसिस तक हो सकता है।
इसलिए शाकाहारी लोगों को अपने खानपान के प्रति विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए और उन्हें मिल्क प्रोडक्ट्स का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए। आम तौर पर किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में इसकी मात्रा 400-500 पिकोग्राम/ मिली लीटर होनी चाहिए।
शाकाहारी लोगों को अपने खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। उन्हें दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन, सोया मिल्क या टोफू का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। नॉन-वेजटेरियन लोगों को अंडा, मछली, रेड मीट, चिकेन और सी फूड से विटमिन बी-12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है।

क्या हैं इसके कारण
  1. अगर थाइरॉइड हार्मोन का स्तर कम हो तो भी पैरों में जलन की समस्या हो सकती है।
  2. अगर व्यक्ति की रक्त वाहिकाओं में संक्रमण हो, तब भी उसके पैरों में जलन या तेज जलन हो सकती है।
  3. उच्च रक्तचाप के कारण भी पैरों में जलन हो सकती है। उच्च रक्तचाप के कारण रक्त परिसंचरण में परेशानी होती है। इससे त्वचा के रंग में परिवर्तन, पैरों की पल्स रेट में कमी और हाथ-पैरों के तापमान में कमी होती है, जिससे पैरों में जलन की समस्या महसूस हो सकती है।
  4. कुछ लोगों को अचानक ही पैरों में जलन होने लगती है। कई बार यह अधिक बढ़ जाती है। ऐसे लोगों के सही उपचार के लिए विशेषज्ञ पूरी जांच करवाने और सही उपचार की सलाह देते हैं।
  5. गुर्दे से जुड़ी बीमारी होने पर पैरों में जलन होना स्वाभाविक है।
  6. ज्यादातर लोगों में पैरों में जलन का मुख्य कारण डायबिटीज होता है। ऐसे लोगों में इस बीमारी के निदान के लिए किसी अतिरिक्त परीक्षण की जरूरत नहीं पड़ती और उपचार कर रहा डॉक्टर इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण कर लेता है।
  7. दवाओं का दुष्प्रभाव, एचआईवी की दवाएं लेने और कीमोथेरेपी की दवा खाने से भी पैरों में जलन होने लगती है।
  8. पैरों में जलन का एक कारण न्यूरोपैथी बीमारी भी हो सकती है, क्योंकि न्यूरोपैथी का असर सभी नसों, मोटर न्यूरॉन्स आदि पर पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक रूप से सभी अंगों और तंत्रों को प्रभावित कर सकती है। इसमें पैरों में दर्द, जलन, चुभन काफी संवेदनशील तरीके से महसूस होती है।
  9. पैरों में जलन हल्के से लेकर गंभीर और तीव्र या क्रोनिक प्रकृति की हो सकती है। अकसर पैरों में जलन तंत्रिका तंत्र में नुकसान या शिथिलता के कारण होती है।
  10. विटामिन बी12 तंत्रिका तंत्र के कार्यों सहित हमारे शरीर के कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए बी12 झुनझुनी के साथ पैरों में जलन और बाहों में जलन का कारण बन सकता है।
  11. हाई ब्लड प्रेशर के कारण भी पैरों में जलन हो सकती है। उच्च रक्तचाप के कारण रक्त परिसंचरण में परेशानी होती है। इससे त्वचा के रंग में परिवर्तन पैरों की पल्स रेट में कमी और हाथ-पैरों के तापमान में कमी होती है। जिससे पैरों में जलन की समस्या महसूस हो सकती है।
  12. पैरों में जलन कई प्रकार की संक्रामक रोगों का प्रमुख लक्षण हो सकता है, लेकिन यह न्यूरोपैथी के कारण भी हो सकता है। कुछ बीमारियां जैसे कुछ एचआईवी/एड्स, लाइम रोग और ग्यूलियन बैरे में पैरों की समस्याएं शामिल होती है।
  13. ज्यादातर लोगों में पैरों में जलन का मुख्य कारण डायबिटीज होता है। ऐसे लोगों में इस बीमारी के निदान के लिए किसी अतिरिक्त परीक्षण की जरूरत नहीं पड़ती और उपचार कर रहा डॉक्टर इस स्थिति पर तुरंत नियंत्रण कर लेता है।
जांच से न बचें
  1. इलेक्ट्रोमायोग्राफी : ईएमजी टेस्ट के लिए मांसपेशियों में सुई डाली जाती है और इसकी क्रियाओं के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाती है।
  2. नर्व बायोप्सी : गंभीर परिस्थितियों में यह टेस्ट भी किया जाता है। इसके लिए डॉक्टर नर्व टिशू का एक टुकड़ा निकालकर माइक्रोस्कोप से उसका पूरी तरह से परीक्षण करते हैं।
  3. प्रयोगशाला टेस्ट : पैरों में जलन के कारणों का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला में खून, पेशाब और रीढ़ के लिक्विड का परीक्षण किया जाता है। सामान्य ब्लड टेस्ट के माध्यम से विटामिन के स्तरों की भी जांच की जाती है।
पैर के तलवे पर जलन होने का उपचार
  1. करेले के पत्ते पीस कर लेप करने से भी लाभ होता है।
  2. गर्मी के दिनों में जिन लोगों के पैरों में निरंतर जलन होती है उन्हे पैरों में मेहंदी लगाने से लाभ होता है।
  3. जिन्हे हाथ-पैर, तालुओं और शरीर में अक्सर जलन की शिकायत रहती हो उन्हे करीब 5 कच्चे बेल के फलों के गूदे को 250 मिली नारियल तेल में एक सप्ताह तक डुबोए रखना चाहिए और बाद में इसे छानकर जलन देने वाले शारीरिक हिस्सों पर मालिश करनी चाहिए, अति शीघ्र जलन की शिकायत दूर हो जाएगी।
  4. तलवों, हाथ पैरों में जलन हो तो देशी घी मलने से मिट जाती है।
  5. तुकमरिया को भीगोकर पैर के तलुओं में बाँधें। जलन दूर होगी।
  6. दो गिलास गर्म पानी में, एक चम्मच सरसों का तेल मिलाकर दोनों पैर इस पानी में रखें और पांच मिनट बाद धोएं। इससे पैर साफ हो जाएंगे, जलन दूर हो जाएगी।
  7. पैर अथवा हाथ में गोखरू होने पर उसे काटकर उसमें नीले थोथे का चूर्ण भर दें अथवा उबलते तेल का पोता रखने से गोखरू हमेशा के लिए मिट जाता है।
  8. पैरों में जलन होने पर करेले के पत्तों के रस की मालिश करने से लाभ होता है।
  9. मक्खन और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर दो चम्मच मिश्रण रोज चाटें।
  10. लौकी को काटकर इसका गूदा पैर के तलवों पर मलने से जलन दूर होती है।
  11. लौकी या घीया को काटकर इसका गूदा पैर के तलवों पर मलने से जलन दूर होती है।
  12. शरीर में किसी भी भाग या हाथ-पैर में जलन हो तो तरबूज के छिलके के सफेद भाग में कपूर और चंदन मिलकर लेप करें। जलन से शांति मिलेगी।
  13. शाकाहारी लोगों को अपने खानपान का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। उन्हें दूध, दही, पनीर, चीज, मक्खन, सोया मिल्क या टोफू का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। मांसाहारी लोगों को अंडे, मछली, रेड मीट, चिकन और सी फूड से विटामिन बी12 भरपूर मात्रा में मिल जाता है।
  14. सरसों का तेल एक कुदरती औषधि होता है, जो पैरों की जलन को दूर करने में मदद करता है। एक कटोरी में दो चम्मच सरसों का तेल लें। अब इसमें दो चम्मच ठंडा पानी या बर्फ का एक टुकड़ा डाल कर अच्छे से मिलाएं। अब इससे अपने पैरों के तलवों की मसाज करें। सप्ताह में दो बार ऐसा करने से आपको आराम मिलेगा।
  15. सिरका भी पैरों की जलन से छुटकारा दिलाता है। एक गिलास गर्म पानी में दो बड़े चम्मच कच्चा व अनफिल्टर्ड सिरका मिलाकर पिएं। ऐसा करने से आपके पैरों की जलन दूर हो जाएगी।
  16. सुखी धनिया और मिश्री समान मात्रा में मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण की दो चम्मच मात्रा ठंडे पानी से रोज चार बार लें।
  17. सेंधा नमक पैरों की जलन से तुरंत राहत देने में मदद करता है। मैग्नीशियम सल्फेट से बना सेंधा नमक सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है। इसके लिए एक टब गुनगुने पानी में आधा कप सेंधा नमक मिलाकर अपने पैरों को उसमें डालें। इस मिश्रण में अपने पैरों को 10 से 15 मिनट के लिए भीगा रहने दें। इस उपाय को कुछ दिनों के लिए नियमित रूप से करें। सेंधा नमक के पानी का इस्तेमाल डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए उपयुक्त नहीं होता। इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
  18. हल्दी में भरपूर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व करक्यूमिन पूरे शरीर में रक्त प्रवाह में सुधार करता है। हल्दी में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पैरों की जलन और दर्द को दूर करने में मदद करता है। हल्दी को दूध के साथ भी ले सकते हैं।
  19. हाथ-पैरों में जलन आम की बौर रगडऩे से मिट जाती है।